राज�थान हाईकोट
ट्रांसजेंडर अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।यह याचिका 'नई भोर संस्था' नामक गैर-लाभकारी संगठन ने दायर की, जो राजस्थान का पहला LGBTQ समुदाय-आधारित संगठन होने का दावा करता है।यह NGO पिछले 20 वर्षों से ट्रांसजेंडर और LGBTQ समुदाय के अधिकारों और सामाजिक विकास के लिए काम करने का दावा करता है।याचिका में कहा गया कि यह अधिनियम 'स्वयं-अनुभूत लिंग पहचान' (self-perceived gender identity) के अधिकार को छीन...
शादी और बच्चे के हित को देखते हुए पीड़िता को दोबारा बुलाने की अनुमति: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए आरोपी की उस अर्जी को मंजूरी दी, जिसमें उसने पीड़िता और उसकी मां को दोबारा गवाही के लिए बुलाने की मांग की थी। अदालत ने यह निर्णय आरोपी और पीड़िता के बीच विवाह तथा उनसे जन्मी बच्ची के हित को ध्यान में रखते हुए दिया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि यदि बदली हुई परिस्थितियों में पीड़िता और उसकी मां के बयान फिर से दर्ज नहीं किए गए तो इससे उनके वैवाहिक जीवन और उनकी बेटी के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।अदालत ने प्राचीन...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी से गायब स्टॉक की रिकवरी आदेश रद्द किया, कहा - गबन के आरोपों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई ज़रूरी
राजस्थान हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया कि जब किसी कर्मचारी की ओर से कोई गंभीर दुराचार होता है, जिससे नियोक्ता को आर्थिक नुकसान होता है तो नियोक्ता को केवल वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर रिकवरी का आदेश देने के बजाय, नियमों के तहत अनुमत उचित कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की बेंच सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम (RSRTC) में मैकेनिक के तौर पर काम कर रहा था। अधिकारियों द्वारा स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया, जिसमें 8 टायर और...
498ए मामले में ननद को राहत, राजस्थान कोर्ट ने कहा-भावावेश में दूर के रिश्तेदारों को भी फंसा दिया जाता है
राजस्थान हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न से जुड़े मामले में मृतका की विवाहित ननद के खिलाफ दर्ज कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में अक्सर भावावेश में दूर के रिश्तेदारों को भी आरोपी बना दिया जाता है, जबकि उनके खिलाफ ठोस आधार नहीं होता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने यह टिप्पणी करते हुए मजिस्ट्रेट द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 498ए के तहत लिए गए संज्ञान को आंशिक रूप से निरस्त किया।मामले में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है और...
चेक मामले में आरोपी को मजबूत बचाव का अधिकार, हस्ताक्षर जांच के लिए FSL भेजने का आदेश: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 139 के तहत चेक धारक के पक्ष में जो कानूनी अनुमान बनाया गया, उससे आरोपी पर अपने बचाव का बोझ बढ़ जाता है। ऐसे में निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और अधिक मजबूत हो जाता है और उसे पूरा अवसर दिया जाना आवश्यक है।जस्टिस अनूप कुमार ढांढ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें आरोपी के चेक पर हस्ताक्षर की FSL जांच कराने के आवेदन को खारिज कर दिया गया।मामले में आरोपी का शुरू से ही यह कहना था कि विवादित चेक पर उसके...
मृतक की आय में HRA व अन्य भत्ते भी शामिल होंगे, मुआवजा गणना में कटौती गलत: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा तय करने को लेकर अहम स्पष्टता देते हुए कहा कि मृतक की आय में मिलने वाले विभिन्न भत्तों को हटाकर गणना नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च दायित्व भत्ता, शहर प्रतिकर भत्ता, मकान किराया भत्ता (HRA), धुलाई भत्ता सहित अन्य भत्ते मृतक की आय का हिस्सा हैं और इन्हें घटाना कानूनन सही नहीं है।जस्टिस संदीप तनेजा की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला कोर्ट द्वारा इन भत्तों को हटाकर मुआवजा तय करना उचित नहीं है।कोर्ट ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट...
आउटसोर्स कर्मचारी को विभाग सीधे नहीं कर सकता बर्खास्त: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी सरकारी विभाग में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी को विभाग स्वयं सीधे बर्खास्त नहीं कर सकता। ऐसे मामलों में विभाग केवल संबंधित एजेंसी को कार्रवाई के लिए अनुशंसा कर सकता है।जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण की पीठ यह मामला सुन रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता पंचायत राज विभाग के राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत ई-गवर्नेंस में राज्य समन्वयक के रूप में कार्यरत था। उसकी नियुक्ति एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से हुई थी लेकिन विभाग ने सीधे उसके सेवाएं...
FIR दर्ज किए बिना भी मजिस्ट्रेट ले सकते हैं पुलिस की मदद: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया अधिकार क्षेत्र
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट किसी शिकायत पर सीधे FIR दर्ज कराने का आदेश दिए बिना भी पुलिस या अन्य सक्षम अधिकारी से जांच करा सकते हैं। अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 225 के तहत यह जांच केवल मजिस्ट्रेट की सहायता के लिए होती है, न कि पूर्ण पुलिस जांच का विकल्प।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि धारा 225 के अंतर्गत की जाने वाली जांच सीमित और प्रारंभिक प्रकृति की होती है, जिसका उद्देश्य यह तय करना होता है कि आरोपी के खिलाफ आगे कार्यवाही के लिए पर्याप्त...
Section 311 CrPC | कोर्ट अहम गवाह को बुला सकता है, भले ही प्रॉसिक्यूशन न बुलाए: राजस्थान हाईकोर्ट
CrPC की धारा 311 के तहत दायर अर्जी मंज़ूर करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि प्रॉसिक्यूशन ने किसी अहम गवाह का ज़िक्र नहीं किया, यह आरोपी को ऐसे गवाह को बुलाने का मौका देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता, जब उसका बयान केस में सही फ़ैसले के लिए ज़रूरी और प्रासंगिक लगे।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ज़िला कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसने याचिकाकर्ता-आरोपी की CrPC की धारा 311 के तहत दायर अर्जी खारिज की थी। इस अर्जी में उस डॉक्टर को...
दूसरे राज्य का आरक्षण यहां लागू नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- हर राज्य की सामाजिक स्थिति अलग
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक राज्य में मिलने वाला आरक्षण लाभ दूसरे राज्य में लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि विभिन्न राज्यों के पिछड़े वर्गों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं।जस्टिस संजीत पुरोहित की पीठ ने यह टिप्पणी NEE-PG सीट आवंटन में आरक्षण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की।अदालत ने कहा,“अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का निर्धारण प्रत्येक राज्य की अपनी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। यह मान लेना कि सभी राज्यों के...
NDPS मामलों में बरामदगी व गिरफ्तारी मेमो की सच्चाई ट्रायल में ही तय होगी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि NDPS मामलों में बरामदगी और गिरफ्तारी मेमो की सत्यता, विश्वसनीयता और प्रमाणिकता का परीक्षण ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है, न कि रिट याचिका में।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज की, जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की थी।याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे उसके घर से उठाया गया और बाद में उस स्थान पर ले जाकर फंसाया गया, जहां से कथित तौर पर मादक पदार्थ बरामद दिखाया गया। उसने पूरे मामले को झूठा और मनगढ़ंत...
एड-हॉक के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता: 28 साल की सेवा के बाद कर्मचारी को पक्का करने पर विचार करे सरकार- राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक कर्मचारी को राहत दी, जिसने 28 साल से ज़्यादा समय तक सेवा देने के बावजूद, सरकार द्वारा उसे पक्का करने पर विचार न किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। सरकार का तर्क था कि उसकी शुरुआती नियुक्ति किसी स्वीकृत पद पर नहीं, बल्कि एड-हॉक (अस्थायी) आधार पर की गई।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने पाया कि राज्य सरकार का यह तर्क कि याचिकाकर्ता को किसी स्वीकृत पद पर नहीं, बल्कि केवल काम के बढ़ते बोझ को संभालने के लिए रखा गया था, लेबर कोर्ट द्वारा पहले ही खारिज किया जा चुका था। लेबर कोर्ट ने...
लोक सेवकों पर FIR का आदेश यूं ही नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- पहले कानूनी सुरक्षा प्रावधानों का पालन जरूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि मजिस्ट्रेट बिना विचार किए या यांत्रिक तरीके से लोक सेवकों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(2) के तहत निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए स्पेशल कोर्ट द्वारा पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश रद्द किया और मामले को पुनः विचार के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया।अदालत ने कहा कि धारा...
भरण-पोषण मामले में पत्नी की नौकरी का रिकॉर्ड मंगा सकता है पति: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पति भरण-पोषण के दावे का विरोध करने के लिए पत्नी के रोजगार और आय से जुड़े दस्तावेज अदालत के माध्यम से मंगा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेज निष्पक्ष सुनवाई के लिए जरूरी होते हैं।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पति की ओर से दायर आवेदन खारिज कर दिया गया था।मामले में पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की थी। सुनवाई के दौरान पति को जानकारी मिली कि पत्नी प्राइवेट हॉस्पिटल में नर्स के रूप...
बिना सभी प्रयास किए किसी को 'फरार' घोषित नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की जल्दबाजी पर जताई आपत्ति
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी को फरार घोषित करने से पहले उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सभी उचित और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। बिना ऐसा किए सीधे कठोर कार्रवाई करना कानून के अनुरूप नहीं है।जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने यह फैसला एक चेक बाउंस मामले में दिया, जिसमें याचिकाकर्ता को अनियमित रूप से पेश होने और जमानत की शर्तों का पालन न करने के कारण ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उसे फरार घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी।हाईकोर्ट...
बिना लाइसेंस के या दो सवारी के साथ बाइक चलाने पर तब तक 'सहयोगी लापरवाही' नहीं मानी जाएगी, जब तक उसका सीधा संबंध दुर्घटना से न हो: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना वैध लाइसेंस के और दो सवारी (पिलियन राइडर्स) के साथ मोटरसाइकिल चलाना भले ही मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन हो, लेकिन ये काम अपने आप में दुर्घटना में मृतक की 'सहयोगी लापरवाही' (Contributory Negligence) मानने का आधार नहीं हो सकते, जब तक कि इस बारे में कोई खास निष्कर्ष न हो।जस्टिस संदीप तनेजा ने आगे कहा कि चूंकि मृतक एक नाई था, इसलिए उसकी मासिक आय की गणना 'कुशल श्रमिक' (Skilled Worker) के न्यूनतम वेतन के आधार पर की जानी चाहिए, न कि एक 'अकुशल श्रमिक' (Unskilled...
झूठे दावे पर फटकार: हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की खारिज, लगाया 5 हजार का जुर्माना
राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रामक और गलत जानकारी के आधार पर दायर की गई अवमानना याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रवि चिरानिया ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अदालत के पूर्व आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।याचिकाकर्ता का दावा था कि समन्वय पीठ ने राजस्व मंडल के पंजीयक को उसे शिक्षा विभाग से राजस्व विभाग में स्थानांतरित करने का निर्देश...
खाप पंचायतों पर सख्त रुख: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को दिया नीति बनाने का निर्देश, कहा- सामाजिक बहिष्कार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
राजस्थान हाईकोर्ट ने खाप पंचायतों द्वारा जारी फरमानों और सामाजिक बहिष्कार की प्रथा पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को व्यापक नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन हैं।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि खाप पंचायतें किसी भी प्रकार की वैधानिक संस्था नहीं हैं। फिर भी वे खुद को समानांतर सत्ता केंद्र के रूप में स्थापित कर चुकी हैं और लोगों के निजी जीवन में दखल देकर गैरकानूनी आदेश जारी करती...
वकील की गैरहाजिरी में अधूरी क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं चलेगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गवाह को दोबारा बुलाने की दी अनुमति
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि आरोपी को प्रभावी जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता खासकर तब जब उसके वकील की अनुपस्थिति के कारण जिरह ठीक से नहीं हो पाई हो।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने एक हत्या के आरोपी को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें प्रत्यक्षदर्शी गवाह को दोबारा बुलाने की मांग खारिज की गई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को अत्यधिक तकनीकी करार दिया।अदालत ने कहा,“किसी सामान्य व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह एक प्रशिक्षित...
बराबरी वालों में ही हो प्रतिस्पर्धा: राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती पर दिया अहम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा हमेशा समान स्तर के उम्मीदवारों के बीच ही होनी चाहिए न कि अनुभवी और नए उम्मीदवारों को एक साथ खड़ा किया जाए।जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण ने यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनमें होमगार्ड विभाग के स्वयंसेवकों ने अपनी कथित मौखिक सेवामुक्ति को चुनौती दी थी।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पहले से होमगार्ड विभाग में स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर चुके हैं और उन्हें नए भर्ती प्रक्रिया में...









