पीएम केयर्स फंड कानूनी संस्था, लेकिन RTI Act के तहत उसे प्राइवेसी का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट

Shahadat

13 Jan 2026 8:26 PM IST

  • पीएम केयर्स फंड कानूनी संस्था, लेकिन RTI Act के तहत उसे प्राइवेसी का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पीएम केयर्स फंड, एक कानूनी या सरकारी संस्था होने के बावजूद, सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत प्राइवेसी के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि भले ही यह फंड एक राज्य हो, लेकिन सिर्फ इसलिए कि यह एक पब्लिक अथॉरिटी है। कुछ सार्वजनिक काम करता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने प्राइवेसी के अधिकार को खो देता है।

    कोर्ट एक गिरीश मित्तल द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें एक सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) का आदेश रद्द कर दिया गया, जिसमें आयकर (IT) विभाग को RTI Act, 2005 के तहत PM केयर्स फंड को दी गई टैक्स छूट से संबंधित जानकारी देने का निर्देश दिया गया।

    सुनवाई के दौरान, मित्तल के वकील ने तर्क दिया कि यह फंड RTI Act की धारा 8(1)(j) में दी गई छूट के तहत नहीं आता।

    उन्होंने कहा कि जहां एक व्यक्ति की प्राइवेसी की रक्षा की जानी चाहिए, वहीं पीएम केयर्स फंड जैसे सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट को यह सुरक्षा नहीं दी जा सकती।

    कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को करेगा।

    विवादित आदेश में सिंगल जज ने कहा था कि CIC के पास IT Act की धारा 138 (करदाताओं से संबंधित जानकारी का खुलासा) में दी गई जानकारी देने का निर्देश देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

    सिंगल जज ने IT विभाग के CPIO द्वारा दायर याचिका स्वीकार की, जिसमें मुंबई के एक्टिविस्ट गिरीश मित्तल द्वारा RTI Act की धारा 6 के तहत दायर आवेदन के संबंध में CIC द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई। इस आवेदन के माध्यम से मित्तल ने पीएम केयर्स फंड को दी गई टैक्स छूट से संबंधित जानकारी मांगी थी।

    मित्तल ने पीएम केयर्स फंड द्वारा अपने छूट आवेदन में जमा किए गए सभी दस्तावेजों की प्रतियां, मंजूरी देने वाली फाइल नोटिंग की प्रतियां, 1 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2020 तक IT विभाग के समक्ष दायर सभी छूट आवेदनों की सूची, साथ ही फाइल करने की तारीख और जिस तारीख को उन्हें छूट दी गई और अस्वीकृति के कारणों के साथ अस्वीकृत किए गए किसी भी आवेदन की प्रतियां मांगी थीं।

    CIC के आदेश पर जुलाई 2022 में एक कोऑर्डिनेट बेंच ने रोक लगाई।

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