मद्रास हाईकोर्ट ने नयनतारा की डॉक्यूमेंट्री में धनुष की फिल्म के बीटीएस फुटेज के इस्तेमाल पर अंतरिम याचिका खारिज की

Praveen Mishra

10 March 2025 5:48 PM IST

  • मद्रास हाईकोर्ट ने नयनतारा की डॉक्यूमेंट्री में धनुष की फिल्म के बीटीएस फुटेज के इस्तेमाल पर अंतरिम याचिका खारिज की

    मद्रास हाईकोर्ट ने अभिनेता धनुष की प्रोडक्शन कंपनी वंडरबार फिल्म्स द्वारा दायर उस अंतरिम याचिका को बंद कर दिया है, जिसमें उनकी फिल्म "नानुम राउडी धान" के फुटेज को नयनतारा की डॉक्यूमेंट्री "नयनतारा: बियॉन्ड द फेयरीटेल" में उपयोग करने पर आपत्ति जताई गई थी।

    जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति ने यह अंतरिम याचिका किसी भी आदेश के बिना बंद कर दी, क्योंकि धनुष की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट पीएस रमन ने अदालत को सूचित किया कि वादी मुख्य मुकदमे पर ही आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

    एडवोकेट ने आगे अदालत को बताया कि मुख्य मुकदमे में प्रतिवादियों को समन भेजा जाएगा। इसके बाद, अदालत ने मुख्य मुकदमे की अगली सुनवाई की तारीख 9 अप्रैल 2025 तय की।

    अदालत ने सोमवार को कहा, "दोनों पक्षों के बीच यह स्पष्ट है कि डॉक्यूमेंट्री 18 नवंबर 2024 से प्रसारित की जा रही है। अंतरिम याचिका में उठाए गए तर्कों को प्रभावित किए बिना, वादी मुकदमे पर मेरिट के आधार पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। इसलिए, ओए 958/2024 को बिना किसी आदेश के बंद किया जाता है।"

    अभिनेता धनुष और नयनतारा के बीच यह विवाद नवंबर 2024 से जारी है, जब नयनतारा ने अपने जीवन और विवाह पर आधारित एक नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री रिलीज़ की थी। धनुष ने आरोप लगाया कि इस डॉक्यूमेंट्री में उनकी फिल्म "नानुम राउडी धान" के Behind The Scenes फुटेज का इस्तेमाल किया गया, जबकि वह इन फुटेज के मालिक थे।

    धनुष ने दावा किया कि डॉक्यूमेंट्री में उनके फुटेज बिना अनुमति के इस्तेमाल किए गए और इसी को लेकर उन्होंने अदालत का रुख किया था।

    चूंकि प्रतिवादियों में से एक लॉस गैटोस (जो कि नेटफ्लिक्स की भारतीय इकाई है) का कार्यालय मुंबई में स्थित था, जो अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर था, धनुष ने हाईकोर्ट में कंपनी पर मुकदमा करने की अनुमति के लिए एक आवेदन दायर किया था, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

    इसको चुनौती देते हुए नेटफ्लिक्स ने एक आवेदन दायर कर मुकदमे की अनुमति को रद्द करने की मांग की और तर्क दिया कि धनुष को केवल नेटफ्लिक्स ही नहीं, बल्कि सभी प्रतिवादियों के खिलाफ मुकदमा करने की अनुमति लेनी चाहिए थी।

    नेटफ्लिक्स ने यह भी दलील दी कि डॉक्यूमेंट्री की रिलीज के एक हफ्ते बाद ही वाद दायर किया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कोई ऐसी आपातकालीन स्थिति नहीं थी, जिसके कारण कामर्शियल कोर्ट एक्ट धारा 12A (पूर्व-मुकदमा मध्यस्थता) को दरकिनार किया जाए। इसलिए, नेटफ्लिक्स ने अदालत से अनुरोध किया कि धारा 12A के पालन न करने के कारण मुकदमे को खारिज कर दिया जाए।

    हालांकि, अदालत ने नेटफ्लिक्स के इस आवेदन को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि चूंकि वाद के कुछ हिस्से का कारण इसी अदालत के क्षेत्राधिकार में उत्पन्न हुआ था, इसलिए अदालत ने लेटर पेटेंट के क्लॉज 12 के तहत मुकदमा दायर करने की अनुमति सही तरीके से दी थी।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि वादी ने अंतरिम राहत के लिए जरूरी तर्क प्रस्तुत किए थे, और पूर्व-मुकदमा मध्यस्थता न करने के आधार पर मुकदमे को प्रारंभिक चरण में खारिज नहीं किया जा सकता।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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