सुप्रीम कोर्ट

भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले आर्थिक अपराधों को समझौते के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले आर्थिक अपराधों को समझौते के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

यह देखते हुए कि आर्थिक अपराध अन्य अपराधों से अलग हैं। इनके व्यापक प्रभाव हैं, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी और बैंक के बीच हुए समझौते के आधार पर भ्रष्टाचार का मामला खारिज करने से इनकार किया।यह देखते हुए कि बैंक को लगभग 6.13 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, कोर्ट ने फैसला सुनाया कि डीआरटी कार्यवाही में पक्षों द्वारा दर्ज किए गए समझौते की शर्तें व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध को मिटा नहीं सकतीं।न्यायालय ने कहा,"इस मामले में यह रिकॉर्ड में है कि पक्षों द्वारा डीआरटी के समक्ष सहमति की शर्तें प्रस्तुत की गई थीं।...

किसान नेता दल्लेवाल को ट्रांसफर करने का विरोध करने के लिए किसानों के एकत्र होने पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर अनुपालन रिपोर्ट मांगी
किसान नेता दल्लेवाल को ट्रांसफर करने का विरोध करने के लिए किसानों के एकत्र होने पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर अनुपालन रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल के अस्पताल में भर्ती होने के संबंध में पंजाब राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक द्वारा दायर अनुपालन रिपोर्ट पर "असंतोष" दर्ज किया। हलफनामे में कहा गया कि अगर दल्लेवाल को हटाने की प्रक्रिया शांतिपूर्ण नहीं होती है, क्योंकि किसान उनके स्थानांतरण का विरोध कर रहे हैं तो जान-माल के नुकसान के मामले में "सह-क्षति" होगी।दल्लेवाल 26 नवंबर से खनौरी सीमा पर आमरण अनशन पर हैं, जिसमें केंद्र सरकार से फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी सहित...

सुप्रीम कोर्ट ने किसान नेता दल्लेवाल के अस्पताल में भर्ती होने के मामले में अनुपालन रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने किसान नेता दल्लेवाल के अस्पताल में भर्ती होने के मामले में अनुपालन रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनी रहे, जबकि किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल, जो खनौरी सीमा पर 20 दिनों से अधिक समय से आमरण अनशन पर हैं, को तत्काल और पर्याप्त मेडिकल सुविधा मिले।कोर्ट ने इस संबंध में कल यानी शनिवार को सुबह 11 बजे अनुपालन रिपोर्ट मांगी।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस सुधांशु धूलिया की अवकाश पीठ ने दल्लेवाल को तत्काल मेडिकल सहायता प्रदान करने के कोर्ट के आदेश का पालन न करने के लिए...

एकपक्षीय डिक्री को निरस्त करने के आवेदन के साथ विलम्ब क्षमा के लिए अलग से आवेदन दायर करना आवश्यक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
एकपक्षीय डिक्री को निरस्त करने के आवेदन के साथ विलम्ब क्षमा के लिए अलग से आवेदन दायर करना आवश्यक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि यदि आवेदन में विलम्ब के बारे में पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया गया तो सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश IX नियम 13 के तहत एकपक्षीय डिक्री को निरस्त करने के आवेदन के साथ विलम्ब क्षमा के लिए अलग से आवेदन दायर करना आवश्यक नहीं है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने प्रथम अपीलीय न्यायालय के उस निर्णय बरकरार रखा था, जिसमें अपीलकर्ता-प्रतिवादी द्वारा उसके विरुद्ध पारित एकपक्षीय...

पहले से मौजूद अधिकार वाली संपत्ति को हासिल करने के लिए समझौता डिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन या स्टाम्प ड्यूटी की आवश्यकता नहीं : सुप्रीम कोर्ट
पहले से मौजूद अधिकार वाली संपत्ति को हासिल करने के लिए समझौता डिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन या स्टाम्प ड्यूटी की आवश्यकता नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अगर किसी व्यक्ति के पास पहले से ही किसी संपत्ति का अधिकार है। वह समझौता डिक्री के माध्यम से इसे हासिल करता है तो उसे रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के तहत इसे रजिस्टर्ड करने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की डिक्री पर कोई स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी, क्योंकि यह कोई नया अधिकार नहीं बनाती है। इसलिए भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 3 के तहत 'हस्तांतरण' के रूप में योग्य नहीं है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ एमपी हाई कोर्ट...

सरकारी संस्थानों को अस्थायी रोजगार अनुबंधों का दुरुपयोग करके गिग इकॉनमी के रुझानों को नहीं अपनाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सरकारी संस्थानों को अस्थायी रोजगार अनुबंधों का दुरुपयोग करके गिग इकॉनमी के रुझानों को नहीं अपनाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

निजी क्षेत्र में गिग इकॉनमी के बढ़ने से अनिश्चित रोजगार व्यवस्थाओं में वृद्धि हुई, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसले में कहा कि सरकारी विभागों को अस्थायी कर्मचारियों को काम पर रखने की प्रथा का दुरुपयोग न करने की सलाह दी।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने सरकारी विभागों से गिग इकॉनमी में पाई जाने वाली हानिकारक प्रथाओं को न अपनाने की अपील की। ​खंड​पीठ ने ये टिप्पणियां केंद्रीय जल आयोग के कुछ अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की अनुमति देते हुए कीं, जिन्होंने लगभग दो दशकों...

S.138 NI Act | चेक पर हस्ताक्षर करने वाला निदेशक अनादर के लिए उत्तरदायी नहीं, जब कंपनी को आरोपी के रूप में नहीं जोड़ा गया: सुप्रीम कोर्ट
S.138 NI Act | चेक पर हस्ताक्षर करने वाला निदेशक अनादर के लिए उत्तरदायी नहीं, जब कंपनी को आरोपी के रूप में नहीं जोड़ा गया: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता को कंपनी के खाते पर निकाले गए चेक के अनादर के लिए परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि कंपनी को मुख्य आरोपी के रूप में आरोपित न किया जाए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने चेक के अनादर के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति को इस आधार पर बरी कर दिया कि चेक कंपनी की ओर से जारी किया गया, जिसे आरोपी के रूप में आरोपित नहीं किया गया। न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि...

कब्जे से अतिरिक्त राहत के साथ स्वामित्व की घोषणा के लिए वाद में 12 वर्ष की सीमा अवधि लागू होती है; 3 वर्ष नहीं: सुप्रीम कोर्ट
कब्जे से अतिरिक्त राहत के साथ स्वामित्व की घोषणा के लिए वाद में 12 वर्ष की सीमा अवधि लागू होती है; 3 वर्ष नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जबकि किसी वाद में सीमा अवधि आम तौर पर मुख्य राहत के बाद आती है, यह तब लागू नहीं होती जब मुख्य राहत स्वामित्व की घोषणा होती है, क्योंकि ऐसी घोषणाओं के लिए कोई सीमा नहीं होती है। इसके बजाय सीमा आगे मांगी गई राहत पर लागू अनुच्छेद द्वारा शासित होती है।इसलिए न्यायालय ने कहा कि जब स्वामित्व की घोषणा के लिए राहत के साथ-साथ कब्जे के लिए भी राहत का दावा किया जाता है तो सीमा अवधि टाइटल के आधार पर अचल संपत्ति के कब्जे को नियंत्रित करने वाले अनुच्छेद द्वारा शासित होगी।न्यायालय ने...

आपसी विश्वास और साथ पर आधारित विवाह; जब ये तत्व गायब होते हैं तो वैवाहिक बंधन मात्र कानूनी औपचारिकता बन जाता है: सुप्रीम कोर्ट
आपसी विश्वास और साथ पर आधारित विवाह; जब ये तत्व गायब होते हैं तो वैवाहिक बंधन मात्र कानूनी औपचारिकता बन जाता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक अलग रहना और सुलह न कर पाना वैवाहिक विवादों को सुलझाने में एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है, जब विवाह आपसी विश्वास और साथ के बिना मात्र कानूनी औपचारिकता बन जाता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने कहा,"विवाह आपसी विश्वास, साथ और साझा अनुभवों पर आधारित एक रिश्ता है। जब ये आवश्यक तत्व लंबे समय तक गायब रहते हैं तो वैवाहिक बंधन मात्र कानूनी औपचारिकता बन जाता है, जिसमें कोई सार नहीं रह जाता। इस न्यायालय ने लगातार माना है कि लंबे समय तक अलग...

S.20 Specific Relief Act | प्रतिवादी केवल तभी कठिनाई की दलील दे सकता है, जब अनुबंध निर्माण के समय यह अप्रत्याशित था: सुप्रीम कोर्ट
S.20 Specific Relief Act | प्रतिवादी केवल तभी कठिनाई की दलील दे सकता है, जब अनुबंध निर्माण के समय यह अप्रत्याशित था: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी अनुबंध के निष्पादन में 'कठिनाई' का आधार तभी उठा सकता है, जब यह ठोस सबूतों से स्थापित हो जाए कि वह अनुबंध में प्रवेश करते समय कठिनाई का पूर्वानुमान लगाने में असमर्थ थी।कोर्ट ने आगे कहा कि विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 (SRA) की धारा 20 लागू नहीं होगी, यदि प्रतिवादी/विक्रेता यह दिखाने में विफल रहता है कि अनुबंध में प्रवेश करते समय कठिनाई अप्रत्याशित थी।एसआरए में 2018 के संशोधन से पहले न्यायालयों के पास अनुबंध के विशिष्ट निष्पादन को मंजूरी देने या न देने का विवेकाधिकार...

सुप्रीम कोर्ट ने सेंथिल बालाजी की जमानत वापस लेने की याचिका पर तमिलनाडु को नोटिस जारी किया, उनके खिलाफ मामलों और गवाहों का विवरण मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने सेंथिल बालाजी की जमानत वापस लेने की याचिका पर तमिलनाडु को नोटिस जारी किया, उनके खिलाफ मामलों और गवाहों का विवरण मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें नौकरी के बदले नकदी घोटाले से जुड़े धनशोधन के एक मामले में मंत्री सेंथिल बालाजी को जमानत देने के अपने फैसले को वापस लेने का अनुरोध किया गया है।जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने तमिलनाडु सरकार को बालाजी के खिलाफ लंबित मामलों और उसके खिलाफ गवाहों की संख्या, लोक सेवकों और अन्य पीड़ितों के बीच अंतर करने का विवरण देने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने कहा, ''हम प्रतिवादी को निर्देश देते हैं कि वह...

सुप्रीम कोर्ट ने पति को तलाक पर सहमति देने के लिए सास-ससुर के खिलाफ पत्नी द्वारा धारा 498A के तरह दायर मामला खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने पति को तलाक पर सहमति देने के लिए सास-ससुर के खिलाफ पत्नी द्वारा धारा 498A के तरह दायर मामला खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने पति के माता-पिता के खिलाफ IPC की धारा 498A के तहत घरेलू क्रूरता का मामला रद्द कर दिया, जो बहू द्वारा अपने बेटे को तलाक के लिए सहमति देने के लिए मजबूर करने के लिए एक गुप्त मकसद के साथ दर्ज किया गया था।कोर्ट ने कहा "ये तथ्य हमें इस निष्कर्ष पर ले जाते हैं कि कार्यवाही अपीलकर्ता के बेटे पर शिकायतकर्ता की शर्तों के अनुसार तलाक के लिए सहमति देने के लिए दबाव डालने के एक गुप्त उद्देश्य के साथ शुरू की गई थी और कार्यवाही को शिकायतकर्ता द्वारा एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया...

रजिस्ट्री प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार नहीं कर सकती, जब सूचीबद्ध करने के लिए न्यायिक आदेश हो: सुप्रीम कोर्ट
रजिस्ट्री प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार नहीं कर सकती, जब सूचीबद्ध करने के लिए न्यायिक आदेश हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (20 दिसंबर) को कहा कि रजिस्ट्री अदालत के विशिष्ट आदेश की अवहेलना नहीं कर सकती है और प्रक्रियात्मक गैर-अनुपालन के आधार पर मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर सकती है।कोर्ट ने कहा "जब इस पीठ को विशेष रूप से सौंपे गए मामलों को सूचीबद्ध करने का निर्देश देने वाला न्यायालय का आदेश है, तो रजिस्ट्री आदेश की अवहेलना नहीं कर सकती है और इस आधार पर मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार नहीं कर सकती है कि प्रक्रियात्मक पहलुओं का अनुपालन नहीं किया गया था” जस्टिस अभय ओक और जस्टिस ऑगस्टीन...

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब नगर निगम के आगामी चुनावों पर रोक लगाने से किया इनकार, विपक्षी उम्मीदवारों की याचिका पर SEC को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब नगर निगम के आगामी चुनावों पर रोक लगाने से किया इनकार, विपक्षी उम्मीदवारों की याचिका पर SEC को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के संभावित उम्मीदवारों द्वारा दायर एक हस्तक्षेप आवेदन में पंजाब राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्हें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी द्वारा पटियाला में नगर निगम चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने से व्यवस्थित रूप से रोका गया था। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 13 दिसंबर के आदेश को चुनौती देने वाली एक विशेष अनुमति याचिका में।आईए के माध्यम से, उम्मीदवारों ने 21 दिसंबर को होने...

VRS आवेदन लंबित होने का हवाला देकर कर्मचारी काम से अनुपस्थित नहीं रह सकता : सुप्रीम कोर्ट
VRS आवेदन लंबित होने का हवाला देकर कर्मचारी काम से अनुपस्थित नहीं रह सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई कर्मचारी केवल इसलिए सेवा से अनुपस्थित नहीं रह सकता, क्योंकि उसका स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सेवा (VRS) आवेदन लंबित है।जस्टिस एएस ओक और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें लंबित VRS आवेदन की आड़ में सेवा से अनुपस्थित रहने के कारण सेवा से बर्खास्त किए गए प्रतिवादी कर्मचारियों को बहाल करने का निर्देश दिया गया।उत्तर प्रदेश राज्य में डॉक्टर के रूप में सेवारत प्रतिवादी कर्मचारियों ने 2006 और...

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को 2017 में ECI द्वारा उनकी 3 साल की अयोग्यता को चुनौती देने वाली याचिका वापस लेने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को 2017 में ECI द्वारा उनकी 3 साल की अयोग्यता को चुनौती देने वाली याचिका वापस लेने की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को 2017 में भारत के चुनाव आयोग द्वारा उनकी 3 साल की अयोग्यता को चुनौती देने वाली याचिका वापस लेने की अनुमति दी।जस्टिस सूर्यकांत और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कोड़ा के वकील की दलील सुनने के बाद यह आदेश पारित किया, जिन्होंने कहा कि 3 साल की अवधि बीत जाने के कारण मामला निरर्थक हो गया।संक्षेप में कहें तो निर्दलय विधायक कोड़ा ने 2006 से 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। 2017 में उन्हें 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान सही चुनाव खर्च...

PMLA के तहत समन केवल इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि आरोपी को पूर्वनिर्धारित अपराध में बरी कर दिया गया था: सुप्रीम कोर्ट
PMLA के तहत समन केवल इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि आरोपी को पूर्वनिर्धारित अपराध में बरी कर दिया गया था: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 दिसंबर) को गौहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराध की जांच के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत समन को इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि प्रतिवादी को अनुसूचित अपराध (इस मामले में संपत्ति से संबंधित अपराध) में बरी कर दिया गया था।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ 3 जनवरी के गौहाटी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके तहत धन शोधन के लिए पीएमएलए की धारा 50 (2)...

जनता के साथ धोखाधड़ी, नोएडा का समझौता मनमाना: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट फ्लाईवे के यात्रियों पर टोल लगाने की याचिका खारिज की
जनता के साथ धोखाधड़ी, नोएडा का समझौता मनमाना: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट फ्लाईवे के यात्रियों पर टोल लगाने की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (20 दिसंबर) को नोएडा टोल ब्रिज कंपनी की याचिका खारिज की, जिसमें उसने दिल्ली नोएडा डायरेक्ट (DND) फ्लाईवे के यात्रियों पर टोल लगाने की मांग की थी।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2016 के फैसले के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज की, जिसमें रियायतकर्ता समझौता रद्द कर दिया गया था। हाईकोर्ट का यह फैसला फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया।हाईकोर्ट के निष्कर्षों से सहमत होते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला...