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एयर इंडिया विमान दुर्घटना | सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक रिपोर्ट के चुनिंदा लीक से पायलट की गलती के दावे की आलोचना की
एयर इंडिया विमान दुर्घटना | सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक रिपोर्ट के चुनिंदा लीक से पायलट की गलती के दावे की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के चुनिंदा लीक पर चिंता व्यक्त की, जिससे जून 2025 में एयर इंडिया की उड़ान AI171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के लिए पायलट की गलती को ज़िम्मेदार ठहराने वाले मीडिया के दावे को बल मिला।कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का चुनिंदा और टुकड़ों में प्रकाशन "दुर्भाग्यपूर्ण" है। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि जांच पूरी होने तक, पूर्ण गोपनीयता बनाए रखना ज़रूरी है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ 12 जून, 2025 को अहमदाबाद हवाई अड्डे...

गरीबों पर डंडा, अमीरों पर रहम: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
गरीबों पर डंडा, अमीरों पर रहम: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर सड़कों पर हो रहे हुड़दंग और लापरवाह ड्राइविंग की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने दो हिंदी दैनिकों में प्रकाशित रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया, जिनमें बताया गया कि कुछ युवक जन्मदिन मनाने फार्महाउस जाते समय गाड़ियों को लापरवाही से चला रहे थे, स्टंट कर रहे थे और खिड़कियों व सनरूफ से लटककर अन्य राहगीरों की जान को खतरे में डाल रहे थे।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने इस पर कड़ी नाराज़गी जताई और कहा कि पुलिस गरीबों, मध्यम वर्ग और वंचितों...

राजस्थान में ई-सिगरेट पर लागू होगा प्रतिबंध, हाईकोर्ट ने डीजीपी को दिया निर्देश
राजस्थान में ई-सिगरेट पर लागू होगा प्रतिबंध, हाईकोर्ट ने डीजीपी को दिया निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध संबंधी कानून के सख्त क्रियान्वयन के लिए राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) को विशेष कदम उठाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस महानिदेशक विभिन्न रेंज मुख्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों की टीम गठित करें, जो प्रोहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स एक्ट, 2019 के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने की दिशा में कार्य करेगी।मुख्य सचिव को भी निर्देश दिया गया कि प्रत्येक जिले में अधिनियम के तहत अधिकृत अधिकारी नियुक्त किए जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये...

UAPA मामलों में सीधे हाईकोर्ट नहीं जा सकते, NIA Act का इस्तेमाल कर वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
UAPA मामलों में सीधे हाईकोर्ट नहीं जा सकते, NIA Act का इस्तेमाल कर वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कोई वैधानिक मंच उपलब्ध है तो कोई भी अपीलकर्ता राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम (NIA Act) की धारा 21 का हवाला देकर सीधे हाई कोर्ट में अपील नहीं कर सकता। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि UAPA में संपत्ति की जब्ती से लेकर संबंधित प्राधिकरण द्वारा निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया प्रदान की गई है।जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की खंडपीठ ने आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों में इस्तेमाल...

यौन सामग्री फारवर्ड करने के आरोपी युवक को सशर्त जमानत, हाईकोर्ट ने 3 साल सोशल मीडिया से दूर रहने को कहा
यौन सामग्री फारवर्ड करने के आरोपी युवक को सशर्त जमानत, हाईकोर्ट ने 3 साल सोशल मीडिया से दूर रहने को कहा

राजस्थान हाईकोर्ट ने आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने और सोशल मीडिया पर महिला को डराने-धमकाने के आरोपी 19 वर्षीय युवक को जमानत दी। हालांकि कोर्ट ने एक अनूठी शर्त भी लगाई कि आरोपी अगले तीन साल तक किसी भी रूप में अपने या किसी फर्जी नाम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेगा।जस्टिस अशोक कुमार जैन ने कहा कि अन्य परिस्थितियों और याचिकाकर्ता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, जो एक कॉलेज का स्टूडेंट है, जमानत दी जा सकती है। हालांकि यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त शर्तें लगाई गईं ताकि आरोपी की...

दिल्ली हाईकोर्ट में तिहाड़ जेल से अफ़ज़ल गुरु और मक़बूल भट्ट की कब्रें हटाने की PIL दायर
दिल्ली हाईकोर्ट में तिहाड़ जेल से अफ़ज़ल गुरु और मक़बूल भट्ट की कब्रें हटाने की PIL दायर

दिल्ली हाईकोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दायर की गई है, जिसमें तिहाड़ जेल, दिल्ली से आतंकवाद संबंधी अपराधों के लिए फांसी पाए मोहम्मद मक़बूल भट्ट और मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु की कब्रों को हटाने की मांग की गई है। वैकल्पिक रूप से, यह भी प्रार्थना की गई है कि उनके अवशेषों को कानून के अनुसार किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, “ताकि आतंकवाद की महिमा फैलने और जेल परिसर के दुरुपयोग को रोका जा सके।”याचिका, जो “विश्व वैदिक सनातन संघ” के माध्यम से दायर की गई है, में कहा गया है कि राज्य...

अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज़ ने 200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज़ ने 200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज़ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने 200 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग केस (अभियुक्त सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा) में दायर ईडी की ECIR और दूसरी सप्लीमेंट्री शिकायत, जिसमें उन्हें दसवां आरोपी बनाया गया था, को रद्द करने की मांग की थी। अंतरिम राहत के तौर पर उन्होंने ट्रायल पर रोक लगाने की मांग भी की है।जैकलीन का कहना है कि ईडी की फ़ाइल की गई सामग्री साबित करती है कि वह...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेटी की भरण-पोषण की लड़ाई में पिता की आय के सत्यापन का आदेश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेटी की भरण-पोषण की लड़ाई में पिता की आय के सत्यापन का आदेश दिया

इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक युवती की दुर्दशा पर गहरा दुःख व्यक्त किया, जो अपने पिता से भरण-पोषण के लिए बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटाने को मजबूर है।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ, मुंबई में ग्रेजुएट की पढ़ाई कर रही अपनी बेटी के खिलाफ एक पिता द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।खंडपीठ ने टिप्पणी की,"यह हमारे लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है कि एक बेटी अपने पिता से भरण-पोषण पाने के लिए संघर्ष कर रही है। अपीलकर्ता-पिता ने प्रतिवादी-बेटी के खिलाफ इस...

पतियों पर भरण-पोषण का बोझ डालने के लिए शिक्षित पत्नियां जानबूझकर काम करने से बचती हैं, यह सामान्यीकरण अनुचित: उड़ीसा हाईकोर्ट
पतियों पर भरण-पोषण का बोझ डालने के लिए शिक्षित पत्नियां जानबूझकर काम करने से बचती हैं, यह सामान्यीकरण 'अनुचित': उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जब तक आय या कमाई की वास्तविक संभावनाओं का स्पष्ट भौतिक प्रमाण न हो, तब तक यह सामान्यीकरण 'अनुचित' होगा कि शिक्षित पत्नियां जानबूझकर काम करने से बचती हैं ताकि अपने पतियों पर भरण-पोषण का बोझ डाल सकें।जस्टिस गौरीशंकर सतपथी की पीठ ने एक पति द्वारा उसके विरुद्ध पारित भरण-पोषण आदेश के विरुद्ध दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की:"इसके अलावा, यह सभी मामलों में सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं हो सकता कि उच्च योग्यता वाली पत्नी जानबूझकर काम करने से बचती है...

गिरोह के सदस्य के खिलाफ FIR का संज्ञान MCOCA लगाने के लिए पर्याप्त, दोषसिद्धि आवश्यक नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
गिरोह के सदस्य के खिलाफ FIR का 'संज्ञान' MCOCA लगाने के लिए पर्याप्त, दोषसिद्धि आवश्यक नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति के खिलाफ 'गिरोह के सदस्य' के रूप में दर्ज दो या अधिक FIR का संज्ञान लेता है तो कठोर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 लागू किया जा सकता है और ऐसी कोई पूर्व शर्त नहीं है कि ऐसी FIR के परिणामस्वरूप दोषसिद्धि हो।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने यह टिप्पणी मकोका के तहत 6 साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में बंद एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे 2018 में हत्या की साजिश रचने के आरोप...

अभियुक्त के विरुद्ध फरारी उद्घोषणा जारी होने पर भी अग्रिम ज़मानत याचिका स्वीकार्य: पटना हाईकोर्ट
अभियुक्त के विरुद्ध फरारी उद्घोषणा जारी होने पर भी अग्रिम ज़मानत याचिका स्वीकार्य: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने माना कि दंड प्रक्रिया संहिता (BNSS) की धारा 82 (फरार व्यक्ति के लिए उद्घोषणा) और 83 (फरार व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की) के तहत कार्यवाही अग्रिम ज़मानत याचिका दायर करने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाती।बता दें, BNSS की धारा 82 में कहा गया कि यदि किसी अदालत को यह विश्वास करने का कारण है (चाहे साक्ष्य लेने के बाद हो या नहीं) कि कोई व्यक्ति, जिसके विरुद्ध उसके द्वारा वारंट जारी किया गया, फरार हो गया या खुद को छिपा रहा है ताकि ऐसे वारंट को निष्पादित न किया जा सके तो ऐसा अदालत लिखित...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना किसी स्पष्ट कारण के आदेश पारित करने पर ट्रायल कोर्ट की खिंचाई की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना किसी स्पष्ट कारण के आदेश पारित करने पर ट्रायल कोर्ट की खिंचाई की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पक्षकार द्वारा पक्षकारों के प्रतिस्थापन (सीपीसी के आदेश 1 नियम 10 के तहत) सहित कई आवेदनों को पक्षकार और उसके वकील की अनुपस्थिति के आधार पर खारिज करते हुए बिना किसी स्पष्ट कारण के आदेश पारित करने के लिए ट्रायल कोर्ट की कड़ी आलोचना की।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने बिना किसी स्पष्ट कारण के आदेश पारित करके "प्रथम दृष्टया अवैधता" की, जो न्यायिक कर्तव्य से विमुख होने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।याचिका में ट्रायल कोर्ट के 21 अप्रैल, 2025 के आदेश को चुनौती दी...