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पाकिस्तान की नागरिकता स्वेच्छा से लेने पर भारतीय नागरिकता समाप्त: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने निर्वासन आदेश सही ठहराया
पाकिस्तान की नागरिकता स्वेच्छा से लेने पर भारतीय नागरिकता समाप्त: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने निर्वासन आदेश सही ठहराया

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने 34 साल पुरानी रिट पिटीशन खारिज करते हुए कहा कि याचियों ने अपनी इच्छा से विदेशी नागरिकता हासिल की है। उनके पासपोर्ट और उनके पक्ष में जारी रेजिडेंशियल परमिट इस तथ्य के ठोस और स्पष्ट प्रमाण हैं कि याचिकाकर्ता भारत के नागरिक नहीं हैं इसलिए उनका निर्वासन आदेश वैध है।जस्टिस सिंधु शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जारी निर्वासन आदेशों में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि न पाते हुए उनकी याचिका खारिज की। यह याचिकाकर्ता पिछले तीन दशकों से श्रीनगर में न्यायिक स्थगन...

कांसुलर पासपोर्ट और वीज़ा सेवाओं के थर्ड-पार्टी वेंडर्स द्वारा तय मूल्य निर्धारण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
कांसुलर पासपोर्ट और वीज़ा सेवाओं के थर्ड-पार्टी वेंडर्स द्वारा तय मूल्य निर्धारण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार की उस नीति की वैधता पर सुनवाई करने पर सहमति दी है, जिसमें कांसुलर पासपोर्ट और वीज़ा सेवाओं (SPV सेवाओं) के लिए एक समान मूल्य निर्धारण तय किया गया, चाहे आवेदक वैल्यू एडेड सर्विसेज़ (VAS) ले या न ले।जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एनके सिंह की खंडपीठ भारतीय नागरिक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो ओमान में निवास करता है।याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसकी जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया गया था।यह याचिका केंद्र...

पीलीभीत जिला कार्यालय से बेदखली के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया
पीलीभीत जिला कार्यालय से बेदखली के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया

27 जून को पार्टी ने एक अर्जेंसी आवेदन दाखिल किया और डिवीजन बेंच को अवगत कराया कि नगर पालिका परिषद उसी दिन एक समिति गठित करने जा रही है, जो अगले दो दिनों में बेदखली की कार्रवाई कर सकती है।नगर पालिका परिषद का पक्ष रखने वाले वकील को मामले में कोई निर्देश प्राप्त नहीं थे, इसलिए जस्टिस जयंती बनर्जी और जस्टिस मदन पाल सिंह की पीठ ने उन्हें 1 जुलाई तक निर्देश प्राप्त करने का समय दिया।मामला अब 1 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।यह घटनाक्रम तब सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी की विशेष...

दिल्ली हाईकोर्ट ने जियो हॉटस्टार के पक्ष में डायनेमिक+ इंजंक्शन ऑर्डर पारित किया,  भारत के इंग्लैंड दौरे की अवैध स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने जियो हॉटस्टार के पक्ष में डायनेमिक+ इंजंक्शन ऑर्डर पारित किया, भारत के इंग्लैंड दौरे की अवैध स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में डायनामिक+ इंजंक्शन (निषेधाज्ञा) पारित की है और भारत के इंग्लैंड दौरे की अवैध और अनधिकृत स्ट्रीमिंग पर रोक लगा दी है। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने जियोस्टार के कॉपीराइट किए गए कार्यों की सुरक्षा के लिए डायनामिक+ इंजंक्‍शन ऑर्डर पारित किया।जियो हॉटस्टार के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश पारित करते हुए, न्यायालय ने चार रॉग (दुष्ट) वेबसाइटों को बिना किसी ऑथराइजेशन के किसी भी तरीके से किसी भी इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर भारत के...

सुप्रीम कोर्ट ने बौद्धों को गया के महाबोधि महाविहार का प्रबंधन सौंपने की याचिका खारिज की, हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने बौद्धों को गया के महाबोधि महाविहार का प्रबंधन सौंपने की याचिका खारिज की, हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (30 जून) को बोधगया बिहार स्थित महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग वाली रिट याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।याचिका में बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को भी चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मंदिर का प्रबंधन एक प्रबंधन समिति द्वारा किया जाता है। इसमें चार बौद्ध, चार हिंदू और एक जिला कलेक्टर शामिल होते हैं।जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की आंशिक कार्यदिवस खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की छूट...

देश का उद्धार इस बात में निहित कि मनुष्य की मनुष्य के रूप में पहचान हो, भारतीय के रूप में पहचान हो; अन्य पहचानें गौणः कर्नाटक हाईकोर्ट
देश का उद्धार इस बात में निहित कि मनुष्य की मनुष्य के रूप में पहचान हो, भारतीय के रूप में पहचान हो; अन्य पहचानें गौणः कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में हैदराबाद और कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों में जनता की ओर से दिखाए गए सांप्रदायिक सद्भाव की प्रशंसा की। हाईकोर्ट ने कहा, "देश का उद्धार इस बात में निहित है कि मनुष्य की मनुष्य के रूप में पहचान हो और भारतीय के रूप में पहचान हो, अन्य पहचानें गौण भूमिका निभाती हैं।" जस्टिस एमआई अरुण ने बताया कि यादगिरी जिला सांप्रदायिक सद्भाव को सेलिब्रेट करता है, जो आम तौर पर हैदराबाद-कर्नाटक के सीामवर्ती इलाके में पाया जाता है। इसमें एक-दूसरे के समुदायों के त्योहारों में हिंदू और...

CJI बीआर गवई ने कहा, सुप्रीम कोर्ट कोर्ट सीजेआई का कोर्ट है, जस्टिस ललित,  जस्टिस संजीव खन्ना और मैंने इस धारणा को दूर करने का प्रयास किया है
CJI बीआर गवई ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट कोर्ट 'सीजेआई का कोर्ट' है, जस्टिस ललित, जस्टिस संजीव खन्ना और मैंने इस धारणा को दूर करने का प्रयास किया है"

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई ने हाल ही में इस धारणा को दूर करने का प्रयास किया कि सुप्रीम कोर्ट "सीजेआई का कोर्ट" है, उन्होंने कहा कि यह सभी निर्णयों का न्यायालय है। इस बात पर जोर देते हुए कि सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक निर्णय पूर्ण न्यायालय द्वारा लिए जाते हैं, न कि केवल चीफ जस्टिस द्वारा, सीजेआई गवई ने कहा कि वे अपने पूर्ववर्तियों, विशेष रूप से जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा किए गए प्रयासों का अनुसरण कर रहे हैं, ताकि इस धारणा को दूर किया जा सके कि सुप्रीम कोर्ट सीजेआई का...

मेघालय हाईकोर्ट ने खासी समुदाय के जनजाति प्रमाणपत्र से जुड़ी जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
मेघालय हाईकोर्ट ने खासी समुदाय के जनजाति प्रमाणपत्र से जुड़ी जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

मेघालय हाईकोर्ट ने शुक्रवार (27 जून) को राज्य के जिला परिषद मामलों के विभाग को नोटिस जारी करते हुए यह निर्देश दिया कि वह रिपोर्ट दायर करें, जिसमें खासी समुदाय के उन व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र जारी करने पर अपना पक्ष रखें, जो पिता या माता के उपनाम को अपनाते हैं या महिलाएं अपने पति का उपनाम अपनाती है।चीफ जस्टिस आई. पी. मुखर्जी और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की खंडपीठ ने Syngkhong Rympei Thymmai नामक एक रजिस्टर्ड सोसायटी द्वारा दायर जनहित याचिका को स्वीकार किया, जो सामाजिक कल्याण विभाग...

हमें अधिक साहसी और निडर जजों की आवश्यकता, तभी संविधान जीवित रहेगा: जस्टिस उज्जल भुइयां
हमें अधिक साहसी और निडर जजों की आवश्यकता, तभी संविधान जीवित रहेगा: जस्टिस उज्जल भुइयां

बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा द्वारा आयोजित सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय एस ओक के विदाई समारोह में बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि भारत का संविधान साहसी और निडर जजों की नियुक्ति से ही जीवित रहेगा।उन्होंने कहा,"जैसा कि कैरोलिन कैनेडी ने कहा था हमें और अधिक साहसी और निडर जजों की आवश्यकता है। हमारे पास ऐसे जज रहे हैं और आगे भी रहेंगे। इसी तरह हमारा संविधान जीवित रहेगा।"जस्टिस भुइयां ने कहा कि लोकतंत्र की नींव कानून का शासन है। इसके लिए एक स्वतंत्र...

शपथ लेने के बाद जज को भविष्य की संभावनाओं के बारे में एक पल भी नहीं सोचना चाहिए: जस्टिस अभय ओक
शपथ लेने के बाद जज को भविष्य की संभावनाओं के बारे में एक पल भी नहीं सोचना चाहिए: जस्टिस अभय ओक

बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा द्वारा आयोजित सम्मान और रिटायरमेंट समारोह में बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय ओक ने कहा कि शपथ लेने के बाद किसी भी जज को अपने भविष्य की संभावनाओं के बारे में एक क्षण के लिए भी नहीं सोचना चाहिए।उन्होंने कहा,"एक बार जब आप जज की शपथ लेते हैं तो भविष्य की संभावनाओं के बारे में एक पल के लिए भी नहीं सोचना चाहिए। जैसे ही आप ऐसा सोचने लगते है, आप अपनी शपथ के अनुसार काम नहीं कर पाएंगे।"जस्टिस ओक ने कहा कि जजों को इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि उनके...

बाहरी ताकतों के कारण सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सभी सिफारिशों पर अमल नहीं होता: जस्टिस दीपांकर दत्ता
'बाहरी ताकतों' के कारण सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सभी सिफारिशों पर अमल नहीं होता: जस्टिस दीपांकर दत्ता

सुप्रीम कोर्ट ने जज जस्टिस दीपांकर दत्ता ने शनिवार (28 जून) को 'कॉलेजियम सिस्टम' की 'आलोचनाओं' का जवाब दिया।उन्होंने कहा कि यह धारणा कि 'केवल जज ही जजों की नियुक्ति करते हैं' एक 'गलत धारणा' है और वास्तव में 'बाहरी ताकतें' हैं, जो जजों की नियुक्ति में बाधा डालती हैं।जस्टिस दत्ता ने रेखांकित किया कि इन बाहरी ताकतों से "सख्ती से निपटा जाना चाहिए।"जस्टिस दत्ता ने कहा,"हमें समाज को यह बताने की ज़रूरत है कि अगर जज ही जजों की नियुक्ति करते तो सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सभी सिफारिशों पर अमल किया जाता।...

FIR में पीड़िता के एससी होने के कारण अपराध होने का उल्लेख न होने पर SC/ST Act की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
FIR में पीड़िता के एससी होने के कारण अपराध होने का उल्लेख न होने पर SC/ST Act की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि जब FIR में यह उल्लेख न हो कि पीड़िता के खिलाफ अपराध, इस मामले में बलात्कार, इसलिए किया गया, क्योंकि वह अनुसूचित जाति समुदाय से है तो SC/ST Act की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता, जो अग्रिम जमानत देने पर रोक लगाती है।जस्टिस वीरेंद्र सिंह:"प्रश्नाधीन FIR में इस तथ्य के संबंध में कोई संदर्भ नहीं है कि पीड़िता के साथ कथित तौर पर इस आधार पर बलात्कार किया गया कि वह अनुसूचित जाति समुदाय से है। यदि SC/ST Act की सामग्री के संबंध में कोई संदर्भ नहीं...