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2008 मालेगांव विस्फोट: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीड़ित परिवारों की अपील पर उठाए सवाल, पूछा- क्या आप गवाह थे?
2008 मालेगांव विस्फोट: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीड़ित परिवारों की अपील पर उठाए सवाल, पूछा- 'क्या आप गवाह थे?'

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2008 मालेगांव विस्फोट मामले में बरी किए गए पूर्व BJP सांसद प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को स्पष्ट किया कि वह याचिका पर तभी विचार करेगा, जब अपीलकर्ता मुकदमे के दौरान गवाह रहे हों।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की खंडपीठ ने अपीलकर्ताओं से पूछा,"क्या आप में से कोई मुकदमे में गवाह था? हमें दिखाएं कि क्या आप गवाह थे?"यह अपील निसार अहमद सैय्यद बिलाल और अन्य लोगों ने दायर की, जिनके परिवार...

सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार पर अधिकारियों के खिलाफ आरोपों वाले स्वतः संज्ञान मामले में हाईकोर्ट से नरमी बरतने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार पर अधिकारियों के खिलाफ आरोपों वाले स्वतः संज्ञान मामले में हाईकोर्ट से नरमी बरतने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने कल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से पत्रकार प्रदीप शर्मा से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले में नरमी बरतने को कहा। मामला 2023 में दिए गए आश्वासन के बाद भी शर्मा द्वारा 2023-25 के बीच 200 से अधिक ईमेल लिखने से जुड़ा है, जिनमें अधिकारियों और न्यायाधीशों पर आरोप लगाए गए थे।सिनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने बताया कि आदेश के बाद से शर्मा ने कोई सार्वजनिक पोस्ट नहीं की, केवल ईमेल भेजे। इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि ईमेल गोपनीय नहीं रह सकते और सुझाव दिया कि आगे से यदि शिकायत हो तो सीलबंद...

UPSC परीक्षाओं में हीमोफीलिया से पीड़ितों को दिव्यांगजन कोटे से क्यों बाहर रखा गया? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा
UPSC परीक्षाओं में हीमोफीलिया से पीड़ितों को दिव्यांगजन कोटे से क्यों बाहर रखा गया? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हीमोफीलिया से पीड़ित व्यक्तियों को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में बैठने से बाहर रखने से संबंधित मामले की सुनवाई करेगा।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ हीमोफीलिया से पीड़ित UPSC उम्मीदवार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट जयना कोठारी ने कहा कि यद्यपि हीमोफीलिया दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की अनुसूची के तहत प्रदान की गई मानक दिव्यांगता है। हालांकि, यह मानक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को...

दिल्ली हाईकोर्ट ने संजू वर्मा की याचिका खारिज की, शमा मोहम्मद द्वारा दायर मानहानि केस जारी रहेगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने संजू वर्मा की याचिका खारिज की, शमा मोहम्मद द्वारा दायर मानहानि केस जारी रहेगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने BJP प्रवक्ता संजू वर्मा द्वारा दायर आवेदन को खारिज कर दिया। इस आवेदन में उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे को रद्द करने की मांग की थी।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि मुकदमे को खारिज करने का कोई आधार नहीं है। वहीं वर्मा द्वारा उठाए गए मुद्दे ऐसे हैं, जिनकी जांच सुनवाई के दौरान की जानी चाहिए, न कि मुकदमे को खारिज करने के आधार पर।वर्मा ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि शमा मोहम्मद को मुकदमा दायर करने का कोई कारण नहीं है,...

जब्त मादक पदार्थ की वीडियो रिकॉर्डिंग ट्रांसक्रिप्ट के बिना भी सबूत के तौर पर मान्य: सुप्रीम कोर्ट
जब्त मादक पदार्थ की वीडियो रिकॉर्डिंग ट्रांसक्रिप्ट के बिना भी सबूत के तौर पर मान्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब्त मादक पदार्थ की वीडियो रिकॉर्डिंग ट्रांसक्रिप्ट के बिना भी सबूत मानी जाएगी, बशर्ते भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के तहत वैध इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र प्रस्तुत हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि वीडियो को हर गवाह की गवाही के दौरान चलाना आवश्यक नहीं है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द किया जिसमें एनडीपीएस मामले में सिर्फ इसलिए पुनःविचारण का निर्देश दिया गया था क्योंकि वीडियो गवाहों के सामने नहीं चलाया गया और न ही उसका...

सुप्रीम कोर्ट ने खजुराहो मंदिर में खंडित विष्णु प्रतिमा की मरम्मत संबंधी याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने खजुराहो मंदिर में खंडित विष्णु प्रतिमा की मरम्मत संबंधी याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने आज मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर समूह स्थित जवारी मंदिर में 7 फीट ऊंची खंडित भगवान विष्णु की प्रतिमा के पुनर्निर्माण की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।चीफी जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खण्डपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई की शुरुआत में ही CJI ने याचिका को 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' करार देते हुए कहा – “यह पूरी तरह से पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन है… जाओ और खुद भगवान से कहो कुछ करने के लिए। अगर आप कह रहे हैं कि आप भगवान विष्णु के प्रबल भक्त हैं, तो...

एक धर्म के व्यक्ति का दूसरे धर्म के त्योहारों में भाग लेना किसी भी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
एक धर्म के व्यक्ति का दूसरे धर्म के त्योहारों में भाग लेना किसी भी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि "किसी विशेष धर्म या आस्था को मानने वाले व्यक्ति का दूसरे धर्म के त्योहारों में भाग लेना भारत के संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।"यह टिप्पणी मैसूर में दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए मुख्य अतिथि के रूप में बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को राज्य द्वारा आमंत्रित किए जाने को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज करते हुए की गई।चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सी. एम. जोशी की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत याचिकाकर्ताओं के धर्म का पालन और...

सुविधाओं की कमी के कारण रिटायर जज ट्रिब्यूनल में नियुक्तियां लेने से इनकार कर रहे हैं, इसके लिए केंद्र सरकार दोषी: सुप्रीम कोर्ट
सुविधाओं की कमी के कारण रिटायर जज ट्रिब्यूनल में नियुक्तियां लेने से इनकार कर रहे हैं, इसके लिए केंद्र सरकार दोषी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर) को कई रिटायर हाईकोर्ट जजों द्वारा रिटायरमेंट के बाद ट्रिब्यूनल के सदस्य के रूप में नियुक्ति स्वीकार करने में अनिच्छा व्यक्त करने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि रिटायर जजों की यह अनिच्छा ट्रिब्यूनल में उचित सुविधाओं के अभाव के कारण है, जो केंद्र सरकार की गलती है।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के न्यायिक सदस्यों के रूप में नियुक्तियों को अस्वीकार करने वाले रिटायर जजों के मुद्दे पर विचार कर...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को लोकपाल से बाहर रखने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को लोकपाल से बाहर रखने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम 1975 के उन प्रावधानों को चुनौती दी थी जो मुख्यमंत्री को लोकायुक्त के दायरे से बाहर रखते हैं।अमिताभ ठाकुर ने इस प्रावधान [अधिनियम की धारा 2(g)] को बेहद मनमाना, अनुचित, अर्थहीन और खतरनाक" करार दिया, क्योंकि यह मुख्यमंत्री को किसी भी आरोप और शिकायत से बचाता है। ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा कि यह प्रावधान मुख्यमंत्री को अपने पद का दुरुपयोग कर किसी भी...

सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर रोक की मांग वाली याचिका पर राज्यों से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर रोक की मांग वाली याचिका पर राज्यों से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर) को विभिन्न राज्यों को उन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा, जिनमें धार्मिक धर्मांतरण से संबंधित उनके कानूनों पर रोक लगाने की मांग की गई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक के धर्मांतरण से संबंधित कानूनों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।खंडपीठ ने राज्यों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए...

बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: स्वीकृत पदों की अनुपलब्धता के कारण श्रमिकों को स्थायी दर्ज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता
बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: स्वीकृत पदों की अनुपलब्धता के कारण श्रमिकों को स्थायी दर्ज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जिन श्रमिकों ने लगातार सेवा की आवश्यक अवधि पूरी कर ली है, उन्हें केवल इस आधार पर स्थायी दर्जा देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ऐसा इनकार श्रमिकों का लगातार शोषण होगा, जो कल्याणकारी कानून और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के 22 वन श्रमिकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। ये श्रमिक 2003 से चौकीदार, माली, रसोइया और जंगली जानवरों...

राजस्थान हाईकोर्ट का अहम कदम: केस से जुड़ी सभी जानकारी के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने पर नोटिस जारी
राजस्थान हाईकोर्ट का अहम कदम: केस से जुड़ी सभी जानकारी के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने पर नोटिस जारी

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में हाईकोर्ट के लिए एक आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने की मांग की गई ताकि केस लिस्ट, ई-फाइलिंग विवरण, आदेश/निर्णय आदि से संबंधित सभी जानकारी एक ही जगह पर मिल सके।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने प्रैक्टिसिंग वकील द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता ने बताया कि 2023 से हाईकोर्ट ने टेलीग्राम चैनल पर केस लिस्ट अपलोड करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा, कोर्ट की ई-कोर्ट्स वेबसाइट...

दिल्ली हाईकोर्ट ने बाढ़ प्रभावित फसलों की देखभाल के लिए हत्या के दोषी की पैरोल बढ़ाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने बाढ़ प्रभावित फसलों की देखभाल के लिए हत्या के दोषी की पैरोल बढ़ाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित अपनी फसलों की देखभाल करने के लिए पैरोल की अवधि चार सप्ताह के लिए बढ़ाई।जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ ने प्रवीण राणा नामक दोषी को पहले कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों पर ही चार सप्ताह की पैरोल दी।कोर्ट ने कहा,"याचिकाकर्ता की निरंतर उपस्थिति न केवल अप्रत्याशित है बल्कि भगवान के कार्य (भारी बारिश) के कारण भी आवश्यक है। यह उसके परिवार की आजीविका का एकमात्र स्रोत है, जिस पर उसकी विधवा मां और दो नाबालिग बच्चे पूरी तरह से निर्भर हैं। पानी कम...

राजस्थान की जोजरी नदी में औद्योगिक प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
राजस्थान की जोजरी नदी में औद्योगिक प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी नदी के संबंध में स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि औद्योगिक अपशिष्ट, मुख्यतः कारखानों से, नदी में बहाया जा रहा है। इससे सैकड़ों गाँव प्रभावित हो रहे हैं और पीने का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने का अनुरोध किया और आदेश दिया,"उचित आदेश के लिए मामले को माननीय चीफ जस्टिस के समक्ष रखा जाए।"गौरतलब है कि इसी खंडपीठ ने हाल ही में राजस्थान राज्य में हिरासत में मौतों की ओर इशारा करने वाली...

स्वतंत्रता बनाम पदानुक्रम: हाईकोर्ट में प्रत्यक्ष अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर बहस
स्वतंत्रता बनाम पदानुक्रम: हाईकोर्ट में प्रत्यक्ष अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर बहस

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केरल हाईकोर्ट की उन अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर विचार करने के लिए आलोचना की है जो बिना सत्र न्यायालय में जाए, सीधे उसके समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं ।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि यद्यपि सत्र न्यायालय और हाईकोर्ट को बीएनएसएस की धारा 482 (पूर्व में, धारा 438 सीआरपीसी) के तहत गिरफ्तारी-पूर्व ज़मानत (अग्रिम ज़मानत) के लिए प्रार्थना पर विचार करने का समवर्ती क्षेत्राधिकार प्रदान किया गया है, न्यायालयों के पदानुक्रम की मांग है कि ऐसे...