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Electricity Act | टैरिफ तय करते समय रेगुलेटरी कमीशन सरकारी ग्रांट को ध्यान में रख सकता है: सुप्रीम कोर्ट
Electricity Act | टैरिफ तय करते समय रेगुलेटरी कमीशन सरकारी ग्रांट को ध्यान में रख सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि हालांकि टैरिफ तय करना पूरी तरह से राज्य बिजली रेगुलेटरी कमीशन के अधिकार क्षेत्र में आता है, फिर भी उसे बिजली उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से दी जाने वाली सब्सिडी सहित सरकारी नीतिगत प्रोत्साहनों पर विचार करना भी उतना ही ज़रूरी है। हालांकि, इस तरह के विचार के परिणामस्वरूप टैरिफ से प्रोत्साहन की यांत्रिक कटौती इस तरह से नहीं होनी चाहिए कि वह योजना के मूल उद्देश्य को ही विफल कर दे।आगे कहा गया,"रेगुलेटरी कमीशन के पास टैरिफ तय करने की पूर्ण शक्ति है और टैरिफ तय करने की...

Land Acquisition | जिस व्यक्ति ने S.28A के तहत मुआवज़ा स्वीकार किया, वह अपील के आधार पर बढ़ोतरी के लिए दूसरा आवेदन दायर कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
Land Acquisition | जिस व्यक्ति ने S.28A के तहत मुआवज़ा स्वीकार किया, वह अपील के आधार पर बढ़ोतरी के लिए दूसरा आवेदन दायर कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28A के तहत दूसरा आवेदन दायर किया जा सकता है, ताकि अन्य मामलों में हाई कोर्ट द्वारा दी गई बढ़ोतरी के आधार पर मुआवज़े का फिर से निर्धारण किया जा सके।कोर्ट ने फैसला दिया कि भूमि अधिग्रहण का मुआवज़ा स्वीकार कर लेने से कोई ज़मीन मालिक भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28-A के तहत बढ़ा हुआ मुआवज़ा मांगने से वंचित नहीं हो जाएगा।जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच का फैसला...

किरायेदार जिम्मेदारी से नहीं बच सकता, परिवार के रहने पर भी मानी जाएगी उसकी कब्जेदारी: दिल्ली हाईकोर्ट
किरायेदार जिम्मेदारी से नहीं बच सकता, परिवार के रहने पर भी मानी जाएगी उसकी कब्जेदारी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि कोई भी किरायेदार यह कहकर अपनी कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि वह खुद किराए के मकान में नहीं रह रहा है। अदालत ने कहा कि यदि उस मकान में उसके परिवार के सदस्य रह रहे हैं, तो उसे ही उस संपत्ति का वैधानिक कब्जाधारी माना जाएगा।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपने फैसले में कहा,“जब कोई किरायेदार अपने परिवार के साथ रहने के लिए मकान किराए पर लेता है तो परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा उस मकान में रहना, किरायेदार का ही वैधानिक कब्जा माना जाएगा। केवल...

मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने पैरालीगल वॉलंटियर्स के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित किया
मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने पैरालीगल वॉलंटियर्स के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित किया

मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (MPSLSA) ने 25 मार्च 2026 को राज्यभर के पैरालीगल वॉलंटियर्स (PLVs) के लिए एक दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जमीनी स्तर पर न्याय तक पहुंच को मजबूत करना और वॉलंटियर्स की कार्यक्षमता बढ़ाना था।यह कार्यक्रम मुख्य न्यायाधीश एवं प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक के मार्गदर्शन में तथा कार्यकारी अध्यक्ष के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने वर्चुअल माध्यम से...

जवाई क्षेत्र में बेकाबू पर्यटन पर सख्त राजस्थान हाईकोर्ट, नाइट सफारी और ड्रोन पर रोक
जवाई क्षेत्र में बेकाबू पर्यटन पर सख्त राजस्थान हाईकोर्ट, नाइट सफारी और ड्रोन पर रोक

राजस्थान के पाली जिले के जवाई क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों पर सख्ती दिखाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया। हाइकोर्ट ने नाइट सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही सफारी गतिविधियों की अनुमति देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही ड्रोन, तेज रोशनी वाले उपकरण और अन्य साधनों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई, जो वन्यजीवों को परेशान करते हैं।यह आदेश जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें कहा गया कि जवाई क्षेत्र में बढ़ते अनियंत्रित...

पश्चिम बंगाल SIR सूची में हुई चूक में किया गया सुधार, पूर्व जस्टिस शाहिदुल्लाह मुंशी का जुड़ा नाम
पश्चिम बंगाल SIR सूची में हुई चूक में किया गया सुधार, पूर्व जस्टिस शाहिदुल्लाह मुंशी का जुड़ा नाम

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा पश्चिम बंगाल में चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत पूर्व जस्टिस शाहिदुल्लाह मुंशी और उनके परिवार के नाम अब पूरक सूची में शामिल कर लिए गए।यह घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब हाल ही में उन्होंने अपनी और अपने परिवार के नाम प्रारंभिक सूची में शामिल न होने पर आपत्ति जताई, जबकि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए और सत्यापन प्रक्रिया में भाग भी लिया।27 मार्च, 2026 की पूरक सूची में उनके नाम को शामिल किया गया, जो 28 फरवरी 2026 को जारी प्रारंभिक सूची में छूट...

प्रक्रिया का दुरुपयोग: रिश्वत मामले में अडानी ग्रीन एनर्जी के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट में खारिज
"प्रक्रिया का दुरुपयोग": 'रिश्वत' मामले में अडानी ग्रीन एनर्जी के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट में खारिज

अडानी ग्रुप की कंपनी— अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (27 मार्च) को याचिका खारिज की। इस याचिका में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से उस कंपनी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की मांग की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी ने भारत के कई राज्यों में सोलर पावर के कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए करोड़ों रुपये की रिश्वत दी थी।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस सुमन श्याम की डिवीज़न बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता जितेंद्र मारू ने उन दस्तावेज़ों पर...

बलात्कार में मदद करने पर महिला को 10 साल की जेल, दिल्ली हाईकोर्ट ने लगातार आपराधिक आचरण का दिया हवाला
बलात्कार में मदद करने पर महिला को 10 साल की जेल, दिल्ली हाईकोर्ट ने लगातार आपराधिक आचरण का दिया हवाला

दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला को बलात्कार करने में मदद करने के लिए 10 साल की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई। कोर्ट ने सज़ा में नरमी न बरतने के मुख्य कारण के तौर पर महिला की आपराधिक गतिविधियों में लगातार संलिप्तता पर ज़ोर दिया।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर सज़ा का यह आदेश पारित किया। इस अपील में महिला को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोषी महिला ने इस अपराध में "सक्रिय और जान-बूझकर भूमिका" निभाई थी।कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि महिला ने...

जब बायोग्राफी समाप्त हो जाए, पर बायोलॉजी शेष रहे: जीवन त्यागने का संवैधानिक अधिकार
जब बायोग्राफी समाप्त हो जाए, पर बायोलॉजी शेष रहे: जीवन त्यागने का संवैधानिक अधिकार

वेंटिलेटर की ठंडी, यांत्रिक गूंज और फीडिंग ट्यूब की नियमित टपक—ये आज की आधुनिक दुनिया के सबसे द्वंद्वपूर्ण प्रतीक बन गए हैं। उन्नत चिकित्सीय तकनीक ने चमत्कार कर दिखाया है—चेतना की लौ बुझ जाने के बाद भी जैविक क्रियाओं को बनाए रखना। लेकिन इस उपलब्धि का एक अंधेरा पक्ष भी है: “टेक्नोलॉजिकल ट्रैप”, जहां उपचार की मशीनरी ही कैद का साधन बन जाती है। 11 मार्च, 2026 को, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक मामले में, अंततः इस पिंजरे के सबसे लगातार सलाखों में से एक को ध्वस्त कर...

डिफ़ॉल्ट के कारण किसी मुक़दमे का खारिज होना रेस ज्यूडिकाटा के तौर पर काम नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट
डिफ़ॉल्ट के कारण किसी मुक़दमे का खारिज होना 'रेस ज्यूडिकाटा' के तौर पर काम नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि डिफ़ॉल्ट के कारण किसी मुक़दमे का खारिज होना 'रेस ज्यूडिकाटा' (Res Judicata) के तौर पर काम नहीं करता, क्योंकि इसमें मामले के गुण-दोष पर कोई निर्णय नहीं होता। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई ऐसा वादी जिसे अपना दावा आगे बढ़ाने का अवसर मिला था, लेकिन जिसने बार-बार कार्यवाही को खारिज होने दिया, उसे न्यायसंगत सिद्धांतों के आधार पर राहत से वंचित किया जा सकता है, क्योंकि ऐसा आचरण कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जा सकता है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन...

Sabarimala Reference | अदालतों को ज़रूरी धार्मिक प्रथाएं तय नहीं करनी चाहिए: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
Sabarimala Reference | अदालतों को ज़रूरी धार्मिक प्रथाएं तय नहीं करनी चाहिए: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अदालतों को यह तय करने से बचना चाहिए कि "ज़रूरी धार्मिक प्रथा" क्या है। बोर्ड ने चेतावनी दी कि इस तरह की न्यायिक जांच संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मिली धार्मिक स्वतंत्रता पर अतिक्रमण हो सकती है।सबरीमाला रेफरेंस केस में अपनी लिखित दलीलों में बोर्ड ने तर्क दिया कि किसी धर्म के "मूल" की पहचान करना स्वाभाविक रूप से व्यक्तिपरक होता है और यह मानने वालों की आस्था पर निर्भर करता है, इसलिए यह न्यायिक निर्णय के लिए उपयुक्त नहीं...

कल्पना से परे: FSL रिपोर्ट के बिना ज़ब्त चीज़ों को नशीला पदार्थ कैसे मान लिया गया: पटना हाईकोर्ट ने 27 साल बाद NDPS के आरोपी को बरी किया
'कल्पना से परे: FSL रिपोर्ट के बिना ज़ब्त चीज़ों को 'नशीला पदार्थ' कैसे मान लिया गया': पटना हाईकोर्ट ने 27 साल बाद NDPS के आरोपी को बरी किया

पटना हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष कानून के मुताबिक नशीला पदार्थ बरामद होने की बात साबित करने में नाकाम रहा और अनिवार्य सुरक्षा उपायों का पालन न करने के साथ-साथ सबूतों में कमियों ने दोषसिद्धि रद्द की।जस्टिस आलोक कुमार पांडे की सिंगल बेंच, एडिशनल जिला एवं सेशन जज (तृतीय), आरा, भोजपुर द्वारा 27.12.2010 को NDPS केस नंबर 2/1998 में दिए गए फैसले के खिलाफ आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला शाहपुर थाना केस नंबर 7/1998 से जुड़ा...

इकबालिया बयान पुलिस जांच को दिशा दे सकते हैं, भले ही वे चार्जशीट का हिस्सा न बन सकें: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इकबालिया बयान पुलिस जांच को दिशा दे सकते हैं, भले ही वे चार्जशीट का हिस्सा न बन सकें: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ किया कि संजू बंसल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, भले ही पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इकबालिया बयान चार्जशीट का हिस्सा नहीं बन सकते, लेकिन यह पुलिस को चल रही जांच में आगे बढ़ने के लिए ऐसे बयानों पर भरोसा करने से नहीं रोकता है।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने किशन यादव नाम के एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी पर गोरखपुर में मानसिक रूप से कमजोर 20 साल के एक युवक की हत्या करने का आरोप है।आरोपी का कहना...

किसी निजी व्यक्ति द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर हमला नैतिक पतन का अपराध: बॉम्बे हाईकोर्ट
'किसी निजी व्यक्ति द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर हमला 'नैतिक पतन' का अपराध': बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी निजी व्यक्ति द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर हमला, खासकर किसी गैर-कानूनी आंदोलन के दौरान, 'नैतिक पतन' (Moral Turpitude) से जुड़ा अपराध माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे काम सामाजिक कर्तव्य का उल्लंघन दिखाते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को कमज़ोर करते हैं। इसलिए ये 'दुराचार' और समाज के मान्य मानकों के विपरीत आचरण की श्रेणी में आते हैं।जस्टिस रजनीश आर. व्यास एक आरोपी द्वारा दायर आपराधिक अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी ने दंगा करने, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने और...

मुकेश अंबानी की रिलायंस के खिलाफ कथित गैस चोरी की याचिका प्रक्रिया का दुरुपयोग, इससे प्रतिष्ठा को नुकसान होता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
मुकेश अंबानी की रिलायंस के खिलाफ कथित 'गैस चोरी' की याचिका प्रक्रिया का दुरुपयोग, इससे प्रतिष्ठा को नुकसान होता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

कथित 'गैस चोरी' मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके निदेशक मुकेश धीरूभाई अंबानी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि ऐसी याचिकाएं इन संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती हैं और उनकी वर्तमान या भविष्य की व्यावसायिक साझेदारियों के लिए खतरा बन सकती हैं।गौरतलब है कि जितेंद्र मारू नाम के कार्यकर्ता ने RIL और अंबानी के खिलाफ CBI जांच की मांग की थी। आरोप था कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के तट से दूर कृष्णा...

Section 166 MV Act | दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रहता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
Section 166 MV Act | दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रहता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से मोटर दुर्घटना दावा याचिका दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रह जाती है।जस्टिस हिरदेश की बेंच ने यह टिप्पणी की:"...मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर दावा याचिका में दोषी वाहन का ड्राइवर आवश्यक पक्षकार होता है। ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा याचिका दोषपूर्ण हो जाती है और सुनवाई योग्य नहीं रहती।"राज्य सरकार ने ग्वालियर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accidents Claims Tribunal) द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती...

शक सबूत की जगह नहीं ले सकता: पटना हाईकोर्ट ने आरा कोर्ट धमाका मामले में आरोपियों को बरी किया, मौत की सज़ा रद्द की
'शक सबूत की जगह नहीं ले सकता': पटना हाईकोर्ट ने आरा कोर्ट धमाका मामले में आरोपियों को बरी किया, मौत की सज़ा रद्द की

176 पन्नों के फ़ैसले में पटना हाई कोर्ट ने आरा सिविल कोर्ट बम धमाका मामले में कई आरोपियों की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) परिस्थितियों की कड़ी को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। साथ ही यह दोहराया कि "शक, चाहे कितना भी मज़बूत क्यों न हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता।"चीफ़ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की डिवीज़न बेंच भोजपुर, आरा के एडिशनल सेशंस जज द्वारा चलाए गए मुक़दमे से जुड़े आपराधिक अपीलों के साथ-साथ CrPC की धारा 366 (BNSS की धारा...