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राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्स फीस रिफंड विवाद में धोखाधड़ी के मामले में upGrad के डायरेक्टर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
राजस्थान हाई कोर्ट ने upGrad के डायरेक्टरों और अन्य कर्मचारियों/सहयोगियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई। upGrad एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है जो ऑनलाइन उच्च शिक्षा कार्यक्रम उपलब्ध कराता है। यह रोक उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वास भंग के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले के संबंध में लगाई गई।जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका के अनुसार, यह मामला एक छात्र ने दर्ज कराया। इस छात्र ने प्लेटफॉर्म पर एक कोर्स चुना था। इसके लिए 5.25 लाख रुपये की फीस जमा की थी।...
3 साल की हिरासत के बाद PMLA में ज़मानत मिली, कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा - लंबे समय तक हिरासत के मामलों में अनुच्छेद 21, दोहरी शर्तों पर भारी पड़ सकता है
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में आरोपी को ज़मानत दी। कोर्ट ने माना कि तीन साल से ज़्यादा समय तक ट्रायल से पहले हिरासत में रखना, अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही यह मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत तय सख्त 'दोहरी शर्तों' में ढील देने का उचित आधार बन सकता है।जस्टिस सुव्रा घोष ने टिप्पणी की कि कोई भी दंडात्मक कानून कितना भी सख्त क्यों न हो, एक संवैधानिक अदालत को हमेशा संविधानवाद और कानून के शासन के पक्ष में ही...
कल्याणकारी राज्य के कार्यों, धर्मार्थ कृत्यों को 'उद्योग' नहीं माना जा सकता हैः केंद्र ने 9-जजों की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया
केंद्र सरकार ने मंगलवार (17 मार्च) को बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा (1978) में निर्धारित परीक्षण के व्यापक आवेदन के खिलाफ चेतावनी देते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य द्वारा की गई कल्याणकारी गतिविधियों और धर्मार्थ कार्यों को श्रम कानून के तहत "उद्योग" के रूप में नहीं माना जा सकता है।नौ जजों की संविधान पीठ के समक्ष पेश हुए, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी ने प्रस्तुत किया कि जबकि 1978 के फैसले में विकसित "ट्रिपल टेस्ट" तार्किक रूप से ध्वनि हो सकता है, इसके अंधाधुंध...
फैसले सुरक्षित रखने के बाद देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिशानिर्देशों पर फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 मई) को हाईकोर्ट्स द्वारा सुनवाई पूरी होने के बाद फैसले सुनाने में हो रही देरी को लेकर प्रस्तावित दिशानिर्देशों पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत ने कहा कि इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि न्यायपालिका में जवाबदेही बढ़ाना और व्यवस्था को मजबूत करना है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने इस मामले में एमिकस क्यूरी अधिवक्ता फौजिया शकील द्वारा प्रस्तुत ड्राफ्ट दिशानिर्देशों की सराहना की और हाईकोर्ट्स से इस पर...
Bilkis Bano Case : सुप्रीम कोर्ट ने हत्या और गैंगरेप के लिए उम्रकैद की सज़ा पाए 2 दोषियों की अपील पर जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो केस के दो दोषियों - बिपिनचंद कनैलाल जोशी और प्रदीप रमनलाल मोधिया - की याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट के 4 मई, 2017 के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ थी, जिसमें हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और सज़ा को सही ठहराया था।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों को नोटिस जारी किया और इस SLP (विशेष अनुमति याचिका) की सुनवाई के लिए 5 मई, 2026 की तारीख़ तय की।बॉम्बे हाईकोर्ट ने जोशी और मोधिया समेत 11 आरोपियों की दोषसिद्धि और...
मृत व्यक्तियों के बिना दावे वाले बैंक अकाउंट्स की जानकारी उनके वारिसों को क्यों नहीं दी जा सकती? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और RBI से पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से पूछा कि मृत व्यक्तियों के बैंक खातों की जानकारी उनके वारिसों को क्यों नहीं दी जा सकती, ताकि वे उन खातों में जमा बिना दावे वाली रकम (Unclaimed Funds) को हासिल कर सकें।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच 2022 में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका वित्तीय पत्रकार और 'मनी लाइफ' की मैनेजिंग एडिटर सुचेता दलाल ने दायर की थी। इस याचिका का विषय निवेशकों और जमाकर्ताओं की वह बिना दावे वाली रकम थी, जिस तक उनके...
विरोधाभासों की जांच करना और गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना CrPC की धारा 319 के दायरे से बाहर: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को कहा कि CrPC की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को समन जारी करने के चरण में 'एक छोटा ट्रायल' (Mini Trial) चलाना गलत है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें सबूतों का 'बारीकी से विश्लेषण' किया गया और CrPC की धारा 319 के तहत अतिरिक्त आरोपी को समन जारी करने के चरण में 'उचित संदेह से परे सबूत' (Proof Beyond a Reasonable Doubt) का पैमाना लागू किया गया।कोर्ट ने कहा,"...इन गवाहों की पूरी गवाही में...
NGT, नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करके किए गए अतिक्रमण को हटाने का आदेश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास ऐसे कथित अतिक्रमण को हटाने का आदेश देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, जो नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करके किया गया हो।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने नई दिल्ली NGT का फैसला रद्द किया, जिसमें एक मंदिर को हटाने का आदेश दिया गया। यह मंदिर गाजियाबाद जिले के वसुंधरा, सेक्टर-16A में 'खुली जगह/पार्क' के तौर पर दिखाई गई ज़मीन पर अवैध रूप से बनाया गया था।बेंच ने NGT Act, 2010 की धारा 14 के तहत अपनी शक्तियों का...
कंपनी के फंड का धोखाधड़ी से गलत इस्तेमाल बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से ठीक नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के ज़रिए जुटाए गए फंड का इस्तेमाल उन मकसदों के अलावा किसी और मकसद के लिए करना, जिनका खुलासा निवेशकों के सामने किया गया, सिक्योरिटीज़ कानून के तहत धोखाधड़ी माना जाएगा। साथ ही इसे बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से भी ठीक नहीं किया जा सकता।भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा दायर अपीलों को मंज़ूर करते हुए जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सिक्योरिटीज़ अपीलीय ट्रिब्यूनल (SAT) का आदेश रद्द किया,...
पत्नी भरण-पोषण की कार्यवाही के लिए RTI Act के तहत पति का IT रिटर्न नहीं मांग सकती, यह 'निजी जानकारी' के तहत छूट प्राप्त है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई भी जीवनसाथी, दूसरे जीवनसाथी का इनकम टैक्स रिटर्न और वित्तीय रिकॉर्ड, सूचना का अधिकार (RTI) एक्ट, 2005 के तहत आवेदन करके प्राप्त नहीं कर सकता; क्योंकि ऐसी जानकारी RTI Act की धारा 8(1)(j) के तहत 'निजी जानकारी' मानी जाती है, जिसे सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है।बेंगलुरु में बैठी पीठ ने अदालत के आदेश में यह टिप्पणी करते हुए गिरीश रामचंद्र देशपांडे बनाम CIC, 2012 AIR SCW 5865 मामले का हवाला दिया,"...किसी व्यक्ति द्वारा अपने इनकम टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी...
अगर अपॉइंटमेंट गैर-कानूनी नहीं है तो प्रमोशन के लिए एड-हॉक सर्विस को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अपॉइंटमेंट गैर-कानूनी नहीं है तो सरकार किसी कर्मचारी की एड-हॉक सर्विस को प्रमोशन के लिए नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस कर्मचारी के दावे को गैर-कानूनी तरीके से नज़रअंदाज़ किया गया, उसे प्रमोशन उसी तारीख से दिया जाना चाहिए, जिस तारीख को उसके जूनियर को प्रमोशन दिया गया।यह मानते हुए कि नियमों के अनुसार किया गया एड-हॉक अपॉइंटमेंट ज़्यादा से ज़्यादा अनियमित हो सकता है, गैर-कानूनी नहीं, जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने कहा,“अगर...
RTE Act के तहत 25% सीटें आरक्षित करने की योजना का इस्तेमाल एक ही बच्चे के एडमिशन के लिए बार-बार नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत वंचितों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की योजना इसलिए बनाई गई ताकि ज़्यादा से ज़्यादा योग्य बच्चों को शिक्षा के अवसर मिल सकें, लेकिन यह योजना किसी माता-पिता को यह अधिकार नहीं देती कि वे एक ही बच्चे के लिए बार-बार सीट की मांग करें। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में यह फैसला सुनाया।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस हितेन वेनेगांवकर की डिवीज़न बेंच ने पिता की याचिका खारिज की। पिता ने अपने घर के पास के एक स्कूल में अपने बच्चे के लिए सीट देने की 'ज़िद' की थी,...
'समन मिलने के बाद सुनवाई की तारीख के बारे में न बताने के लिए आरोपी अपने पिता को दोषी नहीं ठहरा सकता': हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने देरी माफ करने की अर्जी खारिज की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 130 दिन की देरी माफ करने की अर्जी खारिज की। कोर्ट ने कहा कि अर्जी देने वाला इस दलील पर भरोसा नहीं कर सकता कि कोर्ट का समन मिलने के बाद उसके पिता ने उसे सुनवाई की तारीख के बारे में नहीं बताया।जस्टिस राकेश कैंथला ने टिप्पणी की:"जब कानून यह कहता है कि समन परिवार के किसी वयस्क पुरुष सदस्य को दिया जाए तो यह ठीक वैसा ही है जैसे समन सीधे अर्जी देने वाले को दिया गया हो। इसलिए यह दलील कि अर्जी देने वाले को उसके पिता ने सुनवाई की तारीख के बारे में नहीं बताया, उसके काम नहीं आएगी।"...
“नाम में हुई क्लर्क की गलती कानूनी अधिकार को खत्म नहीं कर सकती”: बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना में मौत के मुआवज़े के दावे पर फिर से विचार करने का आदेश दिया
बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रेलवे दुर्घटना से जुड़े मुआवज़े के दावे को सिर्फ़ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि सीज़न टिकट पर यात्री के नाम में कोई छोटी-मोटी गलती है, जबकि टिकट पर लिखा पहचान पत्र (ID) नंबर यात्री की पहचान की पुष्टि करता हो। कोर्ट ने कहा कि अगर यात्री की पहचान रेलवे अधिकारियों द्वारा जारी पहचान पत्र जैसे भरोसेमंद सबूतों से साबित हो जाती है तो टिकट पर नाम में हुई क्लर्क की गलती या अधूरा नाम छपा होने से मुआवज़े का दावा करने का कानूनी अधिकार खत्म नहीं हो जाता।जस्टिस जितेंद्र...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति रद्द की, कहा - सरकार फार्मेसी एक्ट के तहत सीधे नियुक्ति नहीं कर सकती
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार के तौर पर अश्विनी गुरदेकर की नियुक्ति रद्द की। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि फार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 26 के तहत रजिस्ट्रार की नियुक्ति स्टेट फार्मेसी काउंसिल द्वारा राज्य सरकार की पहले से मंज़ूरी लेकर की जानी चाहिए, न कि सीधे सरकार द्वारा।जस्टिस पार्थ प्रतीक साहू रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट जारी करने की मांग की गई। इस याचिका में प्रतिवादी नंबर 4 (अश्विनी गुरदेकर) की छत्तीसगढ़ स्टेट...
SSC Recruitment | उम्मीदवार द्वारा स्वतंत्र रूप से प्राप्त मेडिकल राय, नए मेडिकल टेस्ट का आधार नहीं बन सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) का आदेश रद्द किया, जिसमें स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) द्वारा आयोजित कांस्टेबल (एग्जीक्यूटिव) पद की भर्ती प्रक्रिया के दौरान मेडिकल रूप से अनफिट घोषित किए गए एक उम्मीदवार का फिर से मेडिकल टेस्ट कराने का निर्देश दिया गया।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने फैसला सुनाया कि भर्ती नियमों के तहत गठित विशेषज्ञ बोर्डों की मेडिकल राय में दखल देते समय अदालतों को संयम बरतना चाहिए, और वे केवल स्वतंत्र रूप से प्राप्त मेडिकल...
गुजरात कोर्ट ने 2016 के ऊना कोड़ेबाजी मामले में पांच दोषियों को 5 साल की जेल की सज़ा सुनाई
गिर सोमनाथ ज़िले के वेरावल में एक गुजरात कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को 2016 के ऊना कोड़ेबाजी मामले में पांच लोगों को 5 साल की जेल की सज़ा सुनाई। यह मामला 11 जुलाई 2016 को ऊना में एक मरी हुई गाय की खाल उतारने के आरोप में चार दलित पुरुषों पर हुए हमले से जुड़ा है।आरोप है कि इन पुरुषों को गैर-कानूनी तरीके से पुलिस लॉकअप में भी रखा गया और पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की थी।PTI की रिपोर्ट के अनुसार, सेशंस कोर्ट ने इन पांचों दोषियों पर जुर्माना भी लगाया।सोमवार को सेशंस कोर्ट ने कोड़ेबाजी के इस...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जिम मालिक 'मोहम्मद दीपक' के खिलाफ चल रही जांच की स्थिति और उसे मिले 'दान' के ब्योरे मांगे
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जनवरी 2026 में कोटद्वार में हुई घटना से जुड़ी कई FIRs की जांच के संबंध में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। इस घटना में दीपक कुमार उर्फ 'मोहम्मद दीपक' शामिल था।जस्टिस राकेश थपलियाल की बेंच ने याचिकाकर्ता (दीपक) को यह भी निर्देश दिया कि वह अब तक अपने बैंक खाते में जमा हुए 'दान' का स्पष्ट ब्योरा दे। यह निर्देश तब दिया गया, जब इस घटना का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया।बता दें, यह मामला 26 जनवरी, 2026 को कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) में हुई एक घटना...
गुरु गोबिंद जयंती को राष्ट्रीय अवकाश बनाने की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और छुट्टियां न बढ़ाएं
सुप्रीम कोर्ट ने गुरु गोबिंद जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।अदालत ने स्पष्ट कहा कि देश में पहले से ही पर्याप्त छुट्टियां हैं और इसमें और वृद्धि की जरूरत नहीं है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की भारत पहले ही छुट्टियों का देश है। इसमें और इजाफा न करें।यह याचिका ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा द्वारा दायर की गई, जिसमें गुरु गोबिंद सिंह की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग की गई।याचिकाकर्ता का तर्क था कि...
75 साल पुराना पारिवारिक विवाद खत्म: बॉम्बे हाइकोर्ट ने यरवड़ा संपत्ति के बंटवारे का दिया आदेश
बॉम्बे हाइकोर्ट ने पुणे के यरवड़ा क्षेत्र की एक संपत्ति के बंटवारे का आदेश देकर 75 साल पुराने पारिवारिक विवाद को आंशिक रूप से समाप्त कर दिया।जस्टिस फरहान पी. दबाश इस लंबे समय से लंबित दीवानी मामले की सुनवाई कर रहे थे, जो वर्ष 1950 में मिया मोहम्मद हाजी जनमोहम्मद छोटानी के वारिसों द्वारा दायर किया गया। याचिका में संपत्ति में हिस्सेदारी तय करने और बंटवारे की मांग की गई।मामले में शुरुआत में ही हाइकोर्ट ने संपत्ति के प्रबंधन के लिए कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया था। बाद में वारिसों के हिस्से तय करते हुए...




















