चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़: कर्नाटक क्राउड कंट्रोल बिल 2025 कंसल्टेशन के लिए भेजा गया, हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान वाली PIL बंद की

Shahadat

27 Feb 2026 9:15 PM IST

  • चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़: कर्नाटक क्राउड कंट्रोल बिल 2025 कंसल्टेशन के लिए भेजा गया, हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान वाली PIL बंद की

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान वाली PIL बंद की। यह घटना 2025 IPL फाइनल में रॉयल चैलेंजर बैंगलोर (RCB) की जीत का जश्न मनाने के लिए एक इवेंट से पहले हुई। कोर्ट को बताया गया कि क्राउड कंट्रोल की देखरेख करने वाला एक बिल स्टेट असेंबली ने कंसल्टेशन के लिए भेजा है।

    बता दें, हाईकोर्ट ने पिछले साल इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया और कर्नाटक सरकार से इस हादसे की वजह का पता लगाने और भविष्य में इसे कैसे रोका जाए, यह बताने को कहा था। बता दें, बेंगलुरु में हुई भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई, जबकि 30 से ज़्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। RCB ने 3 जून को पंजाब किंग्स को हराकर 2025 का IPL फाइनल जीता और 2008 में IPL शुरू होने के बाद पहली बार यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीती।

    सोमवार (23 फरवरी) को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सीएम पूनाचा की डिवीजन बेंच को एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने 'क्राउड कंट्रोल और मास गैदरिंग मैनेजमेंट के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' के बारे में बताया, जिसे राज्य सरकार ने बनाया।

    एडवोकेट जनरल ने आगे कहा कि एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट एस सुशीला के सुझावों पर भी विचार किया गया और उन्हें SOP में शामिल किया गया।

    कोर्ट ने कहा,

    "इस बीच कर्नाटक क्राउड कंट्रोल (इवेंट्स और इकट्ठा होने की जगह पर भीड़ को मैनेज करना) बिल, 2025 - जिसमें ज़रूरी सुरक्षा उपायों के नियम भी शामिल हैं, उसे कर्नाटक लेजिस्लेटिव असेंबली ने सलाह के लिए भेजा। एडवोकेट जनरल का कहना है कि कर्नाटक लेजिस्लेटिव असेंबली भी इस बिल के संदर्भ में SOP पर विचार करेगी। उन्होंने इस बारे में एक मेमो भी फाइल किया।"

    बेंच ने निर्देश दिया कि सरकार द्वारा तैयार किया गया 13.01.2026 का SOP तब तक लागू रहेगा, जब तक कर्नाटक क्राउड कंट्रोल (इवेंट्स और इकट्ठा होने की जगह पर भीड़ को मैनेज करना) बिल, 2025 पास होकर कानून नहीं बन जाता।

    बेंच ने कहा,

    "हम इस याचिका में कोई और ऑर्डर पास करना सही नहीं समझते, सिवाय इसके कि अगर कोई वजह बनती है तो एमिकस क्यूरी को इसे फिर से शुरू करने की आज़ादी दी जाए।"

    एमिकस क्यूरी और पार्टियों के वकील की मदद के लिए तारीफ़ करते हुए बेंच ने PIL का निपटारा किया।

    Case title: HIGH COURT OF KARNATAKA v/s HIGH COURT OF KARNATAKA

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