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भारत में नागरिकता: कानूनी ढांचा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और दोहरी नागरिकता पर चर्चा
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता पर उठे सवालों से भारत में नागरिकता से संबंधित कई नए सवालों ने जन्म लिया।गौरतलब है कि राहुल गांधी के कथित दोहरी नागरिकता का मामला 2015 में उठा जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में एक कंपनी (BackOps Ltd.) के दस्तावेजों में खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। उन्होंने गृह मंत्रालय से उनकी भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की थी।भारतीय संविधान के तहत दोहरी नागरिकता मान्य नहीं है, इसलिए यह विवाद का विषय बन गया। गृह...
गवाह संरक्षण योजना : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 398
भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) में गवाहों (Witnesses) की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। उनकी गवाही (Testimony) के आधार पर ही न्यायालय (Court) अपराधियों को सजा देता है। लेकिन कई बार गवाहों को धमकी (Threat), डराने-धमकाने या शारीरिक नुकसान (Physical Harm) का सामना करना पड़ता है, जिससे वे सच्ची गवाही देने से बचते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने गवाह संरक्षण योजना (Witness Protection Scheme) बनाई, जिसे बाद में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha...
धारा 14 राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 के तहत किराया संशोधन की प्रक्रिया
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) में मकान मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) के अधिकारों को संतुलित करने के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। इस अधिनियम की धारा 14 में किराया संशोधन (Rent Revision) की प्रक्रिया बताई गई है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि किराए में कोई भी बदलाव उचित और पारदर्शी (Transparent) तरीके से किया जाए। यदि मकान मालिक धारा 6 या धारा 7 के तहत किराया बढ़ाना चाहता है, तो उसे किराया अधिकरण (Rent Tribunal) में एक याचिका (Petition) दायर...
Multifarious Suits – राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धारा 6
राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 (Rajasthan Court Fees and Suits Valuation Act, 1961) में यह स्पष्ट किया गया है कि न्यायालय में दाखिल किए जाने वाले दस्तावेजों पर किस प्रकार का शुल्क (Court Fee) लगेगा। इस अधिनियम की पिछली धाराओं में यह बताया गया कि न्यायालयों और सार्वजनिक कार्यालयों में प्रस्तुत दस्तावेजों पर शुल्क देना अनिवार्य है (धारा 4), और अगर गलती से बिना शुल्क वाले दस्तावेज़ को स्वीकार कर लिया जाए, तो क्या किया जाएगा (धारा 5)।अब, धारा 6 बहु-विषयक वादों (Multifarious...
Know The Law | सुप्रीम कोर्ट ने समझाया गिफ्ट/सेटलमेंट डीड और वसीयत के बीच अंतर
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गिफ्ट डीड, सेटलमेंट डीड और वसीयत (Will) के बीच अंतर को स्पष्ट किया है। कोर्ट ने कहा कि गिफ्ट बिना किसी प्रतिफल के किया गया स्वैच्छिक हस्तांतरण है, जिसके लिए दानकर्ता के जीवनकाल में स्वीकृति की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, अचल संपत्ति के लिए पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन जब दानकर्ता गिफ्ट स्वीकार करता है तो उस पर कब्ज़ा होना गिफ्ट के रूप में अर्हता प्राप्त करने के लिए अनिवार्य नहीं है।इसके अलावा, जब प्यार, देखभाल और स्नेह से स्वैच्छिक हस्तांतरण किया जाता है, जो तुरंत...
अस्पतालों को पीड़ितों को त्वरित मेडिकल सुविधा देने और पुलिस को सूचना देने की कानूनी बाध्यता : धारा 397, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 397 एक महत्वपूर्ण प्रावधान (Provision) है, जो सभी अस्पतालों—चाहे वे सरकारी हों या निजी—को यह अनिवार्य (Mandatory) करता है कि वे कुछ गंभीर अपराधों के पीड़ितों (Victims) को तुरंत और मुफ्त चिकित्सा सुविधा (Medical Treatment) प्रदान करें। इसके अलावा, अस्पतालों को पुलिस को भी इस घटना की जानकारी तुरंत देनी होगी।यह प्रावधान उन मामलों में बहुत महत्वपूर्ण है, जहां किसी अपराध के कारण पीड़ित को शारीरिक क्षति (Physical...
राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धारा 4 और 5 के तहत न्यायालयों और सार्वजनिक कार्यालयों में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए शुल्क भुगतान का नियम
राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 (Rajasthan Court Fees and Suits Valuation Act, 1961) एक महत्वपूर्ण कानून है जो न्यायालयों (Courts) और सार्वजनिक कार्यालयों (Public Offices) में दस्तावेज़ों (Documents) के लिए शुल्क (Fee) के भुगतान को नियंत्रित करता है।इस अधिनियम के अध्याय II (Chapter II) में शुल्क की देयता (Liability to Pay Fee) से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं कि सरकार को कानूनी कार्यवाहियों (Legal Proceedings) और प्रशासनिक...
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 13 के अनुसार किराया न्यायाधिकरण की स्थापना, कार्य प्रणाली और प्रभाव
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) को राज्य में मकान मालिकों (Landlords) और किरायेदारों (Tenants) के बीच संबंधों को नियंत्रित (Regulate) करने के लिए लागू किया गया था।इस अधिनियम के तहत किराया ट्रिब्यूनल (Rent Tribunal) की स्थापना की गई, जो किराए, बेदखली (Eviction) और अन्य किरायेदारी मामलों का निपटारा (Settlement) करने के लिए एक विशेष प्राधिकरण (Special Authority) के रूप में कार्य करता है। अधिनियम के अध्याय 5 (Chapter V) में किराया ट्रिब्यूनल की संरचना...
यदि सरकार अनुबंध की शर्तों को बदल दे तो ठेकेदार को क्या कानूनी सुरक्षा मिलेगी?
सुप्रीम कोर्ट ने श्रिपति लखू माने बनाम महाराष्ट्र जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (2022) के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर विचार किया—क्या किसी ठेकेदार (Contractor) द्वारा काम रोक देना, जब दूसरा पक्ष अपने वादों (Reciprocal Promises) को पूरा नहीं करता, अनुबंध (Contract) का परित्याग (Abandonment) माना जाएगा?यह मामला भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 (Indian Contract Act, 1872) से संबंधित था, जिसमें अनुबंध में परिवर्तन (Alteration), उल्लंघन (Breach), और कानूनी उपायों (Legal Remedies) की चर्चा की गई।...
NI Act में बगैर किसी कंसीडरेशन के इंस्ट्रूमेंट्स
एक इंस्ट्रूमेंट के भुगतान के लिए यह आवश्यक नहीं है कि उसमे कोई प्रतिफल हो परन्तु यह आवश्यक है कि जब लिखत की रचना हो तब उसके पीछे न कोई प्रतिफल आवश्यक रूप से होना चाहिए। चूँकि किसी परक्राम्य लिखत का रचना, लिखना, प्रतिग्रहीत करना, पृष्ठांकन करना या अन्तरण करना भारतीय संविदा अधिनियम के अधीन संविदा सृजित करता है। अतः इस प्रकार सभी कार्य प्रतिफल से समर्थित होना चाहिए। प्रतिफल के अभाव में अनुबन्ध को न्यूडम पैक्टम (बिना प्रतिफल के) कहा जाएगा, में और अप्रवर्तनीय होगा। अतः प्रत्येक संविदा, अधिनियम की...
NI Act में प्रतिग्रहीता की ड्यूटी
प्रतिग्रहीतावचन पत्र के रचयिता एवं विनिमय पत्र के प्रतिग्रहीता के दायित्व का उपबन्ध परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 32 में किया गया है। उक्त दोनों लिखत के प्राथमिक पक्षकार मूल ऋणी होते हैं।वचन पत्र का रचयिता-लिखत के अधीन वचन पत्र का रचयिता प्रधान रूप से दायी होता है और उसकी वचनबद्धता आत्यन्तिक एवं बिना शर्त के होती है। वचनपत्र का रचयिता इसे लिखकर यह वचनबद्ध होता है कि इसका भुगतान वचन पत्र के प्रकट शब्दों के अनुसार करेगा। चूँकि रचयिता का दायित्व प्रधान रूप से आत्यन्तिक होता है अतः अनादर की सूचना...
हाईकोर्ट जज पर कैसे होती है कानूनी कार्रवाई, कितनी मिलती है सैलरी?
भारत में हाईकोर्ट न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वोच्च न्यायालयों के रूप में काम करते हैं और संविधान व कानून की रक्षा करते हैं। हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति, उनका वेतन और उन्हें हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान में तय की गई है ताकि न्यायपालिका स्वतंत्र और निष्पक्ष बनी रहे।हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति होती है। यह प्रक्रिया कई अधिकारियों की भागीदारी से पूरी होती है, जिनमें...
क्या सरकार बिना मुआवजा दिए निजी संपत्ति ले सकती है? एक कानूनी विश्लेषण
सुप्रीम कोर्ट ने Sukh Dutt Ratra बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य (2022) मामले में यह महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न तय किया कि क्या सरकार किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति (Private Property) को बिना कानूनी प्रक्रिया (Due Process) अपनाए और बिना मुआवजा (Compensation) दिए जबरदस्ती अपने कब्जे में ले सकती है? यह मामला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300-A (Article 300-A) से जुड़ा था, जिसमें यह प्रावधान है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से कानून द्वारा अधिकृत (Authority of Law) किए बिना वंचित नहीं किया जा सकता।सुप्रीम...
भारतीय स्टांप अधिनियम में दंड से संबंधित सभी प्रावधानों की व्याख्या और कानूनी परिणाम : धारा 62 -72
भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) दस्तावेज़ों (Documents) पर स्टांप शुल्क (Stamp Duty) लगाने के नियमों को निर्धारित करता है, ताकि सरकार को उचित राजस्व (Revenue) प्राप्त हो सके।इस अधिनियम (Act) में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति स्टांप शुल्क से बचने की कोशिश करता है, अनुचित तरीके से स्टांप का उपयोग करता है, या धोखाधड़ी (Fraud) करता है, तो उसे दंडित किया जाएगा। इस लेख में उन विभिन्न धाराओं (Sections) को सरल भाषा में समझाया गया है जो भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत...
धारा 396, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 –Victim Compensation Scheme की संपूर्ण व्याख्या
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 396 एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जिसका उद्देश्य अपराध पीड़ितों (Victims) और उनके आश्रितों (Dependents) को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस प्रावधान के तहत, केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक मुआवजा योजना (Compensation Scheme) तैयार करती हैं, ताकि अपराध से पीड़ित व्यक्ति की पुनर्वास (Rehabilitation) में सहायता की जा सके।यह प्रावधान पीड़ितों के अधिकारों को सुनिश्चित करता है और उनके दर्द और कठिनाइयों को कम करने के लिए एक संरचनात्मक प्रक्रिया प्रदान करता है। ...
ग़ैरक़ानूनी रूप से बेदख़ल किरायेदार को फिर से क़ब्ज़ा दिलाने की प्रक्रिया: धारा 11 और 12 राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) राज्य में मकान मालिकों (Landlords) और किरायेदारों (Tenants) के बीच संबंधों को नियंत्रित (Regulate) करने के लिए बनाया गया है। इस अधिनियम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन किरायेदारों की सुरक्षा से जुड़ा है जिन्हें ग़ैरक़ानूनी तरीके से उनके किराए के मकान (Rented Premises) से निकाल दिया जाता है।अधिनियम के अध्याय IV (Chapter IV) में विशेष रूप से उन मामलों का समाधान दिया गया है जहां मकान मालिक बिना किसी वैध (Legal) प्रक्रिया के...
NI Act में लेखीवाल और ऊपरवाल की जिम्मेदारी
लेखीवाल-विनिमय पत्र या चेक का लेखीवाल (लेखक) धारक को क्षतिपूर्ति करने के लिए आबद्ध होते हैं यदि विनिमय पत्र की दशा में प्रतिग्रहीता एवं चेक की दशा में ऊपरवाल बैंक क्रमशः विनिमय पत्र या चेक का अनादर कर देते हैं, बशर्ते कि अनादर की सम्यक् सूचना लेखीवाल को की जाती है।चेक की दशा में चेक द्वारा इसका लेखीवाल ऊपरवाल (बैंक) को एक निश्चित धनराशि पाने वाले को संदाय करने का आदेश अपने खाते से करने को देता है। जहाँ बैंक द्वारा चेक का अनादर कर दिया जाता है वहाँ चेक का धारक बैंक के विरुद्ध कोई उपचार नहीं रखता...
NI Act में कौन एजेंट नियुक्त कर सकता है?
भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 183 उपबन्धित करती है कि कोई भी व्यक्ति जो प्राप्तवय एवं स्वस्थवित हो अभिकर्ता नियोजित कर सकेगा। यह उपबन्ध यह स्पष्ट करता है कि एक अवयस्क प्रधान नहीं हो सकता है, अतः अवयस्क अभिकर्ता नियोजित नहीं कर सकेगा।अभिकर्ता कौन हो सकेगा- भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 184 के अनुसार- "जहाँ तक मालिक और पर व्यक्तियों के बीच का सम्बन्ध है कोई भी व्यक्ति अभिकर्ता हो सकेगा, किन्तु कोई भी व्यक्ति, जो प्राप्तवय और स्वस्थचित्त न हो, अभिकर्ता ऐसे न हो सकेगा कि वह अपने प्रधान के...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 395 के तहत मुकदमे की लागत और पीड़ितों की क्षति पूर्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 395 यह तय करती है कि अदालत द्वारा लगाए गए जुर्माने (Fine) की राशि को कैसे उपयोग किया जाएगा और पीड़ितों (Victims) को मुआवजा (Compensation) देने के लिए क्या प्रावधान हैं।यह धारा अपराधियों द्वारा भरे गए जुर्माने को न्यायपूर्ण तरीके से वितरित करने की व्यवस्था करती है ताकि इससे मुकदमे की लागत पूरी हो सके, पीड़ितों को वित्तीय राहत मिल सके और अपराध के कारण हुए नुकसान की भरपाई हो सके। यह प्रावधान न्याय को केवल सजा तक सीमित नहीं रखता, बल्कि अपराध से प्रभावित...
क्या किसी गलत न्यायिक आदेश से मिले लाभ को बनाए रखा जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने Mekha Ram बनाम राजस्थान राज्य (2022) मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर निर्णय दिया कि यदि किसी व्यक्ति को न्यायालय के एक अस्थायी (Temporary) आदेश से आर्थिक लाभ मिला हो और बाद में वह आदेश हाईकोर्ट (Higher Court) द्वारा निरस्त (Overturned) कर दिया जाए, तो क्या वह लाभ वापस किया जाना चाहिए?यह मामला सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (Code of Civil Procedure - CPC) की धारा 144 के तहत प्रतिपूर्ति (Restitution) के सिद्धांत से संबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी...