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पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी में कुलपतियों की नियुक्ति संतोषजनक, केवल 3 पद शेष: सुप्रीम कोर्ट
पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी में कुलपतियों की नियुक्ति संतोषजनक, केवल 3 पद शेष: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के यूनिवर्सिटी में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर संतोष व्यक्त किया।अदालत को बताया गया कि अब केवल 3 यूनिवर्सिटी में कुलपति की नियुक्ति शेष है। बाकी सभी यूनिवर्सिटी में नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं।चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ को यह जानकारी राज्य सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट जयदीप गुप्ता तथा राज्यपाल की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने दी।पीठ ने अपने आदेश में कहा,“हमें यह दर्ज करते हुए अत्यंत संतोष हो रहा है कि 3 यूनिवर्सिटी को छोड़कर सभी...

कम दंड और घटता भय कानून उल्लंघन की वजह: दंडात्मक प्रावधानों का सख्ती से पालन जरूरी- बॉम्बे हाइकोर्ट
कम दंड और घटता भय कानून उल्लंघन की वजह: दंडात्मक प्रावधानों का सख्ती से पालन जरूरी- बॉम्बे हाइकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि देश में कानूनों के बार-बार उल्लंघन का एक प्रमुख कारण उनका कम निवारक प्रभाव और कानून का घटता भय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दंडात्मक प्रावधानों को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं बल्कि प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।सिंगल बेंच जज जस्टिस जितेंद्र जैन ने 17 फरवरी को पारित आदेश में कहा कि दंडात्मक प्रावधानों का दोहरा उद्देश्य होता है पहला, दोषी को दंडित करना और दूसरा, दूसरों को कानून तोड़ने से रोकना।अदालत ने कहा,“दंडात्मक प्रावधानों का दोहरा प्रभाव होता है एक, अपराधी या...

यह उत्पीड़न का रूप: सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की कमी पर छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव से मांगा हलफनामा
यह उत्पीड़न का रूप: सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की कमी पर छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव से मांगा हलफनामा

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की गंभीर कमी और उनकी दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ वर्ष 2025 में दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान हिंदी दैनिक में प्रकाशित हालिया समाचार का संज्ञान लिया गया, जिसमें राज्यभर के स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की भारी कमी और उनकी...

राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार का केंद्र का आश्वासन संसद पर बाध्यकारी नहीं: BNS चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट
राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार का केंद्र का आश्वासन संसद पर बाध्यकारी नहीं: BNS चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि राजद्रोह कानून की समीक्षा करने संबंधी केंद्र सरकार द्वारा दिया गया आश्वासन संसद को समान प्रावधान वाला नया कानून बनाने से नहीं रोकता।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कुछ धाराओं—विशेष रूप से धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य)—को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि यह प्रावधान भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A...

अरविंद केजरीवाल के खिलाफ रिश्वत या लेन-देन का कोई सबूत नहीं: एक्साइज पॉलिसी केस में दिल्ली कोर्ट
अरविंद केजरीवाल के खिलाफ रिश्वत या लेन-देन का कोई सबूत नहीं: एक्साइज पॉलिसी केस में दिल्ली कोर्ट

शुक्रवार को दिल्ली कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, तेलंगाना जागृति की फाउंडर के कविता और 20 अन्य को कथित शराब पॉलिसी स्कैम केस से जुड़े करप्शन केस में बरी किया।राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने 598 पेज के कड़े शब्दों वाले ऑर्डर में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को उसकी जांच के तरीके के लिए फटकार लगाई। साथ ही जांच एजेंसी की तरफ से कई कमियों को भी गिनाया।कोर्ट ने पाया कि प्रॉसिक्यूशन ऐसा कोई मटीरियल पेश करने में नाकाम रहा, जिससे पता...

पूर्व नौकरशाहों ने परमाणु दायित्व सीमा तय करने वाले SHANTI अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
पूर्व नौकरशाहों ने परमाणु दायित्व सीमा तय करने वाले SHANTI अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने “सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) अधिनियम, 2025” की कई धाराओं को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर संक्षिप्त सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले को आगे विचार के लिए स्थगित कर दिया।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलील...

हाइकोर्टों में प्रशासनिक निरंतरता के लिए नई नीति: रिटायरमेंट से पहले पदभार संभालने की तैयारी
हाइकोर्टों में प्रशासनिक निरंतरता के लिए नई नीति: रिटायरमेंट से पहले पदभार संभालने की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने हाइकोर्टों में प्रशासनिक निरंतरता और कार्यकुशलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई नीति अपनाई है। 26 फरवरी, 2026 को हुई बैठक के बाद जारी वक्तव्य में कहा गया कि अब किसी हाइकोर्ट के भावी चीफ जस्टिस को पद रिक्त होने से लगभग दो माह पूर्व ही ट्रांसफर किया जा सकेगा।कॉलेजियम के अनुसार यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि नामित जस्टिस संबंधित हाइकोर्ट के प्रशासनिक कार्यों और व्यवस्था से पहले ही परिचित हो सकें और वर्तमान चीफ जस्टिस के रिटायर होते ही तत्काल कार्यभार संभाल सकें।...

CrPC की धारा 469 : सीमा अवधि पुलिस अधिकारी की जानकारी की तिथि से शुरू, FIR की तारीख से नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट
CrPC की धारा 469 : सीमा अवधि पुलिस अधिकारी की जानकारी की तिथि से शुरू, FIR की तारीख से नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 469 के तहत सीमा अवधि उस दिन से प्रारंभ होती है, जब पुलिस अधिकारी को अपराध की जानकारी प्राप्त होती है, न कि उस बाद की तारीख से जब औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज की जाती है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इसी सिद्धांत को लागू करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर आरोपपत्र को सीमा अवधि से परे मानते हुए निरस्त किया।मामला एक लोकसेवक के विरुद्ध निजी व्यवसाय चलाने के आरोप में CBI द्वारा शुरू किए गए...

आत्महत्या की धमकी देकर साथ चलने को मजबूर करना अपहरण: बॉम्बे हाइकोर्ट की गोवा पीठ ने दोषसिद्धि बरकरार रखी
आत्महत्या की धमकी देकर साथ चलने को मजबूर करना अपहरण: बॉम्बे हाइकोर्ट की गोवा पीठ ने दोषसिद्धि बरकरार रखी

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी नाबालिग लड़की को यह कहकर साथ चलने के लिए मजबूर करे कि अन्यथा वह आत्महत्या कर लेगा, तो यह प्रलोभन की श्रेणी में आएगा और ऐसे हालात में अपहरण का अपराध बनता है।सिंगल बेंच जज जस्टिस श्रीराम शिरसाट ने 16 फरवरी को दिए गए निर्णय में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 (अपहरण) और धारा 376 (बलात्कार) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।अदालत के समक्ष पीड़िता ने अपने बयान में...

मृत्यु से पहले दिया गया बयान मेडिकल प्रमाणन नहीं, दोषसिद्धि असुरक्षित: राजस्थान हाइकोर्ट ने पत्नी को जलाने के आरोप में दोषी ठहराए व्यक्ति को बरी किया
मृत्यु से पहले दिया गया बयान मेडिकल प्रमाणन नहीं, दोषसिद्धि असुरक्षित: राजस्थान हाइकोर्ट ने पत्नी को जलाने के आरोप में दोषी ठहराए व्यक्ति को बरी किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि मृत्यु मृत्यु से पहले दिया गया बयान मेडिकल प्रमाणन नहीं हो कि कथन देने वाला व्यक्ति होश में सजग और मानसिक रूप से सक्षम था तो केवल ऐसे कथन के आधार पर दोषसिद्धि सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने पत्नी को कथित रूप से आग लगाकर हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया।खंडपीठ के जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा ने यह भी पाया कि कथित मृत्यु पूर्व कथन के समय मृतका की नाड़ी, ब्लड प्रेशर अथवा जलने...

मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम को मुकदमे का हथियार नहीं बनाया जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट ने पिता की मानसिक जांच की मांग ठुकराई
मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम को मुकदमे का हथियार नहीं बनाया जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट ने पिता की मानसिक जांच की मांग ठुकराई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की धारा 105 का उपयोग किसी पक्षकार के विरुद्ध मुकदमेबाजी में रणनीतिक हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता। अदालत ने एक याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह प्रावधान मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए है न कि प्रतिद्वंद्वी पक्ष को परेशान करने के लिए।सिंगल जज जस्टिस फरहान दुबाश ने 17 फरवरी को पारित आदेश में कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति को उसके विरोधी द्वारा चुनौती दिए जाने मात्र पर...

राजनीतिक दलों के अनियंत्रित चुनावी खर्च पर रोक की मांग वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र व चुनाव आयोग को नोटिस
राजनीतिक दलों के अनियंत्रित चुनावी खर्च पर रोक की मांग वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र व चुनाव आयोग को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने आज राजनीतिक दलों द्वारा अनियंत्रित चुनावी खर्च के मुद्दे को उठाने वाली जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया। यह याचिका कॉमन कॉज और सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन द्वारा दायर की गई है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि वर्तमान कानून चुनाव के दौरान उम्मीदवारों द्वारा धन के उपयोग पर सीमा तय करता है, लेकिन इन सीमाओं का प्रभावी पालन नहीं होता। उन्होंने...

West Bengal SIR | ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को ECI की ट्रेनिंग पर TMC को आपत्ति, सुप्रीम कोर्ट ने किया सुनवाई से इनकार
West Bengal SIR | ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को ECI की ट्रेनिंग पर TMC को आपत्ति, सुप्रीम कोर्ट ने किया सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उन आपत्तियों पर विचार करने से मना किया, जिसमें इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) द्वारा ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को ट्रेनिंग देने पर आपत्ति जताई गई, जिन्हें पश्चिम बंगाल राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रोसेस में क्लेम वेरिफिकेशन के लिए तैनात किया गया।चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकांत (CJI) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि ECI का ट्रेनिंग मॉड्यूल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ओवरराइड नहीं कर सकता। ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर भरोसा किया जाना...

S.469 CrPC | परिसीमा अवधि उस तारीख से शुरू होता है जब अपराधी की पहचान पता चलती है, न कि शिकायत मिलने से: सुप्रीम कोर्ट
S.469 CrPC | परिसीमा अवधि उस तारीख से शुरू होता है जब अपराधी की पहचान पता चलती है, न कि शिकायत मिलने से: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्रिमिनल केस में परिसीमा अवधि उस तारीख से शुरू होता है, जब सभी आरोपी लोगों की पहचान संबंधित अथॉरिटी को पता चल जाती है, न कि पहली शिकायत की तारीख से।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत क्रिमिनल कार्रवाई को परिसीमा के आधार पर रद्द करने का केरल हाईकोर्ट का फैसला खारिज किया।यह मामला जनवरी, 2006 में मिली एक शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें पैनेशिया बायोटेक लिमिटेड की बनाई वैक्सीन की लेबलिंग में गड़बड़ी का आरोप...

Manipur Violence | सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस गीता मित्तल कमेटी को खर्च का पेमेंट न करने पर निराशा जताई
Manipur Violence | सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस गीता मित्तल कमेटी को खर्च का पेमेंट न करने पर निराशा जताई

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर निराशा जताई कि मणिपुर हिंसा मामलों में बनाई गई तीन जजों की कमेटी के सदस्यों को अब तक आने-जाने और रहने के खर्च के लिए कोई रीइंबर्समेंट नहीं मिला है, और तुरंत फंड जारी करने का निर्देश दिया।तीन सदस्यों वाली कमेटी में जस्टिस गीता मित्तल, जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस, जस्टिस शालिनी फनसालकर जोशी, बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व जज और जस्टिस आशा मेनन, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज शामिल हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस...

शर्तें स्पष्ट हों तो पक्षकारों के बाद के व्यवहार के आधार पर डीड का दोबारा मतलब नहीं निकाला जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
शर्तें स्पष्ट हों तो पक्षकारों के बाद के व्यवहार के आधार पर डीड का दोबारा मतलब नहीं निकाला जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने लीज़ डीड की शर्तों के साफ़ और साफ़ होने पर पक्षकारों के बाद के व्यवहार पर भरोसा करने के खिलाफ चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा है कि डीड पर सही तरीके से बनी लीज़ को पक्षकारों के बाद के व्यवहार के आधार पर बदला या कमज़ोर नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा,“शर्तें बनने के बाद पैदा हुए हालात से पक्षकारों के इरादे का अंदाज़ा लगाते समय कोर्ट को बहुत ज़्यादा संयम बरतना चाहिए। क्योंकि, व्यवहार न तो डॉक्यूमेंट के असल मतलब से मेल खाता है और न ही उसके मकसद से।” जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन....

एक ही कर्ज के लिए कर्जदार और गारंटर के खिलाफ एक साथ CIRP की इजाज़त पर कोई रोक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
एक ही कर्ज के लिए कर्जदार और गारंटर के खिलाफ एक साथ CIRP की इजाज़त पर कोई रोक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (26 फरवरी) को कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत एक ही कर्ज के लिए कॉर्पोरेट कर्जदार और गारंटर के खिलाफ एक साथ CIRP शुरू करने पर कोई रोक नहीं है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने BRS वेंचर्स इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड बनाम SREI इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड और अन्य के नतीजों को सही ठहराया कि "कॉन्ट्रैक्ट एक्ट के बेसिक प्रिंसिपल्स के मुताबिक, कि प्रिंसिपल बॉरोअर और श्योरिटी की लायबिलिटी एक जैसी है, IBC एक फाइनेंशियल क्रेडिटर द्वारा...

क्या शुरुआती पढ़ाई के दौरान फीस न देने पर किसी स्टूडेंट को स्कूल से निकाला जा सकता है? बॉम्बे हाईकोर्ट का जवाब
क्या शुरुआती पढ़ाई के दौरान फीस न देने पर किसी स्टूडेंट को स्कूल से निकाला जा सकता है? बॉम्बे हाईकोर्ट का जवाब

वर्तमान समय में पढ़ाई की अहमियत पर ज़ोर देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक 13 साल की लड़की की मदद की, जिसे फीस न देने पर उसके स्कूल से निकाल दिया गया था।नागपुर सीट पर बैठे जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोडे की डिवीजन बेंच ने बच्चों के फ्री और ज़रूरी शिक्षा के अधिकार एक्ट, 2009 के तहत स्कूल के काम को 'गैर-कानूनी और मनमाना' माना। इसलिए भंडारा ज़िले के फादर एग्नेल स्कूल को क्लास 7वीं में लड़की को फिर से एडमिशन देने का आदेश दिया और स्टूडेंट के माता-पिता को दो हफ़्ते के अंदर 23,900 रुपये...