इलाहाबाद हाईकोट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां के साथ रह रही नाबालिग लड़की को बाल गृह भेजने के लिए 'CWC' पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में सोमवार को अपनी मां के साथ रह रही 15 वर्षीय लड़की को बाल गृह में भेजने के 'चौंकाने वाले' फैसले के लिए नारी निकेतन/बाल कल्याण समिति, कानपुर नगर पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि लड़की के पिता को सौंपी जाए और नाबालिग लड़की के पालन-पोषण के लिए इस्तेमाल की जाए।जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ ने समिति के कार्यों को 'चौंकाने वाला' और 'आश्चर्यजनक' मानते हुए निर्देश दिया कि यदि समिति जुर्माने...
नैतिक अधमता का दोषी व्यक्ति किसी भी विभाग का प्रमुख बनने के लिए उपयुक्त नहीं, शिक्षण संस्थान का तो बिल्कुल भी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि नैतिक अधमता से जुड़े आपराधिक मामले में दोषी ठहराए गए उम्मीदवार को किसी भी विभाग, किसी शैक्षणिक संस्थान का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त नहीं कहा जा सकता है। जस्टिस अजीत कुमार ने कहा,“…एक उम्मीदवार जो नैतिक अधमता से जुड़े आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया है, उसे किसी भी संस्थान या विभाग के प्रमुख का पद संभालने के लिए उपयुक्त उम्मीदवार नहीं माना जा सकता है, किसी शैक्षणिक संस्थान की तो बात ही छोड़िए क्योंकि उसे न केवल प्रशासन चलाना है बल्कि उसे उच्च...
औद्योगिक विवाद अधिनियम| लेबर कोर्ट धारा 33सी(2) के तहत नियोक्ता से धन की वसूली के लिए कार्यवाही में ब्याज नहीं दे सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 33सी(2) के तहत कार्यवाही करते समय, श्रम न्यायालय के पास नियोक्ता द्वारा देय राशि के विलंबित भुगतान पर कर्मचारी को ब्याज देने की शक्ति नहीं है। न्यायालय ने माना कि धारा 33सी(2) के तहत कार्यवाही निष्पादन कार्यवाही है। धारा 33सी (1) में प्रावधान है कि जहां किसी कर्मचारी का उसके नियोक्ता के पास कोई पैसा बकाया है तो कर्मचारी को अपने बकाया पैसे की रिकवरी के लिए उपयुक्त सरकार को आवेदन करना होगा। यदि सरकार संतुष्ट है कि पैसा बकाया है, तो...
'निंदनीय और गैर-जिम्मेदाराना आरोप': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक पूर्वाग्रह का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज की, 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रणाली के खिलाफ गैर-जिम्मेदाराना आरोप लगाने के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए हाल ही में एक वादी पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया। वादी ने पीठासीन न्यायाधीश के खिलाफ पक्षपात का आरोप लगाते हुए अपने मामले को स्थानांतरित करने की मांग की थी। जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने आरोपों को 'निंदनीय और सबसे गैर-जिम्मेदाराना' करार देते हुए कहा, "नतीजे के ज़रा भी डर के बिना अदालतों पर आरोप लगाने की इस तरह की प्रवृत्ति... को न्याय प्रशासन के व्यापक हित में इसे सख्ती से खत्म किया जाना...
सेवानिवृत्त कर्मचारी को वेतन वृद्धि नहीं देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ नगर आयुक्त पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, कहा-'नगर आयुक्त बच्चे नहीं, जो निदेशक की गोद में बैठे हों':
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में नगर आयुक्त, नगर निगम, मेरठ पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। रुपये का जुर्माना लगाया है। उन पर आरोप था कि उन्होंने वेतन वृद्धि के एक दिन पहले सेवानिवृत्त हुए एक सरकारी कर्मचारी को वेतन वृद्धि से वंचित किया था। न्यायालय ने माना कि सरकारी आदेश के आधार पर नगर आयुक्त की कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के विभिन्न निर्णयों और निदेशक (प्रशासन मानव संसाधन) केपीटीसीएल और अन्य बनाम सीपी मुंडिनामणि और अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ थी।जस्टिस जेजे मुनीर ने नगर...
संयुक्त रूप से दायर किए गए लिखित बयान को एक प्रतिवादी के कहने पर, जबतक कि अन्य की सहमति न हो, संशोधित नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में माना कि कई प्रतिवादियों की ओर से संयुक्त रूप से दायर किए गए लिखित बयान को किसी एक प्रतिवादी के कहने पर संशोधित नहीं किया जा सकता है, जब तक कि संयुक्त रूप से लिखित बयान दाखिल करने वाले अन्य सभी प्रतिवादियों की स्पष्ट सहमति न हो।जस्टिस जयंत बनर्जी की पीठ ने कहा, "जहां प्रतिवादियों के एक समूह ने संयुक्त रूप से लिखित बयान दायर किया हो वहां इसे एक या अधिक ऐसे प्रतिवादियों के कहने पर संशोधित नहीं किया जा सकता है, जब तक कि अन्य प्रतिवादी जो संयुक्त...
डिफॉल्टर SARFAESI एक्ट के तहत आयोजित नीलामी के खिलाफ लेनदार/नीलामी क्रेता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं कर सकता, उसे डीआरटी के पास जाना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेसर्स हिमरी एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के अधिकारियों के खिलाफ शिप्रा ग्रुप ओर से शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने माना कि डिफॉल्टर SARFAECI एक्ट, 2002 के प्रावधानों के तहत आयोजित नीलामी के खिलाफ लेनदार/नीलामी खरीदार के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं कर सकता है। कोर्ट ने कहा ऐसे मामलों में संपत्ति की नीलामी, हस्तांतरण के संबंध में शिकायत SARFAESI अधिनियम के तहत ऋण वसूली न्यायाधिकरणों के समक्ष उठाई जानी चाहिए।...
[Stamp Act] धारा 47-ए (3) गिफ्ट डीड के मामले में लागू नहीं होगी क्योंकि "बाजार मूल्य" "संपत्ति के मूल्य" के समान नहीं है : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि जहां संपत्ति गिफ्ट डीड के माध्यम से स्थानांतरित की गई है वहां भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 47-ए (3) को लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि धारा 47-ए उन उपकरणों पर लागू होती है जहां स्टाम्प शुल्क "बाजार मूल्य" पर निर्धारित किया गया है, न कि "संपत्ति के मूल्य" पर जैसा कि गिफ्ट डीड में होता है।भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 47-ए में प्रावधान है कि यदि किसी लिखित में बताई गई संपत्ति का बाजार मूल्य अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम मूल्य से कम है, तो पंजीकरण अधिकारी ...
'जानबूझकर किया गया धार्मिक अपमान': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भगवान शिव पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपी व्यक्ति को राहत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज सोशल मीडिया पर भगवान शिव के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपी ओवैस खान के खिलाफ एक आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया और इसे "जानबूझकर किया गया धार्मिक अपमान" बताया। न्यायालय ने कहा कि धार्मिक भावनाएं नागरिकों के लिए अत्यधिक महत्व रखती हैं, और ऐसी भावनाओं को अपमानित करने या विघटित करने के उद्देश्य से किया गया कोई भी कार्य सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का "गंभीर अपमान" है।अदालत ने कहा कि आरोपी की हरकतें, जो धार्मिक भावनाओं के प्रति "घोर उपेक्षा"...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रेमिका के चचेरे भाई का सिर काटने के दोषी व्यक्ति की उम्रकैद की सजा निलंबित की, जमानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में अपनी प्रेमिका के चचेरे भाई की सिर काटकर हत्या करने के दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर दी और जमानत दे दी। जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस श्याम सी चांडक की खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया अभियोजन पक्ष के मामले को इस हद तक खारिज कर दिया कि पानी से भरे स्थान पर पाए जाने के बावजूद हत्या के हथियार में मानव खून था।19 जून, 2018 को पुणे के कोंढावा के एक निवासी को एक आदमी का बिना सिर वाला शव मिला, जिसके शरीर पर केवल अंडरवियर था। बाद में शव की पहचान उमेश इंगले के रूप में...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को 'एसडीएम' द्वारा 3 दिनों के लिए अवैध रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 25,000 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते जौनपुर जिले में तैनात सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के 'मनमाने' कृत्य के कारण तीन दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखे गए एक व्यक्ति को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस सुरेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने शिव कुमार वर्मा और अन्य बनाम यूपी राज्य और 3 अन्य 2021 के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर व्यक्ति/याचिकाकर्ता को 10,000 रुपये की मुकदमेबाजी लागत का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।खंडपीठ ने यह आदेश रमेश चंद गुप्ता द्वारा दायर...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अनुमति के बिना पिता के लिए प्रचार करने के आरोपी सपा नेता के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते समाजवादी पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री की बेटी श्रेया वर्मा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दिया। श्रेया के खिलाफ 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में आवश्यक अनुमति के बिना अपने पिता के लिए प्रचार करने के आरोप में आपराधिक कार्यवाही शुरु की गई थी। जस्टिस शमीम अहमद की पीठ ने वर्मा और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 171 एच और 188 के तहत एफआईआर दर्ज करने में खामियां पाईं। उन्होंने देखा कि इस मामले में पुलिस जांच अधिकार क्षेत्र के बिना थी, और ऐसी...
पक्षपात के 'बेतुके' आरोपों पर स्थानांतरण के खतरे का सामना कर रहे जिला जज, जजों के लिए स्वतंत्र रूप से क्षेत्राधिकार का प्रयोग करना मुश्किल: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की कि जिला न्यायपालिका में मामलों पर निर्णय लेने में डर रहता है क्योंकि इससे प्रशासनिक शिकायतें और बाद में स्थानांतरण हो सकता है। जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने कि यद्यपि सिविल न्यायालयों के संबंध में नागरिकों के रवैये को स्वीकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह सच है कि सिविल न्यायालय विभिन्न कारणों से सुस्त हो गए हैं, जिनमें हड़तालें भी शामिल हैं जो न्यायिक समय को छीन लेती हैं। कोर्ट ने यह भी पाया कि जिला अदालतों में अदालत के निर्धारित समय का पालन नहीं...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए सपना चौधरी को NOC देने से इनकार करने वाला आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह पासपोर्ट अधिकारियों को एक्ट्रेस सपना चौधरी द्वारा उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण/पुनः जारी करने के लिए दिए गए आवेदन पर निर्णय लेने और 1 महीने के भीतर आदेश पारित करने का निर्देश दिया।यह कहते हुए कि विदेश यात्रा का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 और 19 (1) (जी) के तहत गारंटीकृत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है, जस्टिस शमीम अहमद की पीठ ने पासपोर्ट जारी करने के लिए आपत्ति प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार करने वाले अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय का आदेश...
मनी लॉन्ड्रिंग केस | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत के लिए 2.5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त को रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक स्पेशल एंटी करप्शन कोर्ट द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत प्राप्त करने के लिए आरोपी पर 2.5 करोड़ रुपये जमा करने की लगाई गई शर्त को रद्द कर दिया। जस्टिस संजय कुमार सिंह ने मीना आनंद नामक आरोपी को राहत देने के लिए कड़ी जमानत शर्तों को लगाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का उल्लेख किया।अदालत विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निरोधक, सीबीआई, गाजियाबाद की ओर से लगाई गई शर्त संख्या एक, जिसके तहत आरोपी को अग्रिम जमानत मिलने के एक महीने के भीतर 2018 से प्रति...
'धर्म के आधार पर स्पष्ट भेदभाव': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम वकीलों पर टिप्पणियों के लिए न्यायिक अधिकारी को तलब किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक न्यायिक अधिकारी को "एक विशिष्ट समुदाय के खिलाफ" उनकी टिप्पणियों के कारण सम्मन किया। हाईकोर्ट ने उनकी टिप्पणियों की आलोचना की और इसे न्यायिक कदाचार का मामला माना। जस्टिस शमीम अहमद की पीठ ने कहा, “यह स्पष्ट रूप से अनुमान लगाया जा सकता है कि ट्रायल कोर्ट ने आदेश पारित किया था जो एक विशिष्ट संवैधानिक निषेध का उल्लंघन करते हुए सीधे अनुच्छेद 15 (1) की शर्तों के विपरीत है। ट्रायल कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से केवल धर्म के आधार पर एक समुदाय के साथ भेदभाव...
पीड़िता को गलत तरीके से नाबालिग के रूप में दिखाना अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पोक्सो मामलों में आयु निर्धारण रिपोर्ट जल्द दाखिल करने का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में पोक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों/जांच अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पोक्सो एक्ट के सभी मामले में शुरुआत में ही सीआरपीसी की धारा 164A सहपठित पोक्सो एक्ट, 2012 की धारा 27 के आदेश के तहत पीड़ित की उम्र तय करने वाले एक मेडिकल रिपोर्ट तैयार की जाए और इसे बिना किसी देरी के न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।कोर्ट ने यह निर्देश देते हुए कहा कि पोक्सो मामलों में पीड़िता की उम्र में विसंगतियां आरोपी के...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भगवान राम को अपशब्द कहने के आरोपी व्यक्ति की बिना शर्त माफी स्वीकार की
पुलिस स्टेशन में दी गई उनकी बिना शर्त माफी को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते रियाज़ उर्फ ओवैसी को जमानत दी। रियाज़ पर फेसबुक पर भगवान राम को गाली देने का आरोप है।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने यह देखते हुए उन्हें राहत दी कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह 28 जनवरी, 2024 से हिरासत में है। अदालत ने यह भी माना कि उसके खिलाफ सभी कथित अपराधों में अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है।आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153-ए, 295-ए, 505(2) और आईटी एक्ट की धारा 67...
जनहित याचिका में मांग-आधिकारिक दस्तावेजों में इलाहाबाद हाईकोर्ट का नाम बदलकर 'हाईकोर्ट ऑफ उत्तर प्रदेश' किया जाए; वकील को नसीहत-'क़ानून पर बहस करें, भावनाओं से बचें'
इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें आधिकारिक दस्तावेजों में हाईकोर्ट का नाम बदलकर "उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट" करने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से अपनी भावनाओं को एक तरफ रखते हुए केवल कानूनी दलीलें पेश करने की नसीहत दी। चीफ जस्टिस भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने मौखिक रूप से कहा, "अगर आपको यही सब बोलना है तो 5 मिनट और बोलिए। अगर कानूनी दलीलें देंगे तो सुना जाएगा आपको। भावनात्मक दलीलें मत...
इलाहाबाद हाईकोर्ट को 'उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट' के रूप में संदर्भित करने की मांग को लेकर याचिका दायर
इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई। उक्त याचिका में केंद्र सरकार और अन्य प्राधिकारियों को सभी अधिसूचनाओं, संचार, निर्णय, आदेश और फरमान में इलाहाबाद हाईकोर्ट को 'उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट' के रूप में संदर्भित करने का निर्देश देने की मांग की गई।लखनऊ के रहने वाले वकील दीपांकर कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट के अधिकारियों को इसके नियमों (इलाहाबाद हाईकोर्ट नियम, 1952) का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट नियम करने और अपने आदेशों/निर्णय, नोटिसों और अधिसूचनाओं में हाईकोर्ट के...







![[Stamp Act] धारा 47-ए (3) गिफ्ट डीड के मामले में लागू नहीं होगी क्योंकि बाजार मूल्य संपत्ति के मूल्य के समान नहीं है : इलाहाबाद हाईकोर्ट [Stamp Act] धारा 47-ए (3) गिफ्ट डीड के मामले में लागू नहीं होगी क्योंकि बाजार मूल्य संपत्ति के मूल्य के समान नहीं है : इलाहाबाद हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2024/03/11/500x300_527306-750x450526252-justice-shekhar-b-saraf-allahabad-high-court.jpg)








