सुप्रीम कोर्ट
9 साल से जेल में बंद विचाराधीन कैदी ज़मानत का हकदार, क्योंकि उसके अनुच्छेद 21 के अधिकार का उल्लंघन हुआ: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे विचाराधीन कैदी को ज़मानत दी, जो पिछले 9 सालों से जेल में बंद था। ज़मानत देने का आधार यह था कि उसके अनुच्छेद 21 के अधिकार का उल्लंघन हुआ।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने ज़मानत देते हुए यह दोहराया कि किसी भी विचाराधीन कैदी को अनिश्चित काल तक जेल में बंद नहीं रखा जा सकता।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में ज़मानत देने से इनकार किया था। उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 120B और 302...
'n-Hexane' 'Motor Spirit' नहीं है: कस्टम ड्यूटी पर सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस के खिलाफ रिवेन्यू अपील खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंपोर्ट किया गया प्रोडक्ट 'n-hexane' - जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से केमिकल बनाने या वनस्पति तेल निकालने में होता है - को सिर्फ इसलिए पेट्रोलियम प्रोडक्ट/मोटर फ्यूल के तौर पर क्लासिफाई नहीं किया जा सकता, ताकि उस पर कम ड्यूटी लगे, क्योंकि उसका फ्लैश पॉइंट कम है।कस्टम डिपार्टमेंट की अपील खारिज करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने Reliance Industries Ltd. को राहत दी। बेंच ने Customs Excise and Service Tax Appellate Tribunal (CESTAT) के उस फैसले...
बांके बिहारी मंदिर में पारंपरिक पूजा व्यवस्था बहाल करने और भीड़ प्रबंधन सुधारने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों को बहाल करने और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर भीड़ प्रबंधन व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने गोस्वामियों के दो समूहों—शयन भोग और राज भोग—से दो-दो प्रतिनिधियों को समिति में शामिल करने की अनुमति दी, ताकि वे मंदिर के दैनिक संचालन और धार्मिक परंपराओं को लेकर सुझाव दे सकें।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने कहा कि समिति इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी। सुप्रीम...
शव मिलने से पहले ही पुलिस ने लगा दी थी हत्या की धाराएं: सुप्रीम कोर्ट ने 4 आरोपियों की बरी बरकरार रखी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 मई) को हत्या के एक मामले में चार आरोपियों को बरी करने के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि मृतक के शव की बरामदगी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी और केवल उसी आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने पाया कि पुलिस ने लापता व्यक्ति की शिकायत को शव मिलने से पहले ही हत्या का मामला मान लिया था, जिससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।मामला अशोक कुमार शर्मा नामक बोलेरो जीप चालक के गायब होने...
फोन पर दवा बताने से डॉक्टर अपराधी नहीं बन जाता: सुप्रीम कोर्ट ने एनेस्थेटिस्ट को दी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 मई) को एक एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर को मेडिकल लापरवाही के आपराधिक मामले से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ड्यूटी समाप्त होने के बाद फोन पर नर्स को दवा सुझाने मात्र से डॉक्टर को मरीज की मौत के लिए IPC की धारा 304-A के तहत आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें डॉक्टर के खिलाफ मेडिकल नेग्लिजेंस का मामला खत्म करने से इनकार किया गया था।मामला 2002 का है, जब कन्नूर के...
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जिस उद्योग के लिए नीति बनी ही नहीं, उसे 'प्रॉमिसरी एसटॉपल' के आधार पर लाभ नहीं मिल सकता
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 मई) को कहा कि 'प्रॉमिसरी एसटॉपल' (Promissory Estoppel) के सिद्धांत का इस्तेमाल करके कोई उद्योग सरकार की ऐसी नीति का लाभ नहीं मांग सकता, जो मूल रूप से उस श्रेणी के उद्योगों के लिए बनाई ही नहीं गई हो।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एक पुराने औद्योगिक इकाई को औद्योगिक नीति 2019 के तहत रियायती बिजली दरों का लाभ देने का निर्देश दिया गया था।मामला एक मेटल प्रोसेसिंग और स्टैम्पिंग कंपनी...
ससुराल वालों पर सिर्फ़ पत्नी को तालमेल बिठाने के लिए कहने पर मुक़दमा नहीं चलाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न, 498A का केस रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 मई) को एक महिला के ससुराल वालों के ख़िलाफ़ घरेलू क्रूरता, घरेलू हिंसा और दहेज की मांग से जुड़ी कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि शादी-शुदा विवादों में पति के रिश्तेदारों के ख़िलाफ़ मुक़दमा जारी रखने के लिए, बिना किसी ठोस सबूत या विशिष्ट कृत्यों के, सिर्फ़ आम और सामान्य आरोप काफ़ी नहीं हैं।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शिकायतकर्ता के ससुराल वालों की अपील को मंज़ूर किया। बेंच ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच का आदेश रद्द किया,...
सुप्रीम कोर्ट ने कमर्शियल कोर्ट रूल्स को नोटिफाई करने में देरी पर सवाल उठाया, कहा: हाईकोर्ट डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूशन सेल बनाने पर विचार कर सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 मई) को केंद्र सरकार द्वारा ड्राफ़्ट कमर्शियल कोर्ट रूल्स, 2021 को नोटिफाई न करने की गंभीर रूप से आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि देश को एग्जीक्यूशन याचिकाओं (अदालती आदेशों को लागू करने वाली याचिकाओं) के प्रभावी और तेज़ी से निपटारे में "बड़ी चुनौती" का सामना करना पड़ रहा है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने इस बात का स्वतः संज्ञान लिया कि "ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस" (व्यापार करने में आसानी) पर कानून और न्याय मंत्रालय के टास्क फ़ोर्स द्वारा तैयार किए गए...
सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की हत्या के लिए पति को ठहराया दोषी, महिलाओं को ज़बरदस्ती प्रताड़ना भरे विवाह में वापस भेजने के खिलाफ दी चेतावनी
अपनी पत्नी की हत्या और उसके साथ घरेलू क्रूरता करने के आरोप में पति की सज़ा बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 मई) को उस सामाजिक विफलता की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें विवाहित बेटियों को उनके ससुराल में होने वाली तकलीफ़ों को पहचाना नहीं जाता। कोर्ट ने पाया कि मृत पीड़िता की घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न की बार-बार की शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया गया या उन्हें मामूली बात मान लिया गया, और उस पर अपने पति से सुलह करने और वैवाहिक जीवन फिर से शुरू करने का दबाव डाला गया।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और...
S. 307 IPC | चोट की गंभीरता ही हत्या के प्रयास के लिए दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं, जब तक कि जान लेने के इरादे का सबूत न हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक जान लेने का आपराधिक इरादा (mens rea) साबित नहीं हो जाता, तब तक हत्या के प्रयास के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, भले ही घायल व्यक्ति को कितनी भी गंभीर चोट क्यों न लगी हो।सुप्रीम कोर्ट ने कहा,"...चोट की गंभीरता अपने आप में IPC की धारा 307 के तहत अपराध को तय करने का आधार नहीं हो सकती, जब तक कि अभियोजन पक्ष उस धारा के तहत ज़रूरी आपराधिक इरादा (mens rea) को साबित न कर दे।" जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए पंजाब...
दूसरी बार ज़मानत देते समय आदेश में हालात में बदलाव या नए आधारों का ज़िक्र होना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि पिछली ज़मानत अर्ज़ी खारिज होने के बाद अगली ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई करते समय अगर नए आधारों के होने का ज़िक्र नहीं किया जाता है तो ज़मानत का आदेश रद्द किया जा सकता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"हालांकि हाईकोर्ट के पास किसी ऐसे आरोपी को ज़मानत देने पर कोई पूरी तरह से रोक नहीं है, जिसकी ज़मानत पहले इस कोर्ट ने रद्द कर दी थी, लेकिन ज़मानत देने के पीछे ऐसे कारण होने चाहिए, जो या तो हालात में बदलाव दिखाएं या फिर ऐसे नए आधारों के...
पंचनामा रिपोर्ट में नाम न होना आरोपी की बेगुनाही का प्रमाण नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल पंचनामा रिपोर्ट में आरोपी का नाम दर्ज न होने के आधार पर उसे जमानत नहीं दी जा सकती, यदि जांच में अन्य ऐसे साक्ष्य मौजूद हों, जो प्रथम दृष्टया उसके अपराध में शामिल होने की ओर संकेत करते हों।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेकापम कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें हत्या के आरोपी को इस आधार पर जमानत दी गई थी कि पंचनामा कार्यवाही के दौरान उसका नाम सामने नहीं आया।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर अपराधों में अदालतों को जमानत देते समय...
केवल धोखाधड़ी का आरोप काफी नहीं, GPA को लोन सुरक्षा बताने का सबूत देना होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के जरिए किए गए संपत्ति लेनदेन वास्तव में बिक्री नहीं बल्कि केवल लोन की सुरक्षा के लिए थे, तो इसे साबित करने की जिम्मेदारी उसी पर होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल धोखाधड़ी या विश्वास के दुरुपयोग के आरोप पर्याप्त नहीं माने जा सकते।जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने तमिलनाडु के एक संपत्ति विवाद में अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें...
आरोपी का खुद को बेकसूर बताने वाला और सह-आरोपी को फंसाने वाला बयान भरोसे लायक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (22 मई) को हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने का फैसला रद्द किया। कोर्ट ने पाया कि किसी आरोपी का अदालत के बाहर दिए गए बयान (Extra-Judicial Confession) के ज़रिए दूसरे सह-आरोपियों को फंसाना और उन्हें बयान देने वाले से जिरह करने का मौका न देना, अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक होगा। साथ ही किसी को दोषी ठहराने के लिए ऐसे बयान भरोसे लायक नहीं माने जा सकते।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट का वह फैसला पलट दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस...
सुप्रीम कोर्ट ने 'अनैतिकता' के अर्थ का विस्तार किया, कहा - महिला के नहाते हुए वीडियो लीक करने की धमकी देना दंडनीय अपराध
महिलाओं की गरिमा, निजता और यौन स्वायत्तता पर महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून के तहत "अनैतिकता" की अवधारणा को आधुनिक संवैधानिक मूल्यों की रोशनी में समझा जाना चाहिए, न कि पुराने नैतिक ढांचों के आधार पर।कोर्ट ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति की सज़ा को बरकरार रखते हुए की। उस व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 506 के भाग II के तहत दोषी ठहराया गया, क्योंकि उसने एक महिला के नहाते हुए निजी वीडियो को Facebook पर अपलोड करने की धमकी दी थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा आचरण उस प्रावधान के...
बच्चों के लापता होने के मामलों में अपहरण की आशंका मानकर आगे बढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की तस्करी से निपटने के लिए निर्देश जारी किए
देश भर में लापता बच्चों की चिंताजनक संख्या का गंभीर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (22 मई) को लापता बच्चों का पता लगाने में व्यवस्थागत कमियों को दूर करने और राज्यों के बीच सक्रिय तस्करी के नेटवर्क से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने लापता बच्चों के लगातार बढ़ते मामलों पर नाराजगी व्यक्त की, जब उन्हें पता चला कि पूरे भारत में लगभग 47,000 बच्चों का अभी भी कोई पता नहीं चल पाया है, और हर साल हजारों नए मामले इसमें जुड़ रहे...
सुप्रीम कोर्ट ने टेंडर डॉक्यूमेंट में 'May' शब्द की HC की व्याख्या को 'Shall' मानने पर गलती बताई, ठेकेदार को राहत दी
यह देखते हुए कि टेंडर डॉक्यूमेंट में इस्तेमाल किए गए शब्द "may" (सकता है) की व्याख्या "shall" (होना ही चाहिए) के रूप में नहीं की जा सकती, सुप्रीम कोर्ट ने एक ठेकेदार को राहत दी। इस ठेकेदार की बोली (bid) को इसलिए खारिज कर दिया गया, क्योंकि उसने अर्नेस्ट मनी डिपॉज़िट (EMD) डिमांड ड्राफ्ट के बजाय फिक्स्ड डिपॉज़िट के ज़रिए जमा किया था, जबकि टेंडर की शर्तों में EMD सिर्फ़ DD के ज़रिए जमा करने की कोई अनिवार्यता नहीं थी।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"क्लॉज़ 2.15 में भी...
सिर्फ इसलिए रेगुलराइज़ेशन से मना नहीं किया जा सकता कि शुरुआती नियुक्ति स्वीकृत पद के खिलाफ नहीं थी: सुप्रीम कोर्ट
एक बड़े घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (21 मई) को फैसला सुनाया कि सिर्फ इस बात से कि कर्मचारियों को शुरू में अस्थायी आधार पर नियुक्त किया गया था और स्वीकृत पदों के खिलाफ नहीं, वे 'स्टेट ऑफ़ कर्नाटक बनाम उमा देवी' मामले में तय किए गए सिद्धांतों के तहत रेगुलराइज़ेशन की मांग करने के हकदार नहीं रह जाएंगे।कोर्ट ने टिप्पणी की कि जहां कर्मचारियों ने उन विभागों में दशकों तक लगातार सेवा दी, जो नियमित सरकारी कार्य करते हैं, वहां वे अभी भी रेगुलराइज़ेशन पर विचार किए जाने के हकदार होंगे, भले ही उनकी...
'ज़मानत के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल आम निर्देश जारी करने के लिए नहीं किया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने समन तामील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों को रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ज़मानत की कार्यवाही में जारी किए गए उन निर्देशों को रद्द कर दिया, जिनमें ट्रायल कोर्ट को समन और ज़बरदस्ती की प्रक्रियाओं की तामील के लिए खास कदम उठाने को कहा गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत ज़मानत के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए इतने दूरगामी निर्देश जारी नहीं किए जा सकते।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने आरोपी रामबालक द्वारा दायर अपील पर यह फ़ैसला सुनाया। रामबालक ने...
वैवाहिक घर में पत्नी की मौत की वजह न बता पाने पर पति के खिलाफ़ धारा 106 के तहत प्रतिकूल निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा सही ठहराई
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (21 मई) को एक पति को अपनी पत्नी का गला घोंटकर हत्या करने के मामले में दी गई सज़ा को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि एक बार जब अभियोजन पक्ष यह साबित कर देता है कि कुछ ऐसे तथ्य जो आरोपी को फंसा सकते हैं, वे विशेष रूप से आरोपी के निजी संज्ञान में थे, तो भारतीय सबूत अधिनियम, 1872 की धारा 106 के तहत यह ज़िम्मेदारी आरोपी पर आ जाती है कि वह उन तथ्यों के बारे में कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण दे।कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक घर के भीतर हुई मौत के कारणों और परिस्थितियों के बारे में पति का कोई...

















