सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों के ऑडिट पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के ऑडिट पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया, जिसे CAG द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा किया जाना था।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने यह आदेश तब दिया जब उन्होंने दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) की याचिका पर नोटिस जारी किया। DERC ने अप्रैल में अपिलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी के एक आदेश को चुनौती दी थी।उस आदेश में कहा गया कि DERC के लिए डिस्कॉम का ऑडिट CAG को सौंपना सही...
Motor Accident Claims | सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित की आय का आकलन करने के लिए ITR के इस्तेमाल पर नियम तय किए
मोटर दुर्घटना मुआवज़े के दावों के लिए मृतक की सालाना आय की गणना के तरीके में एकरूपता लाने के मकसद से सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवज़े के मामलों में पीड़ितों की सालाना आय का आकलन करने के लिए विस्तृत गाइडलाइंस तय कीं। इसमें सैलरी पाने वाले कर्मचारियों और खुद का काम करने वाले (सेल्फ-एम्प्लॉयड) लोगों के बीच स्पष्ट अंतर किया गया।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि सैलरी पाने वाले व्यक्तियों के मामले में आम तौर पर ठीक पिछले असेसमेंट ईयर के इनकम टैक्स रिटर्न...
AI से बने फर्जी फैसलों का हवाला देना वकीलों का पेशेवर दुराचार, ऐसे फैसलों पर आधारित न्यायिक आदेश कानून की नजर में शून्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार किए गए फर्जी या काल्पनिक (Hallucinated) न्यायिक फैसलों का हवाला देने पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने की बात कही है। अदालत ने कहा कि बिना सत्यापन के ऐसे फैसलों का हवाला देना अधिवक्ताओं का पेशेवर दुराचार (Professional Misconduct) है, जबकि उन पर भरोसा कर फैसला देना न्यायाधीश की गंभीर चूक है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने NCLT और NCLAT के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें AI द्वारा तैयार किए गए फर्जी न्यायिक उद्धरणों...
क्लाइंट की स्पष्ट अनुमति के बिना समझौता नहीं कर सकता वकील, केवल पक्षकारों के हस्ताक्षर वाला समझौता ही वैध: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुवक्किल (Client) की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई भी अधिवक्ता उसकी ओर से समझौता (Compromise) नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 23 नियम 3 के तहत समझौता डिक्री तभी वैध होगी, जब समझौता लिखित हो और उस पर संबंधित पक्षकारों के हस्ताक्षर हों।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े एक मामले में की। मामला 1989 में दायर विभाजन वाद से संबंधित था, जिसमें 1994 में कथित समझौते...
नगर निकाय चुनावों पर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' लागू नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (RPA) के तहत सज़ा वाले प्रावधान नगर निकाय चुनावों पर लागू नहीं होते। कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवार झूठा हलफ़नामा (affidavit) दाखिल करने के आरोपी हैं, तो उन पर 'भारतीय दंड संहिता' (IPC) के तहत मुक़दमा चलाया जा सकता है, बशर्ते संबंधित नगर निकाय क़ानून में सज़ा का कोई प्रावधान न हो।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने चंद्रिकाबेन किशोर डाफडा की अपील पर फ़ैसला सुनाते हुए यह बात कही।...
जिन मामलों की सुनवाई सिर्फ़ सेशंस कोर्ट में हो सकती है, उनमें मजिस्ट्रेट को प्रॉसिक्यूशन के सबूत रिकॉर्ड करने की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 जुलाई) को कहा कि अगर किसी शिकायत वाले मामले में ऐसा अपराध शामिल है, जिसकी सुनवाई सिर्फ़ सेशंस कोर्ट में हो सकती है तो मजिस्ट्रेट को उस मामले को सेशंस कोर्ट भेजने से पहले CrPC, 1973 की धारा 244 के तहत आरोप तय होने से पहले के सबूत (pre-charge evidence) रिकॉर्ड करने की ज़रूरत नहीं है। कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द किया, जिसमें ऐसा करने का निर्देश दिया गया।कोर्ट ने 'सुपरिटेंडेंट एंड रिमेंब्रंसर ऑफ़ लीगल अफेयर्स बनाम आशुतोष घोष, (1979) 4 SCC 381' मामले...
S. 465 CrPC | अगर मजिस्ट्रेट के पास अधिकार क्षेत्र है तो गलत प्रावधान के तहत संज्ञान लेना सुधारा जा सकने वाला दोष: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 जुलाई) को कहा कि किसी गलत कानूनी प्रावधान के तहत अपराध का संज्ञान लेने में मजिस्ट्रेट की गलती एक ऐसी कमी है, जिसे सुधारा जा सकता है। इस गलती के आधार पर संज्ञान लेने के आदेश को रद्द नहीं किया जा सकता, बशर्ते मजिस्ट्रेट के पास उस मामले को देखने का अधिकार क्षेत्र हो।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"कानून की स्थापित स्थिति यह है कि गलत धारा के तहत संज्ञान लेने में हुई गलती असल में एक सुधारा जा सकने वाला दोष है, बशर्ते जिस अदालत ने...
आर्टिकल 161 के तहत बनी सज़ा में छूट की पॉलिसी, CrPC के तहत बनी पॉलिसी से ज़्यादा अहम: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 जुलाई) को कहा कि संविधान के आर्टिकल 161 के तहत गवर्नर की संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकार द्वारा बनाई गई सज़ा में छूट की पॉलिसी को बाद में कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) की धारा 432 और 433 के तहत जारी की गई कानूनी छूट पॉलिसी से बदला या खत्म नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने माना कि राज्य की 2008 की कानूनी पॉलिसी के बावजूद हरियाणा की 2002 की छूट पॉलिसी लागू रही। साथ ही कोर्ट ने 'स्टेट ऑफ़ हरियाणा बनाम राज कुमार' मामले में अपने 2021 के फ़ैसले को 'पर...
S. 187(3) BNSS | आरोपी को चार्जशीट न देना डिफ़ॉल्ट ज़मानत का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 जुलाई) को कहा कि आरोपी को चार्जशीट की कॉपी न देना, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 187(3) के तहत डिफ़ॉल्ट ज़मानत का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को सही ठहराया, जिसमें आरोपी की डिफ़ॉल्ट ज़मानत की अर्ज़ी को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उसे चार्जशीट की कॉपी नहीं दी गई।अपील करने वाले आरोपी को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा दर्ज मामले में गिरफ़्तार किया गया।...
रिश्वत लेते समय अधिकारी के साथ मौजूद होना मात्र आपराधिक साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल इस आधार पर कि कोई लोक सेवक उस स्थान पर मौजूद था जहां कथित रूप से रिश्वत ली गई, उसके खिलाफ आपराधिक साजिश (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) का आरोप सिद्ध नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि साजिश साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष को ठोस साक्ष्यों के माध्यम से यह दिखाना होगा कि आरोपियों के बीच पहले से 'मीटिंग ऑफ माइंड्स' (पूर्व सहमति) थी।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस...
आसाराम को राहत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने से किया इनकार, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू की उस याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने 2013 के दुष्कर्म मामले में अपनी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने वाले राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल उनकी सजा पर रोक (सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस) लगाने से इनकार कर दिया।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि केवल गंभीर स्वास्थ्य संकट या जीवन को खतरा होने जैसी स्थिति में ही जमानत या सजा पर रोक के अनुरोध...
क्या मतदाता सूची से नाम हटने पर पासपोर्ट का नवीनीकरण रोका जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से स्थिति हुई स्पष्ट
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद पासपोर्ट नवीनीकरण रोके जाने का मामला सामने आने से नई कानूनी बहस छिड़ गई।सीनियर पत्रकार और पूर्व संपादक आर. राजगोपाल ने दावा किया कि मतदाता सूची से उनका नाम हटने के आधार पर पुलिस ने प्रतिकूल रिपोर्ट भेजी, जिसके कारण उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया रोक दी गई। राजगोपाल के अनुसार, उनका नाम "तार्किक विसंगतियों" का हवाला देकर मतदाता सूची से हटाया गया।चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में इसी श्रेणी के तहत 27 लाख...
ज़िले से बाहर निकालने के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने में हुई देरी को लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के तहत माफ़ किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के तहत ज़िले से बाहर निकालने (एक्सटर्नमेंट) के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने में हुई देरी को लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 5 के तहत माफ़ किया जा सकता है।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने कहा,"...जब तक कानून साफ़ तौर पर या ज़रूरी मतलब के ज़रिए लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के लागू होने को रोकता नहीं है, तब तक अपीलीय अथॉरिटी (अधिनियम के तहत) के पास सही मामलों में देरी को माफ़ करने का अधिकार होना चाहिए।" बेंच ने छत्तीसगढ़...
Motor Accident Claim | माता-पिता के नुकसान का हिसाब गणितीय सटीकता से नहीं लगाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे की मौत से माता-पिता को हुए नुकसान को "गणितीय सटीकता" से नहीं मापा जा सकता और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवज़ा तय करना कोई सटीक गणितीय गणना का काम नहीं है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। कंपनी ने 2013 में दिल्ली में सड़क दुर्घटना में मारे गए 20 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंसी छात्र के माता-पिता को दिए गए मुआवज़े को चुनौती दी थी।कोर्ट ने कहा,"मृतक के माता-पिता को हुए नुकसान को...
अधिनियम के तहत बने नियम कानून में संशोधन की विधायी शक्ति को सीमित नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी अधिनियम के तहत बनाए गए नियम या विनियम (Regulations) विधायिका की उस शक्ति को सीमित नहीं कर सकते, जिसके तहत वह मूल कानून (Parent Act) में संशोधन कर विनियमों को अप्रभावी बना सकती है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए भ्रष्टाचार के मामले में दोषसिद्ध एक ग्रुप-ए अधिकारी को सेवा से बर्खास्त करने के दिल्ली नगर निगम आयुक्त के अधिकार को बरकरार रखा।मामला नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के पूर्व कार्यकारी अभियंता राजेश शर्मा से...
निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस सरकारी कॉलेजों के बराबर नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के एक अभ्यर्थी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस को सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर निर्धारित करने की मांग की गई थी।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्व-वित्तपोषित (Self-Financing) संस्थानों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस संरचना अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।याचिकाकर्ता, राजस्थान का एक EWS श्रेणी का NEET-UG 2025 अभ्यर्थी, निजी मेडिकल कॉलेजों की 18.9 लाख से 25 लाख...
मामूली गवाही विरोधाभास से पंजीकृत बिक्री विलेख की वैधता पर संदेह नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पंजीकृत बिक्री विलेख (Sale Deed) को कानूनन वैधता और प्रामाणिकता का मजबूत अनुमान प्राप्त होता है। ऐसे में सत्यापनकर्ता (Attesting Witness) के बयान में मामूली विरोधाभास मात्र से विलेख के निष्पादन पर संदेह नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने हरिद्वार की कृषि भूमि से जुड़े एक विवाद में यह टिप्पणी की। समेकन अधिकारियों और हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं के स्वामित्व दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि बिक्री विलेख के एक गवाह के...
राशन से वंचित करने के खिलाफ याचिका वापस, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों को राशन लाभ नहीं देने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने की अनुमति दी।जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रसन्ना एस की मौखिक प्रार्थना पर याचिका वापस लेने की अनुमति दी और उचित राहत के लिए हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता प्रदान की।यह याचिका पश्चिम बंगाल के खेतिहर...
मिस्त्री की कटी टांग को 100% कार्यात्मक दिव्यांगता माना जाए: सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 40.29 लाख रुपये किया
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि किसी मिस्त्री की घुटने के ऊपर से दाहिनी टांग कट जाती है तो उसे केवल शारीरिक दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर नहीं आंका जा सकता। ऐसे मामले में उसकी कार्यात्मक दिव्यांगता 100 प्रतिशत मानी जानी चाहिए, क्योंकि वह अपने पेशे से प्रभावी रूप से वंचित हो जाता है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने तमिलनाडु के एक मिस्त्री को दिए गए मुआवजे में बढ़ोतरी करते हुए इसे 29.01 लाख रुपये से बढ़ाकर 40.29 लाख रुपये कर दिया।पीठ ने कहा कि...
लंबे समय तक दोबारा अपराध न करना सजा तय करने में महत्वपूर्ण पहलू: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की सजा घटाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी दोषी के खिलाफ लंबे समय तक समान प्रकार की किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल होने का कोई प्रमाण नहीं मिलता, तो यह सजा तय करते समय एक महत्वपूर्ण विचारणीय पहलू हो सकता है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक दोषी की सजा में राहत दी और उसकी सजा को पहले से काटी गई अवधि तक सीमित किया।मामला एक जाली राजस्व दस्तावेज का उपयोग कर न्यायिक कार्यवाही में जमानतदार बनने से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने फर्जी दस्तावेज...




















