सुप्रीम कोर्ट

'पीड़िता के बयान को आंशिक रूप से स्वीकार और आंशिक रूप से अस्वीकार नहीं किया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने रेप केस में व्यक्ति को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 सितंबर) को व्यक्ति को रेप के आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी आरोप पर फैसला करते समय कोर्ट पीड़िता की गवाही आंशिक रूप से खारिज नहीं कर सकता और फिर उसी गवाही को आंशिक रूप से स्वीकार करके आरोपी को रेप का दोषी नहीं ठहरा सकता।जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया। हाईकोर्ट ने सेशंस कोर्ट द्वारा अपीलकर्ता को रेप के लिए दोषी ठहराए जाने का फैसला बरकरार रखा। यह दोषसिद्धि पीड़िता की गवाही के उस...

सुप्रीम कोर्ट ने जहाज़ की ज़ब्ती का आदेश रद्द किया, कहा- सही तरीके से बेयरबोट चार्टर खत्म होने पर डिमाइस चार्टर भी खत्म हो जाता है
समुद्री और एडमिरल्टी कानूनों के संदर्भ में एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 सितंबर) को कहा कि जब जहाज़ का मालिक सही तरीके से डिमाइस या बेयरबोट चार्टर को खत्म करता है तो चार्टर खत्म हो जाता है, भले ही मालिक ने अभी तक जहाज़ का कब्ज़ा वापस न लिया हो।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने एडमिरल्टी (समुद्री दावों का अधिकार क्षेत्र और निपटान) अधिनियम, 2017 की धारा 5(1)(b) और धारा 5(2) के तहत जहाज़ M.V. Nereus Progress की ज़ब्ती से...

S.413 BNSS | मजिस्ट्रेट के बरी करने के आदेश के खिलाफ पीड़ित की अपील सेशंस कोर्ट में होगी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा बरी करने के आदेश के खिलाफ पीड़ित की अपील सेशंस कोर्ट में की जानी चाहिए, न कि हाई कोर्ट में।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"...जब फर्स्ट क्लास या सेकंड क्लास मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए ट्रायल में दोषी ठहराया जाता है तो अपील सेशंस कोर्ट में होती है। BNSS की धारा 413 के प्रावधान के अनुसार, बरी करने के आदेश के खिलाफ पीड़ित द्वारा दायर अपील भी उसी कोर्ट में होनी चाहिए, जहां ऐसे कोर्ट के दोषी ठहराने के आदेश के खिलाफ आम तौर पर अपील...

नुकसान या भेदभाव के सबूत के बिना सिर्फ़ प्रक्रियात्मक चूक के आधार पर पूरे हो चुके ट्रायल को दोबारा सुनवाई के लिए नहीं भेजा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत पूरा हो चुका ट्रायल सिर्फ़ इस आधार पर दोबारा सुनवाई के लिए नहीं भेजा जा सकता कि बचाव पक्ष के सबूतों से जुड़ी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, खासकर तब जब आरोपी ने यह साबित न किया हो कि उसे इससे कोई नुकसान या भेदभाव (prejudice) हुआ है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने केरल हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द किया, जिसमें बचाव पक्ष के सबूतों के चरण से नया ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया गया था, जबकि...

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को 2026 की ICU गाइडलाइंस लागू करने का निर्देश दिया, इंफ्रास्ट्रक्चर और भर्ती के लिए समय-सीमा तय की
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 'इंटेंसिव केयर सर्विसेज़ के ऑर्गनाइज़ेशन और डिलीवरी' के लिए 2026 की गाइडलाइंस लागू करने का निर्देश दिया। इसमें ICU इंफ्रास्ट्रक्चर की खास ज़रूरतों के लिए ज़्यादा से ज़्यादा नौ महीने और क्रिटिकल-केयर स्टाफ़ की भर्ती के लिए छह महीने का समय तय किया गया।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह निर्देश ऐसे मामले में दिए, जिसमें कोर्ट ICU और क्रिटिकल-केयर सर्विसेज़ के लिए एक जैसे स्टैंडर्ड्स न होने की स्थिति पर नज़र...

कर्मचारी को हटाने वाला अधिकारी नियुक्ति करने वाले अधिकारी के बराबर पद का है तो आर्टिकल 311 के तहत रोक लागू नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 311(1) के तहत संवैधानिक सुरक्षा तभी लागू होती है, जब हटाने वाला अधिकारी, नियुक्ति करने वाले अधिकारी से निचले पद का हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानूनी नियमों के तहत किसी निचले अधिकारी को अनुशासनात्मक शक्तियां सौंपने (डेलिगेशन) से संवैधानिक रोक लागू नहीं होती।बता दें, आर्टिकल 311(1) किसी सिविल सेवक को उस अधिकारी द्वारा बर्खास्त या हटाने से रोकता है, जो उसकी नियुक्ति करने वाले अधिकारी से निचले पद का हो। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच...

CrPC की धारा 156(3) के तहत आदेश संज्ञान लेने से पहले का कदम, इस स्टेज पर CrPC की धारा 197 के तहत मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973 (CrPC, अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 175(3)) की धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट का FIR दर्ज करने और जांच का आदेश देना संज्ञान लेने से पहले का कदम है। सरकारी कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने के लिए CrPC की धारा 197 (अब BNSS की धारा 218) के तहत पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत सिर्फ़ संज्ञान लेने के स्टेज पर होती है, न कि FIR दर्ज करने या जांच के स्टेज पर।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कर्नाटक...

सुप्रीम कोर्ट का सुझाव: कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट की अनुसूची में कमर्शियल मुकदमों के निष्पादन के नियम शामिल करें
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि सरकार कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 में संशोधन कर सकती है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कमर्शियल मुकदमों में निष्पादन की प्रक्रिया 'कमर्शियल कोर्ट रूल्स' के अनुसार होगी, जो 2021 से अधिसूचित (Notified) नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने प्रस्ताव दिया कि इन नियमों को एक अनुसूची (Schedule) जोड़कर एक्ट का हिस्सा बनाया जा सकता है।कमर्शियल कोर्ट रूल्स के ड्राफ्ट को इसलिए अधिसूचित नहीं किया गया, क्योंकि केंद्र सरकार का कहना था कि यह 'कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर' (CPC) के कुछ प्रावधानों...

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की कस्टडी के मामलों में POCSO Act के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय तय किए, पिता के खिलाफ झूठी FIR रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने शादी और बच्चों की कस्टडी से जुड़े झगड़ों में 'प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट, 2012' (POCSO Act) का हथियार के तौर पर गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कुछ सुरक्षा उपाय तय किए। ये उपाय एक नाबालिग लड़की के पिता पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली FIR रद्द करते हुए तय किए गए, क्योंकि सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (CBI) की जांच में आरोप भरोसेमंद नहीं पाए गए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच तलाकशुदा जोड़े - जिन्हें फैसले में 'R' (पिता) और 'E' (माता) कहा...

'POCSO केस का सामना कर रहे माता-पिता को कस्टडी नहीं दी जा सकती': सुप्रीम कोर्ट ने माँ को बच्चों के साथ इंग्लैंड जाने की इजाज़त दी
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (23 सितंबर) को एक माँ को अपने दो नाबालिग बच्चों के साथ यूनाइटेड किंगडम (UK) जाने की इजाज़त दी। साथ ही कोर्ट ने बच्चों की कस्टडी पिता को देने से इनकार किया, क्योंकि उन पर 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012' (POCSO Act) के तहत मुकदमा चल रहा है। कोर्ट ने कहा कि POCSO Act के तहत मुकदमा झेल रहे माता-पिता में से किसी को भी बच्चों की कस्टडी पाने का हकदार नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने गौर किया कि 2023 में आक्रामक व्यवहार दिखाने के बाद NIMHANS में जाँच के दौरान बेटे ने...

छह साल की सौतेली बेटी से दुष्कर्म और हत्या के दोषी की फांसी सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदली
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में छह साल की सौतेली बेटी से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए फांसी की सजा उम्रकैद में बदलने का आदेश दिया।आरोपी वारिस को जावरा की पॉक्सो विशेष अदालत ने 17 दिसंबर 2018 को IPC की धारा 376(2)(F), 376(2)(N), 376(AB), 302 और 201 तथा POCSO Act की धारा 5/6 के तहत दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट ने धारा 376AB और 302 के...

इस अनुमान पर मुकदमा रोकने का आदेश नहीं दिया जा सकता कि विदेशी कोर्ट ऐसा आदेश दे सकता है, जिसे भारत में लागू न किया जा सके: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इस अंदाज़े या आशंका के आधार पर 'एंटी-सूट इंजंक्शन' (मुकदमा रोकने का आदेश) नहीं दिया जा सकता कि विदेशी कोर्ट अंततः ऐसे आधार पर आदेश (डिक्री) दे सकता है, जिसे भारतीय वैवाहिक कानून के तहत मान्यता नहीं है, इसलिए उस आदेश को भारत में लागू नहीं किया जा सकेगा।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने पति की वह अपील खारिज की, जो कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ थी। हाईकोर्ट ने अलीपुर कोर्ट के उस आदेश में दखल दिया था, जिसमें पति के पक्ष में 'एंटी-सूट इंजंक्शन'...

चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को चुनौती: जस्टिस दीपांकर दत्ता ने नियुक्ति प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ के समक्ष भेजने का निर्देश दिया।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की दो सदस्यीय पीठ इस बात पर अलग-अलग राय पर पहुंची कि मामले को बड़ी पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। हालांकि, दोनों जजों ने अंततः मामले को Chief Justice of India के समक्ष रखने का निर्देश दिया, ताकि उचित संख्या वाली Constitution Bench का गठन किया जा सके। पीठ ने कहा कि...

BREAKING | स्टूडेंट की NSA हिरासत रद्द करने और नोएडा DM की आलोचना वाले हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें गौतम बुद्ध नगर जिले (नोएडा) की मजिस्ट्रेट मेधा रूपम को नोएडा में मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रा आकृति चौधरी को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में रखने के लिए अपनी सैलरी से 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया था।कोर्ट ने उस फ़ैसले के अमल पर भी रोक लगाई, जिसमें छात्रा की हिरासत रद्द की गई थी।जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने DM और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर दो अलग-अलग...

'साइबर क्राइम एक लत, इसमें आसानी से पैसे मिलते हैं': सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर क्राइम के आरोपी व्यक्ति को ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा कि साइबर क्राइम एक लत की तरह है। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता (आरोपी) के खिलाफ़ पहले भी इसी तरह के तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह देखते हुए कि पिछले एक साल में सिर्फ़ एक गवाह से पूछताछ हुई है, कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुक़दमे की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी की जाए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ़ स्पेशल लीव एप्लीकेशन (SLP) पर सुनवाई...

जस्टिस जयश्री ठाकुर के पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल में को-ऑप्शन पर आपत्ति खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस जयश्री ठाकुर को पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के सदस्य के रूप में को-ऑप्ट किए जाने के खिलाफ दाखिल आपत्ति खारिज की।आपत्ति इस आधार पर उठाई गई थी कि जस्टिस जयश्री ठाकुर इससे पहले स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में कार्य कर चुकी हैं। इन चुनावों से जुड़े चुनाव संबंधी मामले पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस हेमा कोहली की अध्यक्षता वाले इलेक्शन ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित हैं।यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ (CJI) इंडिया...

Hindu Succession Act | बिना बंटवारे के भी S14(1) के तहत विधवा का सीमित अधिकार पूर्ण अधिकार बन जाता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक हिंदू विधवा, जिसे 'हिंदू महिला संपत्ति अधिकार अधिनियम, 1937' के तहत अपने मृत पति की संपत्ति में अधिकार मिला है, वह 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956' की धारा 14(1) के तहत उस अधिकार की पूर्ण मालिक बन सकती है, भले ही संपत्ति का कोई बंटवारा न हुआ हो।कोर्ट ने कहा कि भले ही संपत्ति का बंटवारा न हुआ हो, लेकिन 1956 से पहले पति की मृत्यु पर विरासत में मिली संपत्ति में विधवा का सीमित अधिकार सिर्फ़ इसलिए खत्म नहीं हो जाता कि उसने औपचारिक बंटवारे की मांग नहीं की या उसे हासिल नहीं...

'सरकारी स्कीम के तहत अस्पतालों को रीइम्बर्समेंट मिलने के बावजूद, मरीज़ों से दवाइयों के लिए ज़्यादा कीमत वसूलना टैक्सपेयर्स पर बोझ': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मरीज़ों से दवाइयों के लिए ऐसी कीमत वसूलना जो मैन्युफैक्चरर द्वारा बेची जाने वाली कीमत से कहीं ज़्यादा हो, "साफ़ तौर पर धोखाधड़ी का मामला" है, खासकर तब जब अस्पताल बाद में सरकारी हेल्थ स्कीम से रीइम्बर्समेंट (खर्च की भरपाई) लेते हैं।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की, जिनमें दवाइयों की कीमतों को रेगुलेट करने और मैन्युफैक्चरर द्वारा रिटेलर्स को बेची जाने वाली कीमत और उन पर छपी MRP के बीच बड़े अंतर पर...

धोखाधड़ी के मामले में असली डीड पेश न कर पाना आरोपी को बरी करने का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (22 सितंबर) को कहा कि प्री-ट्रायल स्टेज पर धोखाधड़ी के आरोप को साबित करने के लिए जाली दस्तावेज़ पेश न कर पाना अभियोजन पक्ष (Prosecution) का मामला रद्द करने का कारण नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट जमा करने के बाद भी, ऐसा कोई दस्तावेज़ जो चार्जशीट के साथ जमा नहीं किया गया, उसे बाद में पेश किया जा सकता है।कोर्ट ने कहा,"...धोखाधड़ी का आरोप साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष जिस असली दस्तावेज़ पर निर्भर है, उसका न होना ट्रायल के दौरान विचार करने का विषय होगा और केवल उसके न...

जब टेंडर मंज़ूर करना साफ़ तौर पर NIT की शर्तों के ख़िलाफ़ हो तो कोर्ट दखल दे सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 सितंबर) को कहा कि हालांकि कोर्ट को आम तौर पर टेंडर देने वाली अथॉरिटी की कमर्शियल समझ का सम्मान करना चाहिए, लेकिन यह सम्मान टेंडर की शर्तों की ऐसी व्याख्या तक नहीं बढ़ सकता, जो 'नोटिस इनवाइटिंग टेंडर' (NIT) के ख़िलाफ़ हो या साफ़ तौर पर मनमानी हो।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने एक मामले की सुनवाई की, जिसमें 16 करोड़ रुपये से ज़्यादा के कॉन्ट्रैक्ट के तहत 12 महीनों में मंडी परिसर में आने वाले बड़ी संख्या में वाहनों से यूज़र चार्ज वसूलने का काम...
