कॉर्डेलिया क्रूज़ ड्रग्स मामले में समीर वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्रवाई रद्द करने वाला CAT आदेश दिल्ली हाई कोर्ट ने पलटा
Praveen Mishra
27 Feb 2026 4:54 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज़ ड्रग बस्ट मामले में IRS अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्यवाही रद्द करने के केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को निरस्त कर दिया।
जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए 19 जनवरी को पारित ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया। निर्णय सुनाते हुए अदालत ने कहा, “याचिका स्वीकार की जाती है।”
CAT ने अपने आदेश में वानखेड़े को जारी आरोपपत्र (चार्ज मेमोरेंडम) को निरस्त कर दिया था और कहा था कि विभागीय कार्रवाई गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटियों, विधिक दुर्भावना (malice in law) और प्रक्रिया के दुरुपयोग से प्रभावित है।
वानखेड़े का तर्क था कि विभागीय कार्यवाही उन्हीं आरोपों पर आधारित है, जिनके आधार पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कॉर्डेलिया क्रूज़ मामले में उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। उनके अनुसार CBI का मामला विशेष जांच दल (SET) की रिपोर्ट पर आधारित है, जबकि अदालतें पहले ही यह कह चुकी हैं कि उस रिपोर्ट की जांच प्रक्रिया दोषपूर्ण थी, क्योंकि जांच दल में ज्ञानेश्वर सिंह को शामिल किया गया था, जबकि वह मामले में पर्यवेक्षी भूमिका में थे।
18 अगस्त 2025 को जारी आरोपपत्र में वानखेड़े और एक पूर्व उप विधि सलाहकार (DLA) के बीच हुई बातचीत के कॉल ट्रांसक्रिप्ट पर भरोसा किया गया था, जिसे वानखेड़े ने स्वयं अपने बचाव में बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया था।
मामले पर निर्णय देते समय CAT ने वानखेड़े के “उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड” का भी उल्लेख किया था और कहा था कि उन्हें अपने कार्यकाल में कई सम्मान प्राप्त हुए हैं।
ट्रिब्यूनल ने यह भी पाया था कि विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय गंभीर प्रक्रियात्मक अनियमितताओं, विधिक दुर्भावना और प्रक्रिया के दुरुपयोग से ग्रस्त है। CAT के अनुसार, जिस तरीके से कार्यवाही शुरू की गई, उससे पूर्वाग्रहपूर्ण मानसिकता, तथ्यों पर विचार न करना और अत्यधिक जल्दबाज़ी झलकती है, जिससे प्रतीत होता है कि अधिकारियों का उद्देश्य मामले के गुण-दोष की परवाह किए बिना आवेदक को दंडित करना था।

