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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेडिकल लापरवाही मामले में डॉक्टर को राहत देने से किया इनकार, कहा- 'प्राइवेट हॉस्पिटल पैसे ऐंठने के लिए मरीजों को ATM की तरह इस्तेमाल करते हैं'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि निजी अस्पताल/नर्सिंग होम मरीजों को 'गिनी पिग/ATM' की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि उनसे पैसे ऐंठ सकें, गुरुवार को डॉक्टर द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में कथित तौर पर सर्जरी में देरी के कारण भ्रूण की मौत के संबंध में उसके खिलाफ 2008 में दर्ज एक मामले को रद्द करने की मांग की गई थी।जस्टिस प्रशांत कुमार की पीठ ने कहा कि आवेदक (डॉ. अशोक कुमार राय) सर्जरी के लिए सहमति प्राप्त करने और ऑपरेशन करने के बीच 4-5 घंटे की देरी को उचित ठहराने में विफल रहे, जिसके...
हाईकोर्ट ने हरियाणा के सभी जिलों में हीमोफीलिया के इलाज की कमी को उजागर करने वाली याचिका पर सरकार से जवाब मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार - हीमोफीलिया - का इलाज सभी जिलों में उपलब्ध नहीं है।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा,"याचिकाकर्ताओं की शिकायत यह है कि राज्य द्वारा 19.10.2012 को लिए गए नीतिगत निर्णय...जिसे 12.11.2018 को संशोधित किया गया, उसके अनुसार हरियाणा राज्य के सभी जिलों में हीमोफीलिया का इलाज उपलब्ध नहीं है।"याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि दिल्ली हाईकोर्ट मुकुल गांधी एवं अन्य...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्नी के विवाह पूर्व संबंध छिपाने के आरोप में पति की शादी रद्द करने की याचिका खारिज की, कहा-धोखाधड़ी साबित नहीं हुई
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक पति की याचिका खारिज की, जिसमें उसने अपनी पत्नी द्वारा विवाह पूर्व संबंध छिपाने के आरोप में अपनी शादी रद्द करने की मांग की थी।पति का कहना था कि शादी से पहले अलग मुलाकात में उसने पत्नी से स्पष्ट रूप से पूछा था कि क्या वह किसी रिश्ते में है, जिससे उसने इनकार कर दिया था। हालांकि, शादी के बाद एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो पोस्ट किया गया, जिसमें कथित तौर पर उसे किसी अन्य पुरुष के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस रोहित कपूर...
'बुजुर्ग माता-पिता के प्रति उपेक्षा और क्रूरता अनुच्छेद 21 का उल्लंघन': सरकार द्वारा पिता को मुआवज़ा दिए जाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेटों के आचरण की निंदा की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि वृद्ध माता-पिता के प्रति क्रूरता, उपेक्षा या परित्याग संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानपूर्वक जीवन जीने के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चों के लिए अपने वृद्ध माता-पिता की गरिमा, कल्याण और देखभाल की रक्षा करना एक पवित्र नैतिक कर्तव्य और वैधानिक दायित्व दोनों है।खंडपीठ ने आगे कहा कि जैसे-जैसे उनकी शारीरिक...
Hindu Marriage Act के क्रिमिनल प्रावधान
हिंदू विवाह अधिनियम 1955 एक सिविल अधिनियम है। इससे संबंधित प्रकरण सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के माध्यम से निपटाए जाते हैं। इस अधिनियम के सिविल होने के पश्चात भी इसमें कुछ दाण्डिक प्रावधान किए गए। इस अधिनियम की कुछ शर्तें ऐसी है जिन का उल्लंघन किया जाना इस अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय अपराध बनाया गया है।इस प्रकार के प्रावधान का उद्देश्य अधिनियम के लक्ष्य को बनाए रखना है। यदि कुछ कृत्यों को आपराधिक कृत्य नहीं बनाया जाता है तो अधिनियम का लक्ष्य भेद पाना कठिन हो सकता है।प्राचीन शास्त्रीय हिंदू विवाह...
Hindu Marriage Act की धारा 15 के प्रावधान
अधिनियम की यह धारा किसी हिंदू विवाह को इस अधिनियम के अधीन विघटन कर दिए जाने के पश्चात पुनर्विवाह का उल्लेख कर रही है। पुनर्विवाह के संबंध में यह धारा में प्रावधान करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि किस सीमा के व्यतीत हो जाने के पश्चात पक्षकार पुनर्विवाह करने में सक्षम होंगे।अधिनियम की धारा 15 दो चीजों का उल्लेख कर रही है। पहली तो यह कि विवाह विच्छेद हो जाने के पश्चात स्वतंत्र हुए विवाह के पक्षकार नवीन विवाह कर सकते हैं और इसके लिए कुछ सीमाएं उनका उल्लेख विशेष रुप से धारा के अंतर्गत किया गया।हिंदू...
सीतापुर में स्कूलों के युग्मन की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, 21 अगस्त तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीतापुर ज़िले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चल रहे स्कूलों के युग्मन की प्रक्रिया के संबंध में 21 अगस्त तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने एकल जज के 7 जुलाई, 2025 के आदेश के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। सिंगल जज ने सीतापुर में स्कूलों के युग्मन की वैधता को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया था।अपीलकर्ताओं ने तर्क दिया कि युग्मित स्कूल बच्चों के निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा...
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 28, 28A और 29: अपील, डिक्री का प्रवर्तन और बचत खंड
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) न केवल वैवाहिक संबंधों को नियंत्रित करता है बल्कि न्यायिक निर्णयों (Judicial Decisions) की अंतिम अपील (Finality of Appeals) और उनके प्रवर्तन (Enforcement) के लिए भी प्रक्रियाएँ प्रदान करता है।धारा 28 (Section 28) और धारा 28A (Section 28A) यह सुनिश्चित करती हैं कि वैवाहिक मामलों में पारित आदेशों को चुनौती दी जा सके और उन्हें प्रभावी बनाया जा सके। वहीं, धारा 29 (Section 29), एक महत्वपूर्ण बचत खंड (Savings Clause) के रूप में, अधिनियम के लागू होने...
पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 21 और 22 के अनुसार संपत्ति के नक्शे, योजनाएँ और सरकारी सर्वेक्षणों का अनिवार्य उपयोग
21. संपत्ति का विवरण और नक्शे या योजनाएँ (Description of property and maps or plans)यह धारा इस बात पर जोर देती है कि अचल संपत्ति (immovable property) से संबंधित दस्तावेजों में संपत्ति का स्पष्ट और पर्याप्त विवरण होना चाहिए ताकि उसे पहचाना जा सके। यह धोखाधड़ी को रोकने और भविष्य में संपत्ति के सीमा विवादों (boundary disputes) को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। उपधारा (1) स्पष्ट रूप से बताती है कि अचल संपत्ति से संबंधित कोई भी गैर-वसीयती दस्तावेज (non-testamentary document) पंजीकरण (registration) के...
मुस्लिम निकाह का अनुबंध: विवाह की शर्तें, विघटन के तरीके और न्यायपालिका का हस्तक्षेप
भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ (Personal Law) इस्लामी शरिया कानून (Islamic Sharia Law) पर आधारित है, लेकिन इसे भारतीय अदालतों (Indian Courts) की विभिन्न कानूनी ढाँचों (Legal Frameworks) और व्याख्याओं (Interpretations) ने भी आकार दिया है। इसका मतलब है कि इसमें धार्मिक सिद्धांतों (Religious Principles) और भारतीय कानूनी मिसालों (Legal Precedents) का मिश्रण है।मुस्लिम विवाह का सार: एक पवित्र अनुबंध (The Essence of Muslim Marriage: A Sacred Contract) मुस्लिम विवाह, जिसे "निकाह" (Nikah) के नाम से जाना...
क्या धारा 143A के तहत अंतरिम मुआवजा देना जरूरी है या अदालत का विवेकाधिकार?
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर आधारित है क्या Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 143A(1) में 'interim compensation' (अंतरिम मुआवज़ा) देने का आदेश अनिवार्य (Mandatory) है या यह सिर्फ़ अदालत का विवेकाधिकार (Discretionary) है। इस निर्णय में अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यह प्रावधान अनिवार्य नहीं, बल्कि निर्देशात्मक (Directory) है।धारा 143A की भूमिका और उद्देश्य (Purpose and Context of Section 143A)साल 2018 में अधिनियम संख्या 20 के माध्यम से धारा 143A कानून में...
पति या पत्नी के ऑफिस में अफेयर की झूठी शिकायत करना 'क्रूरता': दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक दंपति की शादी इस आधार पर भंग कर दी गई थी कि पत्नी ने अपने नियोक्ता से अपमानजनक शिकायत करके पति के साथ क्रूरता की थी।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रेणु भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि विवाह में समायोजन की आवश्यकता होती है और पक्षों को एक-दूसरे के साथ समायोजित होने में लंबा समय लग सकता है, लेकिन पति और पत्नी दोनों से एक-दूसरे के प्रति उचित सम्मान दिखाने की उम्मीद की जाती है। "एक स्वस्थ और स्वस्थ विवाह की नींव सहिष्णुता, समायोजन...
CrPC के Sec.482 के तहत पहले से मौजूद आधार पर दोबारा याचिका खारिज नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मामले में पहले से ही एक बार CrPC की धारा 482 के तहत रद्द करने की याचिका दायर हो चुकी है, तो उसी आधार पर दूसरी याचिका नहीं चलाई जा सकती, भले ही उन बिंदुओं पर पहले बहस नहीं हुई हो। दूसरी याचिका तभी मंजूर होगी जब नए हालात या परिस्थितियों में कोई बदलाव सामने आया हो।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जहां मद्रास हाईकोर्ट ने शुरू में आरोपी की पहली रद्द करने वाली याचिका (दिसंबर 2021) को खारिज कर दिया, लेकिन बाद में इसी आधार पर...
पुराने मोबाइल को नए दाम पर बेचने पर उपभोक्ता आयोग ने डीलर पर लगाया 16 हजार रुपये का जुर्माना
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, गुड़गांव ने एक नोकिया मोबाइल फोन के विक्रेता और उसके सेवा केंद्र को शिकायतकर्ता को नए फोन की कीमत पर सेकेंड हैंड फोन बेचने के लिए उत्तरदायी ठहराया है। आयोग ने फ्लिपकार्ट इंडिया को भी उत्तरदायी ठहराया क्योंकि फोन उसकी वेबसाइट के माध्यम से बेचा गया था।मामले की पृष्ठभूमि: शिकायतकर्ता ने फ्लिपकार्ट इंडियाके माध्यम से 2999 रुपये में एक नया हैंडसेट- "Nokia-6310 Dual Sim Feature Mobile TA-1400 DS" ऑर्डर किया । मोबाइल 19.06.2024 को मेसर्स धायल ट्रेडिंग ('विक्रेता')...
सुप्रीम कोर्ट ने गोलपाड़ा में तोड़फोड़ मामले में अवमानना याचिका पर असम के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा
सुप्रीम कोर्ट आज (24 जुलाई) असम सरकार के मुख्य सचिव और गोलपारा जिला अधिकारियों के खिलाफ संरचनाओं के कथित अवैध बेदखली और विध्वंस के लिए एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया।चीफ़ जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने ग्वालपाड़ा जिले के एक गांव में मकानों, स्कूलों और दुकानों को कथित रूप से अवैध रूप से गिराने के लिए असम सरकार के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली सिविल अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया। असम में ग्वालपाड़ा के हसीला बील गांव के निवासियों ने इलाके में घरों,...
राजनीतिक पार्टियों पर भी POSH Act लागू करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act) को राजनीतिक दलों पर लागू करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई है। नतीजतन, रिट याचिका में 2013 के विशाखा बनाम राजस्थान राज्य में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के निर्देशों के अनुसार एक शिकायत निवारण तंत्र के गठन की भी मांग की गई है।सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली वकील योगमाया एमजी द्वारा दायर रिट याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन करते हुए पीओएसएच...
महज मामले के MACOCA जैसे स्पेशल एक्ट के तहत आने से त्वरित सुनवाई के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
शीघ्र सुनवाई के अधिकार के सिद्धांत को पुष्ट करते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 के तहत एक आरोपी को आठ साल से अधिक की लंबी कैद का हवाला देते हुए ज़मानत पर रिहा कर दिया। जस्टिस संजीव नरूला ने कहा,“भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हमारे संवैधानिक न्यायशास्त्र में अब दृढ़ता से समाहित त्वरित सुनवाई का अधिकार कोई अमूर्त या भ्रामक सुरक्षा नहीं है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक महत्वपूर्ण पहलू है और इसे केवल इसलिए कम नहीं किया जा सकता...
सौरव गांगुली को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, प्लेयर एग्रीमेंट खत्म करने का फैसला बरकरार
कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस रवि किशन कपूर ने सौरव गांगुली के पक्ष में फैसला सुनाया। गांगुली की पुरानी मैनेजमेंट कंपनी प्रीसेप्ट टैलेंट ने जो केस किया था, उसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जो फैसला पहले मध्यस्थ (arbitrator) ने दिया था, वो ठीक और तर्कसंगत था, इसलिए उसमें दखल देने की जरूरत नहीं है।मामले की पृष्ठभूमि: यह मामला मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत दायर किया गया था, जिसमें 9 दिसंबर 2018 के एक फैसले और 8 मार्च 2019 के पूरक फैसले को चुनौती दी गई थी। सौरव गांगुली ने 22 अक्टूबर...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट और जिला न्यायपालिका के बीच 'स्वामी और दास' के रिश्ते पर कड़ी आपत्ति जताई; गलत तरीके से बर्खास्त किए गए जज को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय के एक विशेष न्यायाधीश की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए, हाईकोर्ट के जजों और जिला न्यायपालिका के जजों के बीच "खराब रिश्ते" की आलोचना की और इसे सामंत और दास के बीच के रिश्ते जैसा बताया। हाईकोर्ट के हाथों निचली अदालतों के जजों द्वारा झेले जा रहे मनोवैज्ञानिक दमन की निंदा करते हुए, न्यायालय ने न्यायिक अधिकारी को "घोर अन्याय" के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की खंडपीठ ने कहा कि एक "अहंकारी" हाईकोर्ट छोटी-छोटी...
मानहानि मामले में हाईकोर्ट की नसीहत: साकेत गोखले और लक्ष्मी पुरी आपस में सुलझाएं विवाद, अदालतों पर पहले से ही मुकदमों का बोझ'
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद साकेत गोखले से संयुक्त राष्ट्र में भारत की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पुरी द्वारा दायर मानहानि के मामले का निपटारा करने को कहा और कहा कि अदालतें पहले से ही अति व्यस्त हैं।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा कि दोनों पक्ष मामले को सुलझाने के लिए बैठक कर सकते हैं। खंडपीठ ने यह भी कहा कि गोखले ने माफी मांगी थी, जिसे पुरी ने स्वीकार कर लिया था।न्यायालय ने कहा,"आप सार्वजनिक जीवन में हैं...




















