जानिए हमारा कानून
NI Act में Promissory Note किसे कहा गया है?
इस अधिनियम की धारा 4 वचन पत्र के संबंध में उल्लेख करती है। वचन पत्र ऐसा पत्र है जिसने ऋण चुकाने का वचन समाहित है। इसका संबंध ऋण से है। यदि ऋण है तो वहां वचन पत्र भी होने की संभावना रहती है। सामान्य व्यवहारों में वचन पत्र नहीं मिलता है परंतु इसका चलन आज भी है तथा अनेक व्यापारिक व्यवहारों को इससे ही संचालित किया जा रहा है। यह प्राचीन व्यवस्था है और अत्यंत सरल भी।कृष्ण कुमार बनाम गुरपाल सिंह के मामले में एक अनुज्ञप्तिधारी ऋणदाता ने पूर्व के हस्ताक्षरित अभिलेख पर प्रोनोट तैयार किया एवं प्रतिवादी के...
न्यायालय की अवमानना, दंड प्रक्रिया और माफी – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 386, 387 और 388
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) में न्यायालय (Court) की अवमानना (Contempt) से संबंधित विभिन्न प्रावधान शामिल हैं।धारा 384 और 385 में न्यायालय के सामने हुए अपमानजनक व्यवहार (Contemptuous Behavior) या न्यायालय के आदेश की अवहेलना (Disobedience of Court Order) पर त्वरित कार्रवाई (Immediate Action) और मामले को मजिस्ट्रेट (Magistrate) के पास भेजने की प्रक्रिया (Procedure for Forwarding) का उल्लेख किया गया है। धारा 386, 387 और 388 इन प्रावधानों को और...
अनावश्यक और विशेष स्टाम्प के लिए धनवापसी का अधिकार: धारा 54, 54A और 54B भारतीय स्टाम्प अधिनियम
भारतीय स्टैम्प अधिनियम (Indian Stamp Act) के अंतर्गत विभिन्न कानूनी और वित्तीय दस्तावेजों (Documents) पर स्टैम्प (Stamp) लगाना आवश्यक होता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जरूरी स्टैम्प शुल्क (Stamp Duty) का भुगतान किया गया है।लेकिन कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति के पास कुछ स्टैम्प बच जाते हैं जो अब उसकी जरूरत के नहीं हैं। ये स्टैम्प न तो खराब (Spoiled) हुए होते हैं और न ही बेकार (Useless), लेकिन अब इनका कोई उपयोग नहीं है। ऐसी स्थिति में, भारतीय स्टैम्प अधिनियम की धारा 54, 54A और 54B कुछ...
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 6: मौजूदा किरायेदारी में किराया वृद्धि के नियम
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 6 (Section 6) उन संपत्तियों (Properties) के किराये में वृद्धि करने के नियमों को निर्धारित करती है जो पहले से ही किराए पर दी गई थीं।यह धारा इस बात को स्पष्ट करती है कि अगर किसी संपत्ति को इस अधिनियम के लागू होने से पहले किराए पर दिया गया था, तो उस संपत्ति का किराया (Rent) किस तरह और कितने प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है। यह प्रावधान मकान मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) दोनों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि किसी के साथ भी अन्याय न हो। ...
क्या केवल Circumstantial Evidence से रिश्वतखोरी सिद्ध की जा सकती है?
भारत में सरकारी पदों पर भ्रष्टाचार को रोकना एक महत्वपूर्ण कानूनी और न्यायिक विषय रहा है। Prevention of Corruption Act, 1988 (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988) इस उद्देश्य से लागू किया गया था कि सरकारी अधिकारियों द्वारा रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सके।लेकिन इस अधिनियम के तहत दोषसिद्धि (Conviction) के लिए अवैध लाभ की मांग और स्वीकार करने का प्रमाण (Proof) देना हमेशा एक चुनौती रहा है। Neeraj Dutta बनाम राज्य (GNCTD) (2022) मामले ने यह स्पष्ट किया कि क्या केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य...
NI Act में बैंकर की डेफिनेशन
NI Act में बैंकर की डेफिनेशन दी गयी है जहां बैंकर से मतलब होता है-“बैंककार" के अन्तर्गत बैंककार के तौर पर कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति और कोई भी डाक घर बचत बैंक आता है।इस अधिनियम में और न तो बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में "बैंकर" की कोई सन्तोषजनक परिभाषा नहीं है। अधिनियम की धारा 3 में इसे परिभाषित किया गया है "बैंकर" सम्मिलित करता है:-कोई व्यक्ति जो बैंकर के समान कार्य करता है, औरकिसी पोस्ट आफिस सेविंग बैंकएक बैंकर के निम्नलिखित चार कार्यों को आवश्यक माना हैजमा धन लेनाचालू खाता लेनाचेकों का...
NI Act के बारे में जानिए
Negotiable Instrument Act जिसे हिंदी में Negotiable Instrument Act कहा जाता है। परक्राम्य का अर्थ है हस्तांतरण तथा लिखत का अर्थ है कोई भी लिखित दस्तावेज। कोई भी ऐसा लिखित दस्तावेज जिसका हस्तांतरण किया जा सकता है उसे परक्राम्य लिखत कहा जा सकता है परंतु इस अधिनियम के अंतर्गत परक्राम्य लिखत केवल तीन चीजों को माना गया है। पहला वचन पत्र, दूसरा विनिमय पत्र तथा तीसरा चेक। इन तीनों दस्तावेजों को परक्राम्य लिखत माना गया है तथा इस समस्त अधिनियम में इन तीनों दस्तावेज से संबंधित प्रावधानों को ही प्रस्तुत...
जब न्यायालय मामले को धारा 384 के तहत निपटाने योग्य नहीं समझता – धारा 385, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) एक गंभीर अपराध (Serious Offence) है जो न्याय प्रक्रिया (Judicial Process) को बाधित करता है और न्यायपालिका (Judiciary) के अधिकार को चुनौती देता है।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 384 एक त्वरित प्रक्रिया (Summary Procedure) प्रदान करती है जिसके तहत यदि न्यायालय की उपस्थिति में कोई अवमानना होती है, तो न्यायालय तुरंत कार्रवाई कर सकता है। लेकिन कुछ ऐसे मामले होते हैं जहाँ न्यायालय यह महसूस करता है कि केवल...
गलत उपयोग और खराब हुए स्टैम्प पर रियायत: भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 52 और 53
भारतीय स्टाम्प अधिनियम (Indian Stamp Act) में विभिन्न कानूनी और वित्तीय दस्तावेजों के लिए स्टाम्प (Stamp) के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं।कई बार लोग अनजाने में गलत स्टाम्प का उपयोग कर लेते हैं, जैसे कि किसी दस्तावेज़ पर गलत प्रकार का स्टाम्प लगाना, आवश्यकता से अधिक मूल्य का स्टाम्प लगाना, या ऐसे दस्तावेज़ पर स्टाम्प लगाना, जिस पर कोई स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लागू नहीं होता। ऐसे मामलों में, धारा 52 के तहत राहत दी जाती है, जिससे व्यक्ति को आर्थिक नुकसान न हो और...
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम 2001 की धारा 4 और 5 के अंतर्गत किराया तय करने की प्रक्रिया
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) एक महत्वपूर्ण कानून है जो मकान मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) के बीच संबंधों को नियंत्रित करता है।यह कानून दोनों पक्षों के अधिकार और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है ताकि किराए से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनी रहे। इस लेख में, हम इस अधिनियम के कुछ प्रमुख प्रावधानों को सरल भाषा में समझेंगे, जैसे कि किरायेदार की परिभाषा (Section 2(i)), किराए की तय प्रक्रिया (Section 4) और किराए के भुगतान (Section 5) से जुड़े नियम।...
क्या कोर्ट किसी अतिरिक्त आरोपी को CrPC की धारा 319 के तहत कभी भी बुला सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने सुखपाल सिंह खैरा बनाम पंजाब राज्य (2022) मामले में Code of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) की धारा 319 की व्याख्या की। यह धारा कोर्ट को यह अधिकार (Power) देती है कि अगर किसी ट्रायल (Trial) के दौरान कोई नया सबूत (Evidence) सामने आता है, जिससे किसी अन्य व्यक्ति की अपराध में संलिप्तता (Involvement) का संकेत मिलता है, तो उसे भी मुकदमे (Trial) में शामिल किया जा सकता है।इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह शक्ति (Power) विशेष परिस्थिति (Extraordinary) में ही प्रयोग की...
धारा 49 के तहत राहत प्राप्त करने के लिए आवेदन कब किया जाना चाहिए : धारा 50 भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899
भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत, कुछ परिस्थितियों में खराब (spoiled) या अनुपयोगी (unusable) स्टांप पर छूट (allowance) प्राप्त करने का प्रावधान दिया गया है। यह प्रावधान धारा 49 के तहत आता है, जिसमें यह बताया गया है कि किन परिस्थितियों में स्टांप पर छूट मिल सकती है।लेकिन छूट प्राप्त करने के लिए एक निश्चित समयसीमा (time limit) के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया और समयसीमा को स्पष्ट रूप से धारा 50 में परिभाषित किया गया है। इस लेख में, हम विस्तार से समझेंगे कि धारा 50 क्या कहती है, यह किस...
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम, 2023 के तहत जुर्माने की वसूली और पुराने कानून के तहत की गई कार्रवाई की वैधता : धारा 31 और 32
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम, 2023 की धारा 31 के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर इस अधिनियम के उल्लंघन (Violation) के कारण Controller द्वारा जुर्माना (Fine) लगाया जाता है, तो उसे तय समय सीमा में जुर्माना जमा करना होगा। यदि वह समय पर जुर्माना नहीं भरता है, तो Controller उचित कारण (Valid Reason) के आधार पर उसे कुछ और समय दे सकता है।लेकिन अगर इसके बाद भी जुर्माना जमा नहीं किया जाता, तो इस राशि को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) के प्रावधानों (Provisions) के अनुसार...
क्या हर मुस्लिम पब्लिक ट्रस्ट को वक्फ माना जाएगा?
सुप्रीम कोर्ट ने Maharashtra State Board of Waqfs v. Shaikh Yusuf Bhai Chawla (2022) मामले में यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि क्या सभी मुस्लिम Public Trusts को Waqf Act, 1995 के तहत स्वचालित रूप से Waqf माना जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर Muslim Public Trust को Waqf नहीं माना जा सकता, जब तक कि यह कानूनी रूप से Waqf की आवश्यक शर्तों को पूरा न करता हो।कानूनी ढांचा (Legal Framework) इस विवाद में दो प्रमुख कानूनों की व्याख्या की गई: 1. Waqf Act, 1995 – यह उन संपत्तियों (Property) को नियंत्रित...
न्यायालय में अवमानना से संबंधित प्रक्रिया – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 384
न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) एक गंभीर अपराध है क्योंकि यह न्यायपालिका की गरिमा (Dignity) और अधिकार (Authority) को कमजोर करता है।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS) की धारा 384 न्यायालय (Court) के समक्ष किए गए अवमाननापूर्ण कृत्यों (Contemptuous Acts) से निपटने की विशेष प्रक्रिया (Procedure) प्रदान करती है। यह प्रावधान (Provision) न्यायालय को त्वरित कार्रवाई (Immediate Action) का अधिकार देता है, साथ ही आरोपी (Accused) को अपना पक्ष रखने...
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम 2023 के तहत धारा 30 में उल्लिखित दंड
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम, 2023 (Himachal Pradesh Rent Control Act, 2023) मकान मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) के बीच संबंधों को नियंत्रित करता है।यह सुनिश्चित करता है कि दोनों पक्ष इस अधिनियम के प्रावधानों (Provisions) का पालन करें और किराये से जुड़े नियमों का उल्लंघन न करें। इस अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए Section 30 में उन लोगों के लिए दंड (Penalty) निर्धारित किया गया है जो इसके प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं। इन दंडों में जुर्माना (Fine) और कारावास...
क्या कर्मचारी विदेश यात्रा करने पर भी अवकाश यात्रा रियायत की छूट का दावा कर सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (2022) मामले में यह तय किया कि यदि Leave Travel Concession (LTC) के तहत यात्रा में विदेश (Foreign Travel) शामिल हो, तो क्या इसे टैक्स छूट (Tax Exemption) मिल सकती है।कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें यह कहा गया था कि LTC केवल भारत के भीतर यात्रा (Domestic Travel) के लिए है, और अगर यात्रा में विदेशी स्थान शामिल हैं, तो इसे आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की धारा 10(5) के तहत छूट नहीं मिल सकती। कोर्ट...
झूठे साक्ष्य देने पर त्वरित सुनवाई की प्रक्रिया : धारा 383 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Proceedings) में झूठे साक्ष्य (False Evidence) देना एक गंभीर अपराध है, जिससे निर्दोष को सजा मिल सकती है या अपराधी छूट सकता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS, 2023) की धारा 383 इस अपराध को रोकने के लिए एक त्वरित (Immediate) कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध कराती है।यह धारा सेशन न्यायालय (Court of Session) या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (Magistrate of the First Class) को यह शक्ति देती है कि यदि किसी गवाही (Testimony) में जानबूझकर...
भारतीय स्टांप अधिनियम की धारा 49 के तहत खराब हो चुके स्टांप पर छूट प्राप्त करने की प्रक्रिया
परिचय (Introduction)भारतीय स्टैम्प अधिनियम (Indian Stamp Act) के तहत विभिन्न कानूनी और वित्तीय दस्तावेजों (Documents) पर स्टैम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाया जाता है। हालांकि, कई बार ऐसा होता है कि खरीदा गया स्टैम्प किसी गलती, त्रुटि या अन्य कारणों से उपयोग के योग्य नहीं रह जाता। इस तरह के मामलों में, धारा 49 (Section 49) के तहत व्यक्ति को राहत प्रदान की जाती है, ताकि उसकी आर्थिक हानि न हो। यह प्रावधान इस बात को सुनिश्चित करता है कि यदि कोई स्टैम्प गलती से खराब हो गया है, तो उसका पुनः उपयोग...
Transfer Of Property में गिफ्ट को कौन कैंसिल कर सकता है?
प्रतिसंहरण का अधिकार दाता का व्यक्तिगत अधिकार है। अतः इस अधिकार का प्रयोग केवल वह ही कर सकेगा। वह इस अधिकार का अन्तरण नहीं कर सकेगा क्योंकि इस अधिकार की प्रकृति, वाद संस्थित करने का अधिकार को प्रकृति जैसी हो तथा वाद संस्थित करने का अधिकार इसी अधिनियम की धारा 6 (ङ) के अन्तर्गत अनन्तरणीय घोषित किया गया है। फलतः यह भी एक अनन्तरणीय अधिकार है, पर यह अधिकार दाता की मृत्यु के पश्चात् उसके उत्तराधिकारियों को उत्तराधिकार में प्राप्त हो सकेगा कपट अथवा अनुचित प्रभाव के आधार पर गिफ्ट को रद्द कराने का अधिकार...




















