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मजिस्ट्रेट ने 4 साल की रेप पीड़िता का बयान आरोपी के सामने रिकॉर्ड किया: रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
4 साल की बच्ची के रेप केस के मामले में सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने पुलिस अधिकारियों और अदालतों की ओर से यौन अपराधों से निपटने में दिखाई गई असंवेदनशीलता का मुद्दा उठाया।सीनियर वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कुछ गाइडलाइंस तय करने की अपील की, ताकि पीड़िता को ट्रायल से पहले के चरण में - जिस चरण में पीड़िता को हुआ सदमा "ताज़ा" होता है - "दोबारा सदमा" न पहुँचे। रोहतगी ने कहा, "यह सदमा हर किसी की असंवेदनशीलता के कारण बढ़ रहा है।"चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य...
राज्य के अधिकारियों द्वारा अधिग्रहित वाहन से हुए हादसे के लिए निजी बीमा कंपनी ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को यह फ़ैसला दिया कि जब किसी निजी वाहन को राज्य द्वारा चुनावों जैसे सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिग्रहित किया जाता है तो दुर्घटनाओं की ज़िम्मेदारी अधिग्रहित करने वाले प्राधिकरण की होती है, न कि बीमा कंपनी की।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने कहा,"...जहां किसी वाहन को सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिग्रहित किया जाता है और अधिग्रहण की उस अवधि के दौरान कोई घटना घटित होती है तो उसकी ज़िम्मेदारी सही तौर पर अधिग्रहित करने वाले प्राधिकरण की होनी...
जांच करें कि क्या मुंबई की सड़कों पर बांग्लादेशी प्रवासी फेरी लगा रहे हैं, कानून के अनुसार कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने BMC और पुलिस को निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और मुंबई पुलिस को आदेश दिया कि वे शहर की सड़कों पर फेरी लगाने वाले सभी लोगों की पहचान का 'पूरी तरह' से सत्यापन करें। साथ ही यह भी जांच करें कि क्या इनमें कोई 'बांग्लादेशी' या अन्य 'प्रवासी' शामिल हैं जो फेरी लगाने के काम में लगे हैं। यदि ऐसे लोग मिलते हैं, तो अधिकारियों को उनके खिलाफ 'उचित' कार्रवाई करने का आदेश दिया गया।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की खंडपीठ ने महाराष्ट्र हॉकर संघ (फेरीवालों का एक संगठन) द्वारा उनके समक्ष...
सुनने और बोलने में असमर्थ रेप पीड़िता ने गवाही के लिए प्लास्टिक की गुड़िया का इस्तेमाल किया, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी
एक मूक-बधिर महिला के साथ रेप के मामले में व्यक्ति की सज़ा बरकरार रखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोई भी गवाह—जो बोल नहीं सकता, वह कोर्ट में इशारों या प्रदर्शन के तरीकों से गवाही दे सकता है। ऐसी गवाही को ठोस मौखिक सबूत माना जाएगा।मौजूदा मामले में पीड़िता—एक युवती जो जन्म से ही मूक-बधिर है—के साथ उसके एक रिश्तेदार (आरोपी) ने तब रेप किया, जब उसके माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। जब पीड़िता के माता-पिता घर लौटे तो उसने इशारों के ज़रिए उन्हें घटना के बारे में बताया और आरोपी की तरफ...
Ski and Snowboard India के मामलों को संभालने वाली एड-हॉक कमेटी भंग करने का आदेश सही: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सिंगल जज के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें Ski and Snowboard India के मामलों को संभालने के लिए एक एड-हॉक कमेटी नियुक्त करने के इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) का कदम रद्द कर दिया गया था।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीज़न बेंच ने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन द्वारा दायर अपील खारिज की, जबकि रिटर्निंग ऑफिसर की फीस के भुगतान के संबंध में विवादित आदेश में कुछ बदलाव किए।विवादित आदेश के ज़रिए सिंगल जज ने यह माना था कि Ski and Snowboard India स्वतंत्र...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद की राम नवमी रैली की अर्जी मंज़ूर की, प्रतिभागियों की संख्या 500 तक सीमित की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद को 26 मार्च, 2026 को हावड़ा में राम नवमी रैली आयोजित करने की अनुमति दी। कोर्ट ने उन्हें पिछले साल वाले ही रास्ते का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी है, लेकिन साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई शर्तें भी लगाईं।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य विश्व हिंदू परिषद द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पुलिस अधिकारियों को रैली में मदद करने के निर्देश देने की मांग की गई।याचिकाकर्ताओं ने 4 अप्रैल, 2025 के एक पिछले बेंच के आदेश का हवाला दिया, जिसमें कुछ...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़मानत मिलने के बाद अपील की सुनवाई टालने की मुक़दमेबाज़ों की 'आपत्तिजनक' चाल पर नाराज़गी जताई, कहा- बेंच या बार को दोष न दें
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक अपीलों में ज़मानत हासिल करने और उसके बाद अपने वकीलों को अंतिम सुनवाई के लिए पेश न होने का निर्देश देने की मुक़दमेबाज़ों की "आपत्तिजनक प्रवृत्ति" की कड़ी आलोचना और निंदा की।कोर्ट ने टिप्पणी की कि सेमिनारों में जब अदालतों में देरी के कारणों पर बहस होती है तो मुक़दमेबाज़ों की भूमिका को ज़्यादातर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। मुक़दमेबाज़ को बार और बेंच के हाथों में एक बेबस इंसान के तौर पर देखा जाता है। हालाँकि, असल में ऐसा नहीं है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार...
जजों के विचारों में भिन्नता क्यों होती है और यह किस हद तक होनी चाहिए?
सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन बनाम भारत संघ 1 में शीर्ष अदालत के समक्ष विचार के लिए प्राथमिक प्रश्न यह था कि क्या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए संवैधानिक रूप से वैध है। बेंच ने दो अलग-अलग लेकिन सावधानीपूर्वक तर्कपूर्ण विचारों के साथ एक विभाजित फैसला सुनाया, जिससे एक बड़ी बेंच के गठन के लिए भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश का संदर्भ मिला।जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने धारा 17ए को अपनी अवधारणा में संवैधानिक रूप से कमजोर माना और कहा कि यह प्रावधान संरक्षित लोक सेवकों का एक अस्वीकार्य...
घिसे- पिटे कॉलेजियम सिस्टम पर बहस करने की आवश्यकता; हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पर भरोसा नहीं: जस्टिस मनमोहन
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनमोहन ने शनिवार को कहा कि कॉलेजियम प्रणाली को पूरी तरह से फिर से जांच की आवश्यकता है, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसों के एक प्रणालीगत अविश्वास के रूप में वर्णित किया, जिनकी न्यायिक नियुक्तियों के लिए सिफारिशों को नियमित रूप से जांच की कई परतों के अधीन किया जाता है।पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन नेशनल कॉन्फ्रेंस 2026 में "पेंडेंसी से प्रॉम्प्ट जस्टिस: रीथिंकिंग जस्टिस डिलीवरी इन इंडियन कोर्ट्स" शीर्षक वाले सत्र में बोलते हुए, जस्टिस मनमोहन ने सवाल किया कि हाईकोर्ट...
गंगा इफ्तार पार्टी विवाद | वाराणसी कोर्ट ने सभी 14 आरोपियों की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की, कहा- 'गंभीर अपराध'
उत्तर प्रदेश के वाराणसी कोर्ट ने सोमवार को 14 लोगों की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की। बता दें, इन लोगों पर गंगा नदी के बीच में एक नाव पर 'इफ्तार' पार्टी आयोजित करके और नदी में हड्डियां व खाने का जूठा फेंककर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर ठेस पहुंचाने का आरोप है।यह आदेश वाराणसी के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) अमित कुमार यादव-III ने पारित किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह अपराध गंभीर प्रकृति का है और इसमें ज़मानत नहीं मिल सकती।ये 14 आरोपी - आज़ाद अली, आमिर कैफ़ी, दानिश सैफ़ी,...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किया नया रोस्टर, जस्टिस श्रीधरन अब सुनेंगे पारिवारिक अपीलें और सीनियर सिटीजन एक्ट से जुड़े मामले
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते बेंचों के गठन/रोस्टर की नई अधिसूचना जारी की, जो आज (सोमवार) से लागू हो गई। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के आदेश पर 19 मार्च को पारित प्रशासनिक आदेश में कई डिवीजनों और सिंगल जज बेंचों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए।यह अधिसूचना पिछले रोस्टर की जगह लेती है, जो 5 जनवरी, 2026 से लागू था।नए अधिसूचित रोस्टर में जस्टिस अतुल श्रीधरन, जस्टिस विवेक सरन के साथ बैठकर वर्ष 2021 से आगे की फैमिली कोर्ट की अपीलें सुनेंगे। साथ ही माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम से...
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की, अश्लील AI कंटेंट हटाने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा करते हुए 'जॉन डो' (John Doe) आदेश पारित किया।जस्टिस ज्योति सिंह ने कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन रिटेलर्स को उनके नाम, रूप, आवाज़ और पर्सनैलिटी से जुड़े अन्य गुणों का बिना इजाज़त इस्तेमाल करने से रोक दिया।कोर्ट ने यह आदेश सिन्हा द्वारा दायर अंतरिम रोक याचिका पर दिया, जो उन्होंने कई प्रतिवादियों (Defendants) के खिलाफ दायर अपने मुकदमे में दी थी। इन प्रतिवादियों में अमेरिका स्थित AI चैटबॉट...
देरी की माफ़ी के लिए दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता पहले जांची जानी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि देरी की माफ़ी पर विचार करते समय कोर्ट को सबसे पहले उस पक्ष द्वारा दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता (Bona Fides) की जांच करनी चाहिए, जो ऐसी माफ़ी चाहता है।एक शादी को अमान्य घोषित करने वाले फ़ैसले के ख़िलाफ़ 654 दिनों की देरी से दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की बेंच ने कहा,“कोर्ट का यह फ़र्ज़ है कि वह सबसे पहले उस पक्ष द्वारा दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता की जांच करे, जो माफ़ी चाहता है। केवल तभी, जब मुक़दमा लड़ने वाले पक्ष...
मुकदमे में मुद्दे तय होने के 18 साल बाद शुरुआती मुद्दा नहीं उठाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी मुकदमे में, ट्रायल के दौरान मुद्दे तय होने के 18 साल बाद कोई शुरुआती मुद्दा नहीं उठाया जा सकता।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने फैसला दिया,“मुकदमे की स्वीकार्यता (Maintainability) के संबंध में दलील पहली बार में ही प्लीडिंग (लिखित बयान) में उठाई जानी चाहिए; तभी ट्रायल कोर्ट ऐसी दलील पर, ऑर्डर XIV नियम 2 CPC के तहत शुरुआती मुद्दे के तौर पर उसके गुण-दोष के आधार पर फैसला दे सकता है।”वादी-प्रतिवादियों ने 2006 में एक मुकदमा दायर किया, जिसमें 21.05.1988 को राम आसरे...
सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा- दिव्यांगों के लिए कैब सेवाओं में व्हीलचेयर की सुविधा सुनिश्चित की जाए
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए देशभर में चलने वाली कैब सेवाओं को दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) के अनुकूल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि कैब में व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरणों को रखने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि दिव्यांगों की आवाजाही सुगम हो सके।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले को 24 मार्च तक स्थगित करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से सहायता मांगी।'फर्स्ट और लास्ट माइल' कनेक्टिविटी पर जोरकोर्ट एक ऐसी...
3 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म मामले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हरियाणा पुलिस की कार्यप्रणाली को बताया 'चौंकाने वाला'
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हरियाणा में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले की जांच को लेकर पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराज़गी जताई और जांच की प्रक्रिया को “चौंकाने वाला” तथा असंवेदनशील बताया।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त और जांच अधिकारी को 25 मार्च को पूरे रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी सवालसुप्रीम कोर्ट ने इस शिकायत पर भी गंभीर...
क्या अदालतें पर्सनल लॉ रद्द कर सकती हैं?
नारसु से सबरीमाला तक की एक संवैधानिक यात्रा10-03-2026 को एक परिचित संवैधानिक प्रश्न वापस आ गया। मुस्लिम विरासत कानून को चुनौती देने वाली हालिया याचिका ने सुप्रीम कोर्ट को एक भ्रामक रूप से सरल लेकिन गहराई से परिणामी सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया हैः क्या अदालतें पर्सनल लॉ की बिल्कुल भी समीक्षा कर सकती हैं?यह मुद्दा उन दावों के संदर्भ में उठता है कि कुछ विरासत नियम मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं। फिर भी, तत्काल विवाद के नीचे एक बहुत पुरानी संवैधानिक दुविधा है। भारतीय न्यायपालिका गणतंत्र...
अनुच्छेद 21 विदेशियों पर भी लागू होता है: सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानतदार न होने के कारण ज़मानत नहीं ले पा रही युगांडा की महिला को राहत दी
सुप्रीम कोर्ट ने युगांडा की महिला को राहत दी, जो नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट (NDPS Act) के तहत एक मामले में ज़मानत मिलने के बावजूद जेल में बंद थी, क्योंकि वह एक सक्षम ज़मानतदार (Solvent Surety) पेश नहीं कर पाई।यह देखते हुए कि संविधान का अनुच्छेद 21 विदेशियों पर भी लागू होता है, कोर्ट ने उसे निजी मुचलके पर रिहा करने की अनुमति दी।कोर्ट ने कहा कि जब ज़मानत का मामला बनता है तो ज़मानत बांड जमा करने या सक्षम ज़मानतदार पेश करने जैसी वित्तीय बाधाएं आरोपी की रिहाई में रुकावट नहीं...
कोलकाता ऑरेंज लाइन मेट्रो परियोजना में देरी पर सुप्रीम कोर्ट की पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार, याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोलकाता की ऑरेंज लाइन मेट्रो परियोजना (न्यू गरिया से सॉल्ट लेक सेक्टर-V) के कार्यान्वयन में देरी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये को “हठधर्मी (obstinate attitude)” बताते हुए कहा कि यह एक सार्वजनिक अवसंरचना परियोजना को अनावश्यक रूप से रोकने का प्रयास है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टीस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कोलकाता हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के आदेश को...
IBC कार्यवाही में ADAG कंपनियों के खिलाफ 2983 करोड़ रुपये के दावे 26 करोड़ रुपये में निपटाए गए: ED रिपोर्ट से सुप्रीम कोर्ट का अवलोकन
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कहा कि अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की कुछ कंपनियों पर बकाया 2983 करोड़ रुपये के कर्ज को दिवाला कार्यवाही (Insolvency Proceedings) में मात्र 26 करोड़ रुपये में निपटा दिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि ये सभी अधिग्रहण 8 नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों द्वारा "प्रोजेक्ट हेल्प" के माध्यम से संभव हो पाए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप...




















