सुप्रीम कोर्ट का कोल इंडिया को बहु-दिव्यांग उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश

Praveen Mishra

13 Jan 2026 4:29 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट का कोल इंडिया को बहु-दिव्यांग उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने आज (13 जनवरी) को कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन को निर्देश दिया कि वे एक महिला उम्मीदवार के लिए विशेष (Supernumerary) पद सृजित करें, जिसे वर्ष 2016 में इंटरव्यू में सफल होने के बावजूद नौकरी से वंचित कर दिया गया था क्योंकि वह एक से अधिक दिव्यांगताओं (Multiple Disabilities) से पीड़ित थी।

    जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि यह आदेश विशेष परिस्थितियों में दिया गया है और इसे नज़ीर (precedent) नहीं माना जाएगा।

    अपीलकर्ता सुजाता बोरा ने 2016 में कोल इंडिया में मैनेजमेंट ट्रेनी (पर्सनल व एचआर) पद के लिए दृष्टिबाधित श्रेणी में आवेदन किया था। विज्ञापन में एक से अधिक दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों के लिए कोई प्रावधान नहीं था, इसलिए उन्होंने स्वयं को केवल दृष्टिबाधित श्रेणी में दर्शाया था।

    हालांकि इंटरव्यू में सफल होने के बाद मेडिकल परीक्षण में यह सामने आया कि वह केवल दृष्टिबाधित ही नहीं बल्कि

    दोनों आंखों में 60% कम दृष्टि (Low Vision) और रेज़िडुअल पार्टियल हेमीपेरेसिस (शारीरिक कमजोरी) से भी पीड़ित हैं। इसी आधार पर उन्हें नौकरी से वंचित कर दिया गया।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

    “अपीलकर्ता को उसकी क्षमताओं के अनुरूप एक उपयुक्त डेस्क जॉब दिया जाए और उसे एक अलग कंप्यूटर और कीबोर्ड उपलब्ध कराया जाए, जैसा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 2(ze) में परिभाषित 'यूनिवर्सल डिजाइन' के अनुसार है।”

    कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सुजाता बोरा को नॉर्थ ईस्टर्न कोल फील्ड्स, कोल इंडिया लिमिटेड, मार्गेरिटा (तिनसुकिया, असम) में तैनात किया जाए।

    कोर्ट ने कहा कि चूंकि अपीलकर्ता 2016 की चयन प्रक्रिया में योग्य पाई गई थीं और गलती उनकी नहीं थी, इसलिए उनके लिए एक नया विशेष पद (Supernumerary Post) बनाया जाना न्यायसंगत है।

    संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला

    जस्टिस पारदीवाला ने आदेश पढ़ते हुए कहा कि:

    संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मानवाधिकार सिद्धांतों के अनुसार,

    दिव्यांग व्यक्तियों का समावेशन (Disability Inclusion) केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि कॉरपोरेट और समाज के लिए एक रणनीतिक लाभ भी है।

    कोर्ट ने कहा कि ESG (Environmental, Social and Governance) ढांचे में भी दिव्यांगों को शामिल करना एक महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी है।

    संविधान के तहत आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार), अनुच्छेद 41 और अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए पारित किया।

    हाईकोर्ट का आदेश रद्द

    सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 3 जुलाई 2024 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसने सुजाता बोरा को राहत देने से इंकार कर दिया था।

    AIIMS मेडिकल बोर्ड

    सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS, नई दिल्ली को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था, जिसमें डॉ. सतेन्द्र सिंह भी शामिल थे, ताकि यह तय किया जा सके कि सुजाता बोरा

    बेंचमार्क डिसएबिलिटी और मल्टीपल डिसएबिलिटी की श्रेणी में आती हैं या नहीं।


    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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