जानिए हमारा कानून
क्या भारत से बाहर आंशिक रूप से किए गए अपराधों पर भारतीय अदालतों में मुकदमा चल सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने Sartaj Khan बनाम उत्तराखंड राज्य (2022) के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर फैसला दिया कि क्या कोई अपराध जो आंशिक रूप से भारत के बाहर किया गया हो, भारतीय अदालतों में मुकदमे योग्य (Triable) होगा? यह मामला दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (Code of Criminal Procedure - CrPC) की धारा 188 की व्याख्या (Interpretation) से जुड़ा था।इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी अपराध का कोई भी हिस्सा भारत में घटित हुआ हो, तो उसे भारतीय अदालतों में मुकदमे योग्य माना जाएगा और...
NI Act में चुराए गए इंस्ट्रूमेंट के पेमेंट के संबंध में प्रावधान
वाहक लिखत की दशा में अधिनियम की धाराएं 10, 78 एवं 82 (ग) लिखतों के संदाय के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण है कि सभी मामलों में संदाय एक विधिसम्मत धारक को किया जाना चाहिए। यहाँ प्रश्न है कि वाहक की देय लिखत में किसे विधिसम्मत धारक माना जाय। ऐसी दशा में सही धारक वह है जिसने परिदान के द्वारा लिखत को प्राप्त किया है। वाहक को देय लिखत की दशा में यह निर्धारित करना कि किस धारक ने लिखत को परिदान द्वारा या अन्यथा रूप में प्राप्त किया है, कठिन है।यदि यह दिखाने के लिए कुछ नहीं है कि वह संदाय पाने का हकदार नहीं...
NI Act में धारा 10 के प्रावधान
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 10 सम्यक अनुक्रम में संदाय के संबंध में है।किसी भी सम्यक् अनुक्रम संदाय के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए-लिखत के प्रकट शब्दों के अनुसार संदाय,सद्भावना पूर्वकबिना किसी उपेक्षा के,लिखत का कब्जा रखने वाले (धारक) को, एवं उस व्यक्ति को जो संदाय पाने का हकदार है। उक्त परिस्थितियों में की गई संदाय को विधिसम्मत संदाय भी कहेंगे।लिखत के प्रकट शब्दों के अनुसार-लिखत के प्रकट शब्दों से अभिप्रेत है कि पक्षकारों के आशय के अनुसार संदाय किया जाना चाहिए जो...
न्यायालय के निर्णय की भाषा और और दंड निर्धारण की प्रक्रिया – धारा 393, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
न्यायालय (Court) द्वारा दिए गए निर्णय (Judgment) में यह तय किया जाता है कि अभियुक्त (Accused) दोषी है या नहीं। यदि दोषी है, तो उसे क्या दंड (Punishment) दिया जाएगा।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 393 में यह प्रावधान किया गया है कि न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय की भाषा और उसकी सामग्री कैसी होनी चाहिए। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि निर्णय स्पष्ट, न्यायपूर्ण और पारदर्शी हो। निर्णय की भाषा (Language of the Judgment) धारा 393(1)(a) के अनुसार, हर निर्णय न्यायालय की आधिकारिक भाषा...
किरायेदार को बेदखल करने के कानूनी आधार – राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 9 भाग 2
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) किरायेदार (Tenant) और मकान मालिक (Landlord) के बीच संबंधों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। इस अधिनियम की धारा 9 यह तय करती है कि किन परिस्थितियों में मकान मालिक अपने किरायेदार को कानूनी रूप से बेदखल (Eviction) कर सकता है।भाग 1 में, किराया न देना, संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, बिना अनुमति निर्माण करना, अनुचित गतिविधियाँ करना और संपत्ति का गलत उपयोग जैसे विभिन्न कारणों को समझाया गया था। लेकिन, बेदखली केवल इन कारणों तक...
क्या बिना पूर्व Environmental Clearance के उद्योगों को बंद किया जाना चाहिए? एक कानूनी विश्लेषण
भारत में पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance - EC) और औद्योगिक संचालन को लेकर कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने M/S Pahwa Plastics Pvt. Ltd. & Anr. बनाम Dastak NGO & Ors. (2022) के मामले में यह तय किया कि क्या किसी ऐसे उद्योग को बंद किया जाना चाहिए, जिसे पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिली है, लेकिन जिसे कानूनी रूप से Consent to Establish (CTE) और Consent to Operate (CTO) प्राप्त हुआ है और जिसने Post-Facto EC (बाद में दी जाने वाली स्वीकृति) के लिए आवेदन किया है।इस...
भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 की धारा 68 और 69 के अनुसार गलत तारीख वाले दस्तावेजों और अवैध स्टांप बिक्री पर कानूनी प्रावधान
भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है जो विभिन्न वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) और कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर स्टांप शुल्क (Stamp Duty) के भुगतान को नियंत्रित करता है।इस कानून का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी अनुबंध (Agreement), विनिमय बिल (Bill of Exchange), प्रोमिसरी नोट (Promissory Note) और अन्य दस्तावेज सही ढंग से स्टांप किए जाएं ताकि सरकार को राजस्व (Revenue) की हानि न हो। पिछली धाराओं में, हमने कई अपराधों के बारे में...
NI Act में Holder in Due Course के संबंध में प्रतिफल की उपधारणा
भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 118 (क) प्रतिफल को उपधारणा का उपबन्ध करती है। इसके अनुसार- "यह कि हर एक परक्रामण लिखत, प्रतिफलार्थ रचित, या लिखी गई थी और यह कि हर ऐसी लिखत जब प्रतिगृहीत, पृष्ठांकित, परक्रामित या अन्तरित हो चुकी हो तब वह प्रतिफलार्थ, प्रतिगृहीत, पृष्ठांकित, परक्रामित या अन्तरित की गई थी।" पुनः धारा 118 को उपधारा (छ) यह स्पष्ट करती है कि प्रत्येक धारक, सम्यक् अनुक्रम धारक है, परन्तु इसे साबित करने का भार कि धारक, सम्यक् अनुक्रम धारक है, उस पर है : परन्तु जहाँ कि लिखत उसके विधि पूर्ण...
NI Act में Holder in Due Course किसे कहा गया है?
NI Act की धारा Holder in Due Course के संबंध में उल्लेख करती है। इसे हिंदी में Holder in Due Course कहा जाता है। धारक एवं सम्यक् अनुक्रम शब्दों को समान रूप में नहीं लेना चाहिए। इनमें मौलिक अन्तर है। "प्रत्येक सम्यक् अनुक्रम धारक एक धारक होता है, परन्तु प्रत्येक धारक एक Holder in Due Course हीं होता है।" अधिनियम की धारा 8 एवं 9 क्रमश: धारक एवं Holder in Due Course को परिभाषित करती है। एक लिखत का धारक होने के लिए यह आवश्यक है कि उसे-अपने नाम से लिखत का कब्जा रखने का हकदार होना चाहिए।उस पर शोध्य...
फैसले की घोषणा की प्रक्रिया – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 392
किसी भी आपराधिक (Criminal) मामले में न्यायालय (Court) का अंतिम निर्णय फैसला (Judgment) होता है। यह फैसला यह तय करता है कि आरोपी (Accused) दोषी (Guilty) है या नहीं, और अगर दोषी है, तो उसे कौन सी सजा (Punishment) दी जाएगी।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 392 यह स्पष्ट करती है कि किसी भी आपराधिक मामले में न्यायालय को फैसले की घोषणा कैसे करनी चाहिए। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि फैसला खुले न्यायालय (Open Court) में सुनाया जाए ताकि सभी संबंधित पक्ष (Concerned Parties) को इसके बारे में...
रसीद जारी करने से इनकार करने और स्टाम्प शुल्क बचाने के लिए की गई चालाकी पर दंड : भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 धारा 65, 66 और 67
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है, जो विभिन्न वित्तीय (Financial) और कानूनी (Legal) लेन-देन पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने और उसके भुगतान को सुनिश्चित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी आवश्यक दस्तावेज (Documents) विधिवत (Properly) रूप से स्टाम्प किए जाएं ताकि सरकार को राजस्व (Revenue) का नुकसान न हो।इस अधिनियम के तहत कई दंडात्मक प्रावधान (Penal Provisions) दिए गए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन न करे और स्टाम्प...
किरायेदार को बेदखल करने के नियम - राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 9 भाग 1
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 9 उन स्थितियों को परिभाषित करती है, जिनमें किसी मकान मालिक (Landlord) को अपने किरायेदार (Tenant) को बेदखल (Eviction) करने का कानूनी अधिकार होता है। यह प्रावधान अन्य किसी भी कानून या किराए के अनुबंध (Rent Agreement) से ऊपर माना जाता है, लेकिन इसे इस अधिनियम की अन्य धाराओं के अनुसार पढ़ा जाना चाहिए।यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि कोई मकान मालिक अपने किरायेदार को मनमाने तरीके से बेदखल न कर सके और उसे ऐसा करने के लिए कानूनी रूप से उचित कारण साबित करना...
क्या दीवानी न्यायालय किसी व्यक्ति को आपराधिक मुकदमा दर्ज करने से रोकने का अधिकार रखता है?
सप्रीम कोर्ट ने M/S Frost International Limited v. M/S Milan Developers and Builders (P) Limited & Anr. मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया। यह मामला मुख्य रूप से कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर, 1908 (Code of Civil Procedure, 1908 - CPC), नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (Negotiable Instruments Act, 1881 - N.I. Act) और स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट, 1963 (Specific Relief Act, 1963 - SR Act) के प्रावधानों (Provisions) से संबंधित था।इसमें यह सवाल उठाया गया कि क्या कोई वादी (Plaintiff) दीवानी मुकदमे (Civil...
NI Act में आदरणार्थ प्रतिगृहीता कौन होता है?
जब कोई अन्य व्यक्ति किसी विनिमय पत्र को प्रतिगृहीत करता है, जबकि उसे अप्रतिग्रहण के कारण-(1) अनादर के लिए टिप्पण किया गया है, या(2) अ-प्रतिग्रहण के लिए प्रसाध्य किया गया है।(3) बेहतर प्रतिभूति के लिए टिप्पण और प्रसाक्ष्य किया गया है।ऐसे व्यक्ति को एक आदरणार्थं प्रतिगृहीता कहते हैं। इस प्रकार एक व्यक्ति आदरणार्थ प्रतिगृहीता होता है जो विनिमय पत्र के अनादर की टिप्पण की गई है, या प्रसाध्य धारा 99 एवं 100 के अधीन की गयी है या इसे बेहतर प्रतिभूति के लिए धारा 100 के अधीन टिप्पण एवं प्रसाध्य करा दिया...
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स के पक्षकार
लिखत के पक्षकार विनिमय पत्र एवं चेक के पक्षकार होते हैं, 'लेखीवाल', 'ऊपरवाल' एवं 'पाने वाला' (आदाता) जबकि वचन पत्र के 'लेखक' एवं 'पाने वाला' दो पक्षकार होते हैं।'लेखीवाल' - अधिनियम की धारा 7 के अनुसार विनिमय पत्र एवं चेक के लेखक को 'लेखीवाल' कहा जाता है। वचन पत्र में ऐसे व्यक्ति को "लेखक" जाता है। लेखीवाल या लेखक ऐसे व्यक्ति होते हैं जो लिखतों को लिखते है। विनिमय पत्र एवं चेक की दशा में लेखीवाल एवं वचन पत्र की दशा में लेखक कहा जाता है। इन दोनों में मुख्य अन्तर है कि विनिमय पत्र एवं चेक का लेखक...
एडहेसिव स्टाम्प को रद्द न करने पर दंड: भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 63 और 64
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है जो विभिन्न कानूनी (Legal) और वित्तीय दस्तावेजों (Financial Documents) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) के भुगतान को नियंत्रित करता है। यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि सभी महत्वपूर्ण लेन-देन सही तरीके से दर्ज किए जाएं और सरकार को उचित राजस्व प्राप्त हो।इस अधिनियम की धारा 63 और 64 (Section 63 and Section 64) में उन परिस्थितियों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है जब कोई व्यक्ति स्टाम्प शुल्क से संबंधित नियमों का पालन नहीं...
सीमित अवधि किरायेदारी– राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 8
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 8 सीमित अवधि किरायेदारी (Limited Period Tenancy) से संबंधित है। यह प्रावधान मकान मालिक (Landlord) को यह अधिकार देता है कि वह अपनी संपत्ति को तीन साल से अधिक नहीं की अवधि के लिए किराए पर दे सकता है।यह प्रावधान उन मकान मालिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो अपनी संपत्ति को अल्पकालिक (Short-Term) आधार पर किराए पर देना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तय अवधि पूरी होने के बाद उन्हें उनकी संपत्ति वापस मिल जाए। यह कानून यह भी तय करता है कि मकान...
अपील का अधिकार – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 390 और 391
न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) में दोषसिद्धि (Conviction) और सजा (Sentence) के खिलाफ अपील (Appeal) करने का अधिकार एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह अधिकार सुनिश्चित करता है कि किसी व्यक्ति को अन्यायपूर्ण सजा न मिले और यदि कोई गलती हुई हो तो उसे सुधारा जा सके।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 390 उन व्यक्तियों को अपील करने का अधिकार प्रदान करती है जिन्हें धारा 383, धारा 384, धारा 388 और धारा 389 के तहत दोषी ठहराया गया हो। इसके अलावा, धारा 391 यह स्पष्ट करती है कि किन परिस्थितियों में...
क्या सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की जवाबदेही RTI Act के तहत है?
सुप्रीम कोर्ट ने अंजलि भारद्वाज बनाम CPIO, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (RTI Cell) (2022) मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर फैसला दिया, जो सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम (Supreme Court Collegium) की पारदर्शिता (Transparency) से जुड़ा था।इस मामले में यह सवाल उठाया गया कि क्या कोलेजियम की बैठकों में हुई चर्चाओं को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005 - RTI Act) के तहत सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कोलेजियम के अंतिम निर्णय (Final Decision) और प्रस्ताव...
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स में प्रतिफल का महत्व
चूँकि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक निश्चित धनराशि भुगतान करने की संविदा करता है, अत: एक विधिसम्मत संविदा के समर्थन के लिए प्रतिफल का होना आवश्यक होता है। लिखतों के सम्बन्ध में प्रतिफल की उपधारणा होती है।अधिनियम की धारा 118 (क) में यह उबन्धित है कि प्रत्येक निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स जब यह प्रतिग्रहीत, पृष्ठांकित परक्राम्य या अन्तरित किया जाता है तो ऐसा प्रतिग्रहण, पृष्ठांकन, परक्रामण या अन्तरण प्रतिफल से किया गया है परन्तु वह उपधारणा खण्डनीय होती है। तातोपमुला नागराजू बनाम पैटेम पदमावती के मामले...