सुप्रीम कोर्ट

मुकदमे की सुनवाई में धारा 161 के बयानों पर भरोसा नहीं, लेकिन संज्ञान लेने के स्तर पर विचार कर सकती है अदालत: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 161 के तहत पुलिस द्वारा दर्ज किए गए गवाहों के बयानों पर मुकदमे की सुनवाई के दौरान ठोस साक्ष्य के रूप में भरोसा नहीं किया जा सकता लेकिन अपराध का संज्ञान लेने के चरण में अदालत इन बयानों पर विचार कर सकती है। अदालत ने कहा कि पुलिस की ओर से अंतिम रिपोर्ट में मामला नहीं बनने की बात कहने यानी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बावजूद मजिस्ट्रेट अपराध का संज्ञान ले सकता है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने यह...

बिहार SIR फ़ैसले के समय नया फ़ॉर्म 6 मौजूद नहीं था, हमने इस पर कोई फ़ैसला नहीं दिया: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ़ किया कि उसने नए फ़ॉर्म 6 डिक्लेरेशन (नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए) को न तो मंज़ूरी दी और न ही इसे नामंज़ूर किया। इसकी वैधता पर अभी फ़ैसला होना बाकी है।कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की पिछले हफ़्ते की टिप्पणी का मतलब सिर्फ़ यह बताना था कि मई 2026 के बिहार SIR फ़ैसले में नए फ़ॉर्म 6 की जांच नहीं की गई थी क्योंकि वह उस समय मौजूद ही नहीं था।CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने भारत निर्वाचन आयोग से जुड़ी...

पेंशन के लिए एड-हॉक सर्विस गिनी जा सकती है, लेकिन सीधे भर्ती हुए कर्मचारियों के मुकाबले सीनियरिटी का दावा नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्थायी या एड-हॉक (कामचलाऊ) तौर पर नियुक्त कर्मचारी, सीधे भर्ती हुए कर्मचारियों के साथ सीनियरिटी तय करने के मामले में बराबरी का दावा नहीं कर सकते। असल में, एड-हॉक या अस्थायी कर्मचारियों की सीनियरिटी उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से नहीं, बल्कि सर्विस में पक्के (कन्फर्म) होने की तारीख से तय होगी।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा कि हालांकि एड-हॉक सर्विस को पेंशन के मकसद से ध्यान में रखा जा सकता है, लेकिन सीनियरिटी तय करने के लिए इसे नहीं गिना जा...

CEC Protest: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में न लिया जाए; मेट्रो, ट्रेन और इंटरनेट सेवाएं बिना रुकावट जारी रहें

रविवार को एक विशेष सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा तय प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जाएगा। यह निर्देश खासकर उन शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों के जमावड़े के संबंध में है, जो उन इलाकों से बाहर हैं जहाँ निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) लागू है।जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट के आसपास के इलाके में BNSS की धारा 163 लागू करने से संबंधित बोर्ड को हटा दें (यदि पहले से नहीं हटाया...

विरोध-प्रदर्शन के दौरान पाबंदियों के बीच वकीलों, पत्रकारों और दूसरे प्रोफेशनल्स को अपना काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने CEC विरोध-प्रदर्शन मामले की सुनवाई के दौरान साफ ​​तौर पर कहा कि वकीलों, पत्रकारों और दूसरे प्रोफेशनल्स को उनके पेशेवर काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए।दिल्ली पुलिस पर वकीलों और पत्रकारों को उनके पेशेवर काम करने से रोकने के आरोप लगने के बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से कहा कि इन प्रोफेशनल्स को उनके काम में बाधा नहीं डाली जानी चाहिए।कोर्ट ने अपने आदेश में SG के इस भरोसे (निर्देशों के आधार पर) को दर्ज किया कि वकीलों,...

1956 के उत्तराधिकार कानून के तहत हिंदू विधवा का सीमित अधिकार पूर्ण अधिकार बन गया: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14(1) के तहत कृषि भूमि में हिंदू विधवा का सीमित अधिकार पूर्ण स्वामित्व में बदल सकता है। उत्तराधिकार का निर्धारण उसकी मृत्यु के समय लागू व्यक्तिगत कानून को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने लगभग 45 बीघा कृषि भूमि को लेकर हुए विवाद पर सुनवाई की। यह विवाद एक महिला के पहले पति के परिवार के वारिसों और उसकी दूसरी शादी से हुए दो बेटों के बीच है।मुख्य मुद्दा यह था कि क्या महिला का...

आरोपी ही नहीं, पीड़ित को भी स्पीडी ट्रायल का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्पीडी ट्रायल का अधिकार केवल आरोपी तक सीमित नहीं है बल्कि पीड़ित को भी समय पर न्याय पाने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई में हो रही देरी को लेकर पीड़ित पक्ष का अदालत का दरवाजा खटखटाना गलत नहीं है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें पीड़िता की याचिका खारिज करते हुए उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने कहा कि पीड़ित या उसका कानूनी अभिभावक मुकदमे...

Guruvayur Temple | सुप्रीम कोर्ट का देवस्वोम बोर्ड को निर्देश: पिछले साल की तरह एकादशी पर उदयस्तमन पूजा जारी रखें

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवायुर श्री कृष्ण मंदिर के प्रशासन और मुख्य तांत्री (पुजारी) को निर्देश दिया कि वे 'वृश्चिकम एकादशी' (जो इस साल 21 नवंबर को है) पर उदयस्तमन पूजा उसी तरह जारी रखें, जैसे पहले की परंपरा के अनुसार होती रही है।कोर्ट ने पिछले साल 25 अक्टूबर को दिए गए अपने उसी आदेश को दोहराया, जो मंदिर प्रशासन के उस फैसले के खिलाफ था जिसमें भीड़ प्रबंधन की चिंताओं के कारण एकादशी पर पूजा रद्द कर दी गई।बता दें, यह विवाद तब शुरू हुआ था जब मंदिर प्रशासन ने तांत्री के समर्थन से भीड़ प्रबंधन में...

प्रक्रिया का उल्लंघन ज़ब्ती को अमान्य नहीं करेगा, लेकिन सबूत की अहमियत पर असर डाल सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (8 अक्टूबर) को कहा कि आरोपी द्वारा अपनी जगह से की गई ज़ब्ती के बारे में कोई स्पष्टीकरण न दे पाना उसके खिलाफ दोषी होने का सबूत नहीं माना जा सकता, और ज़ब्ती के सही होने का सबूत देने की ज़िम्मेदारी अभियोजन पक्ष की ही रहती है।जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने आपराधिक विश्वासघात (IPC की धारा 409 के तहत) के कथित अपराध में आरोपी के बरी होने का फैसला पलट दिया था। हाईकोर्ट ने उसके घर से...

Delhi Women Safety | सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाएं, कैब-बस ड्राइवरों की जांच करें और गैर-कानूनी शराब की दुकानें बंद करें

दिल्ली-NCR में हाल ही में हुई रेप की घटनाओं पर खुद संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 अक्टूबर) को दिल्ली पुलिस, स्थानीय प्रशासन और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को तुरंत बचाव के उपाय करने का निर्देश दिया। इन निर्देशों में बीट पेट्रोलिंग बढ़ाना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट ड्राइवरों की सघन जांच और गैर-कानूनी शराब की दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने चिंता जताते हुए कहा कि सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि सही निर्देश मौजूद हैं या नहीं, बल्कि यह...

अगर ब्रेकअप के बाद कोई आत्महत्या कर ले तो इसे हमेशा आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में छह लोगों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। महिला के पार्टनर ने कथित तौर पर उससे शादी करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि शादी से इनकार करना, भले ही उसके बाद आत्महत्या हो जाए, अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि लोग स्थितियों पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और ब्रेकअप के बाद...

भर्ती नियमों के तहत ज़रूरी योग्यता न होने पर परीक्षा के नंबर काम नहीं आते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिखित परीक्षा में मिले नंबर भर्ती नियमों के तहत तय ज़रूरी योग्यता की कमी को पूरा नहीं कर सकते। कोर्ट ने दोहराया कि तुलनात्मक मेरिट पर तभी विचार किया जा सकता है, जब उम्मीदवार पहले तय योग्यता शर्तों को पूरा करते हों।कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी एजुकेशनल बोर्ड द्वारा किसी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन (शैक्षिक योग्यता) को मान्यता देने का मतलब यह नहीं है कि वह भर्ती नियमों में बताई गई खास योग्यता के बराबर हो।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने गोवा सरकार में...

Shiv Sena Row | स्पीकर का अयोग्य न ठहराने का फ़ैसला गलत निकलता है तो ECI के चुनाव-चिह्न आवंटन पर फिर से विचार करना पड़ सकता है: सुप्रीम कोर्ट

शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कल इस बात पर विचार किया कि क्या चुनाव आयोग (ECI) के उस फ़ैसले पर फिर से विचार करना होगा, जिसमें उसने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना माना और पार्टी का आरक्षित चुनाव चिह्न उन्हें दिया। यह विचार तब करना पड़ सकता है अगर कोर्ट यह पाए कि महाराष्ट्र के स्पीकर ने उस गुट के विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं को गलत तरीके से खारिज कर दिया था।जस्टिस जॉयमालिया बागची ने पूछा,"मान लीजिए कि इस कोर्ट द्वारा अयोग्यता का फ़ैसला पलट दिया जाता है। तो चुनाव चिह्न वाले आदेश पर...

रेगुलर होने के बाद सालाना इंक्रीमेंट देने से मना करने का आधार शुरुआत में डेली वेजर होना नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 अक्टूबर) को कहा कि डेली-वेज पर काम करने वाले कुशल (Skilled) कर्मचारियों को, जिन्हें सरकारी आदेश के तहत स्थायी कर्मचारी माना गया और रेगुलर पे-स्केल और रिटायरमेंट के फायदे दिए गए, उन्हें रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले सालाना इंक्रीमेंट से सिर्फ़ इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे शुरुआत में डेली वेजर के तौर पर रखे गए।गुजरात हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच का फैसला रद्द करते हुए जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने गुजरात सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि...

गलती से ज़्यादा सैलरी मिलने पर अंडरटेकिंग देने वाले कर्मचारियों से पैसे वापस लिए जा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की अपील खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIT), कालीकट के शिक्षकों को गलती से दिए गए 'एकेडमिक ग्रेड पे' (Academic Grade Pay) के फ़ायदों की रिकवरी को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि रिकवरी सही थी क्योंकि शिक्षकों ने ज़्यादा पेमेंट वापस करने के लिए लिखित अंडरटेकिंग दी थी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने केरल हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील को खारिज करते हुए यह आदेश दिया।यह मामला अपील करने वालों को 'एकेडमिक ग्रेड पे' देने से जुड़ा है। उन्हें...

ज्यूडिशियल सर्विस के लिए बेंच क्लर्क का अनुभव लॉ क्लर्क के अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 अक्टूबर) को एक रिट याचिका खारिज की। इस याचिका में मांग की गई थी कि न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए ज़रूरी एक साल की कानूनी प्रैक्टिस की शर्त को पूरा करने के मकसद से, ज़िला न्यायपालिका में बेंच क्लर्क के अनुभव को लॉ क्लर्क के अनुभव के बराबर माना जाए।कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि बेंच क्लर्क का अनुभव "प्रशासनिक" (मिनिस्टीरियल) प्रकृति का होता है और लॉ क्लर्क के अनुभव से अलग होता है, इसलिए कोर्ट ने मामला खारिज किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस...