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अस्पष्ट और तर्कहीन आदेश रद्द: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर परिषद अध्यक्ष को हटाने के फैसले पर लगाई रोक
पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत पंजाब म्युनिसिपल एक्ट 1911 की धारा 22 के तहत नगर परिषद, समाना के अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया था। कोर्ट ने इसे पूरी तरह से अस्पष्ट और तर्कहीन आदेश माना।जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने मामले को राज्य सरकार को वापस भेज दिया, ताकि वह इस तथ्य पर नए सिरे से निर्णय ले सके कि क्या जिस बैठक में याचिकाकर्ता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया, वह 1911 अधिनियम के प्रावधानों के तहत वैध रूप से...
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के 20 साल पुराने हाउसिंग प्रोजेक्ट के समाधान के लिए पूर्व हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में समिति गठित की
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा स्थित शिव कला चार्म्स प्रोजेक्ट से जुड़े लंबे समय से लंबित आवासीय विवाद की स्वतंत्र जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पंकज नकवी (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में एक एक-सदस्यीय समिति (One-Member Committee) गठित करने का निर्देश दिया है। यह मामला लगभग दो दशकों से लंबित है और इसमें सैकड़ों ऐसे घर खरीदार शामिल हैं जिन्हें गोल्फ कोर्स सहकारी आवास समिति (GCSAS) और शिव कला डेवलपर्स प्रा. लि. द्वारा विकसित इस प्रोजेक्ट में निवेश के बाद ठगा गया था।जस्टिस विक्रम...
बिना रजिस्ट्री वाला पारिवारिक समझौता बंटवारा साबित करने के लिए मान्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (6 नवंबर) को यह स्पष्ट किया कि संयुक्त परिवार की संपत्ति में किसी सहभाजनकर्ता (coparcener) द्वारा किए गए पंजीकृत परित्याग विलेख (registered relinquishment deed), जिसके तहत वह अपना हिस्सा छोड़ देता है, तुरंत प्रभाव से लागू होता है, भले ही उसे आगे लागू करने की कोई प्रक्रिया न की गई हो।अदालत ने कहा, “यदि किसी सहभाजनकर्ता ने किसी प्रतिफल (consideration) के बदले में अपने अधिकारों का परित्याग किया है, तो वह विलेख तुरंत प्रभाव से उसके अधिकार समाप्त कर देता है। इसकी वैधता किसी...
संपत्ति खरीदना कठिन: सुप्रीम कोर्ट ने भूमि रजिस्ट्रेशन में ब्लॉकचेन तकनीक अपनाने का सुझाव दिया
सुप्रीम कोर्ट ने भारत की भूमि पंजीकरण और स्वामित्व प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि देश का मौजूदा ढांचा अब भी औपनिवेशिक कानूनों — ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882, इंडियन स्टैम्प एक्ट, 1899 और रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 — पर आधारित है, जिसने भ्रम, भ्रष्टाचार, देरी और मुकदमों की भरमार पैदा की है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रेशन एक्ट केवल दस्तावेज़ का पंजीकरण करता है, स्वामित्व की गारंटी नहीं देता, जिसके कारण...
सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप : अक्टूबर, 2025
सुप्रीम कोर्ट में अक्टूबर, 2025 में क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप। अक्टूबर महीने के सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।ट्रायल कोर्ट केवल निजी गवाह के हलफनामे के आधार पर चार्जशीट में न उल्लिखित अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी ट्रायल कोर्ट को केवल निजी गवाहों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों (अफिडेविट्स) के आधार पर चार्जशीट में न उल्लिखित अतिरिक्त अपराधों का संज्ञान नहीं लेना चाहिए, बिना जांच रिकॉर्ड...
'आवारा कुत्तों की लगातार मौजूदगी जन सुरक्षा के लिए ख़तरा': सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से कुत्तों को हटाने के लिए जारी किए दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने भारत भर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी जन सुरक्षा के लिए ख़तरा बनी हुई है। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने की बार-बार होने वाली घटनाएं, खासकर शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, परिवहन केंद्रों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर, गंभीर प्रशासनिक खामियों और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के सुरक्षा के अधिकार को सुरक्षित रखने में व्यवस्थागत विफलता को उजागर करती हैं।कई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए, बेंच ने...
राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एडवोकेट शेहला चौधरी द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें भारत भर की सभी राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने की मांग की गई। इसमें रोटेशन के आधार पर कम से कम एक पदाधिकारी का पद भी शामिल है।याचिका में कहा गया,"भारतीय संविधान में लैंगिक समानता का सिद्धांत इसकी प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों और राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में निहित है। राज्य बार काउंसिलों की सदस्य न होने वाली महिला वकीलों की अनुपस्थिति में...
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावों में 'विभाजन गुणक' के इस्तेमाल पर रोक लगाई, मृत्यु के समय की आय को ध्यान में रखना अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावों के मामलों में मुआवज़े की गणना पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि 'विभाजन गुणक' पद्धति लागू नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुआवज़े की गणना केवल मृतक की मृत्यु के समय की आय के आधार पर की जानी चाहिए।कोर्ट ने कहा,"हमारा मानना है कि मुआवज़े की गणना के लिए मृत्यु की तिथि तक की आय को आधार बनाया जाना चाहिए... दूसरे शब्दों में, विभाजन गुणक मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के लिए एक विदेशी अवधारणा है। इसका उपयोग न्यायाधिकरण और/या न्यायालयों द्वारा...
"मीडिया की चर्चा के दीवाने हो गए हो": संविधान (अनुसूचित जातियाँ) आदेश 1950 को चुनौती देने वाले लॉ स्टूडेंट को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक तीसरे वर्ष के क़ानून के छात्र की याचिका को खारिज करते हुए उसे कड़ी फटकार लगाई। छात्र ने 1950 के संविधान (अनुसूचित जातियाँ) आदेश — जो राष्ट्रपति द्वारा पारित आदेश है और जिसमें अनुसूचित जातियों की सूची निर्धारित की गई है — को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्य बागची की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता (जो स्वयं पेश हुए थे) से कहा कि पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय वे “फिजूल की याचिका” दाखिल...
क्रिकेटर मोहम्मद शमी को पत्नी की मासिक गुजारा भत्ता बढ़ाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को उनकी पत्नी द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने और अपनी बेटी के लिए गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग की।पत्नी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 1 जुलाई, 2025 और 25 अगस्त, 2025 के आदेशों को चुनौती दी, जिसमें उनके अंतरिम गुजारा भत्ता को बढ़ाकर ₹1.5 लाख प्रति माह और उनकी नाबालिग बेटी के लिए ₹2.5 लाख प्रति माह कर दिया गया था। शमी की आर्थिक स्थिति और जीवनशैली को देखते हुए यह राशि बेहद अपर्याप्त बताते हुए, जहां ने अपने लिए गुजारा भत्ता...
सिर्फ इतना कहना कि 'बेटी दुखी थी' या 'अक्सर रोती थी' 498A के तहत ससुराल वालों या पति को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी महिला के ससुराल वालों या पति को केवल इस आधार पर धारा 498A (क्रूरता) के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि महिला के माता-पिता ने कहा हो कि उनकी बेटी शादी में 'असंतुष्ट' थी या 'रोती रहती थी'।जस्टिस मिलिंद सथाये ने पुणे की सत्र न्यायालय के 17 नवंबर 1998 के फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें रामप्रकाश मनोहर को धारा 498A (क्रूरता) और धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत उसकी पत्नी रेखा की आत्महत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। रेखा ने नवंबर...
BREAKING| अकोला दंगों की जांच के लिए हिंदू-मुस्लिम अधिकारियों वाली SIT के गठन के आदेश के पुनर्विचार पर सुप्रीम कोर्ट का खंडित फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर विभाजित फैसला सुनाया, जिसमें 2023 के अकोला दंगों के दौरान हुए एक हमले की जांच में राज्य सरकार की विफलता से संबंधित आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन के निर्देश देने वाले आदेश की पुनर्विचार की मांग की गई थी।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की उस याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें 11 सितंबर के अपने आदेश की पुनर्विचार की मांग की गई थी। इस आदेश में हमले की जांच में विफल रहने के लिए महाराष्ट्र...
लंबी तारीखें न दें, जल्दी साक्ष्य दर्ज करें : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ट्रायल कोर्ट्स को निर्देश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निचली अदालतों (ट्रायल कोर्ट्स) को सलाह दी है कि वे अनावश्यक रूप से लंबी तारीखें (adjournments) न दें, क्योंकि इससे मुकदमों के निपटारे में देरी होती है। अदालत ने कहा कि विशेष रूप से तब जब आरोपी न्यायिक हिरासत में हो, साक्ष्य दर्ज करने (recording of evidence) के लिए छोटी और लगातार तारीखें तय की जानी चाहिए।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा ने टिप्पणी की, “यह देखा गया है कि कई मामलों में ट्रायल कोर्ट्स लंबे समय की तारीखें दे देते हैं, भले ही आरोपी जेल में हो। ऐसी प्रथा न केवल मुकदमे के...
जस्टिस अशोक भूषण को दूसरी बार NCLAT का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया
केंद्र सरकार ने भारत के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस अशोक भूषण की राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) के चेयरपर्सन के रूप में दूसरी बार नियुक्ति को मंजूरी दी। यह पुनर्नियुक्ति उनके कार्यभार संभालने की तिथि से प्रभावी होगी और वे 70 वर्ष की आयु तक इस पद पर बने रहेंगे यानी 4 जुलाई 2026 तक।जस्टिस भूषण को पहली बार 29 अक्टूबर 2021 को NCLAT का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया था। उन्होंने 8 नवंबर, 2021 को पदभार ग्रहण किया था। उनका वर्तमान कार्यकाल आज (शुक्रवार) समाप्त हो रहा है।जस्टिस अशोक भूषण का...
RSS रूट मार्च पर कर्नाटक सरकार का रुख सकारात्मक, हाईकोर्ट को दी जानकारी
कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार (7 नवंबर) को हाईकोर्ट को सूचित किया कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कलबुर्गी के संयोजक द्वारा चित्तापुर शहर में प्रस्तावित पथसंचलन आयोजित करने के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी।यह जानकारी राज्य के एडवोकेट जनरल शशिकिरण शेट्टी ने जस्टिस एम.जी.एस. कमल की अदालत में दी। उन्होंने कहा कि 5 नवंबर को आयोजित बैठक में RSS संयोजक अशोक पाटिल सहित सभी पक्षों ने भाग लिया और चर्चा रचनात्मक रही।30 अक्टूबर को अदालत ने RSS कलबुर्गी के संयोजक अशोक पाटिल को निर्देश दिया था कि वह 5...
बीमा सुगम डोमेन नामों के हस्तांतरण के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक
दिल्ली हाईकोर्ट ने बीमा सुगम इंडिया फेडरेशन को www.bimasugam.com और www.bimasugam.in डोमेन नाम हस्तांतरित करने के सिंगल जज के आदेश पर रोक लगा दी।अदालत ने यह अंतरिम आदेश उस अपील पर सुनाया, जिसमें बीमा एजेंट और निजी व्यक्ति ए. रेंज गौड़ा ने 16 अक्टूबर, 2025 को पारित आदेश को चुनौती दी थी।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने 30 अक्टूबर, 2025 को आदेश पारित करते हुए कहा कि जब तक ट्रेडमार्क विवाद का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक डोमेन हस्तांतरण नहीं किया जाएगा।मामले की...
मूल दस्तावेज़ के खो जाने या नष्ट होने का सख्त प्रमाण मिलने पर ही स्वीकार होगे द्वितीयक साक्ष्य: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में कहा कि अदालतें तभी द्वितीयक साक्ष्य स्वीकार कर सकती हैं जब मूल दस्तावेज़ के खो जाने, नष्ट होने या विपक्षी पक्ष द्वारा जानबूझकर रोककर रखने का ठोस और विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत किया जाए। केवल आरोप लगाना या बिना साक्ष्य के दावा करना इस आधार पर पर्याप्त नहीं होगा।जस्टिस अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने कहा,“जांच रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि वादी द्वारा पंजीकरण के लिए कोई मूल दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किया गया था। उसने केवल वसीयत की फोटोकॉपी जमा की थी और इस संबंध में...
घरेलू सहायिका आत्महत्या मामले में SP MLA और पत्नी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, ट्रायल पर लगी रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में भदोही से समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक ज़ाहिद बेग @ ज़ाहिद जमाल बेग और उनकी पत्नी सीमा बेग के खिलाफ चल रहे सेशन ट्रायल की आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। विधायक और उनकी पत्नी पर उनकी घरेलू सहायिका की आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने विधायक और उनकी पत्नी द्वारा दायर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया। यह याचिका दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग कर रही थी।आवेदकों की ओर से...
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया जेल में बंद सांसद इंजीनियर राशिद की याचिका पर विभाजित फैसला, मामला चीफ जस्टिस की पीठ को भेजा गया
जम्मू-कश्मीर के बारामूला से सांसद इंजीनियर राशिद की याचिका पर शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने विभाजित फैसला सुनाया। राशिद ने ट्रायल कोर्ट द्वारा संसद सत्र में शामिल होने के लिए दी गई हिरासत परोल की अनुमति के साथ लगाए गए चार लाख रुपये के खर्चे को चुनौती दी थी।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस अनुप जयराम भांबनी की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। जहां जस्टिस विवेक चौधरी ने राशिद की याचिका को खारिज कर दिया, वहीं जस्टिस भांबनी ने याचिका को स्वीकार कर लिया।दोनों जजों के बीच मतभेद होने के कारण अब यह मामला...
बांग्लादेश से हो रहा अवैध प्रवास बदल रहा असम की जनसांख्यिकी, राज्य में बढ़ रहा है असंतोष: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि बांग्लादेश से हो रहा अवैध प्रवास असम की जनसांख्यिकी (demography) को बदल रहा है, जिसके कारण राज्य में व्यापक असंतोष फैल रहा है।कोर्ट ने यह भी माना कि राज्य सरकार के पास “घोषित विदेशी नागरिकों” (declared foreign nationals) को देश से बाहर निकालने की पूरी शक्ति है। अगर किसी कारण से ऐसे व्यक्तियों को निष्कासित (expel) नहीं किया जा सकता, तो राज्य सरकार उन्हें रोजगार पाने, भूमि खरीदने, भारतीय नागरिक से विवाह करने आदि से रोक सकती है — इसके...




















