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मुकदमे में संशोधन की समयसीमा पर अहम फैसला: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कहा- मुकदमे के चरण के आधार पर होगा निर्णय
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सिविल मामलों में याचिका (प्लीडिंग) में संशोधन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संशोधन आवेदन की समयसीमा का आकलन मुकदमे की शुरुआत की तारीख से नहीं, बल्कि मुकदमे किस चरण में है, इसके आधार पर किया जाना चाहिए।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 नियम 17 के तहत अदालत को किसी भी चरण में संशोधन की अनुमति देने का अधिकार है। बशर्ते वह वास्तविक विवाद के समाधान के लिए आवश्यक हो।अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक चरण (ट्रायल शुरू होने से पहले) में...
नार्को टेस्ट से पहले या दौरान भी आरोपी वापस ले सकता है सहमति: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि कोई भी आरोपी नार्को विश्लेषण (नार्को टेस्ट) के लिए दी गई अपनी सहमति को परीक्षण से पहले या उसके दौरान भी वापस ले सकता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि एक बार दी गई सहमति अंतिम (अपरिवर्तनीय) नहीं मानी जा सकती।जस्टिस अनूप कुमार धांध की पीठ ने कहा कि यदि आरोपी की इच्छा के विरुद्ध नार्को टेस्ट किया जाता है, तो यह उसके मौलिक अधिकारों जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) तथा आत्मदोषारोपण के खिलाफ अधिकार (अनुच्छेद 20(3)) का उल्लंघन होगा।अदालत ने कहा,“नार्को...
मजिस्ट्रेट खुद करेंगे प्रारंभिक जांच, पुलिस को नहीं सौंप सकते जिम्मेदारी: कलकत्ता हाइकोर्ट
कलकत्ता हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट पुलिस को “जांच” (इन्क्वायरी) करने का निर्देश नहीं दे सकते। यह जिम्मेदारी स्वयं मजिस्ट्रेट को निभानी होगी, और उसके बाद ही वे जांच के आदेश दे सकते हैं।जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी ने कहा कि कानून के तहत जांच का अर्थ न्यायिक प्रक्रिया से है, जिसे केवल मजिस्ट्रेट या अदालत ही कर सकती है। यदि इस कार्य को पुलिस को सौंप दिया जाए खासकर तब जब पुलिस पहले ही FIR दर्ज करने से इनकार...
रिश्वत मांगने के आरोप में फंसे आबकारी अधिकारी को राहत नहीं, कलकत्ता हाइकोर्ट ने कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार
कथित तौर पर लाइसेंस देने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में फंसे एक आबकारी अधिकारी को कलकत्ता हाइकोर्ट से राहत नहीं मिली।अदालत ने भ्रष्टाचार से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिनकी जांच ट्रायल के दौरान ही की जाएगी।जस्टिस अपूर्व सिन्हा राय ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर अदालत को केवल यह देखना होता है कि क्या प्रथम दृष्टया मामला बनता है, न कि पूरे मामले का...
मेवाड़ राजघराने में विरासत विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने पद्मजा कुमारी की याचिका खारिज की
मेवाड़ राजघराने में चल रहे विरासत विवाद में एक अहम मोड़ आया। दिल्ली हाइकोर्ट ने पद्मजा कुमारी परमार की उस याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने अपने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार मांगा था।जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने स्पष्ट किया कि जब किसी वसीयत (विल) के अस्तित्व को स्वीकार किया जा चुका हो, भले ही उसकी वैधता पर विवाद हो तब व्यक्ति को बिना वसीयत (इंटेस्टेट) के आधार पर संपत्ति के प्रशासन की मांग करने वाली याचिका मान्य नहीं होती।अदालत ने कहा,“कानूनी व्यवस्था यह कहती है...
गोद लेना भी प्रजनन अधिकार का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मातृत्व केवल जैविक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि गोद लेना (अडॉप्शन) भी व्यक्ति के प्रजनन और निर्णय लेने की स्वतंत्रता का हिस्सा है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि परिवार बनाने का अधिकार केवल जैविक तरीके तक सीमित नहीं है, बल्कि गोद लेना भी उसी अधिकार का समान और वैध रूप है।अदालत ने कहा,“प्रजनन स्वतंत्रता केवल बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं है। गोद लेना भी परिवार बनाने और माता-पिता बनने के अधिकार का समान रूप से महत्वपूर्ण...
सूरत दुष्कर्म मामला: बयान में विरोधाभास का दावा, नारायण साईं ने हाइकोर्ट में सजा को दी चुनौती
सूरत दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण साईं ने गुजरात हाइकोर्ट में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए कहा है कि पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास बदलाव और सुधार हैं, जिन पर ट्रायल कोर्ट ने ध्यान नहीं दिया।यह दलील मंगलवार को जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दी गई।साईं के वकील ने अदालत में कहा कि पीड़िता को कई मौके मिले, जब वह घटना की शिकायत कर सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।वकील के अनुसार,“यदि किसी महिला के साथ ऐसा अत्याचार होता है,...
दिव्यांगों के लिए ऊपरी सीमा तय नहीं कर सकता राज्य: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, 90% दिव्यांग वकील की नियुक्ति का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजनों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 केवल न्यूनतम पात्रता (फ्लोर) तय करता है लेकिन राज्य को यह अधिकार नहीं देता कि वह अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को बाहर करने के लिए कोई ऊपरी सीमा (सीलिंग) तय करे।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि 90% दिव्यांग वकील को सहायक जिला अटॉर्नी (ADA) के पद पर नियुक्त किया जाए।मामला उस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था, जिसमें दिव्यांग...
जज खुद ही अलग-अलग जवाब दें तो लॉ स्टूडेंट से सही जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट ने लॉ ऑफिसर परीक्षा में राहत दी
लॉ ऑफिसर की भर्ती के लिए हुई परीक्षा के एक सवाल के सही जवाब में अस्पष्टता के कारण सुप्रीम कोर्ट ने दो उम्मीदवारों के प्रतिस्पर्धी दावों को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने दोनों उम्मीदवारों को राहत देते हुए निर्देश दिया कि एक अतिरिक्त पद (Supernumerary Post) बनाकर दोनों को समायोजित किया जाए।यह मामला चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा 2021 में लॉ ऑफिसर के एक पद के लिए आयोजित परीक्षा से जुड़ा था। इसमें चरण प्रीत सिंह का चयन हुआ। उनकी नियुक्ति को एक अन्य उम्मीदवार अमित कुमार शर्मा ने इस आधार पर चुनौती दी थी कि...
बच्चों के मन से डर निकालने के लिए फ़ैमिली कोर्ट में काले चोगे पहनना बंद करें जज और वकील: CJI सूर्यकांत
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने हाल ही में सुझाव दिया कि फ़ैमिली कोर्ट में जज और वकील अपने पारंपरिक काले चोगे पहनना छोड़ दें, ताकि बच्चों को डर न लगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि फ़ैमिली कोर्ट का नाम बदलकर 'फ़ैमिली रिज़ॉल्यूशन सेंटर' (पारिवारिक समाधान केंद्र) कर दिया जाए।नई दिल्ली के रोहिणी में नए फ़ैमिली कोर्ट कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखने के समारोह में बोलते हुए CJI ने पूछा,"क्या फ़ैमिली कोर्ट में ये काले चोगे होने चाहिए? क्या इससे बच्चे के मन में डर पैदा नहीं होगा?" चीफ जस्टिस ने...
'बैंक ग्राहक के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है': सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड पार्टी को गलत तरीके से पैसे भेजने के लिए बैंक को ज़िम्मेदार ठहराया
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बैंकों को ग्राहक के निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि कोई भी बैंक अपने ग्राहक द्वारा दिए गए आदेश के विपरीत एकतरफ़ा रूप से पैसे कहीं और नहीं भेज सकता। कोर्ट ने केनरा बैंक की उस ज़िम्मेदारी को भी सही ठहराया, जिसके तहत उसने गलती से किसी तीसरे पक्ष को 100,000 अमेरिकी डॉलर भेज दिए।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने बैंक की अपील खारिज की। बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट का फ़ैसला बरकरार रखा, जिसमें बैंक को इस गलत ट्रांसफर...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्स फीस रिफंड विवाद में धोखाधड़ी के मामले में upGrad के डायरेक्टर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
राजस्थान हाई कोर्ट ने upGrad के डायरेक्टरों और अन्य कर्मचारियों/सहयोगियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई। upGrad एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है जो ऑनलाइन उच्च शिक्षा कार्यक्रम उपलब्ध कराता है। यह रोक उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वास भंग के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले के संबंध में लगाई गई।जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका के अनुसार, यह मामला एक छात्र ने दर्ज कराया। इस छात्र ने प्लेटफॉर्म पर एक कोर्स चुना था। इसके लिए 5.25 लाख रुपये की फीस जमा की थी।...
3 साल की हिरासत के बाद PMLA में ज़मानत मिली, कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा - लंबे समय तक हिरासत के मामलों में अनुच्छेद 21, दोहरी शर्तों पर भारी पड़ सकता है
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में आरोपी को ज़मानत दी। कोर्ट ने माना कि तीन साल से ज़्यादा समय तक ट्रायल से पहले हिरासत में रखना, अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही यह मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत तय सख्त 'दोहरी शर्तों' में ढील देने का उचित आधार बन सकता है।जस्टिस सुव्रा घोष ने टिप्पणी की कि कोई भी दंडात्मक कानून कितना भी सख्त क्यों न हो, एक संवैधानिक अदालत को हमेशा संविधानवाद और कानून के शासन के पक्ष में ही...
कल्याणकारी राज्य के कार्यों, धर्मार्थ कृत्यों को 'उद्योग' नहीं माना जा सकता हैः केंद्र ने 9-जजों की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया
केंद्र सरकार ने मंगलवार (17 मार्च) को बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा (1978) में निर्धारित परीक्षण के व्यापक आवेदन के खिलाफ चेतावनी देते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य द्वारा की गई कल्याणकारी गतिविधियों और धर्मार्थ कार्यों को श्रम कानून के तहत "उद्योग" के रूप में नहीं माना जा सकता है।नौ जजों की संविधान पीठ के समक्ष पेश हुए, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी ने प्रस्तुत किया कि जबकि 1978 के फैसले में विकसित "ट्रिपल टेस्ट" तार्किक रूप से ध्वनि हो सकता है, इसके अंधाधुंध...
फैसले सुरक्षित रखने के बाद देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिशानिर्देशों पर फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 मई) को हाईकोर्ट्स द्वारा सुनवाई पूरी होने के बाद फैसले सुनाने में हो रही देरी को लेकर प्रस्तावित दिशानिर्देशों पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत ने कहा कि इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि न्यायपालिका में जवाबदेही बढ़ाना और व्यवस्था को मजबूत करना है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने इस मामले में एमिकस क्यूरी अधिवक्ता फौजिया शकील द्वारा प्रस्तुत ड्राफ्ट दिशानिर्देशों की सराहना की और हाईकोर्ट्स से इस पर...
Bilkis Bano Case : सुप्रीम कोर्ट ने हत्या और गैंगरेप के लिए उम्रकैद की सज़ा पाए 2 दोषियों की अपील पर जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो केस के दो दोषियों - बिपिनचंद कनैलाल जोशी और प्रदीप रमनलाल मोधिया - की याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट के 4 मई, 2017 के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ थी, जिसमें हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और सज़ा को सही ठहराया था।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों को नोटिस जारी किया और इस SLP (विशेष अनुमति याचिका) की सुनवाई के लिए 5 मई, 2026 की तारीख़ तय की।बॉम्बे हाईकोर्ट ने जोशी और मोधिया समेत 11 आरोपियों की दोषसिद्धि और...
मृत व्यक्तियों के बिना दावे वाले बैंक अकाउंट्स की जानकारी उनके वारिसों को क्यों नहीं दी जा सकती? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और RBI से पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से पूछा कि मृत व्यक्तियों के बैंक खातों की जानकारी उनके वारिसों को क्यों नहीं दी जा सकती, ताकि वे उन खातों में जमा बिना दावे वाली रकम (Unclaimed Funds) को हासिल कर सकें।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच 2022 में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका वित्तीय पत्रकार और 'मनी लाइफ' की मैनेजिंग एडिटर सुचेता दलाल ने दायर की थी। इस याचिका का विषय निवेशकों और जमाकर्ताओं की वह बिना दावे वाली रकम थी, जिस तक उनके...
विरोधाभासों की जांच करना और गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना CrPC की धारा 319 के दायरे से बाहर: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को कहा कि CrPC की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को समन जारी करने के चरण में 'एक छोटा ट्रायल' (Mini Trial) चलाना गलत है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें सबूतों का 'बारीकी से विश्लेषण' किया गया और CrPC की धारा 319 के तहत अतिरिक्त आरोपी को समन जारी करने के चरण में 'उचित संदेह से परे सबूत' (Proof Beyond a Reasonable Doubt) का पैमाना लागू किया गया।कोर्ट ने कहा,"...इन गवाहों की पूरी गवाही में...
NGT, नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करके किए गए अतिक्रमण को हटाने का आदेश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास ऐसे कथित अतिक्रमण को हटाने का आदेश देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, जो नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करके किया गया हो।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने नई दिल्ली NGT का फैसला रद्द किया, जिसमें एक मंदिर को हटाने का आदेश दिया गया। यह मंदिर गाजियाबाद जिले के वसुंधरा, सेक्टर-16A में 'खुली जगह/पार्क' के तौर पर दिखाई गई ज़मीन पर अवैध रूप से बनाया गया था।बेंच ने NGT Act, 2010 की धारा 14 के तहत अपनी शक्तियों का...
कंपनी के फंड का धोखाधड़ी से गलत इस्तेमाल बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से ठीक नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के ज़रिए जुटाए गए फंड का इस्तेमाल उन मकसदों के अलावा किसी और मकसद के लिए करना, जिनका खुलासा निवेशकों के सामने किया गया, सिक्योरिटीज़ कानून के तहत धोखाधड़ी माना जाएगा। साथ ही इसे बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से भी ठीक नहीं किया जा सकता।भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा दायर अपीलों को मंज़ूर करते हुए जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सिक्योरिटीज़ अपीलीय ट्रिब्यूनल (SAT) का आदेश रद्द किया,...




















