राज�थान हाईकोट
एक ही आदेश के खिलाफ दो समानांतर उपाय नहीं अपना सकता पक्षकार: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि किसी आदेश या निर्णय के खिलाफ एक ही समय में दो समानांतर कानूनी उपाय अपनाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस आधार पर एक पुनर्विचार याचिका खारिज की।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा कि जब कोई पक्षकार उपाय चुन लेता है तो उसे उसी के साथ आगे बढ़ना होगा। यदि उस उपाय से राहत नहीं मिलती तो वह बीच में दूसरा उपाय अपनाकर दो नावों पर सवार” नहीं हो सकता।अदालत ने कहा,“दो समानांतर उपाय अपनाकर याचिकाकर्ता दो नावों में सवार होने का प्रयास कर रहा...
सिंगल यूज़ प्लास्टिक प्रतिबंध: 36 माइक्रोन शराब लेबल टेंडर पर राजस्थान हाइकोर्ट ने आबकारी विभाग से जवाब मांगा
राजस्थान हाइकोर्ट ने 36 माइक्रोन मोटाई वाले प्लास्टिक शराब लेबल की खरीद के लिए जारी टेंडर को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राजस्थान सरकार के आबकारी विभाग को नोटिस जारी किया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संज़ीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा कि विज्ञापन में 50 माइक्रोन के बजाय 36 माइक्रोन मोटाई वाले होलोग्राम की मांग क्यों की गई।पूरा मामलाजनहित याचिका में कहा गया कि राज्य ने ई-निविदा जारी कर लगभग 600 करोड़ पॉलिएस्टर आधारित रंगीन सुरक्षा होलोग्राम...
राजस्थान भूमि राजस्व संशोधन अधिनियम पर उठे संवैधानिक सवाल, हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस
राजस्थान हाइकोर्ट ने राजस्थान भूमि राजस्व (संशोधन एवं वैधीकरण) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार और विशेष रूप से राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम को नोटिस जारी किया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संज़ीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत जो धारा 100ए जोड़ी गई, उसके अंतर्गत की गई सभी कार्रवाइयाँ अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि रीको ने अपने वैधानिक अधिकार...
मृत्यु से पहले दिया गया बयान मेडिकल प्रमाणन नहीं, दोषसिद्धि असुरक्षित: राजस्थान हाइकोर्ट ने पत्नी को जलाने के आरोप में दोषी ठहराए व्यक्ति को बरी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि मृत्यु मृत्यु से पहले दिया गया बयान मेडिकल प्रमाणन नहीं हो कि कथन देने वाला व्यक्ति होश में सजग और मानसिक रूप से सक्षम था तो केवल ऐसे कथन के आधार पर दोषसिद्धि सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने पत्नी को कथित रूप से आग लगाकर हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया।खंडपीठ के जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा ने यह भी पाया कि कथित मृत्यु पूर्व कथन के समय मृतका की नाड़ी, ब्लड प्रेशर अथवा जलने...
'हज़ारों अपील 20-30 साल से पेंडिंग': राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- जहां जल्दी सुनवाई की उम्मीद कम, वहां सज़ा सस्पेंड करने पर विचार किया जाना चाहिए
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि अपील कोर्ट को सज़ा सस्पेंड करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल उन मामलों में ज़्यादा सावधानी से करना चाहिए, जहां उसे लगता है कि क्रिमिनल अपील पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि अगर अपील आखिरकार सफल हो जाती है तो काटी गई जेल की सज़ा को वापस नहीं किया जा सकता है।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट में हज़ारों क्रिमिनल अपील 20-30 साल से पेंडिंग हैं, जिनमें जल्दी सुनवाई की कोई उम्मीद नहीं है।उन्होंने कहा,"हाईकोर्ट में पिछले 20-30 सालों से हज़ारों क्रिमिनल...
सीनियर सिटीजन का सम्मानपूर्वक जीवन जीना संवैधानिक दायित्व: राजस्थान हाइकोर्ट ने वृद्धाश्रमों का राज्यव्यापी लेखा-परीक्षण कराने के दिए निर्देश
राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटीजन को सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अधिकार संविधान से प्राप्त है। इसी संदर्भ में हाइकोर्ट ने राज्य में संचालित 31 वृद्धाश्रमों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं का व्यापक आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह राज्य के सभी 31 वृद्धाश्रमों की स्थिति, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं, चिकित्सीय व्यवस्था और कल्याणकारी उपायों का समग्र अध्ययन...
मनगढ़ंत मामला, सह-आरोपी बरी; पीड़िता से जोड़ने वाला एक भी कॉल नहीं: आसाराम की राजस्थान हाइकोर्ट में दलील
स्वयंभू संत आसाराम बापू की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने अभियोजन गवाहों, खासकर पीड़िता के माता-पिता की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए।बचाव पक्ष ने कहा कि उनके बयानों में विरोधाभास बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें और झूठे दावे हैं, जो पूरे मामले की जड़ को कमजोर करते हैं।डिवीजन बेंच के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित के समक्ष बचाव पक्ष ने दलील दी कि पीड़िता के माता-पिता को अपीलकर्ता की गतिविधियों की पूरी जानकारी थी और उन्हें यह भी पता था कि वह...
राजस्थान हाईकोर्ट ने MBBS फाइनल ईयर के स्टूडेंट की एक्सीडेंटल मौत पर मुआवज़ा बढ़ाकर ₹78 लाख किया, हर महीने ₹50K की नोशनल इनकम लागू की
राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2015 में एक एक्सीडेंट में मारे गए 23 साल के MBBS फाइनल ईयर के स्टूडेंट के परिवार के लिए मुआवज़ा लगभग ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹78 लाख किया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के बिष्णुप्रिया पांडा बनाम बसंती मंजरी मोहंती और अन्य के केस का ज़िक्र किया, जिसमें एक जैसी असल स्थिति से निपटा गया और मृतक की नोशनल इनकम, भविष्य की संभावनाओं के साथ ₹50,000 हर महीने मानी गई।कोर्ट एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के उस आदेश के खिलाफ दायर क्रॉस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें मृतक के...
गांव में दुश्मनी का अंदाज़ा पैरोल देने से मना करने का कोई आधार नहीं, शर्तों के ज़रिए लॉ एंड ऑर्डर को संभाला जा सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि पक्षकारों के बीच आपसी तनाव की संभावना या किसी खतरे का एहसास अपने आप में पैरोल देने से मना करने का कोई तय करने वाला कारण नहीं हो सकता, खासकर तब जब आवेदक का जेल में व्यवहार ठीक बताया गया हो।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखना राज्य की लगातार ज़िम्मेदारी है और पैरोल के समय आवेदक पर सही शर्तें लगाकर ऐसी चिंताओं को दूर किया जा सकता है।कोर्ट एक दोषी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसकी पहली पैरोल की अर्जी पैरोल एडवाइजरी कमेटी ने पुलिस अधिकारियों की...
'अगर विक्टिम मेरी लोकेशन पूछ रही थी, तो मुझ पर ट्रैफिकिंग का आरोप कैसे लगाया जा सकता है?' आसाराम ने रेप केस में राजस्थान हाईकोर्ट में बताया
खुद को भगवान कहने वाले आसाराम ने मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट को बताया कि इस केस में ट्रैफिकिंग और गैंग रेप के ज़रूरी हिस्से नहीं बनते हैं।यह दलील देते हुए कि न तो कोई "मिलन" था और न ही उसकी वजह से कोई खुला काम हुआ ,जिससे विक्टिम ने कथित तौर पर कहीं और जाने का फैसला किया, वकील ने कहा कि IPC की धाराएं 370 और 376D नहीं लगतीं।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने बचाव पक्ष से बार-बार कहा कि वह साज़िश के बड़े आरोपों से आगे बढ़कर प्रॉसिक्यूशन की कहानी में खास कानूनी...
राजस्थान हा कोर्ट ने कर्मचारी की 5 साल की गैरहाज़िरी को अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा मानने वाले ऑर्डर पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस ऑर्डर पर रोक लगाई, जिसमें एक कर्मचारी की लंबे समय तक गैरहाज़िरी को अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा माना गया। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को हो रही मेडिकल दिक्कतों को देखते हुए इस मामले में अंतरिम सुरक्षा की ज़रूरत है।जस्टिस समीर जैन एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें राज्य के उस ऑर्डर को चुनौती दी गई। इसमें याचिकाकर्ता की लगभग 5 साल तक जानबूझकर गैरहाज़िर रहने को नौकरी से अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा माना गया।याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने कई छुट्टी की एप्लीकेशन दी थीं,...
सिर्फ़ जुर्म की गंभीरता का हवाला देकर ओपन एयर कैंप में ट्रांसफर से मना नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने रेप के दोषी को राहत दी
रेप के एक दोषी की ओपन एयर कैंप में शिफ्ट करने की अर्ज़ी को मंज़ूरी देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही ऐसा ट्रांसफर अधिकार का मामला न हो, लेकिन दूसरे ज़रूरी फैक्टर्स पर विचार किए बिना सिर्फ़ जुर्म के नेचर पर निर्भर रहने का सीधा-सादा फ़ॉर्मूला लागू करके इसे मना नहीं किया जा सकता।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि राजस्थान प्रिज़नर्स ओपन एयर कैंप रूल्स, 1972 के रूल 3 के तहत लगाई गई रोक पूरी तरह से नहीं थी या उसने पूरी तरह से रोक नहीं लगाई। बल्कि, यह सक्षम अधिकारियों के पास अपनी मर्ज़ी से...
यदि यौन शोषण का इरादा होता तो माता-पिता को क्यों बुलाता”: आसाराम की राजस्थान हाइकोर्ट में दलील
कथित दुष्कर्म मामले में स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की ओर से राजस्थान हाइकोर्ट में विस्तृत दलीलें पेश की गईं।जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ के समक्ष बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी को असंभाव्य, साक्ष्यहीन और गढ़ी हुई साजिश करार दिया।आसाराम की ओर से एडवोकेट ने तर्क दिया कि अभियोजन का घटनाक्रम सामान्य मानवीय व्यवहार की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।उन्होंने कहा कि यदि किसी का उद्देश्य यौन शोषण होता तो वह कथित पीड़िता के माता-पिता को साथ आने के लिए क्यों कहता।बचाव पक्ष ने सवाल उठाया,“अगर...
राजस्थान हाइकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण को अवमानना नोटिस जारी किया
राजस्थान हाइकोर्ट ने विवाह उद्यान को सील करने के आदेश पर रोक लगाए जाने के बावजूद उसे नहीं खोले जाने के मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को अवमानना का नोटिस जारी किया।मामले में याचिकाकर्ता विवाह उद्यान का संचालन करता है, जिसे JDA ने सील कर दिया।इस कार्रवाई को चुनौती दिए जाने पर जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने 8 जनवरी को पारित आदेश में सीलिंग आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाई।खंडपीठ के आदेश के बाद याचिकाकर्ता ने विवाह उद्यान को खोलने के लिए JDA के समक्ष...
निजी संस्थान में सेवा समाप्ति के विरुद्ध रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं, सार्वजनिक तत्व का अभाव: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि किसी निजी संस्थान द्वारा की गई सेवा समाप्ति के विरुद्ध रिट याचिका तब तक सुनवाई योग्य नहीं है, जब तक मामले में सार्वजनिक विधि का तत्व स्पष्ट रूप से विद्यमान न हो।अदालत ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च के एक कर्मचारी द्वारा दायर याचिका खारिज की।जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता और संस्थान के बीच संबंध निजी सेवा अनुबंध पर आधारित है। चूंकि विवाद सेवा संबंधी है और किसी वैधानिक प्रावधान द्वारा शासित नहीं है। इसलिए यह...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कॉलेज NOC को अच्छे इंस्पेक्शन के बावजूद दबाए रखने पर राज्य की आलोचना की, 'समय पर सर्विस का अधिकार' पक्का किया
इंस्पेक्शन के 8 महीने बाद भी NOC जारी करने में “बहुत ज़्यादा इनएक्टिविटी” के लिए राज्य की आलोचना करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि रूटीन क्लियरेंस को प्रोसेस करने में इस तरह की चूक से पब्लिक इंटरेस्ट की अनदेखी और पब्लिक ड्यूटी निभाने में ढिलाई का पता चलता है।इस तरह की इनएक्टिविटी पर नाराज़गी और हैरानी जताते हुए जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने कहा कि इस तरह की गलतियों की वजह से एंटिटीज़ को कोर्ट में रिट ऑफ़ मैंडेमस के लिए जाना पड़ा, जिससे लिटिगेशन का एक खतरनाक चक्र चलता रहा, जिसमें...
पति का पत्नी को छोड़ना और भरण-पोषण न देना, शादी टूटने का विरोध करने का अधिकार खो देता है: राजस्थान हाईकोर्ट
शादी टूटने की इजाज़त देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि पति का कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह से छोड़ना, कानूनी निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन करना और कोर्ट के आदेश के अनुसार भरण-पोषण का लगातार भुगतान न करना, लगातार मानसिक क्रूरता है, जिससे पत्नी के लिए पति के साथ रहने की उम्मीद करना नामुमकिन हो जाता है।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने कहा कि पति द्वारा जानबूझकर अपनी शादी की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ कानूनी ज़िम्मेदारियों को छोड़ना, मामले का विरोध करने के उसके...
बिना कारण कैदी को 800–1000 किमी दूर जेल में भेजना असंवैधानिक: राजस्थान हाइकोर्ट ने आदेश किया रद्द
राजस्थान हाइकोर्ट ने एक विचाराधीन बंदी को उसके गृह नगर से 800–1000 किलोमीटर दूर स्थित जेल में स्थानांतरित करने के आदेश को निरस्त किया। अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस कारण के किया गया ऐसा स्थानांतरण बंदी के परिवार पर अनुचित और अत्यधिक बोझ डालता है।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के परिवार को इतनी लंबी दूरी तय कर मिलने के लिए बाध्य करना, जबकि स्थानांतरण के लिए कोई सुरक्षा या प्रशासनिक आवश्यकता दर्शाई नहीं गई, पूर्णतः अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है। इसलिए यह आदेश विधि की दृष्टि में...
पति के वेतन का विवरण व्यक्तिगत सूचना, पत्नी की RTI याचिका खारिज: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार का आदेश बरकरार रखा, जिसमें पत्नी द्वारा दायर सूचना अधिकार (RTI) आवेदन के तहत पति के वेतन संबंधी विवरण देने से इनकार किया गया था। अदालत ने कहा कि किसी कर्मचारी के वेतन और सेवा संबंधी विवरण व्यक्तिगत सूचना की श्रेणी में आते हैं।मामले में याचिकाकर्ता ने संबंधित विभाग में कार्यरत अपने पति के एक निश्चित अवधि के वेतन पर्ची और वेतन भुगतान का विवरण मांगा। राज्य ने यह कहते हुए सूचना देने से इनकार किया कि मांगी गई जानकारी व्यक्तिगत प्रकृति की है, जो एक तृतीय पक्ष से...
मंदिर के पास 40 वर्ष पुरानी दुकान हटाने का नोटिस बरकरार, श्रद्धालुओं की आवाजाही में बाधा: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने श्री देवस्थान बोर्ड सिरोही द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, जिसमें श्री सारणेश्वर महादेव मंदिर के पास स्थित लगभग 40 वर्ष पुरानी दुकान को खाली करने के लिए कहा गया। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता मंदिर की भूमि पर अतिक्रमणकारी है।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कहा कि मंदिर की संपत्ति से अतिक्रमण हटाने के लिए बोर्ड को कार्यवाही शुरू करने का पूरा अधिकार है ताकि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।याचिकाकर्ता का कहना था...

















