SC के ताज़ा फैसले

Judicial Service में 3 साल की Practice Rule घटाकर 1 साल: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने Judicial Service में Civil Judge (Junior Division) के पद पर सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य 3 साल की legal practice की शर्त को बदलते हुए इसे 1 साल की active practice कर दिया है। हालांकि, चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति के बाद एक साल Judicial Academy में training और एक साल structured law clerkship पूरी करनी होगी।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मई 2025 के फैसले के खिलाफ दाखिल review petitions पर यह फैसला सुनाया। जस्टिस विनोद चंद्रन ने...

अगर सर्विस रूल्स में कहा गया कि PSC का फ़ैसला फ़ाइनल है तो सरकार कैंडिडेट की योग्यता की दोबारा जांच नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां सर्विस रूल्स में साफ़ तौर पर कहा गया कि कैंडिडेट की योग्यता पर पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) का फ़ैसला फ़ाइनल होगा, वहां कमीशन द्वारा व्यक्ति को योग्य पाए जाने और नियुक्ति के लिए उसकी सिफ़ारिश करने के बाद सरकार स्वतंत्र रूप से उस व्यक्ति की योग्यता की दोबारा जांच या पूरी तरह से दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शैलेंद्र कुमार पटेल से जुड़े मामले की सुनवाई की, जिन्हें छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन (CGPSC) ने...

बंद जगह पर जातिसूचक गाली देना SC/ST Act के तहत अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (20.08.2026) को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) की धारा 3(2)(r) और 3(1)(s) के तहत चल रही कार्यवाही रद्द की। यह मामला स्कूल मैनेजर के खिलाफ दर्ज किया गया, जिस पर दो छात्रों के पिता के साथ मारपीट करने और जातिसूचक गालियां देने का आरोप था। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए मामला रद्द किया कि कथित बातें एक बंद कमरे में कही गईं, जहां आम जनता की पहुंच नहीं थी, इसलिए कानून की ज़रूरी शर्तों को पूरा नहीं किया गया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस...

BREAKING| बेंगलुरु वॉटर सप्लाई मामले में दी गई 'इंडस्ट्री' की परिभाषा ही लंबित मामलों पर लागू होगी: सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच
सुप्रीम कोर्ट ने 5:4 के बहुमत से 'बेंगलुरु वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजाप्पा' मामले में 1978 के फैसले में तय किए गए "ट्रिपल टेस्ट" (तीन शर्तों वाले परीक्षण) को फिर से परिभाषित किया। यह परीक्षण यह तय करने के लिए था कि क्या कोई गतिविधि 'इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947' की धारा 2(j) के तहत "इंडस्ट्री" (उद्योग) की परिभाषा में आएगी या नहीं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नया फॉर्मूला केवल भविष्य के मामलों पर लागू होगा और इससे पहले के फैसलों या लंबित कार्यवाही पर कोई असर नहीं...

PC-PNDT Act के तहत अपराधों के लिए पुलिस FIR दर्ज नहीं कर सकती, न ही जांच कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस 'प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स (लिंग चयन पर रोक) एक्ट, 1994' (PC & PNDT Act) के तहत अपराधों के लिए FIR दर्ज नहीं कर सकती और न ही मुख्य जांच एजेंसी के तौर पर काम कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि एक्ट के तहत बनी 'उचित अथॉरिटी' (Appropriate Authority) शिकायतों की जांच के लिए जिम्मेदार है, जबकि पुलिस ज़्यादा से ज़्यादा तब सहायक भूमिका निभा सकती है जब उचित अथॉरिटी को इसकी ज़रूरत हो।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने PC & PNDT...

बैंक और इंश्योरेंस प्रमोशन के लिए ऑटो डीलरों को मिले रेफरल चार्ज पर सर्विस टैक्स लगेगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19 अगस्त) को कहा कि ऑटोमोबाइल डीलरों को बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों से गाड़ी का लोन और इंश्योरेंस पॉलिसी दिलाने के लिए मिलने वाले रेफरल चार्ज पर फाइनेंस एक्ट, 1994 के तहत "बिज़नेस ऑक्सिलरी सर्विस" (व्यावसायिक सहायक सेवा) के तौर पर टैक्स लगेगा।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"आसेसी (टैक्स देने वाला) बैंकों और इंश्योरेंस कंपनी के कारोबार को बढ़ावा दे रहा है, जिसके लिए उन्हें एग्रीमेंट में तय रकम मिलती है।" ऑटोमोबाइल डीलर TVS मोटर कंपनी...

PC Act | रिश्वत की मांग का सबूत न होने पर सिर्फ़ रिश्वत की रकम बरामद होना काफ़ी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19.08.2026) को एक ग्राम पंचायत के पूर्व तलाटी-सह-मंत्री और चपरासी को बरी किया, जिन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PCA) के तहत दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की शुरुआती मांग को बिना किसी संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सह-आरोपी से सिर्फ़ करेंसी नोट बरामद होने के आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता।जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ताओं...

RPF Rules | आपराधिक मामला छिपाने वाले कर्मचारी को कभी भी नौकरी से निकाला जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (RPSF) के उन कॉन्स्टेबलों को नौकरी से हटाने के फैसले को सही ठहराया, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया के दौरान अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी थी।कोर्ट ने फिर से कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में ज़रूरी जानकारी जानबूझकर छिपाना कर्मचारी के चरित्र पर असर डालता है और नौकरी से हटाने का सही कारण बनता है।जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि RPF नियमों के अनुसार, आपराधिक मामलों...

प्रीमियम का एडवांस भुगतान न होने पर तय बीमा राशि से ज़्यादा जोखिम के लिए बीमा कंपनी ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (18.08.2026) को कहा कि बीमा कंपनी उस नुकसान के लिए ज़िम्मेदार नहीं हो सकती, जो तब हुआ जब बीमित व्यक्ति का टर्नओवर 'मरीन कार्गो एनुअल टर्नओवर पॉलिसी' के तहत तय बीमा राशि (सम एश्योर्ड) से ज़्यादा हो गया, और बढ़े हुए टर्नओवर के लिए प्रीमियम का एडवांस भुगतान नहीं किया गया। यह फ़ैसला इंश्योरेंस एक्ट, 1938 की धारा 64VB की पाबंदी को ध्यान में रखते हुए लिया गया।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने 'न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी' की अपील को मंज़ूरी दे दी।...

Evidence Act | धारा 69 का इस्तेमाल वसीयत साबित करने के लिए तभी किया जा सकता है जब धारा 68 के तहत गवाहों की पुष्टि साबित करना नामुमकिन हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 की धारा 69 का इस्तेमाल धारा 68 के तहत वसीयत साबित करने के सामान्य तरीके के विकल्प के तौर पर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आम तौर पर वसीयत को धारा 68 के तहत साबित किया जाना चाहिए। इसे धारा 69 के तहत तभी साबित किया जा सकता है, जब वसीयत पेश करने वाला यह साबित कर दे कि धारा 68 के तहत वसीयत साबित करने के लिए कोई गवाह नहीं मिल रहा है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह बात...

JJ Act | रेगुलर कोर्ट ने नाबालिग पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाया तो भी सज़ा का फ़ैसला रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी नाबालिग पर रेगुलर क्रिमिनल कोर्ट में मुक़दमा चलाया गया तो सिर्फ़ इस वजह से मामले के गुण-दोष के आधार पर हुई सज़ा (कनविक्शन) रद्द करने की ज़रूरत नहीं। इसी के अनुसार, कोर्ट ने एक ऐसे आरोपी की सज़ा (कनविक्शन) को तो बरकरार रखा, जिस पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाया गया था, लेकिन अपराध की तारीख़ पर उसके नाबालिग होने का पता चलने के बाद उसे सुनाई गई सज़ा रद्द कर दी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की, जिसमें अपील करने वाले आरोपी...

बिजली का झटका लगने से हुई मौतों के लिए बिजली बोर्ड पर सख्त जवाबदेही लागू होती है, पूर्ण जवाबदेही नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिजली का झटका लगने से हुई मौतों या चोटों के लिए बिजली अधिकारियों को 'स्ट्रिक्ट लायबिलिटी' (सख्त जवाबदेही) के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, लेकिन ऐसी जवाबदेही को बिना किसी अपवाद के 'एब्सोल्यूट लायबिलिटी' (पूर्ण जवाबदेही) नहीं माना जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट की सिंगल और डिवीजन बेंच के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को बिजली का झटका लगने से हुई मौतों के लिए...

S. 14 Limitation Act | रिकवरी का केस करने के लिए कंपनी बंद करने की कार्यवाही में लगा समय नहीं घटाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (12 अगस्त) को कहा कि कंपनी बंद करने की कार्यवाही (वाइंडिंग अप प्रोसीडिंग्स) में लगा समय, लिमिटेशन एक्ट की धारा 14 के तहत रिकवरी का केस करने की समय-सीमा से नहीं घटाया जा सकता, क्योंकि दोनों कार्यवाहियों में मांगी गई राहत मूल रूप से अलग-अलग है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"...कंपनी बंद करने की कार्यवाही शुरू करने से - जिससे रिकवरी हो भी सकती है और नहीं भी - पैसे की रिकवरी के लिए अलग से केस करने की समय-सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।" ...

अगर किसी व्यक्ति के पास गोपनीय जानकारी है और वह ट्रेडिंग करता है तो इसे इनसाइडर ट्रेडिंग माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 अगस्त) को कहा कि SEBI (इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक) रेगुलेशन, 2015 के तहत इनसाइडर ट्रेडिंग का अनुमान लगाने के लिए सिर्फ़ 'अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन' (UPSI) का पास होना और उस दौरान सिक्योरिटीज़ में ट्रेडिंग करना ही काफ़ी है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के आदेश को रद्द करते हुए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की अपील को मंज़ूरी दी। इसके साथ ही कोर्ट ने तारा ज्वेल्स लिमिटेड (TJL) के...

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही कानूनी संशोधन के ज़रिए पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही तरीके से लागू की जा सकती है, लेकिन किसी डीलर पर पिछली तारीख से जुर्माना नहीं लगाया जा सकता, जिसने उस समय कानून का पालन किया था जब लेन-देन हुआ था।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने यह अंतर तब स्पष्ट किया, जब उन्होंने कर्नाटक सेल्स टैक्स एक्ट, 1957 में 2001 के संशोधन की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। इस संशोधन ने चीनी पर मिलने वाली छूट को पिछली तारीख से केवल "भारत में उत्पादित या...

S.101(2) JJ Act | JJB के आदेश के खिलाफ अपील की सुनवाई में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साफ़ किया कि कानून के दायरे में आए बच्चे (Child in Conflict with Law) की शुरुआती जांच (Preliminary Assessment) करते समय चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट एक्सपर्ट की मदद लेने का नियम, जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 की धारा 101(2) पर उसी तरह लागू नहीं होगा।धारा 15(1) के प्रावधान के अनुसार, जब यह तय किया जा रहा हो कि कानून के दायरे में आए बच्चे पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाए या नहीं तो बोर्ड के लिए चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की एक्सपर्ट मदद लेना ज़रूरी है, बशर्ते...

National Highways Act | रेफ़रेंस कोर्ट मुआवज़े के हक के लिए मालिकाना हक़ तय कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फ़ैसला सुनाया कि नेशनल हाईवेज़ एक्ट के तहत रेफ़रेंस कोर्ट मुआवज़े के हक को तय करने के लिए मालिकाना हक़ से जुड़े सवालों पर भी विचार कर सकता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,"इसलिए धारा 3H (4) के तहत रेफ़रेंस कोर्ट का अधिकार क्षेत्र इतना व्यापक है कि वह मालिकाना हक़ से जुड़े सवालों पर भी विचार कर सकता है, बशर्ते ऐसा करना ज़मीन अधिग्रहण से मिलने वाले मुआवज़े के हकदार व्यक्ति को तय करने के लिए ज़रूरी हो। इसके उलट कोई भी व्याख्या विधायी योजना को...

कर्मचारी को नौकरी में बनाए रखने के फ़ैसले में 'वॉश्ड-ऑफ़ थ्योरी' लागू नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (6 अगस्त) को कहा कि नौकरी में बनाए रखने के लिए कर्मचारी की उपयुक्तता का आकलन करते समय नियोक्ता (Employer) केवल कर्मचारी के हालिया सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर फ़ैसला लेने के लिए बाध्य नहीं है; बल्कि, फ़ैसला कर्मचारी के पूरे सर्विस रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।इसका मतलब है कि "वॉश्ड-ऑफ़ थ्योरी" - जिसके तहत प्रमोशन मिलने के बाद पिछली खराब एंट्रीज़ (Adverse Entries) को खत्म मान लिया जाता है - नौकरी में बनाए रखने के लिए कर्मचारी की उपयुक्तता का आकलन करते समय लागू...

चेक बाउंस मामले में कंपनी को आरोपी न बनाना CrPC की धारा 319 के तहत समन भेजकर ठीक नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस की शिकायत में कंपनी को आरोपी न बनाना एक ऐसी गंभीर कमी है, जिसे बाद में ट्रायल के दौरान क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 319 के तहत कंपनी को अतिरिक्त आरोपी के तौर पर समन भेजकर ठीक नहीं किया जा सकता।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने फैसला सुनाया कि जब कोई चेक कंपनी के बैंक अकाउंट से जारी किया जाता है तो NI Act की धारा 141 के तहत कंपनी के डायरेक्टर या अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं...

BREAKING| सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: कारों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को 4 साल और दो-पहिया वाहनों के लिए 6 साल तक बढ़ाया जाए
एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने नई कारों के लिए थर्ड-पार्टी मोटर वाहन इंश्योरेंस की अवधि को चार साल और नए दो-पहिया वाहनों के लिए छह साल तक बढ़ाने का निर्देश दिया।सुप्रीम कोर्ट के 2018 के निर्देश के बाद यह कारों के लिए 3 साल और दो-पहिया वाहनों के लिए 5 साल है। मंगलवार को कोर्ट ने गौर किया कि आठ साल पहले जारी किए गए इस निर्देश के बावजूद, कई वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। इसलिए कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI) और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) की आपत्तियों के...
