जानिए हमारा कानून
BNSS 2023 के अंतर्गत पुलिस जांच में दिए गए बयानों की प्रक्रिया और अधिकार : धारा 181 और 182
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code) को प्रतिस्थापित किया और यह 1 जुलाई 2024 से लागू हो गई। इस नई संहिता के अंतर्गत धारा 181 और 182 पुलिस द्वारा जांच के दौरान दिए गए बयानों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करती हैं। ये प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि जांच के दौरान एकत्रित किए गए बयानों का सही ढंग से उपयोग हो और आरोपी के अधिकारों की रक्षा हो।भारतीय नागरिक...
साक्षी की गवाही की पुष्टि : भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के अंतर्गत धारा 159 और 160
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ है, साक्षियों (witnesses) की गवाही की पुष्टि के संबंध में विशेष प्रावधान करता है। पुष्टि (corroboration) का तात्पर्य है साक्षी द्वारा दिए गए बयान को अन्य साक्ष्य (evidence) के माध्यम से समर्थन देना ताकि उसकी गवाही और विश्वसनीय (credible) बन सके। धारा 159 और 160 इस बात पर केंद्रित हैं कि साक्षी की गवाही की पुष्टि कैसे और कब की जा सकती है। इस लेख में हम इन धाराओं का विस्तार से विश्लेषण करेंगे और अन्य संबंधित धाराओं के संदर्भ में समझेंगे।धारा...
Arup Bhuyan बनाम असम राज्य (2023): UAPA के तहत संगठन की सदस्यता पर ऐतिहासिक फैसला
Arup Bhuyan बनाम असम राज्य (2023) का मामला भारत के सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्णय है, जो Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 (UAPA) के प्रावधानों की व्याख्या से संबंधित है। इस फैसले ने यह सवाल उठाया कि क्या केवल किसी प्रतिबंधित संगठन का सदस्य होना अपराध करने के समान है।इस लेख में हम इस मामले के तथ्यों, तर्कों, और सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या को सरल भाषा में समझेंगे और यह जानेंगे कि यह निर्णय मौलिक अधिकारों पर कैसे असर डालता है, खासकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत दिए गए...
गवाहों पर सवाल और उनकी साख को चुनौती देने के प्रावधान: BSA 2023 की धारा 157 और 158 का विश्लेषण
परिचय भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023, जो 1 जुलाई 2024 से प्रभाव में आया है, गवाहों की साख और उनके द्वारा दिए गए साक्ष्यों को चुनौती देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को शामिल करता है। इस लेख में हम धारा 157 और 158 के तहत गवाहों से पूछे जाने वाले प्रश्नों और उनकी साख (Credit) को चुनौती देने के प्रावधानों का सरल भाषा में विश्लेषण करेंगे। इसके साथ ही, परीक्षा (Examination) और प्रतिपरीक्षा (Cross-examination) की प्रक्रिया को भी संक्षेप में समझेंगे, ताकि पाठकों को व्यापक संदर्भ मिल सके।धारा 157:...
भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत सिक्कों, करेंसी नोट्स, बैंक नोट्स और सरकारी टिकटों से जुड़े अपराध
भारतीय न्याय संहिता 2023, जो भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की जगह आई है, 1 जुलाई 2024 से लागू हो गई है। इस संहिता के अध्याय 10 में सिक्कों, करेंसी नोट्स, बैंक नोट्स और सरकारी टिकटों से जुड़े विभिन्न अपराधों का उल्लेख किया गया है। ये प्रावधान देश की अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं ताकि धोखाधड़ी और जालसाजी (Forgery) से बचा जा सके। इस लेख में हम धाराएं 181, 182 और 183 को सरल हिंदी में समझाएंगे और उदाहरण देकर इन्हें और स्पष्ट करेंगे।ध्यान देने योग्य है कि सिक्कों और नकली वस्तुओं के...
पुलिस अधिकारी की गवाहों को उपस्थित होने की शक्ति और गवाहों की पूछताछ - भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 179 - 180
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 179 पुलिस अधिकारियों को यह शक्ति देती है कि वे किसी जाँच के दौरान गवाहों को उपस्थित होने के लिए बुला सकते हैं। यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि जिन व्यक्तियों को किसी मामले से संबंधित जानकारी हो, वे पुलिस की जाँच में मदद कर सकें।गवाहों को बुलाने का अधिकार (Authority to Summon Witnesses) इस धारा के तहत, जो पुलिस अधिकारी किसी मामले की जाँच कर रहा हो, वह लिखित आदेश के माध्यम से किसी व्यक्ति को बुला सकता है, बशर्ते...
इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 कौन-से कामों को अपराध बताता है?
भारत में इंटरनेट से जुड़े कामों के नियंत्रण के लिए इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट कार्य करता है। यह कानून इंटरनेट से जुड़ी सभी चीज़ों को सरकार द्वारा नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस एक्ट में ऐसे बहुत से कार्य है जिन्हें करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।इस एक्ट के अंतर्गत विभिन्न अपराध और उनके लिए प्रदान की गई सजा अधिनियम के अध्याय 11 और 11(ए) में निहित हैं।अनधिकृत पहुंच (धारा 43)यह खंड बताता है कि कोई भी व्यक्ति जो कंप्यूटर, कंप्यूटर सिस्टम या कंप्यूटर तक पहुंच प्राप्त करता है और उसे...
साइबर अपराधों क्या है? जानिए
इंटरनेट के माध्यम से होने वाले अपराधों को साइबर अपराध कहा जाता है। ऐसे बहुत सारे काम इंटरनेट के माध्यम से किये जा सकते हैं जिन्हें सरकार ने कानून बनाकर अपराध की श्रेणी में डाला है।साइबर अपराधों के प्रकारव्यक्तियों के खिलाफ अपराध।सभी प्रकार की संपत्ति के खिलाफ साइबर अपराध, औरराज्य या समाज के खिलाफ साइबर अपराध।सायबर अपराधों को इन तीन श्रेणियों में रखा जा सकता है।व्यक्ति या व्यक्ति के खिलाफ साइबर अपराधों में ई-मेल के माध्यम से उत्पीड़न शामिल है। पीछा करना, मानहानि, कंप्यूटर सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच,...
नकली सिक्कों, करेंसी नोट, बैंक नोट और सरकारी स्टैम्प से संबंधित अपराध: भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 178, 179 और 180
1 जुलाई, 2024 से लागू हुई भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023), जो भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) का स्थान लेती है, ने नकली सिक्के, करेंसी नोट, बैंक नोट और सरकारी स्टैम्प से संबंधित अपराधों के बारे में सख्त प्रावधान बनाए हैं। अध्याय X में ऐसे अपराधों का विवरण दिया गया है, जो नकली (counterfeit) वस्तुओं के उपयोग और जालसाजी को रोकने के उद्देश्य से हैं। इस लेख में हम भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 178, 179 और 180 को सरल भाषा में समझेंगे।धारा 178: नकली सिक्के, स्टैम्प,...
BNSS 2023 की धारा 177-178: मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट मिलने पर शक्तियां
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (Bhartiya Nagarik Suraksha Sanhita 2023) ने 1 जुलाई 2024 से आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code) को बदल दिया है। इस नई संहिता की धारा 175 पुलिस जांच की रीढ़ की हड्डी है। यह धारा पुलिस अधिकारियों को किसी भी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की जांच करने का अधिकार देती है, यानी ऐसा अपराध जिसके लिए पुलिस को मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना ही किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार है। इस धारा के तहत, जब पुलिस अधिकारी को किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी...
गवाहों के उत्तरों को खंडित करने के नियम : भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 156
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ है, भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य (Evidence) से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों को समाहित करता है। धारा 156 एक प्रमुख धारा है जो गवाह से पूछे गए सवालों और उनके उत्तरों के संदर्भ में साक्ष्य पेश करने के नियमों को स्पष्ट करती है। यह धारा, विशेष रूप से, गवाह की साख (Credibility) को हानि पहुँचाने या उसे गलत साबित करने के उद्देश्य से पूछे गए प्रश्नों से जुड़ी है। इस धारा के तहत, गवाह द्वारा दिए गए उत्तरों को खंडित (Contradict) करने के लिए...
चुनाव से संबंधित अपराध: भारतीय न्याय संहिता 2023 (धारा 175-177)
भारतीय न्याय संहिता 2023, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हो चुकी है, भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) का स्थान लेती है। इसमें चुनावों से संबंधित अपराधों के लिए विस्तृत और कठोर प्रावधान बनाए गए हैं। इस लेख में हम धारा 175 से 177 का सरल और स्पष्ट विश्लेषण करेंगे, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए गलत बयानबाजी, अनधिकृत खर्चे, और चुनावी खर्चों का लेखा-जोखा न रखने से जुड़े अपराधों को परिभाषित करती हैं। इससे पहले कि हम इन धाराओं पर चर्चा करें, आप पिछले लेख में धारा 169 से 174 के प्रावधानों को...
गवाह से पूछे गए अश्लील या अपमानजनक प्रश्न : BNS 2023 की धारा 153 से 156
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ है, ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की जगह ली है। इस अधिनियम के अंतर्गत गवाहों से पूछताछ (Cross-examination) के दौरान पूछे जाने वाले अनुचित प्रश्नों को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान दिए गए हैं। धारा 151 और धारा 152, जिन पर हमने पहले चर्चा की थी, इस बात की रक्षा करते हैं कि गवाह से सिर्फ उन प्रश्नों को पूछा जाए जिनके लिए उचित आधार हो। अब धारा 153 से 156 तक के प्रावधान न्यायालय (Court) की शक्ति और जिम्मेदारी को दर्शाते...
डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ: सुप्रीम कोर्ट का मैन्युअल स्कैवेंजिंग और मजबूरी से श्रम पर ऐतिहासिक फैसला
डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ का यह मामला मैन्युअल स्कैवेंजिंग (Manual Scavenging) के उन्मूलन (Eradication) पर आधारित है, जिसे भारत में लंबे समय से अमानवीय और असंवैधानिक (Unconstitutional) माना गया है। हालांकि मैन्युअल स्कैवेंजिंग को समाप्त करने के लिए कानून बनाए गए हैं, लेकिन यह प्रथा (Practice) अब भी जारी है, जिससे भारतीय संविधान में निहित (Guaranteed) मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) का उल्लंघन हो रहा है। यह मामला राज्य की उन विफलताओं (Failures) को उजागर करता है, जिनमें मैन्युअल स्कैवेंजिंग...
धारा 176, BNSS 2023: पुलिस अधिकारियों के लिए संज्ञेय अपराधों की जाँच करने की प्रक्रिया
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (Bhartiya Nagarik Suraksha Sanhita 2023), जो 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुई है, ने दंड प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code - CrPC) को बदल दिया है और भारत के आपराधिक न्याय प्रणाली में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए हैं। इसमें से एक प्रमुख धारा 176 है, जो पुलिस अधिकारियों को अपराधों की जाँच के दौरान पालन करने वाली प्रक्रिया के बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश देती है। यह धारा इस बात को स्पष्ट करती है कि पुलिस अधिकारियों को अपराध की जानकारी प्राप्त होने पर कैसे कार्य...
हसबैंड के वाइफ को साथ नहीं रखने पर क्या कहता है कानून?
कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं जब किसी पति द्वारा पत्नी को बगैर किसी कारण के घर से निकाल दिया जाता है। ऐसी स्थिति में यदि महिला कामकाजी नहीं है तब उस पर आर्थिक संकट भी आ खड़ा होता है। यह हालात अत्यंत संकटकारी है। इस स्थिति में पत्नी सर्वप्रथम अपने कानूनी अधिकारों को तलाशते हैं।भारतीय कानून ने महिलाओं को अनेक अधिकार दिए हैं। उन अधिकारों में कुछ अधिकार ऐसे हैं जो एक पत्नी को प्राप्त होते हैं। अपने पति के विरुद्ध वह सभी अधिकार यह है:-धारा- 498 (ए ) भारतीय दंड संहिता IPC:-भारतीय दंड संहिता की धारा 498...
सहमति से तलाक कैसे होता है? जानिए
एक स्थिति ऐसी होती है जब विवाह का कोई एक पक्षकार तलाक के लिए सहमत होता है तथा दूसरा पक्षकार तलाक नहीं लेना चाहता है और एक स्थिति वह होती है जब तलाक के लिए विवाह के दोनों पक्षकार पति और पत्नी एकमत पर सहमत होते हैं। ऐसी स्थिति में भारतीय कानून में क्या व्यवस्था दी गई है?अनेक मामलों में यह देखा जाता है कि जब विवाह के दोनों पक्षकार तलाक हेतु सहमत होते हैं तब वह अज्ञानता में नोटरी या शपथ पत्र के माध्यम से तलाक कर लेते हैं। कुछ परिस्थितियां तो ऐसी देखी गई हैं कि सादे कागज पर लिखकर भी तलाक कर लेते हैं...
सुप्रीम कोर्ट का 'The Temple of Healing' केस पर निर्णय: एडॉप्शन की प्रक्रिया, समस्याएँ, और सुधार
भारत में दत्तक ग्रहण (Adoption) की प्रक्रिया को लेकर कई वर्षों से समस्याएँ और विवाद उठते रहे हैं। दत्तक ग्रहण से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाएँ जटिल हैं, और इसके कारण बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और दत्तक माता-पिता के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस परिप्रेक्ष्य में, 'The Temple of Healing बनाम Union of India' का मामला दत्तक ग्रहण की मौजूदा प्रक्रिया, उसकी कमियों, और सुधार के संभावित तरीकों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह मामला न केवल दत्तक ग्रहण की प्रक्रियाओं की समीक्षा करता...
BNSS की धारा 175 का विश्लेषण: पुलिस की संज्ञेय मामलों की जांच करने की शक्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हो गई है, ने दंड प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code) की जगह ले ली है। इस नई कानूनी संरचना में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं, जो भारत में कानून प्रवर्तन (Law Enforcement) के कामकाज को प्रभावित करते हैं। इस संहिता के तहत धारा 175 एक महत्वपूर्ण धारा है, जो पुलिस को संज्ञेय मामलों की जांच करने की शक्ति प्रदान करती है। इस धारा को समझना पुलिस के अधिकारों और जिम्मेदारियों के व्यापक दायरे को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।संज्ञेय...
BSA 2023 की धारा 151 और 152 के अनुसार न्यायिक कार्यवाही के दौरान गवाहों से पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रासंगिकता
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ है, ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की जगह ली है। इस अधिनियम की धारा 151 और 152 न्यायिक कार्यवाही के दौरान गवाहों से पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रासंगिकता और उचितता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन धाराओं का उद्देश्य गवाहों को अनुचित या असंवेदनशील प्रश्नों से बचाना है, जो बिना किसी उचित आधार के पूछे जाते हैं। इस लेख में, हम धारा 151 और 152 के प्रावधानों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे, जिसमें दिए गए...