राज�थान हाईकोट
राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए आदेश: सेवा अधिकरण में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोपों की होगी जांच
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में रिकॉर्ड से कथित छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों को लेकर जांच के आदेश दिए। अदालत ने कार्मिक विभाग के सचिव को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।जस्टिस रवि चिरानिया ने 17 अप्रैल को पारित आदेश में अधिकरण के रजिस्ट्रार की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर असंतोष जताते हुए कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी एक लिपिक पर डालने का प्रयास कर रहे हैं।अदालत ने कहा,"यह न्यायालय पाता है कि यह स्पष्टीकरण अत्यंत अव्यावहारिक है और रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम...
46 साल की बकाया दिव्यांग पेंशन देने का आदेश, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- सरकारी लापरवाही का खामियाजा पूर्व वायुसेना कर्मी नहीं भुगत सकता
राजस्थान हाईकोर्ट ने भारतीय वायुसेना के पूर्व कॉर्पोरल को बड़ी राहत देते हुए सरकार को 46 वर्षों की बकाया दिव्यांग पेंशन चार महीने के भीतर अदा करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकारी निष्क्रियता या देरी के कारण किसी पूर्व सैनिक को उसके वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस नुपुर भाटी की खंडपीठ ने सशस्त्र बल अधिकरण के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें दिव्यांग पेंशन बहाल तो की गई, लेकिन उसके बकाये का भुगतान केवल वर्ष...
जुए के मामले में 100 रुपये का जुर्माना 'नैतिक अधमता' नहीं, नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश के तहत किसी व्यक्ति पर केवल जुर्माना लगाए जाने को 'नैतिक अधमता' (मोरल टरपिट्यूड) नहीं माना जा सकता। ऐसे आधार पर किसी पात्र अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी को किसी मामले में दोषी ठहराया गया हो तो केवल उसी आधार पर यांत्रिक तरीके से नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। नियुक्ति प्राधिकारी का दायित्व है कि वह यह जांच करे कि संबंधित अपराध...
प्रोटेस्ट याचिका के आधार पर ही फाइनल रिपोर्ट खारिज नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दुष्कर्म मामले में राजश्तान हाईकोर्ट ने रद्द किया संज्ञान आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट केवल प्रोटेस्ट याचिका में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस की नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर अपराधों का संज्ञान नहीं ले सकता। ऐसा करने से पहले उसे जांच के दौरान एकत्र किए गए समस्त साक्ष्यों और सामग्री पर सार्थक विचार करना होगा तथा जांच अधिकारी के निष्कर्षों से असहमति के स्पष्ट कारण दर्ज करने होंगे।जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने दुष्कर्म के एक मामले में दो आरोपियों के खिलाफ लिए गए संज्ञान को रद्द करते हुए कहा कि संबंधित...
राजनीतिक पहचान नहीं, कानून और प्रक्रिया के आधार पर परखी जाए प्रशासनिक कार्रवाई: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी प्रशासनिक निर्णय की वैधता का परीक्षण संबंधित कानून और अपनाई गई प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि उस व्यक्ति की राजनीतिक पहचान के आधार पर जिसने मामले को अधिकारियों के संज्ञान में लाया हो। अदालत ने कहा कि केवल इस कारण कोई प्रशासनिक निर्णय अवैध या मनमाना नहीं माना जा सकता कि उसके पीछे सत्तारूढ़ दल के किसी स्थानीय नेता का प्रतिनिधित्व या अनुरोध रहा हो।जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह टिप्पणी फालोदी जिले में नए राजस्व गांव खीचन विस्तार के गठन को चुनौती देने...
गंभीर बीमारी से जूझ रहे आजीवन कारावास भुगत रहे दोषी को राहत, राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर दी जमानत
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे दोषी को बड़ी राहत देते हुए उसकी सजा निलंबित कर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। दोषी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी गिलियन-बारे सिंड्रोम से पीड़ित है। हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था को मानवीय गरिमा से अलग नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों में मानवता तथा संवैधानिक मूल्यों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने कहा कि केवल बीमारी के आधार पर सजा निलंबित नहीं की जा सकती, लेकिन जब कोई...
53 दिन की अवैध कैद पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: तहसीलदार पर व्यक्तिगत रूप से 2 लाख का जुर्माना, जांच के आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने HIV संक्रमित व्यक्ति को रिहाई के आदेश के बावजूद 53 दिनों तक अवैध रूप से जेल में रखने के मामले में राज्य प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए संबंधित तहसीलदार पर व्यक्तिगत रूप से 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के भी आदेश दिए।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने इस घटना को शैतानी कृत्य करार देते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि मानवीय पीड़ा के प्रति ऐसी असंवेदनशीलता है जो अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देती है।अदालत ने...
ज्यूडिशियल रिमांड के बाद गिरफ्तारी के आधार न बताए जाने पर भी 'हेबियस कॉर्पस' नहीं दिया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार ज्यूडिशियल रिमांड के आदेश जारी होने के बाद गिरफ्तारी को इस आधार पर चुनौती देने के लिए 'हेबियस कॉर्पस' की याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए। ऐसा तब भी है जब नियमों का यह पालन न करना संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 के तहत अनिवार्य संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का उल्लंघन हो। [2026 LiveLaw (Raj) 249]जस्टिस उमा शंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की डिवीजन बेंच ने...
नामर्दी के आरोपों को गलत साबित करने के लिए पत्नी के नार्को, पॉलीग्राफ और DNA टेस्ट की मांग: राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की पति की अर्ज़ी
राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की उस अर्ज़ी को खारिज करने का फैसला सही ठहराया, जिसमें उसने अपनी और अपनी पत्नी की संयुक्त मेडिकल जांच की मांग की थी, ताकि पत्नी द्वारा तलाक की अर्ज़ी में लगाए गए शारीरिक अक्षमता और नामर्दी के आरोपों को गलत साबित किया जा सके। [2026 LiveLaw (Raj) 248]जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने कहा कि पहली बात तो यह कि अर्ज़ी कार्यवाही के बहुत बाद के चरण में दायर की गई। दूसरी बात, याचिकाकर्ता कथित यौन अक्षमता या नामर्दी के मुद्दे के लिए नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट, DNA टेस्ट आदि की...
दोषसिद्धि जरूरी नहीं, आदतन अपराधी होने के उचित आधार पर खोली जा सकती है हिस्ट्रीशीट: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस नियम, 1965 के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने या दोबारा सक्रिय करने के लिए पूर्व दोषसिद्धि (सजा) अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि पुलिस के पास यह मानने के उचित आधार हैं कि कोई व्यक्ति आदतन अपराध करने का आदी है, तो उसके खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोली जा सकती है।जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि पुलिस नियमों में प्रयुक्त "आदतन अपराधी" की व्याख्या राजस्थान आदतन अपराधी अधिनियम, 1953 से नहीं ली जा सकती। अधिनियम के तहत...
अलग रह रही विधवा जेठानी को दहेज से कोई लाभ नहीं होना था, उसके खिलाफ 498ए का मामला रद्द: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में महिला की जेठानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। अदालत ने कहा कि विधवा और ससुराल परिवार से अलग रह रही जेठानी को कथित दहेज से कोई लाभ मिलने की संभावना नहीं थी, इसलिए उसके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया टिकाऊ नहीं हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता जेठानी का उन नकदी या दहेज के सामानों से कोई लेना-देना नहीं था, जो कथित रूप से महिला के पति और सास-ससुर को दिए जाने थे।अदालत ने कहा...
गैर-जमानती गंभीर धाराएं जुड़ते ही पहले मिली जमानत का लाभ समाप्त होगा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी आरोपी को शुरू में केवल जमानती अपराधों में जमानत मिली हो और बाद में जांच के दौरान उससे संबंधित गंभीर गैर-जमानती धाराएं जोड़ दी जाएं, तो पहले दी गई जमानत का लाभ स्वतः जारी नहीं रह सकता। ऐसी स्थिति में जमानत निरस्त की जा सकती है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति मामलों की विशेष अदालत द्वारा जमानत निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामले में आरोपी के खिलाफ FIR...
समय से पहले दायर चेक बाउंस शिकायत वापस लेने के बाद नई शिकायत वैध, कार्यवाही रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि चेक बाउंस मामले में पहले दायर की गई शिकायत समय से पूर्व होने के कारण वापस ले ली गई हो तो उसके बाद दायर की गई नई शिकायत को केवल इस आधार पर समय-सीमा से बाहर नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर एक आरोपी की याचिका खारिज की, जिसमें उसने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने कहा कि समय से पहले दायर शिकायत वापस लेने के बाद प्रस्तुत की गई नई शिकायत को विलंबित नहीं माना जा...
बिना मांग के पक्षकार बनाने का आदेश देना कानून का घोर दुरुपयोग, राजस्व मंडल का आदेश रद्द: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्व मंडल द्वारा पारित एक आदेश को रद्द करते हुए उसे कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग और न्यायिक मर्यादा के विपरीत करार दिया।हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामले को दोबारा सुनवाई के लिए राजस्व मंडल की किसी अन्य पीठ को सौंपा जाए।जस्टिस संजीत पुरोहित की पीठ ने कहा कि राजस्व मंडल ने जिस प्रकार बिना नोटिस जारी किए, बिना प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए और बिना विलंब माफी आवेदन पर निर्णय किए ही पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की, वह स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ है।मामले...
31 साल बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया पूर्व सिपाही को दिव्यांगता पेंशन देने का आदेश, कहा- सेना ने न तो मेडिकल जांच की और न ही डिस्चार्ज ऑर्डर में बीमारी का ज़िक्र किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने 1995 में सर्विस के दौरान हुई न्यूरोलॉजिकल बीमारी के कारण डिस्चार्ज किए गए पूर्व सिपाही को 31 साल बाद राहत देते हुए कहा कि डिस्चार्ज से पहले कोई मेडिकल जांच नहीं की गई और पूर्व सैनिक के डिस्चार्ज ऑर्डर में उसकी मेडिकल हिस्ट्री/बीमारी का ज़िक्र "जानबूझकर" नहीं किया गया।उन्हें 'आर्मी पेंशन रेगुलेशंस 1961' ("1961 रेगुलेशंस") के तहत दिव्यांगता/अशक्तता पेंशन का लाभ देने से मना कर दिया गया।जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस रवि चिरानिया की डिवीजन बेंच ने पाया कि डिस्चार्ज से पहले न तो कोई...
मात्र नाबालिग पीड़िता के केस आगे न बढ़ाने की इच्छा पर ही POCSO केस रद्द नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पुलिस की 'नेगेटिव फ़ाइनल रिपोर्ट' स्वीकार की थी। यह रिपोर्ट नाबालिग पीड़िता की सहमति के आधार पर दी गई, जिसमें उसने कहा कि वह आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाना चाहती।जस्टिस अनूप कुमार ढंड की बेंच ने कहा कि POCSO के तहत आरोपियों पर चल रहे मुक़दमे को सिर्फ़ इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता कि पीड़िता ने बाद में कार्यवाही आगे न बढ़ाने पर सहमति दी थी।आगे कहा गया,"जब आरोपी के ख़िलाफ़ अपराध बनता है - चाहे पीड़िता की सहमति हो या न...
राजस्थान हाई कोर्ट ने पति के जीवित रहते हुए अलग रह रही पत्नी की फैमिली पेंशन में नॉमिनी के तौर पर नाम शामिल करने की याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की याचिका खारिज की, जिसमें उसने अपने पति के पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) में नॉमिनी के तौर पर अपना नाम शामिल करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि चूंकि पति अभी जीवित है, इसलिए यह याचिका समय से पहले दायर की गई।जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने कहा कि जब तक पति जीवित है, तब तक याचिकाकर्ता को पति की मृत्यु के बाद फैमिली पेंशन पाने के लिए PPO में नॉमिनी के तौर पर अपना नाम शामिल करने का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।आगे कहा गया,"याचिकाकर्ता को यह दावा करने का कोई...
विदेश यात्रा करने के इच्छुक आरोपी को ज़मानत मिलने के बाद LOC वापस लेने के लिए SOP बनाने की मांगा: राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी
राजस्थान हाईकोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और एडवोकेट जनरल से मदद मांगी ताकि वे कोर्ट को उन कदमों के बारे में बता सकें, जो उन आरोपियों को ज़मानत मिलने की जानकारी अधिकारियों को समय पर देने के लिए SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) बनाने के लिए उठाए गए, जिनके खिलाफ LOC जारी किया गया, ताकि उसे वापस लिया जा सके।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने उस तरीके के बारे में भी स्पष्टता मांगी, जो किसी आरोपी को रेगुलर ज़मानत मिलने पर एविएशन डिपार्टमेंट/एयरपोर्ट अधिकारियों को समय पर जानकारी देने और यह सुनिश्चित...
20 लाख रुपये गुजारा भत्ता और आपसी सहमति से तलाक के बाद भी दहेज मामला जारी रखना कानून का दुरुपयोग: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि एक महिला द्वारा 20 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता प्राप्त करने और आपसी सहमति से तलाक लेने के बाद भी पूर्व पति और उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के मुकदमे को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।जस्टिस अनुप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि यह मामला एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है जहां समझौता, गुजारा भत्ता और तलाक प्राप्त करने के बावजूद शिकायतकर्ता मुकदमे को जारी रखकर याचिकाकर्ताओं को लंबी कानूनी प्रक्रिया और आर्थिक बोझ झेलने के लिए मजबूर कर रही है।अदालत दहेज...
राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश: आसाराम को जेल में पहले के आदेशों के तहत मिल रही मेडिकल सुविधाएं जारी रहेगी
राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि रेप के दोषी आसाराम को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों के तहत जो भी सुविधाएं, रहने की व्यवस्था, मंज़ूरियां और मेडिकल इंतज़ाम दिए गए, वे सभी उसकी सज़ा के ख़िलाफ़ अपील खारिज होने के बाद भी उसी तरह जारी रहेंगे।आसाराम ने हाईकोर्ट में कुछ ऐसी सुविधाएं और रहने की व्यवस्थाएं फिर से शुरू करने की मांग की, जो उसे पहले सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों के तहत उसकी उम्र और मेडिकल स्थिति को देखते हुए दी गईं। साथ ही उसने कुछ अतिरिक्त सुविधाओं की भी मांग की।...


















