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भ्रष्टाचार मामले में पूर्व हाईकोर्ट जज निर्मल यादव को बरी किए जाने को CBI की चुनौती पर नोटिस जारी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व हाईकोर्ट जज जस्टिस निर्मल यादव और तीन अन्य को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर अपील पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें बरी किए जाने को चुनौती दी गई।चंडीगढ़ की स्पेशल CBI कोर्ट ने इस साल अप्रैल में जस्टिस निर्मल यादव को 2008 के भ्रष्टाचार मामले में बरी कर दिया। 89 पृष्ठों के अपने फैसले में स्पेशल कोर्ट ने CBI के इस दावे को खारिज कर दिया कि जज ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सेवा करते हुए 15 लाख रुपये नकद प्राप्त किए।जस्टिस मंजरी...
2008 Malegaon Blast: प्रज्ञा ठाकुर और अन्य आरोपियों को बरी करने के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती
2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले के पीड़ितों ने स्पेशल कोर्ट के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसमें पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था।निसार अहमद सैय्यद बिलाल द्वारा दायर अपील पर जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रंजीतसिंह भोंसले की खंडपीठ 15 सितंबर को सुनवाई कर सकती है।अन्य पीड़ितों शेख लियाकत मोहिउद्दीन, शेख इशाक शेख यूसुफ, उस्मान खान ऐनुल्लाह खान, मुश्ताक शाह हारून शाह और शेख इब्राहिम शेख...
सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर रिज़र्व सफ़ारी पर समिति गठित की | मौजूदा टाइगर सफ़ारी को जारी रखने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) को गोवा के महादेई वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के क्षेत्रों को बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने के मुद्दे की जांच करने और छह सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने गोवा राज्य को उन क्षेत्रों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया, जिन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट ने बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने का निर्देश...
PC-PNDT मामलों में बरी किए गए लोगों को चुनौती न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि राज्य गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम के मामलों में अपराधियों को बरी किए जाने के खिलाफ अपील क्यों नहीं दायर कर रहे हैं।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) नियम, 1966 के नियम 18ए(5)(vi) का कड़ाई से पालन करने का निर्देश देने की मांग की गई। यह नियम बरी किए जाने के आदेश के मामले में हाईकोर्ट में अपील, पुनर्विचार या अन्य कार्यवाही के लिए...
राष्ट्रपति संदर्भ: कर्नाटक, केरल और पंजाब ने सुप्रीम कोर्ट में कहा– राज्यपाल को बिल अनिश्चितकाल तक रोकने का अधिकार नहीं
कर्नाटक, केरल और पंजाब राज्यों ने आज राष्ट्रपति को संदर्भित मामले में अपनी दलीलें पूरी कीं, जो बिलों पर सहमति (assent) देने की समयसीमा से जुड़ा है। राज्यों ने कहा कि अनुच्छेद 200 के तहत संवैधानिक ढांचे में राज्यपाल को कोई विवेकाधिकार (discretion) नहीं दिया गया है।सीनियर एडवोकेट के.के. वेणुगोपाल (केरल की ओर से) ने जोर देकर कहा कि राज्यपाल को इस तरह विवेकाधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह मनी बिल तक को रोक दें। वहीं, कर्नाटक की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि राष्ट्रपति और...
The Indian Contract Act में Bailment के Contract में डिलीवरी का तरीका
कब्जे में परिवर्तन होना चाहिए मात्र अभिरक्षा से ही Bailment का सृजन नहीं हो जाता है। इस संबंध में इस धारा के स्पष्टीकरण पर भी प्रकाश डालना चाहिए। स्पष्टीकरण में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है यदि वह व्यक्ति जो किसी अन्य माल पर पहले से ही कब्जा रखता है उसका उपनिहिती के रूप में करने की संविदा करता है तो वह एतद्द्वारा उपनिहिती हो जाता है और माल का स्वामी उसका उपनिधाता हो जाता है।इसे एक उदाहरण की सहायता से भली प्रकार समझा जा सकता है। यदि क अपनी कार ख को बेच देता है परंतु ख, क को कहता है कि वह 6 माह उसे...
The Indian Contract Act में Bailment का Contract
इस एक्ट की धारा 148 के अंतर्गत उपनिधान, उपनिहिती और उपनिधाता के शब्द की परिभाषा प्रस्तुत की गई है। इस धारा में Bailment के संदर्भ में विस्तृत उल्लेख कर दिया गया है। Bailment में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किसी प्रयोजन हेतु माल का प्रदान करना होता है इससे संबंधित शर्त विवक्षित अथवा अभिव्यक्त होती है। यह एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किसी प्रयोजन के लिए इस संविदा के अंतर्गत माल का प्रदान करना है की उक्त प्रायोजन के पूरा होने पर वह माल प्रदान करने वाले व्यक्ति को वापस कर दिया जाएगा अथवा...
आयु-छूट लेने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार सामान्य श्रेणी सीटों पर नहीं जा सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितम्बर) को कहा कि आरक्षित वर्ग के वे उम्मीदवार, जो आरक्षण श्रेणी में आयु-छूट लेकर आवेदन करते हैं, उन्हें बाद में अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी की रिक्तियों में चयन के लिए नहीं माना जा सकता, यदि भर्ती नियम ऐसे स्थानांतरण (migration) को स्पष्ट रूप से रोकते हैं।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह मामला सुना, जो स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की कॉन्स्टेबल (GD) भर्ती से जुड़ा था। इसमें आयु सीमा 18–23 वर्ष तय थी और ओबीसी उम्मीदवारों को 3 साल की छूट दी गई...
झूठे विवाह वादे पर बने संबंधों के मामलों में आरोपी की नीयत देखना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि शादी का वादा करने के बाद आपसी सहमति से बने यौन संबंध, और शुरुआत से ही बुरी नीयत से झूठा वादा करके बनाए गए यौन संबंध — दोनों में फर्क है।कोर्ट ने कहा, "बलात्कार और सहमति से बने यौन संबंधों में स्पष्ट अंतर है। जब मामला शादी के वादे का हो, तो अदालत को यह बहुत सावधानी से देखना होगा कि आरोपी सच में पीड़िता से शादी करना चाहता था या फिर उसकी नीयत शुरू से ही गलत थी और उसने केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए झूठा वादा किया था। बाद वाली स्थिति धोखाधड़ी या छल...
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने को कहा
नौकरशाहों को भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा तय करने की अनुमति देने वाले प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के कुछ प्रावधानों पर "पुनर्विचार" करने को कहा।अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि 1956 का अधिनियम मुआवजे का निर्णय कार्यपालिका पर छोड़ देता है, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम जैसे अन्य कानूनों के तहत अधिग्रहण के लिए न्यायिक निगरानी की आवश्यकता होती है। निष्पक्षता के महत्व पर ज़ोर देते हुए यह सुझाव दिया गया कि NHAI अधिग्रहण के मामले में मुआवजे का...
गलती से पूर्व पति का नाम या वैवाहिक स्थिति भरने पर पासपोर्ट रद्द नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि पासपोर्ट आवेदन में वैवाहिक स्थिति या पति/पत्नी का नाम गलत तरीके से भरना, अपने आप में पासपोर्ट को जब्त या रद्द करने का कारण नहीं बनता है, जैसा कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 10(3)(b) में वर्णित है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह की अनजाने में हुई त्रुटियाँ या चूक — चाहे वह आवेदनकर्ता द्वारा हो या किसी ने उसके behalf में फॉर्म भरा हो — कानून के तहत "मिश्रफ" (मंशा से की गई गलती) के दायरे में नहीं आतीं और इन्हें पासपोर्ट जब्त करने या रद्द करने की सजा के...
SRM यूनिवर्सिटी में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ जांच की मांग
इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें यूपी पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। आरोप है कि बाराबंकी जिले में श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी द्वारा चलाए जा रहे अमान्यता प्राप्त लॉ कोर्स के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध कर रहे विधि छात्रों के साथ पुलिस ने बेहद बर्बरता से पेश आया।एडवोकेट आशीष कुमार सिंह ने याचिका में मांग की है कि 4 सितंबर को हुई इस घटना की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग बनाया जाए। याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने...
सुप्रीम कोर्ट के जजों ने बाढ़ राहत कोष में 25,000 रुपये प्रत्येक देने का निर्णय लिया
देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में 25,000 रुपये प्रत्येक देने का निर्णय लिया है।चीफ़ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के जजों ने प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और जल्द राहत, पुनर्वास और सामान्य स्थिति बहाल होने की आशा जताई। हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद हिमाचल प्रदेश और पंजाब के कई हिस्से बाढ़ संकट से जूझ रहे हैं।
धर्मस्थल मामला: कर्नाटक हाईकोर्ट ने वकील को भेजे समन पर रोक लगाई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वे उस अधिवक्ता के खिलाफ कोई कठोर कदम न उठाएँ, जो एक महिला का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उस महिला ने दावा किया था कि उसकी बेटी 2003 में धर्मस्थल से लापता हो गई थी। वकील ने इस मामले की जाँच में हुई प्रगति के बारे में प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी।हाईकोर्ट ने वकील को भेजे गए 1 सितंबर के समन को अगली सुनवाई तक स्थगित रखा है। जस्टिस सचिन शंकर मागडुम ने आदेश में कहा कि फिलहाल जाँच एजेंसी कोई कठोर कार्रवाई न करे। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला...
आतंकी खतरे का हवाला देकर ड्यूटी से गैरहाज़िर रहना सही नहीं: जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई पुलिसकर्मी केवल आतंकवादी खतरे का हवाला देकर 19 साल तक ड्यूटी से गायब रहने को सही नहीं ठहरा सकता। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक अनुपस्थिति, वह भी बिना किसी ठोस सबूत के, गंभीर कदाचार है और पुलिस बल के सदस्य के लिए अनुचित आचरण है।चीफ़ जस्टिस अरुण पाली और जस्टिस रजनेश ओसवाल की खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता आतंकी खतरे का दावा साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर सका। कई नोटिस और आदेश मिलने के बावजूद उसने ड्यूटी जॉइन नहीं की। कोर्ट ने सख्त...
न्याय देने में इंसानी सोच की जगह AI नहीं ले सकता: जस्टिस विक्रम नाथ
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने हाल ही में कहा कि भविष्य में न्याय प्रणाली को सच्ची जानकारी, मीडिया के प्रभाव और तकनीक-आधारित निष्पक्षता के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा देनी होगी।उन्होंने कहा,“अगर पिछली सदी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की लड़ाई की थी, तो आने वाली सदी सच्ची अभिव्यक्ति (True Speech) की लड़ाई की होगी — यानी ऐसी जानकारी जो सही, नैतिक और गरिमा का सम्मान करने वाली हो। अगर पिछली सदी न्याय तक पहुँच की जद्दोजहद की थी, तो आने वाली सदी तकनीक-प्रधान न्याय में निष्पक्षता की होगी। और अगर...
OTS स्कीम समयबद्ध, उधारकर्ता को विस्तार मांगने का कोई अधिकार नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए यह साफ़ कर दिया कि हर वन टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम समयबद्ध होती है और उधारकर्ता को इसकी समयसीमा बढ़ाने का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस समय की, जब M/s Jaharveer Maharaj Agro Pvt. Ltd. द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की जा रही थी।याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2017 में पंजाब नेशनल बैंक से लोन लिया था और खाते एनपीए घोषित हो गए। इसके बाद उन्होंने OTS स्कीम का लाभ...
तलाक केस के बाद भरण-पोषण मांगने पर पत्नी का हक नहीं छीना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी को केवल इसलिए भरण-पोषण (Maintenance) से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसने यह राहत पति द्वारा तलाक की याचिका दायर करने के बाद ही मांगी हो।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हर्ष वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ पत्नी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पारिवारिक अदालत ने उसे भरण-पोषण भत्ता (maintenance pendente lite) देने से इनकार कर दिया था, हालांकि बच्चे के लिए 25,000 रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। पति-पत्नी का विवाह 2009 में हुआ था। विवाह से पहले पत्नी लगभग...
भविष्य की कार्रवाई के बहाने पेंशन रोकी नहीं जा सकती: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पूर्व कर्मचारी की पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को इस आधार पर अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता कि भविष्य में कभी उस पर अनुशासनात्मक कार्यवाही हो सकती है।चीफ़ जस्टिस विभु बाखरु और जस्टिस सी. एम. जोशी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए बंगलोर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज कर दी। कंपनी ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी को कर्मचारी मालती बी को सेवानिवृत्ति लाभ—मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति अनुग्रह राशि, अवकाश नकदीकरण का लाभ और अन्य...



















