राज�थान हाईकोट

क्या लॉ डिपार्टमेंट का JDA के लॉ ऑफिसर पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं? राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर आरोपपत्रों पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण में तैनात लॉ ऑफिसर के खिलाफ विधि एवं विधिक कार्य विभाग की ओर से शुरू की गई विभागीय कार्रवाई के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस अनूरूप सिंघी की पीठ ने अधिकारी के खिलाफ जारी दो आरोपपत्रों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर भी रोक लगाई।मामला नरेंद्र कुमार आर्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने विधि एवं विधिक कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से 30 जुलाई 2026 को जारी किए गए दोनों आरोपपत्रों को चुनौती दी।याचिकाकर्ता की ओर...

राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: एडवोकेट क्लर्क का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, इंटर्न के लिए भी ड्रेस कोड
राजस्थान हाईकोर्ट ने एडवोकेट क्लर्कों के प्रवेश, रजिस्ट्रेशन और आचरण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत निर्देश जारी किए।जस्टिस रवि चिरानिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी व्यक्ति को एडवोकेट क्लर्क के रूप में कोर्ट परिसर में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही लॉ इंटर्न और कोर्ट की कार्यवाही देखने आने वाले छात्रों के लिए भी ड्रेस कोड और पहचान संबंधी नियम तय किए गए।मामला कोर्ट के संज्ञान में आई उन घटनाओं के बाद आया, जिनमें कुछ एडवोकेट क्लर्क निर्धारित स्थान के बजाय...

राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर क्राइम के मामलों में बैंक अकाउंट को पूरी तरह फ्रीज़ करने से निपटने के लिए गाइडलाइंस जारी कीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में जांच एजेंसियों, बैंकों और अन्य अधिकारियों के लिए साइबर क्राइम के मामलों में बैंक अकाउंट को "बिना सोचे-समझे" फ्रीज़ करने से निपटने के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं। इसका मकसद न केवल प्रभावी जांच सुनिश्चित करना है, बल्कि "बेगुनाह नागरिकों" की सुरक्षा भी करना है।जस्टिस आनंद शर्मा 105 याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रहे थे, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने कथित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के संबंध में जांच एजेंसियों द्वारा जारी सूचनाओं के आधार पर अपने बैंक अकाउंट को...

रोड चौड़ीकरण के लिए मकान गिराने से पहले मालिकाना दावों की जांच जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश
शहर के मास्टर प्लान के तहत सड़क निर्माण और चौड़ीकरण के लिए आवासीय संपत्तियों को गिराने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया।हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की संपत्ति को हटाने या गिराने से पहले उसके मालिकाना हक के दावे और आपत्तियों की जांच करना तथा उसे सुनवाई का उचित अवसर देना जरूरी है। बिना विधि सम्मत प्रक्रिया अपनाए किसी को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने मामले में संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों की एक समिति गठित करने का निर्देश...

अलग रह रहे पिता की सहमति न होने पर नाबालिग को पासपोर्ट देने से मना नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने पासपोर्ट अथॉरिटी को नाबालिग बच्चे को पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि एप्लीकेशन में पिता की सहमति नहीं थी, बच्चे के विदेश जाने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा:"याचिकाकर्ता का भविष्य और करियर उसके माता-पिता में से किसी एक की इच्छा या मर्जी पर निर्भर नहीं छोड़ा जा सकता। पासपोर्ट के लिए एप्लीकेशन पर पिता की सहमति न होने के कारण याचिकाकर्ता के महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार को नुकसान नहीं...

कब्जाधारियों के कारण नीलाम भूखंडों का कब्जा नहीं दे सकी निगम, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
नीलामी में भूखंड हासिल करने वाले सफल बोलीदाताओं को कब्जा नहीं सौंप पाने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर नगर निगम की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई।हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी संस्था का काम ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे नागरिकों को मुकदमेबाजी के लिए मजबूर होना पड़े। निगम की लापरवाही, जरूरी रिकॉर्ड के रखरखाव में कमी और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण नीलामी में भूखंड हासिल करने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ चार भूखंडों से जुड़े याचिकाओं के समूह पर सुनवाई...

20 साल सेवा के बाद अवैध रूप से हटाई गई शिक्षिका को सिर्फ 1 लाख मुआवजा देना अनुचित: राजस्थान हाईकोर्ट ने बढ़ाकर 20 लाख किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने अवैध रूप से सेवा से हटाई गई शिक्षिका को दिए गए एक लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया।अदालत ने कहा कि राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थान अधिकरण द्वारा दिया गया एक लाख रुपये का मुआवजा बेहद असंगत था। जस्टिस अनुरूप सिंघी की पीठ एक हिंदी शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिन्होंने संबंधित स्कूल में करीब 20 वर्ष तक सेवा की थी। वर्ष 2015 में स्कूल ने यह कहते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं कि हिंदी विषय पढ़ने के लिए कोई छात्र उपलब्ध नहीं है।शिक्षिका...

दिव्यांग अभ्यर्थी को MBBS के लिए अयोग्य बताने से पहले बतानी होगी कार्यात्मक कमी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने बाएं हाथ के जन्मजात विकार के आधार पर MBBS स्टूडेंट को मेडिकल शिक्षा के लिए अयोग्य घोषित करने वाली मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट खारिज की।हाईकोर्ट ने कहा कि केवल दिव्यांगता या शारीरिक विकार के आधार पर किसी स्टूडेंट को MBBS कोर्स के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। मेडिकल बोर्ड को यह स्पष्ट करना होगा कि छात्र में कौन-सी विशिष्ट कार्यात्मक कमी है और वह कमी मेडिकल कोर्स पूरा करने में किस तरह बाधा बनती है।जस्टिस नूपुर भाटी की पीठ ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया...

उपाय से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता: ई-टेंडर अपील पर विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने ऑफलाइन अपील की दी अनुमति
राजस्थान हाईकोर्ट ने ई-टेंडर प्रक्रिया में अपील दाखिल करने को लेकर हुए विवाद में असफल बोलीदाता को राहत देते हुए उसे ऑफलाइन अपील दाखिल करने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपने कानूनी उपाय से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता। साथ ही, अपील पर अंतिम निर्णय होने तक निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाई गई।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभाग के समक्ष 24 घंटे के भीतर अपील की प्रति ऑफलाइन जमा करने की अनुमति दी। अदालत ने विभाग को निर्देश दिया कि वह अपील पर शीघ्र निर्णय करे।मामला...

दोषसिद्धि पर पहले ही रोक, फिर भी कर्मचारी की सेवा समाप्ति पर राजस्थान हाईकोर्ट ने लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने आपराधिक मामले में दोषसिद्धि की जानकारी छिपाने के आरोप में बर्खास्त किए गए सरकारी कर्मचारी को अंतरिम राहत देते हुए उसकी सेवा समाप्ति के आदेश पर रोक लगाई। अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक सेवा समाप्ति के आदेश का प्रभाव और क्रियान्वयन स्थगित रहेगा।जस्टिस अनूप सिंघी की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इस तथ्य पर गौर किया कि कर्मचारी की दोषसिद्धि पर पहले ही हाईकोर्ट की समकक्ष पीठ रोक लगा चुकी थी। उस आदेश में अदालत ने कहा कि दोषसिद्धि को प्रभावी...

बीमारी, गर्भावस्था और भारी बारिश के कारण शारीरिक परीक्षा छूटी तो एक मौका और: राजस्थान हाईकोर्ट ने दी राहत
राजस्थान हाईकोर्ट ने उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने वाले अभ्यर्थियों को एक बार फिर परीक्षा देने का मौका दिया।अदालत ने बीमारी, शारीरिक चोट, गर्भावस्था और भारी बारिश जैसी वास्तविक और अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण परीक्षा से वंचित रहे अभ्यर्थियों के लिए सितंबर 2026 में दोबारा शारीरिक दक्षता परीक्षा कराने का निर्देश दिया।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगी, जो निर्धारित तारीख पर वास्तविक और उचित...

तलाक के बाद अलग रहने से वैवाहिक अपराध का मामला खत्म नहीं हो सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर वैवाहिक अपराध से जुड़े आपराधिक मामले को खत्म नहीं किया जा सकता कि पति-पत्नी का तलाक हो चुका है और दोनों अब अलग-अलग रह रहे हैं। अदालत ने कहा कि वैवाहिक विवाद में यदि अपराध के आरोप लगाए गए हैं तो उनका समाधान कानून के तहत ही होना चाहिए।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने पति की ओर से दायर वह याचिका खारिज की, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत दर्ज FIR और उसके आधार पर चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई।मामले में पति-पत्नी की शादी...

विवाह संबंध कायम होने की बात अभियोजन सामग्री में हो तो धारा 376 प्रथम दृष्टया लागू नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोप में आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति को राहत देते हुए उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत लगाए गए आरोप रद्द किया।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कहा कि अभियोजन की अपनी सामग्री से यह सामने आ रहा है कि संबंधित अवधि में आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच पति-पत्नी का संबंध कायम था। ऐसे में प्रथम दृष्टया धारा 376 के तहत दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। अदालत ने यह फैसला आरोपी की ओर से आरोप तय किए जाने को चुनौती देते हुए दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनाया।...

जीविका का अधिकार अधिसूचित वेंडिंग जोन के बाहर सड़क किनारे कारोबार की अनुमति नहीं देता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने सड़क किनारे वाहन मरम्मत की अस्थायी दुकान चलाने वाले व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जीविका कमाने का अधिकार किसी व्यक्ति को ऐसे स्थान पर दुकान या अस्थायी ढांचा लगाने का असीमित अधिकार नहीं देता, जिसे राज्य सरकार ने वेंडिंग जोन के रूप में अधिसूचित नहीं किया।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(छ) के तहत जीविका कमाने के अधिकार से मनमाने ढंग से वंचित नहीं किया जा सकता लेकिन यह अधिकार निरंकुश और असीमित भी नहीं है। जहां राज्य सरकार ने विधिवत अधिसूचना...

महिला की आधी रात में गिरफ्तारी कानून के खिलाफ, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर NDPS मामला रद्द नहीं होगा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार करने के लिए विशेष परिस्थितियों में संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति जरूरी है। ऐसी अनुमति के बिना आधी रात में महिला की गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन है।हालांकि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई इस गंभीर कानूनी चूक के आधार पर अकेले NDPS मामले की FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने एक महिला की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। महिला के खिलाफ मादक...

होटल चलाने के लिए किराये पर दी गई संपत्ति का विवाद केवल व्यावसायिक उपयोग के कारण वाणिज्यिक विवाद नहीं बन जाता : राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी किराये की संपत्ति में होटल, दुकान, कार्यालय या अन्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित होने मात्र से मकान मालिक और किरायेदार के बीच उत्पन्न विवाद स्वतः वाणिज्यिक विवाद नहीं बन जाता। यदि विवाद मूलतः किरायेदारी, किराया, पट्टे की अवधि, समय से पहले पट्टा समाप्त करने अथवा किरायेदार को बेदखल करने से संबंधित है तो ऐसे विवाद की सुनवाई राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 के तहत गठित किराया अधिकरण के अधिकार क्षेत्र में ही होगी। जस्टिस...

OBC प्रमाणपत्र नहीं दे पाई उम्मीदवार, फिर भी जनरल कैटेगरी में मेरिट पर विचार जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी उम्मीदवार द्वारा आरक्षित वर्ग का प्रमाणपत्र पेश नहीं कर पाने से उसे सामान्य वर्ग (General Category) में अपनी मेरिट के आधार पर चयन के लिए विचार किए जाने से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने एक महिला उम्मीदवार को राहत देते हुए राज्य सरकार को उसकी उम्मीदवारी पर सामान्य वर्ग में मेरिट के आधार पर विचार करने का निर्देश दिया।OBC प्रमाणपत्र नहीं होने पर उम्मीदवारी खारिजमामला जूनियर इंजीनियर पद पर...

RTI से मिली जानकारी पर सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट भारी, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- आधिकारिक संचार को प्राथमिकता
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि जब किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक संचार के विपरीत RTI के तहत प्राप्त जानकारी सामने हो और आधिकारिक संचार को खारिज करने वाला कोई ठोस रिकॉर्ड मौजूद न हो, तो सक्षम प्राधिकारी का संचार अधिक प्रभावी माना जाएगा।जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रतिवादियों को प्रबोधक पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था।180 दिन से अधिक सेवा में ब्रेक का...

₹2.25 करोड़ के सिक्योरिटी बॉन्ड की शर्त रद्द, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- कारण बताना जरूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 375 के तहत सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी करते समय सुरक्षा बांड की शर्त लगाने से पहले जिला जज को उसके पीछे का कम से कम कुछ औचित्य या कारण रिकॉर्ड करना जरूरी है।जस्टिस सुदेश बंसल की पीठ ने ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं से सक्सेशन सर्टिफिकेट के लिए ₹2.25 करोड़ का सिक्योरिटी बॉन्ड मांगा गया था।मामला याचिकाकर्ताओं के पिता की मृत्यु के बाद उनके नाम पर मौजूद कुछ शेयरों की राशि प्राप्त...

गलत अर्ध-न्यायिक आदेश देना अकेले कदाचार नहीं, दुर्भावना या भ्रष्ट मंशा जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक रिटायर राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही और उनकी पेंशन स्थायी रूप से रोकने की सजा रद्द की।अधिकारी पर आरोप था कि उन्होंने किरायेदारी विवाद से जुड़े मामले में गलत आदेश पारित किया और अपने अधिकार क्षेत्र का अनुचित इस्तेमाल किया। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल किसी अर्ध-न्यायिक आदेश के गलत या कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण पाए जाने से अधिकारी का कृत्य कदाचार नहीं बन जाता।जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने कहा कि न्यायिक या अर्ध-न्यायिक अधिकारों का इस्तेमाल...
