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AMU में फिलिस्तीन समर्थक नारों की भड़काऊ कवरेज के लिए Zee News पर ₹2 लाख का जुर्माना, NBDSA ने दिया वीडियो हटाने का आदेश

न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान फिलिस्तीन के समर्थन में लगाए गए नारों की कवरेज के लिए Zee News पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अथॉरिटी ने माना कि यह ब्रॉडकास्टिंग आचार संहिता (Code of Conduct) का उल्लंघन है।यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस ए.के. सीकरी (रिटायर्ड) की अध्यक्षता वाली अथॉरिटी ने जारी किया।अथॉरिटी ने Zee News को अपनी वेबसाइट, YouTube और अन्य चैनल प्लेटफॉर्म से विवादित फुटेज...

2.10 करोड़ से ज्यादा मामलों का निपटारा, ₹13,589 करोड़ के समझौतों के साथ तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत संपन्न

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा वर्ष 2026 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 12 सितंबर को देशभर में किया गया। इसका उद्देश्य लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों को आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से सरल एवं त्वरित तरीके से निपटाना रहा।इस राष्ट्रीय लोक अदालत में 26 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों में विभिन्न स्तरों पर लोक अदालत पीठों का गठन किया गया। इसमें उच्च न्यायालयों से लेकर तालुका स्तर तक न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पैरा-लीगल वॉलंटियर्स और पक्षकारों ने भाग लिया।NALSA के...

S.164 Electricity Act | पावर ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए ज़मीन मालिक की मंज़ूरी ज़रूरी नहीं, मुआवज़े का अधिकार बना रहेगा: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए ज़मीन मालिक की पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं है, अगर बिजली कंपनी को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 164 के तहत टेलीग्राफ अथॉरिटी की शक्तियां दी गई हैं। [2026 LiveLaw (MP) 366]एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने साफ़ किया कि एक बार ऐसी शक्तियां मिल जाने के बाद कंपनी इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 (ITA) की धारा 10 और 16 के तहत टेलीग्राफ अथॉरिटी को मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है।कोर्ट...

IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का एक गंभीर कृत्य भी अपराध माना जा सकता है, कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि क्रूरता का एक ही गंभीर कृत्य IPC की धारा 498A के तहत अपराध माना जा सकता है और इसके लिए कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी नहीं है।जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने कहा:“पति-पत्नी के बीच हर तरह की परेशानी, असहमति या बुरे बर्ताव को IPC की धारा 498A के तहत 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता... साथ ही यह भी नहीं कहा जा सकता कि क्रूरता साबित करने के लिए हमेशा कई कृत्यों की श्रृंखला ज़रूरी है। अगर कोई एक कृत्य काफ़ी गंभीर हो और क़ानूनी परिभाषा के दायरे में आता हो, तो उसे भी क्रूरता...

सरकारी डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी प्रभारी डॉक्टर की, अधीनस्थ पर नहीं डाल सकते दोष: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी के प्रभारी डॉक्टर को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि डिस्पेंसरी के रिकॉर्ड और उसमें होने वाली प्रविष्टियों की जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारी की होती है। अधीनस्थ कर्मचारी ने अपना काम ठीक से नहीं किया तो इससे प्रभारी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता।जस्टिस आनंद शर्मा ने सरकारी आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी, किशनपुर, बेराठ के प्रभारी रहे डॉक्टर की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।बता दें, डॉक्टर को एक अन्य सरकारी...

गैर-वाणिज्यिक मुकदमों में लिखित बयान की देरी माफ करने का कोई तय फार्मूला नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि गैर-वाणिज्यिक दीवानी मुकदमों में लिखित बयान दाखिल करने की समय-सीमा को लेकर कोई कठोर या तय फार्मूला नहीं अपनाया जा सकता। हर मामले में देरी के कारणों को उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर परखा जाना चाहिए।जस्टिस सुदेश बंसल ने कहा कि दीवानी प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 8 नियम 1 के तहत लिखित बयान दाखिल करने की समय-सीमा अनिवार्य नहीं, बल्कि निर्देशात्मक है। हालांकि निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद लिखित बयान दाखिल करने की अनुमति मांगने वाले पक्ष को देरी के लिए पर्याप्त...

लखनऊ जिला कोर्ट के आसपास बचे अवैध कब्जे भी हटेंगे, हाईकोर्ट ने पांच हफ्ते में कार्रवाई के दिए निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ जिला एवं सेशन कोर्ट के आसपास बचे सभी अवैध कब्जे हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने बताया कि उसके पहले के आदेशों के अनुपालन में 57 और अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। इससे पहले 14 अवैध निर्माण हटाए गए।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने लखनऊ में जिला एवं सेशन कोर्ट परिसर तथा आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में कथित अवैध कब्जों से संबंधित दो याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।लखनऊ नगर निगम के जोन-1 के जोनल अधिकारी ने 8 सितंबर 2026 के निर्देशों के साथ हटाए...

पूजा करना मौलिक अधिकार: मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपुर में गणेश प्रतिमा स्थापित करने की दी अनुमति

मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपुर में विनायक चतुर्थी के अवसर पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पूजा करना मौलिक अधिकार है और याचिकाकर्ताओं को प्रतिमा स्थापित करने से रोका नहीं जाना चाहिए।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण ने हिंदू मुन्नानी के कार्यकारी समिति सदस्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए तिरुपुर पुलिस को उस स्थान पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया, जिसे याचिकाकर्ता और पुलिस अधिकारियों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण के बाद तय किया था।याचिकाकर्ता...

RTE Act | नियुक्ति के समय TET नहीं था 31 मार्च 2015 से पहले पास किया तो नहीं जाएगी नौकरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि नियुक्ति के समय शिक्षक के पास शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की योग्यता नहीं थी लेकिन उसने कानून में दी गई समय-सीमा के भीतर TET पास कर लिया तो उसकी नियुक्ति को केवल इस आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने कहा कि RTE Act 2009 की धारा 23 में दी गई सुरक्षा को नजरअंदाज करके राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना के आधार पर शिक्षक की सेवा समाप्त नहीं की...

Electricity Act | दो साल बाद बिजली बकाया वसूलना तभी संभव, जब हर बिल में लगातार बकाया दिखाया गया हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बिजली के पुराने बकाये की वसूली को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि सामान्य तौर पर बिजली की खपत से जुड़ी कोई रकम दो साल के भीतर वसूल की जानी चाहिए। दो साल की अवधि के बाद भी बकाया वसूलना है तो उस रकम को लगातार बिजली बिलों में बकाया के तौर पर दिखाया जाना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर दो साल से अधिक पुरानी रकम की वसूली पर रोक रहेगी।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण कंपनी दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए यह...

सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेज जुटाने के लिए Order XI का सहारा नहीं, कानून आलसी पक्षकार की मदद नहीं करता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के Order XI के नियम 12 और 14 के तहत दस्तावेजों की खोज और पेशी की प्रक्रिया का इस्तेमाल केवल इसलिए नहीं किया जा सकता कि किसी पक्षकार को अपने विरोधी के जरिए सबूत हासिल करना सुविधाजनक लग रहा है। यदि मांगे गए दस्तावेज सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं और संबंधित पक्ष उन्हें कानून के तहत खुद हासिल कर सकता है तो अदालत की प्रक्रिया को सबूत जुटाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह टिप्पणी ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने...

तमिलनाडु में अब डिजिटल जारी होंगे ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी, हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की नई योजना पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार किया। हालांकि हाईकोर्ट ने योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और परिवहन आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने शुक्रवार 11 सितंबर को मामले की सुनवाई की। याचिका में परिवहन आयुक्त की ओर से जारी उस संचार को चुनौती दी गई, जिसके जरिए ड्राइविंग...

सुप्रीम कोर्ट ने डीपफेक और AI कंटेंट को रेगुलेट करने की याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रहे डीपफेक और AI-जनरेटेड कंटेंट के बारे में चिंता जताने वाली PIL पर गुजरात हाई कोर्ट के सामने चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब केंद्र सरकार ने केस को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की याचिका पर नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान वकील ज़ोहेब हुसैन ने बताया कि कोर्ट ने दूसरे हाईकोर्ट में भी ऐसी ही कार्यवाही पर रोक लगाई और वे मामले अब...

गैर-कानूनी मकसद के लिए दिए गए पैसे की वसूली का मुकदमा नहीं चल सकता, इसे CPC ऑर्डर VII नियम 11 के तहत खारिज किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर शिकायत (plaint) से ही पता चलता है कि जिस पैसे की वसूली की मांग की जा रही है, वह गैर-कानूनी और धोखाधड़ी वाले मकसद के लिए दिया गया था तो मुकदमा 'इन पेरी डेलिक्टो' (in pari delicto - यानी दोनों पक्ष गलत काम में शामिल थे) के सिद्धांत के तहत वर्जित है और शिकायत को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के ऑर्डर VII नियम 11(d) के तहत खारिज किया जाना चाहिए।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते...

महाराष्ट्र के धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून को हाईकोर्ट में चुनौती, धार्मिक स्वतंत्रता और निजता के उल्लंघन का आरोप

बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता (MFR) अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई। इसमें तर्क दिया गया कि यह कानून, जिसे 'धर्म-परिवर्तन विरोधी' कानून बताया जा रहा है, नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।यह याचिका मौलाना हलीमुल्लाह फारूक अहमद खान ने वकील अब्दुल मतीन शेख के माध्यम से MFR Act की वैधता को चुनौती देते हुए दायर की।उन्होंने तर्क दिया कि कानून के कई प्रावधान, विशेष रूप से धारा 2(a), 3, 6, 7 और 9, भारत के संविधान के तहत गारंटीकृत...