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कर्नाटक हाईकोर्ट ने लॉन्ड्रिंग मामले में वकील को भेजे ED समन पर लगाई रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा एडवोकेट अनिल गौड़ा को भेजे गए समन पर अंतरिम रोक लगाई। यह मामला अवैध ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाज़ी रैकेट से जुड़ा है जिसमें कांग्रेस विधायक के.सी. वीरेंद्र का नाम भी सामने आया है।जस्टिस सचिन शंकर मागदुम ने आदेश पारित करते हुए ED को निर्देश दिया कि वह आगे की कोई कार्यवाही न करे और न ही वकील के खिलाफ किसी प्रकार की ज़बरदस्ती की कार्रवाई करे।अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि प्रारंभिक दृष्टि से यह माना जाता है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट यह तय नहीं...
स्वतंत्रता बनाम पदानुक्रम: हाईकोर्ट में प्रत्यक्ष अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर बहस
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केरल हाईकोर्ट की उन अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर विचार करने के लिए आलोचना की है जो बिना सत्र न्यायालय में जाए, सीधे उसके समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं ।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि यद्यपि सत्र न्यायालय और हाईकोर्ट को बीएनएसएस की धारा 482 (पूर्व में, धारा 438 सीआरपीसी) के तहत गिरफ्तारी-पूर्व ज़मानत (अग्रिम ज़मानत) के लिए प्रार्थना पर विचार करने का समवर्ती क्षेत्राधिकार प्रदान किया गया है, न्यायालयों के पदानुक्रम की मांग है कि ऐसे...
NDPS Act | जब्ती और सैंपल-ड्राविंग धारा 52ए के अनुसार विधिवत दर्ज हो तो ट्रायल में प्रतिबंधित पदार्थ का न होना घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के तहत मामलों में अभियोजन पक्ष का मामला केवल इसलिए विफल नहीं हो जाता, क्योंकि जब्त प्रतिबंधित पदार्थ अदालत में पेश नहीं किया गया, बशर्ते कि सूची और सैंपल-ड्राविंग रिकॉर्ड विधिवत तैयार किए गए हों और NDPS Act की धारा 52ए के अनुपालन में रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हों।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें NDPS मामले में केवल...
भीमा कोरेगांव मामला मामले में महेश राउत को मिली अंतरिम ज़मानत
सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले के आरोपी महेश राउत को मेडिकल आधार पर 6 हफ़्तों की अंतरिम ज़मानत दी। महेश राउत को कथित माओवादी संबंधों के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत गिरफ़्तार किया गया। जून 2018 में गिरफ़्तारी के बाद से ही वह हिरासत में है।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट सी.यू. सिंह द्वारा राउत को रूमेटाइड अर्थराइटिस (र्यूमेटॉइड अर्थराइटिस) से पीड़ित होने का ज़िक्र किए जाने के बाद ज़मानत दी। यह...
सुप्रीम कोर्ट ने 'अवैध फायरआर्म्स' मामले में एक्सपर्ट कमेटी से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सुझावों पर विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिना लाइसेंस वाले फायरआर्म्स से संबंधित मामले का निपटारा कर दिया। उसे बताया गया कि केंद्र सरकार ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया ताकि देश भर में अवैध आग्नेयास्त्रों और वैध आग्नेयास्त्रों के अनधिकृत उपयोग की समस्या से निपटने और उसे रोकने के लिए योजना सुझाई जा सके।पिछले साल नवंबर में अदालत ने प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में समिति का गठन किया, क्योंकि उसे शस्त्र अधिनियम, 1959 और शस्त्र...
फैशन और परंपरा का मिलन: भारतीय कोल्हापुरी शिल्पकला के संरक्षण में बौद्धिक संपदा की कमी
कला और उसके रचनाकारों की सच्ची समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि उत्साही और नवोन्मेषी आविष्कारकों और कलाकारों को उनके काम के लिए उचित मान्यता और संरक्षण मिले। इसका एक ज्वलंत उदाहरण कोल्हापुरी चप्पलों की कहानी है।ये हस्तनिर्मित चमड़े की चप्पलें भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रही हैं। आमतौर पर भारतीय बाजारों में 1000 रुपये से ज़्यादा की कीमत पर नहीं बिकतीं। फिर भी, हाल ही में इतालवी लक्ज़री ब्रांड प्राडा ने इन्हें 1-1.2 लाख रुपये में सूचीबद्ध किया है, जबकि उन कारीगरों को कोई प्रतिफल, मुआवजा या...
केवल FIR दर्ज होना पदोन्नति रोकने का आधार नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने कहा कि केवल FIR दर्ज होना आपराधिक कार्यवाही का लंबित होना नहीं माना जाता है और पदोन्नति केवल आरोप-पत्र दाखिल होने या आरोप तय होने के बाद ही रोकी जा सकती है।पृष्ठभूमि तथ्यसेवा के दौरान, याचिकाकर्ता के पक्ष में जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) के पद पर पदोन्नति के लिए दिनांक 25.05.2022 को पदोन्नति आदेश जारी किया गया। हालांकि, प्रतिवादियों द्वारा इस आधार पर पदोन्नति लागू नहीं की गई कि याचिकाकर्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई...
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने DC और SSP के कब्जे वाले गेस्ट हाउस जिला जजों को आवंटित करने का निर्देश दिया
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पंजाब के मलेरकोटला में उपायुक्त (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के कब्जे वाले सरकारी गेस्ट हाउस खाली करके जिला जज को आधिकारिक और आवासीय उपयोग के लिए आवंटित किए जाएं।पंजाब सरकार ने 2021 में मलेरकोटला को ज़िला घोषित किया था। उसके बाद 2023 में वहां सेशन कोर्ट का गठन किया गया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि संबंधित अधिसूचना के अनुसार निर्धारित मानकों के अनुरूप कोई आवासीय सुविधा उपलब्ध नहीं है, जो जिला एंड सेशन जज, एडिशनल जिला...
बिना आरोप पत्र दाखिल किए आपराधिक मामला लंबित होने पर पदोन्नति से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आपराधिक मामले का लंबित होना, जिसमें आरोप पत्र दाखिल न किया गया हो, विभागीय जांच में सभी आरोपों से बरी हुए कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:"निश्चित रूप से याचिकाकर्ता को कोई आरोप पत्र नहीं दिया गया। हालांकि, संबंधित मजिस्ट्रेट को आगे की जांच का आदेश देने का पूरा अधिकार है। हालांकि, ऐसा कोई भी तथ्य, यदि कोई हो, प्रतिवादियों को उच्च पद पर पदोन्नति से वंचित करने का आधार नहीं बन सकता, खासकर जब आरोप पत्र अभी तक तय...
धर्मस्थल दफ़नाने का मामला: हाईकोर्ट ने निवासियों द्वारा चिन्हित स्थलों पर निरीक्षण और उत्खनन की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को धर्मस्थल दफ़नाने के मामलों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) को शहर के दो निवासियों की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने चिन्हित स्थलों पर शवों का निरीक्षण और उत्खनन करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई करने के उनके अनुरोध पर विचार करने का अनुरोध किया।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने पुरंदर गौड़ा और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर SIT को नोटिस जारी किया और कहा,"याचिकाकर्ताओं को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, क्योंकि अपराध संख्या 39/2025 (एक सफाई कर्मचारी द्वारा दर्ज की गई...
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम के खिलाफ रिट याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के कोंटाई रहमानिया हाई मदरसा की प्रबंध समिति द्वारा दायर रिट याचिका को जुर्माने के साथ खारिज किया। इस याचिका में पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम, 2008 को बरकरार रखने वाले अपने 2020 के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने कहा कि याचिका "पूरी तरह से गलत धारणा" वाली है और याचिकाकर्ता पर ₹1,00,000 का जुर्माना लगाया।अदालत ने कहा,"रिट याचिका पूरी तरह से गलत धारणा वाली है। इसलिए इसे ₹1,00,000 के...
मणिपुर हिंसा के पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश का आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने NIA से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश में शामिल होने के आरोपी मोइरंगथेम आनंद सिंह की याचिका पर नोटिस जारी किया। सिंह ने मुकदमे में देरी और जमानत न मिलने का आरोप लगाया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और मुकदमे की स्थिति जानने के लिए NIA से जवाब मांगा।खंडपीठ ने आदेश दिया,"केवल मुकदमे की स्थिति जानने के लिए नोटिस जारी करें।"याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि आरोप-पत्र दाखिल होने के बावजूद मुकदमा आगे नहीं बढ़ा और याचिकाकर्ता...
गैर-मुस्लिमों को वक्फ बनाने से रोकना प्रथम दृष्टया मनमाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि गैर-मुस्लिम नागरिक वक्फ मानी जाने वाली संपत्ति दान नहीं कर सकते तो यह मनमाना नहीं है, क्योंकि वे एक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाकर ऐसा कर सकते हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की धारा 3(1)(आर) सहित कुछ प्रावधानों पर रोक लगाते हुए अंतरिम आदेश पारित किया, जिसके तहत किसी व्यक्ति को संपत्ति वक्फ के रूप में समर्पित करने के लिए कम से कम पांच वर्षों तक इस्लाम का पालन करना आवश्यक है।हालांकि, इसने मूल वक्फ अधिनियम,...
वैवाहिक बलात्कार पर चुप्पी तोड़ते हुए आंदोलनरत महिलाएं, तोड़ रहीं वर्जनाएं
समाज। कितना छोटा और सरल शब्द; फिर भी इसका भार अन्य सभी मौजूदा शब्दों से कहीं अधिक जटिल है। एक शब्द कैसे लगातार हमारी निंदा कर सकता है और हम पर मंडरा सकता है? हमारे कर्मों के बावजूद, हम भारत में लगातार एक ही चीज़ के बारे में सोचते रहते हैं - समाज। इस लेखिका को समझ नहीं आ रहा है कि एक छोटा सा शब्द हमें इतना गंभीर रूप से कैसे प्रभावित कर रहा है। समाज के अलिखित नियमों और विनियमों में एक गलत कदम ही हमें आंकने, शर्मिंदगी और कलंक का सामना करने के लिए काफी है। समाज ने ऐसे अंतर्निहित नियमों का जाल बुना...
हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संबंधी स्वतः संज्ञान मामले में सुप्रीम कोर्ट 23 सितंबर को सुनाएगा अपना आदेश
सुप्रीम कोर्ट 23 सितंबर को उस मामले में अपना आदेश सुनाएगा, जिसमें उसने हिमाचल प्रदेश में अनियंत्रित विकास गतिविधियों के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय चिंताओं का स्वतः संज्ञान लिया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल और सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर (एमिक्स क्यूरी) की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। जस्टिस मेहता ने संकेत दिया कि न्यायालय केवल हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र के बारे में चिंतित है।जस्टिस नाथ ने...
कॉलेजों में जातिगत भेदभाव: सुप्रीम कोर्ट ने UGC को सुझावों पर विचार करने और नियम अधिसूचित करने के लिए 8 हफ़्ते का समय दिया
उच्च शिक्षण संस्थानों (HEI) में जातिगत भेदभाव का विरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों पर विचार करने और नियमों की अधिसूचना के संबंध में अंतिम निर्णय लेने के लिए 8 हफ़्ते का समय दिया।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और संकेत दिया कि UGC निम्नलिखित पहलुओं पर याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर भी विचार कर सकता है:- भेदभावपूर्ण प्रथाओं पर रोक लगाना - अर्थात, भेदभाव के सभी ज्ञात रूपों...
The Indian Contract Act में एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट में एजेंट की Liability
भारतीय संविदा विधि 1872 के अंतर्गत अभिकरण की संविदा पर विस्तारपूर्वक उल्लेख किया गया है। अभिकरण की संविदा के अंतर्गत मालिक तथा स्वामी के बीच संविदा होती है, इस संविदा में मालिक के प्रति एजेंट के कर्तव्यों का सर्वाधिक महत्व है। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 211 मालिक के प्रति एजेंट के कर्तव्य के संबंध में उल्लेख कर रही है। हालांकि केवल यह धारा ही एजेंट के कर्तव्यों का उल्लेख नहीं करती है अपितु इस अधिनियम के अंतर्गत ऐसी अनेकों धाराएं हैं जो मालिक के प्रति एजेंट के कर्तव्यों का उल्लेख कर रही...
The Indian Contract Act में एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट में एजेंट को परिश्रमिक प्राप्त करने का अधिकार
भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 219 सर्वप्रथम एजेंट के पारिश्रमिक का उल्लेख करती है। इस धारा के अनुसार एजेंट का सबसे पहला अधिकार है कि वह अपने मालिक से पारिश्रमिक प्राप्त करें। जब एजेंट को सौंपा गया कार्य पूर्ण हो जाता है तब एजेंट उस कार्य के लिए अपने मालिक से पारिश्रमिक प्राप्त करने का हकदार हो जाता है।जैसे राम से 1000 वसूल करने के लिए शाम को घनश्याम ने नियोजित किया, श्याम के कपट के कारण धन वसूल नहीं होता है, यहां पर श्याम अपनी सेवाओं के लिए किसी भी पारिश्रमिक का हकदार नहीं है।श्री दिग्विजय...
तीन दशक से अलग रह रहे दंपति को साथ रहने को मजबूर करना मानसिक क्रूरता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जब पति-पत्नी में से कोई भी पक्ष “तीन दशकों से अधिक समय तक अलग रह रहा हो और सुलह या सहवास का कोई प्रयास भी न किया गया हो, तो विवाह का मूल सार ही नष्ट हो जाता है।”अदालत ने कहा, “ऐसे में केवल एक कानूनी बंधन शेष रह जाता है, जिसमें कोई वास्तविकता नहीं होती। इतने लंबे अलगाव के बाद पक्षों को साथ रहने के लिए बाध्य करना अव्यावहारिक होगा और वास्तव में दोनों पक्षों पर और अधिक मानसिक क्रूरता थोपने जैसा होगा।”यह नोट करते हुए कि दंपति वर्ष 1994 से अलग रह रहे हैं,...
विशेष कानूनों के तहत बिना वारंट तलाशी में कारण दर्ज करना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर किसी विशेष कानून (Special Enactment) के तहत बिना वारंट तलाशी ली जाती है, तो “कारण दर्ज करना” अनिवार्य है।कोर्ट की मुख्य बातेंदंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 165 (BNSS की धारा 185) कहती है कि अगर वारंट के बिना तलाशी करनी है, तो अधिकारी को यह लिखित रूप से दर्ज करना होगा कि1. अपराध संबंधी सामग्री होने का विश्वास क्यों है, और2. तत्काल तलाशी की ज़रूरत क्यों है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनी मापविज्ञान अधिनियम, आयकर अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम, केंद्रीय...




















