सुप्रीम कोर्ट
Article 226 | इकोनॉमिक या फिस्कल रिफॉर्म्स पर सवाल उठाने के लिए रिट जूरिस्डिक्शन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 दिसंबर) को सिविक बॉडीज़ के प्रॉपर्टी टैक्स रेट्स को रिवाइज़ करने के अधिकार को सही ठहराया। साथ ही कहा कि ऐसे रिवीजन को तब तक चैलेंज नहीं किया जा सकता, जब तक कि अपनाया गया प्रोसेस मनमाना न हो या गवर्निंग कानूनी प्रोविज़न्स का साफ उल्लंघन न करता हो।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच का फैसला खारिज करते हुए कहा, जिसमें अकोला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के प्रॉपर्टी टैक्स रेट्स को रिवाइज़ करने के फैसले को लगभग 16 साल बाद रद्द कर दिया...
सिर्फ़ इसलिए गवाही खारिज नहीं की जा सकती क्योंकि गवाह को होस्टाइल घोषित कर दिया गया: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 दिसंबर) को कहा कि किसी गवाह की गवाही सिर्फ़ इसलिए पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती, क्योंकि उसे होस्टाइल गवाह घोषित कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि गवाही का वह हिस्सा जो प्रॉसिक्यूशन या डिफेंस के केस से मेल खाता है, उसे स्वीकार किया जा सकता है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने उस केस की सुनवाई की, जिसमें अपील करने वालों को ट्रायल कोर्ट ने इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 354 (शील भंग करना) के साथ-साथ SC/ST Act की धारा...
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम विरोधी टिप्पणी के आरोपी UP पुलिस अधिकारी को वॉयस सैंपल देने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति के खिलाफ क्रिमिनल केस रद्द किया, क्योंकि पाया गया कि उसके खिलाफ यह केस गलत तरीके से दर्ज किया गया था, क्योंकि वह एक ऑडियो क्लिप पर कानूनी कार्रवाई शुरू करने का प्रस्ताव दे रहा था, जिसमें बिजनौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए सुना गया था।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने DIG संजीव त्यागी (तत्कालीन SP बिजनौर) को पक्षकार बनाया और उन्हें वेरिफिकेशन के लिए कथित ऑडियो...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल में 30% महिला रिज़र्वेशन का दिया आदेश दिया, 10% सीटों पर को-ऑप्शन की भी इजाज़त
एक अहम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया कि स्टेट बार काउंसिल में 30% सीटों पर - जहां चुनाव अभी नोटिफ़ाई नहीं हुए - महिला वकीलों को रिप्रेज़ेंट किया जाना चाहिए।इस साल के लिए कोर्ट ने आदेश दिया कि 20% सीटें महिला सदस्यों के चुनाव से और 10% को-ऑप्शन से भरी जानी चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि उन काउंसिल के संबंध में को-ऑप्शन का प्रस्ताव उसके सामने रखा जाए, जहां महिलाओं की संख्या काफ़ी नहीं हो सकती है।कोर्ट ने कहा कि उन छह बार काउंसिल में महिलाओं के लिए सीटें तय करना समझदारी नहीं...
कर्मचारी द्वारा माता-पिता के पक्ष में किया गया जनरल प्रोविडेंट फंड नॉमिनेशन शादी के बाद इनवैलिड हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार कर्मचारी की शादी हो जाने पर माता-पिता के पक्ष में किया गया नॉमिनेशन खत्म हो जाएगा। साथ ही जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) की रकम मृतक एम्प्लॉई की पत्नी और माता-पिता के बीच बराबर बांटी जाएगी।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया, जबकि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के उस फैसले को बहाल किया, जिसमें GPF की रकम मृतक की पत्नी और मां को बांटने का निर्देश दिया गया था।बेंच ने कहा,“रेस्पोंडेंट नंबर 1 (मृतक की मां) के पक्ष...
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग कैदियों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरे भारत में निर्देश जारी किए, राज्यों/UTs से सहायक उपकरणों पर रिपोर्ट मांगी
दिव्यांग कैदियों के अधिकारों और सम्मान को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने जेल सिस्टम में एक बड़ा, दिव्यांगों को शामिल करने वाला फ्रेमवर्क लागू करने का निर्देश दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सत्यन नरवूर की PIL पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए, जिसमें दिव्यांग कैदियों के लिए ज़रूरी सुविधाओं और सही कानूनी सिस्टम की मांग की गई।कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता में उठाई गई कई चिंताओं पर एल. मुरुगनंथम...
को-ऑपरेटिव सोसाइटियों के लिए स्टाम्प ड्यूटी में राहत, कानून के तहत ज़रूरी नहीं एक्स्ट्रा वेरिफिकेशन पर आधारित नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (5 दिसंबर) को झारखंड सरकार के उस मेमो को रद्द कर दिया, जिसमें को-ऑपरेटिव सोसाइटियों को अपने सदस्यों को प्रॉपर्टी ट्रांसफर रजिस्टर करने के लिए इंडियन स्टाम्प (बिहार अमेंडमेंट) एक्ट की धारा 9A के तहत स्टाम्प ड्यूटी में छूट का दावा करने से पहले असिस्टेंट रजिस्ट्रार की सिफारिश लेनी ज़रूरी है।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने कहा,“फर्जी कोऑपरेटिव सोसाइटी को धारा 9A का फायदा उठाने से रोकने के लिए कोऑपरेटिव सोसाइटी की जगह को उसके मेंबर्स के हक में बिना...
अगर कोर सब्जेक्ट पढ़ा है तो सिर्फ़ डिग्री टाइटल न होने पर कैंडिडेट को डिसक्वालिफाई नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब किसी कैंडिडेट ने अपने करिकुलम के हिस्से के तौर पर ज़रूरी मेन सब्जेक्ट पढ़ा है तो सिर्फ़ इस आधार पर उसका कैंडिडेट अप्लाई रिजेक्ट नहीं किया जा सकता कि उसकी डिग्री किसी दूसरे स्पेशलाइज़ेशन में है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने एक एम.कॉम (कॉमर्स) ग्रेजुएट की मॉनिटरिंग और इवैल्यूएशन कंसल्टेंट के तौर पर नियुक्ति को फिर से बहाल कर दिया। यह एक ऐसा पद था जिसके लिए स्टैटिस्टिक्स में पोस्टग्रेजुएट डिग्री ज़रूरी थी। उसकी सर्विस सिर्फ़ इसलिए खत्म कर दी गई,...
बयान को 'डाइंग डिक्लेरेशन' मानने के लिए मृत्यु का आसन्न होना आवश्यक नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 दिसंबर) को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि सिर्फ इस आधार पर कि बयान दर्ज करते समय मृत्यु आसन्न नहीं थी, किसी कथन को dying declaration (मरणोपरांत कथन) मानने से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मृतक महिला के ससुराल वालों को समन बहाल करते हुए यह टिप्पणी की।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ उस मामले की सुनवाई कर रही थी जिसमें अपीलकर्ता ने अपनी बहन को उसके पति द्वारा गोली मारने के बाद एफआईआर दर्ज कराई थी। शुरू में पीड़िता ने अपने धारा 161...
CrPC की धारा 319 के तहत दायर आवेदन पर फैसला करते समय कोर्ट को सबूतों की क्रेडिबिलिटी टेस्ट करने की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 दिसंबर) को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें मृतक के ससुराल वालों को एडिशनल आरोपी के तौर पर बुलाने से मना कर दिया गया था। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोर्ट CrPC की धारा 319 के तहत किसी एप्लीकेशन पर फैसला करते समय मिनी-ट्रायल नहीं कर सकतीं या गवाह की क्रेडिबिलिटी का अंदाज़ा नहीं लगा सकतीं।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने कहा,“CrPC की धारा 319 के तहत आवेदन पर फैसला करने के चरण में कोर्ट को सबूतों की विश्वसनीयता का ट्रायल...
हाईकोर्ट को FIR रद्द करने से मना करते हुए अग्रिम जमानत नहीं देनी चाहिए, आरोपी को पहले सेशन कोर्ट जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि हाईकोर्ट आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से मना करते हुए उसे प्री-अरेस्ट बेल नहीं दे सकते। इसने यह भी कहा कि सबसे पहले, आरोपी को प्री-अरेस्ट बेल की राहत सेशन कोर्ट से लेनी चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,"इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उत्तर प्रदेश राज्य में प्री-अरेस्ट बेल के नियम लागू हैं। इसलिए किसी भी अपराध का आरोपी व्यक्ति अगर ऐसी सुरक्षा चाहता है तो उसे सबसे पहले सक्षम सेशन कोर्ट जाकर सही उपाय करना होगा। कार्यवाही...
PG और हॉस्टल को किराये पर देने पर भी लागू होगी GST छूट: सुप्रीम कोर्ट
एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आवासीय मकान के किराये पर मिलने वाली GST छूट तब भी लागू होगी जब किरायेदार उस संपत्ति को आगे सब-लीज़ देकर हॉस्टल या पेइंग गेस्ट (PG) आवास उपलब्ध कराए। कोर्ट ने कहा कि 28 जून 2017 की GST छूट अधिसूचना (एंट्री 13, नोटिफिकेशन 9/2017) में यह अनिवार्य नहीं है कि किरायेदार स्वयं उस संपत्ति का उपयोग निवास के रूप में करे, बल्कि अंतिम उपयोग आवासीय होना पर्याप्त है।जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह निर्णय कर्नाटक...
बिहार SIR के दौरान 26 लाख लोगों को साइक्लोस्टाइल नोटिस भेजे गए: प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में बताया
SIR प्रोसेस को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि बिहार SIR के दौरान, ECI ने 26 लाख लोगों को उनकी एलिजिबिलिटी साबित करने के लिए बिना कोई कारण बताए 'साइक्लोस्टाइल' नोटिस जारी किए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच कई राज्यों में शुरू किए गए SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।गुरुवार को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के एडवोकेट प्रशांत भूषण ने ECI के अपने काम में ट्रांसपेरेंट न होने पर अपनी पिछली...
विश्वविद्यालयों को UGC के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।यह टिप्पणी कोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से जुड़े एक मामले का निपटारा करते हुए की।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ 2013 में सहायक प्रोफेसरों की नियुक्तियों से संबंधित मामले पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता धर्मेंद्र कुमार और बृजेश कुमार तिवारी ने इन नियुक्तियों को पारदर्शिता के अभाव और UGC विनियम, 2013—जिनमें 50%...
CLAT-PG स्कोर के आधार पर लॉ अधिकारियों की नियुक्ति रोकने वाले फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 दिसंबर) को दिल्ली हाईकोर्ट के उस निर्णय पर रोक लगा दी, जिसमें हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवेज़ अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा CLAT-PG स्कोर के आधार पर विधि अधिकारियों [यंग प्रोफेशनल–लीगल] की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना को रद्द कर दिया था।चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए NHAI की विशेष अनुमति याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। यह याचिका हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देती है।सुनवाई के दौरान NHAI की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर...
SIR ड्यूटी पर लगाए गए सरकारी कर्मचारी काम करने के लिए बाध्य, कठिनाई होने पर अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन राज्य सरकारों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए, जिनके कर्मचारी चुनाव आयोग के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में तैनात किए गए और जो इस दौरान कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। अदालत ने साफ कहा कि जिन कर्मचारियों को राज्य सरकारों या राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के पास प्रतिनियुक्त किया गया है, वे वैधानिक दायित्व के तहत अपनी ड्यूटी निभाने के लिए बाध्य हैं।चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या...
S. 354C IPC | बिना इजाज़त महिला की फोटो लेना जुर्म नहीं, अगर वह कोई प्राइवेट काम नहीं कर रही हो तो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी महिला की फ़ोटो खींचना और उसकी सहमति के बिना मोबाइल फ़ोन पर उसका वीडियो बनाना, जब वह कोई "प्राइवेट काम" नहीं कर रही हो तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354C के तहत वॉयरिज्म (तांक-झांक करना) का अपराध नहीं माना जाएगा।इस तरह, जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने एक आदमी को बरी कर दिया, जिस पर शिकायतकर्ता को उसके फ़ोटो खींचकर और अपने मोबाइल फ़ोन पर वीडियो बनाकर धमकाने का आरोप था, जिसके बारे में उसने दावा किया कि उसके काम ने उसकी प्राइवेसी में दखल दिया और...
सिर्फ़ माता-पिता का वर्क-फ़्रॉम-होम स्टेटस बच्चे की कस्टडी तय नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि कोई माता-पिता घर से काम कर रहा है, उसे बच्चे की कस्टडी का हक़ नहीं मिल जाता। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि माता-पिता हमेशा बच्चे के साथ मौजूद नहीं रह सकते। साथ ही उन्हें रोज़ी-रोटी कमाने के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिससे माता-पिता को बच्चे की कस्टडी लेने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने पिता को कस्टडी दिए जाने को चुनौती देने वाली माँ की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा,"इसलिए हम इस बात से सहमत नहीं हैं कि अगर एक...
दिव्यांगों के अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को एग्जाम से 7 दिन पहले तक स्क्राइब बदलने की इजाज़त देने का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने एक फ़ैसला सुनाया, जिससे दिव्यांग UPSC कैंडिडेट्स के लिए स्क्राइब का नाम बदलना आसान हो जाएगा और जिन्हें देखने में दिक्कत है, उनके लिए स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर लागू करने में भी मदद मिलेगी।कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, UPSC एग्जाम में बैठने वाले कैंडिडेट्स, जो स्क्राइब के लिए एलिजिबल हैं, उन्हें एग्जाम से कम-से-कम 7 दिन पहले तक स्क्राइब का नाम बदलने की रिक्वेस्ट करने की इजाज़त होगी। इसके अलावा, UPSC अपने एग्जाम में देखने में दिक्कत वाले कैंडिडेट्स के लिए स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर के...
दिल्ली दंगे UAPA केस में ज़मानत याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद, शरजील, गुलफिशा और अन्य से स्थायी पता देने को कहा
दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई टालते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से अगली सुनवाई तक सभी याचिकाकर्ताओं का स्थायी पता देने को कहा।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरा हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद की दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में ज़मानत की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें ज़मानत देने से...




















