SC के ताज़ा फैसले

अनारक्षित श्रेणी में PwD के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित पद SC/ST/OBC दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी खुले हैं: सुप्रीम कोर्ट
अनारक्षित श्रेणी में PwD के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित पद SC/ST/OBC दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी खुले हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जब किसी अनारक्षित सीट पर क्षैतिज आरक्षण लागू होता है तो उस अनारक्षित सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अधिकार उन सभी उम्मीदवारों को होता है जिनके पास वह क्षैतिज विशेषता (Horizontal Attribute) मौजूद है, चाहे वे SC, ST, OBC या सामान्य श्रेणी के हों।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में वेस्ट बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर सिविल इंजीनियर के एक पद को यूआर...

NI Act की धारा 138 की शर्तें पूरी होने पर चेक बाउंस की शिकायत को ट्रायल से पहले के स्टेज पर रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
NI Act की धारा 138 की शर्तें पूरी होने पर चेक बाउंस की शिकायत को ट्रायल से पहले के स्टेज पर रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब Negotiable Instruments Act, 1881 (NI Act) की धारा 138 की बुनियादी शर्तें पूरी हो जाती हैं तो चेक बाउंस के मामले को ट्रायल से पहले के स्टेज पर इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता कि चेक किसी कानूनी रूप से लागू होने वाले कर्ज़ के लिए जारी नहीं किया गया।कोर्ट ने कहा कि चेक किसी कानूनी रूप से लागू होने वाले कर्ज़ के लिए जारी किया गया या नहीं, यह ट्रायल का मामला है, और इसे ट्रायल से पहले के स्टेज पर तय नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा,“जब धारा 138 की बुनियादी शर्तें पूरी हो...

S.528 BNSS | विश्वसनीय सबूत आरोपों को गलत साबित कर दें तो आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
S.528 BNSS | विश्वसनीय सबूत आरोपों को गलत साबित कर दें तो आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को फैसला सुनाया कि जहां अभियोजन पक्ष ऐसे विश्वसनीय और अकाट्य सबूतों का खंडन करने में विफल रहता है, जो शिकायत के तथ्यात्मक आधार को प्रभावी ढंग से कमजोर करते हैं, वहां कोर्ट के लिए कार्यवाही रद्द करने की अपनी शक्ति का प्रयोग करना उचित होगा।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने उन अपीलकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की, जिन पर एक बुजुर्ग व्यक्ति पर हमला करने का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि CCTV फुटेज काफी महत्वपूर्ण साबित...

गलत तरीके से सार्वजनिक काम देने का एक भी मामला अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट
गलत तरीके से सार्वजनिक काम देने का एक भी मामला अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक शुरुआती जांच करने का आदेश दिया। यह जांच अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर लगे पक्षपात के आरोपों और उनके रिश्तेदारों व करीबी सहयोगियों को काम के ठेके देने में खुली और प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया से बार-बार हटने के तरीकों से जुड़े आरोपों पर आधारित है।कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक ठेके देने के फैसले संविधान के अनुच्छेद 14 के दायरे में आते हैं। राज्य से यह उम्मीद की जाती है कि वह जनहित को सुरक्षित रखने के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और मनमानी से...

NEET | मेडिकल सीट राष्ट्रीय संसाधन, धोखाधड़ी के कारण खाली हुई सीट अगले उम्मीदवार को ही दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
NEET | मेडिकल सीट राष्ट्रीय संसाधन, धोखाधड़ी के कारण खाली हुई सीट अगले उम्मीदवार को ही दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG के एक उम्मीदवार के एडमिशन को सही ठहराया। यह सीट तब खाली हुई थी, जब पता चला कि मूल रूप से चुने गए उम्मीदवार ने जाली मार्कशीट का इस्तेमाल करके एडमिशन लिया था। कोर्ट ने कहा कि जब ऐसी परिस्थितियों में कोई सीट खाली होती है तो अधिकारियों का यह फ़र्ज़ है कि वे उसे मेरिट लिस्ट में अगले योग्य उम्मीदवार को दें।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने नेशनल मेडिकल काउंसिल की अपील खारिज की, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई, जिसमें...

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास, राज्य केवल अन्य सड़कों पर ही टोल लगा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास, राज्य केवल अन्य सड़कों पर ही टोल लगा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज की। इस याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स लगाने की केंद्र सरकार की शक्ति को चुनौती दी गई। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि इस तरह के शुल्क संविधान के तहत 'संघ सूची' (Union List) के दायरे में आते हैं।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों के उपयोग के लिए वसूला जाने वाला टोल, सूची I (संघ सूची) की प्रविष्टि 23 (संसद द्वारा...

पे कमीशन के फ़ायदे अतिरिक्त शर्तें लगाकर नहीं रोके जा सकते: सुप्रीम कोर्ट
पे कमीशन के फ़ायदे अतिरिक्त शर्तें लगाकर नहीं रोके जा सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को यह टिप्पणी की कि सेंट्रल पे कमीशन की सिफ़ारिशों की मनमानी व्याख्या करके किसी कर्मचारी को पे कमीशन के फ़ायदों से वंचित करने के लिए कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला उन याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था, जिन्होंने शुरू में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन में जूनियर इंजीनियरिंग कैडर में नौकरी शुरू की थी। बाद में कैडर के विलय के बाद उन्हें 'जूनियर इंजीनियर' के तौर पर नया पदनाम दिया गया।लेवल 8 पर...

कंपनी आम बैठक में विशेष प्रस्ताव के बिना डायरेक्टर को लोन नहीं दे सकती: सुप्रीम कोर्ट
कंपनी आम बैठक में विशेष प्रस्ताव के बिना डायरेक्टर को लोन नहीं दे सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को बिजनेसमैन सतिंदर सिंह भसीन की ज़मानत रद्द की, क्योंकि उन्होंने कोर्ट द्वारा लगाई गई ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया था। लगाई गई शर्तों में से एक यह थी कि भसीन को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में 50 करोड़ रुपये जमा करने होंगे। हालांकि, यह बात सामने आई कि इस शर्त को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी कंपनी भसीन इन्फोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (BIIPL) के फंड का गलत इस्तेमाल किया था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने कहा कि भसीन को इस शर्त...

कारण बताओ नोटिस को असाधारण मामलों में रिट अधिकार क्षेत्र में चुनौती दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
कारण बताओ नोटिस को असाधारण मामलों में रिट अधिकार क्षेत्र में चुनौती दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि यद्यपि अदालतें आमतौर पर कारण बताओ नोटिस (SCN) को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर विचार नहीं करती हैं। फिर भी यह सिद्धांत पूर्ण नहीं है और असाधारण परिस्थितियों में नोटिस के चरण पर हस्तक्षेप की अनुमति है।अदालत ने टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का सहारा तब लिया जा सकता है, जब कारण बताओ नोटिस में ऐसी मौलिक कानूनी कमियां हों, जिनके परिणामस्वरूप स्पष्ट अन्याय हो सकता है।अदालत ने कहा कि यद्यपि सामान्य नियम कारण बताओ नोटिसों को चुनौती देने को...

विभागीय जांच में कर्मचारी द्वारा स्वीकार न किए गए दस्तावेज़ों को गवाह के ज़रिए साबित करना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
विभागीय जांच में कर्मचारी द्वारा स्वीकार न किए गए दस्तावेज़ों को गवाह के ज़रिए साबित करना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जब कोई कर्मचारी अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं करता है तो उसे नियोक्ता के बिना साबित हुए दस्तावेज़ी सबूतों के आधार पर नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि नियोक्ता को ऐसे दस्तावेज़ी सबूतों को गवाहों के ज़रिए साबित करना होगा ताकि कर्मचारी को गवाह से जिरह करने का मौका मिल सके।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वे यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड के कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द कर रहे थे।...

S. 197 CrPC | मंजूरी की ज़रूरत का बाद में विस्तार उस समय लिए गए संज्ञान को अमान्य नहीं करेगा, जब कोई रोक नहीं थी: सुप्रीम कोर्ट
S. 197 CrPC | मंजूरी की ज़रूरत का बाद में विस्तार उस समय लिए गए संज्ञान को अमान्य नहीं करेगा, जब कोई रोक नहीं थी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 अप्रैल) को कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत मंजूरी सुरक्षा का बाद में किया गया विस्तार, उन कार्यवाहियों को रोकने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जो उस समय शुरू की गई थीं, जब ऐसी कोई रोक मौजूद नहीं थी।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कलकत्ता पुलिस बल के अधीनस्थ अधिकारी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को सही ठहराया। इस अधिकारी के खिलाफ अपराध का संज्ञान उस समय लिया गया था, जब कलकत्ता पुलिस के सभी अधीनस्थ अधिकारियों को CrPC...

Karnataka Stamp Act | कोर्ट के पास कम पड़ी ड्यूटी के दस गुना से कम जुर्माना लगाने का कोई विवेकाधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
Karnataka Stamp Act | कोर्ट के पास कम पड़ी ड्यूटी के दस गुना से कम जुर्माना लगाने का कोई विवेकाधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जब अदालतें 'कर्नाटक स्टाम्प अधिनियम, 1957' के तहत स्टाम्प ड्यूटी में किसी कमी का निर्धारण करती हैं तो उनके पास कम पड़ी ड्यूटी के दस गुना से कम जुर्माना लगाने का कोई विवेकाधिकार नहीं होता है।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह टिप्पणी की, “जब किसी दस्तावेज़ को डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के पास भेजे बिना कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश करने की कोशिश की जाती है, तो जुर्माने की रकम तय करने में कोई छूट नहीं होती।” बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस...

सरकार को जनहित में उद्योगों को दी गई टैक्स छूट वापस लेने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
सरकार को जनहित में उद्योगों को दी गई टैक्स छूट वापस लेने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा दी गई टैक्स छूट से पाने वाले का कोई ऐसा पक्का अधिकार नहीं बन जाता कि वह हमेशा के लिए उस छूट का दावा करता रहे, और सरकार जनहित में ऐसी छूट वापस ले सकती है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार की अपील को मंज़ूर करते हुए यह बात कही। यह अपील कैप्टिव पावर जेनरेटरों के खिलाफ थी। बेंच ने सरकार के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें उसने कैप्टिव पावर (वह बिजली जो उद्योग अपनी ज़रूरत के लिए खुद बनाते हैं, बिना ग्रिड सप्लाई पर निर्भर रहे)...

Land Acquisition | जिस व्यक्ति ने S.28A के तहत मुआवज़ा स्वीकार किया, वह अपील के आधार पर बढ़ोतरी के लिए दूसरा आवेदन दायर कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
Land Acquisition | जिस व्यक्ति ने S.28A के तहत मुआवज़ा स्वीकार किया, वह अपील के आधार पर बढ़ोतरी के लिए दूसरा आवेदन दायर कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28A के तहत दूसरा आवेदन दायर किया जा सकता है, ताकि अन्य मामलों में हाई कोर्ट द्वारा दी गई बढ़ोतरी के आधार पर मुआवज़े का फिर से निर्धारण किया जा सके।कोर्ट ने फैसला दिया कि भूमि अधिग्रहण का मुआवज़ा स्वीकार कर लेने से कोई ज़मीन मालिक भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28-A के तहत बढ़ा हुआ मुआवज़ा मांगने से वंचित नहीं हो जाएगा।जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच का फैसला...

अनुच्छेद 25 में धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश मांगने का अधिकार शामिल नहीं: सुप्रीम कोर्ट
अनुच्छेद 25 में धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश मांगने का अधिकार शामिल नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार में यह मांग करने का अधिकार शामिल नहीं है कि राज्य किसी धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करे। साथ ही कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक विकासशील राष्ट्र के तौर पर भारत को उत्पादकता और काम की निरंतरता को प्राथमिकता देनी चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 'ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा' ​​द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) खारिज की। इस याचिका में गुरु गोबिंद सिंह की जयंती (प्रकाश पर्व) को...

BREAKING| हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट
BREAKING| हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें कहा गया कि एक बार जब कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और सक्रिय रूप से उसका पालन करता है तो वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं रह सकता।कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने आगे कहा कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने गौर किया कि संविधान...

आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार नियमों की अनुमति होने पर छूट का लाभ उठाने के बावजूद मेरिट के आधार पर सामान्य सीटों का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार नियमों की अनुमति होने पर छूट का लाभ उठाने के बावजूद मेरिट के आधार पर सामान्य सीटों का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को यह टिप्पणी की कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, जिन्होंने किसी योग्यता परीक्षा में छूट का लाभ उठाया, उन्हें अभी भी सामान्य वर्ग के पदों के लिए विचार किया जा सकता है, बशर्ते वे अंतिम चयन चरण में उच्च मेरिट हासिल करें और संबंधित नियम इसकी अनुमति देते हों।TET उम्मीदवारों को राहत देते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ का फैसला रद्द किया, जिसमें यह कहा गया था कि जिन उम्मीदवारों ने छूट का लाभ उठाया है, वे...