सुप्रीम कोर्ट

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों की बिजली और पानी की सप्लाई काटें: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (18 अगस्त) को देश भर के ज़िला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे छह हफ़्ते के अंदर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों (BWGs) की पहचान करें। साथ ही ऐसी संस्थाओं को चेतावनी दी कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 का पालन न करने पर सख़्त कार्रवाई हो सकती है, जिसमें बिजली या पानी की सप्लाई को कुछ समय के लिए काटना भी शामिल है।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 को लागू करने से जुड़े एक मामले की...

PC Act | रिश्वत की मांग का सबूत न होने पर सिर्फ़ रिश्वत की रकम बरामद होना काफ़ी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19.08.2026) को एक ग्राम पंचायत के पूर्व तलाटी-सह-मंत्री और चपरासी को बरी किया, जिन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PCA) के तहत दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की शुरुआती मांग को बिना किसी संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सह-आरोपी से सिर्फ़ करेंसी नोट बरामद होने के आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता।जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ताओं...

फांसी की तुलना में जानलेवा इंजेक्शन से मौत की सज़ा देना ज़्यादा मानवीय, इसका कोई सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि उसके सामने ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि फांसी की तुलना में जानलेवा इंजेक्शन (मौत के लिए नसों के ज़रिए दवा देना) से मौत की सज़ा देना ज़्यादा बेहतर या मानवीय तरीका है।कोर्ट ने कहा,"इसलिए उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि फांसी की तुलना में जानलेवा इंजेक्शन से मौत की सज़ा देने का कोई अतिरिक्त फ़ायदा है। इसलिए याचिकाकर्ता की यह दलील कि जानलेवा इंजेक्शन मौत की सज़ा देने का बेहतर और ज़्यादा मानवीय तरीका है, बिल्कुल भी ठोस नहीं...

RPF Rules | आपराधिक मामला छिपाने वाले कर्मचारी को कभी भी नौकरी से निकाला जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (RPSF) के उन कॉन्स्टेबलों को नौकरी से हटाने के फैसले को सही ठहराया, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया के दौरान अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी थी।कोर्ट ने फिर से कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में ज़रूरी जानकारी जानबूझकर छिपाना कर्मचारी के चरित्र पर असर डालता है और नौकरी से हटाने का सही कारण बनता है।जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि RPF नियमों के अनुसार, आपराधिक मामलों...

सुप्रीम कोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस के प्रमोटरों पर कथित वित्तीय गड़बड़ियों की CBI जांच का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (अब सम्मान कैपिटल लिमिटेड) के प्रमोटरों पर लगे वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने CBI से जांच करने को कहा, भले ही दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने ED की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में शामिल 6 में से 5 आरोपों पर अपनी रिपोर्ट दी थी।यह आदेश एक PIL पर दिया गया, जिसमें इंडियाबुल्स के प्रमोटरों...

प्रीमियम का एडवांस भुगतान न होने पर तय बीमा राशि से ज़्यादा जोखिम के लिए बीमा कंपनी ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (18.08.2026) को कहा कि बीमा कंपनी उस नुकसान के लिए ज़िम्मेदार नहीं हो सकती, जो तब हुआ जब बीमित व्यक्ति का टर्नओवर 'मरीन कार्गो एनुअल टर्नओवर पॉलिसी' के तहत तय बीमा राशि (सम एश्योर्ड) से ज़्यादा हो गया, और बढ़े हुए टर्नओवर के लिए प्रीमियम का एडवांस भुगतान नहीं किया गया। यह फ़ैसला इंश्योरेंस एक्ट, 1938 की धारा 64VB की पाबंदी को ध्यान में रखते हुए लिया गया।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने 'न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी' की अपील को मंज़ूरी दे दी।...

हाथी को नौकर नहीं, देवता की तरह मानें: सुप्रीम कोर्ट ने बंधक हाथियों की भलाई के लिए निर्देश जारी किए

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बंधक हाथियों की भलाई और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संबंधित नियमों का पालन किए बिना और ट्रांसफर करने वाले व लेने वाले तथा ट्रांसफर के मकसद के बारे में स्पष्ट कागजी कार्रवाई के बिना हाथियों का मालिकाना हक या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने MoEFCC/कैप्टिव एलिफेंट हेल्थकेयर एंड वेलफेयर कमेटी (जिसे MoEFCC ने बनाया है) को यह बताने का...

पेपर लीक आरोपियों की संपत्ति की जांच और धनशोधन कानून लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक के मामलों में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम और बेनामी संपत्ति कानून के प्रावधान लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर मंगलवार को नोटिस जारी किया। याचिका में पेपर लीक में शामिल आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की पूरी संपत्ति का आकलन करने और अवैध संपत्ति जब्त करने की मांग की गई।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने वकील और याचिकाकर्ता स्वयं अश्विनी कुमार उपाध्याय की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी किया।यह...

प्रदर्शन में चेहरे की पहचान तकनीक केवल आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान करती है: दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस तकनीक के जरिए केवल ऐसे लोगों की तस्वीरें पहचानी गईं, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है या जो पहले से पुलिस के आपराधिक आंकड़ों में दर्ज हैं। पुलिस ने इसे परिस्थिति के अनुरूप और संतुलित पुलिसिंग उपाय बताया।सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने कहा कि चेहरे की पहचान करने वाला सॉफ्टवेयर प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हर व्यक्ति की तस्वीर या...

वैधानिक वेतनमान लागू कराने के लिए प्राइवेट स्कूल के खिलाफ शिक्षक की रिट याचिका सुनवाई योग्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल के शिक्षक वैधानिक वेतनमान लागू कराने के लिए उसके खिलाफ रिट याचिका दायर कर सकते हैं।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी कानून के तहत शिक्षकों के वेतन और सेवा शर्तों को लेकर स्कूल पर वैधानिक दायित्व तय किया गया हो तो उस दायित्व के पालन के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका सुनवाई योग्य होगी।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने कहा कि कानून के तहत मान्यता प्राप्त संस्थान द्वारा शिक्षा प्रदान...

ECI हलफनामे से चुनाव में काले धन के लाखों मामले, किंतु सज़ा बहुत कम में हुई: सुप्रीम कोर्ट ने केस वापस लेने के लिए हाईकोर्ट की मंज़ूरी ज़रूरी की

चुनावों के दौरान काले धन के इस्तेमाल को रोकने के लिए निर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और 2019 से 2025 के बीच हुए राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान ज़ब्ती और दर्ज FIR के बारे में दिए गए आंकड़ों पर ध्यान दिया।यह डेटा जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने ECI द्वारा दायर हलफनामों में पेश किया गया। यह सुनवाई 2015 के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अपील पर हो रही थी, जिसमें प्रतिवादी के ख़िलाफ़ दर्ज...

NDPS Act| सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग मामलों में विदेशी नागरिकों की ज़मानत के लिए फ़र्ज़ी ज़मानतदारों पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए

सुप्रीम कोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत कमर्शियल मात्रा में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में आरोपी विदेशी नागरिकों को ज़मानत देने के संबंध में निर्देश जारी किए।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने नाइजीरियाई नागरिक चिडिबेरे किंग्सले नवाचारा की ज़मानत रद्द करते हुए ये निर्देश जारी किए। नवाचारा पर लगभग 5 किलोग्राम हेरोइन से जुड़े एक मामले में आरोप था।यह मामला तब और महत्वपूर्ण हो गया, जब कोर्ट को पता चला कि नवाचारा के लिए दी गई...

चुनावों में काला धन लोकतंत्र को भ्रष्ट करता है: सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों के दौरान बिना हिसाब-किताब वाले कैश पर रोकने के लिए जारी किए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17.08.2026) को चुनावों में काले धन के इस्तेमाल को रोकने के लिए निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि वोटरों को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला बिना हिसाब-किताब का कैश स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की नींव पर चोट करता है और "लोकतंत्र की मूल भावना" से समझौता करता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के 2015 के एक आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। हाईकोर्ट ने उस आदेश में प्रतिवादी के खिलाफ दर्ज...

तेज़ सुनवाई पीड़ित का भी अधिकार, आरोपी गैंगस्टर्स एक्ट के लंबित मामले का इस्तेमाल दूसरे मुकदमों को रोकने के लिए नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 अगस्त) को कहा कि तेज़ी से सुनवाई का अधिकार सिर्फ़ आरोपी का ही नहीं, बल्कि पीड़ित का भी एक अहम अधिकार है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें एक आरोपी के ख़िलाफ़ हत्या के मुकदमे की सुनवाई को सिर्फ़ इसलिए रोक दिया गया, क्योंकि उसके ख़िलाफ़ यूपी गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही लंबित है।शिकायतकर्ता की अपील मंज़ूरी करते हुए जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने प्रतिवादी-आरोपी की उस दलील को खारिज किया, जिसमें कहा गया कि उत्तर प्रदेश...

कोई भी राज्य व्यक्तियों या संपत्ति को नुकसान का हवाला देकर हाथी गलियारे को अवरुद्ध नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश हाथी गलियारों में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता है, यहां तक कि व्यक्तियों या संपत्ति को संभावित नुकसान के कथित आधार पर भी।संघ द्वारा एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण का आदेश देते हुए न्यायालय ने एक व्यापक रिपोर्ट मांगी, जिसमें बताया जाएगा कि राज्यों द्वारा इस तरह की बाधा को रोकने और हुल्ला पार्टियों (लोहे की छड़ों/कीलों और जलती हुई मशालों से लैस स्थानीय युवाओं के समूह), हाथियों के खिलाफ आग के गोले, मशालों आदि के उपयोग पर...