सांप्रदायिक घृणा फैलाने और नफरत फैलाने वाले भाषणों में शामिल होने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

8 May 2025 5:53 PM IST

  • सांप्रदायिक घृणा फैलाने और नफरत फैलाने वाले भाषणों में शामिल होने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक नफरत फैलाने और नफरत फैलाने वाले भाषणों में लिप्त होने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि नफरत भरे भाषण को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

    अदालत ने कहा, "लक्षित समूह के अलगाव या अपमान का कोई भी प्रयास एक आपराधिक अपराध है और इससे तदनुसार निपटा जाना चाहिए।

    चीफ़ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाले मामलों के संदर्भ में नफरत भरे भाषण और भड़काऊ टिप्पणी करने वाले राजनेताओं के खिलाफ अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

    हालांकि अदालत ने याचिका में कोई विशिष्ट निर्देश पारित नहीं किया, लेकिन इसने अधिकारियों को याद दिलाया कि नफरत फैलाने वाले भाषणों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

    खंडपीठ ने कहा, ''हम वर्तमान रिट याचिका पर विचार नहीं कर रहे हैं, लेकिन हम यह स्पष्ट करते हैं कि सांप्रदायिक घृणा फैलाने या नफरत भरे भाषण देने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। अभद्र भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता क्योंकि यह लक्षित समूह के सदस्यों की गरिमा और आत्म-मूल्य की हानि की ओर जाता है, समूहों के बीच असामंजस्य में योगदान देता है, और सहिष्णुता और खुले दिमाग को मिटा देता है, जो समानता के विचार के लिए प्रतिबद्ध बहु-सांस्कृतिक समाज के लिए जरूरी है। लक्षित समूह के अलगाव या अपमान का कोई भी प्रयास एक आपराधिक अपराध है और तदनुसार निपटा जाना चाहिए।

    अप्रैल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को किसी की लिखित शिकायत की प्रतीक्षा किए बिना अभद्र भाषा के भाषणों के खिलाफ स्वतः संज्ञान से FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।

    याचिकाकर्ता ने न्यायपालिका और सीजेआई संजीव खन्ना पर हमला करने वाली टिप्पणियों के लिए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ स्वत: संज्ञान आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने की भी मांग की। दुबे ने वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ये टिप्पणियां कीं।

    अदालत ने दुबे की टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें "अत्यधिक गैर-जिम्मेदाराना" और ध्यान आकर्षित करने वाला बताया। न्यायालय ने कहा कि टिप्पणियां संवैधानिक न्यायालयों के कामकाज के बारे में उनकी अज्ञानता को दर्शाती हैं।

    साथ ही, अदालत ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से परहेज करते हुए कहा कि न्यायपालिका में जनता का विश्वास "इस तरह की बेतुकी टिप्पणियों" से हिलाया नहीं जा सकता है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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