सुप्रीम कोर्ट

पूर्व राजघरानों की निजी संपत्ति पर लागू नहीं होगा ज्येष्ठाधिकार का नियम : सुप्रीम कोर्ट
पूर्व राजघरानों की निजी संपत्ति पर लागू नहीं होगा ज्येष्ठाधिकार का नियम : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पूर्व रियासतों के शासकों की निजी संपत्तियों के उत्तराधिकार पर ज्येष्ठाधिकार यानी केवल सबसे बड़े पुरुष उत्तराधिकारी को संपत्ति मिलने का नियम लागू नहीं होगा। ऐसी संपत्तियों का बंटवारा संबंधित परिवार के व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानून के अनुसार किया जाएगा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कपूरथला राजघराने की निजी संपत्तियों पर ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह को एकमात्र...

सिर्फ इसलिए ज़मीन के मुआवज़े का दावा खारिज नहीं किया जा सकता कि दावा करने वाला संन्यासी है: सुप्रीम कोर्ट
सिर्फ इसलिए ज़मीन के मुआवज़े का दावा खारिज नहीं किया जा सकता कि दावा करने वाला संन्यासी है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी व्यक्ति का ज़मीन या पैसे के मुआवज़े का दावा सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि वह खुद को संन्यासी बताता है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने यह बात तब कही, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के व्यक्ति द्वारा मुआवज़े और ज़मीन के आवंटन को लेकर शुरू की गई एक और कानूनी लड़ाई को खारिज किया। यह मामला तब शुरू हुआ था, जब उस व्यक्ति की ज़मीन पर एक सड़क बना दी गई थी।कोर्ट ने कहा,"संन्यास पारंपरिक हिंदू जीवन-पद्धति का चौथा और आखिरी चरण है। इसमें...

S.33(1)(a) आर्बिट्रेशन एक्ट सिर्फ़ अवार्ड में क्लर्कियल गलतियां सुधारने के लिए, इसका इस्तेमाल ब्याज की प्रकृति बदलने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
S.33(1)(a) आर्बिट्रेशन एक्ट सिर्फ़ अवार्ड में क्लर्कियल गलतियां सुधारने के लिए, इसका इस्तेमाल ब्याज की प्रकृति बदलने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

यह मानते हुए कि गलतियां सुधारने की आड़ में आर्बिट्रल अवार्ड के मूल तत्व को बदला नहीं जा सकता, सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि दिए गए ब्याज की प्रकृति को साधारण ब्याज से बदलकर चक्रवृद्धि ब्याज करना एक बड़ा बदलाव माना जाएगा, जो आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 33(1)(a) के सीमित दायरे से बाहर है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह फ़ैसला गुजरात वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड द्वारा दायर उन अपीलों को मंज़ूर करते हुए सुनाया, जो गुजरात हाईकोर्ट के उस फ़ैसले के...

अभियोजन पक्ष में गंभीर कमियां: सुप्रीम कोर्ट ने रेप-मर्डर केस में मौत की सज़ा पाए 2 दोषियों को बरी किया
'अभियोजन पक्ष में गंभीर कमियां': सुप्रीम कोर्ट ने रेप-मर्डर केस में मौत की सज़ा पाए 2 दोषियों को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने उन दो लोगों को बरी किया, जिन्हें उत्तराखंड में 55 साल की महिला के कथित रेप और मर्डर के लिए मौत की सज़ा सुनाई गई थी। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उन परिस्थितियों की एक पूरी और भरोसेमंद कड़ी साबित करने में नाकाम रहा, जो इन लोगों को अपराध से जोड़ती हों।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने मर्डर के दोषियों की अपील मंज़ूर की। बेंच ने ट्रायल कोर्ट और उत्तराखंड हाईकोर्ट के उन फैसलों को रद्द किया, जिनमें उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 और...

NI Act | कारोबार चलाने में सक्रिय भूमिका साबित न होने तक सोसायटी के पदाधिकारी पर चेक बाउंस होने की ज़िम्मेदारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
NI Act | कारोबार चलाने में सक्रिय भूमिका साबित न होने तक सोसायटी के पदाधिकारी पर चेक बाउंस होने की ज़िम्मेदारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी सोसायटी में मैनेजर के पद पर बैठे किसी व्यक्ति का सिर्फ़ पदनाम ही, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 141 के तहत उसकी ज़िम्मेदारी तय करने के लिए काफ़ी नहीं होगा।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कंपनी के एग्जीक्यूटिव सदस्य के ख़िलाफ़ चेक बाउंस का मामला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। इस सदस्य के ख़िलाफ़ धारा 141 के तहत ज़िम्मेदारी तय करने के लिए लेन-देन में उसकी भागीदारी या सोसायटी के मामलों के लिए उसकी...

पुलिस को आगे की जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
पुलिस को आगे की जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया

सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि मजिस्ट्रेट से स्पष्ट अनुमति के बिना, क्लोजर रिपोर्ट (जांच बंद करने की रिपोर्ट) दाखिल करने के बाद पुलिस आगे की जांच नहीं कर सकती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"भले ही कानून में स्पष्ट अनुमति की ज़रूरत न हो, लेकिन कानून जिस तरह से विकसित हुआ है, उससे यह बिल्कुल साफ हो गया है कि संबंधित मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अब एक ज़रूरी शर्त बन गया है।" बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ता के खिलाफ आगे की जांच जारी...

ट्रॉमा केयर जीवन के अधिकार का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ने, PM RAHAT और Good Samaritan योजना लागू करने का निर्देश दिया
'ट्रॉमा केयर जीवन के अधिकार का हिस्सा': सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ने, PM RAHAT और Good Samaritan योजना लागू करने का निर्देश दिया

यह मानते हुए कि नागरिकों की ट्रॉमा केयर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अंतरिम निर्देश जारी किए, जिसमें पूरे देश में इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए एक साझा हेल्पलाइन नंबर '112' को चालू करना भी शामिल है।कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पूरे देश में एक समान और मज़बूत ट्रॉमा केयर सिस्टम बनाने के लिए कई अंतरिम निर्देश जारी किए। इनमें सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ना, PM RAHAT कैशलेस इलाज योजना को चालू करना और Good...

क्या IBC मोरेटोरियम कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ चेक बाउंस केस को पूरी तरह से रोकता है? सुप्रीम कोर्ट ने बड़े बेंच को भेजा मामला
क्या IBC मोरेटोरियम कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ चेक बाउंस केस को पूरी तरह से रोकता है? सुप्रीम कोर्ट ने बड़े बेंच को भेजा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े बेंच को यह सवाल भेजा कि क्या नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस की कार्यवाही को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के भाग III के तहत मोरेटोरियम अवधि के दौरान रोका जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसी कार्यवाही मुख्य रूप से आपराधिक प्रकृति की होती है, न कि केवल कर्ज वसूली की कार्रवाई।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने टिप्पणी की कि NI Act की धारा 138 के तहत कार्यवाही को केवल पैसे की वसूली के लिए कानूनी...

बस ड्राइवर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पीछे मुड़कर देखे कि यात्री उतर गए या नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने लापरवाही से हुई मौत के मामले में सज़ा रद्द की
बस ड्राइवर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पीछे मुड़कर देखे कि यात्री उतर गए या नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने लापरवाही से हुई मौत के मामले में सज़ा रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (27 मई) को कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के एक बस ड्राइवर को बरी किया। इस ड्राइवर को एक यात्री की मौत का दोषी ठहराया गया था, जो बस से उतरते समय गिर गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कंडक्टर के इशारे पर गाड़ी आगे बढ़ाने वाले ड्राइवर को अपने आप आपराधिक रूप से लापरवाह नहीं माना जा सकता।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 279 और 304A के तहत अपील करने वाले ड्राइवर की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि...

इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के लिए हैश वैल्यू बताना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने BSA की धारा 63(4) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के लिए 'हैश वैल्यू' बताना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने BSA की धारा 63(4) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 63(4) की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। कोर्ट ने पुणे बार एसोसिएशन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को स्वीकार करने के लिए बनाए गए सख्त नियमों के खिलाफ दायर चुनौती खारिज की। इस प्रावधान में दखल देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मद्रास हाईकोर्ट का यह विचार कि ऐसे रिकॉर्ड को सिर्फ़ सरकार द्वारा नोटिफ़ाई किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के जांचकर्ता ही सर्टिफ़ाई कर सकते हैं, उसे एक बाध्यकारी मिसाल (binding precedent) के तौर पर नहीं माना...

Amazon-Future डील की मंज़ूरी वापस लेने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, कहा - निवेश बढ़ाने के लिए रेगुलेटरी निष्पक्षता ज़रूरी
Amazon-Future डील की मंज़ूरी वापस लेने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, कहा - निवेश बढ़ाने के लिए रेगुलेटरी निष्पक्षता ज़रूरी

भारत के रेगुलेटरी माहौल और विदेशी निवेश के नज़रिए पर असर डालने वाले अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 2019 की Amazon-Future Coupons निवेश डील की मंज़ूरी रद्द करके अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन किया। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि मर्जर से जुड़े नियम सख़्त तो होने चाहिए, लेकिन साथ ही वे पहले से पता चलने वाले, निष्पक्ष और कानून के दायरे में होने चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने NCLAT के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ Amazon की अपील मंज़ूर...

ऑल इंडिया सर्विसेज़ ऑफिसर का VRS खारिज करने से पहले केंद्र सरकार को राज्य के विचारों पर गौर करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
ऑल इंडिया सर्विसेज़ ऑफिसर का VRS खारिज करने से पहले केंद्र सरकार को राज्य के विचारों पर गौर करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही ऑल इंडिया सर्विसेज़ से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए केंद्र सरकार की अनिवार्य मंज़ूरी ज़रूरी होती है, लेकिन सिर्फ़ इस आधार पर केंद्र सरकार को यह अधिकार नहीं मिल जाता कि वह राज्य सरकार की सिफ़ारिश पर विचार किए बिना ही VRS आवेदन खारिज कर दे।महाराष्ट्र कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी की VRS याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पामिडीघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के फ़ैसलों को रद्द...

मतदाता सूची में शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच सकता है ECI, लेकिन उसका फैसला अंतिम नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
मतदाता सूची में शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच सकता है ECI, लेकिन उसका फैसला अंतिम नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

चुनाव आयोग की शक्तियों के दायरे पर अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत का चुनाव आयोग (ECI) किसी व्यक्ति की नागरिकता की सीमित जांच करने के लिए अधिकृत है, ताकि यह तय किया जा सके कि वह चुनावी रोल में शामिल होने के योग्य है या नहीं; लेकिन कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस तरह के फैसले को नागरिकता के सवाल पर अंतिम नहीं माना जा सकता।यह फैसला बिहार में चुनावी रोल के चुनाव आयोग के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) को सही ठहराते हुए आया।इस प्रक्रिया के दौरान नागरिकता की स्थिति की जांच करने के आयोग के फैसले को...

BREAKING| ऑनलाइन गेमिंग पर लगा GST, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह सट्टेबाजी और जुए के ​​तौर पर टैक्सेबल
BREAKING| ऑनलाइन गेमिंग पर लगा GST, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह 'सट्टेबाजी और जुए' के ​​तौर पर टैक्सेबल

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लगाने को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया। साथ ही सट्टेबाजी और जुए के लेन-देन से पैदा होने वाले 'एक्शनेबल क्लेम' (दावों) पर CGST लगाने के खिलाफ दायर संवैधानिक और कानूनी चुनौती खारिज की।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने फैसला सुनाया कि संगठित ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियां 'एक्शनेबल क्लेम' को जन्म देती हैं। इन गतिविधियों में पूल किए गए दांव और संभावित इनाम वाली फैंटेसी गेम्स शामिल हैं। सट्टेबाजी और जुए के लेन-देन...

बिहार मतदाता सूची पुनर्विचार पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: संदिग्ध नागरिकता वाले नाम केंद्र को भेजने का निर्देश
बिहार मतदाता सूची पुनर्विचार पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: संदिग्ध नागरिकता वाले नाम केंद्र को भेजने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की वैधता को बरकरार रखते हुए चुनाव आयोग को बड़ा निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि वर्ष 2003 की बिहार मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम संदिग्ध नागरिकता के आधार पर हटाए गए, उनके मामलों को चार सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाए ताकि उनकी नागरिकता पर अंतिम फैसला हो सके।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह फैसला बिहार में विशेष गहन पुनर्विचार अभियान को चुनौती देने...

बरी करने का फ़ैसला पलटने वाली अपीलीय अदालत को सज़ा के मामले में दोषी की बात खुद सुननी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
बरी करने का फ़ैसला पलटने वाली अपीलीय अदालत को सज़ा के मामले में दोषी की बात खुद सुननी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (26 मई) को फ़ैसला सुनाया कि अगर कोई अपीलीय अदालत बरी करने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी पाती है तो वह सज़ा सुनाने के लिए मामला ट्रायल कोर्ट को वापस नहीं भेज सकती। अपीलीय अदालत को सज़ा के मामले में दोषी की बात खुद सुननी होगी।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा,"CrPC की धारा 386(a) से यह साफ़ है कि जहां बरी करने के आदेश के ख़िलाफ़ अपील में अपील सुनने वाली अदालत आरोपी को दोषी पाती है, तो उसे क़ानून के मुताबिक़ उस पर...

9 साल से जेल में बंद विचाराधीन कैदी ज़मानत का हकदार, क्योंकि उसके अनुच्छेद 21 के अधिकार का उल्लंघन हुआ: सुप्रीम कोर्ट
9 साल से जेल में बंद विचाराधीन कैदी ज़मानत का हकदार, क्योंकि उसके अनुच्छेद 21 के अधिकार का उल्लंघन हुआ: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे विचाराधीन कैदी को ज़मानत दी, जो पिछले 9 सालों से जेल में बंद था। ज़मानत देने का आधार यह था कि उसके अनुच्छेद 21 के अधिकार का उल्लंघन हुआ।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने ज़मानत देते हुए यह दोहराया कि किसी भी विचाराधीन कैदी को अनिश्चित काल तक जेल में बंद नहीं रखा जा सकता।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में ज़मानत देने से इनकार किया था। उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 120B और 302...