सुप्रीम कोर्ट

S.142 NI Act | बोर्ड प्रस्ताव पर दस्तखत करने का मतलब यह नहीं कि डायरेक्टर को कंपनी के रोज़मर्रा के मामलों की जानकारी थी: सुप्रीम कोर्ट
S.142 NI Act | बोर्ड प्रस्ताव पर दस्तखत करने का मतलब यह नहीं कि डायरेक्टर को कंपनी के रोज़मर्रा के मामलों की जानकारी थी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि सिर्फ़ बोर्ड प्रस्ताव पर दस्तखत करने से यह साबित नहीं होता कि कोई डायरेक्टर कंपनी के रोज़मर्रा के मामलों का इंचार्ज था और उनके लिए ज़िम्मेदार था> इसलिए सिर्फ़ इस आधार पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।कंपनी की डायरेक्टर की अपील मंज़ूर करते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने चेक बाउंस मामले में उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। बेंच ने कहा कि ऐसा कोई खास आरोप नहीं था...

Motor Accident Claim | केस पार्टी बनाई गई बीमा कंपनी सभी आधार उठा सकती है और मुआवज़े की रकम को चुनौती दे सकती है: सुप्रीम कोर्ट
Motor Accident Claim | केस पार्टी बनाई गई बीमा कंपनी सभी आधार उठा सकती है और मुआवज़े की रकम को चुनौती दे सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बीमा कंपनी की उस अपील को मंज़ूरी दी, जो बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ थी। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को मोटर दुर्घटना मुआवज़े की रकम के बारे में अपनी दलीलें रखने से रोक दिया था।कोर्ट ने कहा कि जब किसी मोटर दुर्घटना मुआवज़े के केस में बीमा कंपनी को एक पार्टी-प्रतिवादी (Respondent) के तौर पर शामिल किया जाता है तो उसे सभी उपलब्ध आधारों पर दावे को चुनौती देने का अधिकार होता है। यानी, उसे सिर्फ़ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 149(2) में बताए गए आधारों (जैसे, पॉलिसी की...

बच्चों की तस्करी को हल्के में न लें, पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के गृह सचिवों से कहा
बच्चों की तस्करी को हल्के में न लें, पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के गृह सचिवों से कहा

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे बच्चों की तस्करी को हल्के में न लें। साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि यह मुद्दा कानून-व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चिंताओं वाला है और इस पर राज्य के अधिकारियों के स्तर पर तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत है।जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा,"कृपया इस मुद्दे को बहुत-बहुत गंभीरता से लें। बच्चों की तस्करी बेकाबू हो चुकी है। पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं। अगर आप सभी इस पर ध्यान नहीं देंगे तो हालात काबू से बाहर हो जाएंगे। इस मामले में केवल राज्य सरकार...

कई अपराधों के लिए जब जेल की सज़ाएं एक साथ चलती हैं तो जुर्माना भी एक साथ ही चलता है: सुप्रीम कोर्ट
कई अपराधों के लिए जब जेल की सज़ाएं एक साथ चलती हैं तो जुर्माना भी एक साथ ही चलता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जहां अलग-अलग अपराधों के लिए दी गई सज़ाओं को एक साथ (Concurrently) चलाने का निर्देश दिया गया हो, वहां हर अपराध के लिए अलग से जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि दो अपराधों की सज़ा के हिस्से के तौर पर अलग से लगाया गया जुर्माना भी, जेल की सज़ाओं के साथ-साथ ही माना जाएगा।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने कहा,"IPC की धारा 53 में जुर्माने को भी सज़ा का एक हिस्सा माना गया। इस नज़रिए से जब सज़ा को एक...

Sabarimala Reference | अंधविश्वास से जुड़ी प्रथाओं की न्यायिक पुनर्विचार पर रोक नहीं: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट
Sabarimala Reference | अंधविश्वास से जुड़ी प्रथाओं की न्यायिक पुनर्विचार पर रोक नहीं: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट

सबरीमाला मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अदालतों को ऐसी प्रथाओं या 'अंधविश्वासों' को रद्द करने से नहीं रोका जा सकता, जो सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य का उल्लंघन करती हों। भले ही संविधान के अनुच्छेद 25(2)(b) के तहत धर्म सुधार के लिए कानून बनाने की शक्ति विधायिका के पास हो।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी 'आवश्यक धार्मिक प्रथा' (ERP) को केवल संबंधित धर्म के दार्शनिक दृष्टिकोण से ही देखा जाना चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली...

CCS Pension Rules | कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने पर ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
CCS Pension Rules | कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने पर ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी नियोक्ता उस कर्मचारी की ग्रेच्युटी का भुगतान रोकने का हकदार है, जिसके खिलाफ कोई न्यायिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम के एक पूर्व क्लर्क द्वारा दायर अपील खारिज की। इस क्लर्क की ग्रेच्युटी परिवहन निगम ने उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही के लंबित होने के कारण रोक दी थी।रिटायरमेंट के बाद अपीलकर्ता की ग्रेच्युटी प्रतिवादी विभाग द्वारा रोक दी गई थी। इसका कारण उसके...

Motor Accident Claim | सिर्फ इसलिए सैलरी से कटौती नहीं की जा सकती कि मृतक रिटायरमेंट के करीब था: सुप्रीम कोर्ट
Motor Accident Claim | सिर्फ इसलिए सैलरी से कटौती नहीं की जा सकती कि मृतक रिटायरमेंट के करीब था: सुप्रीम कोर्ट

मोटर दुर्घटना मुआवज़ा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मृतक की सैलरी से 50 प्रतिशत की कटौती को गलत ठहराया। यह कटौती इस आधार पर की गई कि मृतक की नौकरी के सिर्फ 6 महीने बचे थे।जस्टिस राजेश बिंदल और विजय बिश्नोई की बेंच ने दावेदारों (मृतक के परिवार वालों) को दिए जाने वाले मुआवज़े की रकम बढ़ा दी। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट और मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने मुआवज़े की रकम तय करते समय मृतक की सैलरी से 50% की कटौती करके गलती की थी।बेंच ने कहा,"हमारे सामने जो मामला है, उसमें ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट...

बिना लाइसेंस वाले साहूकारों के खिलाफ जांच के लिए नए कानून का इंतज़ार ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
बिना लाइसेंस वाले साहूकारों के खिलाफ जांच के लिए नए कानून का इंतज़ार ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साफ किया कि बिना इजाज़त के पैसे उधार देने के मामले में खुद से शुरू की गई (suo motu) कार्रवाई को बंद करने वाले उसके पिछले आदेश का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि इस विषय पर अभी कोई कानून मौजूद नहीं है, या यह कि कानून लागू करने वाली कार्रवाई के लिए राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नए कानून बनाने का इंतज़ार करना होगा।अदालत ने साफ किया कि बिना लाइसेंस वाले साहूकारों के खिलाफ राज्यों के पैसे उधार देने से जुड़े कानूनों और भारतीय न्याय संहिता के तहत मौजूदा...

अपील खारिज होने पर डिक्री के क्रियान्वयन के लिए नई लिमिटेशन अवधि शुरू होगी: सुप्रीम कोर्ट
अपील खारिज होने पर डिक्री के क्रियान्वयन के लिए नई लिमिटेशन अवधि शुरू होगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपील को गैर-हाजिरी (default) के कारण खारिज किया जाता है, तो उससे एक नया लिमिटेशन पीरियड शुरू होता है, और ऐसे में 12 साल के भीतर दायर की गई एग्जीक्यूशन पिटीशन (डिक्री के क्रियान्वयन की अर्जी) मान्य होगी।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि यह तर्क सही नहीं है कि एग्जीक्यूशन पिटीशन की 12 साल की अवधि केवल डिक्री पास होने की तारीख से ही गिनी जाए, खासकर तब जब उस डिक्री के खिलाफ अपील लंबित रही हो।कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच...

सबरीमाला फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं होगा, सिर्फ़ संवैधानिक सवालों पर विचार होगा: सुप्रीम कोर्ट
सबरीमाला फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं होगा, सिर्फ़ संवैधानिक सवालों पर विचार होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई शुरू की। इस मामले में क़ानून से जुड़े कई बड़े सवाल उठाए गए, जिनमें धार्मिक संप्रदाय और ज़रूरी धार्मिक प्रथाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।बहस की शुरुआत सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने की। उन्होंने केंद्र सरकार का पक्ष साफ़ करते हुए कहा कि 2018 का सबरीमाला फ़ैसला, जिसमें सभी वर्गों की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई, ग़लत था। हालांकि, बेंच ने कहा कि चूंकि मौजूदा मामले का दायरा अनुच्छेद 25 (अंतरात्मा की स्वतंत्रता...

अनारक्षित श्रेणी में PwD के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित पद SC/ST/OBC दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी खुले हैं: सुप्रीम कोर्ट
अनारक्षित श्रेणी में PwD के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित पद SC/ST/OBC दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी खुले हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जब किसी अनारक्षित सीट पर क्षैतिज आरक्षण लागू होता है तो उस अनारक्षित सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अधिकार उन सभी उम्मीदवारों को होता है जिनके पास वह क्षैतिज विशेषता (Horizontal Attribute) मौजूद है, चाहे वे SC, ST, OBC या सामान्य श्रेणी के हों।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में वेस्ट बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर सिविल इंजीनियर के एक पद को यूआर...

UCO Bank द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी करके कर्मचारी के VRS को रोकने की कोशिश गलत: सुप्रीम कोर्ट
UCO Bank द्वारा 'कारण बताओ नोटिस' जारी करके कर्मचारी के VRS को रोकने की कोशिश गलत: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि कोई भी एम्प्लॉयर (मालिक) किसी कर्मचारी को सिर्फ़ 'कारण बताओ नोटिस' जारी करके, बिना किसी औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू किए और तय नोटिस अवधि के भीतर अनुमति देने से इनकार किए बिना स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने से नहीं रोक सकता।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें बैंक कर्मचारी को तब 'कारण बताओ नोटिस' दिया गया, जब उसका स्वैच्छिक रिटायरमेंट का आवेदन अभी पेंडिंग था। हालांकि, VRS के अनुरोध...

सुप्रीम कोर्ट ने जाली पॉलिसी पर शिकायत दर्ज न करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी से सवाल किया, SIT जांच का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने जाली पॉलिसी पर शिकायत दर्ज न करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी से सवाल किया, SIT जांच का आदेश दिया

इंश्योरेंस पॉलिसी में हेराफेरी के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने यह आदेश यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारित किया कि इंश्योरेंस कंपनियां जो पॉलिसीधारकों द्वारा जमा किए गए भारी मात्रा में सार्वजनिक धन का प्रबंधन करती हैं, अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी सतर्कता के साथ करें।खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह मुद्दा...

NI Act की धारा 138 की शर्तें पूरी होने पर चेक बाउंस की शिकायत को ट्रायल से पहले के स्टेज पर रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
NI Act की धारा 138 की शर्तें पूरी होने पर चेक बाउंस की शिकायत को ट्रायल से पहले के स्टेज पर रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब Negotiable Instruments Act, 1881 (NI Act) की धारा 138 की बुनियादी शर्तें पूरी हो जाती हैं तो चेक बाउंस के मामले को ट्रायल से पहले के स्टेज पर इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता कि चेक किसी कानूनी रूप से लागू होने वाले कर्ज़ के लिए जारी नहीं किया गया।कोर्ट ने कहा कि चेक किसी कानूनी रूप से लागू होने वाले कर्ज़ के लिए जारी किया गया या नहीं, यह ट्रायल का मामला है, और इसे ट्रायल से पहले के स्टेज पर तय नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा,“जब धारा 138 की बुनियादी शर्तें पूरी हो...

बैंकों द्वारा अकाउंट को धोखाधड़ी घोषित करने से पहले कर्जदार की व्यक्तिगत सुनवाई ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया राजेश अग्रवाल फैसला
बैंकों द्वारा अकाउंट को 'धोखाधड़ी' घोषित करने से पहले कर्जदार की व्यक्तिगत सुनवाई ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया 'राजेश अग्रवाल' फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को फैसला सुनाया कि कर्जदारों के पास यह कानूनी अधिकार नहीं है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के तहत बैंकों द्वारा उनके अकाउंट को "धोखाधड़ी" के रूप में वर्गीकृत किए जाने से पहले उनकी व्यक्तिगत (मौखिक) सुनवाई हो। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि डिफ़ॉल्टरों को प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए पूरी फ़ॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट दी जानी चाहिए।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें हाईकोर्ट ने...

S.528 BNSS | विश्वसनीय सबूत आरोपों को गलत साबित कर दें तो आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
S.528 BNSS | विश्वसनीय सबूत आरोपों को गलत साबित कर दें तो आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को फैसला सुनाया कि जहां अभियोजन पक्ष ऐसे विश्वसनीय और अकाट्य सबूतों का खंडन करने में विफल रहता है, जो शिकायत के तथ्यात्मक आधार को प्रभावी ढंग से कमजोर करते हैं, वहां कोर्ट के लिए कार्यवाही रद्द करने की अपनी शक्ति का प्रयोग करना उचित होगा।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने उन अपीलकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की, जिन पर एक बुजुर्ग व्यक्ति पर हमला करने का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि CCTV फुटेज काफी महत्वपूर्ण साबित...

गलत तरीके से सार्वजनिक काम देने का एक भी मामला अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट
गलत तरीके से सार्वजनिक काम देने का एक भी मामला अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक शुरुआती जांच करने का आदेश दिया। यह जांच अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर लगे पक्षपात के आरोपों और उनके रिश्तेदारों व करीबी सहयोगियों को काम के ठेके देने में खुली और प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया से बार-बार हटने के तरीकों से जुड़े आरोपों पर आधारित है।कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक ठेके देने के फैसले संविधान के अनुच्छेद 14 के दायरे में आते हैं। राज्य से यह उम्मीद की जाती है कि वह जनहित को सुरक्षित रखने के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और मनमानी से...

आवंटित ज़मीन को विकसित न कर पाने पर कोई राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने Piaggio के पक्ष में लीज़ रद्द करने का फ़ैसला सही ठहराया
'आवंटित ज़मीन को विकसित न कर पाने पर कोई राहत नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने Piaggio के पक्ष में लीज़ रद्द करने का फ़ैसला सही ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को Piaggio Vehicles Pvt. Ltd. को दी गई लीज़ रद्द करने का फ़ैसले सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि कंपनी तय समय सीमा के भीतर औद्योगिक प्लॉट पर निर्माण या विकास कार्य करने में नाकाम रही, इसलिए वह किसी भी तरह की राहत पाने की हकदार नहीं है।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा,"...इस नतीजे से बचा नहीं जा सकता कि, जिस दिन लीज़ दी गई... तब से लेकर अब तक अपील करने वाली कंपनी इस प्लॉट पर एक पूरी तरह से औद्योगिक निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए...