बॉम्बे हाईकोर्ट

प्राइवेसी का उल्लंघन: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस प्रीति जिंटा की AI से बनी तस्वीरें, डीपफेक और मॉर्फ्ड तस्वीरें हटाने का आदेश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (8 जुलाई) को एक अंतरिम आदेश में एक्ट्रेस प्रीति जिंटा की डीपफेक इमेज, AI और सुपरइम्पोज़्ड विज़ुअल्स और मॉर्फ्ड तस्वीरों समेत आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया।सिंगल-जज जस्टिस माधव जामदार ने जिंटा की याचिका पर यह आदेश पारित किया।जज ने कहा कि एक्ट्रेस द्वारा बताई गई सामग्री, जैसे डीपफेक इमेज, AI और सुपरइम्पोज़्ड विज़ुअल्स और मॉर्फ्ड तस्वीरें, उनके नैतिक, पब्लिसिटी और पर्सनैलिटी अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।जज ने माना कि उक्त कंटेंट उनकी प्राइवेसी के अधिकारों का भी...

भीमा कोरेगांव केस: आरोपी महेश राउत ने इलाज के लिए केरल जाने की इजाज़त के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्ज़ी दी

भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले के आरोपियों में से एक महेश राउत ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्ज़ी देकर केरल में आयुर्वेदिक इलाज के लिए जाने की इजाज़त मांगी। इससे पहले, इस साल जनवरी में एक स्पेशल NIA कोर्ट ने उनकी ऐसी ही अर्ज़ी खारिज की थी।राउत ने शहर की स्पेशल NIA कोर्ट के 21 जनवरी, 2026 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें 29 जनवरी से 7 फरवरी तक केरल के पूनथोट्टम आयुर्वेदाश्रम जाने की उनकी अर्ज़ी खारिज कर दी गई। वह अपने रूमेटाइड आर्थराइटिस और सोग्रेन सिंड्रोम के इलाज के लिए आयुर्वेदिक आश्रम जाना चाहते...

गलत जानकारी देना ही मिथ्या प्रस्तुतीकरण नहीं: 45 साल पुरानी हाउसिंग सोसायटी का पंजीकरण रद्द करने से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल गलत या अधूरी जानकारी देना अपने आप में 'मिथ्या प्रस्तुतीकरण' नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी सहकारी समिति का पंजीकरण तभी रद्द किया जा सकता है, जब यह साबित हो कि पंजीकरण जानबूझकर धोखा देकर, तथ्य छिपाकर या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किया गया था। बाद की घटनाओं या पंजीकरण से जुड़े किसी कथित त्रुटिपूर्ण निर्णय के आधार पर पंजीकरण रद्द नहीं किया जा सकता।जस्टिस संदीप वी. मारणे ने यह फैसला एलीट डायग्नोस्टिक सेंटर प्राइवेट...

सरकारी नीतियों के विरोध पर नागरिक को शहर से बाहर नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करना या असहमति जताना किसी नागरिक को शहर से बाहर (Extern) करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि ऐसी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस माधव जे. जामदार ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के सचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ जारी एक्सटर्नमेंट आदेश और उसके खिलाफ पारित अपीलीय आदेश को रद्द कर दिया। अदालत...

पूरे महाराष्ट्र में नेताओं की खरीद-फरोख्त चल रही है; अगर आपके खिलाफ FIR हैं तो पाला बदल लीजिए, वहां एक वॉशिंग मशीन है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (2 जुलाई) को मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पूरे महाराष्ट्र राज्य में नेताओं की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) चल रही है। कोर्ट ने सत्ताधारी पार्टी की ओर इशारा करते हुए कहा कि कोई भी राजनीतिक नेता 'वॉशिंग मशीन' में शामिल होकर अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को बंद करवा सकता है।जस्टिस माधव जामदार, सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी (49) की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। सईद ने केंद्र सरकार और BJP के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के कारण...

बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है, विरोध करने पर केस दर्ज किए जाते हैं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (2 जुलाई) को कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि कोई नागरिक केंद्र सरकार के कुछ फ़ैसलों का विरोध कर रहा है और उसके ख़िलाफ़ नारे लगा रहा है, उसे किसी इलाके से बाहर निकालने (एक्सटर्नमेंट) का आधार नहीं बनाया जा सकता। [2026 LiveLaw (Bom) 305]सिंगल-जज जस्टिस माधव जामदार ने मुंबई पुलिस द्वारा सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी (49) के ख़िलाफ़ एक्सटर्नमेंट ऑर्डर जारी करने पर कड़ी नाराज़गी जताई। सईद 'सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया' (SDPI) के जनरल सेक्रेटरी हैं और केंद्र सरकार के कई...

जस्टिस गौतम पटेल को मिली धमकियों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न हो, बॉम्बे हाईकोर्ट का महाराष्ट्र सरकार को निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि पूर्व जस्टिस गौतम पटेल को मिली धमकियों और हमलों की जांच से संबंधित मुंबई पुलिस तथा विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट किसी भी हालत में सार्वजनिक न की जाए।अदालत ने कहा कि जांच से जुड़ी जानकारी बाहर आने से जांच प्रभावित हो सकती है और आरोपियों को लाभ मिल सकता है। एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान 26/11 मुंबई आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय लगातार प्रसारित हो रहे घटनाक्रम से हमलावरों को सुरक्षा...

सिखों को हेलमेट पहनने से छूट देना आर्टिकल 14 के तहत उचित वर्गीकरण, न कि धर्म पर आधारित: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सिखों को हेलमेट पहनने से दी गई छूट धर्म या जाति पर आधारित नहीं है, बल्कि यह भारत के संविधान के आर्टिकल 14 के तहत 'उचित' वर्गीकरण है और इसलिए यह किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है। [2026 LiveLaw (Bom) 304]नागपुर बेंच में जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस निवेदिता मेहता की डिवीजन बेंच ने लॉ स्टूडेंट की याचिका खारिज की। स्टूडेंट ने सिख समुदाय के लोगों को हेलमेट पहनने से मिली छूट को चुनौती दी थी, जबकि मोटर वाहन अधिनियम (MVA) की धारा 129 के तहत हर...

अगर पहली शादी अभी भी कायम है तो महिला अपने दूसरे पति के परिवार के खिलाफ IPC की धारा 498A के तहत मामला दर्ज नहीं करा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के परिवार के सदस्यों और एक दोस्त के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द करते हुए कहा कि अगर किसी महिला की पहली शादी अभी भी कायम है, तो उसके दूसरे पति के परिवार के सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत FIR कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकती। [2026 LiveLaw (Bom) 303]सिंगल-जज जस्टिस रंजीतसिंह भोंसले ने कहा कि दूसरे पति के परिवार के सदस्यों को IPC की धारा 498A में बताए गए 'रिश्तेदारों' की परिभाषा के दायरे में नहीं लाया जा सकता।जस्टिस भोंसले ने...

पति का अपनी भाभी से बातचीत करना और अपने हाथ पर उनके बेटे का नाम गुदवाना, बिना किसी गलत इरादे के क्रूरता नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि पति का अपनी भाभी से बातचीत करना और अपने हाथ पर उनके बेटे का नाम गुदवाना IPC की धारा 498A के दायरे में नहीं आता है, जो जीवनसाथी के प्रति क्रूरता के लिए सज़ा का प्रावधान करती है।कोर्ट ने एक व्यक्ति की भाभी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की; पत्नी का आरोप था कि पति का भाभी के साथ 'एक्स्ट्रा-मैरिटल' अफेयर था।सिंगल-जज जस्टिस रंजीतसिंह भोंसले ने 10 जून को सुनाए गए आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता को 'शक' था कि उसके पति के संबंध याचिकाकर्ता (जो उसके चचेरे भाई की पत्नी थी) के साथ थे।FIR में...

RTE के तहत पड़ोस के स्कूल में एडमिशन के लिए निवास का प्रमाण अनिवार्य, औपचारिकता नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिक्षा का अधिकार अधिकार (RTE Act) के तहत पड़ोस के स्कूल आरक्षण श्रेणी में प्रवेश से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि निवास का प्रमाण केवल औपचारिकता नहीं बल्कि पात्रता की अनिवार्य शर्त है। यदि इसका संतोषजनक प्रमाण नहीं दिया जाता तो इससे वास्तव में पात्र और जरूरतमंद बच्चे का अधिकार प्रभावित हो सकता है।एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने नाबालिग छात्र की ओर से दायर याचिका खारिज की। याचिका में पुणे के प्राइवेट स्कूल को शैक्षणिक...

अस्पताल पर लापरवाही के आरोपों की रिपोर्टिंग जारी रख सकता है गली न्यूज़, लेकिन अपमानजनक टिप्पणियों पर रोक: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में लोकप्रिय स्थानीय डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'गली न्यूज़' को कथित चिकित्सीय लापरवाही से जुड़े मामले की रिपोर्टिंग जारी रखने की अनुमति दी। हालांकि अदालत ने चैनल को अस्पताल के खिलाफ अपमानजनक और मानहानिकारक शब्दों या आरोपों के इस्तेमाल से रोक दिया।जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया समाचार प्रसारण के कुछ हिस्से मानहानिकारक प्रतीत होते हैं। इसलिए चैनल को मामले की रिपोर्टिंग से नहीं रोका जाएगा, लेकिन वह अस्पताल के खिलाफ ऐसे आरोप, संकेत या टिप्पणियां...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्टर सनी देओल के खिलाफ प्रोड्यूसर की अपील को फिर से शुरू किया, ₹15,000 का जुर्माना लगाया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (25 जून) को प्रोड्यूसर सुनील दर्शन पर ₹15,000 का जुर्माना लगाते हुए उनकी अपील को फिर से शुरू करने की इजाज़त दी। यह अपील 2015 में सिंगल-जज के फैसले के खिलाफ दायर की गई, जिसमें फिल्ममेकर और बॉलीवुड एक्टर सनी देओल द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ दायर दो आर्बिट्रेशन याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।मामले की पृष्ठभूमि यह है कि दोनों सेलिब्रिटी एक दशक से भी ज़्यादा समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह विवाद 'गुड मॉर्निंग इंडिया' नाम की फिल्म से देओल के अलग होने को लेकर था, जिसे 2008...

महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 41A के तहत असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर ट्रस्ट के चल रहे चुनावों में दखल नहीं दे सकते: हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट, 1950 की धारा 41A के तहत मिली शक्ति केवल पब्लिक ट्रस्ट के सही कामकाज के लिए निर्देश जारी करने तक सीमित है और इसका इस्तेमाल चल रही चुनाव प्रक्रिया में दखल देने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर धारा 41A का इस्तेमाल करके चुनाव नोटिस को रद्द नहीं कर सकते या इस आधार पर चुनाव नहीं रोक सकते कि मौजूदा मैनेजिंग कमेटी की वैधता पर संदेह है।जस्टिस अनिल एस. किलोर और राज डी....

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीने के पानी के संकट पर महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई, कहा - एक प्रगतिशील राज्य बहाने नहीं बना सकता

आज़ादी के 75 साल बाद भी अगर किसी नागरिक को पीने का साफ़ पानी उपलब्ध कराने के लिए राज्य को निर्देश देने की मांग को लेकर संवैधानिक अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़े तो ऐसे हालात में महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य की ओर से राहत न देने के लिए बहाने नहीं सुने जा सकते। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार (22 जून) को यह टिप्पणी की, क्योंकि राज्य के कई हिस्सों में पीने का पानी नहीं मिल रहा है।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की डिवीज़न बेंच ने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वे मंगलवार (23 जून) तक राज्य के सभी...

तबादले से नाराज़ कर्मचारी द्वारा कार्यालय में पुलिस लाना और बाहरी अधिकारियों से शिकायत करना कदाचार: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत स्थानांतरित किया जाता है और वह इसके विरोध में पुलिस के पास शिकायत कर कार्यालय में पुलिसकर्मियों को लेकर आता है, तो यह कदाचार की श्रेणी में आता है। अदालत ने यह भी कहा कि सेवा संबंधी विवादों को लेकर नियोक्ता के खिलाफ विभिन्न बाहरी और असंबंधित प्राधिकरणों के समक्ष गंभीर आरोप लगाना भी कदाचार माना जा सकता है।जस्टिस संदीप मार्ने ने 18 जून को दिए अपने आदेश में अभ्युदय सहकारी बैंक लिमिटेड की...

एक बार खारिज होकर अंतिम रूप ले चुकी डिम्ड कन्वेयंस अर्जी दोबारा दाखिल नहीं की जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र ओनरशिप फ्लैट्स अधिनियम के तहत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि डिम्ड कन्वेयंस के लिए दायर की गई पहली अर्जी खारिज हो चुकी हो और उस आदेश को चुनौती न दिए जाने के कारण वह अंतिम रूप ले चुका हो, तो उसी राहत के लिए दूसरी अर्जी दाखिल नहीं की जा सकती।अदालत ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी के पास अपने ही आदेश की समीक्षा या पुनर्विचार करने की कोई अंतर्निहित शक्ति नहीं है। जब तक कानून में ऐसी शक्ति स्पष्ट रूप से प्रदान न की गई हो, तब तक पहले से तय हो चुके मुद्दे को...

महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट के तहत मंज़ूरी रद्द करना सिर्फ़ धोखाधड़ी साबित होने पर ही मुमकिन: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 36(1) के तहत दी गई मंज़ूरी को धारा 36(2) के तहत तभी रद्द किया जा सकता है, जब यह साबित हो जाए कि मंज़ूरी धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने या ज़रूरी तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई। कोर्ट ने कहा कि धारा 36(2) के तहत अधिकार क्षेत्र अपील वाला नहीं है और यह चैरिटी कमिश्नर को लेन-देन का नया मूल्यांकन करने या मूल मंज़ूरी की सही-गलत होने पर फिर से विचार करने की इजाज़त नहीं देता, सिर्फ़ इसलिए कि उसी जानकारी के आधार पर कोई दूसरा नज़रिया भी हो सकता...

25% वकील कोटा विवाद: जिला जज भर्ती में न्यायिक अधिकारियों की एंट्री को चुनौती, बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा मामला

महाराष्ट्र में जिला जज पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। प्रैक्टिस कर रहे वकीलों के एक समूह ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया कि बार से सीधे भर्ती के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत कोटे में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को शामिल करने की अनुमति देकर भर्ती नियमों का उल्लंघन किया गया।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उच्च न्यायिक सेवा में भर्ती के लिए तीन अलग-अलग माध्यम निर्धारित हैं। इनमें 50 प्रतिशत पद पदोन्नति से, 25 प्रतिशत पद सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से...

किरायेदारी पाने के लिए मृत किरायेदार के साथ रहना जरूरी नहीं, वारिस को मिलेगा अधिकार: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मृत किरायेदार की किरायेदारी विरासत में पाने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वारिस उसकी मृत्यु के समय उसके साथ रह रहा हो।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किरायेदार की मृत्यु के समय उसके साथ कोई पारिवारिक सदस्य निवास नहीं कर रहा था तो उसके किसी भी वैध वारिस को किरायेदार के रूप में मान्यता दी जा सकती है। जस्टिस एम. एम. साठये ने यह फैसला पारसी पंचायत फंड्स एंड प्रॉपर्टीज, बॉम्बे द्वारा दायर याचिका पर सुनाया।मामला एक फ्लैट की किरायेदारी से जुड़ा है। मूल...