इलाहाबाद हाईकोट

कार्यकारी सर्कुलर कानून से मिले वेतन के अधिकार को सीमित नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि शिक्षा निदेशक (बेसिक) की ओर से जारी कार्यकारी सर्कुलर किसी शिक्षक को कानून के तहत मिले वेतन के अधिकार को सीमित या समाप्त नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि कार्यकारी निर्देश किसी वैधानिक प्रावधान पर हावी नहीं हो सकते।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने कहा कि 3 मई 1982 का सर्कुलर केवल सहायता अनुदान योजना को लागू करने के लिए जारी एक कार्यकारी निर्देश है। यह उत्तर प्रदेश जूनियर हाई स्कूल (शिक्षकों एवं अन्य...

कार्यकारी सर्कुलर कानून से मिले वेतन के अधिकार को सीमित नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि शिक्षा निदेशक (बेसिक) की ओर से जारी कार्यकारी सर्कुलर किसी शिक्षक को कानून के तहत मिले वेतन के अधिकार को सीमित या समाप्त नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि कार्यकारी निर्देश किसी वैधानिक प्रावधान पर हावी नहीं हो सकते।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने कहा कि 3 मई 1982 का सर्कुलर केवल सहायता अनुदान योजना को लागू करने के लिए जारी एक कार्यकारी निर्देश है। यह उत्तर प्रदेश जूनियर हाई स्कूल (शिक्षकों एवं अन्य...

'मंजूरी देने वाली अथॉरिटी की जगह नहीं ले सकते': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेलवे कंक्रीट स्लीपर प्लांट की मंजूरी के लिए दायर याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते M/s कलकत्ता स्प्रिंग्स लिमिटेड की उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने प्रस्तावित रेलवे कंक्रीट स्लीपर प्लांट (CSP) के लिए मंजूरी मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि वह मंजूरी देने का निर्देश नहीं दे सकता, क्योंकि कानूनी प्रक्रिया के तहत सक्षम अथॉरिटी द्वारा तकनीकी मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि रेलवे की मंजूरी प्रक्रिया में कई चरणों में तकनीकी जांच शामिल होती है और कोर्ट के पास मंजूरी देने वाली...

वकीलों के हंगामे के दौरान कथित तौर पर कोई कार्रवाई न करने पर हाईकोर्ट का लखनऊ पुलिस से सवाल: पुलिस 'मूक दर्शक' क्यों बनी रही?
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने बुधवार को लखनऊ की एक घटना से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई। इस घटना में वकील के भेष में आए लोगों पर पुलिस की मौजूदगी में जबरन घुसने, तोड़-फोड़ और गुंडागर्दी करने का आरोप है।मौके पर मौजूद लखनऊ पुलिसकर्मियों की कथित निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने पूछा:"जब ऐसी घटना हो रही थी तो पुलिस मूक दर्शक क्यों बनी रही? अतिरिक्त बल क्यों नहीं बुलाया गया और उन लोगों को...

हाईकोर्ट ने लखनऊ ज़िला कोर्ट में 3 वकीलों पर कथित हमले को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए PIL दर्ज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के तीन वकीलों (जिनमें दो महिला वकील शामिल हैं) और उनके क्लाइंट पर लखनऊ ज़िला अदालत परिसर के अंदर (मंगलवार को) हुए कथित हमले के मामले को एक अलग स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका (PIL) में बदल दिया।कोर्ट ने माना कि यह मुद्दा अब किसी लंबित आपराधिक रिट याचिका में केवल एक अंतरिम आवेदन (IA) बनकर नहीं रहना चाहिए।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने लखनऊ के ज़िला जज की रिपोर्ट, लखनऊ के पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट, आवेदन में जिन वकीलों पर आरोप लगाए गए, उनके...

दहेज मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार बेटे की बरामदगी की याचिका खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां को नहीं दी राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस मां की हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी, जिसने दावा किया था कि उसका 35 वर्षीय बेटा अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष द्वारा अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि बेटा दहेज उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार है, इसलिए हैबियस कॉर्पस याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।जस्टिस संदीप जैन की पीठ ने कहा कि दहेज उत्पीड़न मामले की जांच पूरी हो चुकी है और मां तथा बेटे दोनों के खिलाफ आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में यह...

फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर मिली आरक्षित नौकरी शुरू से ही अवैध, बर्खास्तगी से पहले विभागीय जांच जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी और जाली जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षित श्रेणी की सरकारी नौकरी हासिल की है, तो उसकी नियुक्ति शुरू से ही (Void Ab Initio) अवैध मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में कर्मचारी को सेवा से हटाने से पहले विभागीय अनुशासनात्मक जांच (Departmental Inquiry) या आरोपपत्र (Charge-sheet) जारी करना आवश्यक नहीं है। केवल कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) देना पर्याप्त होगा।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने कहा कि...

मृतक मां की जगह मिली अनुकंपा नियुक्ति 12 साल बाद नहीं छीनी जा सकती, जब विभाग को पिता की सरकारी नौकरी की जानकारी थी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) देते समय विभाग को आवेदक के पिता की सरकारी नौकरी की जानकारी थी और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद नियुक्ति दी गई थी, तो लगभग 12 वर्ष बाद यह कहते हुए सेवा समाप्त नहीं की जा सकती कि आवेदक ने तथ्य छिपाए थे।जस्टिस प्रकाश पाड़िया की पीठ ने कहा कि बिना विभागीय जांच, आरोपपत्र (Charge-sheet) और साक्ष्यों की जांच के कर्मचारी को सेवा से हटाना पूरी तरह अवैध है।क्या था मामला?याचिकाकर्ता की मां आजमगढ़ के कंजय...

राहुल गांधी के खिलाफ 'आय से अधिक संपत्ति' मामले में ED कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) असहाय नहीं है और अगर विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ 'आय से अधिक संपत्ति' की शिकायत की जांच में कोई "गलत काम या गैर-कानूनी हरकत" सामने आती है, तो वह कानून के अनुसार सख्ती से कार्रवाई कर सकता है।साथ ही यह देखते हुए कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल हलफनामे में स्पष्टता की कमी थी, कोर्ट ने एजेंसी को इस मामले में नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।CBI, ED और याचिकाकर्ता (जो खुद पेश हुए थे) द्वारा दाखिल हलफनामों को देखने...

हाईकोर्ट ने लखनऊ कोर्ट में महिला वकीलों पर हमले को लेकर शाम 7 बजे अर्जेंट सुनवाई की; सुरक्षा के आदेश दिए
लखनऊ ज़िला कोर्ट में दिल्ली के 3 वकीलों (जिनमें 2 महिला वकील शामिल थीं) के साथ मारपीट और उन्हें कोर्ट में पेश होने से रोकने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार शाम 7 बजे एक स्पेशल बेंच बुलाई।यह घटनाक्रम तब हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट की एक वकील ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की कोर्ट में आरोप लगाया कि लखनऊ ज़िला कोर्ट में ज़मीन हड़पने के मामले के सिलसिले में बार एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने उनके और उनके क्लाइंट के साथ मारपीट की।चीफ जस्टिस के आदेश पर दिल्ली के वकील अभिप्सा...

महिला वकील का पीछा करने के आरोपी वकील की अंतरिम जमानत रद्द: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार काउंसिल से आचरण की जांच के दिए निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला वकील का कथित रूप से पीछा करने और उत्पीड़न के आरोपी एक वकील की अंतरिम जमानत रद्द करते हुए उसे तत्काल न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।अदालत ने उसके आचरण को अदालत की अवमानना के समान और पूरी तरह गैर-पेशेवर बताते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भी उसके आचरण की जांच करने और यह तय करने का निर्देश दिया कि वह वकालत जारी रखने के योग्य है या नहीं।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने यह आदेश सुनाया।मामले में हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली महिला वकील ने FIR दर्ज कराई।...

किरायेदार की मृत्यु के बाद सभी वारिसों को पक्षकार बनाना जरूरी नहीं, संयुक्त किरायेदार पूरे किरायेदारी अधिकारों का प्रतिनिधित्व कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी किरायेदार की मृत्यु के बाद बेदखली के मुकदमे में उसके सभी कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाना अनिवार्य नहीं है। यदि संयुक्त किरायेदारों में से कोई एक किरायेदारी का प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व कर रहा है या कब्जे में है, तो वही पूरे किरायेदारी अधिकारों का प्रतिनिधित्व करेगा और उसके विरुद्ध पारित आदेश अन्य संयुक्त किरायेदारों पर भी बाध्यकारी होगा।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि किरायेदार की मृत्यु के बाद किरायेदारी उसके...

'बुलडोजर कार्रवाई कानून नहीं, प्रतिशोध का हथियार बन गई है': इलाहाबाद हाईकोर्ट
'बुलडोजर न्याय' पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन की सख्त टिप्पणी, बोले- आरोपियों के घर गिराकर समाज की 'खून की प्यास' शांत कर रही है सरकारइलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने उत्तर प्रदेश सरकार की हालिया 'बुलडोजर कार्रवाई' पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य आरोपियों के घर इसलिए ढहा रहा है ताकि "बुलडोजर न्याय की आदत डाल दिए गए समाज की कथित खून की प्यास (Bloodlust) शांत की जा सके।"उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य यह मानकर चल रहा है कि समाज दूसरों के दुर्भाग्य में सुख...

'बुलडोजर न्याय' पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में मतभेद: FIR के बाद 2 साल तक ध्वस्तीकरण पर रोक को लेकर बंटी राय
राज्य भर में घर गिराने की कार्रवाई से जुड़े अहम मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक डिवीज़न बेंच ने आज एक बंटा हुआ फ़ैसला सुनाया। यह फ़ैसला इस बात पर था कि क्या राज्य को FIR दर्ज होने की तारीख से दो साल तक आरोपी का घर गिराने की कार्रवाई करने से रोका जा सकता है।जहाँ जस्टिस अतुल श्रीधरन का मानना था कि 2 साल की रोक होनी चाहिए ताकि अपराध के तुरंत बाद "माना जाने वाला जन-आक्रोश" शांत हो सके, वहीं जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कानूनी कार्रवाई पर 2 साल की पूरी रोक लगाने का कड़ा विरोध किया।हालांकि, दोनों जज इस...

पुलिस की लापरवाही से ज़मानत की सुनवाई में देरी, एक व्यक्ति को 15 दिन ज़्यादा जेल में रहना पड़ा: हाईकोर्ट ने यूपी सरकार पर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹1,00,000 का जुर्माना लगाया। यह जुर्माना कुछ पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के कारण लगाया गया, जिससे ज़मानत अर्ज़ी पर फ़ैसला होने में देरी हुई और एक व्यक्ति को 15 दिन ज़्यादा जेल में रहना पड़ा।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने आदेश दिया कि यह जुर्माना राशि ज़मानत मांगने वाले व्यक्ति को दी जाए। हालाँकि, राज्य सरकार को यह छूट दी गई कि वह जाँच के बाद दोषी अधिकारियों से यह राशि वसूल सकती है।कोर्ट ने यह आदेश अमित नाम के व्यक्ति को ज़मानत...

यूपी में बढ़ते बंदर आतंक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, 13 सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते बंदर आतंक (Monkey Menace) से निपटने के लिए गठित 13 सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी को तत्काल प्रभाव से काम करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि समिति नियमित बैठकें करे और सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे।चीफ़ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बंदरों के बढ़ते आतंक को नियंत्रित करने और मानव-बंदर संघर्ष कम करने की मांग की गई है।राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 15 जुलाई 2026 को समिति का गठन किया जा...

FSL रिपोर्ट में केवल निष्कर्ष नहीं, वैज्ञानिक आधार और कारण भी बताना अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के दो आरोपियों को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट में केवल निष्कर्ष लिख देना पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन-कौन से वैज्ञानिक परीक्षण किए गए किन वैज्ञानिक मानकों को अपनाया गया और किन आधारों पर विशेषज्ञ अपने निष्कर्ष पर पहुंचे। ऐसी जानकारी के बिना केवल निष्कर्ष दर्ज करने वाली एफएसएल रिपोर्ट साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं की जा सकती।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने ये टिप्पणियां वर्ष 2013 के एक...

अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल के आरोपी की मानसिक जांच के आदेश, मैसेज देखकर लगा स्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अश्लील तस्वीरों के जरिए एक युवती को कथित रूप से ब्लैकमेल करने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसकी मानसिक जांच कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आरोपी द्वारा भेजे गए आपत्तिजनक मैसेज और सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया वह स्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति प्रतीत नहीं होता।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कौशांबी को आरोपी की मानसिक जांच कराकर उसकी रिपोर्ट संबंधित जिला अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश...

खनन पट्टा समाप्त करने में राज्य की देरी का बोझ पट्टाधारक पर नहीं डाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि रॉयल्टी का भुगतान न करने के कारण राज्य सरकार के पास खनन पट्टा समाप्त करने का आधार मौजूद है, तो उत्तर प्रदेश उपखनिज (रियायत) नियमावली, 1963 के नियम 58 के तहत कार्रवाई करने में राज्य की बिना कारण देरी मनमानी मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में केवल राज्य की देरी के कारण बाद में देय हुई किस्तों का भुगतान करने के लिए पट्टाधारक को बाध्य नहीं किया जा सकता।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी के पास...

फैसले में धारा 34 का उल्लेख छूटना घातक नहीं, यदि साझा मंशा साबित हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि अभियोजन पक्ष आरोपियों की साझा मंशा साबित करने में सफल रहा है, तो निर्णय के अंतिम भाग में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 34 का उल्लेख छूट जाना मामले के लिए घातक नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 34 कोई स्वतंत्र अपराध नहीं है, बल्कि यह साझा मंशा के आधार पर सामूहिक दायित्व तय करने का एक विधिक सिद्धांत है।यह टिप्पणी जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस अजय कुमार-द्वितीय की खंडपीठ ने वर्ष 2008 के हत्या के एक मामले में दोषसिद्ध चार...
