सुप्रीम कोर्ट

सभी मेडिकल ग्रेजुएट, चाहे वे भारतीय हों या विदेशी, उन्हें एक जैसा स्टाइपेंड मिलना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से यह पता लगाने को कहा कि क्या राजस्थान, आंध्र प्रदेश, केरल, गुजरात और झारखंड राज्यों में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट को स्टाइपेंड का भुगतान किया गया, या नहीं।कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि वह इस बारे में विस्तृत निर्देश जारी करेगा कि सभी अंडरग्रेजुएट मेडिकल ग्रेजुएट को - चाहे वे भारतीय हों या विदेशी - स्टाइपेंड मिलना चाहिए और यह भुगतान दोनों के लिए समान होना चाहिए। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि वह देखेगा कि क्या स्टाइपेंड का भुगतान न होने के मामलों को...

रद्द किए गए नियमों के तहत प्रमोशन का दावा करने का कोई पक्का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (17 सितंबर) को फिर से कहा कि लागू नियमों के तहत बनने वाली प्रमोशन वाली पोस्ट को ज़रूरी नहीं कि उन्हीं नियमों के तहत भरा जाए, खासकर तब जब वे नियम अब रद्द कर दिए गए हों। कोर्ट ने माना कि ऐसी प्रमोशन वाली पोस्ट को नए नियमों के तहत भरा जा सकता है, जिनमें भर्ती के नए तरीके बताए गए।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा,"सरकार के पॉलिसी फ़ैसले को देखते हुए कर्मचारी को रद्द किए गए नियमों के अनुसार प्रमोशन पर विचार किए जाने का कोई पक्का अधिकार नहीं...

सुप्रीम कोर्ट ने डिस्टेंस/ओपन मोड से बैचलर डिग्री लेने वाले लॉ ग्रेजुएट एडवोकेट के तौर पर प्रोविज़नल एनरोलमेंट की इजाज़त दी

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल को निर्देश दिया कि वे उन आवेदकों के एक ग्रुप को एडवोकेट के तौर पर प्रोविज़नल रूप से एनरोल करें, जिन्होंने रेगुलर मोड से तीन साल की LL.B. डिग्री हासिल की थी, लेकिन जिनका एनरोलमेंट इस आधार पर रोक दिया गया कि उनकी पिछली एजुकेशनल क्वालिफिकेशन (बैचलर डिग्री) ओपन, डिस्टेंस या कॉरेस्पोंडेंस मोड से हासिल की गई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह अंतरिम आदेश उन आवेदनों पर दिया जिनमें प्रोविज़नल एनरोलमेंट की मांग की गई। यह मामला बार...

NDPS Act | सैंपल की कस्टडी में बिना वजह 5 दिन का गैप, धारा 52A का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट ने 20 साल बाद दो लोगों को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (16 सितंबर) को NDPS Act के एक मामले में दो लोगों की सज़ा बीस साल बाद रद्द की। यह मामला कमर्शियल मात्रा में चरस बरामद होने और रखने से जुड़ा था। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष ज़ब्त किए गए प्रतिबंधित सामान की कस्टडी की चेन में कड़ी जोड़ने में नाकाम रहा। कोर्ट ने ज़ब्त सामान को FSL टेस्टिंग के लिए भेजने की तारीख और FSL को उसके असल में मिलने की तारीख के बीच बिना वजह पांच दिन के गैप पर ध्यान दिया।कोर्ट ने सैंपल पैकेट पर पहचान के निशान/हस्ताक्षर न होने, मालखाना से निकलने की कोई...

PC Act | बिचौलिये को रिश्वत देना सरकारी कर्मचारी का अपराध साबित करने के लिए काफ़ी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (16 सितंबर) को कहा कि सिर्फ़ यह साबित हो जाने से कि शिकायतकर्ता और बिचौलिये (जिसने किसी सरकारी कर्मचारी का नाम लिया था) के बीच पैसों का लेन-देन हुआ, यह साबित नहीं होता कि उस सरकारी कर्मचारी ने रिश्वत ली है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व रेलवे सुरक्षा बल (RPF) अधिकारी भरत राज मीणा को बरी करते हुए यह टिप्पणी की। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि अपीलकर्ता ने बिचौलिये के ज़रिए गैर-कानूनी तौर पर पैसे...

आर्टिकल 220 के तहत पूर्व हाईकोर्ट जजों को बार काउंसिल में महिला सदस्य के तौर पर शामिल करने पर कोई रोक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि संविधान का आर्टिकल 220, जो भारत में अदालतों और अधिकारियों के सामने प्रैक्टिस करने से पूर्व हाईकोर्ट चीफ जस्टिसों और जजों को रोकता है, उन्हें संबंधित राज्य बार काउंसिल में महिला सदस्य के तौर पर शामिल करने से नहीं रोकता।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह स्पष्टीकरण तब दिया, जब वह राज्य बार काउंसिल में महिला सदस्यों को शामिल करने के बारे में कोर्ट के पहले के निर्देशों में बदलाव की मांग करने वाली अलग-अलग...

बीमा कंपनी के ऑफिस की जगह से मोटर दुर्घटना के दावे के लिए अधिकार क्षेत्र तय नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट ने MV Act की धारा 166(2) की व्याख्या की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166(2) दावेदार को उस जगह पर मुआवज़े का दावा दायर करने की अनुमति देती है, जहां वह खुद "कारोबार करता है," लेकिन यही बात बीमा कंपनी पर लागू नहीं होती। सिर्फ़ इसलिए कि बीमा कंपनी किसी जगह पर कारोबार करती है, उसे उस जगह पर केस चलाने के अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन) के मकसद से प्रतिवादी (डिफेंडेंट) नहीं माना जा सकता।जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने दावेदार की अपील खारिज करते हुए यह बात कही।बेंच ने...

अदालतों को आंसर की को सही मानना ​​चाहिए, दखल तभी दें जब गलती साफ़ और स्पष्ट हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि परीक्षा लेने वाली संस्था द्वारा चुनी गई आंसर की की सटीकता को चुनौती तभी दी जा सकती है, जब गलती इतनी साफ़ और स्पष्ट हो कि उसे बिना किसी अनुमान या तर्क-वितर्क के पहचाना जा सके। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में एक उम्मीदवार को विवादित अंक दिया गया।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने आयोग की उस अपील को मंज़ूरी दी, जो...

Know The Law | क्या कोर्ट किसी व्यक्ति को ऐसे आरोप के लिए दोषी ठहरा सकती है, जिसके लिए आरोप तय नहीं किए गए? सुप्रीम कोर्ट ने समझाया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस आरोपी पर एक तरह के अपराध का आरोप लगाया गया, उसे अपीलीय या रिविजनल कोर्ट किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहरा सकती है, जिसके लिए आरोप तय नहीं किए गए, बशर्ते कि ऐसे अपराध मिलते-जुलते या कम गंभीर हों और आरोपी के साथ न्याय में कोई चूक न हुई हो।कोर्ट ने कहा,"CrPC की धारा 464 को देखते हुए अपीलीय कोर्ट या रिविजनल कोर्ट के लिए किसी आरोपी को ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराना संभव है, जिसके लिए कोई आरोप तय नहीं किया गया, जब तक कि कोर्ट की यह राय न हो कि वास्तव में न्याय में चूक होगी। यह...

Electricity Act | दो साल बाद बिजली बकाया वसूलना तभी संभव, जब हर बिल में लगातार बकाया दिखाया गया हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बिजली के पुराने बकाये की वसूली को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि सामान्य तौर पर बिजली की खपत से जुड़ी कोई रकम दो साल के भीतर वसूल की जानी चाहिए। दो साल की अवधि के बाद भी बकाया वसूलना है तो उस रकम को लगातार बिजली बिलों में बकाया के तौर पर दिखाया जाना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर दो साल से अधिक पुरानी रकम की वसूली पर रोक रहेगी।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण कंपनी दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए यह...

सुप्रीम कोर्ट ने BNS की धारा 69 के बारे में बताया: शादी का असली वादा तोड़ने पर धोखे से सेक्स का अपराध नहीं बनता

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज FIR रद्द की। इस धारा में धोखे से (जैसे शादी का झूठा वादा करके) सहमति लेकर सेक्स करने को अपराध माना गया। कोर्ट ने पाया कि शिकायत से ही पता चलता है कि यह धोखे से बहला-फुसलाकर बनाया गया संबंध नहीं, बल्कि आपसी सहमति से बना संबंध था। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी की माँ की इजाज़त न होने के कारण शादी से इनकार करना धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के...

सिर्फ़ लंबे समय तक कब्ज़ा एडवर्स पज़ेशन साबित नहीं करता, इसके लिए विरोधी इरादा ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (10.09.2026) को कहा कि किसी प्रॉपर्टी पर सिर्फ़ लंबे समय तक और बिना रुकावट कब्ज़ा होना ही 'एडवर्स पज़ेशन' (प्रतिकूल कब्ज़ा) का दावा साबित करने के लिए काफ़ी नहीं है। इसके लिए यह साबित करना ज़रूरी है कि कब्ज़ा किस बिंदु पर असली मालिक के खिलाफ़ (विरोधी) हो गया।ऐसा फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि रेवेन्यू रिकॉर्ड में कब्ज़े को 'गैर-मरूसी बिला लगान बवजह धर्म-अर्थ' (यानी धार्मिक उद्देश्यों के लिए बिना किराया दिए कब्ज़ा) के तौर पर दर्ज करना प्रॉपर्टी को पूरी तरह से...

सुप्रीम कोर्ट का जम्मू-कश्मीर सरकार को आदेश- सरकारी टीचर को एशियन गेम्स के लिए नेशनल कयाकिंग कोच बनने की मंज़ूरी दें

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (10 सितंबर) को जम्मू-कश्मीर सरकार को आदेश दिया कि वह तुरंत एक फिजिकल एजुकेशन टीचर के लिए रिलीविंग ऑर्डर, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) और मंज़ूरी जारी करें। इस टीचर को इंडियन नेशनल कयाकिंग और कैनोइंग टीम का चीफ कोच चुना गया, ताकि वह एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा ले सकें।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें स्पोर्ट्स टीचर सुश्री बिलकिस मीर को रिलीविंग ऑर्डर और NOC देने से...

डेडवुड बताकर अधिकारी को समय से पहले रिटायर करना गलत, सुप्रीम कोर्ट ने दिया 15 लाख मुआवजा और सम्मान से विदाई का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भारतीय व्यापार सेवा अधिकारी को समय से पहले अनिवार्य रिटायरमेंट देने का आदेश रद्द करते हुए केंद्र सरकार को उन्हें 15 लाख रुपये देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि बेदाग सेवा रिकॉर्ड और लगातार उत्कृष्ट मूल्यांकन वाले अधिकारी को बिना किसी नए प्रतिकूल रिकॉर्ड के अचानक डेडवुड या संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाला अधिकारी नहीं बताया जा सकता।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने अधिकारी को प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए 9 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 6 लाख रुपये देने का...

जीवंत लोकतंत्र में न्यायपालिका की रचनात्मक आलोचना ज़रूरी, लेकिन इसे सही मंच पर ही उठाया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक संस्था के तौर पर न्यायपालिका की आलोचना हो सकती है और न्यायिक कामकाज की निष्पक्ष, जानकारीपूर्ण और रचनात्मक आलोचना एक जीवंत संवैधानिक लोकतंत्र की जायज़ और ज़रूरी विशेषता है।हालांकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि ऐसी आलोचना सही मंच और निष्पक्ष, तर्कसंगत तरीके से की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बिना पुष्टि वाली आलोचना बच्चों के लिए बने स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं की जानी चाहिए।कोर्ट ने...

Partnership Act | पार्टनरशिप खत्म होने की तारीख पर नहीं, बल्कि असेसमेंट की तारीख पर तय होगा पार्टनर का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (9 सितंबर) को कहा कि जब पार्टनरशिप खत्म होती है तो पार्टनरशिप की बची हुई संपत्ति में अपने हिस्से को पाने का पार्टनर का अधिकार, पार्टनरशिप खत्म होने की तारीख पर ही तय नहीं हो जाता। इसके बजाय, पार्टनर को पार्टनरशिप की संपत्ति की असल वैल्यूएशन की तारीख पर संपत्ति की वैल्यू के आधार पर अपना हिस्सा पाने का हक है।जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें हैदराबाद में 3.27 एकड़ ज़मीन की मालिक पार्टनरशिप फर्म को पार्टनर ने खत्म करने...

SEBI बायबैक नियमों के तहत एस्क्रो जारी करने से धोखाधड़ी की अलग जांच नहीं रुकती: वेदांता मामले में सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (09.09.2026) को कहा कि SEBI (सिक्योरिटीज बायबैक) रेगुलेशन, 1998 (बायबैक रेगुलेशन) के रेगुलेशन 15B(8) के तहत किसी कंपनी द्वारा जमा किए गए कैश एस्क्रो को जारी करने का मतलब यह नहीं है कि SEBI (सिक्योरिटीज मार्केट से जुड़े धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक) रेगुलेशन, 2003 (PFUTP रेगुलेशन) के तहत धोखाधड़ी की अलग और स्वतंत्र जांच नहीं की जा सकती।हालांकि, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने मामले को धोखाधड़ी के सीमित सवाल पर नए सिरे से सुनवाई के लिए...

क्या भगवान इससे खुश होंगे? महावीर जी मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने जैन संप्रदायों से कहा- आपस में लड़कर भगवान को क्यों परेशान कर रहे हैं?

राजस्थान के महावीर जी जैन मंदिर के प्रबंधन को लेकर श्वेतांबर और दिगंबर जैन संप्रदायों के बीच चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दोनों पक्षों को धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस मामले में संयम बरतने की सलाह दी।कोर्ट ने कहा कि जिस भगवान के नाम पर दोनों पक्ष मुकदमा लड़ रहे हैं क्या वह इस तरह की कानूनी लड़ाई से खुश होंगे? जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया। पीठ ने दोनों पक्षों को आठ दिन के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश...