जानिए हमारा कानून
जानिए मुस्लिम लॉ में हिबा (गिफ्ट) का मूलभूत अर्थ, क्या हिबा रद्द किया जा सकता है?
मुस्लिम लॉ में कोई भी मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा ही वसीयत कर सकता है। ऐसा हिस्सा वह किसी बाहरी व्यक्ति को वसीयत कर सकता है, जो उत्तराधिकारी शरीयत द्वारा तय किए गए हैं, उन्हें वसीयत अन्य उत्तराधिकारियों की सहमति द्वारा ही की जा सकती है, परंतु मुस्लिम लॉ में हिबा नाम की एक व्यवस्था रखी गई है, जिसे दान या गिफ्ट कहा जाता है। मुस्लिम लॉ में संपत्ति को हिबा के माध्यम से दान किया जा सकता है। हिबा क्या है- हिबा, दान और गिफ्ट का ही एक रूप है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को...
धारा 295A आईपीसी: जानिए कब धार्मिक भावनाओं को आहत करना बन जाता है अपराध?
अभी हाल ही में, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राष्ट्रीय लॉकडाउन के बीच "रामायण" धारावाहिक देखने की खुद की एक तस्वीर को ट्वीट किया था। इस ट्वीट पर वकील प्रशांत भूषण द्वारा ट्विटर पर ही कथित रूप से एक आलोचनात्मक टिपण्णी की गयी थी, जिसके चलते उनके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई थी।दरअसल वकील प्रशांत भूषण ने अपने ट्विटर पर (केन्द्रीय मंत्री की तस्वीर के सम्बन्ध में) लिखा था, "लॉकडाउन के कारण करोड़ों भूखे और सैकड़ों मील घर के लिए चल रहे हैं, हमारे हृदयहीन मंत्री लोगों को रामायण और महाभारत की अफीम का...
धारा 188 आईपीसी : जानिए कैसे और कब लिया जाता है अदालत द्वारा इस अपराध का संज्ञान?
कोरोना महामारी के बीच जैसे कि हम जानते ही हैं कि देश में तमाम जगहों पर शासन/प्रशासन द्वारा अधिसूचना जारी/प्रख्यापित करते हुए तमाम प्रकार के ऐसे आदेश जारी किये जा रहे हैं या किये जा चुके हैं, जिससे इस महामारी से लड़ने में हमे मदद मिले।ऐसे किसी आदेश, जिसे एक लोकसेवक द्वारा प्रख्यापित किया गया है और यदि ऐसे आदेश की अवज्ञा की जाती है तो अवज्ञा करने वाले व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 188 के अंतर्गत दण्डित किया जा सकता है।एक पिछले लेख में हम विस्तार से इस बारे में जान चुके हैं कि आखिर...
साक्ष्य अधिनियम: जानिए किसी मामले में साक्षियों (Witnesss) की संख्या पर क्या है कानून?
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 में साक्षियों की संख्या को लेकर प्रावधान एक अलग धारा में प्रदान किया गया है। अधिनियम की धारा 134 इस विषय में प्रावधान करती है कि आखिर किसी मामले में साक्षियों की संख्या क्या होनी चाहिए। इसी धारा को मौजूदा लेख में हम समझने का प्रयास करेंगे और यह जानेंगे कि किसी मामले में साक्षियों (Witnesss) की संख्या पर क्या कानून है। वास्तव में, यह धारा एक प्रकार का स्पष्टीकरण देती है कि किसी भी मामले में किसी तथ्य को साबित करने के लिए साक्षियों की कोई विशिष्ट संख्या अपेक्षित...
जानिए महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश 2020 के बारे में ख़ास बातें
बीते बुधवार (22 अप्रैल, 2020) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ हमलों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने के लिए महामारी रोग अधिनियम, 1897 में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश को मंजूरी दी थी। उसी दिन (22 अप्रैल, 2020) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर करते हुए इसे अपनी मंजूरी दी और यह कानून बन गया। गौरतलब है कि संविधान के अंतर्गत, अनुच्छेद 123 के तहत भारत के राष्ट्रपति को, संसद के सत्र में न होने की स्थिति में एक अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त...
धारा 235 (2) सीआरपीसी: जानिए सजा-पूर्व सुनवाई (Pre-sentence Hearing) के बारे में खास बातें
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 का अध्याय 18 (XVIII) सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण के बारे में प्रावधान करता है। इस अध्याय के अंतर्गत धाराएँ 225 से 237 आती हैं। इसी के अंतर्गत एक धारा 235 है, जिसकी उपधारा (2) दोषी व्यक्ति के सम्बन्ध में सजा-पूर्व सुनवाई (pre-sentence hearing) के बारे में प्रावधान करती है।इसके अंतर्गत, यदि अभियुक्त दोषसिद्ध किया जाता है तो न्यायाधीश, दण्ड (Sentence) के प्रश्न पर अभियुक्त की सुनवाई करता है, और उसके पश्च्यात ही विधि के अनुसार दण्ड पारित करता है। हालाँकि, वह ऐसा तब करने...
साक्ष्य अधिनियम: जानिए रेप पीड़िता की गवाही पर अदालत द्वारा कब भरोसा किया जा सकता है?
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का अध्याय 9, 'साक्षियों के विषय में' प्रावधान करता है। इसके अंतर्गत धारा 118 यह बताती है कि कौन व्यक्ति टेस्टिफाई करने/गवाही देने या साक्ष्य देने में सक्षम है, हालाँकि, इस धारा के अंतर्गत किसी ख़ास वर्ग के व्यक्तियों की सूची नहीं दी गयी है जिन्हें साक्ष्य देने में सक्षम कहा गया हो।गौरतलब है कि इस धारा के अंतर्गत, ऐसी कोई आयु या व्यक्तियों के वर्ग का उल्लेख नहीं किया गया है, जो गवाह के गावही/बयान/साक्ष्य देने की योग्यता के प्रश्न को निर्धारित करते हों। मसलन, यह धारा...
धारा 165 साक्ष्य अधिनियम: जानिए क्या है गवाहों से प्रश्न पूछने की न्यायाधीश की स्वतंत्र शक्ति?
यदि एक अदालत को न्याय देने में एक प्रभावी साधन के तौर पर उभारना है, तो पीठासीन न्यायाधीश को महज़ एक दर्शक और एक रिकॉर्डिंग मशीन नहीं होना चाहिए कि वह मामले को बस सुने और एक टाइपिस्ट की तरह अपना निर्णय सुना दे।उसे मामले में सत्य का पता लगाने हेतु स्वतंत्र रूप से गवाहों से सवाल करते हुए अपनी बुद्धिमत्ता, सक्रियता एवं रुचि का परिचय देना चाहिए। इसके जरिये न केवल सत्य की जीत होगी, बल्कि न्यायालय, मामले के परीक्षण में स्वयं भागीदार भी बन सकेगा और न्याय विजयी हो सकेगा।यह आम तौर पर कहा भी जाता है कि...
धारा 358 सीआरपीसी: जानिए क्या है निराधार गिरफ्तारी के लिए प्रतिकर (Compensation) सम्बन्धी प्रावधान?
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि समाज में लोग एक दूसरे को आपसी रंजिश, मतभेद, विवाद या अन्य कारणों के चलते, कानूनी दांव पेंच में फंसाने के लिए कानून का दुरुपयोग करते हैं। वे कानून का सहारा लेकर किसी दूसरे पक्ष पर निराधार आरोप लगाते हैं, जिसके परिणाम-स्वरुप कभी-कभार उस व्यक्ति की पुलिस अफसर द्वारा गिरफ्तारी हो जाती है। ऐसे मामलों में गिरफ्तार किये गए पक्ष को काफी परेशानी एवं बिना वजह की समस्याओं से जूझना पड़ता है, ऐसे में यह जरुरी हो जाता है कि कानून द्वारा ऐसे गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को कथित तौर पर...
च्युइंग-गम और पान-मसाला बैन: जानिए खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक को लेकर क्या है कानून?
COVID-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए हाल ही में चंडीगढ़ प्रशासन ने एहतियात के तौर पर, चंडीगढ़ में च्युइंग-गम, बबल-गम, पान-मसाला और अन्य संबद्ध उत्पादों की बिक्री और इनके थूकने पर प्रतिबन्ध लगा दिया। केंद्र शासित प्रदेश, चंडीगढ़ में प्रधान गृह सचिव, अरुण गुप्ता, जो इस केंद्र शासित प्रदेश के खाद्य सुरक्षा आयुक्त का प्रभार भी संभालते हैं, ने 6 अप्रैल (सोमवार) को ये आदेश जारी किए। उनके मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया कि चूँकि यह वायरस मनुष्य के लार (सैलाइवा) में मौजूद हो सकता है, और...
COVID-19: जानिए आपदा के दौरान एक अधिकारी कीकर्त्तव्य-पालन में असफलता के क्या होंगे परिणाम?
जैसा कि हम सभी जानते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च, रात 12 बजे से अगले 21 दिनों के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी। पीएम ने यह घोषणा करते हुए कहा था कि कोरोना-वायरस को आम-जन के बीच फैलने से रोकने के लिए यह उपाय नितांत आवश्यक है। प्रधानमंत्री की इस घोषणा के पश्च्यात, गृह मंत्रालय (एमएचए) ने 24 मार्च को ही आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 को सम्पूर्ण देश में लागू कर दिया था, ताकि देश में फैलते COVID -19 के प्रभाव को रोकने के लिए सोशल डिसटैन्सिंग (या फिजिकल डिसटैन्सिंग) के उपायों को...
क्या है फर्जी खबर और IPC की धारा 505 (1) के बीच संबंध, जानिए कौन से मामलों में लागू होगी यह धारा?
यह बात हम सभी जानते हैं कि वैसे तो फर्जी खबर को फैलाना एवं इसके फैलने में अपना योगदान देना अपने आप में बिलकुल भी उचित नहीं है, परन्तु आपदा के दौरान फर्जी ख़बरों का वितरण, बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसके दुष्परिणाम शायद किसी से भी छुपे नहीं हैं। हाल ही में, अलख आलोक श्रीवास्तव बनाम भारत संघ [Writ Petition(s) (Civil) No(s). 468/2020] के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी यह टिपण्णी की थी कि फर्जी ख़बरों के जरिये फैलने वाला आतंक, लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। पीठ का...
COVID-2019: आपदा संबंधी फर्जी ख़बर फ़ैलाने के क्या हो सकते हैं दुष्परिणाम, जानिए क्या कहता है कानून?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (31 मार्च, 2020) को अलख आलोक श्रीवास्तव बनाम भारत संघ Writ Petition(s) (Civil) No(s). 468/2020 के मामले में यह कहा कि शहरों में काम कर रहे मज़दूरों का पलायन, देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद इस फ़र्ज़ी खबर के कारण शुरू हुआ कि लॉकडाउन 3 महीने तक चलेगा। इस मामले में पीठ ने आगे यह भी कहा कि, "...हम मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल) से यह उम्मीद करते हैं कि वह जिम्मेदारी भरा रवैया अपनाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि दहशत का माहौल पैदा करने वाली खबरें, बिना पुष्टि के...
COVID 19: समझिये क्या है IPC की धारा 271, जानिए Quarantine नियम के बारे में महत्वपूर्ण बातें
हम सभी अबतक यह जान ही चुके हैं कि कैसे कोरोना-वायरस पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है, और अब यह भारत में भी अपने पाँव तेज़ी पसार रहा है।इसी के मद्देनजर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार (24 मार्च) रात 12 बजे से अगले 21 दिनों के लिए तीन सप्ताह के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा कर दी। पीएम ने कहा था कि COVID-19 वायरस को फैलने से रोकने के लिए यह उपाय नितांत आवश्यक था।दरअसल, COVID-19 महामारी को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए...
COVID-2019: जानिए क्या है सीआरपीसी की धारा 144 और आईपीसी की धारा 188 के मध्य सम्बन्ध?
पिछले कई लेखों में हम कोरोना-वायरस से जुड़े तमाम कानूनी पहलुओं पर चर्चा कर चुके हैं। हम देख रहे हैं कि केंद्र और तमाम राज्य सरकारें, किस प्रकार इस महामारी को लेकर गंभीर कदम उठाने पर मजबूर हो रही हैं।लॉकडाउन से लेकर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की धारा 144 लागू करने तक, सरकारों द्वारा इस वायरस के प्रकोप पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। इसी क्रम में हम ने देखा कि 23 मार्च से ही देश के तमाम जगहों पर सीआरपीसी धारा 144 को लागू कर दिया गया।मौजूदा लेख में हम यह...
जानिए उपभोक्ता संंरक्षण अधिनियम के अनुसार उपभोक्ता कौन है?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में उपभोक्ता कौन है? इसको लेकर समय-समय पर विवाद रहे हैं। न्यायालय अनेक मामलों में उपभोक्ता कौन है, इसकी परिभाषा स्पष्ट करता रहा है। अनेक मामलों में हमें यह मालूम हुआ है कि इस अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ता किसे माना जा सकता है। उपभोक्ता संरक्षणअधिनियम 1986 भारत भर के उपभोक्ताओं के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है। अधिनियम तो उपभोक्ता के अधिकारों को सुरक्षित कर भी रहा है, परंतु अधिकांश मामलों में यह तय करना मुश्किल होता है कि उपभोक्ता है कौन? इस लेख के माध्यम...
COVID -19 : जानिए क्या कहती है आईपीसी की धारा 188, क्या हो सकते हैंं प्रशासन के आदेश की अवज्ञा के परिणाम
कोरोना वायरस के बढ़ते असर को देखते हुए देश में तमाम जगहों पर प्रशासन द्वारा अधिसूचना जारी करते हुए यह आदेश जारी कर दिया गया है/किया जा रहा है कि तमाम दुकाने (आवश्यक वस्तुओं को बेचने वाली दुकानों को छोड़कर), रेस्तरां, पब, म्यूजियम, डिस्को, पर्यटन स्थल इत्यादि बंद कर दिए जाएँ। यह आदेश इस वायरस के प्रभाव को कम करने के लिए जारी किये जा रहे हैं। हम सभी अबतक यह जान ही चुके हैं कि कैसे यह वायरस पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है और अब यह भारत में भी अपने पाँव तेज़ी पसार रहा है। इस आदेश के साथ...















