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साक्ष्य अधिनियम: जानिए रेप पीड़िता की गवाही पर अदालत द्वारा कब भरोसा किया जा सकता है?
साक्ष्य अधिनियम: जानिए रेप पीड़िता की गवाही पर अदालत द्वारा कब भरोसा किया जा सकता है?

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का अध्याय 9, 'साक्षियों के विषय में' प्रावधान करता है। इसके अंतर्गत धारा 118 यह बताती है कि कौन व्यक्ति टेस्टिफाई करने/गवाही देने या साक्ष्य देने में सक्षम है, हालाँकि, इस धारा के अंतर्गत किसी ख़ास वर्ग के व्यक्तियों की सूची नहीं दी गयी है जिन्हें साक्ष्य देने में सक्षम कहा गया हो।गौरतलब है कि इस धारा के अंतर्गत, ऐसी कोई आयु या व्यक्तियों के वर्ग का उल्लेख नहीं किया गया है, जो गवाह के गावही/बयान/साक्ष्य देने की योग्यता के प्रश्न को निर्धारित करते हों। मसलन, यह धारा...

धारा 165 साक्ष्य अधिनियम: जानिए क्या है गवाहों से प्रश्न पूछने की न्यायाधीश की स्वतंत्र शक्ति?
धारा 165 साक्ष्य अधिनियम: जानिए क्या है गवाहों से प्रश्न पूछने की न्यायाधीश की स्वतंत्र शक्ति?

यदि एक अदालत को न्याय देने में एक प्रभावी साधन के तौर पर उभारना है, तो पीठासीन न्यायाधीश को महज़ एक दर्शक और एक रिकॉर्डिंग मशीन नहीं होना चाहिए कि वह मामले को बस सुने और एक टाइपिस्ट की तरह अपना निर्णय सुना दे।उसे मामले में सत्य का पता लगाने हेतु स्वतंत्र रूप से गवाहों से सवाल करते हुए अपनी बुद्धिमत्ता, सक्रियता एवं रुचि का परिचय देना चाहिए। इसके जरिये न केवल सत्य की जीत होगी, बल्कि न्यायालय, मामले के परीक्षण में स्वयं भागीदार भी बन सकेगा और न्याय विजयी हो सकेगा।यह आम तौर पर कहा भी जाता है कि...

धारा 358 सीआरपीसी: जानिए क्या है निराधार गिरफ्तारी के लिए प्रतिकर (Compensation) सम्बन्धी प्रावधान?
धारा 358 सीआरपीसी: जानिए क्या है निराधार गिरफ्तारी के लिए प्रतिकर (Compensation) सम्बन्धी प्रावधान?

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि समाज में लोग एक दूसरे को आपसी रंजिश, मतभेद, विवाद या अन्य कारणों के चलते, कानूनी दांव पेंच में फंसाने के लिए कानून का दुरुपयोग करते हैं। वे कानून का सहारा लेकर किसी दूसरे पक्ष पर निराधार आरोप लगाते हैं, जिसके परिणाम-स्वरुप कभी-कभार उस व्यक्ति की पुलिस अफसर द्वारा गिरफ्तारी हो जाती है। ऐसे मामलों में गिरफ्तार किये गए पक्ष को काफी परेशानी एवं बिना वजह की समस्याओं से जूझना पड़ता है, ऐसे में यह जरुरी हो जाता है कि कानून द्वारा ऐसे गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को कथित तौर पर...

COVID -19 : जानिए क्या कहती है आईपीसी की धारा 188, क्या हो सकते हैंं प्रशासन के आदेश की अवज्ञा के परिणाम
COVID -19 : जानिए क्या कहती है आईपीसी की धारा 188, क्या हो सकते हैंं प्रशासन के आदेश की अवज्ञा के परिणाम

कोरोना वायरस के बढ़ते असर को देखते हुए देश में तमाम जगहों पर प्रशासन द्वारा अधिसूचना जारी करते हुए यह आदेश जारी कर दिया गया है/किया जा रहा है कि तमाम दुकाने (आवश्यक वस्तुओं को बेचने वाली दुकानों को छोड़कर), रेस्तरां, पब, म्यूजियम, डिस्को, पर्यटन स्थल इत्यादि बंद कर दिए जाएँ। यह आदेश इस वायरस के प्रभाव को कम करने के लिए जारी किये जा रहे हैं। हम सभी अबतक यह जान ही चुके हैं कि कैसे यह वायरस पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है और अब यह भारत में भी अपने पाँव तेज़ी पसार रहा है। इस आदेश के साथ...