इलाहाबाद हाईकोट
मृतक किसान के छोटे-मोटे काम उसके परिवार को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लाभ से वंचित नहीं करेंगे: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि केवल इसलिए कि किसान अपनी मृत्यु के समय छोटे-मोटे काम कर रहा था, अपने आप में उसके परिवार को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की खंडपीठ ने सविता यादव नामक महिला द्वारा दायर याचिका स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की, जिसके पति की आजमगढ़ जिले में एक ट्रक पर गेहूं की बोरियां लादते समय बिजली का झटका लगने से मृत्यु हो गई।जिला मजिस्ट्रेट ने उक्त योजना के तहत अनुग्रह राशि के लिए...
पाकिस्तानी वीडियो पर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' लिखने वाले आरोपी को मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक 20 वर्षीय युवक को जमानत दी, जिस पर एक पाकिस्तानी नागरिक द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो को लाइक करने और उस पर पाकिस्तान जिंदाबाद टिप्पणी पोस्ट करने का आरोप था।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने आरोपी जैद को राहत देते हुए कहा कि उसने कोई धार्मिक टिप्पणी या देश की गरिमा और संप्रभुता को ठेस पहुंचाने वाली कोई अन्य टिप्पणी नहीं की थी।मामले का विवरणआरोपी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 115(2), और 351(2) के तहत दर्ज मामले में हाईकोर्ट का रुख...
राजस्व अभिलेखों में प्रविष्टि हटाना या बदलना न्यायिक मामला, सुनवाई का अवसर देना आवश्यक: इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भू-राजस्व अधिनियम की धारा 34 के तहत राजस्व अभिलेखों में किसी भी तरह का बदलाव, जिसमें प्रविष्टि को हटाना या बदलना शामिल है, एक न्यायिक मामला है, जिसके लिए संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान करना अनिवार्य है।जस्टिस इरशाद अली की पीठ ने कहा,"प्रशासनिक मामलों में सुनवाई का अवसर प्रदान करना अपेक्षाकृत नया सिद्धांत है। जहां तक न्यायिक मामलों का संबंध है, जब से अदालतों की स्थापना हुई है, यह प्रक्रियात्मक कानून का सबसे आवश्यक घटक रहा है कि संबंधित पक्षों को सुने...
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद: दस्तावेज़ों की सुरक्षा के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रिकॉर्ड्स डिजिटाइज़ करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में रजिस्ट्रार (न्यायिक) (कंप्यूटर) को श्री कृष्ण जन्मभूमि टाइटल विवाद से संबंधित सभी रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया ताकि मामले के दस्तावेजों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।यह आदेश जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने पारित किया, जिन्हें अब हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में स्थानांतरित कर दिया गया है।हाईकोर्ट वर्तमान में कृष्ण जन्मभूमि टाइटल विवाद से संबंधित 18 सिविल मुकदमों की सुनवाई कर रहा है। इन सभी मुकदमों में एक सामान्य...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक्सटॉर्शन मामले में ADGP को तलब किया, कहा- मामला दबाया जा रहा है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक्सटॉर्शन (जबरन वसूली) के मामले में कथित पुलिस निष्क्रियता और आरोपी हेड कॉन्स्टेबल के जांच अधिकारियों पर स्पष्ट प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए वाराणसी के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और जांच की प्रगति का विवरण देते हुए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए तलब किया।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ CBCID वाराणसी में तैनात हेड कॉन्स्टेबल रणधीर सिंह और रीना सिंह द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।FIR के अनुसार दोनों पर...
16 वर्ष से अधिक उम्र की पत्नी से 2017 से पहले यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2007 का दोषसिद्धि आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि 15 वर्ष से अधिक उम्र की नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के लिए किसी पुरुष को केवल सुप्रीम कोर्ट के इंडिपेंडेंट थॉट बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2017) फैसले के बाद ही दोषी ठहराया जा सकता है उससे पहले नहीं।इंडिपेंडेंट थॉट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा 375 (बलात्कार) के अपवाद 2 की व्याख्या करते हुए इसे बदल दिया था, जिसमें 15 वर्ष से अधिक उम्र की पत्नी के साथ यौन संबंध को बलात्कार नहीं माना जाता। सुप्रीम कोर्ट ने इसे बदलकर 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मॉब लिंचिंग रोकने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर उत्तर प्रदेश सरकार की 'निष्क्रियता' पर उठाए सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तहसीन एस. पूनावाला बनाम भारत संघ (2018) मामले में सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों को लागू करने में उत्तर प्रदेश सरकार की स्पष्ट निष्क्रियता पर सवाल उठाया। इन निर्देशों में देश भर में मॉब लिंचिंग रोकने के लिए निवारक, उपचारात्मक और दंडात्मक उपाय निर्धारित किए गए।यह देखते हुए कि इन निर्देशों के सात साल बाद भी राज्य द्वारा क्या कार्रवाई की गई, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है, कोर्ट ने कहा कि जुलाई 2018 में पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी परिपत्र, सरकार की नीति और प्रशासनिक रुख...
'हिंसा, लिंचिंग और गौरक्षकों का चलन आम हो गया है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौहत्या अधिनियम के तहत लापरवाही से दर्ज की गई FIRs की निंदा की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश गौहत्या निवारण अधिनियम, 1955 के तहत पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले दर्ज करने के 'लापरवाह' तरीके और राज्य में गौरक्षकों की बढ़ती समस्या को गंभीरता से लिया।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने प्रमुख सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अधीन न होने के बावजूद ऐसी FIRs क्यों दर्ज की जा रही हैं।खंडपीठ ने इस मुद्दे पर भी हलफनामा मांगा कि राज्य...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम सभा भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ राज्यव्यापी कार्रवाई का दिया आदेश
तालाबों, चरागाहों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिता संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण को समाप्त करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण और व्यापक आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरे उत्तर प्रदेश में कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि ग्राम सभा भूमि पर अतिक्रमण की सूचना देने या उसे हटाने में प्रधानों, लेखपालों और राजस्व अधिकारियों की निष्क्रियता आपराधिक विश्वासघात के समान है।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने अपने 24 पृष्ठों के आदेश में न केवल राज्य भर में सार्वजनिक भूमि या सार्वजनिक...
सर्विस के दौरान दिव्यांगता होती है तो कर्मचारी को सेवामुक्त करने के बजाय उपयुक्त पद पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जहां दिव्यांगता सेवा के दौरान प्राप्त होती है, वहां कर्मचारी की सेवाएं समाप्त करने के बजाय उसे उपयुक्त पद पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए।दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 20 [रोज़गार में भेदभाव न करना] का हवाला देते हुए जस्टिस अब्दुल मोइन ने कहा,“अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि जहां कोई कर्मचारी अपनी सेवा के दौरान दिव्यांगता प्राप्त करता है, उसकी सेवाएं समाप्त नहीं की जानी चाहिए, बल्कि नियोक्ता द्वारा उसे उपयुक्त पद पर ट्रांसफर करने और उसके...
पहलगाम पोस्ट केस: डॉ. मेडुसा पर गंभीर आरोप, 'एकता खतरे' की धारा हटाई, 352 और 302 BNS बरकरार
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. मद्री ककोटी (डॉ. मेडुसा) के खिलाफ पहलगाम आतंक हमले के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट पर FIR की जांच पूरी हो गई है और जल्द ही चार्जशीट दायर की जाएगी।राज्य के वकील ने बताया कि पहले FIR में कई धाराएं थीं, जैसे धारा 152 BNS (भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम) लेकिन अब चार्जशीट में केवल धारा 352 (जानबूझकर अपमान और शांति भंग करने के लिए) और 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए) शामिल हैं। इस वजह से...
यूपी राज्य में गोद लेना केवल रजिस्टर्ड डीड द्वारा ही हो सकता है, केवल नोटरीकृत दत्तक ग्रहण विलेख अमान्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17(3) में राज्य संशोधन के आधार पर केवल पंजीकृत दत्तक ग्रहण विलेख यूपी राज्य में मान्य है। न्यायालय ने कहा कि केवल गोद लेने के दस्तावेज का नोटरीकरण इसे उत्तराधिकार साबित करने के लिए वैध नहीं बनाता है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच ने की,"यूपी राज्य में लागू अधिनियम, 1956 की संशोधित धारा 16(2) और यूपी राज्य में लागू अधिनियम, 1908 की धारा 17 (1)(एफ) और (3) को संयुक्त रूप से पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि 01.01.1977 के बाद...
असफल निविदाकर्ता अंतिम चरण में निविदा शर्तों को चुनौती नहीं दे सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने हाल ही में कहा कि किसी निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले और बाद में असफल घोषित किए गए पक्ष को बाद के चरण में विशेष रूप से प्रक्रिया के काफी आगे बढ़ जाने के बाद निविदा शर्तों को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका खारिज की, जिसमें तकनीकी मूल्यांकन और संपूर्ण निविदा प्रक्रिया को चुनौती देते हुए आरोप...
क्या जेंडर चेंज करने के सर्जरी के बाद किसी व्यक्ति को नाम बदलने की अनुमति दी जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट करेगा जांच
इलाहाबाद हाईकोर्ट महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचार और जांच करने वाला है कि क्या जेंडर परिवर्तन सर्जरी के बाद किसी व्यक्ति को नाम बदलने की अनुमति दी जा सकती है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने सीनियर एडवोकेट एचआर मिश्रा (सहायक एडवोकेट वीआर तिवारी) से इस प्रश्न पर न्यायालय की सहायता करने का अनुरोध किया।मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।कोर्ट ने वकीलों से कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा एक्स बनाम कर्नाटक राज्य एवं अन्य 2024 लाइव लॉ (कर) 529 और मणिपुर हाईकोर्ट द्वारा डॉ. बेयोन्सी लैशराम बनाम मणिपुर राज्य एवं...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेटा को स्वामी राम भद्राचार्य के विरुद्ध 'अपमानजनक' सामग्री हटाने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने बुधवार को 'मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक' (जो फेसबुक और इंस्टाग्राम का संचालन करती है) को पद्म विभूषण से सम्मानित और जगद्गुरु स्वामी राम भद्राचार्य जी महाराज को कथित रूप से बदनाम करने वाली आपत्तिजनक सामग्री को 48 घंटों के भीतर हटाने का निर्देश दिया, बशर्ते कि ऐसी सामग्री के URL लिंक उसे उपलब्ध करा दिए जाएं।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने स्वामी राम भद्राचार्य जी के अनुयायियों और शिष्यों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित...
ग़लत तथ्यों पर दी गई ज़मानत को समानता का आधार नहीं बनाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि यदि ज़मानत देने के लिए भरोसा किया गया आदेश ग़लत तथ्यों पर आधारित है तो समानता के सिद्धांत का पालन करते हुए ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए।जस्टिस संजय कुमार सिंह ने यह मत व्यक्त किया,"यदि ज़मानत देने वाले आदेश में ग़लत तथ्य शामिल हैं तो कोई जज समानता के आधार पर आरोपी को ज़मानत देने के लिए बाध्य नहीं है। यदि कोई अवैधता न्यायालय के संज्ञान में लाई जाती है तो उसे जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"यह फैसला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 396 (डकैती के साथ हत्या), 412...
विशेष धार्मिक समूह को निशाना बनाने का आरोप लगाने वाला व्हाट्सएप मैसेज BNS की धारा 353(2) के तहत दुश्मनी बढ़ाने का अपराध हो सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विशेष धार्मिक समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कई लोगों को व्हाट्सएप मैसेज प्रसारित करना प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 353(2) के तहत धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी, घृणा और दुर्भावना को बढ़ावा देने का अपराध माना जाएगा।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता (अफाक अहमद) के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की, जिसने कथित तौर पर व्हाट्सएप पर कई व्यक्तियों को एक भड़काऊ...
मानसिक रूप से विकलांग बेटे की देखभाल कर रहे कर्मचारी का तबादला रद्द करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशासनिक संवेदनहीनता पर लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी के तबादले के अनुरोध को अस्वीकार करने के लिए उत्तर प्रदेश के अधिकारियों की प्रशासनिक संवेदनहीनता की कड़ी आलोचना की। यह कर्मचारी अपने बेटे की देखभाल कर रहा है, जो मानसिक मंदता से पीड़ित है और 50% स्थायी विकलांगता रखता है।जस्टिस मनीष माथुर की पीठ ने 12 सितंबर, 2025 को यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठ सहायक संतोष कुमार वर्मा ने मैनपुरी से अयोध्या या आस-पास के किसी जिले जिसमें लखनऊ भी शामिल है, में स्थानांतरण की मांग की...
ख़राब वकालत से न्याय में बाधा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों के उदासीन आचरण पर नाराज़गी जताई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालतों में वकीलों द्वारा दी जा रही खराब गुणवत्ता वाली सहायता पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की। कोर्ट ने इसे बहुत दुखद स्थिति बताया जो पहले से ही अत्यधिक काम के बोझ से दबी अदालतों के लिए न्याय के शीघ्र वितरण में बाधा डालता है।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की सिंगल बेंच ने टिप्पणी की कि वकीलों का ऐसा आचरण न्याय के त्वरित वितरण में बाधा" बनता है। सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया निर्देश को विफल कर देता है, जिसमें ज़मानत याचिकाओं को दाखिल होने के दो महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया गया।कोर्ट...
पहली तलाक याचिका खारिज होने पर भी अलग आधार पर दूसरी याचिका दायर की जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि एक ही आधार पर तलाक की याचिका खारिज होने पर भी, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत दूसरे आधार पर तलाक की याचिका दायर करने में कोई रोक नहीं है।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा— “हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत किसी एक आधार पर याचिका का निर्णय, दूसरे आधार पर तलाक की याचिका दायर करने पर रोक नहीं लगाता। यदि पहली याचिका खारिज होने के बाद भी पक्षकार को दूसरी याचिका दायर करने की अनुमति मिलती है, तो संशोधन के माध्यम से नए आधार जोड़ने में कोई...


















