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नगर निगम वादे के बाद कब्जाधारी को अतिक्रमणकारी नहीं कह सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि नगर निगम ने किसी कब्जाधारी से यह आश्वासन देकर परिसर खाली कराया कि उसे पुनः उसी स्थान पर दुकान आवंटित की जाएगी तो बाद में निगम उस व्यक्ति को 'अवैध कब्जाधारी' या 'अतिक्रमणकारी' नहीं ठहरा सकता।जस्टिस अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने कहा,“उत्तरदायी निगम जिसने पुनः कब्जा दिलाने के वादे पर याचिकाकर्ता से परिसर खाली कराया, अब इस कार्यवाही में यह नहीं कह सकता कि याचिकाकर्ता राज्य की संपत्ति पर अवैध रूप से काबिज है या उसने अतिक्रमण किया है।”यह...
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने परवाणू–शिमला हाईवे की मरम्मत के लिए NHAI को 10 दिन का समय दिया, काम पूरा होने तक टोल वसूली रहेगी बंद
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य सरकार को परवाणू–शिमला हाईवे की मरम्मत का कार्य पूरा करने के लिए 10 दिनों की अंतिम मोहलत दी।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में कार्य पूरा हो जाता है तभी 12 नवंबर, 2025 से टोल वसूली की अनुमति दी जाएगी अन्यथा टोल वसूली निलंबित ही रहेगी।चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि सड़क की खराब स्थिति जनता की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और अब इसे किसी भी हालत में...
सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र की याचिका खारिज होने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट का निर्देश, बंगाल में तुरंत शुरू हो मनरेगा कार्य
पश्चिम बंगाल के ग्रामीण श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत कार्यों को तत्काल प्रभाव से फिर से शुरू करने का आदेश दिया।एक्टिंग चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार दोनों को निर्देश दिया कि वे पूर्व के आदेश के अनुरूप 100 दिन के कार्य योजना को तुरंत बहाल करें।अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मनरेगा जैसी वैधानिक योजना को अनिश्चित काल तक...
ट्रांज़िट बेल केवल अल्पकालिक सुरक्षा, सक्षम अदालत के अधिकार क्षेत्र में मामला पहुंचते ही प्रभाव समाप्त: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रांज़िट बेल एक सीमित अवधि के लिए दी जाने वाली अस्थायी राहत है, जिसका प्रभाव उस समय समाप्त हो जाता है जब सक्षम अदालत के अधिकार क्षेत्र में मामला आ जाता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल आरोपी को तुरंत गिरफ्तारी से बचाने के लिए होती है, न कि उसे स्थायी सुरक्षा प्रदान करने या आरोपों के गुण-दोष पर निर्णय देने के लिए।जस्टिस स्वरना कांत शर्मा की एकल पीठ ने कहा,“जब व्यक्ति इस अवसर का लाभ उठाकर सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश हो जाता है तो ट्रांज़िट बेल का प्रभाव समाप्त हो...
पीड़ित मुआवज़ा मामलों में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, सभी ट्रायल कोर्ट को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर
अपराध पीड़ितों के अधिकारों को मज़बूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सभी विशेष और सत्र न्यायालयों को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक पात्र मामले में पीड़ित मुआवज़ा के भुगतान के संबंध में स्पष्ट आदेश पारित करें।अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट्स द्वारा ऐसे निर्देश न दिए जाने के कारण पीड़ितों को मुआवज़ा प्राप्त करने में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने यह आदेश ज्योति प्रवीन खंडपासोले द्वारा दायर जनहित याचिका पर...
खाली सीटें होने के बावजूद अदालत यूनिवर्सिटी को नया काउंसलिंग राउंड कराने का आदेश नहीं दे सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वह किसी यूनिवर्सिटी को नया काउंसलिंग राउंड आयोजित करने का आदेश नहीं दे सकती, भले ही कुछ सीटें खाली रह गई हों।अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रवेश प्रक्रिया को एक निश्चित समय पर समाप्त होना चाहिए और इसे अनिश्चित काल तक जारी नहीं रखा जा सकता।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर की, जिसमें एक अभ्यर्थी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) को LLB कोर्स में एडमिशन के लिए स्पॉट राउंड-V काउंसलिंग कराने का निर्देश देने की मांग की...
तुरंत सुरक्षा न देने पर अधिकारियों पर होगी जिम्मेदारी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी नागरिक विशेषकर विवाह से जुड़े मामलों में द्वारा सुरक्षा मांगे जाने पर तुरंत सुरक्षा प्रदान नहीं की जाती तो किसी भी अनहोनी की स्थिति में संबंधित अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार ठहराए जाएंगे।जस्टिस प्रमोद गोयल की एकल पीठ ने यह टिप्पणी एक युवा दंपति की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।याचिकाकर्ताओं ने अदालत से जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा की मांग की थी, क्योंकि महिला के परिवारजन उनकी अंतरजातीय शादी से नाराज होकर उन्हें धमकी दे रहे थे।अदालत ने कहा,“यदि कोई...
दिल्ली हाईकोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल चुनाव लड़ने की वकील की याचिका खारिज की, अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने का हवाला दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वकील की याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के आगामी चुनावों में भाग लेने की अनुमति मांगी थी।जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की एकल पीठ ने एडवोकेट लोकिंदर सिंह फौगाट की याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।फौगाट ने यह आवेदन उस लंबित याचिका में दाखिल किया, जिसमें उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी प्रैक्टिस करने से रोका गया था।BCI ने साथ ही पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल को यह निर्देश...
महिला वकील से बलात्कार केस वापस लेने के दबाव के आरोप में दो न्यायिक अधिकारियों पर जांच के आदेश: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने दो न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक जांच के आदेश दिए हैं जिन पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला वकील को बलात्कार के मामले में अपनी शिकायत वापस लेने के लिए प्रभावित करने और दबाव डालने की कोशिश की।जस्टिस अमित महाजन ने यह आदेश उस समय पारित किया जब अदालत ने सीनियर वकील को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया, जिस पर 27 वर्षीय महिला वकील से बलात्कार का आरोप है।अदालत की टिप्पणीजस्टिस महाजन ने कहा,“अदालत यह भलीभांति जानती है कि इस मामले में शामिल व्यक्तियों की प्रकृति को देखते हुए...
मानेसर लैंड स्कैम: पूर्व CM हुड्डा को झटका, हाईकोर्ट ने ट्रायल रोकने की याचिका खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मानेसर भूमि घोटाला मामले में ट्रायल की कार्यवाही को रोकने की मांग की थी।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से मिली रोक हुड्डा के खिलाफ ट्रायल स्थगित करने का आधार नहीं हो सकती।जस्टिस त्रिभुवन दहिया की पीठ ने कहा,"यदि सह-आरोपियों के खिलाफ एसएलपी (विशेष अनुमति याचिकाएँ) अंततः खारिज हो जाती हैं तो उन पर अलग से आरोप तय किए जा सकते हैं। फिर उनके खिलाफ...
अस्पष्ट और तर्कहीन आदेश रद्द: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर परिषद अध्यक्ष को हटाने के फैसले पर लगाई रोक
पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत पंजाब म्युनिसिपल एक्ट 1911 की धारा 22 के तहत नगर परिषद, समाना के अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया था। कोर्ट ने इसे पूरी तरह से अस्पष्ट और तर्कहीन आदेश माना।जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने मामले को राज्य सरकार को वापस भेज दिया, ताकि वह इस तथ्य पर नए सिरे से निर्णय ले सके कि क्या जिस बैठक में याचिकाकर्ता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया, वह 1911 अधिनियम के प्रावधानों के तहत वैध रूप से...
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के 20 साल पुराने हाउसिंग प्रोजेक्ट के समाधान के लिए पूर्व हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में समिति गठित की
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा स्थित शिव कला चार्म्स प्रोजेक्ट से जुड़े लंबे समय से लंबित आवासीय विवाद की स्वतंत्र जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पंकज नकवी (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में एक एक-सदस्यीय समिति (One-Member Committee) गठित करने का निर्देश दिया है। यह मामला लगभग दो दशकों से लंबित है और इसमें सैकड़ों ऐसे घर खरीदार शामिल हैं जिन्हें गोल्फ कोर्स सहकारी आवास समिति (GCSAS) और शिव कला डेवलपर्स प्रा. लि. द्वारा विकसित इस प्रोजेक्ट में निवेश के बाद ठगा गया था।जस्टिस विक्रम...
बिना रजिस्ट्री वाला पारिवारिक समझौता बंटवारा साबित करने के लिए मान्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (6 नवंबर) को यह स्पष्ट किया कि संयुक्त परिवार की संपत्ति में किसी सहभाजनकर्ता (coparcener) द्वारा किए गए पंजीकृत परित्याग विलेख (registered relinquishment deed), जिसके तहत वह अपना हिस्सा छोड़ देता है, तुरंत प्रभाव से लागू होता है, भले ही उसे आगे लागू करने की कोई प्रक्रिया न की गई हो।अदालत ने कहा, “यदि किसी सहभाजनकर्ता ने किसी प्रतिफल (consideration) के बदले में अपने अधिकारों का परित्याग किया है, तो वह विलेख तुरंत प्रभाव से उसके अधिकार समाप्त कर देता है। इसकी वैधता किसी...
संपत्ति खरीदना कठिन: सुप्रीम कोर्ट ने भूमि रजिस्ट्रेशन में ब्लॉकचेन तकनीक अपनाने का सुझाव दिया
सुप्रीम कोर्ट ने भारत की भूमि पंजीकरण और स्वामित्व प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि देश का मौजूदा ढांचा अब भी औपनिवेशिक कानूनों — ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882, इंडियन स्टैम्प एक्ट, 1899 और रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 — पर आधारित है, जिसने भ्रम, भ्रष्टाचार, देरी और मुकदमों की भरमार पैदा की है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रेशन एक्ट केवल दस्तावेज़ का पंजीकरण करता है, स्वामित्व की गारंटी नहीं देता, जिसके कारण...
सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप : अक्टूबर, 2025
सुप्रीम कोर्ट में अक्टूबर, 2025 में क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप। अक्टूबर महीने के सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।ट्रायल कोर्ट केवल निजी गवाह के हलफनामे के आधार पर चार्जशीट में न उल्लिखित अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी ट्रायल कोर्ट को केवल निजी गवाहों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों (अफिडेविट्स) के आधार पर चार्जशीट में न उल्लिखित अतिरिक्त अपराधों का संज्ञान नहीं लेना चाहिए, बिना जांच रिकॉर्ड...
'आवारा कुत्तों की लगातार मौजूदगी जन सुरक्षा के लिए ख़तरा': सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से कुत्तों को हटाने के लिए जारी किए दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने भारत भर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी जन सुरक्षा के लिए ख़तरा बनी हुई है। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने की बार-बार होने वाली घटनाएं, खासकर शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, परिवहन केंद्रों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर, गंभीर प्रशासनिक खामियों और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के सुरक्षा के अधिकार को सुरक्षित रखने में व्यवस्थागत विफलता को उजागर करती हैं।कई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए, बेंच ने...
राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एडवोकेट शेहला चौधरी द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें भारत भर की सभी राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने की मांग की गई। इसमें रोटेशन के आधार पर कम से कम एक पदाधिकारी का पद भी शामिल है।याचिका में कहा गया,"भारतीय संविधान में लैंगिक समानता का सिद्धांत इसकी प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों और राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में निहित है। राज्य बार काउंसिलों की सदस्य न होने वाली महिला वकीलों की अनुपस्थिति में...
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावों में 'विभाजन गुणक' के इस्तेमाल पर रोक लगाई, मृत्यु के समय की आय को ध्यान में रखना अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावों के मामलों में मुआवज़े की गणना पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि 'विभाजन गुणक' पद्धति लागू नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुआवज़े की गणना केवल मृतक की मृत्यु के समय की आय के आधार पर की जानी चाहिए।कोर्ट ने कहा,"हमारा मानना है कि मुआवज़े की गणना के लिए मृत्यु की तिथि तक की आय को आधार बनाया जाना चाहिए... दूसरे शब्दों में, विभाजन गुणक मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के लिए एक विदेशी अवधारणा है। इसका उपयोग न्यायाधिकरण और/या न्यायालयों द्वारा...
"मीडिया की चर्चा के दीवाने हो गए हो": संविधान (अनुसूचित जातियाँ) आदेश 1950 को चुनौती देने वाले लॉ स्टूडेंट को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक तीसरे वर्ष के क़ानून के छात्र की याचिका को खारिज करते हुए उसे कड़ी फटकार लगाई। छात्र ने 1950 के संविधान (अनुसूचित जातियाँ) आदेश — जो राष्ट्रपति द्वारा पारित आदेश है और जिसमें अनुसूचित जातियों की सूची निर्धारित की गई है — को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता (जो स्वयं पेश हुए थे) से कहा कि पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय वे “फिजूल की याचिका” दाखिल...
क्रिकेटर मोहम्मद शमी को पत्नी की मासिक गुजारा भत्ता बढ़ाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को उनकी पत्नी द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने और अपनी बेटी के लिए गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग की।पत्नी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 1 जुलाई, 2025 और 25 अगस्त, 2025 के आदेशों को चुनौती दी, जिसमें उनके अंतरिम गुजारा भत्ता को बढ़ाकर ₹1.5 लाख प्रति माह और उनकी नाबालिग बेटी के लिए ₹2.5 लाख प्रति माह कर दिया गया था। शमी की आर्थिक स्थिति और जीवनशैली को देखते हुए यह राशि बेहद अपर्याप्त बताते हुए, जहां ने अपने लिए गुजारा भत्ता...




















