राज�थान हाईकोट
दस्तावेज के अभाव में एडमिशन से इनकार गलत, हाईकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी को दिलाया दाखिला
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में NEET-PG 2025 की अभ्यर्थी को राहत देते हुए उसे कॉलेज में एडमिशन देने का निर्देश दिया। अभ्यर्थी को स्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र (परमानेंट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) न होने के आधार पर प्रवेश से वंचित कर दिया गया।डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्देश या सूचना पुस्तिका (इन्फॉर्मेशन बुलेटिन) किसी वैधानिक नियम को कमजोर या निरस्त नहीं कर सकती।मामले में याचिकाकर्ता ने MBBS के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से अस्थायी पंजीकरण प्राप्त किया और...
वकीलों के साथ नौकरों की तरह नहीं किया जा सकता व्यवहार, मनमाने तरीके से हटाना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि वकीलों की अपनी गरिमा होती है और उन्हें नौकरों की तरह नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि वकीलों की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया तय शर्तों और नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए न कि मनमाने ढंग से।जस्टिस गणेश राम मीणा की पीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा सहायक वकीलों को हटाने के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि प्राधिकरण ने खुद बनाए गए नियमों और शर्तों की अनदेखी की है।अदालत ने कहा,“वकीलों की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्हें...
गरीबी के कारण जेल नहीं भेजा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को रिहा किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि केवल आर्थिक असमर्थता के कारण किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता छीनी नहीं जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि गरीबी को जेल भेजने का आधार नहीं बनाया जा सकता।जस्टिस फरजंद अली ने यह टिप्पणी करते हुए उस आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया, जिसे केवल इसलिए जेल में रखा गया, क्योंकि वह अदालत द्वारा लगाए गए खर्च (कॉस्ट) का भुगतान नहीं कर सका था जबकि पक्षकारों के बीच विवाद पहले ही सुलझ चुका था।मामला चेक बाउंस से जुड़ा था, जिसमें आरोपी को दोषी ठहराया गया। बाद में जब मामला उच्च...
व्यक्ति होने का अटूट पहलू अब 'राज्य-मध्यस्थता वाला अधिकार' बनने के जोखिम में: ट्रांसजेंडर बिल 2026 पर राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026, जो ट्रांसजेंडर एक्ट 2019 में संशोधन करना चाहता है, ऐसा लगता है कि वह किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के आत्म-निर्धारण के अधिकार को छीन रहा है।जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि अपनी खुद की लैंगिक पहचान तय करने का अधिकार, जिसकी गारंटी 2019 के एक्ट के तहत दी गई, उसे हाल के संशोधन में छीन लिया गया और नया संशोधन यह प्रस्ताव करता है कि लैंगिक पहचान की मान्यता प्रमाणन और जांच के अधीन होगी। इस प्रकार कोर्ट ने टिप्पणी की कि...
ट्रांसजेंडर को OBC में शामिल करने पर राज्य को फटकार, कहा—संवैधानिक दायित्व से पीछे हटी सरकार: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को OBC श्रेणी में शामिल करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह कदम उनके अधिकारों को वास्तविक लाभ देने के बजाय “खाली औपचारिकता” बनकर रह गया है।यह फैसला जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।मामला गंगा कुमारी नामक एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें 12 जनवरी 2023 की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत राज्य सरकार ने ट्रांसजेंडर...
जनजाति से होने मात्र से तलाक पर रोक नहीं, ठोस परंपरा साबित करना जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अनुसूचित जनजाति से संबंध होने के आधार पर हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) के तहत तलाक की कार्यवाही को रोका नहीं जा सकता। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि संबंधित समुदाय में विवाह और तलाक के लिए अलग मान्य परंपराएं मौजूद हैं।जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पत्नी की अपील खारिज की। पत्नी ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसका आवेदन खारिज कर दिया गया था। उसने यह दलील दी थी कि दोनों पक्ष मीणा...
CrPC की धारा 41A के तहत व्हाट्सऐप नोटिस मान्य नहीं, अर्नेश कुमार गाइडलाइन्स के उल्लंघन पर पुलिसकर्मी दोषी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में एक पुलिस अधिकारी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। मामला उस गिरफ्तारी से जुड़ा था, जो केवल व्हाट्सऐप के जरिए दी गई सूचना के आधार पर की गई थी, बिना दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41-A के तहत विधिवत नोटिस जारी किए।यह आदेश जस्टिस प्रवीर भटनागर की पीठ ने पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजा गया संदेश कानूनन मान्य नोटिस की श्रेणी में नहीं आता और इसे वैध सेवा (valid service) नहीं माना जा सकता।मामले के तथ्य:याचिकाकर्ता के...
जवाई क्षेत्र में बेकाबू पर्यटन पर सख्त राजस्थान हाईकोर्ट, नाइट सफारी और ड्रोन पर रोक
राजस्थान के पाली जिले के जवाई क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों पर सख्ती दिखाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया। हाइकोर्ट ने नाइट सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही सफारी गतिविधियों की अनुमति देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही ड्रोन, तेज रोशनी वाले उपकरण और अन्य साधनों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई, जो वन्यजीवों को परेशान करते हैं।यह आदेश जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें कहा गया कि जवाई क्षेत्र में बढ़ते अनियंत्रित...
'रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था ढह जाएगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गैंगस्टर-पुलिस गठजोड़ पर जताई चिंता, DGP को दिए निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में पुलिस पर गैंगस्टर को संरक्षण देने के आरोपों को चिंताजनक संस्थागत विफलता करार दिया। अदालत ने कहा कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही उसे तोड़ने लगें तो जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी के इशारे पर गैंगस्टर उन्हें और उनके परिवार को धमका रहा है।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था के पूरी तरह ढहने...
समय पर पहली अर्जी के बावजूद देरी का बहाना नहीं चलेगा, राजस्थान हाइकोर्ट ने दी राहत
राजस्थान हाइकोर्ट ने करुणामूलक नियुक्ति (कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि पहली अर्जी समय पर दी गई हो तो बाद में देरी का हवाला देकर दूसरी अर्जी खारिज नहीं की जा सकती।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया और राज्य को निर्देश दिया कि 90 दिनों के भीतर मामले पर दोबारा विचार कर उचित पद पर नियुक्ति दी जाए।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने अपने पिता के निधन के बाद वर्ष 2015 में करुणामूलक नियुक्ति के लिए आवेदन...
ड्यूटी के दौरान हादसे में 5 साल से कोमा में सिपाही, राजस्थान हाइकोर्ट ने दिलाई वेतन की राहत
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण मानवीय फैसले में उस महिला को राहत दी, जिसके पति एक सिपाही ड्यूटी के दौरान हुए हादसे के बाद पिछले कई वर्षों से कोमा में हैं और उनका वेतन रोका गया था।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सिपाही को विशेष दिव्यांग अवकाश (स्पेशल डिसएबिलिटी लीव) प्रदान किया जाए, 2021 से बकाया वेतन जारी किया जाए और आगे भी नियमित वेतन का भुगतान जारी रखा जाए।मामले के अनुसार सिपाही 2021 में ड्यूटी के दौरान एक दुर्घटना का शिकार हो गया था, जिसके बाद से वह कोमा में है।...
₹20,000 करोड़ की ज़रूरत के मुकाबले ₹1,000 करोड़ का आवंटन 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसा: राजस्थान हाईकोर्ट का सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सवाल
सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पर्याप्त बजट आवंटन की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस हलफनामे में स्कूल की इमारतों/कमरों के निर्माण/मरम्मत का पूरा रोडमैप और स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की डिवीज़न बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव की इस दलील पर विचार किया कि सरकारी स्कूलों में निर्माण/मरम्मत के काम के लिए...
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत के नियंत्रण वाले तालाबों को मत्स्य विभाग को सौंपने पर रोक लगाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने 17 मार्च के अपने आदेश से पंचायती राज विभाग द्वारा 27 अगस्त, 2025 को पारित आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाई। इस आदेश में संबंधित पंचायत के नियंत्रण वाले कुछ तालाबों को वापस राज्य के मत्स्य विभाग को सौंप दिया गया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ, ग्राम पंचायत सोरसन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में ऊपर बताए गए आदेश को चुनौती देते हुए यह आरोप लगाया गया कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 243G और 11वीं अनुसूची...
RJS सिविल जज 2024 प्रारंभिक परीक्षा की आंसर की को चुनौती देने वाली याचिका खारिज: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) परीक्षा 2024 की आंसर की को रद्द कर संशोधित परिणाम जारी करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक मूल्यांकन या प्रतियोगी परीक्षा में सही उत्तर निर्धारित करने के मामलों में न्यायालय, विशेषज्ञ समिति के निर्णय पर अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य नहीं कर सकता।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने कहा कि विशेषज्ञ समिति संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों से बनी होती है और उसकी शैक्षणिक राय को उचित सम्मान दिया जाना...
11 साल बाद भी चार्जशीट नहीं 'चौंकाने वाला': त्वरित जांच के लिए पुलिस के जांच और कानून-व्यवस्था विंग अलग करने के निर्देश—राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक मामले में गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 11 वर्ष बाद भी चार्जशीट दाखिल न होना अत्यंत चिंताजनक है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कई मामलों में जांच लंबित रहने का एक प्रमुख कारण यह है कि एक ही जांच अधिकारी को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जांच—दोनों जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं।जस्टिस अनूप कुमार धंध की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2006) मामले का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को पुलिस के जांच विंग और...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 37 साल बाद आपराधिक मामले में अमान्य समझौते के बावजूद दोबारा सुनवाई से इनकार किया, कार्यवाही रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट द्वारा एक व्यक्ति को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराया। यह फैसला एक समझौते के आधार पर दिया गया, भले ही वह समझौता अमान्य था।ऐसा करते हुए कोर्ट ने दोबारा सुनवाई का आदेश देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि 37 साल बीत जाने के बाद मामले को दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेजना न्याय के हित में नहीं होगा।भले ही बरी किए जाने का फैसला कानून के पूरी तरह से अनुरूप नहीं था। फिर भी कोर्ट ने अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आरोपी के खिलाफ चल रही कार्यवाही...
पीड़ित और दोषी एक ही गांव के हों, यह अकेले पैरोल से इनकार का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इस आधार पर कि दोषी और पीड़ित एक ही गांव में रहते हैं, पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि ऐसी आशंका सिर्फ अनुमान (conjecture) पर आधारित है और इससे पैरोल के सुधारात्मक उद्देश्य पर असर पड़ता है।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि पैरोल का उद्देश्य कैदी को परिवार से जोड़कर उसमें आत्ममंथन और सुधार की भावना विकसित करना है।मामला क्या था?याचिकाकर्ता की पैरोल अर्जी इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि वह और पीड़ित एक...
आपराधिक मामलों में अस्पष्ट मेडिकल राय निष्पक्ष सुनवाई को कमज़ोर करती है: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को मेडिको-लीगल गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे व्यापक और एक समान मेडिको-लीगल गाइडलाइंस तैयार करने और उन्हें लागू करने के निर्देश जारी करें। इन गाइडलाइंस का पालन सभी सरकारी मेडिकल अधिकारियों को करना होगा, जब वे आपराधिक मामलों में मेडिकल राय देंगे, ताकि उनकी स्पष्टता, पठनीयता, पूर्णता और असंदिग्धता सुनिश्चित हो सके।जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की बेंच ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को आगे निर्देश दिया कि वे पुलिस विभागों को निर्धारित गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने का निर्देश दें। साथ...
नार्को टेस्ट से पहले या दौरान भी आरोपी वापस ले सकता है सहमति: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि कोई भी आरोपी नार्को विश्लेषण (नार्को टेस्ट) के लिए दी गई अपनी सहमति को परीक्षण से पहले या उसके दौरान भी वापस ले सकता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि एक बार दी गई सहमति अंतिम (अपरिवर्तनीय) नहीं मानी जा सकती।जस्टिस अनूप कुमार धांध की पीठ ने कहा कि यदि आरोपी की इच्छा के विरुद्ध नार्को टेस्ट किया जाता है, तो यह उसके मौलिक अधिकारों जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) तथा आत्मदोषारोपण के खिलाफ अधिकार (अनुच्छेद 20(3)) का उल्लंघन होगा।अदालत ने कहा,“नार्को...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्स फीस रिफंड विवाद में धोखाधड़ी के मामले में upGrad के डायरेक्टर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
राजस्थान हाई कोर्ट ने upGrad के डायरेक्टरों और अन्य कर्मचारियों/सहयोगियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई। upGrad एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है जो ऑनलाइन उच्च शिक्षा कार्यक्रम उपलब्ध कराता है। यह रोक उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वास भंग के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले के संबंध में लगाई गई।जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका के अनुसार, यह मामला एक छात्र ने दर्ज कराया। इस छात्र ने प्लेटफॉर्म पर एक कोर्स चुना था। इसके लिए 5.25 लाख रुपये की फीस जमा की थी।...


















