इलाहाबाद हाईकोट

क्लाइंट के फ़ायदे के लिए वकील होने की बात छिपाकर PIL दाखिल करना अदालत के अधिकार का गंभीर दुरुपयोग: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में जनहित याचिका (PIL) खारिज करते हुए कहा कि वकील होने की बात छिपाकर ऐसी याचिका दाखिल करना, जो असल में किसी क्लाइंट के फ़ायदे के लिए हो, "अदालत के PIL अधिकार क्षेत्र का गंभीर दुरुपयोग" है।पेशे से वकील याचिकाकर्ता को अपना तरीका सुधारने की चेतावनी देते हुए कोर्ट ने कहा कि PIL सिस्टम के इस तरह के दुरुपयोग की इजाज़त नहीं दी जा सकती।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने ऐसे याचिकाकर्ता की PIL पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसने खुद को सामाजिक...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भाई की हत्या के दोषी 82 साल के व्यक्ति को 40 साल बाद वापस जेल भेजा, कहा- आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करके सज़ा कम नहीं की जा सकती

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1984 में अपने भाई की हत्या के दोषी 82 साल के व्यक्ति की अपील खारिज की और उसे अपनी उम्रकैद की बाकी सज़ा काटने के लिए सरेंडर करने का आदेश दिया।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने पाया कि रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों से ऐसी कोई राहत देने वाली परिस्थितियां सामने नहीं आईं, जिनके आधार पर अपीलकर्ता की सज़ा को IPC की धारा 302 (हत्या) से बदलकर IPC की धारा 304 पार्ट II (गैर-इरादतन हत्या जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) में बदला जा सके।अपीलकर्ता की सज़ा को...

रायबरेली बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद का चुनाव एक सप्ताह टला, मतदाता सूची से नाम हटाने पर आपत्ति की जांच के आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रायबरेली सिविल कोर्ट स्थित केंद्रीय बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद का चुनाव एक सप्ताह के लिए स्थगित किया। साथ ही एल्डर्स कमेटी को निर्देश दिया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ एक अधिवक्ता की आपत्ति पर सुनवाई कर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता आनंद कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।याचिकाकर्ता का कहना था कि वह वर्ष 2008 से बार एसोसिएशन के आजीवन सदस्य हैं। निवर्तमान...

सिर्फ अदालत के कहने पर अभियोजन स्वीकृति नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व डीएम के खिलाफ CBI मामला किया खत्म

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कोई भी ट्रायल कोर्ट केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी जांच एजेंसी को यह निर्देश नहीं दे सकती कि वह किसी लोक सेवक के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति हर हाल में सुनिश्चित करे। अदालत ने कहा कि ऐसा निर्देश वास्तव में सक्षम प्राधिकारी को अभियोजन स्वीकृति देने के लिए निर्देशित करने जैसा है, जिसकी कानून में अनुमति नहीं है।जस्टिस राज बीर सिंह की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी सहारनपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी पवन कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए की। अदालत ने विशेष CBI...

यमुना एक्सप्रेसवे पर 60 किमी/घंटा स्पीड लिमिट वैध, बस ऑपरेटरों की याचिका खारिज: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे पर स्टेज कैरिज बसों के लिए निर्धारित 60 किमी/घंटा की स्पीड लिमिट को वैध ठहराते हुए ओवरस्पीडिंग ई-चालानों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकारी को किसी विशेष सड़क के लिए केंद्र सरकार द्वारा तय अधिकतम सीमा से कम स्पीड लिमिट निर्धारित करने का अधिकार है।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार की 6 अप्रैल 2018 की अधिसूचना, जिसमें...

आरोपों की सच्चाई की जांच करने से पहले लेबर कोर्ट को घरेलू जांच की निष्पक्षता पर फैसला करना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर से कहा कि जब किसी कर्मचारी को घरेलू जांच के आधार पर नौकरी से निकालने का मामला लेबर कोर्ट में भेजा जाता है तो लेबर कोर्ट को सबसे पहले यह तय करना चाहिए कि घरेलू जांच निष्पक्ष थी या नहीं। कोर्ट आरोपों की सच्चाई पर तभी विचार कर सकता है जब वह इस मुद्दे पर फैसला कर ले।कोर्ट ने कहा कि अगर जांच निष्पक्ष नहीं पाई जाती है तो नियोक्ता (Employer) को आरोप साबित करने के लिए सबूत पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए। इसके बाद लेबर कोर्ट को यह तय करना चाहिए कि पेश किए गए सबूतों के आधार पर...

आवंटन पत्र जारी होने से पहले नीलामी राशि पर ब्याज नहीं वसूल सकता DLA: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) किसी भूखंड के सफल बोलीदाता से आवंटन पत्र जारी होने से पहले नीलामी राशि पर ब्याज नहीं वसूल सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नीलामी की शर्तों के अनुसार किस्तों का भुगतान आवंटन पत्र जारी होने के बाद ही देय होता है, इसलिए उससे पहले ब्याज या दंडात्मक ब्याज लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा,"नीलामी की शर्तों से स्पष्ट है कि आवंटन पत्र जारी किए बिना सफल बोलीदाता...

S.125 CrPC | पति की पहले से मौजूद शादी की बात छिपाकर दूसरी शादी करने पर महिला गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार: इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जिस महिला को पति की पहले से मौजूद शादी की बात छिपाकर शादी के लिए राजी किया गया, वह CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार है, भले ही दोनों के बीच हुई शादी कानूनी रूप से अमान्य (void) हो।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पति को अपनी ही गलती का फायदा उठाने और उस महिला को गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती, जिसने पति की पहले से मौजूद शादी के बारे में जाने बिना उससे शादी की थी।इस तरह सिंगल जज ने पति की क्रिमिनल रिविज़न...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कस्टडी में हुई मौत के मामले में मुआवज़ा न देने के आरोप में यूपी के होम सेक्रेटरी को किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद को अवमानना ​​याचिका के मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तलब किया। यह याचिका कस्टडी में हुई मौत के मामले में मुआवज़ा देने और ऐसे मामलों में मुआवज़ा देने के लिए गाइडलाइंस बनाने के डिवीज़न बेंच के आदेश का पालन न करने के आरोप में दायर की गई।अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सौरभ लवानिया की बेंच ने पाया कि राज्य सरकार डिवीज़न बेंच के 20 फरवरी, 2026 के फैसले में दिए गए दो मुख्य निर्देशों का पालन...

S.528 BNSS | शिकायतकर्ता की अपील पर आपराधिक केस रद्द करने के लिए हाईकोर्ट अपनी इनहेरेंट पावर्स का इस्तेमाल कर सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि शिकायतकर्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए भी, अगर कोर्ट को लगता है कि कार्यवाही जारी रखने से "न्याय के उद्देश्य" पूरे नहीं होंगे या यह "किसी कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग" होगा तो वह BNSS की धारा 528 (CrPC की धारा 482) के तहत अपनी इनहेरेंट पावर्स का इस्तेमाल 'सुओ मोटो' करके आपराधिक कार्यवाही रद्द कर सकता है।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने यह बात एक शिकायतकर्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए कही। शिकायतकर्ता ने स्पेशल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसकी BNSS...

पत्नी को गुज़ारा-भत्ता वसूलने के लिए बार-बार अर्ज़ी देने की ज़रूरत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट की ज्यूडिशियल अधिकारियों को अवमानना ​​की चेतावनी

यह साफ़ करते हुए कि पत्नी को हर महीने का गुज़ारा-भत्ता वसूलने के लिए बार-बार 'एक्ज़ीक्यूशन एप्लीकेशन' (अमल-दरामद की अर्ज़ी) दायर करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के सभी फैमिली कोर्ट जजों को निर्देश दिया कि वे गुज़ारा-भत्ते के आदेशों को लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सख्ती से पालन करें। ऐसा न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही हो सकती है।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की बेंच ने जौनपुर फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक महिला...

पीड़िता के अश्लील वीडियो के आरोप के बावजूद मोबाइल जब्त नहीं किया: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ जांच के दिए आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने POCSO मामले की जांच में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर जौनपुर के पुलिस अधीक्षक को संबंधित जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय जांच कराने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि पीड़िता के अश्लील वीडियो और तस्वीरें बनाने के आरोप होने के बावजूद आरोपी और सह-आरोपी के मोबाइल फोन जब्त नहीं करना गंभीर लापरवाही है। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने यह आदेश उस समय पारित किया, जब वह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा POCSO Act की धारा 5/6 के तहत दर्ज मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर...

मृत व्यक्ति के नाम जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस को Income Tax At की धारा 159 से वैध नहीं ठहराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी मृत करदाता के नाम पर जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस को आयकर अधिनियम (Income Tax At) की धारा 159 के आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि करदाता की मृत्यु के बाद नोटिस जारी किया गया है तो आयकर विभाग को निर्धारित समयसीमा के भीतर उसके विधिक उत्तराधिकारियों के नाम नया नोटिस जारी करना होगा।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि धारा 159 तभी लागू होती है, जब करदाता के जीवित रहते उसके...

रिश्ता टूटने के बाद बदले की भावना से दर्ज हुई दुष्कर्म की FIR: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया मुकदमा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहमति से बने प्रेम संबंध के टूटने के बाद दर्ज दुष्कर्म का मुकदमा रद्द करते हुए कहा कि यह मामला असफल प्रेम संबंध का उदाहरण है। अदालत ने पाया कि FIR तब दर्ज कराई गई, जब आरोपी ने संबंध समाप्त कर किसी अन्य महिला से विवाह करने का फैसला लिया।जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दायर याचिका स्वीकार करते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376, 504 और 506 के तहत दर्ज आरोपपत्र, संज्ञान आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की।अदालत ने...

जिला कोर्ट में व्यस्तता बताकर हाईकोर्ट से स्थगन मांगना पेशेवर दायित्वों के प्रति अनादर: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट में व्यस्तता का हवाला देकर मामलों में स्थगन मांगने की वकालत की बढ़ती प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि इस तरह का आचरण न केवल पेशेवर दायित्वों के प्रति अनादर दर्शाता है, बल्कि हाईकोर्ट के प्रति भी सम्मान की कमी को प्रदर्शित करता है। इससे मामलों का लंबित रहना कृत्रिम रूप से बढ़ता है और न्याय वितरण की प्रक्रिया प्रभावित होती है।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत दायर आपराधिक अपील की...

दूतावास के गारंटी सर्टिफिकेट न देने से चीनी नागरिक को जमानत के बावजूद 5 महीने जेल में बिताने पड़े: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया दखल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते GST चोरी के मामले में आरोपी चीनी नागरिक पर लगाई गई ज़मानत की शर्तों में बदलाव किया। कोर्ट ने पाया कि ज़मानत मिलने के बावजूद वह लगभग पाँच महीने तक जेल में रही, क्योंकि चीनी दूतावास ने मूल ज़मानत आदेश के तहत माँगा गया गारंटी सर्टिफ़िकेट जारी करने से इनकार किया।जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने एलिस ली उर्फ़ ली तेंगली की तरफ़ से दायर बदलाव की अर्ज़ी को मंज़ूरी देते हुए यह आदेश दिया। उन्हें 9 फ़रवरी, 2026 को ज़मानत मिली थी, लेकिन वह रिहा नहीं हो पाईं, क्योंकि ज़मानत की...

S. 311 CrPC | ज़रूरी गवाहों को तब भी बुलाया जा सकता है, जब उनका एग्ज़ामिनेशन-इन-चीफ़ न हुआ हो: इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 311 के तहत ज़रूरी गवाहों को बुलाने में कोई कानूनी रुकावट नहीं है, भले ही उनका 'एग्ज़ामिनेशन-इन-चीफ़' (मुख्य गवाही) अभी तक न हुआ हो।बेंच ने कहा कि अगर ट्रायल कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचती है कि किसी गवाह से पूछताछ ज़रूरी है, तो ऐसे गवाह को फ़ैसला सुनाए जाने से पहले किसी भी स्टेज पर बुलाया जा सकता है।जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की बेंच ने यह बात तब कही, जब उन्होंने उन्नाव के एडिशनल सेशंस जज के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को मंज़ूरी दी, जिसमें CrPC की धारा...

न्यायिक रिमांड से इनकार होने पर भी जांच और संज्ञान लेने की कार्रवाई नहीं रुकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मामले में न्यायिक रिमांड से इनकार कर दिए जाने मात्र से विवेचना अधिकारी आगे की जांच करने से नहीं रुकता और न ही अदालत पुलिस रिपोर्ट पर स्वतंत्र रूप से विचार कर संज्ञान लेने से वंचित होती है। अदालत ने कहा कि न्यायिक रिमांड और संज्ञान, आपराधिक कार्यवाही के दो अलग-अलग चरण हैं और दोनों का उद्देश्य भी अलग है।जस्टिस जफीर अहमद ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत, लखीमपुर खीरी द्वारा संज्ञान लेकर आरोपी को तलब करने के आदेश को...

SHO की रिपोर्ट पर भी जारी हो सकता है गुण्डा एक्ट का नोटिस, यदि वह SP के माध्यम से भेजी गई हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण एक्ट 1970 की धारा 3(1) के तहत कार्यवाही शुरू करने के लिए यदि थानाध्यक्ष (SHO) की रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक (SP) के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट को भेजी गई है तो उसके आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी करना पूरी तरह वैध है। अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण नियमावली, 1970 के नियम 3(1) की भावना और प्रावधानों के अनुरूप है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने उन्नाव के जिला...

बिना कारण बताए दिए गए आदेश के खिलाफ विशेष अपील सुनवाई योग्य, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर Rule 5 की रोक भारी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि किसी एकल न्यायाधीश (Single Judge) का आदेश बिना कारण बताए (Non-Speaking Order) पारित किया गया है, तो उसके खिलाफ विशेष अपील (Special Appeal) सुनवाई योग्य होगी, भले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट नियमावली, 1952 के Rule 5 में ऐसी अपील पर रोक का प्रावधान हो।चीफ़ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कहा कि आदेश में कारण दर्ज करना प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए, यदि कोई आदेश कारणों से रहित है, तो Rule 5...