सुप्रीम कोर्ट ने खजुराहो मंदिर में खंडित विष्णु प्रतिमा की मरम्मत संबंधी याचिका खारिज की

Praveen Mishra

16 Sept 2025 3:38 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने खजुराहो मंदिर में खंडित विष्णु प्रतिमा की मरम्मत संबंधी याचिका खारिज की

    सुप्रीम कोर्ट ने आज मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर समूह स्थित जवारी मंदिर में 7 फीट ऊंची खंडित भगवान विष्णु की प्रतिमा के पुनर्निर्माण की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।

    चीफी जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खण्डपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई की शुरुआत में ही CJI ने याचिका को 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' करार देते हुए कहा – “यह पूरी तरह से पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन है… जाओ और खुद भगवान से कहो कुछ करने के लिए। अगर आप कह रहे हैं कि आप भगवान विष्णु के प्रबल भक्त हैं, तो प्रार्थना कीजिए और ध्यान लगाइए।”

    याचिकाकर्ता के वकील ने प्रतिमा की तस्वीर का हवाला देते हुए जोर दिया कि भगवान विष्णु की प्रतिमा का सिर खंडित है और उसका पुनर्निर्माण जरूरी है। इस पर CJI ने कहा कि खजुराहो मंदिर पुरातत्व विभाग (ASI) के अधिकार क्षेत्र में आता है। “यह पुरातात्विक धरोहर है, ASI इसकी अनुमति देगा या नहीं… इसमें कई मुद्दे हैं। इस बीच, अगर आपको शैव मत से परहेज़ नहीं है, तो वहां शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं – खजुराहो में सबसे बड़ा शिवलिंग मौजूद है।”

    पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
    याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि “भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा का प्रतिस्थापन/पुनर्निर्माण/पुनःस्थापना कर जवारी मंदिर, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश में स्थापित किया जाए।”

    याचिका में कहा गया कि इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री और ASI को कई ज्ञापन दिए गए थे। पुरातत्वविद अधीक्षक ने जवाब में स्पष्ट किया था कि खजुराहो मंदिरों का संरक्षण ASI की जिम्मेदारी है और “खंडित प्रतिमा को बदलकर नई प्रतिमा स्थापित करना संरक्षण नियमों के खिलाफ है, जबकि यह तय करना कि खजुराहो पर्यटक नगरी है या धार्मिक नगरी, यह ASI का विषय नहीं है।”

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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