सुप्रीम कोर्ट
'टैक्स बचाने के लिए किया गया ट्रांजैक्शन': सुप्रीम कोर्ट ने फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील में टाइगर ग्लोबल को इनकम टैक्स में राहत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में फ्लिपकार्ट की सिंगापुर होल्डिंग कंपनी को वॉलमार्ट को बेचने से जुड़े टैक्स विवाद पर फैसला सुनाया, जिसमें मॉरीशस स्थित टाइगर ग्लोबल संस्थाओं ने इस ट्रांजैक्शन से काफी कैपिटल गेन कमाया था।कोर्ट ने कहा कि अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग्स ने टाइगर ग्लोबल के उन गेन पर टैक्स लगने के बारे में फैसला मांगने वाले आवेदनों को शुरुआती तौर पर खारिज करके सही किया था, क्योंकि यह पाया गया कि यह ट्रांजैक्शन पहली नज़र में टैक्स बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के...
AP Stamp Act | एग्रीमेंट टू सेल पर स्टैंप ड्यूटी तभी लगेगी, जब उसके साथ पज़ेशन भी दिया जाए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (15 जनवरी) को फैसला सुनाया कि आंध्र प्रदेश स्टैंप एक्ट के अनुसार, 'बिक्री के एग्रीमेंट' पर स्टैंप ड्यूटी तब तक नहीं देनी होगी, जब तक उसमें पज़ेशन देने की शर्त न हो।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने आंध्र प्रदेश स्टैंप एक्ट के संदर्भ में यह फैसला सुनाया। साथ ही हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि बिक्री का एग्रीमेंट एक तरह का ट्रांसफर है। इसके लिए एक्ट के शेड्यूल I-A के आर्टिकल 47A के एक्सप्लेनेशन I के तहत स्टैंप ड्यूटी और पेनल्टी...
जब मरने से पहले दिए गए बयान के रूप में सीधा सबूत मौजूद हो तो मकसद अहम नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (15 जनवरी) को एक आदमी को अपनी पत्नी की हत्या के लिए दोषी ठहराने का फैसला बहाल कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब मरने से पहले दिए गए बयान जैसे साफ और भरोसेमंद सीधे सबूत हों तो मकसद का न होना अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक नहीं होता।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए कहा,"मकसद मुख्य रूप से उन मामलों में अहम होता है, जो हालात के सबूतों पर आधारित होते हैं। जहां एक भरोसेमंद और विश्वसनीय मरने से पहले दिए गए बयान के रूप...
मुकदमे के दौरान संपत्ति खरीदने वाले को 'बोना फाइड खरीदार' का संरक्षण नहीं मिलेगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी संपत्ति का हस्तांतरण (बिक्री) उस समय किया जाता है जब उस पर विशिष्ट निष्पादन (specific performance) का मुकदमा पहले से लंबित हो, तो ऐसे खरीदार को विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 की धारा 19(b) के तहत संरक्षण नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में स्थानांतरण संपत्ति अधिनियम, 1882 की धारा 52 के तहत Lis Pendens (लंबित मुकदमे के दौरान किया गया हस्तांतरण) का सिद्धांत लागू होगा।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयाँ की खंडपीठ ने कहा कि धारा 19(b) केवल उन खरीदारों को सुरक्षा...
कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़े जाने चाहिए दिव्यांग अधिकार, तभी कार्यस्थल पर सच्ची समानता संभव: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए, ताकि ऐसे वर्गों के मानवाधिकारों की प्रभावी सुरक्षा हो सके और कार्यस्थल पर वास्तविक समानता सुनिश्चित की जा सके।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिव्यांग अधिकार केवल कल्याण का विषय नहीं हैं, बल्कि वे मानवाधिकार हैं, जिनका सम्मान और संरक्षण कॉरपोरेट संस्थाओं की जिम्मेदारी है।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें...
RTE Act की कल्पना: जजों और रेहड़ी-पटरी वालों के बच्चे एक साथ पढ़ें, भाईचारे और समानता को बढ़ावा देता है – सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 ( RTE Act) के तहत कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए निजी गैर-अनुदानित स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण की प्रभावी क्रियान्विति भारत की सामाजिक संरचना को बदलने की क्षमता रखती है और इसे एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे के संवैधानिक मूल्यों को व्यवहार में उतारने का एक सशक्त माध्यम है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए.एस....
सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों में 25% RTE कोटा को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए, राज्यों को नियम बनाने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की धारा 12(1)(c) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कई निर्देश जारी किए, जिसमें अनिवार्य है कि प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को अपनी कुल संख्या का 25% मुफ्त शिक्षा के लिए एडमिशन देना होगा।कोर्ट ने कहा कि "पड़ोस के स्कूलों" की अवधारणा वर्ग, जाति और लिंग की बाधाओं को तोड़ने के लिए बनाई गई।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने फैसला सुनाते हुए इस बात पर जोर दिया...
नामांकित व्यक्ति (Nominee) को जीपीएफ राशि पाने के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी ने अपने General Provident Fund (GPF) खाते में किसी व्यक्ति को वैध रूप से नामांकित (nominee) किया है, तो उस नामांकित व्यक्ति को पूरी राशि पाने के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate), प्रोबेट या लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होगी — भले ही राशि ₹5,000 से अधिक क्यों न हो।जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया।कोर्ट ने क्या...
ससुर की मृत्यु के बाद विधवा बहू भी उसकी संपत्ति से भरण-पोषण की हकदार : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि जो बहू अपने ससुर की मृत्यु के बाद विधवा होती है, वह भी अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण पाने की अधिकारी है। यह अधिकार हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत मिलता है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 21(vii) में प्रयुक्त शब्द “पुत्र की कोई भी विधवा” (any widow of his son) बिल्कुल स्पष्ट है और इसमें यह शर्त नहीं है कि पुत्र की मृत्यु ससुर से पहले हुई हो। इसलिए यह तय करना कि...
Order XXI Rule 102 CPC | मुकदमे के दौरान संपत्ति खरीदने वाले को डिक्री के एग्जीक्यूशन में रुकावट डालने का कोई अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फिर से कहा कि जो खरीदार मुकदमे के दौरान संपत्ति खरीदता है, यानी ट्रांसफर पेंडेंटे लाइट के तौर पर उसे डिक्री के एग्जीक्यूशन में रुकावट डालने का कोई अधिकार नहीं है और वह कार्यवाही के नतीजे से बंधा रहता है, और ट्रांसफर को सख्ती से डिक्री के अधीन माना जाएगा।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा, जिसमें एक ट्रांसफर पेंडेंटे लाइट द्वारा दायर अपील खारिज कर दी गई थी। उसने सिविल प्रोसीजर कोड (CPC) के ऑर्डर XXI नियम 97 के तहत स्पेसिफिक...
हर आवारा कुत्ते के हमले पर प्रशासन और डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी तय करेंगे: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर गंभीर चिंता जताते हुए संकेत दिया कि यदि किसी व्यक्ति — विशेषकर बच्चों और बुज़ुर्गों — को कुत्तों के हमले से चोट या मृत्यु होती है, तो इसके लिए न केवल नगर निकाय बल्कि कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग भी जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ आवारा कुत्तों से जुड़ी एक सुओ मोटो याचिका की सुनवाई कर रही थी।जस्टिस विक्रम नाथ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा—“अगर किसी बच्चे या बुज़ुर्ग...
पर्सनल ज़िम्मेदारी तय न होने तक बिल्डर कंपनी के खिलाफ़ डिक्री को डायरेक्टर्स/प्रमोटर्स के खिलाफ़ तब तक लागू नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को कहा कि घर खरीदार सिर्फ़ बिल्डर कंपनी के खिलाफ़ मिली डिक्री को उसके डायरेक्टर्स या प्रमोटर्स के खिलाफ़ पर्सनली लागू नहीं कर सकते, जब तक कि ओरिजिनल कार्यवाही में उनके खिलाफ़ ज़िम्मेदारी का कोई खास फ़ैसला न दिया गया हो।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने घर खरीदार की याचिका खारिज करते हुए कहा,"यह साफ़ है कि डिक्री को लागू करने की प्रक्रिया से ज़िम्मेदारी को बदला या बढ़ाया नहीं जा सकता ताकि उन लोगों को बांधा जा सके जो न तो डिक्री के...
Right To Education Act | प्राइवेट स्कूलों में गरीब स्टूडडेंट को मुफ्त शिक्षा मिले, यह सुनिश्चित करें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) की व्याख्या करते हुए कहा कि संबंधित राज्य सरकारों और स्थानीय अधिकारियों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि समाज के कमज़ोर और वंचित वर्गों के स्टूडडेंट्स को आस-पड़ोस के स्कूलों में एडमिशन से मना न किया जाए।कोर्ट ने यह भी कहा कि आस-पड़ोस के स्कूलों की भी यह समान ज़िम्मेदारी है कि वे RTE Act और संविधान के अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) के तहत अनिवार्य रूप से 25% छात्रों को एडमिशन दें।...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने जांच से पहले मंज़ूरी को अनिवार्य बनाने वाले PC Act की धारा 17A की वैधता पर सुनाया खंडिता फैसला
सुप्रीम कोर्ट की दो-जजों की बेंच ने आज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17A की संवैधानिकता पर खंडित फैसला सुनाया, जिसे 2018 के संशोधन द्वारा जोड़ा गया था, जिसमें यह अनिवार्य है कि अधिनियम के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार से पूर्व मंज़ूरी लेनी होगी।जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि धारा 17A असंवैधानिक है, वहीं जस्टिस केवी विश्वनाथन ने ऐसा करने से इनकार किया। इसके बजाय उन्होंने इसे इस तरह से पढ़ा कि मंज़ूरी का सवाल लोकपाल या लोकायुक्त द्वारा तय किया जाना...
विक्रेता स्पेसिफिक परफॉर्मेंस सूट में ज़रूरी पक्ष है, भले ही उसने प्रॉपर्टी तीसरे पक्ष को ट्रांसफर कर दी हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने इस तय कानूनी स्थिति को फिर से पक्का किया कि अचल संपत्ति बेचने के समझौते के स्पेसिफिक परफॉर्मेंस के सूट में विक्रेता एक ज़रूरी पक्ष होता है, भले ही उसने प्रॉपर्टी में अपना हिस्सा किसी तीसरे पक्ष को ट्रांसफर कर दिया हो।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने कहा,"कानून यह तय है कि बिक्री के समझौते के स्पेसिफिक परफॉर्मेंस के सूट में विक्रेता एक ज़रूरी पक्ष होता है, भले ही विक्रेता ने समझौते की विषय वस्तु में अपना हिस्सा किसी तीसरे पक्ष को ट्रांसफर कर दिया हो।"कोर्ट ने...
कानूनी वारिसों को पक्षकार न बनाने से अपील स्वतः निरस्त नहीं होगी, यदि मृतक के हित अन्य वारिसों द्वारा पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्वित हों : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी मृत पक्षकार के हितों का पर्याप्त रूप से उसके अन्य कानूनी वारिसों द्वारा प्रतिनिधित्व किया जा रहा है, तो उसके किसी एक वारिस को प्रतिस्थापित (सब्स्टीट्यूट) न किए जाने मात्र से मुकदमा या अपील अभियोजन से समाप्त (abatement) नहीं मानी जा सकती।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें केवल इस आधार पर विशिष्ट प्रदर्शन (Specific Performance) की डिक्री के...
रिलायंस को विकास हेतु दी गई मुंबई कोस्टल रोड की भूमि सामान्यतः जनता के लिए खुली रहेगी : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुंबई कोस्टल रोड (साउथ) के पास स्थित वह रीक्लेम्ड भूमि, जिसे रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को लैंडस्केपिंग और विकास कार्यों के लिए सौंपा गया है, सामान्य रूप से आम जनता के लिए खुली रहनी चाहिए। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) का निपटारा कर दिया, जिसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा जारी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत निजी एजेंसियों को कोस्टल रोड के किनारे की रीक्लेम्ड भूमि पर लैंडस्केपिंग और मेंटेनेंस का काम दिया जाना...
ठेकेदार के माध्यम से रखे गए कर्मचारी नियमित कर्मियों के समान दर्जा नहीं मांग सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ठेकेदार या तीसरे पक्ष की एजेंसियों के जरिए नियुक्त किए गए कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान सेवा लाभ और दर्जे का दावा नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि यदि ऐसे कर्मचारियों को नियमित कर्मियों के बराबर माना गया तो इससे सार्वजनिक नियुक्ति की पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया की बुनियाद ही कमजोर हो जाएगी।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने कहा कि राज्य संस्थाओं में नियमित नियुक्ति एक सार्वजनिक संपत्ति के समान है, जिसे ठेकेदारों के...
जमानत को मशीनी तरीके से मना नहीं किया जाना चाहिए, इसे अप्रासंगिक बातों पर नहीं दिया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट (POCSO Act) के तहत एक मामले में जमानत दी गई, जिसमें उस पर एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि जमानत का आदेश गलत, अनुचित है और उसने संबंधित सबूतों को नज़रअंदाज़ किया।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने शिकायतकर्ता/पीड़ित की जमानत आदेश के खिलाफ अपील स्वीकार करते हुए कहा,“यह तय कानून है कि सिर्फ चार्जशीट...
S.138 NI Act | एक ही ट्रांज़ैक्शन के कई चेक बाउंस होने पर कई शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही ट्रांज़ैक्शन से जुड़े कई चेक बाउंस होने पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत अलग-अलग केस बन सकते हैं। ऐसी शिकायतों को सिर्फ़ ज़्यादा संख्या के आधार पर शुरुआत में ही खारिज नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया, जिसने चेक बाउंस की शिकायतों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एक ही देनदारी के लिए समानांतर केस चलाना गलत है।हाईकोर्ट के नज़रिए से असहमत होते हुए सुप्रीम...


















