सुप्रीम कोर्ट

Order 7 Rule 11 CPC | अर्ज़ी से ही मामला समय-सीमा के दायरे से बाहर लगे तो उसे शुरुआती स्टेज पर ही खारिज किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर अर्ज़ी (Plaint) में दी गई बातों से यह साफ़ हो जाए कि मामला समय-सीमा (Limitation) के दायरे से बाहर है, तो अर्ज़ी को शुरुआती स्टेज पर ही खारिज किया जा सकता है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"...जब अर्ज़ी में दी गई बातों से ही यह साफ़ हो, तो कोर्ट अर्ज़ी खारिज करने की राहत देने में हिचकिचा नहीं सकता।" कोर्ट ने कहा कि हालांकि समय-सीमा का मुद्दा आम तौर पर तथ्य और कानून का मिला-जुला सवाल होता है, जिस पर ट्रायल के दौरान फैसला करना होता है,...

आपराधिक मामला लंबित होने पर सरकारी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई सरकारी नियोक्ता किसी कर्मचारी को सिर्फ़ इसलिए नौकरी से नहीं निकाल सकता कि उसके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला लंबित है, खासकर तब जब कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का मौका न दिया गया हो।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने पुलिस कॉन्स्टेबल को नौकरी से हटाने को ग़ैर-क़ानूनी माना, क्योंकि उसे हटाते समय उसे दोषी नहीं ठहराया गया और यह आदेश पूरी तरह से आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर दिया गया।कोर्ट ने कहा,"अपीलकर्ता को किसी आपराधिक आरोप में दोषी ठहराए जाने के कारण...

राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने से संपत्ति का मालिकाना हक खत्म नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि राजस्व रिकॉर्ड में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज होने से न तो अचल संपत्ति का मालिकाना हक पैदा होता है और न ही समाप्त होता है। कोर्ट ने कहा कि केवल राजस्व रिकॉर्ड में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज हो जाने के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि मूल सह-स्वामी ने अपनी संपत्ति में हिस्सेदारी स्वेच्छा से छोड़ दी है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ एक संयुक्त पारिवारिक कृषि भूमि से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। भूमि मूल रूप से भगवानसिंह के पास थी, जिनकी...

यमुना के बाढ़ वाले इलाके को नुकसान पहुंचाने के मामले में 'आर्ट ऑफ़ लिविंग' को राहत, सुप्रीम कोर्ट का NGT को जुर्माने के 5 करोड़ वापस करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने (22 अगस्त) नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का आदेश रद्द किया, जिसमें श्री श्री रवि शंकर के 'आर्ट ऑफ़ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर' को मार्च 2016 में 'व्यक्ति विकास केंद्र' द्वारा आयोजित 'वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल' के कारण यमुना नदी के बाढ़ वाले इलाके (फ्लडप्लेन) को हुए नुकसान के लिए 5 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने NGT द्वारा दिसंबर 2017 में पारित आदेश के खिलाफ 'व्यक्ति विकास केंद्र' (जो 'आर्ट ऑफ़ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर'...

आरक्षित वर्ग के मेरिटोरियस उम्मीदवार को बेहतर आरक्षित पद का हक: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरक्षित वर्ग का ऐसा उम्मीदवार, जो मेरिट के आधार पर ओपन कैटेगरी में चयनित हुआ है, आरक्षित वर्ग में उससे कम अंक पाने वाले उम्मीदवार की तुलना में बेहतर पद पाने का हकदार है।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि इस संबंध में कानून पूरी तरह स्थापित है और संविधान पीठ के Union of India v. Ramesh Ram, (2010) 7 SCC 234 सहित कई फैसलों में इसे दोहराया जा चुका है।मामला झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 6वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में आरक्षित वर्ग के...

Contract Act | एजेंट के अधिकार की सीमाएं: सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी के कानून को समझाया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एजेंट का निहित अधिकार (Implied Authority) जोखिम को बढ़ाने या किसी ऐसी कानूनी शर्त को हटाने तक नहीं बढ़ सकता, जिसे खुद प्रिंसिपल (मुख्य पक्ष) भी नहीं अपना सकता। यह टिप्पणी नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के आदेश के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान की गई। कमीशन ने अपीलकर्ता को आग से हुए नुकसान के दावे के लिए अपने ही सर्वेयर द्वारा तय की गई रकम का भुगतान करने का निर्देश दिया था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने न्यू इंडिया...

Judicial Service में 3 साल की Practice Rule घटाकर 1 साल: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने Judicial Service में Civil Judge (Junior Division) के पद पर सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य 3 साल की legal practice की शर्त को बदलते हुए इसे 1 साल की active practice कर दिया है। हालांकि, चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति के बाद एक साल Judicial Academy में training और एक साल structured law clerkship पूरी करनी होगी।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मई 2025 के फैसले के खिलाफ दाखिल review petitions पर यह फैसला सुनाया। जस्टिस विनोद चंद्रन ने...

अगर क्लाइंट विरोधी बन जाए, तब भी वकील उसकी गोपनीय जानकारी ज़ाहिर नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट ने वकील का सस्पेंशन सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (21 अगस्त) को वकील के प्रैक्टिस करने के लाइसेंस को दो साल के लिए सस्पेंड करने का फ़ैसला सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि पब्लिक में लगे आरोपों का जवाब देने के नाम पर पुराने क्लाइंट की गोपनीय जानकारी ज़ाहिर करना सही नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा,"वकील का फ़र्ज़ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि क्लाइंट का वकील के प्रति व्यवहार कैसा रहा है। वकील भरोसे में मिली जानकारी का इस्तेमाल अपने क्लाइंट के ख़िलाफ़ नहीं कर...

सिविल जज भर्ती में LLM को वकालत के बराबर नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की भर्ती के लिए कानून में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री को बार में वकालत के अनुभव के बराबर मानने की मांग खारिज की।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून में पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा को वास्तविक न्यायिक और वकालत के अनुभव का विकल्प नहीं माना जा सकता।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ( CJI) सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह फैसला मई 2025 के उस निर्णय के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें निचली ज्यूडिशियल सर्विसेज में...

105 वर्षीय उम्रकैदी को सुप्रीम कोर्ट ने दी समय से पहले रिहाई, 1988 के हत्या मामले में था दोषी
सुप्रीम कोर्ट ने आज 105 वर्षीय उम्रकैदी रसीक चंद्र मंडल को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने 1988 के हत्या मामले में उन्हें दी गई अंतरिम जमानत/पैरोल को बरकरार रखते हुए उनकी Premature Release का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश पारित किया।1988 में हत्या के मामले में हुई थी गिरफ्तारीमंडल के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस ने वर्ष 1988 में IPC की धारा 143, 448, 302 और 324 के तहत मामला दर्ज किया था। बाद में 12 दिसंबर 1994...

बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी केवल गणित से तय नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी केवल माता-पिता की आय का गणित लगाकर तय नहीं की जा सकती। पत्नी के कमाने मात्र से पति की बच्चों के प्रति भरण-पोषण की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दो नाबालिग बेटियों के अंतरिम भरण-पोषण की राशि 60,000 रुपये से घटाकर 30,000 रुपये प्रति माह कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बहाल करते हुए दोनों बेटियों के लिए प्रति माह 30,000...

सिविल जज भर्ती में कानून की पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री को वकालत के बराबर नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर कैटगरी) की भर्ती के लिए कानून में स्नातकोत्तर डिग्री को अदालत में वकालत के अनुभव के बराबर मानने की मांग को खारिज किया।अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कानून में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल कर लेना न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए वकालत के व्यावहारिक अनुभव की जगह नहीं ले सकता। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह फैसला उन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें 20 मई 2025 के उस फैसले को चुनौती दी गई,...

सुप्रीम कोर्ट ने 2027 तक न्यायिक सेवा में 3 साल की प्रैक्टिस शर्त हटाई, लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती में तीन साल की प्रैक्टिस अनिवार्यता को लेकर संक्रमणकालीन अवधि में लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाली भर्ती अधिसूचनाओं के तहत सभी लॉ ग्रेजुएट्स, तीन साल की प्रैक्टिस के बिना भी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन (असहमति) की पीठ ने कहा कि इस अवधि में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को एक साल की सक्रिय...

अगर सर्विस रूल्स में कहा गया कि PSC का फ़ैसला फ़ाइनल है तो सरकार कैंडिडेट की योग्यता की दोबारा जांच नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां सर्विस रूल्स में साफ़ तौर पर कहा गया कि कैंडिडेट की योग्यता पर पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) का फ़ैसला फ़ाइनल होगा, वहां कमीशन द्वारा व्यक्ति को योग्य पाए जाने और नियुक्ति के लिए उसकी सिफ़ारिश करने के बाद सरकार स्वतंत्र रूप से उस व्यक्ति की योग्यता की दोबारा जांच या पूरी तरह से दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शैलेंद्र कुमार पटेल से जुड़े मामले की सुनवाई की, जिन्हें छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन (CGPSC) ने...

बंद जगह पर जातिसूचक गाली देना SC/ST Act के तहत अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (20.08.2026) को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) की धारा 3(2)(r) और 3(1)(s) के तहत चल रही कार्यवाही रद्द की। यह मामला स्कूल मैनेजर के खिलाफ दर्ज किया गया, जिस पर दो छात्रों के पिता के साथ मारपीट करने और जातिसूचक गालियां देने का आरोप था। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए मामला रद्द किया कि कथित बातें एक बंद कमरे में कही गईं, जहां आम जनता की पहुंच नहीं थी, इसलिए कानून की ज़रूरी शर्तों को पूरा नहीं किया गया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस...

यूपी गैंगस्टर एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- 'शुरुआत से ही बेकार', यह कानून निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 'उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986' को "शुरुआत से ही बेकार" (Stillborn) करार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह कानून कोई अलग आपराधिक अपराध नहीं बनाता है और किसी व्यक्ति को सिर्फ़ "गैंगस्टर" का लेबल लगाकर उस पर मुकदमा चलाने या सज़ा देने का आधार नहीं बन सकता।एक कड़े फैसले में कोर्ट ने कहा कि हिंसा और संगठित आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया यह कानून असल में बेखबर नागरिकों के खिलाफ ही काम कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह कानून, "हिंसा को...

BREAKING| बेंगलुरु वॉटर सप्लाई मामले में दी गई 'इंडस्ट्री' की परिभाषा ही लंबित मामलों पर लागू होगी: सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच
सुप्रीम कोर्ट ने 5:4 के बहुमत से 'बेंगलुरु वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजाप्पा' मामले में 1978 के फैसले में तय किए गए "ट्रिपल टेस्ट" (तीन शर्तों वाले परीक्षण) को फिर से परिभाषित किया। यह परीक्षण यह तय करने के लिए था कि क्या कोई गतिविधि 'इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947' की धारा 2(j) के तहत "इंडस्ट्री" (उद्योग) की परिभाषा में आएगी या नहीं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नया फॉर्मूला केवल भविष्य के मामलों पर लागू होगा और इससे पहले के फैसलों या लंबित कार्यवाही पर कोई असर नहीं...

PC-PNDT Act के तहत अपराधों के लिए पुलिस FIR दर्ज नहीं कर सकती, न ही जांच कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस 'प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स (लिंग चयन पर रोक) एक्ट, 1994' (PC & PNDT Act) के तहत अपराधों के लिए FIR दर्ज नहीं कर सकती और न ही मुख्य जांच एजेंसी के तौर पर काम कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि एक्ट के तहत बनी 'उचित अथॉरिटी' (Appropriate Authority) शिकायतों की जांच के लिए जिम्मेदार है, जबकि पुलिस ज़्यादा से ज़्यादा तब सहायक भूमिका निभा सकती है जब उचित अथॉरिटी को इसकी ज़रूरत हो।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने PC & PNDT...

बैंक और इंश्योरेंस प्रमोशन के लिए ऑटो डीलरों को मिले रेफरल चार्ज पर सर्विस टैक्स लगेगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19 अगस्त) को कहा कि ऑटोमोबाइल डीलरों को बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों से गाड़ी का लोन और इंश्योरेंस पॉलिसी दिलाने के लिए मिलने वाले रेफरल चार्ज पर फाइनेंस एक्ट, 1994 के तहत "बिज़नेस ऑक्सिलरी सर्विस" (व्यावसायिक सहायक सेवा) के तौर पर टैक्स लगेगा।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"आसेसी (टैक्स देने वाला) बैंकों और इंश्योरेंस कंपनी के कारोबार को बढ़ावा दे रहा है, जिसके लिए उन्हें एग्रीमेंट में तय रकम मिलती है।" ऑटोमोबाइल डीलर TVS मोटर कंपनी...

Motor Accident Claim | आपराधिक मामले में बरी होने से लापरवाही न होने का सबूत नहीं मिलता: सुप्रीम कोर्ट ने बताए सिद्धांत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक अदालत में बरी होने से MACT की कार्यवाही के नतीजे पर कोई असर नहीं पड़ता या वह उसे तय नहीं करता। कोर्ट ने दोहराया कि आपराधिक कार्यवाही और मोटर दुर्घटना मुआवज़े के दावे अलग-अलग कानूनी दायरे में आते हैं और उनके लिए सबूत के मानक भी अलग-अलग होते हैं।कोर्ट ने कहा,"बाद में किसी आपराधिक मामले में बरी होने से एमवी एक्ट के तहत टॉरटियस लायबिलिटी (गलती या लापरवाही के लिए कानूनी ज़िम्मेदारी) के आकलन पर कोई असर नहीं पड़ता... आपराधिक अदालत के निष्कर्ष, मामला रद्द करना या बरी करना...
