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भीड़ के गुस्से और दरगाह बताई जा रही जगह पर लोगों के आने-जाने से ढांचा वैध साबित नहीं हो सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट ने डिमॉलिशन ऑर्डर वापस लेने से किया इनकार
भीड़ के गुस्से और 'दरगाह' बताई जा रही जगह पर लोगों के आने-जाने से ढांचा वैध साबित नहीं हो सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट ने डिमॉलिशन ऑर्डर वापस लेने से किया इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गाजी सलाउद्दीन रहमतुल्ला हूले उर्फ परदेशी बाबा ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि किसी विशेष भूमि पर केवल "भीड़ का गुस्सा" या "लोगों का आना" इस दावे के आधार पर कि वह एक दरगाह है, यह साबित नहीं कर सकता कि वह एक वैध संरचना है। इस याचिका में ठाणे में एक संरचना को गिराने के 30 मई के आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी। इस प्रकार, कोर्ट ने दरगाह को गिराने के आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया, जिसका कथित तौर पर ठाणे जिले में निजी भूमि पर नगरपालिका की मंजूरी के बिना...

GST प्राधिकरण की ओर से समन किए गए व्यक्ति का बयान उसके वकील की मौजूदगी में, ऑफिस के घंटों में दर्ज किया जाना चाहिए; CCTV रिकॉर्डिंग मांगी जा सकती है: P&H हाईकोर्ट
GST प्राधिकरण की ओर से समन किए गए व्यक्ति का बयान उसके वकील की मौजूदगी में, ऑफिस के घंटों में दर्ज किया जाना चाहिए; CCTV रिकॉर्डिंग मांगी जा सकती है: P&H हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहराया कि वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) के अधिकारियों द्वारा समन किए गए व्यक्ति का बयान आधिकारिक कार्य समय के दौरान और उनके वकील की उपस्थिति में दर्ज किया जाना चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि समन किए गए व्यक्ति को कार्यवाही की सीसीटीवी फुटेज मांगने का अधिकार है। यह घटनाक्रम 30 घंटे की अवैध हिरासत के मामले में सामने आया है, जिसमें एक व्यापारी को रात भर जोनल कार्यालय में रखा गया और उससे लंबी पूछताछ की गई।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"बॉम्बे...

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 से संबंधित प्रमुख मुद्दे
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 से संबंधित प्रमुख मुद्दे

15 अप्रैल 2014 को, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने नालसा बनाम भारत संघ (2014 INSC 275) मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें अनुच्छेद 14 की लिंग-तटस्थ व्याख्या की गई और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की कानूनी स्थिति को मान्यता दी गई। इस फैसले में ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर चल रही सामाजिक-राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं को ध्यान में रखते हुए अनुच्छेद 14, 15 और 21 की एक परिवर्तनकारी व्याख्या प्रस्तुत की गई। न्यायालय ने जीवन के हर पहलू में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों द्वारा झेले जा रहे व्यवस्थागत अन्याय और हाशिए पर...

सीनियर सिटीजन भरण-पोषण न्यायाधिकरण संपत्ति स्वामित्व के दावों पर निर्णय नहीं दे सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया
सीनियर सिटीजन भरण-पोषण न्यायाधिकरण संपत्ति स्वामित्व के दावों पर निर्णय नहीं दे सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि सीनियर सिटीजन एक्ट, 2007 की धारा 7 के अंतर्गत भरण-पोषण न्यायाधिकरण को संपत्ति स्वामित्व के दावों पर विशेष रूप से तृतीय पक्ष विवाद के मामले में निर्णय लेने का अधिकार नहीं है और इसका निर्णय सिविल कोर्ट में ही किया जाना चाहिए।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और डॉ. जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि सीनियर सिटीजन एक्ट का उद्देश्य सीनियर सिटीजन को भरण-पोषण प्रदान करना और उनका कल्याण करना है।खंडपीठ ने कहा,“इस अधिनियम के अंतर्गत गठित भरण-पोषण न्यायाधिकरणों को बच्चों...

कानून प्रवर्तन में अभियोजन पक्ष की प्रभावशीलता की आवश्यकता के विरुद्ध व्यक्तिगत मौलिक अधिकारों की रक्षा
कानून प्रवर्तन में अभियोजन पक्ष की प्रभावशीलता की आवश्यकता के विरुद्ध व्यक्तिगत मौलिक अधिकारों की रक्षा

भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली, अभियोजन में आपराधिक प्रक्रिया कानून प्रवर्तन दक्षता के विरुद्ध व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के बीच निरंतर चुनौतियों का सामना करती है, जैसा कि पंकज बंसल बनाम भारत संघ मामले में हुआ, जिसमें अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए लिखित आधार अनिवार्य किए गए हैं, भले ही इसका पूर्वव्यापी प्रभाव हो। यह मामला कर्नाटक राज्य द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर चर्चा में आया।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने...

सुप्रीम कोर्ट करेगा Delhi-NCR में BS-VI मानकों वाले वाहनों को चलने की अनुमति देने संबंधी याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट करेगा Delhi-NCR में BS-VI मानकों वाले वाहनों को चलने की अनुमति देने संबंधी याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा करने वाले वाहनों को उनकी जीवन अवधि (डीज़ल वाहनों के लिए 10 वर्ष और पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष) की परवाह किए बिना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में चलने की अनुमति देने की मांग की गई थी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने वकील द्वारा तत्काल सुनवाई के लिए आवेदन का उल्लेख करने के बाद मामले को अगले सोमवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की।वकील ने कहा कि ऐसे...

लोगों से जुड़े रहने के लिए वादियों की नब्ज़ पहचानना ज़रूरी: जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से विदाई ली
लोगों से जुड़े रहने के लिए वादियों की नब्ज़ पहचानना ज़रूरी: जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से विदाई ली

जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने झारखंड हाईकोर्ट में ट्रांसफर होने के बाद हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को विदाई दी।अपने विदाई भाषण में उन्होंने कहा कि वे बुद्धिमान व्यक्ति नहीं बल्कि मेहनती व्यक्ति थे और उनका मानना था कि आप जितनी कड़ी मेहनत करेंगे उतना ही भाग्यशाली बनेंगे।उन्होंने लोगों की वास्तविकताओं से जुड़े रहने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और कहा,"अगर आप लोगों या वादियों की नब्ज़ नहीं पहचानते तो यह संभव नहीं होता।"उन्होंने याद किया कि कैसे खबरें आईं कि महामारी के दौरान कुछ मुंशी और वकील अपना पेशा छोड़कर...

जजों की नियुक्ति के मुद्दे पर प्रशासनिक पक्ष से सरकार के साथ बातचीत जारी: चीफ जस्टिस बीआर गवई
जजों की नियुक्ति के मुद्दे पर प्रशासनिक पक्ष से सरकार के साथ बातचीत जारी: चीफ जस्टिस बीआर गवई

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपने प्रशासनिक पक्ष से केंद्र सरकार के साथ लंबित न्यायिक नियुक्तियों के मुद्दे पर बातचीत कर रहा है।चीफ जस्टिस ने यह बयान तब दिया जब सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार और एडवोकेट प्रशांत भूषण की खंडपीठ उन याचिकाओं का उल्लेख किया, जिनमें केंद्र सरकार को कॉलेजियम की सिफारिशों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। दातार ने कहा कि यह मामला आखिरी बार 5 दिसंबर, 2023 को जस्टिस एसके कौल की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया...

7/11 Mumbai Blasts: सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- बरी हुई लोग नहीं जाएंगे वापस जेल
7/11 Mumbai Blasts: सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- बरी हुई लोग नहीं जाएंगे वापस जेल

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य द्वारा दायर आपराधिक अपीलों पर नोटिस जारी किया, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी। इस फैसले में 2006 के 7/11 मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया गया था।महाराष्ट्र राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की खंडपीठ को बताया कि वह फैसले के बाद जेल से रिहा हुए आरोपियों को आत्मसमर्पण करने का निर्देश देने का आदेश नहीं मांग रहे हैं। हालांकि, उन्होंने फैसले पर रोक लगाने का...

कर्नल सोफिया कुरैशी | जस्टिस यशवंत वर्मा मामला | विकास दिव्यकीर्ति विवाद: कोर्ट्स टुडे- 23.07.25
कर्नल सोफिया कुरैशी | जस्टिस यशवंत वर्मा मामला | विकास दिव्यकीर्ति विवाद: कोर्ट्स टुडे- 23.07.25

सुप्रीम कोर्ट में कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी को लेकर बीजेपी मंत्री विजय शाह को हटाने की मांग की गई है। जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ इन-हाउस जांच रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट में विशेष बेंच सुनवाई करेगी। उधर, राजस्थान हाईकोर्ट ने दृष्टि IAS के फाउंडर विकास दिव्यकीर्ति के खिलाफ चल रही मानहानि कार्यवाही पर रोक लगा दी है। वहीं बलात्कार मामले में पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना ने ट्रायल कोर्ट में नियमित ज़मानत याचिका दाखिल की है। पूरी जानकारी के लिए वीडियो देखें-

बंगाल सरकार ने नई OBC सूची अधिसूचना पर हाईकोर्ट की रोक को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
बंगाल सरकार ने नई OBC सूची अधिसूचना पर हाईकोर्ट की रोक को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

पश्चिम बंगाल राज्य ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की नई सूची पर रोक लगाने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई के समक्ष इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिस पर चीफ जस्टिस ने इसे अगले सोमवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की।सिब्बल ने कहा,"नई सूची को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया कि हमें कानून बनाना होगा, जो सभी फैसलों के विपरीत है।"चीफ जस्टिस गवई ने...

होमगार्ड स्वयंसेवक, उनके आश्रित अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
होमगार्ड स्वयंसेवक, उनके आश्रित अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाीकोर्ट ने दो संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि होमगार्ड के आश्रित राज्य सरकार की रोजगार सहायक योजना के तहत स्थायी नौकरी का दावा नहीं कर सकते, जबकि होमगार्ड ने केवल स्वैच्छिक और अस्थायी नौकरी की है।जस्टिस सत्येन वैद्य ने कहा:"इस प्रकार, जब होमगार्ड द्वारा की गई नौकरी को पूरी तरह से अस्थायी प्रकृति का माना गया तो उनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति योजना के तहत लाभ का हकदार मानना विवेकपूर्ण नहीं होगा। होमगार्ड के आश्रित स्थायी नौकरी का दावा नहीं कर सकते, जबकि...

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने बड़े पैमाने पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी घोटाले की साजिश रचने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने बड़े पैमाने पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी घोटाले की साजिश रचने के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया

क्रिप्टो-करेंसी धोखाधड़ी के एक मामले में जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने नरेश कुमार गुलिया की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की। गुलिया पर एक बड़ा फ़र्ज़ी क्रिप्टो पोंजी घोटाला रचने का आरोप है जिसने भारत और अन्य जगहों पर कई निवेशकों को ठगा।गिरफ़्तारी से पहले ज़मानत की उनकी याचिका खारिज करते हुए जस्टिस मोहम्मद यूसुफ़ वानी ने कहा,“याचिकाकर्ता पर अपराध की आय से जुड़े होने के कारण आर्थिक प्रकृति के जघन्य अपराधों में शामिल होने का आरोप है। उस पर आरोप है कि उसने हज़ारों लोगों को उनकी मेहनत की कमाई को...

[S.37 NDPS Act] अभियुक्त के अपराध करने की संभावना कब नहीं होती? पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ज़मानत देने की पूर्व-आवश्यकता स्पष्ट की
[S.37 NDPS Act] अभियुक्त के 'अपराध करने की संभावना कब नहीं' होती? पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ज़मानत देने की पूर्व-आवश्यकता स्पष्ट की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत वाणिज्यिक मात्रा के मामले में ज़मानत देने की पूर्व-आवश्यकता स्पष्ट की है, जिसमें एक शर्त यह है कि अभियुक्त "ज़मानत पर रहते हुए कोई अपराध करने की संभावना नहीं रखता"।NDPS Act की धारा 37 में कहा गया कि वाणिज्यिक मात्रा के मामले में अभियुक्त को तब तक ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए, जब तक कि अभियुक्त दो शर्तों को पूरा न कर ले, यानी यह मानने का उचित आधार कि अभियुक्त ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और यह कि ज़मानत मिलने पर अभियुक्त कोई अपराध नहीं करेगा या अपराध करने...

गुजरात हाईकोर्ट ने कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों का निरीक्षण कर श्रमिकों के व्यावसायिक स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन करने के लिए पैनल को निर्देश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों का निरीक्षण कर श्रमिकों के व्यावसायिक स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन करने के लिए पैनल को निर्देश दिया

गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार (23 जुलाई) को अदालत द्वारा नियुक्त समिति को राज्य में कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों का नए सिरे से निरीक्षण करने का निर्देश दिया ताकि श्रमिकों की चिकित्सा स्थिति का आकलन किया जा सके और "व्यावसायिक स्वास्थ्य जोखिमों" का आकलन किया जा सके।अदालत कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य संबंधी खतरों - जैसे एस्बेस्टोसिस, सिलिकोसिस और शोर से होने वाली श्रवण हानि (NIHL) - जिन्हें व्यावसायिक स्वास्थ्य जोखिम बताया गया है, से संबंधित एक...

धोखाधड़ी से प्राप्त आदेशों पर विलय का सिद्धांत लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने विलय नियम के अपवादों की रूपरेखा प्रस्तुत की
धोखाधड़ी से प्राप्त आदेशों पर विलय का सिद्धांत लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने विलय नियम के अपवादों की रूपरेखा प्रस्तुत की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि हाईकोर्ट का कोई निर्णय, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा, धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया तो पीड़ित पक्ष सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की पुनर्विचार की मांग करने के बजाय हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करके उसे चुनौती दे सकता है।न्यायालय ने कहा कि विलय का सिद्धांत (जहा निचली अदालत का निर्णय हाईकोर्ट के आदेश के साथ विलीन हो जाता है) उस स्थिति पर लागू नहीं होगा, जहां विवादित निर्णय/आदेश धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया हो।जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस...