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माता-पिता की जिम्मेदारी के नाम पर पत्नी की उपेक्षा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ा भरण-पोषण बरकरार रखा
माता-पिता की जिम्मेदारी के नाम पर पत्नी की उपेक्षा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ा भरण-पोषण बरकरार रखा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति की अपने माता-पिता और भाई-बहनों के प्रति जिम्मेदारियां उसे अपनी पत्नी के भरण-पोषण के प्राथमिक दायित्व से मुक्त नहीं कर सकतीं।जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने एक रेलवे कर्मचारी द्वारा दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।मामले में फैमिली कोर्ट इटावा ने पत्नी के लिए मासिक भरण-पोषण राशि 3500 रुपये से बढ़ाकर 8000 रुपये और नाबालिग पुत्र के लिए 1500 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये की थी।पति ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वह रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी...

DNA रिपोर्ट नेगेटिव होने पर भी पीड़िता का बयान सर्वोपरि: यौन उत्पीड़न के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
DNA रिपोर्ट नेगेटिव होने पर भी पीड़िता का बयान सर्वोपरि: यौन उत्पीड़न के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और उसे अन्य मेडिकल सबूतों से समर्थन मिलता है, तो केवल 'नेगेटिव' डीएनए (DNA) रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब अभियोजन पक्ष गवाही के माध्यम से अपराध सिद्ध कर देता है, तो DNA रिपोर्ट का मिलान न होना मामले को कमजोर नहीं करता।मामले की पृष्ठभूमियह फैसला जस्टिस प्रांजल दास की एकल पीठ ने सुनाया। मामला एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़ा है जिसके साथ उस समय बलात्कार किया गया...

100 से अधिक मामलों में आरोपी को हर बार पेशी के लिए लाना बोझिल: राजस्थान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की दी अनुमति
100 से अधिक मामलों में आरोपी को हर बार पेशी के लिए लाना बोझिल: राजस्थान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की दी अनुमति

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि जिन मामलों में किसी आरोपी के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज हों, वहां हर बार शारीरिक रूप से अदालत में पेश करना न केवल पुलिस व्यवस्था पर बोझ डालता है बल्कि सरकारी खर्च भी बढ़ाता है। ऐसे मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी एक व्यवहारिक और प्रभावी विकल्प है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने 100 से अधिक FIR का सामना कर रहे आरोपियों को सभी मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि जब आरोपी की पहचान विवादित...

वैवाहिक बलात्कार भले अपराध नहीं, लेकिन प्रेम संबंध में जबरन संबंध अपराध—FIR रद्द करने से इनकार: गौहाटी हाईकोर्ट
वैवाहिक बलात्कार भले अपराध नहीं, लेकिन प्रेम संबंध में जबरन संबंध अपराध—FIR रद्द करने से इनकार: गौहाटी हाईकोर्ट

गौहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि प्रेम संबंध (love relationship) होने से बलात्कार के अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती। अदालत ने कहा कि यदि महिला की इच्छा के विरुद्ध जबरन शारीरिक संबंध बनाया जाता है, तो वह आपराधिक कृत्य ही रहेगा।जस्टिस प्रांजल दास की पीठ एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO अधिनियम की धारा 4 के तहत दर्ज अपराधों से जुड़ा है।मामले...

West Bengal SIR | क्वालिफ़ाइंग तारीख के बाद फ़ॉर्म 6 से शामिल हुए नए वोटरों को वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा: जस्टिस बागची
West Bengal SIR | क्वालिफ़ाइंग तारीख के बाद फ़ॉर्म 6 से शामिल हुए नए वोटरों को वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा: जस्टिस बागची

पश्चिम बंगाल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति को फ़ॉर्म 6 (नए वोटर के लिए रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म) के ज़रिए वोटर लिस्ट में शामिल करने से उसे मौजूदा विधानसभा चुनाव में वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा, अगर उसे चुनाव आयोग द्वारा नोटिफ़ाई की गई 'क्वालिफ़ाइंग तारीख' के बाद शामिल किया गया।जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 14(b) के अनुसार, वोटर लिस्ट तैयार करने या उसमें बदलाव करने के लिए क्वालिफ़ाइंग...

विभागीय जांच में कर्मचारी द्वारा स्वीकार न किए गए दस्तावेज़ों को गवाह के ज़रिए साबित करना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
विभागीय जांच में कर्मचारी द्वारा स्वीकार न किए गए दस्तावेज़ों को गवाह के ज़रिए साबित करना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जब कोई कर्मचारी अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं करता है तो उसे नियोक्ता के बिना साबित हुए दस्तावेज़ी सबूतों के आधार पर नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि नियोक्ता को ऐसे दस्तावेज़ी सबूतों को गवाहों के ज़रिए साबित करना होगा ताकि कर्मचारी को गवाह से जिरह करने का मौका मिल सके।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वे यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड के कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द कर रहे थे।...

दिल्ली हाईकोर्ट ने उपदेशक अनिरुद्धाचार्य के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की, AI डीपफेक और मीम कंटेंट पर लगाई रोक
दिल्ली हाईकोर्ट ने उपदेशक अनिरुद्धाचार्य के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की, AI डीपफेक और मीम कंटेंट पर लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने आध्यात्मिक उपदेशक अनिरुद्धाचार्य के पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक का आदेश दिया। यह आदेश डिजिटल प्लेटफॉर्म पर AI-जनरेटेड कंटेंट, डीपफेक और मीम-आधारित सामग्री के ज़रिए उनके व्यक्तित्व के अनाधिकृत इस्तेमाल को रोकने के लिए दिया गया।जस्टिस तुषार राव गेडेला ने उपदेशक द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई करते हुए यह 'जॉन डो' आदेश पारित किया। उपदेशक ने आरोप लगाया कि विभिन्न प्रतिवादियों, जिनमें अज्ञात संस्थाएं भी शामिल हैं, द्वारा उनकी पहचान, आवाज़, रूप और शिक्षाओं का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग...

शादी के बाहर महिला द्वारा आपसी सहमति से बनाया गया शारीरिक संबंध व्यभिचार, तथ्यों की गलतफहमी नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप की FIR रद्द की
'शादी के बाहर महिला द्वारा आपसी सहमति से बनाया गया शारीरिक संबंध व्यभिचार, तथ्यों की गलतफहमी नहीं': पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप की FIR रद्द की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि जहां कोई वयस्क महिला अपनी मर्ज़ी से लंबे समय तक किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाती है तो ऐसे आचरण को तथ्यों की गलतफहमी के आधार पर किया गया काम नहीं माना जा सकता, जिससे कि उस पर IPC की धारा 376 के तहत रेप का आरोप लगाया जा सके। कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में यह रिश्ता आपसी सहमति से बने संबंध को दर्शाता है।जस्टिस एन.एस. शेखावत IPC की धारा 376(2) के तहत दर्ज FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। यह FIR पीड़िता के पति की शिकायत पर IPC...

भरण-पोषण बार-बार मिलने वाला अधिकार, समझौते का उल्लंघन होने पर पत्नी फिर से शुरू कर सकती है पुरानी अर्जी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भरण-पोषण बार-बार मिलने वाला अधिकार, समझौते का उल्लंघन होने पर पत्नी फिर से शुरू कर सकती है पुरानी अर्जी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि अगर कोई पति मध्यस्थता समझौते की शर्तों का उल्लंघन करता है तो पत्नी को भरण-पोषण के लिए नई अर्जी दाखिल करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वह पहले से शुरू की गई कार्यवाही को ही आगे बढ़ा सकती है।हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भरण-पोषण का अधिकार कोई एक बार मिलने वाला तोहफ़ा नहीं है, बल्कि यह एक गतिशील और बार-बार मिलने वाला अधिकार है, जो हर बार दायित्व के उल्लंघन पर नए सिरे से लागू हो जाता है।जस्टिस मदन पाल सिंह की पीठ मूल रूप से एक पति द्वारा दायर...

वकील ने जज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के साथ लिंक्डइन पर की थी पोस्ट, हाईकोर्ट ने तय किए आपराधिक अवमानना ​​के आरोप
वकील ने जज के खिलाफ 'अपमानजनक' टिप्पणियों के साथ लिंक्डइन पर की थी पोस्ट, हाईकोर्ट ने तय किए आपराधिक अवमानना ​​के आरोप

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महिला वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​के आरोप तय किए। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कोर्ट के अंदर और लिंक्डइन पर एक सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए, कथित तौर पर अपमानजनक आरोप लगाए।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की एक डिवीज़न बेंच ने यह आदेश एक 'सुओ मोटो' (स्वतः संज्ञान) अवमानना ​​मामले में दिया, जिसे ट्रायल कोर्ट से मिले एक रेफरेंस के आधार पर शुरू किया गया।अवमानना ​​की यह कार्यवाही तीस हज़ारी कोर्ट में लंबित दो क्रॉस FIRs (एक-दूसरे...

गुज़ारा भत्ता न चुकाने के कारण मई 2025 से लगातार हिरासत में व्यक्ति? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैमिली कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा
गुज़ारा भत्ता न चुकाने के कारण मई 2025 से लगातार हिरासत में व्यक्ति? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैमिली कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा की फ़ैमिली कोर्ट से उस व्यक्ति की लगातार हिरासत के बारे में स्पष्टीकरण मांगा, जिसने गुज़ारा भत्ता नहीं चुकाया। आरोप है कि वह व्यक्ति 23 मई, 2025 से लगातार हिरासत में है।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की बेंच ने यह स्पष्टीकरण तब मांगा, जब वह प्रेम सिंह नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीज़न याचिका पर सुनवाई कर रही थी। प्रेम सिंह ने मथुरा की फ़ैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज द्वारा 9 जनवरी, 2026 को CrPC की धारा 125(3) के तहत एक कार्यवाही में पारित आदेश को चुनौती दी थी।...

एक्टर शाहरुख खान के सामने झुकते PM Modi की मॉर्फ्ड तस्वीर पोस्ट करने के आरोपी को मिली जमानत
एक्टर शाहरुख खान के सामने झुकते PM Modi की मॉर्फ्ड तस्वीर पोस्ट करने के आरोपी को मिली जमानत

दिल्ली कोर्ट ने ऐसे व्यक्ति को ज़मानत दी, जिस पर अपने X (पहले ट्विटर) अकाउंट पर एक AI-जनरेटेड मॉर्फ्ड तस्वीर पोस्ट करने का आरोप था। इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिल्म एक्टर शाहरुख खान के सामने झुकते हुए दिखाया गया था।पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने मुजाहिद जमाल शेख को ज़मानत देते हुए कहा कि उसके खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि पुलिस हिरासत रिमांड ली गई थी, लेकिन कोई बरामदगी नहीं हुई।जज ने यह भी कहा कि आरोपी ने 14 मार्च को...

सत्य, प्रक्रिया और न्यायिक अनुशासन: भारत में न्याय-निर्णयन के आधारों की पुन: परीक्षा
सत्य, प्रक्रिया और न्यायिक अनुशासन: भारत में न्याय-निर्णयन के आधारों की पुन: परीक्षा

भारतीय अदालतों ने समान रूप से इस बात पर जोर दिया है कि निर्णय व्यक्तिगत अंतर्ज्ञान का अभ्यास नहीं है, न ही नियमों का एक यांत्रिक अनुप्रयोग है। नहीं, यह एक अनुशासित संस्थागत प्रक्रिया है जिसे संरचित प्रक्रियाओं के माध्यम से कानूनी रूप से प्रासंगिक सत्य को प्रकाश में लाने के लिए डिज़ाइन किया गया।लगातार दावा यह है कि किसी मामले को एक निजी व्यक्ति के रूप में तय करने के लिए विवेक का कोई न्यायिक अभ्यास नहीं है जो सहज प्रवृत्ति, दया या उनकी निजी नैतिकता के साथ चलता है, जो भारतीय संवैधानिक और...

S. 197 CrPC | मंजूरी की ज़रूरत का बाद में विस्तार उस समय लिए गए संज्ञान को अमान्य नहीं करेगा, जब कोई रोक नहीं थी: सुप्रीम कोर्ट
S. 197 CrPC | मंजूरी की ज़रूरत का बाद में विस्तार उस समय लिए गए संज्ञान को अमान्य नहीं करेगा, जब कोई रोक नहीं थी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 अप्रैल) को कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत मंजूरी सुरक्षा का बाद में किया गया विस्तार, उन कार्यवाहियों को रोकने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जो उस समय शुरू की गई थीं, जब ऐसी कोई रोक मौजूद नहीं थी।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कलकत्ता पुलिस बल के अधीनस्थ अधिकारी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को सही ठहराया। इस अधिकारी के खिलाफ अपराध का संज्ञान उस समय लिया गया था, जब कलकत्ता पुलिस के सभी अधीनस्थ अधिकारियों को CrPC...

Karnataka Stamp Act | कोर्ट के पास कम पड़ी ड्यूटी के दस गुना से कम जुर्माना लगाने का कोई विवेकाधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
Karnataka Stamp Act | कोर्ट के पास कम पड़ी ड्यूटी के दस गुना से कम जुर्माना लगाने का कोई विवेकाधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जब अदालतें 'कर्नाटक स्टाम्प अधिनियम, 1957' के तहत स्टाम्प ड्यूटी में किसी कमी का निर्धारण करती हैं तो उनके पास कम पड़ी ड्यूटी के दस गुना से कम जुर्माना लगाने का कोई विवेकाधिकार नहीं होता है।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह टिप्पणी की, “जब किसी दस्तावेज़ को डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के पास भेजे बिना कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश करने की कोशिश की जाती है, तो जुर्माने की रकम तय करने में कोई छूट नहीं होती।” बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस...

नांदेड़ में तेलंगाना MLC राजासिंह के साथ सशर्त सभा की अनुमति, हाईकोर्ट ने कहा- हेट स्पीच न देने का वचन दिया जाए
नांदेड़ में तेलंगाना MLC राजासिंह के साथ सशर्त सभा की अनुमति, हाईकोर्ट ने कहा- हेट स्पीच न देने का वचन दिया जाए

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में महाराष्ट्र की नांदेड़ पुलिस द्वारा पारित आदेश रद्द किया। इस आदेश में विवादित दक्षिणपंथी नेता टी. राजासिंह ठाकुर को एक सभा में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। इसका आधार यह था कि उनके 'भड़काऊ' हेट स्पीच (नफ़रत भरे भाषण) हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच मतभेद पैदा करते हैं।ठाकुर को आम तौर पर टी. राजा के नाम से जाना जाता है। वह वर्तमान में तेलंगाना से एक निर्दलय विधायक के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्य थे। रैलियों के...

दिल्ली बच्चों की तस्करी का अड्डा बन गई है: रेलवे स्टेशनों पर घटनाओं में बढ़ोतरी को लेकर PIL पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
'दिल्ली बच्चों की तस्करी का अड्डा बन गई है': रेलवे स्टेशनों पर घटनाओं में बढ़ोतरी को लेकर PIL पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों से बच्चों की तस्करी की घटनाओं में बढ़ोतरी को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से जवाब मांगा।यह याचिका 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस' की ओर से एडवोकेट प्रभसहाय कौर के ज़रिए दायर की गई।कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,"दिल्ली अब बच्चों की तस्करी का अड्डा बन गई। इस बात का पता लगाने के लिए आपको...