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सर्टिफिकेट खारिज करने पर याचिका पर फैसला करने से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के जज देखेंगे फिल्म 'अजेय
बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) पर नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए गुरुवार को कहा कि वह 'आए : द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी' नामक फिल्म देखेगा और उसके बाद फिल्म के निर्माताओं की ओर से फिल्म को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित करने की याचिका पर फैसला करेगा।यह फिल्म 'द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर' पुस्तक से प्रेरित है, जो कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित है। गौरतलब है कि सीबीएफसी की परीक्षा...
हर वैध व्यापार संविधान के जरिए संरक्षित: कर्नाटक हाईकोर्ट ने बाइक टैक्सी प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर कहा, राज्य मुद्दे पर विचार करने के लिए सहमत
कर्नाटक सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट को सूचित किया कि बाइक टैक्सियों के संबंध में निर्णय सरकार के सर्वोच्च स्तर पर लिया जाएगा। चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सीएम जोशी की खंडपीठ द्वारा परिवहन के इस साधन को विनियमित करने के बजाय, इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर राज्य सरकार की खिंचाई के बाद यह निर्णय लिया गया है।न्यायाधीशों ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा, "आज ई-बाइक की भी अनुमति नहीं है। अब पूरी तरह से वैध व्यापार प्रतिबंधित है। जब तक आप किसी सेवा की अनुमति दे रहे हैं, आप उसे विनियमित कर सकते...
'पूजा करता है और नियमित गीता पढ़ता है': उड़ीसा हाईकोर्ट ने दोहरे हत्याकांड और गर्भवती महिला के भ्रूण की हत्या के दोषी की मौत की सजा कम की
उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को सत्र न्यायालय की ओर से दी गई मृत्युदंड की सज़ा को कम कर दिया है। उसने न केवल दो अलग-अलग स्थानों पर दो अज्ञात लोगों की हत्या की थी, बल्कि दो अन्य लोगों को गंभीर रूप से घायल भी किया था। उसने एक गर्भवती महिला को बार-बार चाकू मारकर और उसके गुप्तांग में 'पेस्ट्री-रोलर' डालकर उसकी हत्या करने का प्रयास भी किया था, जिससे अंततः उसके भ्रूण की मृत्यु हो गई थी। मृत्युदंड को कम करते हुए जस्टिस बिभु प्रसाद राउत्रे और जस्टिस चित्तरंजन दाश की खंडपीठ ने कहा -“जेल प्रशासन की...
POCSO मामलों में बिना ठोस या न्यायोचित कारण के गवाह को वापस नहीं बुलाया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO मामले में किसी गवाह को वापस नहीं बुलाया जा सकता यदि आवेदन में कोई ठोस या न्यायोचित कारण नहीं बताया गया हो।जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा, "किसी गवाह को वापस बुलाने में, विशेष रूप से POCSO Act के तहत उन मामलों में जिनकी सुनवाई शीघ्रता से की जानी आवश्यक है, ऐसे आवेदन दायर करके देरी नहीं की जा सकती, जिनमें ऐसे गवाहों को वापस बुलाने का कोई ठोस या न्यायोचित कारण नहीं बताया गया हो।"भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 348 का हवाला देते हुए न्यायालय ने...
रिटायर कर्मियों पर विभागीय कार्यवाही संभव, पर दंड नहीं सिर्फ सरकारी नुकसान का आकलन: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार रिटायर कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही जारी रख सकती है लेकिन केवल इस सीमा तक कि उससे राज्य को हुए वित्तीय नुकसान का निर्धारण हो सके। सेवा नियमों के तहत दंडित करने के लिए ऐसी कार्यवाही नहीं की जा सकती।जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शाहज़ाद अज़ीम की खंडपीठ ने रिट कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें रिटायर अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि चूंकि अधिकारी को मार्च 2013 में रिटायरमेंट से पहले ही आरोप पत्र...
दिल्ली हाईकोर्ट: वकील क्लाइंट के निर्देशों से बंधे हैं, मगर दावों की सच्चाई की जांच करना उनका काम नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि वकील अपने मुवक्किल (क्लाइंट) के निर्देशों के पालन के लिए बाध्य हैं लेकिन उन दावों की सच्चाई या झूठ की जांच करना उनकी ज़िम्मेदारी नहीं है। यह फैसला चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सुनाया।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुकदमे में किए गए दावे या दलीलें सही हैं या गलत, यह तय करना संबंधित अदालत का काम है न कि वकील का है।यह टिप्पणी कोर्ट ने उस अपील को खारिज करते हुए दी, जो एक शिकायतकर्ता ने तीन वकीलों के खिलाफ दायर की थी। यह मामला...
Order 41 Rule 27 CPC: अपील लंबित रहने पर अतिरिक्त साक्ष्य की अर्जी पर फैसला अंतिम सुनवाई में ही होगा : राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की Order 41 Rule 27 के तहत अपील के दौरान दाखिल की गई अतिरिक्त साक्ष्य लेने की अर्जी पर फैसला अपील की अंतिम सुनवाई के समय ही किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की अर्जी को अपील की सुनवाई से पहले तय करना न्यायिक दृष्टि से उचित नहीं होगा।मामला उस समय उठा, जब याचिकाकर्ता के खिलाफ किराया न्यायाधिकरण ने बेदखली का आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई, जो विचाराधीन थी। अपील लंबित रहते हुए याचिकाकर्ता ने...
सुप्रीम कोर्ट ने दृष्टिबाधित CLAT-PG उम्मीदवारों को कंप्यूटर पर उत्तर देने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि CLAT के भविष्य के संस्करणों में उपस्थित होने वाले दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को जेएडब्ल्यूएस (जॉब एक्सेस विद स्पीच) स्क्रीन रीडर के उपयोग सहित सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए, और कंप्यूटर पर वर्ड डॉक्यूमेंट पर सवालों के जवाब देने के लिए अनुकूलित कीबोर्ड और माउस का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि अखिल भारतीय बार परीक्षा के लिए दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए सुविधाओं के संबंध में 5 दिसंबर,...
लंबित जांच के दरमियान किसी कर्मचारी को बिना उचित प्रक्रिया के समय से पहले सेवानिवृत्त करना कदाचार के बराबर: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने कहा कि विवादित अभिलेखों पर विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान, उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना, किसी कर्मचारी को समय से पहले सेवानिवृत्त करना, अधिकारियों द्वारा कदाचार माना जाता है क्योंकि इससे नियोक्ता के हितों को नुकसान पहुंचता है। मामले में न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की सिफारिश करके और लंबित विभागीय जांच को रद्द करके, कंपनी के हितों के प्रतिकूल कार्य किया है। न्यायालय ने माना कि सीसीएल के प्रमाणित स्थायी आदेशों की...
मास्टर प्लान में गांव को 'शहरी क्षेत्र' घोषित किए जाने पर राज्य ऐसे क्षेत्र के विकास के लिए भूमि परिवर्तन की अनुमति दे सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने सुजानगढ़ मास्टर प्लान 2036 में असोटा गांव को शामिल करने को चुनौती देने वाली याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि यह ग्राम पंचायत की आपत्तियों के बावजूद किया गया था और यह पंचायत की स्वायत्तता के लिए हानिकारक था। जस्टिस कुलदीप माथुर ने कहा कि इस तरह के समावेशन से पहले संबंधित ग्राम पंचायत के साथ किया गया परामर्श पर्याप्त था और नीतिगत निर्णय लेने के लिए सहमति अनिवार्य नहीं थी।कोर्ट ने कहा,"यहां यह ध्यान देने योग्य है कि 'सुजानगढ़ मास्टर प्लान 2036' में असोटा गांव को...
ऑनलाइन मनी गेम्स पर लगा प्रतिबंध, संसद में विधेयक को मिली मंजूरी
लोकसभा में पारित होने के एक दिन बाद ही राज्यसभा ने आज ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य 'ऑनलाइन मनी गेम्स' और उससे संबंधित बैंक सेवाओं, विज्ञापनों आदि की पेशकश पर प्रतिबंध लगाना है।केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस विधेयक को विचार एवं पारित करने के लिए राज्यसभा में प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने उल्लेख किया कि यह विधेयक ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के दो-तिहाई हिस्से को बढ़ावा देने और ऑनलाइन मनी गेम्स से...
कश्मीर में सड़े, अस्वास्थ्यकर मांस की बिक्री का आरोप, हाईकोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को नोटिस जारी किया
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को वकील मीर उमर द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में सड़े, अस्वास्थ्यकर और असुरक्षित मांस और पोल्ट्री उत्पादों की अनियंत्रित बिक्री पर प्रकाश डाला गया। साथ ही खाद्य सुरक्षा एवं नगरपालिका कानूनों को लागू करने में अधिकारियों की घोर लापरवाही का आरोप लगाया गया।विभिन्न विभागों के खिलाफ शीर्षक वाली यह जनहित याचिका स्थानीय समाचार पत्र के कॉलम, "मीट द मीट माफिया" की ओर ध्यान आकर्षित करती है, जिसमें कश्मीर में...
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद MP हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल कॉलेजों की अवैध संबद्धता संबंधित PIL अनिश्चित काल के लिए स्थगित की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (20 अगस्त) को लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से दायर एक जनहित याचिका की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। इस जनहित याचिका में पैरामेडिकल कोर्स प्रदान करने वाले संस्थानों की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताओं और अवैधताओं का आरोप लगाया गया था। अदालत ने यह आदेश पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में हाईकोर्ट में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने के आदेश के मद्देनजर पारित किया।इससे पहले, 16 जुलाई के एक आदेश के माध्यम से, हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल...
अगर राज्यपाल विधेयकों पर अड़े रहे तो राजनीतिक समाधान भी हैं, अदालतें समय-सीमा तय नहीं कर सकतीं: सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
सॉलिसिटर जनरल ने विधेयकों को मंज़ूरी देने से संबंधित राष्ट्रपति के संदर्भ की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर कुछ राज्यपाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर अड़े रहें तो राज्यों को न्यायिक समाधानों के बजाय राजनीतिक समाधान तलाशने होंगे।देश की हर समस्या का समाधान अदालतें नहीं हैं, यह बात सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की संविधान पीठ के समक्ष कही।यदि राज्यपाल विधेयकों...
The Indian Contract Act में अनिश्चितता के कारण करार शून्य होते हैं?
भारतीय संविदा अधिनियम 1872 के अंतर्गत धारा 29 में अनिश्चितता का समावेश किया गया है। किसी भी संविदा के लिए अनिश्चितता घातक होती है। किसी भी प्रस्ताव और स्वीकृति में निश्चिता होनी चाहिए उसका प्रतिफल निश्चित होना चाहिए उसका काल और वचन निश्चित होना चाहिए। कोई भी अनिश्चितता को नहीं माना जा सकता यदि कोई निश्चित नहीं है ऐसी परिस्थिति में कोई करार संविदा नहीं बन सकता है इसलिए यह कहा जा सकता है कि कोई भी करार को संविदा होने के लिए उसमें निश्चितता होनी चाहिए उसमें स्थायित्व होना चाहिए यदि किसी करार में...
The Indian Contract Act की धारा 28 के प्रावधान
भारत के संविधान ने किसी भी व्यक्ति को अपने संवैधानिक और सिविल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए कोर्ट का रास्ता दिया है। यदि किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के कार्य या लोप द्वारा कोई क्षति होती है तो ऐसी क्षति के परिणामस्वरूप कोर्ट के समक्ष जाकर अनुतोष प्राप्त कर सकता है। कोई भी ऐसा करार जो किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों और सिविल अधिकारों में व्यवधान पैदा करता है वह शून्य होता है।भारतीय संविदा अधिनियम 1872 के अंतर्गत धारा 28 में यह प्रावधान किया गया है कि कोई भी ऐसा करार जो किसी वैधानिक...
S.186 IPC के तहत 'बाधा' शारीरिक बल तक सीमित नहीं, बल्कि लोक सेवक के कर्तव्य निर्वहन में किसी भी प्रकार की बाधा है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (20 अगस्त) को स्पष्ट किया कि आईपीसी की धारा 186 के तहत दोषसिद्धि के लिए हिंसा या शारीरिक बल प्रयोग की आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने कहा कि किसी लोक सेवक के वैध कर्तव्य में बाधा, धमकी, भय या जानबूझकर असहयोग के माध्यम से भी डाली जा सकती है, बशर्ते कि इससे कर्तव्य निर्वहन में कठिनाई हो। कोर्ट ने कहा,"हमारा मानना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 186 में प्रयुक्त 'बाधा' शब्द केवल शारीरिक बाधा डालने तक ही सीमित नहीं है। यह आवश्यक नहीं कि यह आपराधिक बल प्रयोग का कृत्य हो। यह...
दिल्ली हाईकोर्ट ने BCI से विदेशी लॉ फर्मों के नियमों के उल्लंघन को लेकर डेंटन्स लिंक गठजोड़ पर अंतिम निर्णय रोकने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया कि वह डेंटन्स लिंक लीगल गठजोड़ के खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर अंतिम निर्णय न ले, क्योंकि इसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स फॉर रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फॉरेन लॉयर्स एंड फॉरेन लॉ फर्म्स इन इंडिया, 2022 का कथित उल्लंघन शामिल है।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने एडवोकेट अतुल शर्मा और उनकी लॉ फर्म लिंक लीगल द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जो 2023 में डेंटन्स समूह में शामिल हो...
'जीविका के लायक वेतन पाने की हकदार': गुजरात हाईकोर्ट ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारियों के बराबर मानने के निर्देश को खारिज किया, वेतन बढ़ाने का आदेश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार (20 अगस्त) को एकल न्यायाधीश के 2024 के उस आदेश को आंशिक रूप से पलट दिया जिसमें कहा गया था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (AWWs) और आंगनवाड़ी सहायिकाओं (AWHs) को राज्य या केंद्र सरकार में सिविल पदों पर कार्यरत नियमित रूप से चयनित स्थायी कर्मचारियों के समान माना जाएगा। अदालत ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारियों के समान मानने और उनके नियमितीकरण के लिए नीति बनाने के एकल न्यायाधीश के निर्देशों को खारिज कर दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के...
आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति के इच्छुक व्यक्ति से चयन से पहले नौकरी से इस्तीफा देने की उम्मीद नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने विदेश में शिक्षा के लिए इच्छुक एक छात्र को राहत प्रदान की। विदेश में अध्ययन के लिए उस छात्र की ओर से राज्य सरकार की स्वामी विवेकानंद शैक्षणिक उत्कृष्टता छात्रवृत्ति योजना के तहत किए गए आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि वह अपना कोर्स शुरू होने से एक महीने पहले अपनी नौकरी का इस्तीफा पेश करने में विफल रहा था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता से कोर्स में चयन से पहले अपनी नौकरी से इस्तीफा देने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की भूमिका पर और...



















