मद्रास हाईकोर्ट

जनता में डर पैदा करने की मंशा न हो तो मंत्री के खिलाफ झूठी सोशल मीडिया पोस्ट अपराध नहीं, लेकिन मानहानि का मामला बन सकता है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से झूठी जानकारी फैलाने के मामले में विनोद सूर्या कुमार के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि किसी मंत्री के खिलाफ झूठी जानकारी या अफवाह फैलाना तभी संबंधित आपराधिक प्रावधानों के तहत अपराध बनेगा, जब उसे फैलाने का इरादा या संभावित प्रभाव जनता में डर या घबराहट पैदा करना हो।क्या था मामला?कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में मंत्री को पलानी स्थित अरुल्मिगु दंडायुधपाणि स्वामी...

नाबालिग के आंसू पोंछना या बिना सेक्सुअल इरादे के उसका हाथ पकड़ना सेक्सुअल असॉल्ट नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आम मानवीय व्यवहार के दौरान होने वाला कोई भी संपर्क - जैसे हाथ पकड़ना, कंधे को छूना, आंसू पोंछना और किसी को सांत्वना देना - अपने आप में सेक्सुअल नहीं माना जाएगा। किसी सेक्सुअल इरादे का पता आसपास की परिस्थितियों से ही लगाया जा सकता है। [2026 LiveLaw (Mad) 408]जस्टिस आर विजयकुमार ने कॉन्स्टेबल के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द किया। उस पर POCSO Act के तहत अपराधों का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि उस व्यक्ति ने केवल उस नाबालिग लड़की को सांत्वना दी थी, जिसके साथ उसका...

सिर्फ़ घरेलू हिंसा का केस पेंडिंग होने की वजह से पति को विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पति या पत्नी को सिर्फ़ इसलिए विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके बीच कोई विवाद पेंडिंग है।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण ने एक पति को राहत दी, जिसे पत्नी द्वारा शुरू की गई घरेलू हिंसा की कार्यवाही पेंडिंग होने के कारण अपना पासपोर्ट वापस करने के लिए कहा गया। कोर्ट ने माना कि घरेलू हिंसा की कार्यवाही तब तक सिविल प्रकृति की होती है जब तक कि 'महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005' की धारा 31 के तहत कोई आदेश पारित न हो जाए।इस अधिनियम...

माता-पिता या 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति ही सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत शिकायत कर सकते हैं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता या 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके व्यक्ति ही माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत शिकायत दाखिल कर सकते हैं।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतकर्ता न तो संबंधित व्यक्ति का माता-पिता है और न ही उसकी उम्र 60 वर्ष पूरी हुई है, तो इस कानून के तहत उसकी शिकायत सुनने का अधिकारियों के पास अधिकार क्षेत्र नहीं होगा। जस्टिस एम. धंडपानी ने यह टिप्पणी करते हुए कन्याकुमारी के जिला कलेक्टर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिकायतकर्ता को हर...

गिरफ्तार वकीलों को अदालत में पेश करने से पुलिस को नहीं रोक सकते वकील: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी वकील की गिरफ्तारी में पुलिस की ज्यादती का आरोप हो तो अन्य वकील उसके खिलाफ आपत्ति जता सकते हैं और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी कर सकते हैं। लेकिन वे पुलिस को गिरफ्तार वकील को अदालत में पेश करने से नहीं रोक सकते।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने यह टिप्पणी 10 वकीलों की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द करने की मांग की। उन पर आरोप था कि उन्होंने मादक पदार्थ मामले में गिरफ्तार दो वकीलों को अदालत में पेश करने से...

जजों के वेतन का ब्योरा RTI Act से बाहर नहीं, नागरिकों को जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जजों के वेतनमान और वेतन संबंधी जानकारी सूचना का अधिकार (RTI Act) अधिनियम की धारा 8 के तहत गोपनीय जानकारी नहीं है। चूंकि जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है, इसलिए नागरिकों को इसकी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।जस्टिस एम. धंडपानी ने कहा,"जजों का वेतन भारत की संचित निधि से दिया जाता है। यह सार्वजनिक धन है, इसलिए भारत का कोई भी नागरिक उनके वेतन संबंधी जानकारी जानने से वंचित नहीं किया जा सकता। यह RTI Act की धारा 8 के तहत अपवाद की...

POCSO मामलों में बच्चे को बार-बार कोर्ट बुलाकर उसका ट्रॉमा दोबारा नहीं जीने दिया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

यौन शोषण का शिकार हुए बच्चे को क्या सिर्फ आरोपी को पूरा मौका देने के नाम पर बार-बार अदालत बुलाया जा सकता है? इस सवाल पर मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा करना बच्चे को दोबारा मानसिक पीड़ा से गुजरने के लिए मजबूर करना होगा, जिसे कानून स्वीकार नहीं कर सकता।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि POCSO Act का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना है। यदि इस कानून का क्रियान्वयन ही बच्चे के लिए एक और मानसिक आघात का कारण बन जाए, तो यह कानून के उद्देश्य के विपरीत होगा। अदालत ने...

विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की पहचान, भूख हड़ताल करना अपराध नहीं: मद्रास हाईकोर्ट ने किसान पर दर्ज मुकदमा किया रद्द

मद्रास हाईकोर्ट ने किसान संगठन के नेता के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों के विरोध में भूख हड़ताल करने वाले एक किसान के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द करते हुए कहा कि विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की पहचान है और यह संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। केवल नारे लगाने या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने को अपराध नहीं माना जा सकता।जस्टिस एम. निर्मल कुमार ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि प्रदर्शन के कारण आम जनता को कोई असुविधा हुई या यातायात बाधित हुआ।अदालत ने कहा,"सिर्फ नारे...

धर्म के नाम पर नदियों को प्रदूषित करने का अधिकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर किसी भी व्यक्ति को जल स्रोतों को प्रदूषित करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता जनस्वास्थ्य के अधीन है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर धार्मिक अधिकारों का प्रयोग नहीं किया जा सकता।जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस बी. पुगालेंधी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी तमिराबरानी नदी में श्राद्ध कर्म के दौरान बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य सामग्री फेंके जाने पर चिंता जताते हुए की। अदालत ने कहा कि तमिलनाडु...

तमिलनाडु राष्ट्र की मांग राजद्रोह नहीं, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक पब्लिशिंग हाउस के ख़िलाफ़ दर्ज देशद्रोह का मामला रद्द किया। इस पब्लिशिंग हाउस ने ऐसी किताब छापी थी, जिसमें कहा गया था कि तमिलनाडु को एक अलग देश होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आज के समय में ऐसे बयान को देश या सरकार के प्रति नफ़रत के तौर पर नहीं देखा जा सकता। [2026 LiveLaw (Mad) 297]जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि भारत दिल और आत्मा से एकजुट है। ऐसे बयानों से मौजूदा सामाजिक माहौल में ज़्यादा से ज़्यादा झुंझलाहट हो सकती है। ऐसा बयान देने वाले व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य की समस्या...

इस्लाम अपनाने से व्यक्ति BC (मुस्लिम) आरक्षण का हकदार नहीं बनता: ​​मद्रास हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित किया

मद्रास हाईकोर्ट ने एक सरकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित किया। इस आदेश के तहत पिछड़ी जातियों, अति पिछड़ी जातियों, डी-नोटिफाइड समुदायों या अनुसूचित जातियों से इस्लाम अपनाने वाले व्यक्ति को BC (मुस्लिम) माना जा सकता था और आरक्षण का लाभ उठाने के लिए 7 अधिसूचित समुदायों में से किसी एक का समुदाय प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता था। [2026 LiveLaw (Mad) 279]'तमिलनाडु पिछड़ी जातियां, अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां (शैक्षिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के तहत सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का...

हाईकोर्ट की 5 जजों की बेंच का अहम फैसला: अपील पेंडिंग होने की वजह से कैदियों की अस्थायी रिहाई को अनिश्चित काल के लिए रोका नहीं जा सकता

मद्रास हाईकोर्ट की 5 जजों की बेंच ने हाल ही में कहा कि छुट्टी (Leave) और अस्थायी रिहाई मानवीय गरिमा का हिस्सा हैं, जिन्हें सिर्फ़ अपील पेंडिंग होने की वजह से अनिश्चित काल के लिए रोका नहीं जा सकता। [2026 LiveLaw (Mad) 276]कोर्ट ने कहा,"हमें फिर से यह दोहराना होगा कि जेल में बंद होने का मतलब यह नहीं है कि मौलिक अधिकार सिर्फ़ 'कागज़ी वादे' बनकर रह जाएं... इन अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 226 के तहत इस कोर्ट की शक्ति हमारे संविधान के मूल ढांचे का एक अटूट हिस्सा है... इसलिए हमारी...

किशोरावस्था में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं: मद्रास हाईकोर्ट ने POCSO मामले में उम्रकैद की सज़ा घटाकर 10 साल की

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि रोमांटिक रिश्तों से जुड़े मामलों में सज़ा तय करते समय किशोरावस्था में होने वाले हार्मोनल बदलावों का असर एक अहम बात हो सकती है, भले ही POCSO Act के तहत सहमति या रोमांटिक रिश्ता कोई बचाव का आधार न हो।जस्टिस आनंद वेंकटेश और जस्टिस केके रामकृष्णन की बेंच ने दोषी की उम्रकैद की सज़ा को घटाकर 10 साल की कठोर कैद में बदल दिया; अपराध करते समय दोषी की उम्र मुश्किल से 19 साल थी।कोर्ट ने कहा,"आरोपी पीड़िता को लंबे समय से जानता था... आरोपी और पीड़िता के बीच रिश्ते को देखते हुए यह...

ChatGPT शिक्षक का विकल्प नहीं, कक्षा में पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के उन छात्रों को राहत देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया, जिन्हें अनिवार्य उपस्थिति पूरी न होने के बावजूद कक्षाओं और परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित उपकरण, जैसे ChatGPT, कभी भी योग्य शिक्षकों और जीवंत कक्षा वातावरण का विकल्प नहीं बन सकते।जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने कहा कि नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने से...

वैवाहिक विवाद में पति के हर रिश्तेदार को नहीं बना सकते आरोपी, ठोस आरोप के बिना मुकदमा नहीं चलेगा: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद होने मात्र से पति के प्रत्येक रिश्तेदार के खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता।अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत पति के परिजनों के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य, अस्पष्ट और बिना किसी ठोस साक्ष्य के थे।जस्टिस विक्टोरिया गौरी ने कहा,"पति-पत्नी के बीच वैवाहिक मतभेद होने मात्र से पति के हर रिश्तेदार के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया...

ऑनर किलिंग में कोई सम्मान नहीं होता, यह कृत्य शर्मनाक और जातिवाद का चरम रूप: मद्रास हाईकोर्ट

पिछले साल तिरुनेलवेली में 27 साल के कविन की ऑनर किलिंग के मामले में आरोपी पुलिसकर्मी की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने जाति-आधारित हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई।जस्टिस बी पुगलेंधी ने कहा कि पिछले 10 सालों में तमिलनाडु राज्य में 59 ऑनर किलिंग की घटनाएं हुई हैं। जज ने कहा कि लोगों के मन में गहराई तक बैठी जातिवाद की भावना पूरे सिस्टम को खराब कर रही है।कोर्ट ने कहा,"ऑनर किलिंग जातिवाद का चरम रूप है। जातिवाद समाज को बांटता है और माननीय सुप्रीम कोर्ट ने लाला सिंह बनाम उत्तर...

भरण-पोषण बकाया होने पर पति की पेंशन रोकने की मांग खारिज, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट को फैमिली कोर्ट नहीं बनाया जा सकता

मद्रास हारेकोर्ट ने एक महिला की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें उसने अपने पति द्वारा भरण-पोषण की राशि का भुगतान नहीं किए जाने का हवाला देते हुए उसकी पेंशन और सेवा निवृत्ति लाभों के वितरण पर रोक लगाने की मांग की थी।जस्टिस मुम्मिनेनी सुधीर कुमार ने स्पष्ट कहा कि हाईकोर्ट को न तो निष्पादन अदालत और न ही फैमिली कोर्ट में बदला जा सकता है।अदालत ने कहा कि यदि महिला को भरण-पोषण मामले में उसके पक्ष में आदेश मिला है और उसका पालन नहीं किया गया है, तो उसे संबंधित आदेश के क्रियान्वयन के लिए विधि सम्मत...

पेरारिवलन के वकील नामांकन मामले में मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी, पूछा- CBI जांच का आधार क्या है?

राजीव गांधी हत्या मामले के दोषी रहे ए. जी. पेरारिवलन के एडवोकेट के रूप में नामांकन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) आवश्यक पक्षकार नहीं है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कौन-सा धोखाधड़ी का मामला है, जिसके लिए सीबीआई जांच का आदेश दिया जाए।चीफ जस्टिस एस. ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से CBI जांच संबंधी अंतरिम मांग पर जोर नहीं दिए जाने के बाद CBI के खिलाफ याचिका खारिज...