जानिए हमारा कानून
जानिए कैसे होता है ट्रायल( विचारण) चलाने के लिए न्यायालय का निर्धारण
जब भी कोई अपराध होता है तो उस अपराध के होने के बाद उसका अन्वेषण किया जाता है तथा अन्वेषण के पश्चात उस पर जांच या विचारण न्यायालय द्वारा किया जाता है। बड़ा तात्विक प्रश्न है कि ऐसी जांच और विचारण कौन से न्यायालय द्वारा किया जाएगा? दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 13 में जांच और विचारण का स्थान बताया गया है। इस अध्याय में लगभग उन सभी प्रश्नों को हल कर दिया गया है जो किसी विचारण के स्थान के संबंध में उत्पन्न होते हैं। विचारण कौन से न्यायालय द्वारा किया जाएगा, यह महत्वपूर्ण और बुनियादी प्रश्न है,...
क्या स्वास्थ्य का अधिकार (Right to Health) एक मौलिक अधिकार है, जानिए राज्य की क्या हैं जिम्मेदारियां?
यह काफी नहीं कि शरीर में रोग या दुर्बलता का अभाव हो तो उसे एक स्वस्थ शरीर कहा जा सकता है, बल्कि स्वास्थ्य (Health) सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक आरोग्यढ की अवस्था् को माना जाता है। यह तथ्य भी जगजाहिर है कि स्वास्थ्य, किसी भी देश के विकास के महत्वपूर्ण मानकों में से एक है। कोरोना-काल में जहाँ स्वास्थ्य के ऊपर खतरा कई गुना बढ़ा है, वहीँ दुनिया भर के देश और उसके नागरिक इस खतरे से जूझ रहे हैं, इसके चलते सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था भी ध्वस्त हो चुकी है और मानव जीवन के हर पहलू...
कस्टडी में मौतः जांच की प्रक्रिया क्या है?
"कानून द्वारा शासित एक सभ्य समाज में कस्टडी में मौत सबसे बुरे अपराधों में से एक है। जब एक पुलिसकर्मी किसी नागरिक को गिरफ्तार करता है, तब क्या उसके जीवन के मौलिक अधिकार समाप्त हो जाते हैं? क्या नागरिक के जीवन के अधिकार को उसकी गिरफ्तारी के बाद निलंबित किया जा सकता है? वास्तव में, इन सवालों का जवाब ठोस तरीके से "नहीं" होना चाहिए।"-डीके बसु बनाम सुप्रीम कोर्ट ऑफ वेस्ट बंगाल AIR 1997 SC 610। हिरासत में मौत/ यातना के मामलों में स्वतंत्र जांच, कम से कम प्रारंभिक चरणों में, एक बड़ी समस्या रही है,...
जानिए अदालत में किसी आरोपी की ज़मानत लेने वाले व्यक्ति पर क्या जिम्मेदारियां आ सकती हैं
आपराधिक विधि में ज़मानत अत्यधिक प्रचलन में आने वाला शब्द है। दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 33 में ज़मानत से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। ज़मानत का अर्थ विस्तृत है, परंतु आपराधिक विधि में ज़मानत से तात्पर्य है- 'किसी अपराध में किसी व्यक्ति को न्यायालय में पेश कराने की जिम्मेदारी लेना।' इससे सरल शब्दों में ज़मानत को परिभाषित नहीं किया जा सकता है। अदालत में अभियुक्त को समय-समय पर पेश कराने एवं जब भी न्यायालय अभियुक्त को न्यायालय में प्रस्तुत होने के लिए आदेश करें, तब उसके प्रस्तुत होने की गारंटी...
जानिए एफआईआर का अर्थ और एफआईआर से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
एफआईआर (FIR) एक साधारण और आम शब्द है। आम जीवन में पुलिस और उससे जुड़े शब्द एफआईआर को काफी सुना जाता है। अपराध विधि में आम और दैनिक जीवन में सर्वाधिक चर्चाओं में रहने वाला शब्द एफआईआर ही है। इस आलेख के माध्यम से एफआईआर पर विस्तारपूर्वक चर्चा की जा रही है। FIR शब्द दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 से निकल कर आता है, जिसका पूरा नाम फर्स्ट इनफॉर्मेशन रिपोर्ट है। हिंदी में इसे प्राथमिकी भी कहा जाता है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के अंतर्गत इसे संज्ञेय मामलों की इत्तिला कहा गया है। दंड...
जानिए जानवरों का वध करने और उनके प्रति क्रूरता करने से संबंधित अपराध
भारतीय दंड विधान में केवल मानव जीवन के प्रति होने वाले अपराधों को ही अपराध नहीं माना है, अपितु पशुओं के प्रति होने वाले अपराधों को भी अपराध माना है। इस मामले में भारतीय दंड विधान अत्यंत उदार है तथा वह भारत की सीमा के भीतर रहने वाले पशुओं की भी सुरक्षा करता है और भारत की सीमा में रहने वाले पशुओं को भी अधिकार प्रदान करता है। हालांकि भारतीय दंड विधान में अलग-अलग अधिनियम एवं विशेषतः भारतीय दंड संहिता के भीतर पशुओं को संपत्ति माना गया है, लेकिन संपत्ति के संबंध में ही दंड भी रखा गया है। ऐसा...
चालान क्या होता है? जानिए सीआरपीसी की धारा 173 का अर्थ
पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश किया जाने वाला चालान एक सामान्य सा शब्द है और नए लॉ छात्रों के लिए यह शब्द कभी-कभी कठिनाई का विषय बन जाता है। इस आलेख के माध्यम से दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 173 के अंतर्गत 'चालान' पर प्रकाश डाला जा रहा है। 'चालान' अंतिम प्रतिवेदन पुलिस अपने अन्वेषण में अलग-अलग स्तर पर रिपोर्ट प्रेषित करती है। पुलिस अन्वेषण के चरणों में तीन प्रकार की रिपोर्ट भेजती है, सीआरपीसी की धारा 157 के अधीन पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को...
धारा 227 CrPC : जानिए डिस्चार्ज होने के लिए अभियुक्त के दलील या दस्तावेज प्रस्तुत करने पर क्या सीमाएं हैं?
जब कभी किसी मामले का अभियुक्त, मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, और मजिस्ट्रेट को ऐसा लगता है कि उस अभियुक्त द्वारा कथित तौर पर किया गया अपराध, अनन्यतः (exclusively) सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय (triable) है तो वह मजिस्ट्रेट, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 209 की शर्तों के अधीन, मामले को सुपुर्द (commit) कर देता है (सेशन न्यायालय को)। गौरतलब है कि मजिस्ट्रेट इस बात की सूचना, लोक अभियोजक (Public Prosecutor) को भी दे देता है कि उसके द्वारा वह मामला सेशन न्यायलय को सुपुर्द...
जानिए मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत बच्चे की संरक्षता (गार्जियनशीप)
किसी भी पर्सनल विधि में संरक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। अवयस्क का संरक्षक कौन होगा और किन मामलों में संरक्षक की नियुक्ति की जाएगी, यह एक तात्विक प्रश्न बनता है।भारत में गार्जियनशिप अधिनियम के साथ मुस्लिम पर्सनल विधि भी है जो भारत के मुसलमानों पर लागू होती है, इसके नियम मुसलमानों के व्यक्तिगत अवयस्क के संरक्षण के लिए इस्तेमाल होते हैं।इसमें एक महत्वपूर्ण विषय शरीर की संरक्षता है जिसे हिज़ानात कहते हैं। कई बार पति पत्नी के बीच विवाद होने, संबंध विच्छेद हो जाने पर अवयस्क बच्चे की संरक्षता प्रश्न...
धारा 156 (3) सीआरपीसी: क्या मजिस्ट्रेट दे सकता है CBI अन्वेषण (Investigation) का आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने 19-मई-2020 (मंगलवार) को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी द्वारा दाखिल याचिका, जिसमे उन्होंने अपने केस को महाराष्ट्र पुलिस से सीबीआई को हस्तांतरित करने की मांग की थी, उसे खारिज कर दिया।जांच के तरीके से आरोपी का नाराजगी जांच CBI को ट्रांसफर करने का आधार नहीं बन सकती : सुप्रीम कोर्टदरअसल, गोस्वामी ने मुंबई पुलिस की निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए सीबीआई को अपने मामले का अन्वेषण स्थानांतरित करने की मांग इस याचिका में की थी।जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस एम. आर. शाह की...
जानिए मुस्लिम विधि में हक़ शुफ़ा (अग्रक्रयाधिकार) से संबंधित प्रावधान
अग्रक्रयाधिकार अर्थात हक शुफ़ा (Pre-emption right) कुछ स्थितियों में क्रेताओं के स्थान पर किसी अचल संपत्ति के अनिवार्य क्रय करने का अधिकार है। यह एक प्रकार का ऐसा अधिकार है जो किसी अचल संपत्ति से निकट का संबंध रखने वाले को उसके क्रय करने के संबंध में प्राप्त होता है। मुस्लिम विधि में अग्रक्रय भी एक अधिकार बताया गया है। यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को विक्रय करता है तो ऐसी स्थिति में उस संपत्ति को क्रय करने का प्रथम अधिकार किसके पास होगा। आधुनिक विधियां यह कहती हैं कि कोई भी व्यक्ति अपनी...
जानिए रेल प्रशासन दुर्घटना/अनपेक्षित घटना के मामलों में कब देता है मुआवजा
एक बेहद दर्दनाक हादसे में, बीते 8 मई 2020 को नांदेड़ डिवीजन में बदलापुर और करमद स्टेशनों के बीच 16 प्रवासी मज़दूर एक माल गाड़ी की चपेट में आकर मारे गए थे। यह दर्दनाक हादसा तब हुआ जब रेलवे लाइन पर ये श्रमिक सो रहे थे।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाँ चौदह मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी वहीँ दो अन्य मजदूरों ने बाद में दम तोड़ दिया था। ये मज़दूर मध्यप्रदेश लौटने के लिए "श्रमिक स्पेशल" ट्रेन में सवार होने के लिए जालौन से भुसावल की ओर जा रहे थे।कथित तौर पर, लगभग 20 श्रमिक, जालना से भुसावल तक पैदल जा...
जानिए सुप्रीम कोर्ट को अपनी अवमानना (Contempt) के लिए दंड देने की शक्ति कहां से प्राप्त होती है?
बीते 27 अप्रैल 2020 (सोमवार) को सुप्रीम कोर्ट ने सुओ मोटो कंटेम्प्ट पिटीशन (क्रिमिनल) नंबर 2 ऑफ 2019 RE. विजय कुर्ले एवं अन्य के मामले में तीन व्यक्तियों को जजों के खिलाफ 'अपमानजनक और निंदनीय' आरोपों के लिए अवमानना का दोषी ठहराया।न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने विजय कुरले (राज्य अध्यक्ष, महाराष्ट्र और गोवा, इंडियन बार एसोसिएशन), राशिद खान पठान (राष्ट्रीय सचिव, मानवाधिकार सुरक्षा परिषद) और नीलेश ओझा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंडियन बार एसोसिएशन) को अवमानना का दोषी...
जानिए मुस्लिम महिला के तलाक लेने के अधिकार, कौन सी परिस्थितियों में मुस्लिम महिला तलाक मांग सकती है
लगभग सभी प्राचीन राष्ट्रों में विवाह विच्छेद दांपत्य अधिकारों का स्वाभाविक परिणाम समझा जाता है। रोम वासियों, यहूदियों, इसरायली आदि सभी लोगों में विवाह विच्छेद किसी न किसी रूप में प्रचलित रहा है। इस्लाम आने के पहले तक पति को विवाह विच्छेद के असीमित अधिकार प्राप्त थे। मुस्लिम विधि में तलाक को स्थान दिया गया है परंतु स्थान देने के साथ ही तलाक को घृणित भी माना गया है। पैगंबर साहब का कथन है कि जो मनमानी रीति से पत्नी को अस्वीकार करता है, वह खुदा के शाप का पात्र होगा। पैगम्बर के निकट मनमाना तलाक...
संविधान का अनुच्छेद 47: जानिए शराब पर प्रतिबन्ध को लेकर भारत का संविधान क्या कहता है?
बीते 04 मई 2020 को मद्रास उच्च न्यायालय ने आर. धनासेकरण बनाम तमिलनाडु सरकार एवं अन्य WP No. 7565/2020 के मामले में तमिलनाडु राज्य में शराब के निर्माण, बिक्री और उपभोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली रिट याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया था।दरअसल इस मामले में, याचिकाकर्ता आर. धनासेकरण ने यह मांग की थी कि चूंकि लोग COVID-19 लॉकडाउन के कारण शराब का सेवन न करने के आदी हो गए हैं, इसलिए सरकार को इस अवसर का उपयोग, शराब के उपभोग और सेवन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के लिए करना...
जानिए वसीयत क्या है और कैसे की जा सकती है
The importance of a A will is a very important basic document in the whole conspectus of inheritance. The importance of a will is often undermined or ignored by individuals and they therefore shy away from making a will, probably in the belief that things and situations have the inbuilt ability to resolve themselves.
COVID-19: कोरोना-संक्रमित शवों को दफनाना उचित है या जलाना, जानिए क्या कहते हैं दिशानिर्देश?
अभी हाल ही में, मुंबई निवासी प्रदीप गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बॉम्बे हाईकोर्ट के 27 अप्रैल के एक अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। इस याचिका में मुंबई के बांद्रा वेस्ट में बने कब्रिस्तान में COVID-19 के संक्रमण से मृत हुए लोगों के शवों को दफनाने पर रोक का अनुरोध किया गया था।गौरतलब है कि इससे पहले, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बांद्रा पश्चिम स्थित तीन कब्रिस्तानों में कोरोना से मरने वाले लोगों को दफनाए जाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसी अंतरिम आदेश को उच्चतम न्यायालय में प्रदीप गांधी...
धारा 102 (3) सीआरपीसी: जानिए जब्त वाहन को बांड पर छोड़ने की पुलिस की शक्ति क्या है?
अभी हाल ही में मोहम्मद आरिफ जमील बनाम भारत संघ Order on I.A. No. 9/2020 in WP No. 6435/2020 के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया कि COVID-19 लॉकडाउन दिशानिर्देशों के उल्लंघन करने पर पुलिस द्वारा जब्त किए गए सभी वाहनों को वाहन मालिक को लौटाया जा सकेगा और ऐसा करने के लिए पुलिस अधिकारी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 102 (3) के तहत शक्ति का प्रयोग करने की अनुमति होगी।अपने आदेश में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बीते गुरुवार (30-04-2020) को बेंगलुरु पुलिस को 35,000 वाहनों को छोड़ने की अनुमति...



















