ताज़ा खबरे
आदेश का विधिशास्त्र और संवैधानिक गतिरोध
भारतीय संवैधानिक परियोजना वर्तमान में टकराव के एक निर्णायक क्षण का सामना कर रही है, एक ऐसी गड़बड़ी जहां 13 हजार ग्रुप-ए कैडर अधिकारियों की नियति और भारत के सुप्रीम कोर्ट की संस्थागत अखंडता संतुलन में खड़ी है। इस तूफान के केंद्र में संजय प्रकाश और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य (2025 INSC 779) का निर्णय है। एक ऐसा निर्णय जिसने न केवल एक सेवा विवाद को सुलझाया, बल्कि राज्य और इसकी सबसे अस्थिर सीमाओं की रक्षा करने वालों के बीच एक मूलभूत समझौते को बहाल करने की मांग की। जैसा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल...
लॉग-इन, लेफ्ट आउट: सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 में भारत के गिग वर्कर्स का ज़िक्र भर क्यों?
हर सुबह, लाखों डिलीवरी सवार स्विगी और जोमैटो पर लॉग इन करते हैं। उनमें से कई, एक साथ, मैजिकपिन चला रहे हैं या दोपहर के लिए अर्बन कंपनी की बुकिंग लाइन में हैं। वे कर्मचारी नहीं हैं। वे किसी भी पारंपरिक अर्थ में ठेकेदार नहीं हैं। वे, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के शब्दों में, 'गिग वर्कर्स' अर्थात एक ऐसी श्रेणी जिसे भारत की संसद ने आखिरकार स्वीकार करने के लिए उपयुक्त समझा। लेकिन स्वीकृति, जैसा कि यह पता चला है, सुरक्षा नहीं है।इस लेख में तर्क दिया गया है कि सामाजिक सुरक्षा पर संहिता, 2020 ('कोड')...
'ऊपरी अदालतों के आदेशों का सम्मान बुनियादी सिद्धांत': सुप्रीम कोर्ट ने रेंट अथॉरिटी को एससी द्वारा पुष्ट बेदखली आदेश पर फिर से विचार करने के लिए फटकारा
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की रेंट कंट्रोल अथॉरिटी (किराया नियंत्रण प्राधिकरण) को फटकार लगाई। अथॉरिटी ने किरायेदार की बेदखली की पुष्टि करने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की और किरायेदार के आवेदन पर मामले को फिर से खोल दिया, जबकि यह मामला पहले ही अंतिम रूप ले चुका था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें किरायेदार की बेदखली का मामला अंतिम रूप ले चुका था और सुप्रीम कोर्ट तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके बावजूद, रेंट कंट्रोल अथॉरिटी...
आरोपी को आरोप पढ़कर सुनाए जाने पर आरोप तय करते समय ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होने पर ट्रायल रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने वाली ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होना एक ठीक किया जा सकने वाला प्रक्रियागत दोष है और इससे ट्रायल रद्द नहीं होता, खासकर तब जब आरोपी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के बारे में ठीक से बताया गया हो और वे उन्हें समझ गए हों।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा,“आरोप पत्र पर दस्तखत न होने से जुड़ा दोष कोई गैर-कानूनी काम नहीं है। यह ज़्यादा से ज़्यादा CrPC की धारा 215 और 464 के दायरे में आने वाली एक ठीक की जा सकने वाली प्रक्रियागत अनियमितता है।...
किसी एक धर्म को 'एकमात्र सच्चा धर्म' बताना गलत, इससे दूसरे धर्मों का अपमान होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने IPC की धारा 295A के तहत दर्ज केस रद्द करने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि धर्मनिरपेक्ष भारत में किसी भी व्यक्ति के लिए यह दावा करना 'गलत' है कि कोई विशेष धर्म ही "एकमात्र सच्चा धर्म" है, क्योंकि ऐसा करने का मतलब है कि वह दूसरे धर्मों का 'अपमान' कर रहा है, और पहली नज़र में इस पर IPC की धारा 295A लागू होती है।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की बेंच ने यह टिप्पणी रेवरेंड फादर विनीत विंसेंट परेरा द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए की। परेरा पर IPC की धारा 295A [जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक...
सह-मालिक की सहमति न होने पर बिजली कनेक्शन देने से मना नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी संपत्ति पर मालिकाना हक या कब्ज़े के अधिकार का सवाल, किसी ऐसे उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन देने से जुड़ा नहीं है, जो अन्यथा इसके लिए हकदार है।कोर्ट ने आगे कहा कि कोई कंपनी किसी उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन देने के लिए संपत्ति के अन्य सह-मालिकों की सहमति पर ज़ोर नहीं दे सकती।मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता ने एक ज़मीन के लिए बिजली कनेक्शन मांगा था, लेकिन बिजली कंपनी ने एक सूचना भेजकर कहा कि उस ज़मीन पर स्थित एक कुआं किसी अन्य व्यक्ति की भी संयुक्त संपत्ति है, इसलिए आगे...
पटना हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट भर्ती में वेटलिस्टेड उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश रद्द किया, कहा- 'खामोश बैठने वाले' समानता का दावा नहीं कर सकते
पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो उम्मीदवार चयन पैनल के अस्तित्व में रहने के दौरान अपने अधिकारों का दावा करने में विफल रहते हैं, वे बाद में उन दूसरों के साथ समानता की मांग नहीं कर सकते, जिन्होंने समय पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने दोहराया कि रिट राहत में देरी और लापरवाही के कारण रोक है और अनुच्छेद 14 "नकारात्मक समानता" के आधार पर लाभों के विस्तार की अनुमति नहीं देता।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की एक खंडपीठ (Division Bench) C.W.J.C. संख्या 10521/2022 में एक...
पत्नी को प्रेमी के साथ अंतरंग अवस्था में देखना गंभीर और अचानक उकसावा: गुजरात हाईकोर्ट ने 2001 की गैर-इरादतन हत्या की सज़ा बरकरार रखी
गुजरात हाईकोर्ट ने 2001 का ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें एक पति को गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) का दोषी ठहराया गया। इस पति ने अपनी पत्नी पर तब हमला किया, जब उसने उसे अपने ही घर में किसी दूसरे आदमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इसे "गंभीर और अचानक उकसावा" माना जा सकता है।ऐसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह मामला IPC की धारा 304-भाग II के अंतर्गत आता है, क्योंकि पति पर अपनी पत्नी की मौत का इरादा या जानकारी होने का आरोप नहीं लगाया जा...
MUDA जमीन घोटाला: सीएम सिद्धारमैया को राहत देने वाली बी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) जमीन घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा कदम उठाते हुए बी रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) स्वीकार करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस एस सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी बीएम पार्वती, रिश्तेदार मल्लिकार्जुन स्वामी, भूमि मालिक देवराजु, प्रवर्तन निदेशालय और लोकायुक्त पुलिस को नोटिस जारी किया।यह याचिका स्नेहमयी कृष्णा द्वारा दायर की गई, जिसमें 28 जनवरी को ट्रायल कोर्ट...
भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी को जेल कंप्यूटर उपयोग की अनुमति पर विचार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग को साक्ष्यों की समीक्षा के लिए जेल में कंप्यूटर उपयोग की अनुमति देने के सवाल पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की पीठ ने गाडलिंग को निजी लैपटॉप इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, लेकिन यह संकेत दिया कि जेल में उपलब्ध कंप्यूटर के उपयोग पर विचार किया जा सकता है।अदालत ने कहा,“लैपटॉप के उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे जेल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं और यह गलत...
डोमिसाइल में तकनीकी गलती पर उम्मीदवार को नहीं किया जा सकता बाहर: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एसएससी अभ्यर्थी को राहत देते हुए कहा कि डोमिसाइल से जुड़ी एक मामूली तकनीकी त्रुटि को तथ्यों को छिपाने के समान नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि सख्त नियमों का यांत्रिक तरीके से प्रयोग कर किसी योग्य उम्मीदवार का भविष्य खराब नहीं किया जा सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अभ्यर्थी की उम्मीदवारी खारिज करने का आदेश रद्द किया।मामला कांस्टेबल (GD) भर्ती परीक्षा 2018 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने ऑनलाइन आवेदन भरा था, लेकिन साइबर कियोस्क पर फॉर्म...
पत्नी के चरित्र पर शक मात्र से आत्महत्या के लिए उकसाना साबित नहीं होता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पति को बरी किया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पत्नी के चरित्र पर शक करना या सामान्य वैवाहिक विवाद, बिना किसी ठोस उकसावे या सहायता के आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण नहीं माना जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर पति को बरी किया।जस्टिस आशीष नैथानी ने सेशन कोर्ट, उधम सिंह नगर का फैसला रद्द किया, जिसमें पति को भारतीय दंड संहिता धारा 306 के तहत दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई गई थी।मामला 15 सितंबर, 2004 का है, जब आरोपी की पत्नी ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अभियोजन का आरोप था...
उधारकर्ता की सहमति बिना तीसरे पक्ष को ऋण देने पर बैंक दोषी: उपभोक्ता आयोग
कुपवाड़ा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जम्मू-कश्मीर बैंक को सेवा में कमी (deficiency in service) का दोषी ठहराया। आयोग ने पाया कि बैंक ने शिकायतकर्ता की सहमति के बिना ऋण राशि का एक हिस्सा तीसरे पक्ष को जारी कर दिया, जो पूरी तरह अवैध और मनमाना कदम था।आयोग, जिसकी अध्यक्षता पीरज़ादा क़ौसर हुसैन (अध्यक्ष) और सदस्य सुश्री नायला यासीन ने की, ने यह भी कहा कि बिना वैध वितरण के पूरे ऋण पर EMI वसूलना और रिकवरी प्रक्रिया शुरू करना सेवा में कमी के दायरे में आता है।मामले के...
यूपी में 80% लापता लोग खोजे गए: नई रिपोर्ट पर हाईकोर्ट, पहले का 'चौंकाने वाला' आंकड़ा गलत तरीके से पेश हुआ
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश पुलिस ने ताजा आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि 1 जनवरी 2024 से 17 मार्च 2026 के बीच राज्य में 1,19,070 लोग लापता हुए, जिनमें से 95,061 (करीब 80%) को खोज लिया गया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ इस मामले में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।अदालत ने नए आंकड़ों पर गौर करते हुए कहा कि पहले जो आंकड़े पेश किए गए, वे सही तरीके से अदालत तक नहीं पहुंचे थे।खंडपीठ ने टिप्पणी की, “प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि 29.01.2026 के...
पेंशन व रिटायरमेंट लाभ न देने पर सख्ती, झारखंड हाईकोर्ट ने परिवहन अधिकारी का वेतन रोका
झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पलामू के जिला परिवहन पदाधिकारी का वेतन रोकने का निर्देश दिया। अदालत ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया, क्योंकि रिटायर कर्मचारी को अब तक पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ नहीं दिए गए।जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका उस आदेश से जुड़ी थी, जिसमें 23 अक्टूबर 2024 को अदालत ने रिटायर लिपिक को पेंशन, सभी रिटायरमेंट लाभ, 6 प्रतिशत ब्याज और 50 हजार रुपये खर्च देने का निर्देश दिया था।याचिकाकर्ता 31 मार्च 2011 को रिटायर हुए, लेकिन विभाग...
सिविल जज भर्ती में SC अभ्यर्थियों के लिए 45% न्यूनतम अंक शर्त में ढील पर विचार करें: सुप्रीम कोर्ट ने P&H हाईकोर्ट से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती परीक्षा में अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए 45% न्यूनतम अंकों की शर्त में ढील देने के अनुरोध पर “सहानुभूतिपूर्वक विचार” करे।यह मामला अनुसूचित जाति वर्ग की अभ्यर्थी दीक्षा काल्सन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। उन्होंने कहा कि वह केवल 1.9 अंकों से निर्धारित कट-ऑफ से पीछे रह गईं।याचिका के अनुसार, काल्सन ने 1100 में से 493.10 अंक प्राप्त किए, जबकि SC श्रेणी...
पिता-बेटी को 'सच्चाई जानने का अधिकार': भरण-पोषण विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने DNA टेस्ट का दिया आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक नाबालिग बच्ची को धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण (maintenance) देने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि पहले बच्ची की वास्तविक पितृत्व (biological parentage) की पुष्टि के लिए DNA टेस्ट कराया जाना आवश्यक है।जस्टिस मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में पिता और बेटी दोनों को जैविक सच्चाई जानने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि वास्तविक पिता की पहचान स्पष्ट नहीं होगी, तो...
बाइपोलर डिसऑर्डर मात्र से नहीं मिलेगा स्थानांतरण में छूट, बेंचमार्क दिव्यांगता जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय संगठन की एक शिक्षिका के स्थानांतरण को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि केवल बाइपोलर डिसऑर्डर होने से मेडिकल आधार पर छूट नहीं मिल सकती, जब तक कि बेंचमार्क दिव्यांगता का प्रमाण न हो।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज की। अधिकरण ने भी शिक्षिका के दिल्ली से बाबूगढ़ छावनी स्थित केंद्रीय विद्यालय में स्थानांतरण में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।याचिकाकर्ता जो केंद्रीय विद्यालय संगठन...
22 बार सुनवाई के बावजूद आदेश की अवहेलना, एमपी हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दो माह की सजा सुनाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश का बार-बार पालन न करने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो माह की साधारण कारावास की सजा सुनाई।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला 22 बार सूचीबद्ध हुआ फिर भी आदेश का पालन नहीं किया गया।जस्टिस प्रणय वर्मा की पीठ ने कहा,“याचिका 22वीं बार सूचीबद्ध हुई और अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया। 06.02.2026 के आदेश के अनुसार प्रतिवादी अवमानना के दोषी है। उन्हें दो माह के साधारण कारावास की सजा दी जाती है।”हालांकि, अदालत...
डंकी रूट से मानव तस्करी मामले में आरोपियों को राहत नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने डंकी रूट के जरिए अवैध तरीके से लोगों को विदेश भेजने वाले मानव तस्करी गिरोह से जुड़े आरोपियों को नियमित जमानत देने से इनकार किया।अदालत ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है। इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हैं। इसलिए आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती।जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की पीठ आरोपियों की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष जज (NIA) द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी।मामले में आरोप है कि आरोपी लोगों को कानूनी तरीके से विदेश...




















