जानिए हमारा कानून
NI Act में Holder in Due Course किसे कहा गया है?
NI Act की धारा Holder in Due Course के संबंध में उल्लेख करती है। इसे हिंदी में Holder in Due Course कहा जाता है। धारक एवं सम्यक् अनुक्रम शब्दों को समान रूप में नहीं लेना चाहिए। इनमें मौलिक अन्तर है। "प्रत्येक सम्यक् अनुक्रम धारक एक धारक होता है, परन्तु प्रत्येक धारक एक Holder in Due Course हीं होता है।" अधिनियम की धारा 8 एवं 9 क्रमश: धारक एवं Holder in Due Course को परिभाषित करती है। एक लिखत का धारक होने के लिए यह आवश्यक है कि उसे-अपने नाम से लिखत का कब्जा रखने का हकदार होना चाहिए।उस पर शोध्य...
फैसले की घोषणा की प्रक्रिया – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 392
किसी भी आपराधिक (Criminal) मामले में न्यायालय (Court) का अंतिम निर्णय फैसला (Judgment) होता है। यह फैसला यह तय करता है कि आरोपी (Accused) दोषी (Guilty) है या नहीं, और अगर दोषी है, तो उसे कौन सी सजा (Punishment) दी जाएगी।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 392 यह स्पष्ट करती है कि किसी भी आपराधिक मामले में न्यायालय को फैसले की घोषणा कैसे करनी चाहिए। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि फैसला खुले न्यायालय (Open Court) में सुनाया जाए ताकि सभी संबंधित पक्ष (Concerned Parties) को इसके बारे में...
रसीद जारी करने से इनकार करने और स्टाम्प शुल्क बचाने के लिए की गई चालाकी पर दंड : भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 धारा 65, 66 और 67
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है, जो विभिन्न वित्तीय (Financial) और कानूनी (Legal) लेन-देन पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने और उसके भुगतान को सुनिश्चित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी आवश्यक दस्तावेज (Documents) विधिवत (Properly) रूप से स्टाम्प किए जाएं ताकि सरकार को राजस्व (Revenue) का नुकसान न हो।इस अधिनियम के तहत कई दंडात्मक प्रावधान (Penal Provisions) दिए गए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन न करे और स्टाम्प...
किरायेदार को बेदखल करने के नियम - राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 9 भाग 1
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 9 उन स्थितियों को परिभाषित करती है, जिनमें किसी मकान मालिक (Landlord) को अपने किरायेदार (Tenant) को बेदखल (Eviction) करने का कानूनी अधिकार होता है। यह प्रावधान अन्य किसी भी कानून या किराए के अनुबंध (Rent Agreement) से ऊपर माना जाता है, लेकिन इसे इस अधिनियम की अन्य धाराओं के अनुसार पढ़ा जाना चाहिए।यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि कोई मकान मालिक अपने किरायेदार को मनमाने तरीके से बेदखल न कर सके और उसे ऐसा करने के लिए कानूनी रूप से उचित कारण साबित करना...
क्या दीवानी न्यायालय किसी व्यक्ति को आपराधिक मुकदमा दर्ज करने से रोकने का अधिकार रखता है?
सप्रीम कोर्ट ने M/S Frost International Limited v. M/S Milan Developers and Builders (P) Limited & Anr. मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया। यह मामला मुख्य रूप से कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर, 1908 (Code of Civil Procedure, 1908 - CPC), नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (Negotiable Instruments Act, 1881 - N.I. Act) और स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट, 1963 (Specific Relief Act, 1963 - SR Act) के प्रावधानों (Provisions) से संबंधित था।इसमें यह सवाल उठाया गया कि क्या कोई वादी (Plaintiff) दीवानी मुकदमे (Civil...
NI Act में आदरणार्थ प्रतिगृहीता कौन होता है?
जब कोई अन्य व्यक्ति किसी विनिमय पत्र को प्रतिगृहीत करता है, जबकि उसे अप्रतिग्रहण के कारण-(1) अनादर के लिए टिप्पण किया गया है, या(2) अ-प्रतिग्रहण के लिए प्रसाध्य किया गया है।(3) बेहतर प्रतिभूति के लिए टिप्पण और प्रसाक्ष्य किया गया है।ऐसे व्यक्ति को एक आदरणार्थं प्रतिगृहीता कहते हैं। इस प्रकार एक व्यक्ति आदरणार्थ प्रतिगृहीता होता है जो विनिमय पत्र के अनादर की टिप्पण की गई है, या प्रसाध्य धारा 99 एवं 100 के अधीन की गयी है या इसे बेहतर प्रतिभूति के लिए धारा 100 के अधीन टिप्पण एवं प्रसाध्य करा दिया...
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स के पक्षकार
लिखत के पक्षकार विनिमय पत्र एवं चेक के पक्षकार होते हैं, 'लेखीवाल', 'ऊपरवाल' एवं 'पाने वाला' (आदाता) जबकि वचन पत्र के 'लेखक' एवं 'पाने वाला' दो पक्षकार होते हैं।'लेखीवाल' - अधिनियम की धारा 7 के अनुसार विनिमय पत्र एवं चेक के लेखक को 'लेखीवाल' कहा जाता है। वचन पत्र में ऐसे व्यक्ति को "लेखक" जाता है। लेखीवाल या लेखक ऐसे व्यक्ति होते हैं जो लिखतों को लिखते है। विनिमय पत्र एवं चेक की दशा में लेखीवाल एवं वचन पत्र की दशा में लेखक कहा जाता है। इन दोनों में मुख्य अन्तर है कि विनिमय पत्र एवं चेक का लेखक...
एडहेसिव स्टाम्प को रद्द न करने पर दंड: भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 63 और 64
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है जो विभिन्न कानूनी (Legal) और वित्तीय दस्तावेजों (Financial Documents) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) के भुगतान को नियंत्रित करता है। यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि सभी महत्वपूर्ण लेन-देन सही तरीके से दर्ज किए जाएं और सरकार को उचित राजस्व प्राप्त हो।इस अधिनियम की धारा 63 और 64 (Section 63 and Section 64) में उन परिस्थितियों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है जब कोई व्यक्ति स्टाम्प शुल्क से संबंधित नियमों का पालन नहीं...
सीमित अवधि किरायेदारी– राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 8
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 8 सीमित अवधि किरायेदारी (Limited Period Tenancy) से संबंधित है। यह प्रावधान मकान मालिक (Landlord) को यह अधिकार देता है कि वह अपनी संपत्ति को तीन साल से अधिक नहीं की अवधि के लिए किराए पर दे सकता है।यह प्रावधान उन मकान मालिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो अपनी संपत्ति को अल्पकालिक (Short-Term) आधार पर किराए पर देना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तय अवधि पूरी होने के बाद उन्हें उनकी संपत्ति वापस मिल जाए। यह कानून यह भी तय करता है कि मकान...
अपील का अधिकार – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 390 और 391
न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) में दोषसिद्धि (Conviction) और सजा (Sentence) के खिलाफ अपील (Appeal) करने का अधिकार एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह अधिकार सुनिश्चित करता है कि किसी व्यक्ति को अन्यायपूर्ण सजा न मिले और यदि कोई गलती हुई हो तो उसे सुधारा जा सके।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 390 उन व्यक्तियों को अपील करने का अधिकार प्रदान करती है जिन्हें धारा 383, धारा 384, धारा 388 और धारा 389 के तहत दोषी ठहराया गया हो। इसके अलावा, धारा 391 यह स्पष्ट करती है कि किन परिस्थितियों में...
क्या सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की जवाबदेही RTI Act के तहत है?
सुप्रीम कोर्ट ने अंजलि भारद्वाज बनाम CPIO, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (RTI Cell) (2022) मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर फैसला दिया, जो सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम (Supreme Court Collegium) की पारदर्शिता (Transparency) से जुड़ा था।इस मामले में यह सवाल उठाया गया कि क्या कोलेजियम की बैठकों में हुई चर्चाओं को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005 - RTI Act) के तहत सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कोलेजियम के अंतिम निर्णय (Final Decision) और प्रस्ताव...
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स में प्रतिफल का महत्व
चूँकि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक निश्चित धनराशि भुगतान करने की संविदा करता है, अत: एक विधिसम्मत संविदा के समर्थन के लिए प्रतिफल का होना आवश्यक होता है। लिखतों के सम्बन्ध में प्रतिफल की उपधारणा होती है।अधिनियम की धारा 118 (क) में यह उबन्धित है कि प्रत्येक निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स जब यह प्रतिग्रहीत, पृष्ठांकित परक्राम्य या अन्तरित किया जाता है तो ऐसा प्रतिग्रहण, पृष्ठांकन, परक्रामण या अन्तरण प्रतिफल से किया गया है परन्तु वह उपधारणा खण्डनीय होती है। तातोपमुला नागराजू बनाम पैटेम पदमावती के मामले...
NI Act में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स किसे कहा जाता है?
व्यापारिक एवं मौद्रिक व्यवहारों में मुद्रा के रूप में प्रयुक्त किये जाने वाले कुछ अभिलेखों को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स कहा जाता है।"निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स" दो शब्दों से बना है, 'परक्राम्य' एवं 'लिखत' जिसका शाब्दिक अर्थ एक अभिलेख जो परिदान द्वारा अन्तरणीय होता है। दूसरे शब्दों में अभिलेख जिनमें परक्राम्यता की विशेषता होती है। निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स कहलाते हैं। अतः लिखत जो परक्राम्य है वे निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स है।निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स अधिनियम, 1881 की धारा 13 परिभाषित करती है "निगोशिएबल...
क्या अनुसूचित जनजाति की महिला सदस्यों को समान उत्तराधिकार अधिकार मिलने चाहिए?
सुप्रीम कोर्ट ने कमला नेटी बनाम विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी एवं अन्य (2022) मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर फैसला दिया, जिसमें अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe - ST) की महिलाओं को उत्तराधिकार (Inheritance) के अधिकार देने का सवाल उठाया गया। अदालत ने यह माना कि वर्तमान कानून के अनुसार, अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act - HSA) के तहत संपत्ति में अधिकार नहीं मिल सकता।हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि इस कानून में बदलाव की जरूरत है और यह काम विधायिका...
गवाह की गैरमौजूदगी पर त्वरित सजा – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 389
न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) में गवाह (Witness) की उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है। एक गवाह अपनी गवाही (Testimony) और सबूतों (Evidence) के माध्यम से अदालत को सही निर्णय लेने में मदद करता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि अदालत द्वारा बुलाए जाने के बावजूद गवाह बिना किसी उचित कारण के हाजिर नहीं होता।इस समस्या को हल करने के लिए, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 389 में एक संक्षिप्त प्रक्रिया (Summary Procedure) का प्रावधान किया गया है। इसके तहत, यदि कोई गवाह बिना किसी वैध कारण के...
नए किरायों में वृद्धि से जुड़ा कानून: राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 7
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 7 (Section 7) उन मकानों या परिसरों (Premises) पर लागू होती है, जो इस अधिनियम के लागू होने के बाद किराए पर दिए गए हैं। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि मकान मालिक (Landlord) को किराए में उचित वृद्धि (Fair Rent Increase) मिले, लेकिन किराएदार (Tenant) पर अचानक बहुत अधिक आर्थिक बोझ न पड़े।धारा 7 के तहत, मकान मालिक हर साल किराए में 5% की वृद्धि कर सकते हैं, लेकिन यह वृद्धि हर साल अलग से लागू नहीं होगी। इसे 10 वर्षों के बाद मूल किराए (Base Rent) में जोड़...
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 62: बिना स्टाम्प लगे दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने की सज़ा
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है जो कानूनी और वित्तीय दस्तावेज़ों (Legal and Financial Documents) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने के नियमों को निर्धारित करता है।यह अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी प्रकार का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बिना उचित स्टाम्प शुल्क के मान्य न हो। इसकी वजह से सरकार को राजस्व (Revenue) भी प्राप्त होता है और दस्तावेज़ कानूनी रूप से मजबूत होते हैं। धारा 62 (Section 62) उन लोगों के लिए दंड का प्रावधान करता है जो बिना स्टाम्प...
NI Act में Cheque, Promissory Note और Exchange Bill में अंतर
NI Act Cheque, Promissory Note और Exchange Bill तीनों मामलो में लागू होता है और इन तीनों में समानता होते हुए भी अंतर है।चेक एवं Exchange Bill में अन्तरप्रकृतित: चेक एवं Exchange Billसमान होते हैं, क्योंकि एक चैक Exchange Billहोता है, यद्यपि कि इन दोनों में मौलिक अन्तर होता है जिसे निम्नलिखित शीर्षकों में स्पष्ट किया जा सकता है-ऊपरवाल के सम्बन्ध में एक चेक सदैव किसी बैंक पर लिखा जाता है, जबकि एक Exchange Billबैंक को सम्मिलित करते हुए किसी भी व्यक्ति पर लिखा जा सकता है।माँग पर देय- एक चेक सदैव...
NI Act में Cheque किसे कहा जाता ?
NI Act में अलग अलग तरह के इंस्ट्रूमेंट हैं जो किसी रूपये के भुगतान के बदले जारी किये जाते हैं। Exchange Billअधिनियम, 1882 (आंग्ल) की धारा 73 में चेक को कुछ इन शब्दों में परिभाषित किया है:-"एक चेक Exchange Billहै जो किसी बैंकर पर लिखा जाता है और माँग पर देय होता है।"चेक की इस परिभाषा के अध्ययन से यह स्पष्ट है कि चेक, Exchange Billका संकीर्ण वर्ग है, चेक की विस्तृत परिभाषा दोनों परिभाषाओं अर्थात् Exchange Billएवं चेक के समामेलन से प्राप्त किया जा सकता है।सभी चेक Exchange Billहोते हैं, लेकिन सभी...
NI Act में Promissory Note स्टाम्प होना चाहिए और उसके प्रतिफल होना चाहिए
Promissory Noteको अन्तिम अपेक्षा है कि Promissory Noteको भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 49 में विहित देय स्टाम्प ड्यूटी सम्य रूपेण स्टाम्पित होना चाहिए। Promissory Noteका स्टाम्प उसके मूल्य पर निर्भर करता है।मे० पैकिंग पेपर सेल्स बनाम वीना लता खोसला के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का यह मत था कि एक Promissory Noteअपेक्षित स्टाम्प फाइन सहित भुगतान कर विधिमान्य बनाया जा सकता है। इससे स्पष्ट है कि Promissory Noteको प्रारम्भ से ही स्टाम्पित होना आवश्यक नहीं है और बिना इसके विधिमान्य हो सकता है....



















