सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट का रजिस्ट्रार जनरल किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ खुद से अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाया कि किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तब तक शुरू नहीं की जा सकती, जब तक कि उसे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस या चीफ जस्टिस द्वारा गठित जजों की समिति द्वारा अधिकृत न किया गया हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि रजिस्ट्रार जनरल के पास ऐसी कार्रवाई खुद से शुरू करने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने उत्तराखंड की सिविल जज की बहाली को सही ठहराया। इस जज को विभागीय कार्रवाई के बाद सेवा से...
UAPA में भी जमानत नियम, जेल अपवाद: सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बताया सर्वोपरि
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) जैसे कठोर कानूनों में भी जमानत नियम है और जेल अपवाद। अदालत ने स्पष्ट किया कि UAPA की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर लगी कानूनी पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं।जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर के व्यक्ति को नार्को-टेरर मामले में जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही...
सुप्रीम कोर्ट ने ₹2500 की बिलिंग गलती को लेकर अस्पताल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने नारायण हेल्थ, कोलकाता में उसके अस्पताल और सीनियर अधिकारियों के खिलाफ ₹2,500 की बिलिंग में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने माना कि शिकायत में कोई आपराधिक अपराध सामने नहीं आया और यह मूल रूप से सेवा से जुड़ी एक शिकायत थी, जिसका समाधान दीवानी या वैधानिक उपायों के ज़रिए बेहतर ढंग से किया जा सकता था।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने यह फैसला सुनाया। खंडपीठ ने अस्पताल और उसके कर्मचारियों की अपील स्वीकार की, जो कलकत्ता...
Order XV Rule 5 CPC | किराया जमा करने में चूक जानबूझकर थी या नहीं, इसकी जांच किए बिना किरायेदार का बचाव खारिज नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश XV नियम 5 के तहत "सुनवाई की पहली तारीख" तय किए बिना और किरायेदार को उचित नोटिस मिला या नहीं और उसे सुनवाई का मौका दिया गया या नहीं, इन मुद्दों पर विचार किए बिना, शुरू में ही किरायेदार के बचाव को खारिज करना गलत है। ऐसा इसलिए ज़रूरी है ताकि यह जांचा जा सके कि किराये में चूक जानबूझकर की गई थी या अनजाने में।जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने कहा,"आदेश XV नियम 5 CPC के तहत बचाव को खारिज करने की शक्ति, भले ही...
सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन का कोई सबूत न होने पर निवारक हिरासत बेवजह: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में MPDA Act 1981 के तहत जारी निवारक हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि जब किसी व्यक्ति पर सामान्य कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती हो और सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन को दिखाने वाला कोई ठोस सबूत न हो, तो निवारक हिरासत कानून का इस्तेमाल करना बेवजह है।कोर्ट ने कहा,"हमारी राय में हिरासत में लेने वाले अधिकारी की यह संतुष्टि कि अपीलकर्ता की गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हानिकारक थीं, उसका कोई वास्तविक आधार नहीं है। इसके अलावा, जहां किसी व्यक्ति पर देश के...
MPID Act के तहत 'लोन' भी 'डिपॉजिट' माना जा सकता है; कोई प्राइवेट पर्सन भी 'फाइनेंशियल एस्टैब्लिशमेंट' हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट
एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को कहा कि महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ़ इंटरेस्ट ऑफ़ डिपॉजिटर्स एक्ट (MPID Act) के तहत प्राइवेट व्यक्तियों को भी 'फाइनेंशियल एस्टैब्लिशमेंट' की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति किसी देनदार को इस वादे के साथ पैसे देता है कि वह उसे ब्याज के साथ लौटाएगा, तो ऐसे पैसे को कानूनी तौर पर "डिपॉजिट" माना जा सकता है, भले ही दोनों पक्ष उसे "लोन" कहते हों।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट की...
Hindu Succession Act | 2005 का संशोधन बेटियों के पहले से मौजूद विरासत के अधिकारों को सीमित नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम पर एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को कहा कि 2005 का संशोधन, जो बेटियों को जन्म से ही सह-दायिक (coparcenary) अधिकार देता है, उनके मृत पिता की संपत्ति में 'प्रथम श्रेणी के वारिस' (Class I heirs) के तौर पर विरासत पाने के स्वतंत्र अधिकार को न तो छीनता है और न ही सीमित करता है - खासकर तब, जब पिता की मृत्यु बिना वसीयत किए हुई हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल बेटों के बीच किया गया संपत्ति का बंटवारा, पिता के हिस्से की संपत्ति में बेटियों के...
वकीलों को अपने मामले के समर्थन में न होने वाले फैसले भी अदालत के संज्ञान में लाने होंगे: सुप्रीम कोर्ट
पेशेवर नैतिकता और न्यायिक अनुशासन पर महत्वपूर्ण टिप्पणी में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वकीलों का यह कर्तव्य है कि वे अदालत के संज्ञान में न केवल अपने मामले के समर्थन में आने वाले फैसले लाएं, बल्कि उनके खिलाफ जाने वाले फैसले भी लाएं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय व्यवस्था में एकरूपता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बार एसोसिएशन और बेंच दोनों की है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने यह टिप्पणी मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिए गए मुआवजे से मेडिक्लेम प्रतिपूर्ति की कटौती...
राज्य, अंतिम आदेश के तहत मिलने वाले लाभों से सिर्फ इसलिए इनकार नहीं कर सकता कि कर्मचारियों ने इसे लागू करवाने में देरी की: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राज्य किसी ऐसे न्यायिक आदेश को लागू करने से इनकार नहीं कर सकता, जो अंतिम रूप ले चुका हो, सिर्फ इसलिए कि लाभार्थियों ने इसे लागू करवाने के लिए अदालतों का दरवाज़ा देर से खटखटाया। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार 'आदर्श नियोक्ता' (model employer) के तौर पर कानून का पालन करने में अपनी ही नाकामी का फायदा नहीं उठा सकती।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने ग्रेड-IV कर्मचारियों के एक समूह द्वारा आंध्र प्रदेश राज्य और विशाखापत्तनम नगर...
मोटर दुर्घटना मुआवज़े से मेडिक्लेम रीइम्बर्समेंट नहीं काटा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी दुर्घटना पीड़ित को मेडिक्लेम या मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत मिली रकम को मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिए गए मुआवज़े से नहीं काटा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ये दोनों फ़ायदे अलग-अलग कानूनी दायरे में आते हैं।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज की। इस अपील में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरणों (MACTs) द्वारा दिए गए मुआवज़े...
बॉम्बे किराया अधिनियम के तहत सह-मालिक 'मकान मालिक', बिना विशेष मालिकाना हक के भी बेदखली का मुकदमा चला सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी संपत्ति का सह-मालिक, बॉम्बे किराया, होटल और लॉजिंग हाउस दर नियंत्रण अधिनियम, 1947 के तहत "मकान मालिक" की श्रेणी में आता है। इसलिए वह किराए पर दी गई जगह पर विशेष मालिकाना हक या औपचारिक बंटवारे के बिना भी बेदखली की कार्यवाही शुरू करने का हकदार है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसने बेदखली के एक विवाद में ट्रायल कोर्ट और पहली अपीलीय अदालत के एक जैसे निष्कर्षों को पलट दिया था। इस मामले में अपीलकर्ता-वादी (जो...
रिलायंस द्वारा KG Besin से यूपी को गैस की सप्लाई 'इंटर-स्टेट सेल', VAT लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को यह फैसला दिया कि आंध्र प्रदेश के KG-D6 बेसिन से दूसरे राज्य के खरीदारों को प्राकृतिक गैस की बिक्री, सेंट्रल सेल्स टैक्स एक्ट, 1956 की धारा 3(a) के तहत एक 'इंटर-स्टेट सेल' (अंतर-राज्यीय बिक्री) है, और इसलिए इस पर राज्य का वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लागू नहीं होता।जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर अपीलों का समूह खारिज किया। ये अपीलें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) द्वारा KG-D6 बेसिन से उत्तर प्रदेश के...
'सिर्फ़ अपराध की गंभीरता ही माफ़ी से इनकार का आधार नहीं हो सकती': सुप्रीम कोर्ट ने मधुमिता हत्याकांड के दोषी को 22 साल बाद रिहा करने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को यह फ़ैसला दिया कि किसी दोषी की सज़ा माफ़ी की अर्ज़ी को सिर्फ़ अपराध की गंभीरता के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। इसके बजाय, सज़ा माफ़ी का फ़ैसला कैदी के रिहा होने के अधिकार के समग्र मूल्यांकन पर आधारित होना चाहिए, जो निष्पक्ष और उचित मानदंडों पर आधारित हो।कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की, जब उसने गृह मंत्रालय (MHA) के उस फ़ैसले को रद्द किया, जिसमें 2003 के मधुमिता हत्याकांड के दोषी रोहित चतुर्वेदी को समय से पहले रिहा करने की अनुमति देने से इनकार किया था।जस्टिस...
मान्यता खोने के बाद दूसरे प्राइवेट कॉलेजों में ट्रांसफर हुए स्टूडेंट सरकारी फीस का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ओडिशा के बंद हो चुके सरदार राजास मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SRMCH) से दूसरे प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसफर हुए स्टूडेंट, जिनकी मूल संस्था की मान्यता खत्म हो गई, सिर्फ़ रियायती सरकारी मेडिकल कॉलेज फीस देकर "अचानक मिलने वाले फ़ायदे" (Windfall) का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने SRMCH में लागू फीस दरों पर उनसे बकाया फीस वसूलने की अनुमति दी।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने निर्देश दिया कि SRMCH का प्रबंधन करने वाले सेल्वम एजुकेशनल एंड चैरिटेबल...
Canara Bank Regulations | जब एक ही मामले में कई अधिकारी शामिल हों तो संयुक्त अनुशासनात्मक कार्यवाही ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि केनरा बैंक अधिकारी कर्मचारियों (अनुशासन और अपील) विनियम, 1976 के विनियम 10 के अनुसार, किसी दोषी बैंक कर्मचारी के खिलाफ अलग से अनुशासनात्मक कार्यवाही करना स्वीकार्य है, भले ही किसी दोषी कृत्य में कई अधिकारी शामिल हों; क्योंकि जहां एक से ज़्यादा अधिकारी शामिल हों, वहाँ संयुक्त अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का कोई अनिवार्य नियम नहीं है।जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच के आदेश के उस हिस्से को रद्द किया, जिसमें...
चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल में कैबिनेट मंत्री क्यों शामिल होना चाहिए? तीसरा व्यक्ति निष्पक्ष होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल करने के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया। यह सवाल कोर्ट ने 'चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023' को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उठाया।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच 2023 के इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस कानून में यह प्रावधान है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति में प्रधानमंत्री,...
'होस्टाइल गवाह की गवाही का इस्तेमाल बरी करने के लिए भी किया जा सकता है, सिर्फ़ दोषी ठहराने के लिए नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने हत्या की सज़ा रद्द की
यह देखते हुए कि होस्टाइल गवाहों के सबूतों का इस्तेमाल न सिर्फ़ दोषी ठहराने के लिए, बल्कि अभियोजन पक्ष के मामले को कमज़ोर करने और बरी करने में मदद के लिए भी किया जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 मई) को SC/ST श्रेणी के एक व्यक्ति की हत्या के आरोपी एक व्यक्ति को बरी किया।कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के मामले की नींव ही अभियोजन पक्ष के गवाहों ने कमज़ोर कर दी थी, क्योंकि उन्होंने अपराध की जगह के बारे में अभियोजन पक्ष के रुख का समर्थन नहीं किया।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी...
नियमित पद के विज्ञापन के बदले संविदा पर नियुक्ति 'स्पष्ट रूप से अवैध': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 मई) को फैसला सुनाया कि नियमित रिक्तियों के लिए जारी विज्ञापन के बदले किसी उम्मीदवार को संविदा के आधार पर नियुक्त करना "स्पष्ट रूप से अवैध और असंवैधानिक" है, खासकर तब जब इस तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए कोई कारण दर्ज न किया गया हो।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने असिस्टेंट प्रोफेसर द्वारा दायर अपील स्वीकार की। इस प्रोफेसर को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद में शिक्षण पदों के लिए नियमित नौकरी के विज्ञापन के बदले संविदा पर...
Land Acquisition | आवासीय प्लॉट की सेल डीड का उपयोग औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राजमार्ग विस्तार के लिए अधिग्रहित औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए पास के किसी गांव के आवासीय बिक्री विलेख का उपयोग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' की धारा 26(1)(b) के तहत 'समान प्रकार की भूमि' की शर्त अनिवार्य है और भूमि अधिग्रहण मुआवजे को निर्धारित करने के लिए इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की...
यूपी में 'स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन' की ज़मीनों की बिक्री जांच करे SIT: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की देखरेख में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। यह SIT 'स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया' से जुड़ी ज़मीनों की कथित धोखाधड़ी वाली बिक्री की जांच करेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस अंतरिम निर्देश को भी रद्द किया, जिसमें पुलिस को इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने से रोका गया।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने यह माना कि हालांकि कोई भी कोर्ट कार्यवाही के दौरान आरोपी को दंडात्मक कदमों से...



















