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2025 के चौथी राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल  2.59 करोड़ केस निस्तारित, ₹7,747 करोड़ का निपटान
2025 के चौथी राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 2.59 करोड़ केस निस्तारित, ₹7,747 करोड़ का निपटान

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) ने 13 दिसंबर 2025 को वर्ष 2025 की चौथी राष्ट्रीय लोक अदालत का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह आयोजन देश के 26 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में उच्च न्यायालयों, जिला न्यायालयों, विभिन्न अधिकरणों, उपभोक्ता मंचों तथा स्थायी लोक अदालतों में एक साथ संपन्न हुआ।इस राष्ट्रीय पहल का मार्गदर्शन भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं नालसा के संरक्षक-प्रमुख जस्टिस सूर्यकांत तथा NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस विक्रम नाथ द्वारा किया गया।राष्ट्रीय लोक...

फैसले इतने आसान होने चाहिए कि नागरिक उन्हें समझ सकें: CJI सूर्यकांत ने बहुत ज़्यादा कानूनी शब्दों के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी
फैसले इतने आसान होने चाहिए कि नागरिक उन्हें समझ सकें: CJI सूर्यकांत ने 'बहुत ज़्यादा कानूनी शब्दों' के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी

शनिवार को वेस्ट ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका से जानबूझकर "बहुत ज़्यादा कानूनी शब्दों" को कम करने का आग्रह किया, जो न्याय और उससे जुड़े लोगों के बीच दूरी पैदा करते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि फैसले साफ और समझने लायक भाषा में लिखे जाने चाहिए।मुख्य भाषण देते हुए CJI ने चेतावनी दी कि अगर न्याय "पढ़ने लायक या अस्पष्ट" है तो यह उन लोगों के लिए अपना मतलब खोने का जोखिम उठाता है, जिनकी सेवा करने का इसका मकसद है। उन्होंने इस बात पर...

S. 321 CrPC | सिर्फ़ राज्य सरकार की प्रॉसिक्यूशन वापस लेने की मंशा बाध्यकारी नहीं, PP और कोर्ट द्वारा स्वतंत्र जांच ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
S. 321 CrPC | सिर्फ़ राज्य सरकार की प्रॉसिक्यूशन वापस लेने की मंशा बाध्यकारी नहीं, PP और कोर्ट द्वारा स्वतंत्र जांच ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि किसी खास मामले में राज्य सरकार द्वारा प्रॉसिक्यूशन वापस लेने की "सिर्फ़ मंशा ज़ाहिर करना" न तो कोर्ट को बाध्य करता है, न ही पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और न्यायपालिका द्वारा स्वतंत्र जांच की कानूनी ज़रूरत को कम करता है।धोखाधड़ी और SC-ST Act के तहत अपराधों से जुड़े एक मामले में चार आरोपियों द्वारा दायर आपराधिक अपील खारिज करते हुए जस्टिस शेखर कुमार यादव की बेंच ने ज़ोर दिया कि CrPC की धारा 321 के तहत प्रॉसिक्यूशन वापस लेना तभी मंज़ूर है, जब पब्लिक प्रॉसिक्यूटर...

क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर पारित सेशन जज के आदेश पर हाईकोर्ट को गंभीर आपत्ति, चीफ जस्टिस के संज्ञान में लाने के निर्देश
क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर पारित सेशन जज के आदेश पर हाईकोर्ट को गंभीर आपत्ति, चीफ जस्टिस के संज्ञान में लाने के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने थाना बदनोर, जिला ब्यावर में दर्ज सामूहिक मारपीट के एक मामले में चार अभियुक्तों को जमानत प्रदान करते हुए तत्कालीन सेशन जज दिनेश कुमार गुप्ता द्वारा पारित कुछ निर्देशों पर गंभीर टिप्पणी की। जस्टिस सुदेश बंसल ने स्पष्ट किया कि जमानत याचिका का निस्तारण करते समय न्यायालय अपने अधिकार-क्षेत्र से बाहर जाकर अन्य प्रशासनिक या नीतिगत निर्देश जारी नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि तत्कालीन सेशन जज, ब्यावर द्वारा पारित आदेश...

सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को 40 आतंकी पीड़ितों को 5 लाख रुपये देने का निर्देश दिया, जिनकी नियुक्तियां खत्म कर दी गईं
सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को 40 आतंकी पीड़ितों को 5 लाख रुपये देने का निर्देश दिया, जिनकी नियुक्तियां खत्म कर दी गईं

सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए एक विशेष राज्य नीति के तहत लोअर डिवीजन असिस्टेंट (LDA) के पद पर नियुक्त 40 लोगों में से प्रत्येक को 5 लाख रुपये देने का निर्देश दिया।जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव किया, जिसने राज्य सरकार के बर्खास्तगी आदेशों को रद्द कर दिया, जिसमें इन लोगों को फिर से बहाल करने के बजाय, बेंच ने राज्य सरकार के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्हें फिर से बहाल करने के...

जनहित से जुड़े शांतिपूर्ण आंदोलनों पर दर्ज मामलों की वापसी को मंजूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
जनहित से जुड़े शांतिपूर्ण आंदोलनों पर दर्ज मामलों की वापसी को मंजूरी: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक पूर्व विधायक एवं राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री के खिलाफ दर्ज अभियोजन को वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा है कि एफआईआर में जिस कथित जन-अशांति का उल्लेख है, वह जनहित से जुड़े मुद्दों के कारण उत्पन्न हुई थी और इसके पीछे कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं था।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह पाया कि आरोप पानी की किल्लत तथा प्रशासन से न्याय की मांग जैसे विषयों पर किए गए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों से संबंधित थे, जिनसे सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने का कोई प्रयास परिलक्षित नहीं...

विदेश में अंतिम रूप से तय किए गए मामलों के लिए आपराधिक शिकायत कायम नहीं रखी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
विदेश में अंतिम रूप से तय किए गए मामलों के लिए आपराधिक शिकायत कायम नहीं रखी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक निजी आपराधिक शिकायत कानून की नज़र में मान्य नहीं होती, जब उसी मुद्दे पर किसी विदेशी देश में सिविल और आपराधिक दोनों कार्यवाही शुरू की गई हों, और उन्हें अंतिम रूप दिया जा चुका हो। यह मानते हुए कि यह कार्यवाही कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है, कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी ऐसे मामले में की, जहां अपीलकर्ता इस बात से नाराज़ था कि प्रतिवादी- एशिया एक्सचेंज सेंटर, जो संयुक्त अरब अमीरात में एक...

उत्तर प्रदेश में SIR के खिलाफ SP नेता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
उत्तर प्रदेश में SIR के खिलाफ SP नेता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में समाजवादी पार्टी (SP) के नेता अरविंद कुमार सिंह द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उत्तर प्रदेश में चुनावी रोल के विशेष गहन संशोधन (SIR) को चुनौती दी गई।चुनाव आयोग का नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग के अलावा, सिंह ने गणना, कंट्रोल टेबल और ड्राफ्ट रोल के अपडेट और चुनावी रोल के अंतिम प्रकाशन के लिए तय समय-सीमा में 3 महीने के विस्तार की भी प्रार्थना की।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे (सिंह के...

सुप्रीम कोर्ट ने DHFL स्कैम केस में वाधवान भाइयों की ज़मानत याचिका पर फ़ैसला सुरक्षित रखा, नेशनल हाउसिंग बैंक की भूमिका पर CBI से सवाल पूछे
सुप्रीम कोर्ट ने DHFL स्कैम केस में वाधवान भाइयों की ज़मानत याचिका पर फ़ैसला सुरक्षित रखा, नेशनल हाउसिंग बैंक की भूमिका पर CBI से सवाल पूछे

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कपिल वाधवान और उनके भाई, DHFL के पूर्व डायरेक्टर धीरज वाधवान की ज़मानत याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रख लिया। यह मामला यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया की शिकायत पर CBI द्वारा दर्ज किए गए 34000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी केस से जुड़ा है।संक्षेप में मामलाउपरोक्त 'घोटाले' में DHFL ने कथित तौर पर 17 बैंकों को 34,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का चूना लगाया था। वाधवान भाइयों को सबसे पहले अप्रैल, 2020 में सेंट्रल...

अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार कर लेने के बाद व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि उसे उच्च पद दिया जाना चाहिए था: सुप्रीम कोर्ट
अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार कर लेने के बाद व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि उसे उच्च पद दिया जाना चाहिए था: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 दिसंबर) को कहा कि जिस व्यक्ति ने अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार कर ली है, वह बाद में यह दावा करके पदोन्नति की मांग नहीं कर सकता कि उसे शुरुआती चरण में ही उच्च पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए था।कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अनुकंपा नियुक्तियां सामान्य भर्ती प्रक्रिया का एक अपवाद हैं। इनका मकसद मृतक कर्मचारी के परिवार को तत्काल राहत देना है। एक बार जब कोई नियुक्त व्यक्ति लागू योजना के तहत दिए गए पद को स्वीकार कर लेता है तो वह उसकी शर्तों से बंधा होता है। बाद में इस आधार पर...

S. 337 BNSS | विदेशी देश में आपराधिक मामला दर्ज होने से भारत में उन्हीं तथ्यों पर मुकदमा चलाने में कोई रोक नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
S. 337 BNSS | विदेशी देश में आपराधिक मामला दर्ज होने से भारत में उन्हीं तथ्यों पर मुकदमा चलाने में कोई रोक नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट

ओडिशा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ विदेशी देश में आपराधिक मामला दर्ज होने से भारत में उसी तरह के तथ्यों या उसी लेन-देन से जुड़े अपराध के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई करने में कोई रुकावट नहीं आएगी।ज़ाम्बिया में हुए कुछ वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक ज़मानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस गौरीशंकर सतपथी की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना या वारंट जारी होना भारतीय दंड प्रावधानों के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई करने में कोई रोक नहीं है, क्योंकि यह 'दोहरे दंड' के...