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वेतन को अफसरशाही की देरी का बंधक नहीं बनाया जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट सख्त, 60 दिन की समयसीमा तय
वेतन को अफसरशाही की देरी का बंधक नहीं बनाया जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट सख्त, 60 दिन की समयसीमा तय

बॉम्बे हाइकोर्ट ने शिक्षकों के वेतन में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण वेतन रोका नहीं जा सकता। अदालत ने शालार्थ प्रणाली से जुड़े मामलों में 60 दिनों की समयसीमा तय की।जस्टिस विभा कंकणवाड़ी और जस्टिस हितेन एस. वेनेगावकर की खंडपीठ सहायक शिक्षक विजय उत्तम चव्हाण की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने शालार्थ प्रणाली में नाम शामिल कर वेतन जारी करने की मांग की थी।अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति और सहायता प्राप्त पद पर स्थानांतरण पहले ही सक्षम...

LPG कमी पर बॉम्बे हाइकोर्ट ने याचिका बंद की, केंद्र के आश्वासन पर जताया भरोसा
LPG कमी पर बॉम्बे हाइकोर्ट ने याचिका बंद की, केंद्र के आश्वासन पर जताया भरोसा

बॉम्बे हाइकोर्ट ने एलपीजी सिलेंडरों की कथित कमी को लेकर दायर याचिका को बंद कर दिया है क्योंकि केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि स्थिति को घरेलू और कूटनीतिक स्तर पर संभाला जा रहा है।जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े की खंडपीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दायर हलफनामे पर विचार करते हुए यह फैसला सुनाया।केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में हो रहे बदलावों के बावजूद नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।अदालत को...

पूर्व सैनिक कोटा: आवेदन की अंतिम तिथि नहीं, रिजल्ट की तारीख से गिना जाएगा एक साल- दिल्ली हाइकोर्ट
पूर्व सैनिक कोटा: आवेदन की अंतिम तिथि नहीं, रिजल्ट की तारीख से गिना जाएगा एक साल- दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने पूर्व सैनिक (ESM) कोटे से जुड़ी भर्ती में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि एक वर्ष की सेवा समाप्ति अवधि की गणना आवेदन की अंतिम तिथि से नहीं बल्कि परीक्षा परिणाम घोषित होने की तारीख से की जाएगी।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब पात्रता नियम अस्पष्ट हों तो उनकी व्याख्या उम्मीदवार के पक्ष में की जानी चाहिए।मामला एक सेना के जवान से जुड़ा था, जिसने भारतीय सेना में सेवा देते हुए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल...

सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला
सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की संपत्ति केवल इस आधार पर जब्त नहीं की जा सकती कि वह किसी गैंगस्टर का रिश्तेदार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति जब्ती के लिए अपराध और संपत्ति के बीच सीधा संबंध (नेक्सस) साबित होना जरूरी है।जस्टिस राज बीर सिंह की पीठ ने मंसूर अंसारी की अपील स्वीकार करते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश रद्द कर दिया। मंसूर अंसारी, कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई हैं।मामले में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा मंसूर अंसारी की दुकानों और भवन...

इलेक्ट्रॉनिक सबूत की प्रमाणित कॉपी न देना निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट
इलेक्ट्रॉनिक सबूत की प्रमाणित कॉपी न देना निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि आरोपी को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की प्रमाणित क्लोन कॉपी न देना उसके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपी की याचिका स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अप्रमाणित कॉपी देना या प्रमाणित क्लोन कॉपी देने से इनकार करना न केवल निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हनन है, बल्कि आरोपी के लिए डिस्चार्ज (मुक्ति) का अधिकार प्रभावी ढंग से उपयोग करने में...

निजी स्वार्थ छिपाकर दायर की जनहित याचिका: राजस्थान हाइकोर्ट सख्त, भविष्य में PIL पर रोक, 25 लाख जुर्माने पर विचार
निजी स्वार्थ छिपाकर दायर की जनहित याचिका: राजस्थान हाइकोर्ट सख्त, भविष्य में PIL पर रोक, 25 लाख जुर्माने पर विचार

राजस्थान हाइकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता को भविष्य में कोई भी PIL दायर करने से रोक दिया। अदालत ने यह भी पूछा है कि उसके खिलाफ कार्यवाही क्यों न की जाए और 25 लाख रुपये का भारी जुर्माना क्यों न लगाया जाए।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने यह आदेश उस समय दिया, जब सुनवाई के दौरान सामने आया कि याचिकाकर्ता का मामले में निजी हित जुड़ा हुआ है।याचिका में राज्यभर में राष्ट्रीय राजमार्गों, रिंग रोड और अन्य सड़कों पर कथित अवैध धर्मकांटे और...

BREAKING| पैनटरनिटी लीव को मान्यता देने वाला कानून बनाया जाए: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार से आग्रह
BREAKING| पैनटरनिटी लीव को मान्यता देने वाला कानून बनाया जाए: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार से आग्रह

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने वाला कानून लाए। कोर्ट ने कहा कि इस अवकाश की अवधि ऐसी होनी चाहिए जो माता-पिता और बच्चे, दोनों की ज़रूरतों के हिसाब से तय की जाए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह सिफ़ारिश एक ऐसे मामले में की, जिसमें उस प्रावधान की संवैधानिकता पर विचार किया जा रहा, जो गोद लेने वाली माताओं को मैटरनिटी लीव तभी देता है, जब गोद लिए गए बच्चे की उम्र 3 महीने...

हिमायनी पुरी मामले में दिल्ली हाइकोर्ट सख्त: आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का आदेश, वैश्विक रोक पर फिलहाल नहीं फैसला
हिमायनी पुरी मामले में दिल्ली हाइकोर्ट सख्त: आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का आदेश, वैश्विक रोक पर फिलहाल नहीं फैसला

दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी से जुड़े कथित मानहानिकारक पोस्ट पर सख्त रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उन्हें हटाने का आदेश दिया। हालांकि अदालत ने फिलहाल वैश्विक स्तर पर सामग्री हटाने (ग्लोबल टेकडाउन) की मांग पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी।जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने ट्विटर (एक्स), गूगल, यूट्यूब, मेटा और लिंक्डइन सहित अन्य पक्षों को निर्देश दिया कि वे भारत में उपलब्ध ऐसे सभी आपत्तिजनक कंटेंट को हटाएं।अदालत ने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर सामग्री...

रिमिशन योजनाएं कैदियों को अच्छे व्यवहार के लिए प्रेरित करती हैं: पटना हाईकोर्ट, आजीवन कारावासियों की याचिका पर पुनर्विचार का निर्देश
रिमिशन योजनाएं कैदियों को अच्छे व्यवहार के लिए प्रेरित करती हैं: पटना हाईकोर्ट, आजीवन कारावासियों की याचिका पर पुनर्विचार का निर्देश

सुधारात्मक उद्देश्य के लिए जरूरी हैं रिमिशन योजनाएं, बिहार हाईकोर्ट ने दो आजीवन कारावास भुगत रहे दोषियों की याचिका पर पुनर्विचार का निर्देश दिया।पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि रिमिशन (सजा में छूट) योजनाएं आपराधिक न्याय प्रणाली के सुधारात्मक पहलू का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और यह कैदियों को अच्छा आचरण बनाए रखने के लिए प्रेरित करती हैं। अदालत ने इस आधार पर बिहार राज्य सजा माफी समीक्षा बोर्ड (State Sentence Remission Review Board) को दो दोषियों की रिमिशन याचिका पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।जस्टिस...

BREAKING | तीन महीने से ज़्यादा उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली माताओं को मातृत्व लाभ से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट
BREAKING | तीन महीने से ज़्यादा उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली माताओं को मातृत्व लाभ से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को फैसला सुनाया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4), जो किसी गोद लेने वाली माँ को मातृत्व लाभ तभी देती है, जब गोद लिए गए बच्चे की उम्र 3 महीने से कम हो, असंवैधानिक है।कोर्ट ने फैसला सुनाया कि गोद लेने वाली माँ 12 हफ़्ते की मातृत्व छुट्टी की हकदार होनी चाहिए, चाहे गोद लिए गए बच्चे की उम्र कुछ भी हो।कोर्ट ने इस प्रावधान की व्याख्या इस तरह की: "कोई भी महिला जो कानूनी तौर पर किसी बच्चे को गोद लेती है, या कोई कमीशनिंग माँ, उस तारीख से 12 हफ़्ते की अवधि...

NDPS Act : तलाशी के लिए पुलिस अधिकारी का विकल्प देना गैरकानूनी- सुप्रीम कोर्ट ने बरी का फैसला बरकरार रखा
NDPS Act : तलाशी के लिए पुलिस अधिकारी का विकल्प देना गैरकानूनी- सुप्रीम कोर्ट ने बरी का फैसला बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि किसी आरोपी को तलाशी के लिए पुलिस अधिकारी के सामने पेश होने का विकल्प देना NDPS कानून की धारा 50 का उल्लंघन है। अदालत ने इस आधार पर आरोपी की बरी को बरकरार रखा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार की अपील खारिज करते हुए हाइकोर्ट का फैसला सही ठहराया।मामला उस आरोपी से जुड़ा था जिसके पास से कथित रूप से चरस बरामद की गई। पुलिस ने उसे यह विकल्प दिया कि वह अपनी तलाशी मजिस्ट्रेट, राजपत्रित अधिकारी या पुलिस अधिकारी के...

मोटर दुर्घटना मुआवजा: ग्रुप बीमा की राशि नहीं होगी कम, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया सिद्धांत
मोटर दुर्घटना मुआवजा: ग्रुप बीमा की राशि नहीं होगी कम, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया सिद्धांत

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि नियोक्ता द्वारा दी गई समूह बीमा योजना या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से मिलने वाली राशि को मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजे से घटाया नहीं जा सकता।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने केरल और कर्नाटक हाइकोर्ट के फैसलों को बरकरार रखते हुए इस संबंध में दायर अपीलों को खारिज किया।अदालत ने कहा कि इस तरह की बीमा या सामाजिक सुरक्षा से मिलने वाली राशि आर्थिक लाभ (पेक्यूनियरी एडवांटेज) नहीं मानी जा सकती, जिसे मुआवजे से घटाया...

कांग्रेस के तुर्की ऑफिस दावे पर विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को भेजा समन, अंतरिम राहत नहीं
कांग्रेस के तुर्की ऑफिस दावे पर विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को भेजा समन, अंतरिम राहत नहीं

दिल्ली हाइकोर्ट ने मंगलवार को मानहानि मामले में अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को समन जारी किया। यह मामला भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) द्वारा दायर किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि चैनल ने प्रसारण में पार्टी का तुर्की में अंतरराष्ट्रीय कार्यालय होने का गलत दावा किया।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया और केवल अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग पर नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि वाद को दर्ज किया जाए और प्रतिवादियों को समन सभी माध्यमों से...

सुप्रीम कोर्ट जस्टिस कृष्णा अय्यर की उद्योग की 48 साल पुरानी परिभाषा पर दोबारा विचार क्यों कर रहा है?
सुप्रीम कोर्ट जस्टिस कृष्णा अय्यर की 'उद्योग' की 48 साल पुरानी परिभाषा पर दोबारा विचार क्यों कर रहा है?

सुप्रीम कोर्ट 48 साल पुराने बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा (1978) में निर्धारित "उद्योग" की विस्तृत परिभाषा की शुद्धता पर सुनवाई करने के लिए तैयार है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस बी. वी. नागरत्ना, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस उज्जल भुइयां, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा,जस्टिस जॉयमल्या बागची, जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल होंगे।सुनवाई 17 मार्च से शुरू होगी और यह 18 मार्च को समाप्त होगी।इस लेख में,...

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मुकदमों में समझ से बाहर और भारी देरी पर फिर से चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मुकदमों में "समझ से बाहर और भारी देरी" पर फिर से चिंता जताई

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर महाराष्ट्र में मुकदमों में होने वाली समझ से बाहर की देरी पर चिंता जताई।कोर्ट ने कहा,"एक बात जिसने कोर्ट को गंभीर रूप से चिंतित किया, वह यह है कि कोर्ट बार-बार देख रहा है कि मुकदमों के संचालन में, खासकर महाराष्ट्र राज्य द्वारा, समझ से बाहर और भारी देरी हो रही है।" जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने ज़मानत याचिका पर नोटिस जारी किया और नासिक के पुलिस कमिश्नर से एक व्यक्तिगत रूप से सत्यापित हलफनामा मांगा, जिसमें जून 2019 में दर्ज एक मामले में...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 साल के बच्चे को कुचलने के मामले में ट्रक ड्राइवर को दोषी ठहराया, रेस इप्सा लोक्विटुर सिद्धांत का हवाला दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 साल के बच्चे को कुचलने के मामले में ट्रक ड्राइवर को दोषी ठहराया, 'रेस इप्सा लोक्विटुर' सिद्धांत का हवाला दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में दो साल के बच्चे की मौत का कारण बनने के लिए ट्रक ड्राइवर को दोषी ठहराया। कोर्ट ने 'रेस इप्सा लोक्विटुर' (Res Ipsa Loquitur) सिद्धांत का हवाला देते हुए यह माना कि दुर्घटना के हालात खुद ही लापरवाही की ओर इशारा कर रहे थे।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील स्वीकार की और 24 दिसंबर, 2019 का ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें आरोपी शिव शंकर को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 279 और 304A के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया था।यह मामला 5...