राज�थान हाईकोट
"दो नावों की सवारी नहीं कर सकते": राजस्थान हाईकोर्ट ने संज्ञान लेने और आरोप तय करने को दी गई समानांतर चुनौती खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि भले ही किसी वादी के पास कई कानूनी उपाय मौजूद हों, लेकिन एक बार जब वह किसी एक उपाय को चुनने का फैसला कर लेता है तो वह फैसला उसे उसी मामले में किसी दूसरे समानांतर उपाय को एक साथ शुरू करने से रोक देता है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने यह राय दी कि पीड़ित पक्ष को एक ही शिकायत के लिए दो समानांतर कानूनी उपायों का सहारा लेकर "दो नावों की सवारी" करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि ऐसी प्रथा की निंदा की जानी चाहिए।कोर्ट ने कहा,"एक बार जब कोई पक्ष किसी...
स्थायी रूप से दिव्यांग कर्मचारियों के परिजनों के लिए अनुकंपा नियुक्ति लागू, भले ही दुर्घटना नियमों के लागू होने से पहले हुई हो: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि 'राजस्थान स्थायी पूर्ण विकलांग सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति नियम, 2023' के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन पर विचार करते समय दुर्घटना की तारीख का कोई महत्व नहीं है, बशर्ते नियमों के लागू होने की तारीख पर स्थायी पूर्ण विकलांगता की स्थिति मौजूद हो।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने टिप्पणी की कि यह नियम ऐसे मामलों पर विचार करने से मना नहीं करता, जिनमें स्थायी पूर्ण विकलांगता का कारण बनी दुर्घटना, नियमों के लागू होने की तारीख से पहले हुई...
राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व विधायकों की पेंशन की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया, 1956 के कानून को चुनौती देने वाली PIL खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान विधानसभा (अधिकारियों और सदस्यों का वेतन, भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1956 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। यह याचिका इस आधार पर दी गई थी कि यह अधिनियम पूर्व विधायकों ("MLAs") को पेंशन लाभ प्रदान करता है।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की कि संविधान में पूर्व विधायकों को पेंशन देने के खिलाफ किसी 'निहित रोक' को समझने की याचिकाकर्ता की व्याख्या सही नहीं थी। किसी भी स्पष्ट संवैधानिक सीमा के अभाव...
सड़क या श्मशान जैसी सार्वजनिक ज़रूरतें, प्राकृतिक जल मार्गों को नष्ट करके पूरी नहीं की जा सकतीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि 'गैर मुमकिन नाला' (प्राकृतिक जल निकासी और जल प्रवाह का मार्ग) का इस्तेमाल किसी भी ऐसे काम के लिए नहीं बदला जा सकता, जो उसके मूल स्वरूप से अलग हो—जैसे कि सड़क या श्मशान बनाना—सिर्फ़ इस आधार पर कि वह इस्तेमाल किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कि वह संबंधित ज़मीन से किसी भी सड़क, श्मशान के ढांचे या अतिक्रमण को हटाए, जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की डिवीज़न बेंच ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार...
टूटे बिजली तार से लगी आग में सामान बचाने गया व्यक्ति लापरवाह नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि टूटे हुए बिजली के तार से लगी आग में अपना सामान बचाने की कोशिश करने वाले व्यक्ति को लापरवाह नहीं कहा जा सकता। अदालत ने इसे आपात स्थिति में स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया बताया।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने करंट लगने से हुई मौत के मामले में मुआवजा राशि 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की। अदालत ने कहा कि कानून किसी व्यक्ति से यह उम्मीद नहीं करता कि उसका घर जल रहा हो और वह मूक दर्शक बना रहे।अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मुआवजा केवल औपचारिक या प्रतीकात्मक...
हाईकोर्ट ने जोधपुर में गंभीर जल संकट का स्वतः संज्ञान लिया; अंतरिम निर्देश जारी किए
राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर में गंभीर जल संकट का स्वतः संज्ञान लिया। इसमें प्राचीन जल निकायों और पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों की उपेक्षित स्थिति; वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण से संबंधित वैधानिक प्रावधानों का अप्रभावी कार्यान्वयन और जलाशयों, बांधों तथा शहरी जल संरक्षण की चिंताजनक स्थिति शामिल है।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी की खंडपीठ ने स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल के अधिकार पर प्रकाश डाला, जिसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मान्यता प्राप्त है। साथ ही संविधान के...
द्वितीय अपील में हाईकोर्ट 'तीसरी तथ्य जांच अदालत' नहीं बन सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के तहत द्वितीय अपील की सुनवाई करते समय हाइकोर्ट तथ्यों की तीसरी अदालत की तरह काम नहीं कर सकता। केवल इस आधार पर कि रिकॉर्ड से कोई दूसरा दृष्टिकोण संभव है, अदालत दोबारा साक्ष्यों का मूल्यांकन या तथ्यों की नई जांच नहीं कर सकती।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि निचली अदालतों द्वारा दिए गए तथ्यात्मक निष्कर्षों को सही मानने की कानूनी मान्यता होती है। इनमें हस्तक्षेप केवल तभी किया जा सकता है जब वे स्पष्ट रूप से मनमाने, कानून के विपरीत या...
लंबित आपराधिक मामले के आरोपों के आधार पर मुआवजा नहीं दिया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब क्रूरता और उत्पीड़न के आरोप किसी अलग आपराधिक मामले में विचाराधीन हों तब घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) के तहत सुनवाई कर रही अदालत उन विवादित आरोपों के आधार पर मुआवजा नहीं दे सकती।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए निचली अदालतों द्वारा पत्नी को मानसिक प्रताड़ना के आरोपों पर दिए गए 2 लाख रुपये के मुआवजे के आदेश को रद्द कर दिया।अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अदालत का अधिकार क्षेत्र राहत और संरक्षण देने तक सीमित है। इसे आपराधिक मुकदमे...
भरण-पोषण का उद्देश्य भूख और बेघर होने से बचाना, पति पर असहनीय आर्थिक बोझ डालना नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य जरूरतमंद जीवनसाथी को तत्काल सहारा देना और उसे भुखमरी या दर-दर भटकने से बचाना है, न कि पति पर ऐसा भारी आर्थिक बोझ डालना जिसे वह वहन ही न कर सके।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि भरण-पोषण के मामलों के निपटारे में वर्षों की देरी हो जाए और फिर आवेदन की तारीख से ही बड़ी रकम देने का आदेश पारित किया जाए, तो यह वेतनभोगी या सीमित आय वाले व्यक्ति पर अत्यधिक और असहनीय आर्थिक दबाव डाल सकता है।अदालत ने कहा,“न्यायिक व्यवस्था में हुई देरी को किसी एक पक्ष पर...
गोदनामे से ही वैध नहीं मानी जाएगी गोद लेने की प्रक्रिया, 'लेने-देने' की रस्म जरूरी : राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल गोदनामा तैयार कर लेने भर से किसी गोद लेने की प्रक्रिया को कानूनन वैध नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत बच्चे को गोद देने और लेने की वास्तविक रस्म का होना अनिवार्य है और इसे महज औपचारिकता नहीं माना जा सकता।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निचली अदालत और अपीलीय अदालत द्वारा गोदनामे को अमान्य ठहराने के फैसले को चुनौती दी गई।मामले में महिला पक्ष ने कहा कि...
राजस्थान हाईकोर्ट ने मंत्री की ऑनलाइन आलोचना करने पर टीचर का सस्पेंशन रद्द किया, कहा - 'कार्यकारी नाराज़गी' कानून से ऊपर नहीं हो सकती
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक सरकारी टीचर का सस्पेंशन रद्द किया। टीचर को सोशल मीडिया पर एक मौजूदा मंत्री के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में सस्पेंड किया गया।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने फैसला सुनाया कि सस्पेंशन के आदेश में इस बात का कोई ज़िक्र नहीं था कि किस कानूनी अधिकार के तहत याचिकाकर्ता को सस्पेंड किया गया। कोर्ट ने कहा कि कार्यकारी नाराज़गी या किसी को हुई कथित शर्मिंदगी, कानूनी अधिकार की जगह नहीं ले सकती।कोर्ट ने टिप्पणी की कि ज़्यादा से ज़्यादा इन आरोपों के आधार पर कानून के मुताबिक सिर्फ़ विभागीय...
फाइनल रिपोर्ट पर फैसला देने के बाद मजिस्ट्रेट दोबारा आदेश नहीं दे सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब किसी मामले में पुलिस की नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट पर मजिस्ट्रेट आदेश पारित कर देता है तो वह फंक्टस ऑफिशियो हो जाता है। उसके बाद विरोध याचिका पर अलग से दूसरा आदेश पारित नहीं कर सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांढ की पीठ ने स्पष्ट किया कि फाइनल रिपोर्ट और विरोध याचिका पर एक साथ विचार करते हुए मजिस्ट्रेट को एक ही साझा आदेश पारित करना चाहिए।अदालत ने कहा,“यदि शिकायतकर्ता विरोध याचिका दाखिल करता है और उसके समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करता है तो...
बिना कानूनी सुरक्षा अपनाए सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ FIR का आदेश नहीं दे सकता मजिस्ट्रेट: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मजिस्ट्रेट बिना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 में निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किए सीधे FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकता।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि शिकायत सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े कार्यों को लेकर हो, तो मजिस्ट्रेट को FIR दर्ज कराने या संज्ञान लेने से पहले संबंधित अधिकारियों को सुनवाई का अवसर देना और उनके सीनियर अधिकारी से तथ्यात्मक...
जवाई में तेंदुओं के संरक्षण के लिए हाईकोर्ट सख्त, निर्माण और खनन पर रोक; अभयारण्य घोषित करने पर विचार के निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई क्षेत्र में तेंदुओं के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को लेकर बड़ा आदेश देते हुए इलाके में नए निर्माण और खनन गतिविधियों पर रोक लगाई। अदालत ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि पूरे क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जाए।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि जवाई क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन, अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय संतुलन...
सहन करना सहमति नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- आर्थिक और सामाजिक मजबूरियों में साथ रहना क्रूरता को खत्म नहीं करता
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कई महिलाएं आर्थिक निर्भरता, सामाजिक दबाव, बच्चों की जिम्मेदारी, रहने की जगह की कमी और बदनामी के डर के कारण प्रताड़नापूर्ण वैवाहिक संबंधों में रहने को मजबूर होती हैं। ऐसे में केवल यह तथ्य कि पति-पत्नी कुछ वर्षों तक एक ही घर में रहे इससे क्रूरता के आरोप स्वतः खत्म नहीं हो जाते।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने कहा,“एक ही घर में रहना हमेशा सौहार्दपूर्ण वैवाहिक जीवन का प्रमाण नहीं होता। कई बार यह प्रतिकूल परिस्थितियों में...
'आटा-साटा' शादियां नैतिक और कानूनी रूप से दिवालिया हैं, बच्ची को सौदेबाजी का ज़रिया बनाया जाता है: राजस्थान हाईकोर्ट
तलाक की खारिज अर्जी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने "आटा-साटा" शादी की प्रचलित प्रथा के बारे में कुछ टिप्पणियां करते हुए राय दीं कि एक संवैधानिक लोकतंत्र में ऐसी प्रथाएं स्पष्ट सामाजिक और कानूनी अस्वीकृति की हकदार हैं।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की डिवीज़न बेंच ने माना कि नाबालिग से जुड़ा आटा-साटा कोई हानिरहित सांस्कृतिक प्रथा नहीं है, बल्कि यह बच्चों को वस्तु बना देती है, उनकी सहमति को दबा देती है, पितृसत्ता को मज़बूत करती है और भविष्य के टकरावों का...
पत्नी बालिग हो और वैध विवाह हो तो पति पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में पति के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की FIR रद्द करते हुए कहा कि यदि विवाह कानूनी रूप से वैध हो और पत्नी विवाह के समय बालिग हो तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अपवाद के तहत पति पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता।जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने कहा कि पीड़िता विवाह के समय 18 वर्ष से अधिक आयु की थी और उसने स्वयं आरोपी के साथ 12 अप्रैल 2021 को विवाह किया था। ऐसे में बाद में दर्ज कराई गई FIR “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” है।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“मामले...
बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा के लिए बेटे-बहू को घर से बेदखल करना सही: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने सीनियर सिटीजन्स के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि बुजुर्ग माता-पिता की गरिमा और शांतिपूर्ण जीवन की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर बेटे, बहू या अन्य रिश्तेदारों को संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने सीनियर सिटीजन दंपति और उनके बेटे-बहू द्वारा दायर याचिका खारिज की। यह याचिका 80 वर्ष से अधिक उम्र के माता-पिता द्वारा संपत्ति से बेदखली के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई।अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि बुजुर्ग माता-पिता को...
S.480 BNSS | केवल महिला होने से हत्या जैसे गंभीर मामलों में जमानत नहीं मिल सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के गंभीर मामले में सास की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल महिला होने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती, विशेषकर तब जब आरोप बेहद गंभीर हों।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 480 के तहत महिला होने के आधार पर राहत देने की दलील अस्वीकार की।अदालत ने रेखा के.सी. बनाम ज्योतिभाई मामले का हवाला देते हुए कहा कि केवल आरोपी का महिला होना जमानत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता, खासकर तब जब उसके खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के...
सरकारी नौकरी में अलग-अलग तैनाती को 'परित्याग' नहीं माना जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत पति-पत्नी का अलग-अलग स्थानों पर रहना असामान्य नहीं है। केवल नौकरी की तैनाती के कारण अलग रहना अपने आप में “परित्याग” नहीं माना जा सकता और न ही इसे तलाक का आधार बनाया जा सकता है।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह भी कहा कि हर झगड़ा, कटु शब्द या घरेलू विवाद “क्रूरता” की श्रेणी में नहीं आता।अदालत ने कहा कि तलाक के लिए क्रूरता इतनी गंभीर होनी चाहिए, जिससे पीड़ित पक्ष के मन में यह उचित आशंका पैदा हो कि...


















