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लॉन्ग टर्म वीज़ा नहीं होने पर पुलिस की घर पर जांच को चुनौती: तेलंगाना हाईकोर्ट ने पासपोर्ट प्राधिकरण को पक्षकार बनाने की अनुमति दी
तेलंगाना हाइकोर्ट ने मंगलवार को हैदराबाद निवासी एक व्यक्ति द्वारा दायर रिट अपील पर सुनवाई की, जिसमें उसने विशेष शाखा (स्पेशल ब्रांच) पुलिस द्वारा उसके घर पर की जा रही डोमिसिलरी विज़िट्स को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उसका जन्म भारत में हुआ है, जबकि उसके पास लॉन्ग टर्म वीज़ा नहीं है।चीफ़ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी. एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने पासपोर्ट प्राधिकरण को पक्षकार (इम्पलीड) बनाने की अनुमति दी और संबंधित अधिकारियों को...
POCSO पीड़िताओं के गर्भसमापन मामलों में देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट चिंतित; 24 हफ्ते से पहले बेहतर व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि यद्यपि 24 सप्ताह तक गर्भसमापन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) मौजूद है, फिर भी बलात्कार पीड़िताएं अक्सर गर्भ का पता देर से चलने के कारण समयसीमा के अंतिम चरण में अदालत का दरवाजा खटखटाती हैं।जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस इन्द्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि कानून 20 से 24 सप्ताह तक, विशेष परिस्थितियों—जैसे दुष्कर्म—में गर्भसमापन की अनुमति देता है, लेकिन जानकारी की कमी, सामाजिक दबाव और...
जमानत के बाद हिरासत बढ़ाने के लिए लगातार FIR दर्ज करना प्रक्रिया का दुरुपयोग; अनुच्छेद 32 लागू करने का उपयुक्त मामला: सुप्रीम कोर्ट
जमानत के बावजूद आरोपी को हिरासत में रखने के लिए लगातार FIR दर्ज करना प्रक्रिया का दुरुपयोग: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी आरोपी को जमानत मिलने के बाद भी उसे हिरासत में बनाए रखने के उद्देश्य से लगातार नई FIR दर्ज करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग (abuse of process) है और ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप उचित है।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनाया जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य...
समान काम, समान वेतन के लिए योग्यता भी समान होनी चाहिए: दिल्ली हाइकोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'समान काम के लिए समान वेतन' का सिद्धांत केवल पद या काम की समानता पर आधारित नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि दो कैडरों के बीच शैक्षणिक योग्यता में अंतर है तो उनके वेतन में अंतर को जायज ठहराया जा सकता है।मामले की पृष्ठभूमियह मामला दिल्ली मेडिकल टेक्निकल एम्प्लॉइज एसोसिएशन की ओर से दायर किया गया। एसोसिएशन के लैब टेक्नीशियन, जो नगर निगम (MCD) के अस्पतालों में कार्यरत हैं, केंद्र सरकार के संस्थानों (जैसे AIIMS और NICD) के लैब टेक्नीशियनों के समान 5,000-8,000 रुपये...
जिला जज की अनिवार्य रिटायरमेंट रद्द: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट की याचिका खारिज की, जिसमें जिला जज का अनिवार्य रिटायरमेंट रद्द करने के हाइकोर्ट के ही फैसले को चुनौती दी गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारी को राहत देने वाला हाइकोर्ट का निर्णय पूरी तरह संभव और उचित है इसलिए इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।पूरा मामलायह विवाद 2011 के एक आदेश से जुड़ा है, जिसमें हरियाणा सरकार ने हाइकोर्ट के फुल कोर्ट निर्णय के आधार पर जिला जज डॉ. शिव शर्मा को 58 वर्ष की आयु में अनिवार्य रिटायरमेंट दी थी। डॉ....
Indian Succession Act | पत्नी और बच्चों के जीवित रहने पर मां को विरासत में हिस्सा नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि कोई पुत्र बिना वसीयत (इंटेस्टेट) के मृत्यु को प्राप्त होता है और उसके पीछे पत्नी व बच्चे (प्रत्यक्ष वंशज) जीवित हैं, तो उसकी मां को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा।जस्टिस ज्योति एम ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें मृतक की पत्नी और बच्चों द्वारा दायर उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि मृतक की मां भी कानूनी उत्तराधिकारी है।मामला क्या...
सिर्फ नियम बदलने से नहीं बदलेगी जमीनी हकीकत: ठोस कचरा प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने देश में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के लागू होने के तरीके पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि बार-बार नियमों में बदलाव और नए रेगुलेशन लाने के बावजूद जमीनी स्तर पर वांछित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।पूरा मामलायह टिप्पणी जस्तित पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने भोपाल नगर निगम की अपील पर सुनवाई के दौरान की। दरअसल, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कचरा प्रबंधन मानदंडों के उल्लंघन के लिए भोपाल नगर निगम पर 1.80 करोड़ रुपये और 121 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया,...
समान काम, समान वेतन के लिए योग्यता भी समान होनी चाहिए: दिल्ली हाइकोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'समान काम के लिए समान वेतन' का सिद्धांत केवल पद या काम की समानता पर आधारित नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि दो कैडरों के बीच शैक्षणिक योग्यता में अंतर है तो उनके वेतन में अंतर को जायज ठहराया जा सकता है।मामले की पृष्ठभूमियह मामला दिल्ली मेडिकल टेक्निकल एम्प्लॉइज एसोसिएशन की ओर से दायर किया गया। एसोसिएशन के लैब टेक्नीशियन, जो नगर निगम (MCD) के अस्पतालों में कार्यरत हैं, केंद्र सरकार के संस्थानों (जैसे AIIMS और NICD) के लैब टेक्नीशियनों के समान 5,000-8,000 रुपये...
राजस्थान हाइकोर्ट का निर्देश: वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारी के वैध बकाये नहीं रोके जा सकते
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम की वित्तीय कठिनाइयां किसी कर्मचारी के वैध बकाये को रोकने का आधार नहीं बन सकतीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी श्रमिक के वैधानिक अधिकारों से केवल इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता कि निगम के पास पर्याप्त धनराशि नहीं है।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ रिटायर कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने लगभग 13 वर्षों तक साप्ताहिक अवकाश के बदले देय राशि का भुगतान न होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया।अदालत ने कहा कि यदि...
अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट की राजस्थान प्रशासन को फटकार, कहा– अधिकारियों की निष्क्रियता ने ग्रामीणों को हिंसा की ओर धकेला
सुप्रीम कोर्ट ने कल एक ऐसे व्यक्ति को जमानत दे दी, जिसे भीड़ द्वारा एक घर में तोड़फोड़ के मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने टिप्पणी की कि क्षेत्र में अवैध खनन और स्टोन क्रशिंग यूनिट्स के खिलाफ ग्रामीणों द्वारा बार-बार की गई शिकायतों पर प्रशासन की निष्क्रियता ही इस घटना का मुख्य कारण बनी।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने अधिकारियों की निष्क्रियता पर “व्यथा” (anguish) व्यक्त करते हुए आगे की कार्रवाई का संकेत दिया। अदालत ने राज्य सरकार को...
क्या 'वीरा राजा वीरा' गाने में डागर ब्रदर्स की परफॉर्मेंस को माना जा सकता? सुप्रीम कोर्ट ने एआर रहमान से पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान और तमिल फिल्म पोन्नियिन सेलवन II के प्रोड्यूसर्स से पूछा कि क्या यह माना जा सकता है कि "वीरा राजा वीरा" गाने का म्यूजिक जूनियर डागर ब्रदर्स द्वारा डागरवाणी परंपरा में गाए गए 'सिह्वा स्तुति' से लिया गया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ध्रुपद सिंगर उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसने तमिल फिल्म पोन्नियिन सेलवन II में 'वीरा...
CJI के ऑफिस को पिछले 10 सालों में मौजूदा जजों के खिलाफ 8630 शिकायतें मिलीं: लॉ मिनिस्ट्री
लोकसभा में शेयर किए गए लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के ऑफिस को पिछले दस सालों में मौजूदा जजों के खिलाफ 8,630 शिकायतें मिली हैं।द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के मथेश्वरन बनाम ने लॉ और जस्टिस मिनिस्टर अर्जुम राम मेघवाल से पूछा कि क्या कोई ऐसा मैकेनिज्म है, जिससे सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ मिली करप्शन, सेक्सुअल मिसकंडक्ट या दूसरी गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतों का कोई रिकॉर्ड रख सके। अगर हां, तो पिछले 10 सालों में सुप्रीम कोर्ट को मिली शिकायतों का डेटा।यह...
धोखाधड़ी मामले में फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट की पत्नी को मिली अंतरिम ज़मानत
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम ज़मानत दी, जो करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी के मामले में उदयपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह आदेश श्वेतांबरी भट्ट और विक्रम भट्ट की उस याचिका पर नोटिस जारी करते हुए दिया, जिसमें राजस्थान हाई कोर्ट के ज़मानत न देने के आदेश को चुनौती दी गई।याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि राजस्थान पुलिस उनके मुंबई वाले घर...
कानून किसी भूत को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकता: पहचान में संदेह के चलते दिल्ली हाइकोर्ट ने 23 साल बाद डकैती मामले में दोषी को बरी किया
दिल्ली कोर्ट ने डकैती मामले में लगभग 23 वर्ष पहले ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी किया है। हाइकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान संदेह से परे स्थापित करने में विफल रहा और पहचान परेड (टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड) विश्वसनीय नहीं थी।जस्टिस विमल कुमार यादव ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा निरस्त करते हुए कहा कि आपराधिक कानून अनुमान या अनिश्चितता के आधार पर नहीं चल सकता। जब अपराधी की पहचान ही संदेह के घेरे में हो तब दायित्व तय नहीं किया जा सकता।अदालत ने अपने...
नाबालिगों को अपराध का 'हथियार' बनाना बढ़ती समस्या: दिल्ली हाइकोर्ट ने तस्करी मामले में अग्रिम जमानत से किया इनकार
दिल्ली कोर्ट ने महिला को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, जिस पर एक नाबालिग बच्चे की तस्करी कर उसे अवैध शराब के कारोबार में इस्तेमाल करने का आरोप है। हाइकोर्ट ने कहा कि अपराधों में बच्चों का शोषण कर उन्हें हथियार की तरह उपयोग करना समाज के लिए गंभीर और बढ़ता हुआ खतरा है।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गिरिश कठपालिया ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना समाज को गलत संदेश देगा। उन्होंने कहा कि हाल के समय में अपराधों के लिए बच्चों के शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और कठोर अपराधी...
आमतौर पर चार्जशीट फाइल होने तक एंटीसिपेटरी बेल पर रोक नहीं लगाई जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चार्जशीट फाइल होने तक एंटीसिपेटरी बेल पर रोक नहीं लगाई जा सकती और यह आमतौर पर बिना किसी तय समय सीमा के जारी रहती है, जब तक कि खास कारण दर्ज न हों।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पहले पुलिस रिपोर्ट फाइल होने तक ही प्रोटेक्शन सीमित करने के बाद दूसरी एंटीसिपेटरी बेल याचिका खारिज कर दी गई।कोर्ट ने कहा,"कानून की स्थिति अच्छी तरह से तय है: एक बार एंटीसिपेटरी बेल मिल जाने के बाद यह आमतौर पर बिना किसी तय समय...
BREAKING| टेलीकॉम स्पेक्ट्रम कम्युनिटी रिसोर्स, IBC इसकी ओनरशिप और कंट्रोल तय नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टेलीकॉम स्पेक्ट्रम की ओनरशिप और कंट्रोल इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) से तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह एक आम भलाई है।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने कहा कि स्पेक्ट्रम संवैधानिक मायने में कम्युनिटी का मटेरियल रिसोर्स है। इसलिए स्पेक्ट्रम से आम भलाई को फायदा होना चाहिए, इसलिए इसका कंट्रोल नागरिकों के लिए सुरक्षित होना चाहिए।जस्टिस नरसिम्हा ने फैसले के दौरान कहा,"IBC स्पेक्ट्रम की ओनरशिप और कंट्रोल को रीस्ट्रक्चर करने का गाइडिंग प्रिंसिपल...
सुप्रीम कोर्ट ने AIBE, CLAT एग्जाम के लिए कम देखने वाले कैंडिडेट को 10+2 से ज़्यादा क्वालिफिकेशन वाले स्क्राइब रखने की इजाज़त दी
सुप्रीम कोर्ट ने AIBE और CLAT एग्जाम में बैठने वाले कम देखने वाले कैंडिडेट को 10+2 से ज़्यादा क्वालिफिकेशन वाले स्क्राइब रखने की इजाज़त दी, बशर्ते ऐसे स्क्राइब लॉ ग्रेजुएट न हों।याचिकाकर्ता के सुझावों को मानते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ को निर्देश दिया कि वे सुझावों को जल्द से जल्द लागू करें, और अगली एग्जाम होने से काफी पहले उन्हें फॉर्मल तौर पर नोटिफाई करें।याचिकाकर्ता के...
ज़मानत मिलने के बाद जोड़े गए अपराध के लिए आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट की इजाज़त ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो आरोपी पहले से ज़मानत पर है, उसे जांच एजेंसी सिर्फ़ इसलिए दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकती, क्योंकि चार्जशीट में कोई नया कॉग्निज़ेबल और नॉन-ज़मानती अपराध जोड़ दिया गया।कोर्ट ने साफ़ किया कि एजेंसी को नए जोड़े गए अपराध के संबंध में गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू करने से पहले ज़मानत देने वाली कोर्ट से सही ऑर्डर लेना होगा।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा,“ऐसे मामले में जहां आरोपी को पहले ही ज़मानत मिल चुकी है, जांच करने वाली अथॉरिटी...
सुप्रीम कोर्ट ने ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के बावजूद ट्रिब्यूनल के हाथ से ऑर्डर लिखने पर दुख जताया, हाईकोर्ट से पूछा- क्या कंप्यूटर नहीं दिया गया?
ज्यूडिशियल डिजिटाइजेशन पर ज़रूरी बात कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर निराशा जताई कि ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के पूरे देश में लागू होने के बावजूद, एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल अपने ऑर्डर हाथ से लिखता रहा।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि हैदराबाद में एक MACT की पूरी ऑर्डर शीट हाथ से लिखी हुईं और कुछ हिस्से पढ़ने लायक नहीं थे। खास बात यह है कि यह अवॉर्ड 2024 में पास हुआ।कोर्ट ने एक क्लेम अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा,“हमें यह नोटिस करना पड़ रहा है कि ट्रिब्यूना के भेजे...




















