सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस जयश्री ठाकुर के पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल में को-ऑप्शन पर आपत्ति खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस जयश्री ठाकुर को पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के सदस्य के रूप में को-ऑप्ट किए जाने के खिलाफ दाखिल आपत्ति खारिज की।आपत्ति इस आधार पर उठाई गई थी कि जस्टिस जयश्री ठाकुर इससे पहले स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में कार्य कर चुकी हैं। इन चुनावों से जुड़े चुनाव संबंधी मामले पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस हेमा कोहली की अध्यक्षता वाले इलेक्शन ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित हैं।यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ (CJI) इंडिया...

Hindu Succession Act | बिना बंटवारे के भी S14(1) के तहत विधवा का सीमित अधिकार पूर्ण अधिकार बन जाता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक हिंदू विधवा, जिसे 'हिंदू महिला संपत्ति अधिकार अधिनियम, 1937' के तहत अपने मृत पति की संपत्ति में अधिकार मिला है, वह 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956' की धारा 14(1) के तहत उस अधिकार की पूर्ण मालिक बन सकती है, भले ही संपत्ति का कोई बंटवारा न हुआ हो।कोर्ट ने कहा कि भले ही संपत्ति का बंटवारा न हुआ हो, लेकिन 1956 से पहले पति की मृत्यु पर विरासत में मिली संपत्ति में विधवा का सीमित अधिकार सिर्फ़ इसलिए खत्म नहीं हो जाता कि उसने औपचारिक बंटवारे की मांग नहीं की या उसे हासिल नहीं...

सरकारी स्कीम के तहत अस्पतालों को रीइम्बर्समेंट मिलने के बावजूद, मरीज़ों से दवाइयों के लिए ज़्यादा कीमत वसूलना टैक्सपेयर्स पर बोझ: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मरीज़ों से दवाइयों के लिए ऐसी कीमत वसूलना जो मैन्युफैक्चरर द्वारा बेची जाने वाली कीमत से कहीं ज़्यादा हो, "साफ़ तौर पर धोखाधड़ी का मामला" है, खासकर तब जब अस्पताल बाद में सरकारी हेल्थ स्कीम से रीइम्बर्समेंट (खर्च की भरपाई) लेते हैं।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की, जिनमें दवाइयों की कीमतों को रेगुलेट करने और मैन्युफैक्चरर द्वारा रिटेलर्स को बेची जाने वाली कीमत और उन पर छपी MRP के बीच बड़े अंतर पर...

धोखाधड़ी के मामले में असली डीड पेश न कर पाना आरोपी को बरी करने का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (22 सितंबर) को कहा कि प्री-ट्रायल स्टेज पर धोखाधड़ी के आरोप को साबित करने के लिए जाली दस्तावेज़ पेश न कर पाना अभियोजन पक्ष (Prosecution) का मामला रद्द करने का कारण नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट जमा करने के बाद भी, ऐसा कोई दस्तावेज़ जो चार्जशीट के साथ जमा नहीं किया गया, उसे बाद में पेश किया जा सकता है।कोर्ट ने कहा,"...धोखाधड़ी का आरोप साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष जिस असली दस्तावेज़ पर निर्भर है, उसका न होना ट्रायल के दौरान विचार करने का विषय होगा और केवल उसके न...

जब टेंडर मंज़ूर करना साफ़ तौर पर NIT की शर्तों के ख़िलाफ़ हो तो कोर्ट दखल दे सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 सितंबर) को कहा कि हालांकि कोर्ट को आम तौर पर टेंडर देने वाली अथॉरिटी की कमर्शियल समझ का सम्मान करना चाहिए, लेकिन यह सम्मान टेंडर की शर्तों की ऐसी व्याख्या तक नहीं बढ़ सकता, जो 'नोटिस इनवाइटिंग टेंडर' (NIT) के ख़िलाफ़ हो या साफ़ तौर पर मनमानी हो।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने एक मामले की सुनवाई की, जिसमें 16 करोड़ रुपये से ज़्यादा के कॉन्ट्रैक्ट के तहत 12 महीनों में मंडी परिसर में आने वाले बड़ी संख्या में वाहनों से यूज़र चार्ज वसूलने का काम...

आग हादसा नहीं लगती, बीमा कंपनी का 2.4 करोड़ का दावा खारिज करना सही: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 2.4 करोड़ रुपये के अग्नि बीमा दावे के मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि बीमा कंपनी ने दावा खारिज करने में उचित कार्रवाई की, क्योंकि बीमित कंपनी ने अपने दावे के समर्थन में गलत घोषणाएं की थीं और पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने बीमा कंपनी की अपील मंजूर करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों से बीमित कंपनी का दावा...

केंद्र सरकार किसी भी अधिकारी को कंपनीज़ एक्ट के तहत धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करने के लिए अधिकृत कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार की वह समीक्षा याचिका खारिज की, जिसमें आर्थिक अपराधों के लिए बनी स्पेशल कोर्ट द्वारा कंपनीज़ एक्ट, 2013 के तहत धोखाधड़ी से जुड़े अपराधों का संज्ञान निजी शिकायत के आधार पर न लेने के फैसले को चुनौती दी गई थी।हालांकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार, सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) के डायरेक्टर के अलावा, कंपनीज़ एक्ट की धारा 212(6) के दूसरे प्रावधान के तहत किसी...

गिरफ्तारी के लिखित आधार नहीं बताए तो पुलिस अधिकारी पर होगी विभागीय जांच: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी ने यदि गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध नहीं कराए हैं तो उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जानी चाहिए।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में और आरोपी की समझ वाली भाषा में देना अनिवार्य है। इसका पालन नहीं होने पर गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी। जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंद्रकुर की खंडपीठ ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार...

एक बार सभी मुद्दों पर ट्रायल शुरू होने के बाद किसी मुद्दे पर शुरुआती सुनवाई नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट ने CPC के ऑर्डर XIV नियम 2(2) की व्याख्या की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब सिविल कोर्ट सभी मुद्दों पर एक साथ सुनवाई शुरू कर देता है तो वह 'कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर, 1908' (CPC) के ऑर्डर XIV नियम 2(2) के तहत किसी मुद्दे पर शुरुआती सुनवाई का निर्देश नहीं दे सकता।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने ट्रायल कोर्ट, पहली अपीलीय अदालत और केरल हाईकोर्ट के आदेशों को रद्द किया। ट्रायल कोर्ट ने शुरुआती मुद्दे पर केस को 'टाइम-बार्ड' (समय सीमा खत्म होने के कारण अमान्य) मानकर खारिज कर दिया था, जबकि वादी (Plaintiff) अपने सबूत पेश कर...

पुलिस का यह कहना कि चार्जशीट दाखिल करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है, इसका मतलब यह नहीं कि डिफ़ॉल्ट ज़मानत दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 सितंबर) को कहा कि जांच एजेंसी का जांच की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन में सिर्फ़ यह कहना कि चार्जशीट दाखिल करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है, इसे जांच पूरी होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता।दूसरे शब्दों में, कोर्ट ने कहा कि जब कोई जांच एजेंसी समय बढ़ाने की मांग करते हुए यह कहती है कि चार्जशीट दाखिल करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है, लेकिन उसे उपलब्ध सामग्री - जिसमें गवाहों के बयान, बैंक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और जांच से जुड़ी अन्य जानकारी शामिल है - का विश्लेषण...

BREAKING | गिरफ्तारी का कारण न बताने पर पहली गिरफ्तारी रद्द होने के बाद दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फ़ैसला सुनाया। इसमें आरोपी की दोबारा गिरफ्तारी की प्रक्रिया साफ़ की गई—खासकर तब, जब संविधान के आर्टिकल 22(1) के तहत गिरफ्तारी का कारण न बताने की वजह से पिछली गिरफ्तारी को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया हो।जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने तय किया कि जिस व्यक्ति को आर्टिकल 22(1) के उल्लंघन के कारण रिहा किया गया था, उसे दोबारा गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को संबंधित ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने अर्ज़ी देनी होगी और मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी लेनी...

दशकों पहले स्पेसिफिक परफॉर्मेंस के आदेश के तहत हुई बिक्री को रिफंड का आदेश देकर रद्द करना गलत: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब बिक्री के समझौते के तहत 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' का आदेश बिक्री विलेख (सेल डीड) के निष्पादन और कब्ज़ा सौंपने के साथ पूरा हो जाता है तो उस पूरे हो चुके लेन-देन को केवल "इक्विटी (न्याय/संतुलन) बनाए रखने" के लिए ज़्यादा पैसे के रिफंड से नहीं बदला जा सकता।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने आगरा के पास लगभग पांच बीघा कृषि भूमि से संबंधित 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' के लिए 1979 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को बहाल करते हुए यह टिप्पणी की।यह विवाद 16 जून,...

कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने के लिए मुख्य नियोक्ता ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब मुख्य नियोक्ता और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के बीच नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध न हो तो कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिए रखे गए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने के लिए मुख्य नियोक्ता को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) को कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिए रखे गए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया था। कोर्ट ने कहा कि कंट्रोलिंग अथॉरिटी यह तय नहीं कर सकती कि...

S. 92 CPC | पब्लिक ट्रस्ट के खिलाफ़ केस करने की इजाज़त वाली अर्ज़ी पेंडिंग होने पर सिविल कोर्ट अंतरिम आदेश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (18 सितंबर) को कहा कि जब तक 'कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर, 1908' (CPC) की धारा 92 के तहत केस करने की इजाज़त मांगने वाली अर्ज़ी पेंडिंग है, तब तक सिविल कोर्ट सुरक्षा या बचाव से जुड़े अंतरिम आदेश नहीं दे सकता।चूंकि CPC की धारा 92 के तहत लोगों के समूह की ओर से केस (रिप्रेजेंटेटिव सूट) करने के लिए कोर्ट से पहले इजाज़त लेना ज़रूरी है, इसलिए जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि धारा 92 CPC के तहत इजाज़त मिलना केस शुरू करने के लिए एक ज़रूरी शर्त है। जब तक ऐसी इजाज़त...

सुप्रीम कोर्ट ने मेथनॉल में एडिटिव्स मिलाने के महाराष्ट्र के नियमों को रद्द किया, ज़हरीली शराब से होने वाली मौतों को रोकने के लिए जारी किए नए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (18 सितंबर) को महाराष्ट्र ज़हर नियम (Maharashtra Poisons Rules), 1972 के नियम 18A और 18B को रद्द कर दिया। इन नियमों के तहत, मेथनॉल को दवा बनाने वाली कंपनियों के अलावा किसी और को बेचने से पहले उसमें कड़वाहट लाने वाला पदार्थ (bitterant) और रंग (colourant) मिलाना ज़रूरी था।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने मेथनॉल-आधारित उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की उन याचिकाओं को मंज़ूरी दी, जिनमें मेथनॉल में एडिटिव्स मिलाने की अनिवार्यता का विरोध किया गया।...

चोट गंभीर होना जरूरी नहीं, हत्या के प्रयास की धारा 307 IPC के लिए इरादा या मौत का ज्ञान जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हत्या के प्रयास के अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307 लागू करने के लिए पीड़ित को लगी चोट का गंभीर या जानलेवा होना जरूरी नहीं है। इसके लिए यह देखना महत्वपूर्ण है कि चोट पहुंचाने वाले कृत्य के पीछे हत्या का इरादा था या आरोपी को इस बात का ज्ञान था कि उसके कृत्य से मौत हो सकती है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक पीड़ित के भाई की याचिका खारिज करते हुए की। याचिकाकर्ता ने मुकदमे की कार्यवाही काफी आगे बढ़ जाने के बाद...

रात 1 बजे वाहन उठाना गुंडागर्दी: लोन रिकवरी के लिए फाइनेंसर बल प्रयोग नहीं कर सकते, सुप्रीम कोर्ट ने ₹10 लाख मुआवजा दिया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाइपोथिकेटेड वाहन की जब्ती का फाइनेंसर का अधिकार बल, धोखे या लोन एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन करके इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लोन की रिकवरी या वाहन की जब्ती केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने वाहन मालिक को ₹10 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया, जिसका ट्रक कथित तौर पर रात करीब 1 बजे स्टीयरिंग लॉक तोड़कर बिना किसी पूर्व नोटिस के उठा लिया...

सभी मेडिकल ग्रेजुएट, चाहे वे भारतीय हों या विदेशी, उन्हें एक जैसा स्टाइपेंड मिलना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से यह पता लगाने को कहा कि क्या राजस्थान, आंध्र प्रदेश, केरल, गुजरात और झारखंड राज्यों में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट को स्टाइपेंड का भुगतान किया गया, या नहीं।कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि वह इस बारे में विस्तृत निर्देश जारी करेगा कि सभी अंडरग्रेजुएट मेडिकल ग्रेजुएट को - चाहे वे भारतीय हों या विदेशी - स्टाइपेंड मिलना चाहिए और यह भुगतान दोनों के लिए समान होना चाहिए। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि वह देखेगा कि क्या स्टाइपेंड का भुगतान न होने के मामलों को...