CBFC ने फिल्म पूरी देखी, सिर्फ टीज़र के आधार पर सर्टिफ़िकेशन में कोई गलती नहीं हो सकती: 'केरल स्टोरी 2' पर विवाद पर हाईकोर्ट

Shahadat

27 Feb 2026 9:31 PM IST

  • CBFC ने फिल्म पूरी देखी, सिर्फ टीज़र के आधार पर सर्टिफ़िकेशन में कोई गलती नहीं हो सकती: केरल स्टोरी 2 पर विवाद पर हाईकोर्ट

    केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (27 फरवरी) को फिल्म 'केरल स्टोरी 2 - गोज़ बियॉन्ड' की रिलीज़ का रास्ता साफ़ करते हुए कहा कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) फिल्म को पूरी देखने के बाद सर्टिफ़िकेशन देता है। साथ ही कुछ टीज़र क्लिप के आधार पर इसमें कोई गलती नहीं हो सकती।

    जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस पी.वी. बालकृष्णन की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी सिंगल जज के उस अंतरिम आदेश के ख़िलाफ़ दायर अपीलों पर आदेश सुनाते हुए की, जिसमें फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाई गई।

    सिंगल जज ने फिल्म के टीज़र और स्क्रीनशॉट देखने के बाद फिल्म के सर्टिफ़िकेशन को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर 15 दिनों के लिए रिलीज़ पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि पहली नज़र में लोगों की सोच बिगड़ने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की संभावना है।

    हालांकि, डिवीजन बेंच ने आदेश रद्द किया और इस बात पर जोर दिया कि यह स्वीकार किया गया तथ्य है कि CBFC ने प्रमाणन जारी करने से पहले फिल्म को पूरी तरह से देखा था और याचिकाकर्ताओं ने पूरी फिल्म नहीं देखी।

    बेंच ने कहा कि एक बार जब वैधानिक प्राधिकरण ने फिल्म की पूरी जांच की और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत प्रमाणन प्रदान कर दिया तो प्रथम दृष्टया यह अनुमान लगता है कि बोर्ड ने धारा 5बी और संबंधित दिशानिर्देशों के अनुसार अपना विवेक लगाया।

    कोर्ट ने आगे कहा,

    "ऐसी परिस्थितियों में केवल कुछ क्लिपिंग्स के आधार पर और फिल्म को देखे बिना सिंगल जज का यह निष्कर्ष कि प्रमाणन प्रदान करते समय CBFC ने प्रमाणन के दिशानिर्देशों को ध्यान में नहीं रखा है, को स्वीकार नहीं किया जा सकता।"

    डिवीजन बेंच ने वायकॉम 18 मीडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया [(2018) 1 SCC 761] में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार CBFC से सर्टिफ़िकेशन मिलने के बाद पहली नज़र में यह माना जाता है कि संबंधित अथॉरिटी ने पब्लिक ऑर्डर समेत सभी गाइडलाइंस को ध्यान में रखा है।

    अतुल मिश्रा बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया और अन्य [W.P.(C)No.181 of 2026 तारीख 19.02.2026] पर भरोसा किया गया, जिसमें दोहराया गया कि लॉ एंड ऑर्डर के मामलों की आशंकाओं के आधार पर एक्सपर्ट बॉडी से मंज़ूरी मिली फ़िल्म की स्क्रीनिंग को रोकना सही नहीं ठहराया जा सकता।

    कोर्ट ने आगे कहा कि प्रोड्यूसर ने CBFC के बताए अनुसार कुछ चीज़ें जोड़ीं, काटीं और बदली थीं। इसलिए बोर्ड ने सर्टिफ़िकेशन देने से पहले ठीक से सोच-विचार किया।

    Case Titles: Vipul Amrutlal Shah v. Freddy V. Francis and Ors. and connected case

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