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'प्यार में विफलता कोई अपराध नहीं': उड़ीसा हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार का आरोप खारिज किया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार के आरोपों को खारिज कर दिया है, जिस पर शादी का झूठा वादा करके लगभग नौ साल की अवधि में एक महिला/शिकायतकर्ता के साथ बार-बार यौन संबंध बनाने का आरोप था। डॉ. जस्टिस संजीव कुमार पाणिग्रही की एकल पीठ ने कहा कि विवाह में रिश्ते का समापन न होना व्यक्तिगत शिकायत का स्रोत हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं है और इस प्रकार, उन्होंने कहा - “कानून हर टूटे हुए वादे को अपनी सुरक्षा प्रदान नहीं करता है और न ही यह हर असफल रिश्ते पर आपराधिकता थोपता है। याचिकाकर्ता और...
[S.115(1) Mental Healthcare Act] आत्महत्या करने के प्रयास के दौरान किए गए अपराधों के लिए व्यक्ति को दंडित करना अतार्किक: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधानों के तहत किसी व्यक्ति को अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराना और सजा देना अतार्किक है, जब उसने उसी लेनदेन के दौरान आत्महत्या करने का प्रयास किया हो। न्यायालय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 की धारा 115 के तहत इस तरह के अभियोजन पर तब तक रोक है, जब तक अभियोजन यह साबित नहीं कर देता कि व्यक्ति गंभीर तनाव में नहीं था।न्यायालय 27 वर्षीय एक मां द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसे अपने 3 ¾ महीने के बेटे को अपने हाथों से गला...
वैवाहिक स्थिति की घोषणा की मांग करने वाले मुकदमे का निर्णय पारिवारिक न्यायालय द्वारा किया जाएगा: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति की घोषणा से संबंधित मुकदमा फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 7 के दायरे में आने वाला मुकदमा होगा और फैमिली कोर्ट को इस पर निर्णय लेने का अधिकार होगा। जस्टिस एस सुनील दत्त यादव और जस्टिस राजेश राय के की खंडपीठ ने अर्जुन रणप्पा हटगुंडी द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया, जिन्होंने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें यह घोषित करने की मांग करने वाली उनकी याचिका को वापस कर दिया गया था कि प्रतिवादी उनकी पत्नी और बच्चे...
Narsinghanand 'X' Posts Case | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर लगी रोक बढ़ाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर रोक 27 फरवरी तक बढ़ाई। यह रोक यति नरसिंहानंद के 'अपमानजनक' भाषण पर कथित 'X' पोस्ट (पूर्व में ट्विटर) को लेकर उनके खिलाफ दर्ज FIR के संबंध में लगाई गई।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की सहमति के बाद राहत बढ़ाई। मामले की सुनवाई 19 तारीख को पूरी नहीं हो पाने के बाद आज यानी सोमवार को होनी थी।हाईकोर्ट के समक्ष एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल के नेतृत्व...
आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषियों के लिए स्वतंत्रता सबसे कीमती चीज, राज्य समय से पहले रिहाई देते समय अपनी पसंद के हिसाब से रिहाई नहीं दे सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य अपनी पसंद के हिसाब से रिहाई नहीं दे सकता। केवल समान स्थिति वाले दोषियों में से कुछ चुनिंदा लोगों को समय से पहले रिहाई की छूट नहीं दे सकता और ऐसा दृष्टिकोण बहुत अधिक अन्यायपूर्ण है।जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा,"सभी क्षेत्रों के लोग स्वतंत्रता के विचार को अपने दिल के करीब रखते हैं। ऐतिहासिक रूप से वे इससे अलग न होने के लिए अपनी शक्ति में सब कुछ करते रहे हैं। आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक दोषी के लिए स्वतंत्रता सबसे कीमती चीज है। यह नहीं माना जाना...
रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 47 | रजिस्टर डीड कब से संचालित होगा, यह कट ऑफ तिथि से पहले अनिवार्य प्रस्तुतिकरण को समाप्त नहीं कर सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
LPG वितरक और उसके रजिस्ट्रेशन से संबंधित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने कहा कि यह स्थापित कानून है कि रजिस्ट्रेशन एक्ट (धारा 47) के तहत रजिस्टर दस्तावेज कब से संचालित होगा, यह धारा संबंधित पक्षों के बीच संचालित होती है, लेकिन इसे निर्धारित कट ऑफ तिथि पर/या उससे पहले रजिस्टर लीज डीड प्रस्तुत करने के अनिवार्यता को समाप्त करने के लिए बढ़ाया नहीं जा सकता।रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 47 पंजीकृत दस्तावेज के संचालन के समय से संबंधित है। इसमें कहा गया कि पंजीकृत दस्तावेज उस समय से संचालित...
आरोपी मजिस्ट्रेट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता हो तो प्रक्रिया जारी करने से पहले प्रारंभिक जांच अनिवार्य: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में प्रक्रिया जारी करने से पहले जांच करना अनिवार्य है, जहां आरोपी मजिस्ट्रेट अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता है। अदालत ने माना कि वर्तमान मामले में मजिस्ट्रेट ने कोई प्रारंभिक जांच नहीं की है और न ही कोई जांच का निर्देश दिया है। अदालत ने विवादित आदेश को कानून में टिकने लायक नहीं माना।मजिस्ट्रेट ने ड्रग कंट्रोल इंस्पेक्टर द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ घटिया दवा के निर्माण और विपणन के लिए दायर की गई शिकायत के आधार पर प्रक्रिया जारी की थी।अदालत ने यह...
सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट की कीमतों के विनियमन की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट की कीमतों के विनियमन की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को वैकल्पिक वैधानिक उपाय तलाशने की स्वतंत्रता दी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ याचिकाकर्ता रजत द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।चीफ जस्टिस ने बताया कि उपभोक्ताओं के पास इंटरनेट सेवाओं का लाभ उठाने के लिए कई विकल्प हैं, उन्होंने समझाया:"यह एक मुक्त बाजार है, आपको लैन मिलता है, आपको वायर्ड इंटरनेट मिलता है, अन्य इंटरनेट भी हैं, बीएसएनएल और...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने गंदेरबल के डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ न्यायालय के समक्ष झूठी याचिका दायर करने के लिए आपराधिक कार्यवाही का निर्देश दिया
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि गंदेरबल के पूर्व डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष झूठी याचिका दायर करने के लिए उचित आपराधिक कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए।न्यायालय ने कहा कि सरकार के एक जिम्मेदार अधिकारी का यह आचरण निंदनीय है। यह दर्शाता है कि उक्त अधिकारी को कानून के शासन का कोई सम्मान नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी ने याचिकाकर्ता के दावे को विफल करने के उद्देश्य से विद्वान निचली अदालत के समक्ष झूठा लिखित बयान दाखिल करने से पहले दो बार भी नहीं...
Plea Challenging AIBE Fees : पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करें- सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जो याचिकाकर्ता के रूप में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) की फीस और अन्य आकस्मिक शुल्कों को चुनौती दी। याचिकाकर्ता के अनुसार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) AIBE के लिए 3,500 रुपये लेता है, जो गौरव कुमार बनाम यूओआई (2024) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है।गौरव कुमार के फैसले में पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नदी किनारे स्थित आवासीय क्षेत्रों के लिए आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने का निर्देश दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नदी के किनारे स्थित आवासीय क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें कहा गया है कि न्यायालय का "सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सुनिश्चित करना संवैधानिक कर्तव्य है।" जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी ने कहा,"विशेषज्ञों की एक टीम को वैज्ञानिक आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने के लिए तैनात किया जा रहा है, ताकि हरियाणा राज्य में बहने वाली सभी नदियों के किनारे बसे घनी आबादी वाले इलाकों के सभी निवासियों को लाभ...
'जल निकायों/आर्द्रभूमियों की सुरक्षा के बिना कोई शहर कैसे स्मार्ट बन सकता है?' : सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव को तलब किया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के स्मार्ट सिटी विकास मिशन के तहत अजमेर शहर में आर्द्रभूमियों की बहाली के संबंध में अपने पहले के आदेश का पालन करने में राजस्थान राज्य की विफलता पर नाराजगी व्यक्त की और चेतावनी दी कि यदि आदेश पूरे नहीं किए गए तो अवमानना कार्यवाही की संभावना है।कोर्ट ने टिप्पणी की,"1 दिसंबर, 2023 के आदेश का पालन न करने के मद्देनजर, न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई शुरू करने पर विचार करने से पहले हम राजस्थान राज्य के मुख्य सचिव को सोमवार 17 मार्च, 2025 को वीडियो...
केवल अधिकारियों की कमी का हवाला देकर इंटर-कैडर ट्रांसफर से इनकार नहीं किया जा सकता, दिल्ली हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों की कमी के आधार पर इंटर-कैडर ट्रांसफर (आईसीटी) के लिए कई मामलों में अनुरोध को अस्वीकार करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की कार्रवाई की आलोचना की है। जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस अजय दिगपॉल की खंडपीठ ने कहा,"ऊपर उल्लिखित सभी मामलों में अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया है, और हम जानते हैं कि ऐसे कई और मामले हो सकते हैं। मुकदमेबाजी कोई मौज-मस्ती या खेल नहीं है। न ही न्यायालय का कीमती समय बार-बार एक ही बात दोहराकर बर्बाद किया जा सकता है। कभी-कभी धुन बिगड़ने लगती है।" पीठ...
बोर्ड परीक्षा प्रमाण पत्र में नाम सिविल कोर्ट से डिक्री प्राप्त करने के बाद ही बदला जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में माना कि बोर्ड परीक्षा प्रमाणपत्रों में नाम केवल नाम परिवर्तन के संबंध में सिविल न्यायालय से डिक्री प्राप्त करने के बाद ही बदला जा सकता है। न्यायालय ने कहा कि आधार कार्ड और पैन कार्ड में नाम बदलने का संदर्भ बोर्ड की ओर से किसी व्यक्ति का नाम बदलने के लिए पर्याप्त नहीं है। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने कहा,“अपनी पसंद से नया नाम प्राप्त करना अधिनियम के अध्याय-VI के अंतर्गत आता है, इस अर्थ में कि कोई व्यक्ति जो...
कस्टम विभाग के रोलेक्स घड़ी जब्त करने वाले की शिकायत करने वाले विदेशी नागरिक को दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहराया कि कस्टम एक्ट, 1962 की धारा 124 के तहत सामान आदि जब्त करने से पहले किसी यात्री को कारण बताओ नोटिस से छूट देने के लिए प्राधिकारियों द्वारा मात्र प्रारूप पर बाध्य करना वैध नहीं है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और धर्मेश शर्मा की खंडपीठ ने इस प्रकार हांगकांग के निवासी को राहत प्रदान की, जिसकी 30,29,400 कीमत की रोलेक्स कलाई घड़ी सीमा शुल्क विभाग द्वारा हवाई अड्डे पर जब्त कर ली गई थी।उन्होंने कहा,“यह एक और मामला है जिसमें विभाग याचिकाकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित मानक प्रपत्र...
Advocate (Amendment) Bill 2025 को प्राप्त फीडबैक के आधार पर संशोधित किया जाएगा: केंद्रीय कानून मंत्रालय
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने घोषणा की है कि एडवोकेट (संशोधन) विधेयक 2025, जिसे 13 फरवरी 2025 को सार्वजनिक परामर्श के लिए उपलब्ध कराया गया अब उसे प्राप्त फीडबैक के आधार पर संशोधित किया जाएगा।प्राप्त सुझावों और चिंताओं की संख्या को देखते हुए मंत्रालय ने अब परामर्श प्रक्रिया को समाप्त करने का निर्णय लिया और वह हितधारकों के परामर्श के लिए संशोधनों के साथ विधेयक को नए सिरे से संसाधित करेगा।प्रेस रिलीज में मंत्रालय ने कहा,"एडवोकेट (संशोधन) विधेयक, 2025, 13 फरवरी, 2025 को विधिक मामलों के विभाग...
NDPS Act | सह-आरोपी को केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब मिलीभगत साबित न हो: तेलंगाना हाईकोर्ट
नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) के तहत दायर आपराधिक अपील पर विचार करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट ने दोहराया कि सह-आरोपी को केवल संदेह और या धारणा के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब मिलीभगत साबित न हो।इस मामले मेंदोनों आरोपी (A1 और A2) एक साथ बैंकॉक जा रहे थे। जब एक अज्ञात सूचना पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने उनके चेक-इन सामान की जांच की तो पाया कि उनके बैग का निचला हिस्सा नकली थ और जब उन्हें अलग किया गया तो छिपे हुए डिब्बे में एक काले रंग की पॉलीथीन की थैली थी, जिसमें...
असफलताओं के बाद भी आगे बढ़ने की क्षमता आपको कानूनी पेशे में अलग पहचान दिलाएगी : जस्टिस संदीप मेहता ने लॉ ग्रेजुएट से कहा
"आप जिस कानूनी पेशे में प्रवेश करने जा रहे हैं, वह केवल एक कैरियर नहीं है, बल्कि न्याय, समानता और कानून के शासन के सिद्धांत को बनाए रखने का एक पवित्र कर्तव्य है, जो हमारे लोकतंत्र का आधार है," सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने जोधपुर में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के सत्रहवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा।उन्होंने आगे कहा:"आप में से कुछ लोग वकालत की महान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए काले वस्त्र पहनेंगे और न्यायालयों में कदम रखेंगे। अन्य लोग कॉर्पोरेट कानून की जटिल दुनिया में कदम रखेंगे,...
Prevention Of Corruption Act | लोक सेवक के खिलाफ FIR दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच अनिवार्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention Of Corruption Act) के तहत लोक सेवक के खिलाफ FIR दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार के मामलों में FIR दर्ज करने से पहले आरोपी को प्रारंभिक जांच का दावा करने का अधिकार नहीं है।यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार के आरोपी लोक सेवक के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए प्रारंभिक जांच करना अनिवार्य नहीं है। हालांकि PC Act के तहत आने वाले मामलों सहित कुछ श्रेणियों के मामलों में प्रारंभिक जांच वांछनीय है, लेकिन यह न...
धर्मनिरपेक्ष संविधान के तहत आप कभी भी इस राष्ट्र को हिंदू राष्ट्र नहीं बना सकते: सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह
कार्यक्रम में बोलते हुए सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा कि संविधान और 'धर्मनिरपेक्षता' जैसे इसके मूल मूल्यों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने संविधान को बनाए रखने के लिए न्यायपालिका द्वारा अपने कर्तव्य का निर्वहन करने के महत्व को रेखांकित किया।सीनियर एडवोकेट "भारत का आधुनिक संविधानवाद" विषय पर "29वां जस्टिस सुनंदा भंडारे स्मारक व्याख्यान" दे रही थीं। उनके अलावा, कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी लोकुर, दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय...


![[S.115(1) Mental Healthcare Act] आत्महत्या करने के प्रयास के दौरान किए गए अपराधों के लिए व्यक्ति को दंडित करना अतार्किक: केरल हाईकोर्ट [S.115(1) Mental Healthcare Act] आत्महत्या करने के प्रयास के दौरान किए गए अपराधों के लिए व्यक्ति को दंडित करना अतार्किक: केरल हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2025/02/21/500x300_587947-750x450587716-750x450482650-mental-health.jpg)

















