भारत माता चित्र विवाद: हाइकोर्ट ने केरल यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार के खिलाफ जारी आरोप-पत्र पर लगाई रोक

Amir Ahmad

13 Jan 2026 1:33 PM IST

  • भारत माता चित्र विवाद: हाइकोर्ट ने केरल यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार के खिलाफ जारी आरोप-पत्र पर लगाई रोक

    केरल हाइकोर्ट ने सोमवार 12 जनवरी को केरल यूनिवर्सिटी के कुलपति (कार्यवाहक) द्वारा पूर्व यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार के. एस. अनिलकुमार के खिलाफ जारी आरोप-पत्र (मेमो ऑफ चार्जेस) पर अंतरिम रोक लगाई। यह आदेश जस्टिस पी. वी. कुन्हीकृष्णन ने पूर्व रजिस्ट्रार द्वारा दायर याचिका पर पारित किया, जिसमें कुलपति की ओर से आरोप-पत्र जारी करने के अधिकार को चुनौती दी गई थी।

    याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कुलपति ने केरल यूनिवर्सिटी एक्ट, 1974 की धारा 10(13) का सहारा लेते हुए आरोप-पत्र जारी किया। इस धारा के अनुसार, यदि कुलपति यह संतुष्ट हो जाएं कि कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो गई और उस समय सिंडिकेट या अकादमिक काउंसिल का सत्र नहीं चल रहा है, तो वे तत्काल कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि, ऐसी कार्रवाई की रिपोर्ट अगली बैठक में सिंडिकेट या अकादमिक काउंसिल के समक्ष रखना अनिवार्य होता है।

    पूर्व रजिस्ट्रार के वकील ने दलील दी कि आरोप-पत्र जारी किए जाने के बाद 24 दिसंबर, 2025 को यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट बैठक हुई, लेकिन धारा 10(13) के तहत आवश्यक रिपोर्ट उस बैठक में पेश नहीं की गई। इससे स्पष्ट होता है कि कुलपति ने वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

    इन दलीलों पर विचार करते हुए हाइकोर्ट ने प्रथम दृष्टया यह टिप्पणी की कि आरोप-पत्र बिना किसी वैध अधिकार के जारी किया गया प्रतीत होता है। अदालत ने कहा कि कुलपति को यह स्पष्ट करना होगा कि किस आधार पर अधिनियम की धारा 10(13) को एक आपात स्थिति मानते हुए लागू किया गया और पूर्व रजिस्ट्रार के खिलाफ आरोप-पत्र जारी किया गया।

    अदालत ने आरोप-पत्र के आधार पर आगे की सभी कार्यवाहियों पर रोक लगाते हुए कुलपति को निर्देश दिया कि वे इस मामले में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करें।

    मामले की पृष्ठभूमि में केरल यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार को जुलाई 2025 में कुलपति द्वारा निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई उस समय की गई, जब 'भारत माता' के एक चित्र को लेकर यूनिवर्सिटी कैंपस में विभिन्न छात्र संगठनों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस चित्र में केसरिया ध्वज के साथ भारत माता को दर्शाया गया, जिसे कुछ वर्गों ने हिंदू देवी के रूप में प्रस्तुत करने वाला बताया। इसी विवाद के चलते राज्यपाल के सेमिनार में शामिल होने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

    कुलपति ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए रजिस्ट्रार को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर प्रक्रियागत अनियमितताओं और कुप्रबंधन के आरोप लगाए। निलंबन के बाद यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट की बैठक बुलाई गई, जिसमें रजिस्ट्रार का निलंबन रद्द कर उन्हें बहाल कर दिया गया। इसके बावजूद कुलपति ने नए निर्देश जारी करते हुए यह दावा किया कि रजिस्ट्रार का निलंबन अभी भी प्रभावी है।

    इसके बाद पूर्व रजिस्ट्रार ने हाइकोर्ट का रुख किया और सिंडिकेट द्वारा औपचारिक रूप से निलंबन रद्द किए जाने के बावजूद उन्हें कार्यभार ग्रहण करने से रोके जाने को चुनौती दी। हाइकोर्ट ने उस याचिका का निपटारा करते हुए कुलपति को निर्देश दिया कि रजिस्ट्रार-इन-चार्ज के माध्यम से सिंडिकेट की बैठक बुलाकर यह निर्णय लिया जाए कि निलंबन जारी रखा जाए या नहीं।

    इस निर्देश के अनुपालन में 24 दिसंबर, 2025 को सिंडिकेट की बैठक हुई। वर्तमान याचिका इसी के बाद दायर की गई जिसमें कुलपति द्वारा आरोप-पत्र जारी करने के अधिकार और सिंडिकेट के समक्ष उसे पेश न किए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी गई।

    Next Story