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लिव-इन संबंध पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी—विवाहित पुरुष और वयस्क महिला साथ रहें तो अपराध नहीं
लिव-इन संबंध पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी—विवाहित पुरुष और वयस्क महिला साथ रहें तो अपराध नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई विवाहित पुरुष किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन संबंध में रहता है, तो यह किसी भी प्रकार का अपराध नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून और नैतिकता को अलग-अलग रखा जाना चाहिए और सामाजिक धारणा अदालत के फैसलों को प्रभावित नहीं कर सकती।जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस करून सक्सेना की खंडपीठ यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कर रही थी, जिसमें एक लिव-इन कपल ने महिला के परिवार से मिल रही धमकियों के खिलाफ सुरक्षा की...

अनुच्छेद 226 के तहत आपराधिक कोर्ट के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अनुच्छेद 226 के तहत आपराधिक कोर्ट के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी आपराधिक अदालत द्वारा पारित न्यायिक आदेश को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल कर चुनौती नहीं दी जा सकती।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें लखनऊ के स्पेशल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (कस्टम) द्वारा फरवरी 2026 में पारित आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।सुनवाई के दौरान राज्य ने याचिका की सुनवाई योग्य होने पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई और नीता सिंह बनाम राज्य, 2024 के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि...

पासपोर्ट जब्ती जैसे मामलों में रिट याचिका सुनने से इनकार करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट
पासपोर्ट जब्ती जैसे मामलों में रिट याचिका सुनने से इनकार करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जब्त किए जाने के खिलाफ दायर रिट याचिका को सुनने से इनकार करने के एकल पीठ का आदेश रद्द किया।अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में गंभीर नागरिक परिणाम होते हैं, इसलिए याचिका पर विचार किया जाना चाहिए।चीफ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।मामला उस आदेश से जुड़ा था जिसमें एकल जस्टिस ने याचिकाकर्ता को पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 11 के तहत वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए कहा था और रिट याचिका सुनने से मना कर दिया था।हाईकोर्ट ने कहा कि...

यूनिवर्सिटी शिक्षक पब्लिक ऑफिस नहीं, क्वो वारंटो याचिका नहीं चलेगी: एमपी हाईकोर्ट
यूनिवर्सिटी शिक्षक 'पब्लिक ऑफिस' नहीं, क्वो वारंटो याचिका नहीं चलेगी: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी में शिक्षक, प्रोफेसर या रीडर 'पब्लिक ऑफिस' के दायरे में नहीं आते इसलिए उनके खिलाफ क्वो वारंटो याचिका दायर नहीं की जा सकती।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।मामला एक यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के लेक्चरर की नियुक्ति को चुनौती देने से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नियुक्त व्यक्ति के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी और उसने गलत प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए।अदालत ने पहले यह स्पष्ट किया कि...

LPG संकट पर वीडियो डालने पर शिक्षक के निलंबन पर रोक, एमपी हाईकोर्ट ने कहा- बिना सोच-समझ के लिया गया फैसला
LPG संकट पर वीडियो डालने पर शिक्षक के निलंबन पर रोक, एमपी हाईकोर्ट ने कहा- बिना सोच-समझ के लिया गया फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी प्राथमिक शिक्षक के निलंबन पर रोक लगाते हुए कहा कि यह आदेश बिना उचित विचार किए और जल्दबाजी में पारित किया गया प्रतीत होता है।जस्टिस आशीष श्रोति की पीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निर्देश दिया कि वह पूरे मामले पर नए सिरे से विचार करें और तथ्यों के आधार पर निर्णय लें।मामला उस शिक्षक से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने 13 मार्च, 2026 को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एलपीजी गैस की कमी पर चर्चा की गई। प्रशासन का आरोप था कि इस वीडियो से समाज में अशांति फैल...

बैंकिंग अनुशासनात्मक जांच में गवाह न होने से कार्यवाही अमान्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
बैंकिंग अनुशासनात्मक जांच में गवाह न होने से कार्यवाही अमान्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि बैंकिंग अनुशासनात्मक जांच में प्रबंधन के गवाहों का न होना अपने आप में कार्यवाही को अवैध नहीं बनाता, यदि निष्कर्ष दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित हों।जस्टिस संजीव नरूला ने यह टिप्पणी पंजाब नेशनल बैंक के एक सीनियर अधिकारी के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की। अधिकारी को ऋण स्वीकृति और निगरानी में कथित लापरवाही के आरोप में सेवा से बर्खास्त किया गया।याचिकाकर्ता का तर्क था कि जांच में किसी भी प्रबंधन...

गुजरात हाईकोर्ट ने पति की सजा बरकरार रखी, पत्नी की हत्या को आत्महत्या दिखाने की साजिश साबित
गुजरात हाईकोर्ट ने पति की सजा बरकरार रखी, पत्नी की हत्या को आत्महत्या दिखाने की साजिश साबित

गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्रायल कोर्ट द्वारा पति को दी गई सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या की और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की।यह मामला 20 सितंबर 2014 का है, जब पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर सूती दोरी/रस्सी से पत्नी का गला घोंट दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने खुद को बचाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए घटना स्थल को इस तरह तैयार किया...

एक्टर मोहनलाल के पर्सनालिटी राइट्स की रक्षा पर दिल्ली हाईकोर्ट देगा अंतरिम आदेश
एक्टर मोहनलाल के पर्सनालिटी राइट्स की रक्षा पर दिल्ली हाईकोर्ट देगा अंतरिम आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मलयालम अभिनेता मोहनलाल के पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अंतरिम आदेश पारित करने का संकेत दिया।जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनवाई के दौरान एक्टर की उस अर्जी को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने नए प्रतिवादियों को मुकदमे में पक्षकार बनाने की मांग की थी।अदालत ने एक्टर मोहनलाल को निर्देश दिया कि वे कथित रूप से उल्लंघन करने वाले लिंक की सूची प्रतिवादियों के साथ साझा करें ताकि मामले पर आगे विचार किया जा सके।गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में अदालत ने एक्टर को अपनी अंतरिम अर्जी वापस लेने की...

रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था ढह जाएगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गैंगस्टर-पुलिस गठजोड़ पर जताई चिंता, DGP को दिए निर्देश
'रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था ढह जाएगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गैंगस्टर-पुलिस गठजोड़ पर जताई चिंता, DGP को दिए निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में पुलिस पर गैंगस्टर को संरक्षण देने के आरोपों को चिंताजनक संस्थागत विफलता करार दिया। अदालत ने कहा कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही उसे तोड़ने लगें तो जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी के इशारे पर गैंगस्टर उन्हें और उनके परिवार को धमका रहा है।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था के पूरी तरह ढहने...

एक ही गलती के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की
एक ही गलती के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की पेंशन केवल एक घटना में अनियमितता के आधार पर नहीं रोकी जा सकती। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि कर्मचारी का पूरा सेवा काल गंभीर रूप से असंतोषजनक रहा हो या उसने गंभीर कदाचार किया हो।चीफ जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ का फैसला बरकरार रखा।मामला जल संसाधन विभाग के जूनियर इंजीनियर से जुड़ा था जिन पर माइक्रोलिफ्ट योजनाओं में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे।...

समय पर पहली अर्जी के बावजूद देरी का बहाना नहीं चलेगा, राजस्थान हाइकोर्ट ने दी राहत
समय पर पहली अर्जी के बावजूद देरी का बहाना नहीं चलेगा, राजस्थान हाइकोर्ट ने दी राहत

राजस्थान हाइकोर्ट ने करुणामूलक नियुक्ति (कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि पहली अर्जी समय पर दी गई हो तो बाद में देरी का हवाला देकर दूसरी अर्जी खारिज नहीं की जा सकती।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया और राज्य को निर्देश दिया कि 90 दिनों के भीतर मामले पर दोबारा विचार कर उचित पद पर नियुक्ति दी जाए।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने अपने पिता के निधन के बाद वर्ष 2015 में करुणामूलक नियुक्ति के लिए आवेदन...

हाईकोर्ट ने किसी भी बात पर चर्चा नहीं की: दहेज हत्या मामले में यांत्रिक तरीके से ज़मानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना की
'हाईकोर्ट ने किसी भी बात पर चर्चा नहीं की': दहेज हत्या मामले में यांत्रिक तरीके से ज़मानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की आलोचना की कि उसने कथित दहेज हत्या के एक मामले में पति को ज़मानत देने का आदेश बिना सोचे-समझे (यांत्रिक तरीके से) पारित किया।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने पाया कि हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता और रिकॉर्ड पर मौजूद उन सबूतों पर विचार किए बिना ज़मानत देकर गलती की, जिनसे पहली नज़र में आरोपी-पति की संलिप्तता का पता चलता है।कोर्ट ने कहा,"हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को ज़मानत पर रिहा करने का जो आदेश दिया गया, वह पूरी तरह से गलत है। दहेज हत्या जैसे...

अगर मुद्दों को तय करने से पहले क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति नहीं उठाई जाती तो उसे छोड़ दिया गया माना जाएगा: दिल्ली हा कोर्ट ने वाद-पत्र लौटाने का आदेश रद्द किया
अगर मुद्दों को तय करने से पहले क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति नहीं उठाई जाती तो उसे छोड़ दिया गया माना जाएगा: दिल्ली हा कोर्ट ने वाद-पत्र लौटाने का आदेश रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ़ किया कि क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति को तब छोड़ दिया गया माना जाएगा, अगर उसे शुरुआती चरण में, खासकर मुद्दों को तय करने से पहले नहीं उठाया जाता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें इसी आधार पर वाद-पत्र (Plaint) लौटा दिया गया।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस तरह वादी (Plaintiff) द्वारा दायर एक अपील को मंज़ूरी दी। इस अपील में CPC के आदेश VII नियम 10 के तहत पारित आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत ट्रायल कोर्ट ने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर...

कानूनी शादी में यौन संबंध के लिए सहमति का कोई महत्व नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ IPC की धारा 377 के तहत आरोप रद्द किए
'कानूनी शादी में यौन संबंध के लिए सहमति का कोई महत्व नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ IPC की धारा 377 के तहत आरोप रद्द किए

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पति की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की, जिसमें उसने यौन शोषण और दहेज उत्पीड़न के आरोप में दर्ज FIR रद्द करने की मांग की। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि बलात्कार से जुड़े प्रावधानों में दी गई छूटों को देखते हुए एक पति द्वारा अपनी वयस्क पत्नी के साथ किया गया कोई भी यौन संबंध या यौन कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए शादी के दायरे में सहमति का पहलू कानूनी तौर पर महत्वहीन है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने यह टिप्पणी की:"...IPC की धारा 375 के अपवाद 2 (Exception 2)...

ऊपरी अदालतों के आदेशों का सम्मान बुनियादी सिद्धांत: सुप्रीम कोर्ट ने रेंट अथॉरिटी को एससी द्वारा पुष्ट बेदखली आदेश पर फिर से विचार करने के लिए फटकारा
'ऊपरी अदालतों के आदेशों का सम्मान बुनियादी सिद्धांत': सुप्रीम कोर्ट ने रेंट अथॉरिटी को एससी द्वारा पुष्ट बेदखली आदेश पर फिर से विचार करने के लिए फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की रेंट कंट्रोल अथॉरिटी (किराया नियंत्रण प्राधिकरण) को फटकार लगाई। अथॉरिटी ने किरायेदार की बेदखली की पुष्टि करने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की और किरायेदार के आवेदन पर मामले को फिर से खोल दिया, जबकि यह मामला पहले ही अंतिम रूप ले चुका था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें किरायेदार की बेदखली का मामला अंतिम रूप ले चुका था और सुप्रीम कोर्ट तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके बावजूद, रेंट कंट्रोल अथॉरिटी...