सुप्रीम कोर्ट
कल्याणकारी राज्य के कार्यों, धर्मार्थ कृत्यों को 'उद्योग' नहीं माना जा सकता हैः केंद्र ने 9-जजों की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया
केंद्र सरकार ने मंगलवार (17 मार्च) को बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा (1978) में निर्धारित परीक्षण के व्यापक आवेदन के खिलाफ चेतावनी देते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य द्वारा की गई कल्याणकारी गतिविधियों और धर्मार्थ कार्यों को श्रम कानून के तहत "उद्योग" के रूप में नहीं माना जा सकता है।नौ जजों की संविधान पीठ के समक्ष पेश हुए, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी ने प्रस्तुत किया कि जबकि 1978 के फैसले में विकसित "ट्रिपल टेस्ट" तार्किक रूप से ध्वनि हो सकता है, इसके अंधाधुंध...
विरोधाभासों की जांच करना और गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना CrPC की धारा 319 के दायरे से बाहर: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को कहा कि CrPC की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को समन जारी करने के चरण में 'एक छोटा ट्रायल' (Mini Trial) चलाना गलत है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें सबूतों का 'बारीकी से विश्लेषण' किया गया और CrPC की धारा 319 के तहत अतिरिक्त आरोपी को समन जारी करने के चरण में 'उचित संदेह से परे सबूत' (Proof Beyond a Reasonable Doubt) का पैमाना लागू किया गया।कोर्ट ने कहा,"...इन गवाहों की पूरी गवाही में...
NGT, नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करके किए गए अतिक्रमण को हटाने का आदेश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास ऐसे कथित अतिक्रमण को हटाने का आदेश देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, जो नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करके किया गया हो।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने नई दिल्ली NGT का फैसला रद्द किया, जिसमें एक मंदिर को हटाने का आदेश दिया गया। यह मंदिर गाजियाबाद जिले के वसुंधरा, सेक्टर-16A में 'खुली जगह/पार्क' के तौर पर दिखाई गई ज़मीन पर अवैध रूप से बनाया गया था।बेंच ने NGT Act, 2010 की धारा 14 के तहत अपनी शक्तियों का...
कंपनी के फंड का धोखाधड़ी से गलत इस्तेमाल बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से ठीक नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के ज़रिए जुटाए गए फंड का इस्तेमाल उन मकसदों के अलावा किसी और मकसद के लिए करना, जिनका खुलासा निवेशकों के सामने किया गया, सिक्योरिटीज़ कानून के तहत धोखाधड़ी माना जाएगा। साथ ही इसे बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से भी ठीक नहीं किया जा सकता।भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा दायर अपीलों को मंज़ूर करते हुए जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सिक्योरिटीज़ अपीलीय ट्रिब्यूनल (SAT) का आदेश रद्द किया,...
BREAKING | तीन महीने से ज़्यादा उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली माताओं को मातृत्व लाभ से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को फैसला सुनाया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4), जो किसी गोद लेने वाली माँ को मातृत्व लाभ तभी देती है, जब गोद लिए गए बच्चे की उम्र 3 महीने से कम हो, असंवैधानिक है।कोर्ट ने फैसला सुनाया कि गोद लेने वाली माँ 12 हफ़्ते की मातृत्व छुट्टी की हकदार होनी चाहिए, चाहे गोद लिए गए बच्चे की उम्र कुछ भी हो।कोर्ट ने इस प्रावधान की व्याख्या इस तरह की: "कोई भी महिला जो कानूनी तौर पर किसी बच्चे को गोद लेती है, या कोई कमीशनिंग माँ, उस तारीख से 12 हफ़्ते की अवधि...
NDPS Act : तलाशी के लिए पुलिस अधिकारी का विकल्प देना गैरकानूनी- सुप्रीम कोर्ट ने बरी का फैसला बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि किसी आरोपी को तलाशी के लिए पुलिस अधिकारी के सामने पेश होने का विकल्प देना NDPS कानून की धारा 50 का उल्लंघन है। अदालत ने इस आधार पर आरोपी की बरी को बरकरार रखा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार की अपील खारिज करते हुए हाइकोर्ट का फैसला सही ठहराया।मामला उस आरोपी से जुड़ा था जिसके पास से कथित रूप से चरस बरामद की गई। पुलिस ने उसे यह विकल्प दिया कि वह अपनी तलाशी मजिस्ट्रेट, राजपत्रित अधिकारी या पुलिस अधिकारी के...
मोटर दुर्घटना मुआवजा: ग्रुप बीमा की राशि नहीं होगी कम, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया सिद्धांत
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि नियोक्ता द्वारा दी गई समूह बीमा योजना या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से मिलने वाली राशि को मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजे से घटाया नहीं जा सकता।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने केरल और कर्नाटक हाइकोर्ट के फैसलों को बरकरार रखते हुए इस संबंध में दायर अपीलों को खारिज किया।अदालत ने कहा कि इस तरह की बीमा या सामाजिक सुरक्षा से मिलने वाली राशि आर्थिक लाभ (पेक्यूनियरी एडवांटेज) नहीं मानी जा सकती, जिसे मुआवजे से घटाया...
एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' माना है, जिस पर रिट क्षेत्राधिकार लागू होता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला पलट दिया, जिसमें एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी (सोसाइटी) को 'राज्य' मानने से इनकार किया गया। बेंच ने कहा कि चूंकि सोसाइटी एक सार्वजनिक कार्य करती है, जो भारतीय वायु सेना के सदस्यों के प्रति राज्य के दायित्वों से गहराई से जुड़ा है, इसलिए यह 'राज्य' की श्रेणी में आती...
सुप्रीम कोर्ट ने 1998 के गैंगरेप केस में 4 लोगों की सज़ा रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने एक गैंगरेप केस में चार लोगों की रेप की सज़ा रद्द की। साथ ही इस मामले में पीड़ित महिला की अकेली गवाही पर शक ज़ाहिर किया।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई की। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपील करने वालों को रेप करने और पीड़ित महिला को डराने-धमकाने के आरोप में दोषी ठहराया था।साल 2000 में ट्रायल कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें 10 साल की कड़ी सज़ा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया। उत्तराखंड हाई...
विवाद सुलझाने की कोशिश पुलिस को अपराध का संज्ञान लेने से नहीं रोक सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपस में झगड़ रहे गुटों के बीच विवाद सुलझाने की पुलिस की कोशिश उन्हें आपराधिक कृत्यों के लिए FIR दर्ज करने से नहीं रोक सकती।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"सिर्फ़ सुलह की कोशिश पुलिस को आपराधिक कृत्यों का संज्ञान लेने से नहीं रोक सकती।" यह मामला पंजाब के एक इलाके में दो गुटों के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। अपीलकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, जबकि प्रतिवादी उच्च जाति के गुट से है। बताया जाता है कि यह विवाद इस आरोप पर शुरू हुआ कि नाली का पानी...
नीलामी बिक्री की पुष्टि आरक्षित मूल्य के मूल्यांकन की न्यायिक जांच में बाधा नहीं बनती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (13 मार्च) को यह टिप्पणी की कि नीलामी बिक्री पूरी हो जाने के बाद भी नीलामी वाली संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन में कोई बाधा नहीं आएगी; खासकर तब, जब मूल्यांकन की पर्याप्तता या आरक्षित मूल्य तय करने के संबंध में कोई सवाल उठता हो।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की,"हालांकि इस स्थापित सिद्धांत पर कोई विवाद नहीं हो सकता कि एक 'बोना फाइड' (नेक-नीयत) नीलामी खरीदार के अधिकारों को उचित सुरक्षा मिलनी चाहिए और कोर्ट द्वारा पुष्टि की गई बिक्री में...
'3 साल की प्रैक्टिस शर्त बनी रहेगी, सिर्फ लागू करने का तरीका तय करना है': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निचली न्यायिक सेवा (सिविल जज जूनियर डिवीजन) में नियुक्ति के लिए अनिवार्य 3 वर्ष के प्रैक्टिस नियम की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी हाईकोर्टों को निर्देश दिया कि आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई जाए।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि जिन हाईकोर्टों ने पहले ही सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है, वे आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाएं। साथ ही...
'महज पुलिस के बयान पर आधारित होने के कारण ही FIR पर शक नहीं किया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST मामले में अग्रिम ज़मानत रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों की अग्रिम ज़मानत रद्द की, जिन पर कथित तौर पर अनुसूचित जाति वर्ग के सदस्यों के साथ जाति-आधारित गाली-गलौज करने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि किसी FIR की प्रामाणिकता पर सिर्फ इसलिए शक नहीं किया जा सकता कि वह किसी शिकायतकर्ता के बजाय पुलिस के बयान के आधार पर दर्ज की गई।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें SC/ST मामले में अग्रिम ज़मानत दी गई। हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी के बयान के आधार पर दर्ज FIR की असलियत...
'शॉपिंग मॉल जैसी याचिका' : व्यापक PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक प्राधिकरणों की कथित लापरवाही से होने वाली मौतों को रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिका बहुत व्यापक है और इसमें मांगी गई राहतें इतनी विस्तृत हैं कि उन्हें लागू करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे सार्वजनिक प्राधिकरणों...
पीरियड लीव अनिवार्य करने से महिलाओं के रोजगार पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी कार्यस्थलों में महिलाओं के लिए पेड मेंस्ट्रुअल लीव (मासिक धर्म अवकाश) की मांग करने वाली एक याचिका का निस्तारण करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि वह याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व पर सभी हितधारकों से परामर्श करके नीति बनाने पर विचार करे।सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी चिंता जताई कि यदि कानून बनाकर मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य कर दिया गया तो इसका महिलाओं के रोजगार पर उल्टा असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से हिचक सकते हैं,...
S. 149 IPC | गैर-कानूनी जमाव के हर सदस्य के खास कामों को साबित न कर पाना अभियोजन पक्ष के लिए घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने चार लोगों की हत्या की सज़ा और उम्रकैद बरकरार रखते हुए कहा कि अगर आरोपी भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 149 के तहत एक ही मकसद वाले गैर-कानूनी जमाव के सदस्यों के तौर पर काम करते हैं तो आरोपी द्वारा मृतक पर गोली चलाने का कोई खास चश्मदीद गवाह न होना अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक नहीं है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की बेंच ने दोषी लोगों द्वारा दायर अपीलें सुनीं। इन लोगों ने दूसरे आधारों के अलावा, अपनी सज़ा को इस तर्क पर चुनौती दी कि घटना के स्वतंत्र गवाह...
बिना विभागीय जांच सरकारी कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 मार्च) को कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी को बिना विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के सेवा से बर्खास्त करने की शक्ति केवल इस आधार पर इस्तेमाल नहीं की जा सकती कि जांच करना “व्यावहारिक रूप से संभव नहीं” है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच को टालने का निर्णय केवल अनुमान या आशंका के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सामग्री (relevant material) के आधार पर होना चाहिए।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी,...
सीएम, विपक्ष के नेता और मंत्री का कॉलेजियम DGP का चुनाव नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मौखिक रूप से कहा कि पुलिस महानिदेशक (DGP) के चुनाव के लिए मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और एक मंत्री को मिलाकर एक कॉलेजियम बनाने का सुझाव व्यावहारिक नहीं होगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयलम्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब वह 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले में DGP की नियुक्ति से जुड़े निर्देशों में बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।इस मामले में एमिक्स क्यूरी (अदालत के सलाहकार) सीनियर वकील राजू रामचंद्रन...
Arbitration | आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के बाद अधिकार क्षेत्र को लेकर देर से की गई चुनौती स्वीकार्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि कोई भी पक्ष, जो आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में सही समय पर अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई आपत्ति उठाए बिना हिस्सा लेता है। वह बाद में जब उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल फैसला (Award) आता है तो आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई तकनीकी दलील नहीं दे सकता।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने कहा,"कोई भी पक्ष अपने पास 'अधिकार क्षेत्र का तुरुप का पत्ता' (Jurisdictional Ace) छिपाकर नहीं रख सकता। फिर यह दावा नहीं कर सकता कि धारा 16 के तहत...
गंभीर अपराध में 'संदेह का लाभ' मिलने पर बरी हुए व्यक्ति को पुलिस भर्ती से रोका जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'संदेह का लाभ' (Benefit of Doubt) मिलने के आधार पर बरी होने से किसी उम्मीदवार को सरकारी नौकरी में नियुक्ति का अपने-आप अधिकार नहीं मिल जाता।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा,"...किसी व्यक्ति का किसी अपराध में या ऐसे आचरण में शामिल होना, जिसे 'नैतिक पतन' (Moral Turpitude) माना जा सकता है—भले ही इसके अलावा और कुछ न हो—उस पद के लिए उसकी योग्यता और उसे नौकरी पर रखने के लिए उसकी साख (Credentials) जांचने में एक अहम आधार बन सकता है।" बेंच ने...



















